विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

श्री नरेन्द्र झा-मिथिलाक आर्थिक पक्ष रखनिहार किन्तु ऐतिहासिक विभ्रम उत्पन्न केनिहार लेखक (पृ. ६५-७२)

डॉ. धनाकर ठाकुर · 2024-06-01 · अंक 395

२.८.अशोक- मिथिला मैथिली आ नरेन्द्र बाबू (पृ. ७३-७८)
२.९.लक्ष्मण झा सागर- श्री नरेन्द्र झाजी: हमरा नजरिमे (पृ. ७९-८४)
२.१०.जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल'- की थिक मिथिला की छथि मैथिल (पृ. ८५-८८)
२.११.जीवन मिश्र- अद्भुत देश मिथिला (मिथिला राइजिंग: प्रकाशनसँ एखन धरि, हमरा नजरिसँ हमर सूचना सहित) (पृ. ८९-१४८)
२.१२.प्रणव झा- नरेंद्र झा: सीए, मैथिल आर्थिक-सामाजिक लेखक आ मिथिला अभियानी (पृ. १४९-१५६)
२.१३.रमेश- मिथिलाक अर्थव्यवस्थाक विरल व्याख्या करैत लेखक: नरेन्द्र झा, सी.ए. (पृ. १५७-१६८)
२.१४.मधुकांत झा- नरेन्द्र झा लिखित मिथिलाक आर्थिक संरचनापर प्रकाशित पुस्तक-एक ऐतिहासिक दस्तावेज (पृ. १६९-१७३)
२.१५.शैलेन्द्र मिश्र- श्री नरेन्द्र झा : मिथिलाक अर्थतंत्रक जानकारी रखनिहार एकटा विशेषज्ञ अर्थशास्त्री (पृ. १७४-१८०)
२.१६.डॉ कैलाश कुमार मिश्र- अर्थतंत्र ओ भ्रष्टाचार: नरेन्द्र झा केर पोथी सँ विषय वस्तु आ व्यक्ति केर व्यक्तित्व पर चिंतन (पृ. १८१-१९४)
२.१७.आशीष अनचिन्हार- कुपोषित मैथिली भाषा-साहित्य लेल एकटा अनिवार्य पौष्टिक तत्व: नरेन्द्र झा (पृ. १९५-२०१)

१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय
नरेन्द्र झा
चपल चरन चित चंचल भान
सैसव जौवन दरसन भेल। दुहु दल-बलहि दन्द-परि गेल।।
कबहुँ बाँधए कच कबहुँ बिथार। कबहुँ झाँपए अँग कबहुँ उघार।।
थीर नयान अथिर किछु भेल। उरज उदय-थल लालिम देल।।
चपल चरन, चित चंचल भान। जागल मनसिज मुदित नयान।।
विद्यापति कह करु अवधान। बाला अंग लागल पंचवान।।
[सैसव आ जौवनक भेंट भेल। दुनूक दल-बलमे द्वन्‍द्व बजरि गेल॥
कखनो ओ अपन कच (केश) बान्है छथि, कखनो फलका (बिथार) दइ छथि। कखनो अपन अंगकेँ झाँपै छथि, कखनो उघारि दइ छथि॥
थीर नयन आब अथिर भऽ गेलन्हि। उरोजक उदय-स्‍थल ललौन भऽ गेल छन्हि॥
चरण चपल छन्हि; आ चित्त चंचल सन भान भऽ रहल अछि। मनसिज (कामदेव) मुदित नयन (नयान) मे जागल छथि।
विद्यापति कहै छथि- संयम (अवधान- रोकटोक) राखू। बालाक अंगमे पाँचू वाण (मनसिज माने कामदेवक) लागल छन्हि।]
(ज्योतिरीश्वर पूर्व महाकवि विद्यापति)
नरेन्द्र झा अपन आत्मकथ्य ’चपल चरन चित चंचल भान’ (अंतिका, जनवरी-जून २००९) नामसँ लिखने छथि।
सन् १९३४, भूकम्प भेलै मिथिलामे, सहस्रबाढ़नि देखाइ पड़ल रहै किछु बर्ख पहिने, किछु अनहोनी हेतै, से लोक अनदाजने रहै।
आ तही भूकम्पमे नरेन्द्र झा केर बाबाक घर धराशायी भऽ गेलन्हि आ ओ सभ अपन नव-घराड़ी बनेलन्हि, पुरखाक खुनायल पोखड़िक दछिनबाड़ी भीड़पर। आ ओही नव घराड़ीपर जन्म भेलन्हि नरेन्द्र झा केर २२ सितम्बर १९३४ केँ। गाम तरौनी।
फेर शिव सिंहक समयमे करमहे मूलक श्रोत्रिय ब्राह्मणक ओ चर्च करै छथि जे तथ्यात्मक रूपेँ गलत अछि जँ ब्राह्मणक उपजातिक रूपमे स्रोत्रिय केँ देखी। हँ वेदपाठीकेँ श्रोत्रिय कहल जाइ छै, आ से सम्पूर्ण भारत/ नेपालमे आ से अखनो।
