श्री नरेन्द्र झा केर एक पोथी हस्तगत भेल अछि: "अर्थतंत्र ओ भ्रष्टाचार"। हिनका सँ परिचय हमर अतबे अछि जे 2018 केर मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर समय हमरा हिनका सँ किछु क्षण हेतु भेट भेल अछि। भेट मे कोनो साहित्य अथवा हिनक विषय पर चर्च नहि भेल अछि ।
खैर! अपन विधा केर अनुकूल हम हिनका बारे मे किछु साहित्यकार लोकनि सँ चर्चा कएल। हिनका पर किछु पढ़ल। उपरोक्त पोथी पढ़ल आ हिनका सँ प्रभावित होइत हिनका पर एक लघु निबंध लिखबाक निर्णय लेल। ई लेख तकरे प्रमाण थिक। हिनका हम अपना हिसाबे आ एक प्रवासी मैथिल केर हिसाबे बुझबाक यत्न कएल अछि। आशा करैत छी पाठक लोकनि के हमर प्रयास नीक लगतनि।
साहित्य लिखला सँ भाषा मे लालित्य अबैत छैक, ओकर सौन्दर्य देखार होइत छैक, नाट्य, गायन, कल्पना, धर्म, कर्तव्य, पौरुष, देशभक्ति, प्रेमक अभिव्यक्ति बढैत छैक। मुदा कोनो भाषा आ संस्कृति अथवा भाषा केर वांग्मय अग्गब साहित्य सँ संभव नहि छैक। मराठी, बांग्ला, आ तमिल केर विकास मे एक बात जे सर्वविदित छैक से छैक ओहि भाषा सब मे गणित, विज्ञान, इतिहास, पुरातत्व, मीमांसा, दर्शन, राजनीती, कला, आदि पर प्रचुर मात्रा मे उपलब्ध लिखित प्रमाणिक दस्तावेज जे पोथी, शोध ग्रन्थ, पाण्डुलिपि, जर्नल आदिक रूप मे उपलब्ध छैक। वकाटक राजवंश केर द्वारा एलोरा मे एक पाथर सँ निर्मित दुमंजिला कैलाशनाथ मंदिर (गुफा)। ई अपन स्थापत्यकला, मूर्तिकला आदि लेल विश्व विख्यात अछि। एहि विषय पर महाराष्ट्र राज्य केर पुरातत्व विभाग केर निर्देशक सँ हम विस्तृत चर्च करैत रही। ओ हमर चैनल फोकब्रेन पर एक विस्तृत ऑनलाइन लेक्चर देने छलाह। जखन हुनका सँ मंदिर केर स्थापत्य, इतिहास, विशेषता आदिक सम्बन्ध मे हम सन्दर्भ केर बात कएल तँ ओ कहलनि जे अधिक प्रमाणिक सन्दर्भ मराठी भाषा मे उपलब्ध अछि। शांति निकेतन यात्रा केर क्रम मे पता चलल जे अर्थशास्त्र मे नोबेल पुरुस्कार विजेता देशरत्न प्रोफेसर अमर्त्य सेन अर्थशास्त्र केर गंभीर विषय पर एक पोथी बंगाली भाषा मे लिखने छथि। संयोग देखू जे हिनक पोथी अपन विषय केर मूल, प्रमाणिक आ बेजोड़ कृति मानल जाइत अछि। बाद मे कोनो गंभीर शोधकर्मी एहि पोथी के बंगला सँ अंग्रेजी मे अनुवाद केलनि। उदाहारण अनेक अछि आ तकर उदेश्य मात्र अतबे जे भाषा मे साहित्य केर अतिरिक्त आन विषय केर महत्त्व बुझि सकी। मगही भाषा केर लेखन पक्ष जेना-जेना विलुप्त भेल गेल तहिना-तहिना आयुर्वेद केर अनेक सूत्र ख़त्म भेल गेल। खैर! ई अलग विषय अछि एकरा पर अतए चर्च करब जरुरी नहि।
