आजुक समय में मैथिली भाषा में रार ठनल अछि । की मैथिली मात्र एक भाषा थिक ? जी नहि ! मैथिली भाषा नहि, भाषा परिवार थिक । भाषा परिवार ओहि भाषा के कहल जाइत अछि, जेकरा सऽ भाषा समूह जन्म लइत अछि । मैथिली सऽ बंगला, मैथिली सऽ ओड़िया, मैथिली सऽ असमिया भाषा के जन्म भेल अछि । तेंऽ मैथिली के विद्वान लोकनि बंगला, ओड़िया, असमिया के जननी कहैत अछि । जननी कोना नहि कहत ? जंऽ हम लिपि के गप्प करी, तखन किछु अंतर सऽ मैथिली लिपि, बंगला लिपि, असमिया लिपि में समानता अछि, तऽ किछु अंतर सऽ बंगला सऽ ओड़िया लिपि में समानता अछि ।
आब प्रश्न उठैत अछि जे मैथिलीये कियेक जननी ? ईसा सऽ कयेक हजार वर्ष पूर्व मैथिली भाषी क्षेत्र, बंगलाभाषी क्षेत्र, ओड़िया भाषी क्षेत्र असमिया भाषी क्षेत्र आ शुम्ह क्षेत्र (वर्तमानक बंगलादेश) मिला कऽ एक राष्ट्र छल । नांओ छल आनव देश, आ सम्राटक नांओ छल बलि । जनिक राजधानी मधुबनीक बाबुबरही प्रखंड केरऽ बलिराजगढ़ में छल । बलिराजगढ़क गर्भ में अखनों सब इतिहास दबल अछि, आ उखाड़नाहरक बाट जोहति अछि ।
राजा बलि के छओ संतान छल । अंग, बंग, कलिंग, शुम्ह आ औद्र । जाहि में अंग सबसऽ पैघ आ राज काज दक्षताक कारणें पिताक सिंहासन पर आसीन भेलाह । बंग के हिंस्सा में बंगाल, कलिंग के हिस्सा में वर्तमानक आसाम, शुम्ह के हिस्सा में शुम्ह प्रदेश अर्थात आधुनिक बंग्लादेश, औद्र के हिस्सा में वर्तमानक ओड़िसा आ पौण्ड्रक हिस्सा में पौण्ड्रिया अर्थात वर्तमानक पूर्णियां गेल ।
बहुतरास विद्वान ओड़िसा के कलिंग कहने अछि, मुदा कलिंग उड़िसा के कहने छथि । मुदा ओद्र सऽ ओद्रिस, ओड़िष, ओड़िशा, उड़िसा आ भाषा ओद्रिया, ओड़िया, उड़िया बनल अछि ।
ज्ञातव्य होइ जे अंग, बंग, कलिंग, शुम्ह, पौण्ड्र आ औद्र राज्यक केन्द्र अंग अर्थात बलिराजगढ़ छल । और छओ राज्यक जननी बलिराजगढ़ थिक । बलिराजगढ़क भाषाक नांओ मैथिली थिक, तखन मैथिली माय आ पांच भाषा में बचल तीन भाषा बंगला, असमिया, आ ओड़िया केरऽ जननी तऽ मैथिलीये भेल । पौण्ड्रिया आ बलिराजगढ़क भाषा एकहि थिक । पच्छिमी बंगाल आ पूर्वी बंगाल ( बंगलादेश) केरऽ भाषा एकहि थिक । तखन एम्हर बचल मैथिली माय केरऽ तीन भाषा बंगला, उड़िया आ असमिया ।
बलिराजेगढ़ अंग थिक । प्रमाण अंग पर मगधक शासन । बलिराजगढ़क खुदाई में मगधकालिन मृण्डभांड आदि सब मिलल छल । मुदा आधुनिक विद्वान लोकनि भागलपुरके बिना प्रमाणे अंग कहैत इतराति छथि । जे गलत अछि ।
अंग पर इक्ष्वाकुक चढ़ाई कैयलन्हि, आओर वो पूब्ह में कोशी, पच्छिम में गंडकि, उत्तर में हिमालयक तराई आ दक्षिण में गंगा धरिक जमीन जीतलक, आ निमी नांओक पुत्र के इ अहि प्रदेशक राजा बनौलक, जे विदेह राज्यक स्थापना कैयलक । ताहि के बाद भागलपुर मालिनी प्रदेश बनि गेल । आ अंग वंश चंप, चंपा नांओक नगर बसौलक । जे मालिनी प्रदेशक राजधानी बनल ।
आब प्रश्न उठैत अछि, जे जंऽ हिमवन सऽ संथाल अर्थात औद्रक सीमा धरि अंग छल तखन भाषा मैथिली कोना ?
