विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

समीक्षा- ठेहा परक मौलाएल गाछ

डॉ कैलाश कुमार मिश्र · 2023-07-01 · अंक 373 · पृष्ठ 24–33

मैथिली साहित्य केर गद्य हमरा नीक लगैत अछि। रबीन्द्र नारायण मिश्र केर टटका उपन्यास “ठेहा परक मौलाएल गाछ” एखने पूरा पढ़लहुँ अछि। रबीन्द्र जी प्रवासी मैथिल छथि, वरिष्ठ सेवा निवृत अधिकारी छथि, संयमित लोक आ गहन पाठक छथि। पढ़बाक संग-संग नियमित लिखबाक व्यसनी थिकाह। खोजी प्रवृत्ति केर लोक छथिए। ई जड़ि केर लोक छथि। बहु-भाषी छथि मुदा मातृभाषा सँ अनकंडीशनल प्रेम छनि ताहिं अधिकांश रचना मैथिली मे करैत छथि।

प्रवासी मैथिल केर समस्या ई छनि जे ई सब अपन मिथिला, माटि, परंपरा, परिवार, समाज आ इतिहास संग चार्म मे जिबैत छथि। हिनका सभ के नॉस्टैल्जिया जेना अपन गिरफ़्त मे लेने होनि। नॉस्टैल्जिया कतेक समय यथार्थ सँ लोक के दूर भगा लैत अछि। लोक बिसरि जाइत अछि जे गाम सँ दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बैंगलोर आ ओतय सँ दुबई, लंदन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिआ आदि ठाम ओ सभ कियैक गेलाह अथवा जा रहल छथि। अगर अपन जड़ि सँ डायस्पोरा के अतेक सिनेह छनि तँ उनटा माइग्रेशन कियैक नहि भ रहल अछि ? एक समस्या जे सभ्यता केर निर्माणक शैशव कल सँ एखन धरि निरंतरता सँ आबि रहल अछि से अछि जेनेरशन गैप। सेवा निवृत आ वरिष्ठ नागरिक अपन विचार, संस्कार, सोच के सर्वोत्तम मनैत छथि, हुनका होइत छनि जे नवका लोक दिशाहीन, संस्कृतिभंजक, हृदयहीन होइत छथि। हुनका अपन लोक, बुजुर्ग, संस्कृति, संस्कार आ सभ सँ पैघ अपन भूमि आ देश सँ प्रेम नहि छनि। हुनक भौतिकतावाद परम्परा आ संस्कृति पर प्रहार करैत अछि। जमीन सँ जन केर प्रेम सनातन सँ आबि रहल छैक मुदा वैश्विक बाजार, रोजगार आ व्यापार केर अवसर, जीवन मे सुख आ बिलासिता आब लोकक सोच बदलि रहल अछि। पोथी केर आलोचना लिखब सँ पहिने ई बात सब कहब जरुरी अछि कारण एहि बात सभक खाम्ह पर ई उपन्यास ठाढ़ अछि।
चलू, संक्षेप मे बता दी जे उपन्यास केर कथा वस्तु की अछि। उपन्यास मे प्राण अनबाक हेतु रबीन्द्र जी नायक केर बात प्रथम पुरुष अथवा फर्स्ट पर्सन मे करैत छथि। एकर अर्थ भेल जे लेखक कथा केर प्रमाणिकता पर मोहर लगा रहल छथि। उपन्यास प्रारम्भ भ रहल अछि। नायक मिथिला केर एक गाम सँ दिल्ली नौकरी तकबा केर जोगार मे आबि जाइत छथि। चारु दिस तकैत छथि मुदा कियोक व्यक्ति नहि भेट भ रहल छनि जे हुनकर समस्या दिस ताकनि ! अंततः गुरुद्वारा मे एक अधेड़ बयस केर पंडित जी भेटैत छथिन्ह। पंडित जी युवक के एक संस्कृत विद्यालय अथवा गुरुकुल मे ल जाइत छथिन्ह। युवक के ओतहिं रहबाक, भोजनक व्यवस्था भ जाइत छनि आ ओ पढ़ि क दिल्लीक एक सरकारी स्कूल मे शिक्षक बनि जाइत छथि। अधेड़ उमेर केर पंडित जी शिक्षक छलाह। हुनका ई युवक सभ तरहेँ नीक लगलथिन्ह ताहिं ओ अपन एकमात्र पुत्री रमा जे वनस्थली विद्यापीठ मे शिक्षा ग्रहण क रहलि छलीह तिनका सँ युवक के विवाह करा देलथिन्ह। रमा के सेहो सरकारी नौकरी लागि गेलनि।