आइ-काल्हि देख रहल छी जे मैथिल, विशेष रूप सँ प्रवासी मैथिल सब मैथिली साहित्य लेखन मे आगाँ आबि रहल छथि। निश्चित रूप सँ ई उत्साहक विषय अछि मुदा एहि मे एक समस्या अछि। मैथिली भाषा केर आँगन मे एकरंगी फूल फुला रहल अछि। इंजीनियर, प्रबंध विषय केर जानकार, डॉक्टर, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, राजनीति, पारिस्थितिकी, मानवाधिकार, जेंडर, दलित, पत्रकारिता, नगर निर्माण, आदि के विषय सँ सम्बंधित अधिकांश लोक साहित्य लिख रहल छथि। यद्यपि किछु लोक आनो विषय पर लिख रहल छथि मुदा एहेन लेखक आ लेखनी बहुत कम अभरैत अछि। हमरा लगैत अछि जे इंजीनियर मिथिला केर भूमि मे अभियांत्रिकी केर सम्भावना पर लिखथि, चिकित्सक स्वास्थ्य पर लिखथि, कला समीक्षक कला पर; कियोक जल प्रंबंधन पर लिखथि, राजनीती, पर गंभीर लेखन होबाक चाही। झारखण्ड आन्दोलन केर समय झारखण्ड केर तमाम दिग्गज झारखण्ड राज्य केर आवश्यकता कियैक छैक ताहि विषय पर अनेक भाषा मे लिखैत छलाह। तहिना मिथिला के लोक के केना क्षेत्रीय दुर्भाव केर कारण मिथिला विकास केर गति मे बाधित भऽ रहल अछि ताहि पर लिखथि आ प्रमाणिकता एवं सन्दर्भपरक लेख, पोथी लिखथि। पोथी अथवा लेख अतेक आवश्यक हो जकर चहुँ दिस चर्च हो, लोक बूझए, सरकार आ निति निर्धारक लोकनि तक बात पहुँचय। से कखन हएत? तखन जखन ओहि विषय केर सम्बंधित लोक ओहि पर गंभीरता सँ लिखता। एक बेर साहित्य अकादमी केर एक कार्यक्रम केर ऑनलाइन प्रसारण देखैत रही। विषय रहैक "मैथिली मे पर्यावरण पर कुन तरहक काज भेल छैक?" वक्ता ओहि विषय पर उपलब्ध तमाम गूगल डाटा सँ बाजि रहल छलाह। सब किछु छल मुदा मैथिली मे लिखल पोथी, लेख आदिक चर्च नहि छल। संचालक सेहो शायद एहि बात पर गंभीर नहि रहथि! तखन एकर इएह समाधान अछि।
हमरा स्मरण अबैत अछि भोगेन्द्र झा सदैव कमला आ कोसी केर जल प्रबंधन केर बात करैत छलाह, जल प्रबंधन मे कोना भारत केर मिथिला आ नेपाल केर मिथिला केर भाग्योदय भऽ सकैत अछि तकर बात करैत छलाह। मुदा हुनका स्थानीय नीतिकारक, जानकार लोकनि, अभियंता, वैज्ञानिक, पर्यावरण केर ज्ञाता, आदि केर सहयोग यथेष्ठ नहि भेटैत छलनि। ईहो एक सत्य बात छैक जे अपन अनेक योजना मे भोगेन्द्र जी पढ़ल-लिखल समुदाय केर सहयोग सँ भावहु-भैंसुर केर सम्बन्ध रखैत छलाह आ सब काज यूनियन मोड पर करैत छलाह जकर साक्षात् उदाहरण अखिल भारतीय मिथिला संघ केर वर्तमान स्वरुप अछि ! खैर! एहि विषय सब पर कहियो गंभीरता सँ निर्भीक लेखनी सँ लिखल जा सकैत अछि।
