५.आशीष अनचिन्हार- स्थानवर्णना, नगरवर्णना, ग्रामवर्णना
आशीष अनचिन्हार-संपर्क-8876162759
स्थानवर्णना, नगरवर्णना, ग्रामवर्णना (मिथिलाक संदर्भमे)
दक्षिण भारतक संस्कृत साहित्यमे "स्थलपुराण" नामक विषय भेटैत छै जाहिमे कोनो तीर्थ अथवा मंदिर संबंधित जानकरी रहैत छै। संस्कृतक सभ धार्मिक ग्रंथ सभमे तीर्थ एवं नगरक वर्णन भेटिते छै से चाहे संक्षिप्त रूपमे हो वा कि विस्तार रूपमे। तेनाहिते आधुनिक कालमे देशी सरकार एवं विभिन्न संगठन द्वारा स्थानक विवरण सेहो वैज्ञानिक तरीकासँ एकत्र कएल जाइत छै। मैथिलीक विद्वान एवं लेखक डॉ. कैलाश कुमार मिश्र जी संगठन लेल मिथिलाक किछु गामक अध्य्यन केने छथि आ ओकर विवरण आधुनिक ओ वैज्ञानिक तरीकासँ रखने छथि।
एहि प्रकारक विवरण संस्कृते नहि हरेक भाषामे भेटैत छै कम वा कि बेसी। मैथिली साहित्य केर बात करी तऽ सभसँ पहिने ज्योतिरीश्वर कृत वर्णरत्नाकरक बात हएत जाहिमे ओ बहुत रास चीजक वर्णन केने छथि। एखन धरि जे वर्णरत्नाकर रूप हमरा सभहक सामनेमे अछि से ओकर खंडित पांडुलिपिक छै। तथापि ओकर प्रथमे कल्लोल (मने पहिल अध्याय) केर नाम छै "नगरवर्णना"। मने एहि कल्लोलमे नगरसँ संबंधित हरेक निर्जीव-सजीव चीजक चित्रण भेल छै जाहिमेसँ अंतिम भागक किछुए वर्णन भेटैत छै, शुरू आ बीचक भाग अनुपलब्ध छै। हमर अनुमान अछि जे अही खंडमे शायद ग्रामवर्णना सेहो रहल हेतै। ई मात्र हमर अनुमान अछि से अनुमान हम अइ लेल कऽ पाबि रहल छी जे जखन ज्योतिरीश्वर पूरा संसारक वर्णन कऽ देलखिन तखन ओ ग्राम वर्णन नहिए छोड़ने हेता। तथापि हम अपन अनुमान लेल वर्णरत्नाकरक बनावट ओ पैटर्न पाठकक सामने राखब। वर्णरत्नाकरक बनावट ओ पैटर्नक बात करी तँ हमरा समझसँ सभसँ पहिने डा. काञ्चीनाथ झा 'किरण' एकर वर्णरत्नाकरक बनावट ओ पैटर्नक बात करैत एहि पोथीकेँ गद्य नहि काव्यग्रंथ मानै छथि। आब हम अही बनावट ओ पैटर्नक बात करैत ई बात राखब जे वर्णरत्नाकरमे ग्राम वर्णना सेहो रहल हेतै। जँ वर्णरत्नाकरक बनावट ओ पैटर्न देखबै तऽ ई सामने अबैत अछि जे जाहि कल्लोलमे जकर वर्णन शुरू भेलै ताहिसँ संबंधित चीजक सेहो भेल छै। हम जे अनुमान कऽ रहल छी तकर आधार ग्रंथ 1998 मे सुनीति कुमार चर्टजी आ बबुआ मिश्र आ साहित्य अकादमी द्वारा पुनःप्रकाशित वर्णरत्नाकर अछि। एहिसँ इतर आनो संपादकक संपादनमे प्रकाशित भेल अछि आ से हमर अपन व्यक्तिगत पुस्तकालयमे सेहो अछि। मुदा दुख जे संगमे नहि अछि। तँइ हम जे अनुमान कऽ रहल छी से यदि हमर अग्रज सभ द्वारा कएल गेल हेतनि तऽ हमर एहि आलेखमे कएल गेल दाबी स्वतः ओहि अग्रज लेल सुरक्षित भऽ जेतनि (हम ई बात तखनो लीखि रहल छी जखन कि हमरा बूझल अछि जे कतिपय लेखक प्रकाशन वर्षकेँ पाछू वा आगू कऽ अपन-अपन व्यक्तिगत हित सधने छथि)।