महाराज हरसिंहदेव- मिथिलाक कर्णाट वंशक। ज्योतिरीश्वर ठाकुरक वर्ण-रत्नाकरमे हरसिंहदेव नायक आकि राजा छलाह। १२९४ ई. मे जन्म आ १३०७ ई. मे राजसिंहासन। घियासुद्दीन तुगलकसँ १३२४-२५ ई. मे हारिक बाद नेपाल पलायन। मिथिलाक पञ्जी-प्रबन्धक ब्राह्मण, कायस्थ आ क्षत्रिय मध्य आधिकारिक स्थापक, मैथिल ब्राह्मणक हेतु गुणाकर झा, कर्ण कायस्थक लेल शंकरदत्त, आ क्षत्रियक हेतु विजयदत्त ऐ हेतु प्रथमतया नियुक्त्त भेलाह। हरसिंहदेवक प्रेरणासँ- आ ई हरसिंहदेव नान्यदेवक वंशज छलाह, जे नान्यदेव कार्णाट वंशक १००९ शाकेमे स्थापना केने रहथि- नन्दैद शुन्यं शशि शाक वर्षे (१०१९ शाके)... मिथिलाक पण्डित लोकनि शाके १२४८ तदनुसार १३२६ ई. मे पञ्जी-प्रबन्धक वर्तमान स्वरूपक प्रारम्भक निर्णय केलन्हि। पुनः वर्तमान स्वरूपमे थोडे बुद्धि विलासी लोकनि मिथिलेश महाराज माधव सिंहसँ १७६० ई. मे आदेश करबाय पञ्जीकारसँ शाखा पुस्तकक प्रणयन करबओलन्हि। ओकर बाद पाँजिमे (कखनो काल वर्णित १६०० शाके माने १६७८ ई. वास्तवमे माधव सिंहक बादमे १८०० ई.क आसपास) श्रोत्रिय नामक एकटा नव ब्राह्मण उपजातिक मिथिलामे उत्पत्ति भेल। [मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध खण्ड १ आ २ द्रष्टव्य (जीनोम मैपिंग आ जीनियोलोजिकल मैपिंग, २००९, २०१२, गजेन्द्र ठाकुर, पञ्जीकार विद्यानन्द झा, नागेन्द्र कुमार झा)]
फेर राधाकृष्णक भक्त हिनकर बाबा पोखरिक भीड़पर मन्दिर बनाबऽ चहै छला, मुदा राघोपुरक पछवारि ड्योढ़ी (कार्नवालिसक स्थायी बन्दोबस्त दरभंगा राजकेँ भेटल रहै, जे वास्तवमे जमीन्दार छलाह, जिनका लोक अज्ञानतावश राजा, महराजा इत्यादि कहै छन्हि; आ स्थायी बन्दोबस्तक जमीन्दारक अन्तर्गत मारिते रास वसूली एजेण्ट/ गुमाश्ता सभ बहाल छल जकरा ड्योढ़ी इत्यादि कहल जाइत अछि।) रोक लगेलकन्हि से केस-फौदारी भेल जइमे हिनकर जेठ पित्ती भगीरथ झा आ बहिया गनौरा लड़ाइमे अगुआ रहथि। आ हिनकर वैष्णव गुरुबाबा ककरो पोखरिमे माछ नै मारऽ द इ छलखिन्ह, कियो मलाह चोरा-नुका कऽ पैसि गेल तँ ईहो पानिमे पैसि कऽ ओकरा भगबैत छलाह।
नरेन्द्र झा दरभंगासँ १९५४ ई. मे आई कॉम केलन्हि, फेर बी.कॉम केलन्हि। दरभंगामे किछु दिन लक्ष्मण झा (प्रसिद्ध लखन झा) संगे मिथिला-मैथिलीक काज केलन्हि। तही बीच सुनीति कुमार चटर्जी आ मिथिला रिसर्च इन्स्टीट्यूटक चर्चा अबैत अछि, आ मिथिलाक संस्कृत पण्डित लोकनि संग सुनीति कुमार चटर्जीक अशोभनीय व्यवहार, लक्ष्मण झा केर उलहन आ सुनीति कुमार चटर्जीक स्पष्टीकरणक चर्च होइत अछि। आ फेर कलकत्ता (आब कोलकाता) मे रहि, अगस्त १९५६ सँ सी.ए. केर तैयारी शुरू केलन्हि आ १९६६ क जनवरीमे चार्टर्ड अकाउण्टेण्ट (सी.ए.) भऽ गेला, फेर कलकत्ता दिल्ली होइत १९७५ ई सँ स्थायी रूपेँ पटनावासी भऽ गेला। तही बीच ३ जुलाई १९५९ केँ पन्ना झा संगे विवाह भेलन्हि। १९६४ ई. मे पत्नी बिहार विश्वविद्यालयसँ मनोविज्ञानमे बी.ए. (ऑनर्स) केलखिन्ह। १९६५ ई. मे पत्नी सेहो कलकत्ता आबि गेलखिन्ह। १९९७-९८ मे हृदय रोगक ऑपरेशन भेलन्हि आ मिथिला मैथिली लेल सक्रिय काज नै कएल हेतन्हि से बुझना गेलन्हि। से लेख लिखब शुरू केलन्हि आ आकाशवाणी पटनाक मैथिली कार्यक्रम ’भारती’ मे भाग लेब शुरू केलन्हि। अखन धरि हिनकर आ हिनकर पत्नीक निम्न पोथी सभ छपि गेल छन्हि, जे हिनकर अनुमतिसँ विदेह पेटारमे पी.डी.एफ. फार्मेटमे http://www.videha.co.in/pothi.htm लिंक पर उपलब्ध अछि (Psycho Social Stress and Schizophrenia 2003 केँ छोड़ि कऽ जे उपलब्ध नै भऽ सकल।)