युवक अपन पत्नी रमा संग व्यवस्थित पारिवारिक जीवन दिल्ली मे व्यतीत करय लगलाह। समय चलैत रहलैक आ हिनका सभ के दू बालक : मुरली आ श्याम एवं एक पुत्री शालिनी केर जन्म भेलनि। दुनू प्राणी सरकारी नौकरी मे छलाह ताहिं तीनू संतानक पढाई उत्कृष्ट पब्लिक स्कूल मे करौलनि। मुरली आ श्याम इंजीनियर बनलाह आ शालिनी कॉमर्स दिस प्रवेश करैत सी ए। बाद मे मुरली लंदन आ श्याम अमेरिका नीक नौकरी, पाई, सुविधा आदिक लोभे चल गेलाह आ शालिनी माता पिता लग दिल्ली रहि सी ए भ गेलीह। दिल्ली मे तीन कमरा केर फ्लैट ल लेने रहथि। मुरली आ श्याम पैसा कमा तँ रहल छलथिन्ह मुदा विवाहक बात टालि रहल छलथिन्ह। एहि बीच शालिनी के एक केरल केर ईसाई लड़का सँ प्रेम भ गेलनि। ओ अपन बात जखन अपन माता पिता सँ कहलथिन्ह तँ ई सभ झमा खसलाह। मुदा की क सकैत छलाह। लड़का नीक रहैक लाचार भ विवाह करा देलथिन्ह। बाद मे शालिनी के एक कन्या भेलनि। शालिनी अपन पति संग मुंबई रहैत छलीह। बेचारे पुनः अपन पत्नी रमा संग असगर रहय लगलाह। आर त आर जहिया सेवा निवृत भेलाह तहियो तीनू संतान मे कियोक नहि एलथिन। दुखी छलाह, मुदा की क सकैत छलाह। मुरली सलाह दैत छलथिन्ह जे ओ अपन सम्पति आदि बेचि फैक्ट्री लगा लेथि। ओहि सँ आमदनी संग समय कटि जेतनि। श्याम कुनो वृद्ध आश्रम मे रहबाक सुझाव द रहल छथिन्ह। शालिनी के अपन काज आ परिवार सँ कहाँ समय बचैत छनि ? पत्नी रमा बीमार रहैत छथिन्ह। मुदा पड़ोसी जे दक्षिण भारतीय छथि से दुनू प्राणी हिनका सभ के बहुत सिनेह करैत छथिन्ह।

समय चलैत रहैत छनि, पश्चाताप बढ़ल जा रहल छनि। बीच मे एक दिन पत्नी रमा के हार्ट अटैक होइत छनि। हॉस्पिटल मे स्टेंट लगबाक दरकार। असगर छथि। पड़ोसी मात्र सहारा। तीनू संतान के फोन करैत छथिन्ह। कियोक फोन नहि उठबैत छनि। दुखी भेल जा रहल छथि। खैर! पत्नी रमा इलाज के बाद सकुशल घर अबैत छथिन। बाद मे बेटा सब फोन करैत छथिन मुदा कियोक दिल्ली नहि अबैत छथिन।