एहि पोथीक दोसर कल्लोल छै नायिकावर्णना ताहिमे नायक, दुर्ग, सखी आदिक वर्णन छै माने नायिकासँ जुड़ल चीजक वर्णन। तेनाहिते हरेक कल्लोलक इएह बनावट छै। तेसर कल्लोल जखन प्रभात वर्णन शुरू होइत छै तकर संगे दुपहर, साँझ, राति, जाड़, गर्मी, वर्षा सभहक वर्णन एकै संग छै। बात अतबे नहि छै, वर्णरत्नाकरक बनावट ओ पैटर्न बहुत महीन छै जेना पाँचम कल्लोकमे वन, उपवन, सरोवर, पोखरि सहित पर्वतक वर्णन सेहो छै मुदा ताहि संगे सातम कल्लोलमे पर्वतवर्णना सेहो छै। मुदा पाँचम आ सातम कल्लोलक पर्वतवर्णना दूनूमे बहुत अंतर छै। वन संगे जे पर्वत छै ताहिमे पर्वतमे वन, गाछ आ ताहिसँ संबंधित वर्णन छै तँ सातममे तीर्ध, नदी संगे पर्वतक नाम सहित वर्णन छै एकर मतलब ई जे वर्णरत्नाकर बनावट ओ पैटर्ने नहि छै बल्कि सुनियोजित आ तार्किक पैटर्न छै। आ हम अपन अही एकमात्र तर्कक आधारपर ई कहि रहल छी जे "वर्णरत्नाकरक पहिल कल्लोल नगरवर्णनामे 'ग्रामवर्णना' रहल हेतै।
वर्णरत्नाकरक बाद विद्यापति कृत भूपरिक्रमण केर चर्चा उपयुक्त रहत। ई अछि संस्कृत पोथी मुदा दू कारणसँ हम एकरा महत्वपूर्ण मानै छी पहिल जे एहिमे जनकदेश अर्थात मिथिलाक स्थानक वर्णन सेहो अछि दोसर जे जनकदेशक वर्णन करैत काल गामक नाम सेहो लेल गेल। भने ओ आजुक ग्रामगाथा नै अछि मुदा ग्रामगाथा विधा जँ अपन उत्स वर्णरत्नाकर आ भूपरिक्रमण ग्रंथ सभमे ताकए तँ दिक्कते की छै? ई भूपरिक्रमण कोन विद्यापति केर छनि, सरस गीत बला कि धर्मग्रंथ बला से विवाद शोधकर्ता मध्य हेतनि। डा. काञ्चीनाथ झा किरण एवं गजेन्द्र ठाकुर अलग-अलग विद्यापतिक उपस्थिति मानै छथि। बहुत रास विद्वान गीत बला आ धर्मग्रंथ बला दूनूकेँ एकै मानै छथि। हम ओहि विवादसँ बचि मात्र भूपरिक्रमणपर अपन बात रखने छी। भूपरिक्रमणक बादक संस्कृत ग्रंथ सभमे सेहो तीर्थक उल्लेख स्थान वर्णनक रूपमे अछि। महाकाव्य सभमे सेहो ई स्थान वर्णन पद्य रूपमे आएल अछि। कुल मिला कऽ ग्रामगाथा नामक विधा स्थान वर्णनक एक भाग थिक।
अही क्रममे ईहो सूचित करी जे भवनाथ झा जीक एक लेख "मिथिलाक पञ्जी आ ओकर संरक्षणक दिशामे श्री गजेन्द्र ठाकुर" हिसाबें पञ्जी आन सूचनाक संगे तात्कालीन गामक विवरण अछि। ई आलेख हमरे द्वारा संपादित पोथी 'प्रीति कारण सेतु बान्हल' मे संकलित अछि, जे कि मिथिला ओ मैथिलीक संवर्धनमे गजेन्द्र ठाकुर एवं प्रीति ठाकुरक योगदानक आलोचनात्मक ग्रंथ अछि।