नरेन्द्र झा
मिथिलाक आर्थिक विकास (२०००), मिथिलाक जनपदीय विकास (२००५), मिथिला मे जल-संसाधन ओ प्रबन्धन (२००६), विकास ओ अर्थतंत्र (२००८), परिभ्रमण (२०१२), अर्थतंत्र ओ भ्रष्टाचार (२०१२), स्मृति (२०१३); Mithila Rising (2014); चपल चरन चित चंचल भान (२०२१)।
पन्ना झा
Psycho Social Stress and Schizophrenia 2003; अनुभूति (लघुकथा संग्रह) २००९, अनुशीलन (निबन्ध संग्रह) २०१२, अभिलाषा (लघुकथा संग्रह) (२०२१)।
पटनाक मैथिली संस्था ’चेतना समिति’ केँ ओ ’अचेतना समिति’ कहै छथि, ऐ संस्थाक काजे सभ तेहने छै। हुनका कलकत्ता, जकरा ओ मिथिला-मैथिलीक कर्मभूमि कहै छथि, छुटबाक दुख छन्हि, ओ प्रबोध बाबू, बाबू साहेब चौधरी, सुखदेव ठाकुर, श्रीकान्त मण्डलकेँ मोन पाड़ै छथि, ओ सभ आब नै छथि। वीरेन्द्र मल्लिक अपन प्रज्वलित मैथिली साहित्यक रचना छोड़ि कर्मकाण्डमे ओझरायल छथि। असगरे रामलोचन ठाकुर की-की करताह (चपल चरन चित चंचल भान २००९ मे लिखल गेल आब रामलोचन ठाकुर सेहो स्वर्गीय भऽ गेल छथि।)। पत्नी पन्ना झा आ अनुज अग्निपुष्प आ कुणालकेँ कलकत्ता सँ पटना लऽ अनलन्हि जतऽ मैथिलीक काज नहिये सन होइत अछि। पन्ना झा संघक काज मे लागल रहै छथि (आब ओहो स्वर्गीय), अग्निपुष्प पत्रिका ’संवाद’ कुहरि कऽ निकालि रहल छथि, कुणाल मैथिली नाटक सीरियल निकालैमे लागल रहै छथि। जिबैत जी मिथिला राज्य नहिये बनि सकतनि।
टिप्पणी: नरेन्द्र झा जी केर पोथीमे देल परिचयमे हुनकर मायक नाम नै भेटल तेँ परिचयमे नै देल जा सकल।
पुनश्च: विदेहक नरेन्द्र झा विशेषांक ई-प्रकाशित भेलाक बाद श्री कुणाल जी नरेन्द्र झा जी केँ विशेषांक मुद्रित करा कऽ देलखिन्ह। केदारनाथ चौधरी विशेषांक बेरमे सेहो श्री अरविन्द गुप्ता जी विदेह ई-पत्रिकाक लिंक केदारनाथ चौधरी जी केँ देने रहथिन्ह, आ ई-पत्रिकाक विशेषांक मुद्रित करा कऽ सेहो। सभ गोटेक आभार।
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
नरेन्द्र झा विशेषांक
२.१.प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे
२.२.नरेन्द्र झाजीक संक्षिप्त परिचय
२.३.कल्पना झा- "अनुशीलन"क अनुशीलन आवश्यक
२.४.मुन्नी कामत- मिथिला-मैथिल केर चहुविकासक शुभचिंतक श्री नरेन्द्र झा
२.५.हितनाथ झा- आत्मविश्वासक प्रेरणास्रोत डा. प्रो. पन्ना झा
२.६.अजित कुमार झा- मिथिलाक अर्थशास्त्री: श्री नरेन्द्र झा
२.७.डॉ. धनाकर ठाकुर- श्री नरेन्द्र झा-मिथिलाक आर्थिक पक्ष रखनिहार किन्तु ऐतिहासिक विभ्रम उत्पन्न केनिहार लेखक
२.८.अशोक- मिथिला मैथिली आ नरेन्द्र बाबू
२.९.लक्ष्मण झा सागर- श्री नरेन्द्र झाजी: हमरा नजरिमे
२.१०.जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल'- की थिक मिथिला की छथि मैथिल
२.११.जीवन मिश्र- अद्भुत देश मिथिला (मिथिला राइजिंग: प्रकाशनसँ एखन धरि, हमरा नजरिसँ हमर सूचना सहित)
२.१२.प्रणव झा- नरेंद्र झा: सीए, मैथिल आर्थिक-सामाजिक लेखक आ मिथिला अभियानी
२.१३.रमेश- मिथिलाक अर्थव्यवस्थाक विरल व्याख्या करैत लेखक: नरेन्द्र झा, सी.ए.