एहि बीच पुत्र श्याम बेर-बेर अमेरिका आबय लेल आग्रह करैत छथिन्ह। निर्णय लैत अमेरिका किछु दिन चलि जाइत छथि। ओतय ज्ञात होइत छनि जे श्याम डेविड नामक कुनो लड़का संग लिवइन मे रहि रहल छथि। विस्मय आ विछोह मे रहैत छथि। अमेरिका आएब पर क्षोभ भ रहल छनि ! एक दिन शहर केर प्रमुख स्थान घुमेबा लेल श्याम संग जाइत काल एक आदमी केर कार सँ रमा के दुर्घटना भ जाइत छनि। रमा के जांघ केर हड्डी टूटि जाइत छनि। तुरत हॉस्पिटल जाइत छथि। ओतय ऑपरेशन होइत छनि। हॉस्पिटल केर खर्चा से स्वयं करैत छथि कारण श्याम लग अतेक पाई नहि छनि। संयोग सँ जाहि आदमी केर कार सँ दुर्घटना भेल छलन्हि से भद्रलोक छल आ ओ पूरा इलाज केर खर्च उठबैत छनि आ सब पैसा वापस क दैत छनि। श्याम केर घर मे दुनू प्राणी असगर रहैत छथि। या त श्याम देर राति क अबैत छथि अथवा कतेक दिन नाहियो अबैत छथि। एहना स्थिति मे समय काटब मुश्किल। एक दिन बगल के पार्क मे जाइत छथि त देखैत छथि जे बुजुर्ग स्त्री पुरुख आपस मे हिल मिल मस्ती क रहल छथि। ओ सब खा रहल छल, पी रहल छल, गाबि रहल छल, नृत्य क रहल छल। हिनका दुनू प्राणी के ओतय भव्य स्वागत होइत छनि। पता चलैत छनि जे ओहि मे अधिकंश लोक भारतीय मूल के अछि। कियोक अपने, ककरो माता पिता, त ककरो पितामह अतय नौकरी केर तलाश मे आबि गेल रहथि। अमेरिका मे लोक अपन काज मे व्यस्त रहैत अछि। माता पिता या त ओल्ड होम मे रहैत छथि अथवा स्वयं मे मस्त। रमा आ हुनक पति के एहि बूढ़ सब संग मोन लागय लगैत छनि। रमा प्रति दिन वरिष्ट लोक सभ लेल किछु ने किछु बना क ल जाइत छथि जकरा ओ सब बहुत प्रेम सँ खाइत छथि। एक दिन कुनो बात केर कारण रमा केर पति अपन पुत्र श्याम के डेविड सँ झगड़ैत देखि लैत छथि। डेविड श्याम के कहि रहल छलैक जे ओ आब श्याम केर माता पिता संग अहि घर मे नहि रहत। ई दृश्य देखि रमा दुनू प्राणी छोभ मे अबैत छथि आ निर्णय लैत छथि जे दिल्ली वापस आबि जेतीह। फोन सँ ज्ञात होइत छनि जे हुनक दक्षिण भारतीय पड़ोसी आब बंगलौर जाक अपन मकान मे दुनू प्राणी आ बेटा पुतहु एक संग एक घर मे रहैत अछि। मुरली हुनका सभ के लंदन बजा रहल छनि मुदा मोन ततेक ने दुखा गेल छनि से सोझे दिल्ली आबि जाइत छथि।

दिल्ली एलाक किछु दिनक बाद कोरोना महामारी सँ पूरा संसार त्राहि कृष्ण करय लगैत अछि। किछु दिनक बाद पता चलैत छनि जे श्याम अपन मित्र डेविड केर खून क देलकैक। सब सबूत श्याम केर दोषी प्रमाणित क रहल छलैक। अंततः श्याम के आजीवन कारावास केर सजा भेट गेलैक। ओ जेल मे सजा काटि रहल छल। इम्हर बंगलौर मे दक्षिण भारतीय पड़ोसी केर पत्नी के कैंसर भ गेल रहैक। ओ बहुत परेशान छल। ई सब बंगलौर गेलाह आ पड़ोसी के देखि अबैत छथि।