एखन बात कऽ रहल छी श्री नरेन्द्र झा केर लेखनी, हुनक व्यक्तित्व आ हुनक एक पोथी केर मादे हुनक मैथिली वांग्मय मे योगदान पर। नरेंद्र जी शिक्षा सँ चार्टर्ड अकाउंटेंट छथि। अर्थशास्त्र आ राजनीती के बुझैत छथि। मैथिली साहित्य के कुनो साहित्यकार सँ अधिक पढैत छथि। साहित्य, संस्कृति, संस्कृत सँ जन्महि सँ जुड़ल छथि। साहित्य केर विन्यास सँ लऽ कऽ ओकर राजनीति तक केर गति, मति, सुगति, दुरगति सब किछु बुझैत छथि। साहित्य-संस्था लेल काज करैत छथि। साहित्यकार लोकनि संग तारतम्य बनबैत रहैत छथि। ई भेल हुनक स्वभाव आ मैथिली साहित्य सँ लगाव। जखन लिखबाक बात होइत अछि तखन ई राजनीति आ मिथिला ओहि मे कोना कात कऽ देल जैत अछि, पानि केर समस्या, नदी मे बाँध बनेबाक औचित्य, विकास आर्थिक विकास आ भ्रष्टाचार, स्थानीय नदी केर स्वरुप आ तदनुकूल वैज्ञानिक आ तथ्यपरक चिंतन संग सुझाव आदि पर मैथिली भाषा मे लिखैत छथि। चुनाव, चुनाव केर धांधली आ ओहि मे मिथिला केर योगदान आ अवस्था पर लिखैत छथि, केना मगध आ आन ठामक लोक, अधिकारी, मुख्यमंत्री, नेता, नियंता लोकनि जोड़-तोड़क माध्यम सँ मिथिला के विकास केर डेग मे पैर खीच लेत छथि, ताहि पर लिखैत छथि। मिथिलाक माटिक आ अगल बगल केर नदीक संगम भेला सँ मिथिला आ अतय केर लोक कोना समृद्ध जीवन जीबि सकैत छथि, ताहि पर लिखैत छथि। हिनक सोचब छनि जे बाढि आ मिथिला भूमि एक दोसरक पूरक अछि। एक केर बिना दोसर केर अस्तित्व नहि। तँइ अदौ सँ मिथिलाक जीवन, संस्कृति, व्यापार, कृषि कर्म आदि ताहि अनुकूले चलि रहल छल। एहि पर स्थानीय ज्ञान केर बिना सोचब आ निर्णय लेब सतत घातक रहल अछि। स्थानीय ज्ञान, जैव परंपरा, प्रकृति संस्कृति संवाद सँ निर्णय लेब हितकर रहत। ई सोचब छनि नरेंद्र जी केर। राहत केर नाम पर कोना धांधली होइत अछि। कोसी कोना कहर उतपन्न करैत अछि। ताहि पर हिनक चिंता एकक नहि अपितु लोकक अथवा जनमानस केर चिंता लगैत अछि। माओवादी नेता, आन्दोलन आदि कोना मिथिला केर सौहार्द आ सामाजिक समरसता आ शांति के सत्यानाश कऽ रहल अछि ताहि पर हिनक आलेख गंभीर चेतावनी दऽ रहल अछि। नरेंद्र जी मिथिला मे विद्युत् समस्या, असफल भूमि सुधार, रौदी-दाही केर समस्या, नीतिश कुमार केर शासनकाल कोना मिथिला क्षेत्रक हानि कऽ रहल अछि आदि विषय पर जनमानस केर मनोभाव केर प्रतिनिधि स्वर दऽ रहल छथि। एहन प्रतिनिधि जे प्रत्यक्षदर्शी थिकाह। ज्ञानी छथि। शिक्षा आ बाहरी परिवेश केर सोच आ डेग सँ परिचित छथि। एहन प्रतिनिधि जिनका लेल मिथिला केर सर्वोन्नत विकास मिशन स्टेटमेंट छनि। ई हिनक पोथी केर USP छनि। ई बात सब, बिंदु सब, विषय सब, सोच सब हमरा सन समान्य पाठक केर ध्यान अपना दिस खीचैत अछि।