२.१४.मधुकांत झा- नरेन्द्र झा लिखित मिथिलाक आर्थिक संरचनापर प्रकाशित पुस्तक-एक ऐतिहासिक दस्तावेज
२.१५.शैलेन्द्र मिश्र- श्री नरेन्द्र झा : मिथिलाक अर्थतंत्रक जानकारी रखनिहार एकटा विशेषज्ञ अर्थशास्त्री
२.१६.डॉ कैलाश कुमार मिश्र- अर्थतंत्र ओ भ्रष्टाचार: नरेन्द्र झा केर पोथी सँ विषय वस्तु आ व्यक्ति केर व्यक्तित्व पर चिंतन
२.१७.आशीष अनचिन्हार- कुपोषित मैथिली भाषा-साहित्य लेल एकटा अनिवार्य पौष्टिक तत्व: नरेन्द्र झा
नरेन्द्र झा विशेषांक
२.१.प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे
प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे
1
2008 सँ एखन धरि विदेह http://videha.co.in/ द्वारा जे विशेषांक सभ आएल अछि तकरा तीन चरणमे बाँटि सकैत छी।
पहिल चरण 2008सँ जनवरी 2015 धरि जाहिमे विषय आधारित विषेषांक सभ प्रकाशित भेल आ मधुपजीपर सेहो विषेषांक प्रकाशित भेल। एकदम प्रारंभिक विषेषांक सभमे "विशेषांक" नाम नहि लीखल गेल छै मुदा ओहिमे ओहन रचनाक बेसी स्थान देल गेल छै सायास रूपें (क्रम-1 सँ 12)।
दोसर चरण भेल 2015 सँ लऽ कऽ एखन धरि जाहिमे मात्र जीवित लेखकपर विशेषांक प्रकाशित करबाक निर्णय लेल गेल आ इम्हर पछिला बर्ख एहिमे संस्था आ पत्र-पत्रिकापर विशेषांक प्रकाशित करबाक सेहो निर्णय लेल गेल क्रम- 13 एवं 14, 20 सँ 30)।
तेसर चरण भेल पछिला सालमे विदेहक संपादक द्वारा "नित नवल सिरीज" प्रकाशित करबाक (एकर विवरण अलगसँ देल गेल अछि)।
विदेह द्वारा 'जीवैत लेखकपर विशेषांक शुरू कएल गेल छल 2015 सँ जे विभिन्न नामसँ होइत आब "विदेहक जीवित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकपर विशेषांक शृंखला" नामसँ जानल जाइत अछि। मैथिलकर्मीसँ हमर सभहक आशय जिनकर काज मिथिला-मैथिली-मैथिली लेल कोनो माध्यमसँ भेल हो। ओ संगठनकर्ता सेहो भऽ सकै छथि, आन भाषाक लेखक सेहो। तहिना संगीतकर्मी मने गीत-संगीतसँ जुड़ल लोक। निच्चा एहि सभ चरण केर विस्तृत सूचना क्रमबद्ध रूपें देल जाएत।
विदेहक विशेषांक सभ लेल हम ओहनो लोक सभ लग आलेख लेल जाइत छी, हुनका सूचना दैत छी जे कि हमर, विदेह या गजेन्द्र ठाकुरक धुर विरोधी छथि। दू-चारि लोक कहि सकै छथि जे हमरा सूचना नहि भेटल, तऽ हुनकासँ हमर आग्रह जे कमसँ कम ओ अपन ह्वाटसएप आ फेसबुक केर मैसेज बॅाक्स (इनबॅाक्स) देखथि। हमर एहि प्रयासक प्रतिफल विदेहक आन विशेषांक संगे एहूमे देखाइ पड़त से उम्मेद अछि।
20 दिसंबर 2023 केँ विदेह नरेन्द्र झा जीक ऊपर विशेषांक प्रकाशित करबाक सार्वजनिक घोषणा केलक आ प्रस्तुत अछि ई विशेषांक। एहि सूचनाकेँ एहि लिंकपर देखि सकैत छी-घोषणा। श्रीमती पन्ना झा लेखिका छथि आ श्री नरेन्द्र झा जीक पत्नी सेहो। मैथिलीमे दंपति लेखक केर जे अवधारणा छै ताहिमे ईहो एकटा छथि। तऽ अइ विशेषांक केर अवसरपर हमरा लोकनि श्रीमती पन्ना जीक किछु रचनापर चर्चा सेहो राखि रहल छी। उद्येश्य अतबे जे विदेहक पाठक एहि अंकमे नरेन्द्रजीक संग पन्नोजीकेँ जानि सकथि।
एहि विशेषांकसँ पहिने विदेह 30 टा विशेषांक प्रकाशित कऽ चुकल अछि आ एहिठाम आब हम कहि सकैत छी जे ई एकटा चुनौतीपूर्ण काज छै। अनेक संकट केर सामना करए पड़ैत अछि लेख एकट्ठा करएमे। मुदा संगहि ईहो हम कहब जे संकटसँ बेसी हमरा लग समर्थन अछि। हँ, ई मानएमे हमरा कोनो दिक्कत नहि जे जतेक लेख केर उम्मेद केने रहैत छी हम ततेक नै आबैए, जतेक लोक लिखबाक लेल गछैत छथि से सभ अंत- अंत धरि आबि चुप्प भऽ जाइत छथि। आ एकर कारणो छै, किनको ई लागै छनि जे आनपर लिखब से हम अपने रचना किए ने लीखि लेब, किनको लग पोथिए नै रहै छनि, जखन कि हम सभ यथासंभव पाठककेँ विकल्प रूपमे पोथीक पी.डी.