दिल्ली अबैत देरी एक दिन मोबाइल पर कियोक फ्रॉड करैत उपन्यास केर मुख्य पात्र केर अकाउंट सँ बहुत पैसा निकालि लैत छनि। किछु राशि तँ बैंक मैनेजर बचा दैत छनि मुदा दस लाख लेल पुलिस मे एफ आई आर करबैत छथि। एक दिन पुलिस घर आबि मुरली के फोटो देखबैत बतबैत छनि जे पैसा फ्रॉड करबा केर काज हुनक पुत्र मुरली केने छनि। आब की कऽ सकैत छलाह ? एक बेटा हत्या केर जुर्म मे अमेरिका मे आजीवन कारावास केर सजा काटि रहल छनि आ दोसर अपने माता पिता केर बैंक अकाउंट सँ फ्रॉड ! केस वापस ल लैत छथि। यद्यपि बेटी आ जमाय सँ प्रसन्न छथि। बेटी तँ बेर-बेर मुंबई आबि ओतहि रहबाक हेतु आग्रह करैत छनि। की क सकैत छलाह ! इम्हर एक दिन एकाएक मुरली घर पर आबि जाइत छनि। मुरली सं पता चलैत छनि जे ओ जाहि विदेशी महिला संग लिवइन रिलेशनशिप मे रहैत छलाह ओ लड़की सब फ्रॉड केने रहैक। आर त आर ओ महिला हुनकर पूरा अकाउंट खाली क भागि गेलैक। अब मुरली बंगलौर मे काज कर चाहैत छलाह। एक फैक्ट्री लगबै चाहैत छलाह जाहि मे 25 लाख केर जरुरत रहैक। पहिने त मना क देलथिन्ह मुदा पत्नी रमा कहैत छथिन्ह जे एक बेटा जेल मे आजीवन कारावास केर सजा काटि रहल अछि आब की करब पैसा बचाय। अंततः द दैत छथिन्ह। किछु दिनक बाद मुरली फेर अबैत छथि आ एहि बेर मकान केर कागज़ बैंक केर जमानत लेल मँगैत छथिन्ह। न नुकुर करैत रमा करेज पर पाथर रखैत ओहो द दैत छथिन्ह। मुरली बंगलोर चलि जाइत छथि।

एकाएक पता चलैत छनि जे दक्षिण भारतीय पड़ोसी केर पत्नी के कियोक बदमाश गरदनि दबा हत्या क देलकैक आ सब पैसा, गहना इत्यादि ल क भागि गेलैक। ई दुनू प्राणी पड़ोसी केर हाल लेबा लेल आ मुरली सँ भेट करबा केर उद्देश्य सँ बंगलोर केर हेतु बिदा होइत छथि। बंगलोर गेला के बाद पता चलैत छनि जे पुलिस सिक्योरिटी कैमरा केर सहारा सँ पता लगेलकैक जे पड़ोसी केर पत्नी केर हत्या कियोक आन नहि अपितु ओकर पुतोहू केने रहैक। सब बात प्रमाणित भ गेल रहैक ताहिं ओकर पुतोहु के जेल भ गेलैक। पड़ोसी केर बेटा पिता केर अवहेलना करय लगलैक जखन कि ओ सब बेटा केर व्यापार लेल अपन संचित निधि लगा देने रहैक। अंत मे पड़ोसी के ओकर बेटा घर सँ निकालि दैत छैक। ओ ककरो मदति अहि दुर्दिन केर क्षण मे सेहो नहि लेत अछि आ एक गुरुद्वारा मे चलि जाइत अछि।

