विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

लेख-रेख

कल्पना झा · 2024-11-01 · अंक 405

१६.कल्पना झा-लेख-रेख
कल्पना झा
लेख-रेख
एम्हरे कोनो पत्रिकामे एकटा आलेख पढ़ने छलहुँ, जाहिमे चर्चा छलैक जे विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) स्वास्थ्य केँ एहि तरहेँ परिभाषित करैत अछि-सामाजिक स्वास्थ्य(आध्यात्मिक स्वास्थ्य)+मानसिक स्वास्थ्य+ शारीरिक स्वास्थ्य। आ एकटा स्वस्थ मनुष्यक सामाजिक, मानसिक आ शारीरिक स्वास्थ्य दुरुस्त राखबामे पढ़ब-लिखब बड्ड मददगार साबित होइत अछि।तँ हमरा लागैए जे आदरणीय हितनाथ सरकेँ फिटनेस हुनकर निरन्तर पढ़ैत-लिखैत रहबाक परिणाम छनि प्रायः। एकसंग 59 पोथीक समीक्षात्मक विश्लेषण संकलित क' पाठकक सोझाँ परसि देलनि अछि। एहि बातसँ अनुमान लगाओल जा सकैत अछि,जे ई कतेक पढ़ैत हेताह।एतेक लिखबालेल, कतेक पढ़ए पड़ल हेतनि, से अनुमान लगा लै जाउ। हम गप्प क' रहल छी आदरणीय हितनाथ सरकेँ नबका पोथी "लेख-रेख"क।बहुत नीक पोथी-प्रसंग सभ संकलित कएल गेल अछि।पोथी पढ़ितहि त्वरित प्रतिक्रिया स्वरूप हमरा मोनमे इएह आएल -"समीक्षा लिखब केओ हितनाथ सरसँ सीखए।" ओना समीक्षा सभ कनि संक्षिप्त अछि,से अखरल। कनि आरो विस्तार दैत लिखितथि,तँ पूर्णतया समीक्षात्मक पोथी होइतनि। पोथीक प्रारम्भमे स्व.ललितेश मिश्र जीक लिखल "साहित्य सर्जनक लेखा-जोखा"मे सेहो एहि बातक चर्चा देखबालेल भेटल। ललितेश सर कहैत छथि -"पुस्तक लेखक श्री हितनाथ बाबू विगत दु-तीन दशकमे प्रकाशित प्रायः अधिकांश प्रमुख साहित्यिक कृति सभहिक विश्लेषण-विवेचन एहि पुस्तकमे उपनिबद्ध कएलनि अछि आ यथार्थमे हुनक एहि उपस्थापनक रंग-ढंग यद्यपि आलोचनात्मक अछि, तथापि हमरा एहि पुस्तककेँ आलोचना-समालोचनाक ग्रन्थ बूझबा मे विप्रतिपति अछि। हम एहि पुस्तककेँ परिचयात्मक कहब आ से विषय विलक्षणताक सँग प्रतिबोधित अछि।" वास्तवमे पोथी "लेख-रेख" 59टा पोथीक परिचय अछि,जाहिमे 13 विधाक पोथी समाहित अछि आ 51 लेखक/कवि/सम्पादकक पोथीक चर्चा अछि। पोथी सभसँ परिचित करबैत,पोथीमे समाहित नीक-बेजाए तत्वकेँ उजागर करैत छथि लेखक। मुदा जतबे समीक्षात्मक विश्लेषण अछि,से बहुत नीक,स्पष्ट, बिना कोनो लाग-लपेटकेँ कएल गेल अछि।कारण लेखक कोनो तरहक गुटबाजी, गोधियाँगिरीक फेरमे नहि पड़ल छथि,जे फूसिओ ककरो रचनाक गुणगान वा खिधांस करताह। फेसबुक पर बहुत दिनसँ जुड़ल छी हमहूँ लेखकसँ,आ हिनकर साहित्यिक गतिविधि सभ देखैत रहैत छी।बहुत नीक आ सार्थक काजमे लागल छथि सर।