हिनक लेखनी केर धार, हिनक सोचक सार अगर बुझक हो तँ एहि पोथी मे सम्मिलित आलेख सबहक नामकरण पढ़ने जाउ आ हमर बात स्पष्ट भेल जायत। आलेख सबहक नाम एक पाठक के एहि पुस्तक केर लेखक केर सोच, चिंता, ज्ञान, गरिमा, मैथिली, मैथिल आ मिथिला प्रेम सँ परिचित करबैत जायत आ पाठक अगर गंभीर छथि तँ हिनक पोथी पढ़बा लेल अवश्य आगू बढताह। आब कने लेख सबहक नामकरण देखल जाय: लोकतंत्रक महापर्व आ मिथिला; सरकारी जोड़-तोड़ मे घुरियाइत मिथिला विकास; कोसी कहर ओ बाढि राहत; मिथिला मे नदी संगम सँ समृद्धि तक; मिथिला मे बाढि अबैत रहत; मिथिला मे बाढिक व्यथा कथा; मिथिलांचल मे विद्युत संकट; मिथिला मे असफल भूमि सुधार; माओवादीक प्रभाव क्षेत्र मे मिथिला; आशा मे जीवित मिथिला; अनवृष्टिक चपेट मे मिथिला; खाद्य असुरक्षा एवं हरित क्रांति; रौदी-दाही सँ तबाह मिथिला
आब अर्थव्यवस्था सँ सम्बंधित आलेख सब देखल जाय: मूल्य वृद्धि सँ पीड़ित जनमानस; वैश्विक मन्दी, मूल्यवृद्धि आ हम सब; भ्रष्टाचार एवं कारीधन; महगी कम नहि होयत; दिवालिया लाल दुर्ग मे ममता; भ्रष्टाचार आ कारीधन प्रगतिक बाधक; नीतिशक शासन मे खोटे खोट; दिखावटी सुरक्षक विफलता; वैश्वीकरण सँ जनमानसक अधोगति; गरीबी केर मापदंड मे गड़बड़ी; आरटीआईक बेचैनी; महगी आ भ्रष्टाचार बाजारवादक देन; तृणमूल कांग्रेसक रेल बजट; महगी ओ विकासक चुनौती मे झुलैत वित्तमंत्री केर बजट; बिहार शताब्दी वर्ष- पोल-खोल; आर्थिक उदारीकरणक दुष्परिणाम; भंवर मे मनमोहनक अर्थनीति; लोकपाल नहि धोखापाल ।
पोथी मे यद्यपि जेना होइत छैक, लेखक के दल विशेष सँ अनुराग आ द्वेष भाव एक संग देखार भऽ रहल छनि तथापि अपन बातक आ कथ्यक पुष्टि लेल प्रमाण बेर-बेर लबैत छथि। कतहुँ हिनक मिथिला प्रेम तँ कतहुँ पॉलिटिकली करेक्ट बात सब उभरैत रहैत अछि। विषय सब यद्यपि बहुत प्रमाणिक आ मिथिला केर सन्दर्भ मे औचित्य रखैत अछि। भारत केर गणतांत्रिक आ प्रजातान्त्रिक स्वरुपक खोज वैदिक काल आ बुद्धकाल सँ करैत नरेन्द्र जी लिखैत छथि: "विश्वक सबस पैघ जनतंत्र भारत चुनावी महासमर मे छल। 70 करोड़ मतदाता 545 सदस्यता वाला लोक सभा चुनावक तैयारी मे छलाह। भारत ऋग्वैदिक काल सँ जनतांत्रिक अछि। वैदिक काल मे सभा समिति छल तथा बुद्धकाल मे गणतंत्र छल।" कहबाक अर्थ जे पोथी प्रमाणिकता अनैत अछि।
भ्रष्टाचार केर बात के प्रमाणित करबा लेल नरेन्द्र जी दी एक्नोमिस्ट पत्रिका सँ सन्दर्भ लैत लिखैत छथि जे डेमोक्रेसी केर सूचकांक पाँच मानक पर कएल जाइत अछि:
1. चुनाव प्रक्रिया
2. नागरिक अधिकार
3. शासनक कार्य कुशलता
4. राजनीतिक भागीदारी
5. राजनीतिक संस्कृति ।
बात के आगाँ बढबैत फेरो कहैत छथि जे उपरोक्त अध्ययन मे लोकतान्त्रिक देश के दू श्रेणी मे राखल गेल अछि:
1. अपूर्ण लोकतंत्र आ, 2. दोषपूर्ण लोकतंत्र। भारत केर लोकतंत्र के दोसर श्रेणी अर्थात दोषपूर्ण लोकतंत्र मे राखल गेल अछि।
