१०.श्री सियाराम झा 'सरस ''कोइलख'- ग्राम गाथाक विलक्षण अभिलेख
श्री सियाराम झा 'सरस'-संपर्क-9931346334
'कोइलख'; ग्राम गाथाक विलक्षण अभिलेख
हमरा सभ मैथिली भाषा-साहित्यमे कथा, कविता, उपन्यास, निबंध, संस्मरण एवं जीवनी इत्यादि पढ़व बेसी पसिन्न करैत छी। ई सभ विधा अपेक्षाकृत बेसी लिखलो-रचलो जाइत अछि। हालक एक-डेढ़ दसकमे बालसाहित्यपर वा गजल ओ विज्ञान-कथादि दिस सेहो पूर्वापेक्षा अधिक रचना रचब देखना जाइछ । सैह बात अनुवाद-साहित्यहुमे देखल जा सकैछ।
मुदा एक टा प्रवृत्तिक रूपें (जे एखन स्थापित नहि भए सकल अछि) ग्राम-गाथाक लेखन-प्रकाशन बेस महत्वक वस्तु कहल जा सकैछ। स्थानीयता ओ आंचलिकतापर डॉ. मणिपदमक एक टा विशिष्ट आलेख हमरालोकनिकेँ देखबाक सुयोग भेटल अछि। किंतु स्थानीयताकेँ नब स्वरूप ओ नब कलेबर दए ठाढ़ करबाक विलक्षण प्रयास कएलनि अछि-श्री हितनाथ झा। श्री झा बैंकक उच्चाधिकारी छलाह आ सेवानिवृतिक बाद हजारीबागक बासी भए, पहिनहुँसँ बेसी रचनाशील देखा पडैत छथि। प्रसंगवश मोन पाड़ि दी जे स्वनामधन्य प्रभास कुमार चौधरीक उपन्यास 'नवारंभ' केर प्रकाशन इएह हितनाथजी (प्रियदर्शी प्रकाशन, पटना) कएने छलाह आ मूलरूपें कोइलखे ग्रामक बासी थिकाह ई।
कहबाक प्रयोजन नहि जे मिथिलाक किछु अति विशिष्ट गामसभक सूचीमे सरिसब-पाही, मंगरौनी, बिसफी, लोहना लालगंज, भवानीपुर (पडौल), ढंगा हरिपुर, पिण्डारुच, ठाड़ी, सिंहवार, सतलखा, सौराठ, वनगाँव, महिषी, वरगाँव, धमदाहा, चम्यानगर, श्रीनगर, भ्रमरपुर आदिक संग कोइलखोक नाम अग्रणी अछि। आरो कतिपय नाम अछि मुदा हम एतय दृष्टांतरूपें किछुए नामक चर्च कएल अछि। किंतु से ई नाम सन की हेतुएँ प्रसिद्ध अछि ?
ठीक तकरे उत्तर दैत अछि ई पुस्तक 'कोइलख'। ई भद्रकाली कोकिलाक्षी देवीक तीर्थस्थलीक रूपें प्रसिद्ध गाम धिक। डॉ. भीमनाथजीक पाँती द्रष्टव्य थिक :--
"जय - जय भद्रकालि परमेश्वरि, जय कोइलख देवी।
विश्वम्मर उर पर जनिकर पद, तनिक चरण हम सेवी ।।"
एहिपर पुस्तकक गरिमा कैक गुणा एहि कारणे बढ़ि गेल अछि जे कोइलखक महत्ताकेँ रेखांकित करैत ज्योतिषाचार्य बलदेव मिश्र, आचार्य सुरेन्द्र झा सुमन आ मोहन भारद्वाज सन-सन दिग्गजक रचना परिशिष्ट रूपेँ शामिल भेल अछि। तहिना, कैक ठाम आ कैक संदर्भमे कवि पुंगव काशीकान्त मिश्र मधुपक काव्यमय टिप्पणी सभ सेहो समाहित भेल अछि। एहि पोथीमे एकहिठाम पाठक लोकनिकेँ कोइलखक इतिहास, भूगोल, अद्यतन जनसंख्या ( करीब 8500/2011) सहित 'पारिजात हरण केर कृतिकार म.म. उमापति उपाध्याय (16 में शताब्दी), मैथिली साहित्यक आद्य दू प्राध्यापक-पं. (प्रो.) खुद्दी झा एवं पं बबुआजी मिश्र (कलकत्ता वि.वि.केर प्रथम ओ द्वितीय वरेण्य शिक्षक), शास्त्रार्थ मार्तण्ड पं लुट्टी झा, रानी चन्द्रावती (बनैली राजक राजरानी आ मिथिलाक अत्साधारण समाजसेविका), श्रीकांत ठाकुर विद्यालंकार (मैथिली अकादमी. पटनाक पहिल अध्यक्ष तथा आर्यावर्त, प्रदीप, विश्वमित्र, आज, वाराणसी, दै. स्वतंत्र सन-सन अनेको पत्रक प्र. सम्पादक), पं. (महाकवि) काशीकांत मिश्र 'मधुप, पं. (प्रो.) जयदेव मिश्र, पं. हरिनाथ मिश्र (33 वर्ष धरि विधायकी, तखन सांसदो, प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी एवं बिहारक स्वास्थ्य मंत्री-1952-57 रहैत डी.एम.सी.एचकेँ व्यवस्थित चिकित्सा महाविद्यालय बनबौनिहार), डॉ. भवनाथ मिश्र (एम.आर.सी.पी. इंग्लैण्ड, एफ.आर. सी.पी.एफ.ए.आइ.एम.एस. लंदन-एतबा सुयोग्य पहिल मैथिल डाक्टर), योगानन्द झा (मैथिली अकादमी पटनाक निदेशक एवं भलमानुस सन कालजयी उपन्यास ओ उड़ैत वंशी कथा संकलनक रचनाकार), आइ.पी.एस. मिहिर कुमार झा. महान कथाकार घूमकेतु आ पद्मश्री डॉ. मोहन मिश्र प्रभृति मैथिल रत्न सभसँ भेँट-परिचय भए सकतनि। लेखकक प्रयास स्तुत्य अछि।।
(साभार : अरिपन ,झारखण्ड मिथिला मंच ,राँची , स्मारिका 2018)
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