मुरली केर काज फँसि गेल रहनि। कोरोना आ अन्य कारण सँ रेल सही समय सँ सामान नहि पहुँचा सकल रहैक। कर्जा बढ़ैत गेलैक। अंततः मुरली दिवालिया घोषित भ जाइत छथि आ रमा के मकान सेहो ख़त्म भ जाइत छनि। एहि बीच मुंबई सँ एक नर्स कुनो अस्पताल सँ फोन करैत छनि जे शालिनी अपन पति आ बेटी संग कोरोना केर चपेट मे छथि आ हॉस्पिटल मे भर्ती छथि। शालिनी केर पति बहुत क्रिटिकल छथि। फेर जानकारी अबैत छनि जे शालिनी केर पति केर निधन भ गेलनि। शालिनी एखनो गहन चिकित्सा मे छथि मुदा बेटी आब ठीक छनि। आब की हो? दुनू प्राणी रमा लॉकडाउन केर कारण एक टैक्सी पकड़ि मुंबई जाइत छथि। पता चलैत छनि जे कुनो सम्बन्धी केर आभाव मे किछु सामाजिक संस्था केर द्वारा शालिनी केर पति केर अंतिम संस्कार करा देल गेलैक। एक घर मे शालिनी केर बेटी केर देख रेख रमा दुनू प्राणी करय लगलीह। किछु दिन मे शालिनी सेहो अस्पताल सं घर आबि गेलीह मुदा शरीर खिन्न रहय लगलनि। लंग्स आ अनेक ठाम समस्या भ रहल छलनि। किछु दिनक बाद शालिनी केर सेहो निधन भ जाइत छनि। शालिनी दुनू प्राणी यद्यपि अपन बेटी लेल पर्याप्त चल आ अचल सम्पति छोड़ि देने रहथिन्ह। ओ बचिया एम् बी ए करबाक योजना करैत छैक।

आब हिनका सभ लग किछु नहि छलनि। मकान सेहो गेलनि। किछु दिनक बाद बैंक हिनकर मकान केर नीलामी करैत छैक जकरा ई सभ कहूना क किन लैत छथि। स्थिति लगैत छनि जे आब सुधरि रहल अछि तँ एकाएक श्याम दाढ़ी बढ़ेने, बूढ़ आ रोगी केर काया लेने दिल्ली डेरा पर आबि जाइत छथिन। पता चलैत छनि जे श्याम के अमेरिका केर अदालत अहि बात पर छोड़ि देने छनि जे ओ तुरत अमेरिका सदा केर लेल छोड़ि देताह।