"लेख-रेख"सँ पहिने हिनकर एकटा बहुत महत्वपूर्ण काज "कोइलख" पोथीक रूपमे बेस चर्चित ओ प्रशंसित रहल अछि। एकर अतिरिक्त हिनकर संपादकत्वमे दूटा महत्वपूर्ण पोथी "मैथिली इतिहासक रेखांकन" आ "त्रिवेणी" सेहो प्रकाशित भ' चुकल अछि। कहबाक तात्पर्य जे साहित्यिक अवदान बेस ओजनगर छनि आदरणीय हितनाथ झा जीक।
साहित्यानुरागी तँ छथिए,संगहि तत्पर रहैत छथि मैथिली भाषाक संरक्षण ओ संवर्द्धन लेल कोनो तरहक गतिविधिक प्रचार-प्रसारमे। अपन लेखनीसँ लोककेँ लाभान्वित करैत,लोककेँ जागरूक सेहो करैत रहैत छथिन,अपन भाषा,अपन संस्कृतिसँ जुड़ल रहबालेल।इतिहासक कोनहुँ साहित्यिक कार्यसँ लोककेँ अवगत कराएब,जेना-कोइलखसँ हस्तलिखित मासिक पत्र बहराइत छल,तकरा फेसबुक पर साझा करब,प्रभात मासिक पत्रक कोनहुँ हस्तलिखित रचना पोस्ट करब। एकर अतिरिक्त अन्यान्य पुरान साहित्यकार लोकनिक कोनो अनमोल कृति पोस्ट क' पाठक पर बड़का उपकार करैत छथिन।एखनहि किछुए दिन पहिने आचार्य सुरेन्द्र झा "सुमन" जीक जयन्तीक अवसर पर हुनकर परिचयक संग हुनकर रचना-संसार आ सम्मान-पुरस्कार धरि सभटाक चर्चा करैत,हुनका स्मरण करब,नीक लागल छलए। कहबाक माने चाहे ओ पोथी प्रकाशनक माध्यमसँ हुअए कि फेसबुक पोस्टक माध्यमसँ,हितनाथ सरकेँ जीवनक उद्देश्य जेना मातृभाषा मैथिलीक संरक्षण,संवर्द्धन छनि, तेहन सन बुझना जाइए।
"समीक्षा लिखब केओ हितनाथ सरसँ सीखए"से बात मोनमे आएल एहि कारणेँ, जे 59 टा पोथीपर हिनकर विवेचना सभ पढ़ैत एहि बात पर गौर केलहुँ,लेखक पोथीक विषयमे बहुत किछु कहिओ दैत छथि,आ बहुत किछु अनकहल सेहो राखि लैत छथि।जे पाठकक मोनमे एकटा लालसा उत्पन्न करैत अछि,आ से प्रबल लालसा,किछु एहन सन जे तत्क्षण अमुक पोथी आनि ली आ आद्योपान्त पढ़ि जाइ। ई क्षमता एकटा समीक्षकमे होएब परम आवश्यक।"लेख-रेख" पोथी पढ़ैत अनायास हमरा अपन लिखल कोनहुँ पाठकीय-प्रतिक्रिया पर एक गोटेक टिप्पणी मोन पड़ि गेल। ओ महाशय लिखने छलाह-"अद्भुत। बहुत सुंदर समीक्षा लिखलहुँ। सच पूछी तँ ई समीक्षा पढलाक बाद आब ओ पोथी पढबाक आवश्यकते नहि बुझाइछ।"ओ महाशय हमर प्रशंसामे ई बात लिखने छलाह,मुदा हम एहि टिप्पणीसँ सीख लेलहुँ। असलमे समीक्षककेँ पोथीक विषयमे सभकिछु फड़िछाक' नहि लिखबाक चाही,से पहिने नहि बुझैत छलियै।