एफ फाइल सेहो देबाक लेल तैयार रहैत छी। कियो विदेहक समावेशी रूपसँ दुखी छथि, तँ किनको मित्रकेँ विदेहसँ दिक्कत छनि तँइ ओ नहि देता। एकरो हम संकटे बुझै छियै जे सभ फेसबुकपर लंबा-लंबा लेख वा कमेंट टाइप कऽ लै छथि सेहो सभ विदेह लेल हाथसँ लिखल पठाबैत छथि। जे सभ कहियो काल फेसबुकपर टाइप कऽ लीखै छथि तिनकर आलेख हम सभ टाइप करिते छी। खएर पहिने कहलहुँ जे संकटसँ बेसी समर्थन अछि तँइ आइ पहिलसँ लऽ कऽ तीसम (संस्था सहित) विशेषांक धरि पहुँचलहुँ हम। आन विशेषांक लेल इएह बात मानू। 2008 सँ लऽ कऽ 2024 क एखन धरि 31 टा विशेषांक प्रकाशित भेल मने बर्खमे दू टासँ कनी कम। निश्चिते समर्थन बेसी भेटल हमरा। जखन कि विदेहक ई एकतीसो विशेषांक केर अलावे आन अंक हरेक पंद्रह दिनपर (मासमे दू बेर) लगातार प्रकाशित भइए रहल अछि। एकर अतिरिक्त ईहो बात संतोषदायक अछि जे विदेहक हरेक व्यक्तिपरक विशेषांक अभिनंदनग्रंथ हेबासँ बाँचि गेल अछि। मुख्यधारा जकाँ विदेहकेँ अभिनंदनग्रंथ नहि चाही। अभिनंदनग्रंथ अहू दुआरे नै चाही जे ओहिसँ लेखक वा जिनकापर निकालल गेल छनि तिनकामे सुधारक गुंजाइश खत्म भऽ जाइत छै। तँइ विदेहक विशेषांकमे आलोचना-प्रसंशा सभ भेटत।
नरेन्द्र झाजीक रचना वा हुनकर अवदानक ऊपर कतहुँ किछु प्रकाशित भेल हो तकर संख्या बहुत कम हएत कारण कमसँ कम हम ओकरा अवलोकन करबासँ वंचित छी। बहुत संभव नरेन्द्र झाजीक ऊपर लिखल गेल हो मुदा हमहीं नै देख सकल होइ, एहन स्थितिमे पाठक-आलोचक हमरा सूचित करथि हम अपन सूचनाकेँ सुधारि लेब। एहि संदर्भमे हम कहि सकै छी जे विदेहक ई प्रस्तुत विशेषांक एहन पहिल प्रयास अछि जाहिमे ई बुझबाक प्रयास कएल अछि जे नरेन्द्र झाजीक रचना केहन छनि। ई अलग बात जे हम सभ कतेक सफल वा असफल भेलहुँ से पाठक कहता। एहि विशेषांक केर शुरूआत विदेहक आने विशेषांक जकाँ अछि। संगे-संग ई क्रम ने तँ उम्रक वरिष्ठता केर पालन करैए आ ने रचनाक गुणवत्ताक। हँ, एतेक धेआन जरूर राखल गेल छै जे पाठकक रसभंग नहि होइन आ से विश्वास अछि जे रसभंग नै हेतनि। पहिने विदेहक सभ अंक नागरी, तिरहुता आ ब्रेल लिपिमे प्रकाशित होइत छल आब एहिमे कैथी, नेवाड़ी, एवं आइ.पी.ए. लिपि सेहो जोड़ल गेल अछि, मने एखन विदेह कुल छह लिपिमे प्रकाशित होइए। एकर अतिरिक्त विदेहक किछु अंक रंजना (नेवारी केर एक आर रूप), ब्राह्मी, खरोष्ठी, उर्दू, तिब्बती एवं तिब्बती-उमे लिपिमे सेहो छपल अछि। कुल मिला कऽ देखी तँ विदेह बारह लिपि अपना लेल रखने अछि जाहिमेसँ कुल छह टा लिपिमे विदेह लगातार प्रकाशित भऽ रहल अछि।
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पाठक जखन एहि विशेषांककेँ पढ़ताह तँ हुनका वर्तनी ओ मानकताक अभाव लगतनि। वर्तनीक गलती जे थिक से सोझे-सोझ हमर सभहक गलती थिक जे हम सभ संशोधन नै कऽ सकलहुँ मुदा ई धेआन रखबाक बात जे विदेह शुरुएसँ हरेक वर्तनी बला लेखककेँ स्वीकार करैत एलैए। तँइ मानकता अभाव स्वाभाविक। एकर बादो बहुत वर्तनीक गलती रहल गेल अछि जे कि हमरे सभहक गलती अछि। मैथिलीमे किछुए एहन पत्रिका अछि जकर वर्तनी एकरंगक रहैत अछि आ ई हुनक खूबी छनि मुदा जखन ओहो सभ कोनो विशेषांक निकालै छथि तखन वर्तनी तँ ठीक रहैत छनि मुदा सामग्री अधिकांशतः बसिये रहैत छनि। ऐतिहासिकताक दृष्टिसँ कोनो पुरान सामग्रीक उपयोग वर्जित नै छै मुदा सोचियौ जे 72-80 पन्नाक कोनो प्रिंट पत्रिका होइत छै ताहिमे लगभग आधा सामग्री साभार रहैत छनि, तेसर भागमे लेखक केर किछु रचना रहैत छनि आ चारिम भागमे किछु नव सामग्री रहैत छनि। मुदा हमरा लोकनि नव सामग्रीपर बेसी जोर दैत छियै। एकर मतलब ई नहि जे वर्तनीमे गलती होइत रहै। हमर कहबाक मतलब ई जे संपादक-संयोजककेँ कोनो ने कोनो स्तरपर समझौता करहे पड़ैत छै से चाहे वर्तनीक हो कि, मुद्राक हो कि विचारधारक हो कि सामग्रीक हो। हमरा लोकनि वर्तनीक स्तरपर समझौता कऽ रहल छी मुदा कारण सहित। प्रिंट पत्रिका एक बेर प्रकाशित भऽ गेलाक बाद दोबारा नै भऽ सकैए (भऽ तँ सकैए मुदा फेर पाइ लागि जेतै) तँइ ओकर वर्तनी यथाशक्ति सही रहैत छै। इंटरनेटपर सुविधा छै जे बीचमे (इंटरनेटसँ प्रिंट हेबाक अवधि) ओकरा सही कऽ सकैत छी मुदा सामग्रिए बसिया रहत तँ सही वर्तनी रहितो नव अध्याय नै खुजि सकत तँइ हमरा लोकनि वर्तनी बला मुद्दापर समझौता केलहुँ। हमरा लोकनि कएलनि, कयलनि ओ केलनि तीनू शुद्ध मानैत छी, एतेक शुद्ध मानैत छी एकै रचनामे तीनू रूप भेटि जाएत। आन शब्दक लेल एहने बूझू।