अंग्रेज एलाक बाद, अंग्रेज अधिकारी सभ द्वारा ठाम-ठामक जे गजेटियर लिखल गेलै से बहुत रास सूचनाक संगे लिखल गेलै। संस्कृत आ मैथिलीक स्थल पुराणमे मात्र तीर्थे कि वन-उपवन-सरोवरक वर्णन भेटत जखन कि गजेटियरमे ओहि ठामक उद्योगसँ लऽ कऽ भौगोलिक बनावट, सामाजिक सांख्यिकी, भौतिक विशेषता, लोकक प्रवृति आदि सभ भेटत। स्वाभाविक रूपसँ एहि गजेटियरक भाषा अंग्रेजी अछि आ बेसी उपयोगी अछि। ओना खंड-खंड रूपमे पाठक उपलब्ध जिला वा स्थानक गजेटियर पढ़ि सकैत छथि तथापि हम बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित आ विभिन्न संपादक द्वारा संपादित Bihar district gazetteers सभकेँ पढ़बाक सुझाव देबनि।
मैथिलीक आधुनिक कालमे गद्यक प्रचलन बढ़ल आ हमरा जनैत लेख रूपमे निश्चिते गामक विवरण पुरान पत्रिका सभमे प्रकाशित भेल हेतै। एहि ठाम हम अपनाकेँ अक्षम मानै छी जे ओ पुरान पत्रिका सभ हमरा नजरिक सामने अथवा एहन कोनो बेसी रेफरेंस नहि अछि। तथापि चन्दा झाक ग्राम व्युत्पत्ति विचार, महामहोपाध्याय पंडितपरमेश्वर झाक "मिथिला तत्व विमर्श"मे सेहो मिथिलाक किछु गाम, तीर्थक चर्च छै। प्रो.रमानाथ झाक सरिसव महिमा, नामक निबंध सेहो उपलब्ध छै। मैथिलीमे जेहन आ जतेक लेखन पुरनो समयमे भेल छै ताहि हिसाबें निश्चते गामक ऊपर आरो बेसी लिखल गेल हेतै। शोधकर्ता सभसँ आग्रह जे एहि बिंदुपर आर बेसी इजोत देथि। हमरा जहाँ धरि मोन पड़ि रहल अछि भारती-मंडन नामक पत्रिकाक अंक-4 मे भीमनाथ झा द्वारा मधुबनी जिलाक साहित्यकारक परिचय देल गेल रहै (बर्ख मोन नहि पड़ि रहल मुदा 1999 सँ पहिने केर अंक छै ई)। एक तरहें ईहो स्थानगाथा केर नमूना अछि।
पोथी आ निबंध दूनू मिला कऽ यदि देखी तऽ हिंदीमे डा. श्रीकान्त झा लिखित चैनपुर गामक इतिहास (2003), प्रकाशित भेल, संगहि 2007 ई.मे विनयानंद झा द्वारा लिखल हिंदीमे मंगरौनी गामक इतिहास सेहो आएल। मैथिलीमे जगदीश मिश्रक 'नवटोलक उत्पत्ति कथा' (2007) प्रकाशित भेल। डा. किशोरनाथ झा क विट्ठो गामक परिचय पोथी रूप मे 2008 ई. मे प्रकाशित भेल। 2010 मे गजेन्द्र ठाकुर अपन उपन्यास 'स॒हस्र॑ शीर्षा॒' मे अपन गाम मेंहथ केर नाम बौद्ध सिद्ध मेहथपासँ जोड़लथि आ बादमे 31 मइ 2014 केँ जखन गजेन्द्र ठाकुर अपन गाम मेहथमे 'सगर राति दीप जरए' केर आयोजन केने रहथि तखन ओकर नाम 'कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा' रखने रहथि। 2015 ई.मे पंडित गोविन्द झाक सात रेखा सात रंग इसहपुर गाथा,रामचन्द्र मिश्र मधुकरक ग्राम गाथा नरूआर,अर्जुन झा निरालाक चिकना गामक इतिहास, केदार काननक सुपौलाख्यान,प्रो.ललितेश मिश्रक हमर गाम (वनगाम) आदि प्रकाशित हेबाक सूचना अछि। हितनाथ झा द्वारा लिखल "कोइलख" (2017), गिरीश चंद्रक लिखल 'शिवनगर ग्रामगाथा' (2017), आ भैरवेश्वर झाक 'लालगंजक इतिहास' (2017) सेहो प्रकाशित भेल अछि। 