तँ से जे "लेख-रेख" पोथीक प्रसंगमे कहैत रही,बेजोड़ शैली छनि लेखकक, पोथीसँ परिचित करएबाक। पोथीक विषयमे कतबा बात कहल जाए,कतबा नुकाएल जाए,तकर गुणा-भाग अद्भुत करैत छथि लेखक। सहज-सरल भाषाक प्रयोग सेहो प्रभावित करैत छै पाठककेँ। कामेन्द्रनाथ झा 'अमल' जीक कथासंग्रह "ग्रिभांस"क संदर्भमे,लेखकक कहल बात हुनकहि शब्दमे देखल जाए--"कथा जँ अपन हो,कथा जँ अपन घर परिवारक हो,कथा जँ अपन टोल पड़ोसक हो,कथा जँ गाम घरक हो,कथा जँ वर्तमान समस्या आ समाधानक हो,कथा जँ ककरो अहंकार पर चोटक हो,कथा जँ विनम्रतापूर्वक पराभवक निदानक हो,कथा जँ नारी सशक्तिकरणक हो,तँ निश्चिते ओ ककरो मानस पटल पर अपन छाप छोड़बाक लेल पर्याप्त होएत" विश्लेषण-विवेचन करबाक तरीका,क्षमता अद्भुत छनि लेखकक।
एकटा दोसर उदाहरण सेहो प्रस्तुत अछि। श्री नन्द कुमार मिश्र 'नन्द' जी रचित ललित निबन्ध "दिल्लीक पार्क"क चर्चा करैत लेखक कहैत छथि--"कहबाक अपन-अपन ढंग होइत छैक।कियो सोझो बातकेँ तेना क' ने ओझरा क' कहत, जे अहाँकेँ सोझो बात बुझबामे कठिन भ' सकैत अछि।कियो ओझराएलो बातकेँ ततेक सुंदर ढंगसँ सोझराएल अहाँक समक्ष राखि देत जे कठिन बात सेहो सहज लागत।"से ठीके,तहिना सोझराएल भाषामे अपन मन्तव्य राखल गेल अछि पोथी "लेख-रेख"मे।
ककर-ककर चर्चा करब, सभटा पोथी-प्रसंग विलक्षण लागत।
एहि पोथीक एकटा विशेषता इहो देखबामे आएल,जे एहिमे नब-पुरान सभ बएसक,सभ समयक लेखकक पोथीकेँ संलग्न कएल गेल छनि।तेरह विधाक पोथी संलग्न अछि,से तँ पहिनहि चर्चा कएलहुँ अछि। कहबाक माने पोथीक चयनक परिधि बृहद छलनि लेखकक। दोसर एकटा इहो विशेष बात अछि एहि पोथीक,जे जाहि लेखकक पोथीक पाठकीय समालोचना कएल गेल अछि,हुनकर संक्षिप्त व्यक्तित्व आ कृतित्वक चर्चा सेहो कएलनि अछि। जाहिसँ विशेष जनतबसँ युक्त पोथी बनि गेल ई।संगहि सभ पाठक वर्गलेल पठनीय,संग्रहणीय सेहो।
साहित्यिक जगतमे जतबा महत्वपूर्ण एकटा साहित्यकार होइत छथि,ओहिसँ कनिको कम महत्व समीक्षक/आलोचकक नहि।समीक्षकक अभावक चर्चा सुनबालेल भेटैत रहैए यत्र-तत्र। तेहनमे आसक एकटा किरण देखाइत अछि आदरणीय हितनाथ झा जीक रूपमे।हिनका सँ बहुत अपेक्षा छै मैथिली साहित्यकेँ।
(फेसबुकसँ साभार)
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Suggested citation: कल्पना झा. “लेख-रेख.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 405, 2024-11-01. https://www.videha.co.in/research/2024/405/लेख-रेख.htm

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