कालक्रम बदलल तऽ शासको बदलल । बलिराजगढ़ सहित चंपा पर मगधक कब्जा भाषा माग्धी, कालांतर में पालक कब्जा । ताहि के बाद बंगालक कब्जा । मुगलकाल में अकबरक कब्जा, अकबरक जमींदार कर्नाटवंश जे तिरहुत राज्य के स्थापना कैयलक । भाषाक नांओ तिरहुतिया राखल आ लिपि कैथी छल । आजुक विद्वान मिथिलाक्षर के तिरहुता लिपि कहै सऽ नहि अघाइत छथि । तऽ आब प्रश्न उठैत अछि जे गंगाक दक्षिणी भाग में तिरहुत तऽ नहि छल तखन मंदारक शिलालेखक लिपि आ सहोदराक लिपि एकहि कियेक थिक ? जंऽ पालकालिन राजाक समय में शिलालेख वा ओहि सऽ पहिलके राजाक समय के शिलालेख थिक, तखन स्पष्ट होइत अछि जे कैथी तिरहुता लिपि थिक ।
कर्नाटवंश के बाद ओईनबार वंश, ओईनबार वंश के बाद खंडवाल वंश आओल । ताहि के बाद मिथिले नहि समुच्चा भारत अंग्रेजियाक गुलाम भऽ गेल ।
आब आबैत छी मैथिली नांओ पर । सन 1801 ई० में अंग्रेज विद्वान कॉलब्रुक अहि मधुर भाषाक नांओ मैथिली कहलक । बस्स...एतहि सऽ मैथिलीक शत्रु तैयार ।
मैथिलीक प्रथम शत्रु श्रोत्रिय बाभन- दरभंगा महाराज सन 1810 ई०में सोति बाभन के भागलपुर में बैसार कैयलन्हि । अहि बैसार में दरभंगा महाराज बाभन के सुच्चा मैथिल घोषित कयलन्हि आ सोति बाभनक बोली के मानक मैथिली । प्रमाण 1949 ई० में कविश्रेष्ठ बाबा नागार्जुन अपना कविताक माध्यमे विरोध जतौलन्हि । तऽ हुनका यातना सेहो मिलल छलन्हि । ओ अपना कविताक माध्यमे मिथिला के सब जातिक साथ बाध-बोन, मांछी-मच्छर सब के मैथिल कहने छथि । जंऽ पढ़बाक हुऽए तऽ श्रीमान दिलीप कुमार झा द्वारा रचित बाबा नागार्जुनक मिथिला नांओक पोथी में श्रीमान दिलीप कुमार झाजी बहुत सुंदर विवेचना कयने छथि ।
जखन भागलपुरक सभा में खंडवा सऽ आबै बाला लोक अपनेआप के मैथिल घोषित कऽ लेलक, तखन मधेपुराक जमींदार श्रीमान स्व० बी पी मंडल के पिता वा बाबा 1811 ई० में बैसार कऽ सोलकन महासभा के गठन कयलन्हि आ सोलकनक बोली आ मूल मैथिली के अंगिका घोषित कयलन्हि । अहि प्रकारे मैथिलीक प्रथम शत्रु बाभन बनल । तखनो मूल मैथिली में रचना नहि बन्न भेल । बांकाक तेज नारायण कुशवाहा अप्पन रचना लऽ कऽ दरभंगा प्रेस में आओल । चूंकि अर्थाभाव में दरभंगे में प्रेस छल आ वो प्रेस दरभंगा महाराज के छल । परिणाम तेज नारायण कुशवाहा के बेईज्जत कऽ कऽऽ पठाओल गेल । मैथिली खंडित भेल । दोसर रचना ज्वाला प्रसाद साह जे साइत नेपाल सऽ लऽ कऽ आओल हुनको मानक के दुहाई दऽ कऽ बेईज्जत कऽ कऽऽ पठाओल गेल । परिणाम वज्जिका के जन्म भेल । ताहि के बाद आगि में घी देलक पंडित राहुल सांकृत्यायन जे ओहो बाभने छल । वो मैथिली के तीन भाग के बिनु प्रमाणे तीन भाषा कहि देलक आ अप्पन रचना में रचि देलक । ओहि सऽ पहिले लिखित में मैथिली नांओ के सिवा किछु नहि छल । तेसर शत्रु मिथिला राज मांगनाहर थिक । जे अपना नीज स्वार्थ लेल मिथिला मांगै छथि, मुदा वो मिथिला लेल समर्पित नहि रहल आ नहि अछि । चूंकि मिथिला राज्य भाषा के नांओ पर मांगल जाइत अछि । ताहि के खंडन हेतू बिहार सरकार तेसर शत्रु बनि अंगिका अकादमी के गठन कऽ मैथिली के तोड़बाक काज कयलक अछि ।
श्रीमान कवि एकांत राजीब झा अप्पन नव रचना में कहलथि जे अंगिका, वज्जिका मैथिली भाषा परिवारक सदस्य थिक । तखन हम हुनक अहि कथन के खंडन करैत छी । कारण अंगिका आओर वज्जिका मैथिलीक मूल थिक । मिथिला समाज ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित आ श्रीमान आचार्य रामानंद मंडल द्वारा लिखित पोथी रानियां भिखारिन में भाषा के नहि बंटियौ में लेखक स्पष्ट कहने छथि जे इ भाषा मैथिली थिकैक । नहि कि वज्जिका ।
अंत में मैथिली भाषा परिवार थिक । इ बंगला, ओड़िया, असमिया भाषाक जननी थिक । सोतिपुरिया तऽ मूल मैथिली के बोली मात्र थिक । अस्तु