2018 मे चन्द्रेशक माउँबेहटक गाथा, डा.यदुवंश मिश्रक गजहरा ग्राम, 2019 मे डा.बीरेन्द्र झा रचित दुल्लीपट्टीक इतिहास ग्रंथ, 2019 मे फेसबुकपर मिथिलेश कुमार झा द्वारा "बेनीपट्टी परिसरमे लेखन" नामसँ बहुत रास खंडमे जानकारी देल गेल अछि जे कि स्थानगाथाक नीक नमूना अछि। विदेह 368 म अंक 15 अप्रैल 2023 मे उदयनाथ झा 'अशोक' जीक आलेख 'गामक नामकरण: एक परिशीलन' प्रकाशित भेल अछि जे ग्रामगाथाक शोधकर्ता सभ लेल एकटा नीक स्रोत अछि। बर्ख 2023 मे मणिकांत झा द्वारा संपादित आ विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा द्वारा प्रकाशित 'मिथिलाक गाम' सेहो एक नीक पुस्तक अछि जाहिमे लगभग 80-85 टा गामक विवरण लेख रूपमे अछि (ओही बर्खक विद्यापति पर्व समारोहमे लोकार्पित)। अही क्रममे गजेन्द्र ठाकुर एवं प्रीति ठाकुरक योगदानकेँ रेखांकित करैत हमरे द्वारा संपादित आ फरवरी 2024 मे प्रकाशित पोथी 'प्रीति कारण सेतु बान्हल' मे सियाराम झा 'सरस' द्वारा लिखल मेंहथ गामक विवरण आएल अछि जाहिमे संपूर्णाताक संग मेंहथ गामक विवरण पाठक लेल देल गेल छै। अगस्त 2024 हि मे विदेश्वर नाथ झा 'विकास' (फेसबुकपर BJ Bikash) द्वारा "बेनीपट्टी 0 KM" नामक पोथी आएल अछि। विदेश्वर बेनीपट्टीमे रहि कऽ पत्रकारिता कऽ रहलाह (इंजीनियरक छात्र रहलाक बादो) तँइ ई पोथी किछु बेसिए तथ्यात्मक हएत से हमरा उम्मेद अछि। अक्टूबर 2024 मे डा. उषा चौधरी द्वारा लिखल 'हमर गामक माटि (पंचोभ ग्राम गाथा) आदि प्रकाशित भेल। 14 नवम्बर 2024 केँ विद्यापति पर्व समारोहमे एक बेर फेर मणिकांत झा द्वारा संपादित आ विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा द्वारा प्रकाशित 'मिथिलाक गाम खंड-2’ लोकार्पित भेल अछि (ई सूचना विशेषांक प्रकाशित भेलाक बादक अछि जकरा 14 नवम्बरकेँ लेखमे संशोधित कएल गेल)।
ओना तऽ मैथिलीक हरेक विधामे एकै समान बेमारी सभ पसरल छै तखन ग्रामगाथा विधा किए छूटल रहत। मैथिली आत्मकथा एवं ग्रामगाथा दूनू विधामे एक समान बेमारी अछि से सभ किछु नीके कहब। आत्मकथामे लेखक मात्र अपन संघर्षे लिखता चाहे ओ उधारीक संघर्ष किए ने हो आ अपन नीचता नुका लेता से नीचता चाहे जगजाहिर किए ने हो। तहिना ग्रामगाथामे सभ अपन गामक नीके लीखै छथि भने ओहि गाममे हजार खरापी किएक ने हो। ई संकेत विधाक हिसाबें उचित नहि। एहि पक्षकेँ देखैत 'प्रीति कारण सेतु बान्हल' मे सियाराम झा 'सरस' द्वारा लिखल मेंहथ गामक विवरण एकटा नीक लेख अछि जाहिमे गामक अधलाहो पक्षकेँ संतुलित रूपे पाठक लग देल गेल छै।