अतेक पुष्ट प्रमाण संग पोथी केर शुरुआत कएल गेल अछि जे अपना आप मे एकर विशिष्ट गुण भेलैक। अहि तरहक पोथी सँ मैथिली केर सम्मान बढैत अछि। हमरा लोकनि आजुक समय मे गहन चिंतन कऽ रहल छी जे लगभग सब प्रमुख भाषा मे साहित्य सँ इत्तर रचना सब आबि रहल अछि। मैथिली मे सेहो एबाक चाही। किछु लिखा रहल अछि मुदा ततबे सँ काज नहि चलत। राजनीति पर, जलनीति पर, जल संसाधन पर, चुनाव पर, लोकपाल पर, क्षेत्रीय विकास पर, संविधान पर, भूगोल पर, भाव भूगोल पर, बाँध पर, पुल पर, रोजगार पर, उद्यम पर, पलायन पर लिखब जरूरी अछि । केवल लिखला सँ नहि हएत ओहि विषय सब पर साहित्य अकादमी भारत सरकार, मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली (सरकार), मैथिली अकादमी बिहार (सरकार) विभिन्न स्थानीय आ प्रवासी मैथिली संस्था सब चर्चा परिचर्चा करबथि। गंभीर बनथि। अखिल भारतीय मिथिला संघ, मिथिला स्टूडेंट यूनियन, सखी बहिनपा संगठन आदि अहि तरहक पोथी, लेखक, विचारधारा केर लोक सब सँ तथ्य ग्रहण करथि। ताहि सँ हिनका लोकनि केर डेग ठोस हेतनि। ई सब भविष्यक योजना बना सकैत छथि। अकादमिक स्तर पर विश्विद्यालय आ शोध संस्थान केर लोक अपन विद्यार्थी के एहि तरहक विषय पर नूतन शोध लेल उत्साहित करथि। नीक प्रबंधन संस्थान केर शोधकर्मी, विद्यार्थी के सहजता सँ जोड़ल जा सकैत अछि। ताहि तरहक कार्यकर्म मे नरेन्द्र झा आ हुनक पोथी नेयों केर निर्माण कऽ सकैत अछि। सब सँ पैघ बात ई जे नरेन्द्र जीक सब पोथी जतबा हमरा जानकारी अछि ताहि हिसाबे विदेह केर पोर्टल पर बिना कुनो शुल्क के उपलब्ध छैक। कियो लऽ सकैत अछि, पढ़ि सकैत अछि। फेर पोथी दिस अबैत छी। पोथी मे स्थानीय अथवा क्षेत्रीय आँकड़ा अलग-अलग समय केर अलग-अलग विषय पर सारगर्भित ढंग सँ देल गेल छैक। सब डाटा संग ओकर प्रेजेंटेशन आ ओकर विवेचन मिथिला सम्मत छैक। ओहि आँकड़ा सब के फेरो देखल जा सकैत अछि। नव डाटा पूल बनाएल जा सकैत अछि। हिनक काज पर बहुत आगाँ केर नीति आ रणनीति तैयार कएल जा सकैत अछि। हिनका आ हिनका एहन आन लोक सबहक रचना केर पुनर्पाठ सँ हमरा लोकनि तार्किक मैथिल भऽ सकैत छी मिथिलावादी भऽ सकैत छी।
एखन समय केर घनघोर दिक्कत अछि तँइ अतबे कहि सकैत छी जे नरेन्द्र झा पर विदेह केर ई काज जे हिनक केन्द्रित आलेख केर एक विस्तृत अंक छपत से अपने आप मे बहुत पैघ काज अछि। विदेह केर टीम विशेष रूप सँ गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हार धन्यवाद केर पात्र थिकाह मुदा विदेह के एक डेग आरो आगाँ एबाक चाही हिनक रचना केन्द्रित संगोष्ठी केर आयोजन हो आ ताहि पर किछु नीतिगत बात हो। कारण नरेन्द्र झा सन लोकक मिथिला के सही अर्थ मे मिथिला भूमि पर आ प्रवास मे दरकार छैक।