ई त छल उपन्यास केर संक्षिप्त विवरण। आब अहि पर किछु चर्च करैत छी। उपन्यास केर भाषा बहुत सहज, सरल आ पाठक संग चलैत छैक। पूरा उपन्यासक प्लॉटिंग बहुत आकर्षित करैत छैक जकर परिणाम ई होइत छैक जे पाठक कथा केर सब लेयर अथवा तह संग यात्रा करैत रहैत छथि। कतौ उबाऊ अथवा लिंक नहि टूटैत छैक। पोथी केर स्वरुप, पृष्ट संख्या आदि के देखैत ई स्पष्ट भ जाइत छैक जे ई लघु उपन्यास केर श्रेणी मे अबैत अछि जकरा अंग्रेज़ी मे नॉवेल्ला कहल जाइत छैक मुदा बात, प्रसंग आ सम्बाद ई पोथी अनेक तरहक रखैत छैक, गंभीरता संग रखैत छैक। एहि मे माइग्रेशन केर अनेक पक्ष सम्मिलित कएल गेल छैक - गाम छोड़ब आ दिल्ली महानगर आयब, संघर्ष करैत पढ़ब, नौकरी करब, परिवार केर नीवक निर्माण करब, बाल बच्चा केर क्वालिटी शिक्षा केर व्यवस्था करब, बाल बच्चा द्वारा नाम, पैसा, विलासिता केर कारण अपन देश सँ दूर देश जाएब, बैंक लोन, आजुक पीढ़ी द्वारा वरिष्ठ नागरिक, विशेष रूप सँ वृद्ध माता पिता केर जवाबदेही सँ भागब, अपन धरती, लोक, संस्कृति आ संस्कार सँ विमुख रहब, विवाह सँ पूर्व लिवइन रिलेशनशिप मे रहब, माता पिता परिवार के छोड़ि स्व मे केंद्रित रहब, समलिंगी व्यवहार, बैंकिंग फ्रॉड, कॉरोना , कोरोना केर त्रासदी, ओकर बादक प्रभाव, कोरोना भेलाक बाद जे रोगी के अन्य शारीरिक आ मानशिक समस्या होइत छैक तकर चित्रण, अपन समाज, जाति कुल सॅ अलग विवाह करब, अस्थिर जीवन आ ने जानि की की। हमरा लगैत अछि रबीन्द्र नारायण मिश्र अपना भरि कथा केर रोचकता केर दृष्टिकोण सँ सफल रहल छथि। पोथी कतौ बोर नहि करैत छैक, नैराश्य दूरे रहैत छैक। संगहि भाषा आ व्याकरण सम्बन्धी गलती नाममात्र भेटत। उपरोक्त गुण एहि पोथी केँ पठनीय बनबैत छैक।
मुदा पोथी जँ कियो समीक्षा केर दृष्टि सँ पढ़त तँ किछु प्रश्न उठब स्वाभाविक छैक। लेखक अथवा उपन्यासकार एक विशेष युग के प्रतिनिधित्व करैत छथि। रबीन्द्र नारायण मिश्र स्वयं 70 के छथि, अवकाश प्राप्त सरकारी अधिकारी छथि। ई नव बयस केर लोक मे, विशेष रूप सँ पुरुष मे सार्वभौमिक कमी ताकि रहल छथि। युवक चाहे मिथिला, बिहार, दिल्ली, बंगलौर अथवा अमेरिका के होथि ओ सब कर्तव्यच्युत छथि - किछु एहि तरहक मानशिकता ई पोथी स्पष्ट करैत अछि। जेनेरशन गैप देखार भ रहल छैक। हमरा लगैत अछि आजुक अधिकांश युवक अपन माता पिता केर प्रति साकांक्ष आ भावनात्मक भ रहल छथि। किछु गलत आ दिशाहीन अवश्य छथि। हमरा इहो लगैत अछि जे अही कथा वस्तु पर अगर कियोक 35 -40 वर्षक युवा उपन्यास लिखने रहितथि त उपन्यास केर ट्रीटमेंट अलग रहितैक। कम सँ कम एक पुरुष चरित्र नीक अथवा आदर्श अवश्य रहितैक। बहुत पढ़ल लिखल इंजीनियर, मैनेजमेंट केर युवक सब नौकरी छोड़ि व्यापार मे आबि रहल छथि। ओ सब सफल सेहो भ रहल छथि। स्टार्टअप हमेशा खराप नहि होइत छैक। संस्कृति संरक्षण एक आवश्यक मुद्दा अवश्य छैक मुदा ताहि लेल अनुकूल वातावरण तँ सभ सँ पहिने माता-पिता परिवार मे निर्माण करथु! यहूदी परिवार, कश्मीरी परिवार, सिख परिवार, बंगाली परिवार, मलयाली परिवार वैश्विक वातावरण अवश्य स्वीकार करैत अछि मुदा दुनिया केर कोनो कोण, देश मे रहैत अपन संस्कृति, संस्कार, भाषा, भोजन सँ अलग नहि होइत अछि। एक बात हमरा लागल कारण एक प्रखर साहित्यकार सँ पोथी केर माध्यम सँ किछु दर्शन अथवा जीवन दर्शन केर पन्ना, पैराग्राफ, पंक्ति मुखर अवश्य होबाक चाही जे साहित्य के सार्वभौमिक साहित्य बना सकय अन्यथा एहि तरहक रचना के एक लघु काल खंड मे विलुप्त भऽ जएबाक डर बनल रहैत छैक। एहेन बात अहि पोथी मे साहित्यकार नहि समावेश क सकल छथि।

कुल मिला क ई उपन्यास – “ठेहा परक मौलाएल गाछ” - एक नीक कृति छैक। उपन्यासकार आ प्रकाशक दुनू के बधाई।
लेखक एवं प्रकाशक: रबीन्द्र नारायण मिश्र
दाम: 400 रुपया (2023)
House No: C42, NSG SAS Ltd., Black Cat Enclave
Pocket No.: 6 Builders Area, Greater Noida, Gautam Buddha Nagar, UP: 201315

Suggested citation: डॉ कैलाश कुमार मिश्र. “समीक्षा- ठेहा परक मौलाएल गाछ.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 373, pp. 24–33, 2023-07-01. https://www.videha.co.in/research/2023/373/समीक्षा--ठेहा-परक-मौलाएल-गाछ.htm

मूल विदेह अंक / Original issue