उम्मेद अछि जे पाठक विदेहक आने विशेषांक जकाँ एकरा पढ़ताह आ पढ़ि एकर नीक-बेजाएपर अपन सुझाव देताह। जँ अहाँ अइ विशेषांक केर PDF पढ़ि रहल छी तँ कोनो शब्द वा पाँति अंडरलाइनमे वा बिना अंडरलाइनकेँ नीला वा कोनो रंगक देखाए तँ बुझि लिअ जे ओहिमे लिंक देल गेल छै रेफरेंस लेल आ तकरा क्लिक करबै तँ ओ लिंक खुजि जाएत। कोनो-कोनो फोटोमे सेहो लिंक देल गेल छै। पाठक एहि माध्यमसँ कम समयमे रेफरेंस सभहक अध्य्यन कऽ सकै छथि। मुदा प्रिंटमे प्रकाशित पोथीमे ई सुविधा नै रहत। अइ कारणसँ भऽ सकैए जे पाठककेँ एहि पोथीक किछु पाँति प्रचलित नै बुझेतनि। जाहि ठाम लिंक देल गेल छै ताहि ठामक पाँतिक किछु शब्दक बीच बेसी स्थान छूटल छै। ओकरा एक पाँति बना पढ़ी से आग्रह। हम चाहितहुँ तँ सभ लिंक वा चित्रकेँ एकठाम दऽ सकै छलहुँ मुदा हमर सोच अछि जे पाठककेँ एकै ठाम तर्क आ सबूत भेटनि।
विदेहक द्वारा जीवैत लेखक ओ संस्थाक विशेषांक शृखंलामे प्रकाशित भेल आन विशेषांक सभहक लिस्ट एना अछि (एहिठाम जे अंकक लिस्ट देल गेल अछि ताहि अंकपर क्लिक करबै तँ ओ अंक खुजि जाएत)। जे विशेषांक केर विदेहक लिंक छै ठीक तकर निच्चा एहि किछु विशेषांकक पोथी.कॅम केर प्रिंट आॉन डिमांड लिंक अछि जाहि ठाम पाठक एकरा आॉनलाइन कीनि सकै छथि-
1) हाइकू विशेषांक 12 म अंक, 15 जून 2008
2) गजल विशेषांक 21 म अंक, 1 नवम्बर 2008
3) विहनि कथा विशेषांक 67 म अंक, 1 अक्टूबर 2010
4) बाल साहित्य विशेषांक 70 म अंक, 15 नवम्बर 2010
5) नाटक विशेषांक 72 म अंक 15 दिसम्बर2010
6) समीक्षा विशेषांक
7) नारी विशेषांक 77म अंक 01 मार्च 2011
8) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) 97म अंक
9) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक 111 म अंक, 1 अगस्त 2012
10) भक्ति गजल विशेषांक 126 म अंक, 15 मार्च 2013
11) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक 142 म, अंक 15 नवम्बर 2013
12) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक 169 म अंक 1 जनवरी 2015
13) अरविन्द ठाकुर विशेषांक 01 नवम्बर 2015 अंक 189
https://store.pothi.com/book/गजेन्द्र-ठाकुर-सम्पादक-विदेह-अरविन्द-ठाकुर-विशेषांक/
विदेहक अरविन्द ठाकुर विशेषांक केर पोथी रूप "स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व" केर नामसँ प्रकाशित भेल।
14) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक 01 दिसम्बर 2015 अंक 191
https://store.pothi.com/search/?q=गजेन्द्र%20ठाकुर
15) विदेह सम्मान विशेषा‍क- 200म, भाग-1, 15 अप्रैल 2016
16) विदेह सम्मान विशेषा‍क- 205म, भाग-2, 1 जुलाई 2016
17) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- 217 म अंक 01 जनवरी 2017
18) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक-313म अंक 1 जनवरी 2021
19) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-2, 317 म अंक 1 मार्च 2021
20) रामलोचन ठाकुर विशेषांक 01 अप्रैल 2021 अंक 319
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-विदेह-रामलोचन-ठाकुर-विशेषांक/
21) राजनन्दन लाल दास विशेषांक 01 नवम्बर 2021 अंक 333
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-विदेह-राजनन्दन-लाल-दास-विशेषांक/
22) रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक 15 जून 2022 अंक 348