एहिसँ इतर हम एकटा आरो बात मानबाक पक्षधर छी, जेना अंग्रेजक लिखल गजेटियर सभमे उद्योग-धंधाक आदिक विवरण छै तेनाहिते ओहन पोथी जाहिमे आर्थिक वा स्थान विशेषक कोनो प्रवृतिक वर्णन हो तकरा हम स्थान गाथा वा ग्राम गाथा विधा मानबाक पक्षधर छी आ एहि हिसाबें हम राम दयाल राकेश (नेपाल) केर अंग्रेजीमे मिथिलाक ऊपर लिखल, शैलेन्द्र कुमार झा द्वारा अंग्रजीमे आर्थिक लेखन, नरेन्द्र झा द्वारा लिखल मैथिलीमे मिथिलाक स्थान विशेषक आर्थिक पक्ष, शिव कुमार मिश्र द्वारा मिथिलाक विभिन्न गामक शिक्षा पद्धति, आ हालहिमे अवनीन्द्र कुमार झाक लिखल अंग्रेजी पोथीकेँ सेहो ग्राम गाथा मानैत छी। एहि ठाम हम पोथीक नाम नहि लीखल। पाठक हमर फेसबुकपर जा कऽ उक्त अंग्रेजी पोथीक विवरण देखि सकै छथि। किछु पोथी विदेहपर सेहो सार्वजनिक छै।
एकर कारण ई जे मैथिलीमे लिखल, हिंदीमे लिखल वा कि अंग्रेजीमे लिखल कोनो स्थान गाथा, ग्राम गाथा संपूर्ण नहि अछि। संपूर्ण नहि हेबाक मतलब ई जे कोनो पोथीमे गामक परिचय मात्र अछि तऽ किछुमे ओहि गामक किछु प्रतापी लोकक चर्च तऽ किछुमे गामक किंदवंती सभहक संकलन अछि। तहिना अंग्रेजीमे लिखल पोथी सभमे तथ्य सभ अछि मुदा ओहि स्थान-गामक विषयमे जे सरस बात छै से गाएब भेटत। तँइ मैथिलीक पाठक लेल ग्रामगाथा नामधारी पोथीसँ लऽ स्थानक आर्थिक-समाजिक सभ विषय बला पोथी पढ़ए पड़तनि तखने हुनका लग एक स्थान वा कि एक गामक विषयमे संपूर्ण जानकारी आबि सकतनि। खेदक विषय ई जे ग्रामगाथा कि स्थानगाथा मुख्यतः इतिहास-भूगोल, अर्थ-समाजशास्त्रसँ जुड़ल विषय अछि आ मैथिलीमे एहि विषयपर अधिकांशतः साहित्यकार सभ कलम चलबै छथि, तथापि किछु ने किछु नीक तथ्य आ संकलन आबिए जाइत छै। अतबे संतोषक बात अछि।
हम जनैत छी जे एहि आलेखमे आएल सूचना संपूर्ण नहि अछि, बहुत रास निबंध ओ पोथीक नाम छूटल हेतै। पाठक ओ विद्वान सभसँ आग्रह जे छूटल सूचना दऽ एहि आलेखकेँ संपूर्ण बनेबाक दिशामे आगू आबथि।
ओना कहबाक तऽ नै चाही मुदा प्रसंगवश कही जे जनवरी 2015 मे फेसबुकपर हम सूचना देने रही जे हम अपन आत्मकथा "हम अनचिन्हार कोना भेलहुँ" केर नामसँ लीखब। तकरा हम अपन पोस्ट रूपमे कहियो काल दैत रहलहुँ। हम अपन एहि आत्मकथामे अपन गामक ऊपर सेहो लिखबाक प्रयास कऽ रहल छी, समाजक ऊपर सेहो। बादमे हम अपना ऊपर लीखब। जते नीक वा कि अधलाह छै से हम दऽ रहल छी, आ से फेसबुकपर सार्वजनिक भेल छै, चोरा-नुका कऽ नहि। मुदा एखन एकरा मात्र सूचना मानल जाए। ई आधिकारिक तखन बनत जखन हम ओकरा लेख रूपमे वा पोथी रूपमे आनब। फेसबुकपर देल गेल पोस्ट सभ पाठक लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकै छथि-
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