विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

बाल्मीकि रामायण आ रामचरितमानस के तुलनात्मक अध्ययन

आचार्य रामानन्द मण्डल · 2023-08-01 · अंक 375 · पृष्ठ 35–43

आचार्य रामानंद मंडल
बाल्मीकि रामायण आ रामचरितमानस के तुलनात्मक अध्ययन
श्री राम कथा के तीनटा प्रमुख घटना १. रानी सभ मे पुत्र प्राप्त लेल खीर वितरण २. सीता स्वयंवर वा धनुष यज्ञ आ ३ रावण बध के भेद के तुलनात्मक अध्ययन कैला पर मतभिन्नता पायल जाइ हय।
राजा दशरथ के रानी सभ के गर्म धारण के लेल खीर वितरण के संबंध मे रामायण आ रामचरित मानस मे मतभिन्नता हैय।
बाल्मीकि रामायण के अनुसार।
कौशल्यायै नरपति:पायसार्धं ददौ तदा।
अर्धादर्धं ददौ चापि सुमित्रायै नराधिप:।।२७ ।।
कैकेय्ये चावशिष्टार्धं ददौ पुत्रार्थकारणात।
प्रददौ चावशिष्टार्धं पायसस्यमृतोपमम्।।२८।।
अनुचिन्त्य सुमित्रायै पुनरेव महामति:।
एवं तासां ददौ राजा भार्याणां पायसं पृथक्।।२९।।
समझे के लेल
खीर=१६आना(१रु)
कौशल्या- ८ आना
सुमित्रा -४ आना+२ आना=६आना
कैकेई-२ आना
कुल-१६आना
तबहिं रायं प्रिय नारी बोलाईं। कौशल्यादि तहां चलि आईं।
अर्द्ध भाग कौशल्यहि दींहा।उभय भाग आधे कर कींहा।
कैकेई कहं नृप सो दयऊ।रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ
कौशल्या कैकेई हाथ धरि।दींह सुमित्रिहि मन प्रसन्न करि।
समझे के लेल
खीर -१६आना(१रु)
कौशल्या -८आना
कैकेई -४आना
सुमित्रा -२ आना+२आना=४ आना।
कुल-१६आना।
सभ रानी अपन अपन खीर के खैलन आ गर्भधारण कैलन।बाद मे कौशल्या राम के, कैकेई भरत के आ सुमित्रा लक्ष्मण आ शत्रुधन के जनम देलक।
अइ प्रकार खीर बांटे के प्रक्रिया मे रामायण आ रामचरित मानस मे मतभिन्नता हैय
स्वयंबर वा धनुष्य यज्ञ के वृत्तांत मे महर्षि बाल्मीकि आ संत तुलसीदास मे मत भिन्नता हय!
महर्षि बाल्मीकि के अनुसार -
वीर्यशुल्केति मे कन्या स्थापितेयमयोनिजा।
भूतलादुत्थितां तां वर्धमानां ममात्मजाम्।।१५।।
वरयामासुरागत्य राजानो मुनिपुंगव ।
तेषां वरयतां कन्यां सर्वेषां पृथिवीक्षिताम्।।१६।
वीर्यशुल्केति भगवन् न ददामि सुतामहम्।
तेषां जिज्ञासमाननां शैवं धनूरूपाहृतम्।।१८।।
न शेकुर्ग्रहणे तस्य धनुषस्तोलनेअपि वा।
यद्यस्य धनुषो राम:कुर्यादारोपणं मुने।
सुतामयोनिजां सीतां दद्यां दशरथेरहम्।।२६।।
तामादाय समंजुषामायसीं यत्र,तद्धनु:।
सुरोपं ते जनकमूचुर्नृपतिमन्त्रिण:।।५।।
इदं धनुर्वंरं राजन् पूजितं सर्वराजभि:।
मिथिलाधिप राजेन्द्र दर्शनीयं यदीच्छसि।।६।
इदं धनुर्वंरं ब्रह्मय्जनकैरभिपूजितम्।
राजभिश्च महावीर्यैरशक्ते पूरितं तदा।।८।।
महर्षेर्वचनाद् रामो यत्र तिष्ठति तद्वनु:।
मंजुषां तामपावृत्य दृष्ट्वा धनुरथाब्रवीत्।।१३।।