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-विदेह-रवीन्द्रनाथ-ठाकुर-विशेषांक/
23) केदारनाथ चौधरी विशेषांक 15 अगस्त 2022 अंक 352
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-विदेह-केदार-नाथ-चौधरी-विशेषांक/
24) प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' विशेषांक 01 नवम्बर 2022 अंक 357
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-विदेह-प्रेमलता-मिश्र-प्रेम-विशेषांक/
25) शरदिन्दु चौधरी विशेषांक 15 नवम्बर 2022 अंक 358
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-विदेह-शरदिन्दु-चौधरी-विशेषांक/
26) "कला-विमर्श विशेषांक (सन्दर्भ- संजू दास, कृष्ण कुमार कश्यप, शशिबाला, एस.सी.सुमन आ श्वेता झा चौधरी)" 15 अप्रैल 2023 अंक 368
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-विदेह-कला-विमर्श-विशेषांक-सन्दर्भ-संजू-दास-कृष्ण-कुमार-कश्यप-शशिबाला-एस-/
27) अशोक विशेषांक 1 मइ 2023 अंक 369
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28) रामभरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक 15 मइ 2023 अंक 370
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-विदेह-राम-भरोस-कापड़ि-भ्रमर-विशेषांक/
29) मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) विशेषांक 1 जून 2023 अंक 371
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-विदेह-मिथिला-स्टूडेण्ट-यूनियन-एम-एस-यू-विशेषांक/
30) लक्ष्मण झा सागर विशेषांक (15 नवम्बर 2023 अंक 382)
https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-विदेह-३८२-म-अंक-१५-नवम्बर-२०२३-लक्ष्मण-झा-सागर-विशेषांक/
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विदेहक जीवित विशेषांक शृंखलामे किनकर चयन हो ताहि लेल मोटा-मोटी निच्चाक किछु बिंदुक पालन कएल जाइत अछि-
1) लगभग पाँच-छह मास पहिनेसँ विदेह अपन पाठककेँ सुझाव देबा लेल लेल सूचना दैत अछि।
2) आएल सुझावमेसँ विदेह मात्र जीवित लेखककेँ चयन करैत अछि। संस्था सेहो वर्तामनमे जीवंत हेबाक चाही।
3) सभ जीवित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकक बीचमे हुनकर लेखन/ काज एवं आचरणक साम्यता देखल जाइत अछि। जाहि लेखकक लेखन/ काज ओ आचरणमे बेसी साम्यता (कम फाँक) भेटैए तेहन छह टा नाम चयनित होइत अछि।
4) छह नाम एलापर ई तुलना कएल जाइत छै जे ई छहो मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशक अथवा संस्थाकेँ रचना लिखबाक वा समाजिक काज केलाक एवजमे समाजसँ की भेटलनि।
5) जिनका सभसँ कम भेटल बुझाइत अछि ताहि तीन मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशक,-संस्थाकेँ अगिला चरण लेल राखि लैत छी।
6) एहि तीन चयनित जीबित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकक वा संस्थाक रचना, काज, हुनक उद्येश्य आदिक बीचमे परस्पर तुलना कएल जाइत अछि आ,
7) अंतिम रूपसँ विदेह द्वारा नाम चुनि सालक अंतमे घोषणा कएल जाइत अछि आ नियत समयपर ई विशेषांक निकालबाक प्रयास करैत छी। एकर मतलब ई भेल जे पाठककेँ सुझाव देबाक सूचना हरेक बर्खक अप्रैल-मइ धरिमे चलि जाइत छनि।
प्रश्न उठि सकैए जे कि उपरक नियम एहन छै जाहिमे अंतिम रूपसँ सभ सुयोग्य जीवित लेखक केर चयन समयपर भ़ऽ जेतनि? तऽ एकर उत्तर छै- नै। विदेहक पाठक लग सेहो अपन सीमा छनि। मुदा अही सीमाक संगे हमरा सभकेँ अपन यथासाध्य श्रेष्ठ देबाक छै आ मैथिली लेल एकटा एहन रस्ता बना देबाक छै जाहिसँ आबए बला 500-600 बर्खक साहित्य विदेहक लीकसँ प्रेरणा पाबए। अही विचारक संग विदेह ओहन जीवित लेखकपर अपन धेआन सेहो केंद्रित कऽ रहल अछि जे कि सुयोग्य छथि मुदा जिनकापर विदेहक विशेषांक कोनो कारणवश नहि प्रकाशित भऽ सकल। एकर नाम भेल विदेहक "नित नवल सिरीज"। एहि नव विचारक मुख्य बिंदु एना अछि-