इदं धनुर्वंरं दिव्यं संस्पृशामीह पाणिना।
यत्नवांश्च भविष्यामि तोलने पूरणेअपि वा।।१४।।
बाढमित्यब्रवीद् राजा मुनिश्च समभाषत।
लीलया स धनुर्मध्यै जग्राह वचनान्मुने:।।१५।।
पश्यतां नृसहस्त्राणां बहूनां रघुनंदन:।
आरोपयत् स धर्मात्मा सलीलमिव तद्धनु;।।१६।।
आरोपयित्वा मऔवईं च पूरयामास थद्धनउ:।
तद् बभन्च धनुर्मध्ये नरश्रेष्ठो महायशा:।।१७।।
जनकानां खुले कीर्तिमाहरिष्यति मे सुता।
सीता भर्तारमासाद्य रामं दशरथात्मजम् ।।२२।।
मम सत्या प्रतिज्ञा सा वीर्यशुल्केति कौशिक।
सीता प्राणैर्बहुमता देया रामाय मे सुता।।२३।।
रामचरित मानस के अनुसार -
सीय स्वयंबरु देखिअ जाइ।इसु काहि धौंस देइ बड़ाई।
लखन कहा जस भाजनु सोई।नाथ कृपा तव जापर होई।।१।।
रंगभूमि आए दोउ भाई।असि सुधि सब पुरबासिन्ह पाई।।
चले सकल गृहिकाज बिसारी।बाल जुबान जरठ नर नारी।।
लेत चढावत खैंचत गाढे।कहीं न लखा देख सबु ठाढ़ैं।।
तेहि छन राम मध्य धनु तोरा,भरे भुवन धुनि घोर कठोरा।।
गावहिं छवि अवलोकि सहेली।सिय जयमाल राम उर मेली।।
रावण बध के भेद बताबे वाला मे रामायण आ रामचरित मानस मे मतभिन्नता हैय।
बाल्मीकि रामायण के अनुसार इन्द्र के सारथि मातलि हैय।
अथ संस्मारयामास मालति राघवं तदा।
अजानन्वि किं वीर त्वमेनमनुवर्तसे।।१।
विसृजास्मै वधाय त्वमस्त्रं पैतामहं प्रभो।
विनाशकाल:कथितो य: सुरै:सोद्धं वर्त्तते।।२।।
स विसृष्टो महावेग: शरीरान्तकर:पर:।
बिभेद हृदयं तस्य रावणस्य दुरात्मनं।।१८।।
रुधिराक्त: स वेगेन शरीरान्तकर:शर:।
रावणस्य हरन् प्राणान् विवेश धरणीतलम्।।१९।।
स शरो रावणं हत्या रुधिरार्द्रकृतच्छवि;।
कृतकर्मा निभृतवत् स तूणिं पुनराविशत्।।२०।।
रामचरित मानस के अनुसार रावण के भाई विभीषण भेद बताबे वाला हैय।
नाभिकुंड पियुष बस याकें।नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।
सुनत विभिषण बचन कृपाला।हरषि गहे कर बान कराला।।
सायक एक नाभि सर सोषा।अपर लगे भुज सिर करि रोषा।
लै सिर बाहु चले नाराचा।सिर भुज हीन रूंड महि नाचा।।
अइ प्रकार से रावण बध के भेद बताबे वाला मे रामायण आ रामचरित मानस मे मतभिन्नता हैय।
-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सह साहित्यकार सीतामढ़ी।
-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 मो नं-9973641075 ईमेल-ramanandmandal001@gmail.com

Suggested citation: आचार्य रामानन्द मण्डल. “बाल्मीकि रामायण आ रामचरितमानस के तुलनात्मक अध्ययन.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 375, pp. 35–43, 2023-08-01. https://www.videha.co.in/research/2023/375/बाल्मीकि-रामायण-आ-रामचरितमानस-के-तुलनात्मक-अध्ययन.htm

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