1) विदेहक संपादक गजेन्द्र ठाकुर एकटा कोनो जीवित लेखक वा कलाकारपर एकाग्र आलोचना करता मने ओहि लेखक केर उपल्बध सभ साहित्यपर। एहि पोथीक भाषा मैथिली अथवा अंग्रेजी कोनो एक भाषामे रहत। एहि पोथीक पहिल रूप ई-बुक केर रूपमे आएत आ प्रयास रहत जे एकर प्रिंट सेहो आबए जे कि परिस्थितिपर निर्भर करतै।
2) लेखक वा कलाकार केर चुनाव संपादक अपन रुचि वा विदेह टीमक रुचि केर हिसाबें करता।
3) एहिमे ओहने लेखक वा कलाकार केर चयन संभव हएत जिनकर उपल्बध हरेक पोथीक PDF रूपमे विदेहक माध्यमसँ सार्वजनिक भेल छनि। कलाकार लेल यूट्यूब एवं आन साइट सेहो मान्य हेतै।
4) एहि परियोजनाक लेल चयनित लेखक वा कलाकारपर काज संपादक केर समय केर अनुसारे हेतै। तँइ एकर समय सीमा कहब संभव नहि।
नित नवल सिरीजमे एखन धरि प्रकाशित पोथीक सूची एना अछि-
1) Rajdeo Mandal- Maithili Writer (ई प्रिंट रूपमे सेहो प्रकाशित भेल अछि)
2) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (ई प्रिंट रूपमे सेहो प्रकाशित भेल अछि, संगे-संग ई प्रिंट आॉन डिमांड रूपमे सेहो अछि)
https://store.pothi.com/book/गजेन्द्र-ठाकुर-नित-नवल-सुभाष-चन्द्र-यादव/
एकर अतिरिक्त विदेहक वर्तमान अंक सभमे धारावाहिक रूपें "नित नवल सुशील" आ "नित नवल दिनेश मिश्र" सेहो प्रकाशित भऽ रहल अछि आ दूनूक पोथी रूप जल्दिये आएत।
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ई तँ भेल जे काज हम सभ कऽ सकलहुँ तकर विवरण मुदा किछु एहनो घोषणा छै जे कि हम सभ नै कऽ सकलहुँ जेना 2016 मे हम सभ परमेश्वर कापड़ि, कमला चौधरी आ वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक केर घोषणा कइयो कऽ नहि प्रकाशित कऽ सकलहुँ। पाठक एहि घोषणाकेँ एहि लिंकपर देखि सकै छथि- सूचना बादमे विदेहक "वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक" (जे कि प्रकाशित नै भऽ सकल) लेल वीरेन्द्र मल्लिक जीक साक्षात्कार जे नबोनारायण मिश्रजी से विदेहक 337म अंकमे प्रकाशित भेल पाठक एकरा एहि लिंकपर पढ़ि सकै छथि- 1 जनवरी 2022 अंक 337
2017 मे विदेह "नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य" विषयक विशेषांक निकालबाक नेयार केने छल जे एखन धरि पूरा नहि भऽ सकल अछि।
तेनाहिते विदेहक "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" हमरा लोकनि एखन धरि नै प्रकाशित कऽ सकलहुँ अछि। एकर घोषणा हम 2019 मे केने रही। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू।
तेनाहिते विदेहक 'मिथिला विकास परिषद्" विशेषांक केर घोषणा कइयो कऽ नहि प्रकाशित कऽ सकलहुँ अछि। एकर घोषणा हम जुलाई 2023 मे केने रही। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू।
परिशिष्ट-1
परिशिष्ट-2
परिशिष्ट-3
विदेह अपन कोनो अंकमे "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" निकालत (लिंक कमेंटमे) ताहि लेल अपने सभसँ निम्नलिखित विषयपर आलेख आदि चाही।
1.साहित्य, कला एवं सरकारी अकादमीः-
(क) पुरस्कारक राजनीति
(ख) सरकारी अकादेमीमे पैसबाक गैर-लोकतांत्रिक विधान
(ग) सत्तागुट आ अकादमी केर काजक तौर-तरीका
घ) सरकारी सत्ताक छद्म विरोधमे उपजल तात्कालिक समानांतर सत्ताक कार्यपद्धति (1985सँ एखन धरि)
ङ) अकादेमी पुरस्कारमे पाइ फैक्टरः मिथक वा यथार्थ
2.व्यक्तिगत साहित्य संस्थान आ पुरस्कारक राजनीति
3.प्रकाशन जगतमे पसरल भ्रष्टाचार आ लेखक

Suggested citation: डॉ. धनाकर ठाकुर. “श्री नरेन्द्र झा-मिथिलाक आर्थिक पक्ष रखनिहार किन्तु ऐतिहासिक विभ्रम उत्पन्न केनिहार लेखक (पृ. ६५-७२).” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 395, 2024-06-01. https://www.videha.co.in/research/2024/395/श्री-नरेन्द्र-झा-मिथिलाक-आर्थिक-पक्ष-रखनिहार-किन्तु-ऐतिहास-6e343d7d80.htm

मूल विदेह अंक / Original issue