२८.आशीष अनचिन्हार-हम हितनाथ झाकेँ कोना चिन्हलियनि
आशीष अनचिन्हार-संपर्क-8876162759
हम हितनाथ झाकेँ कोना चिन्हलियनि
ओना तऽ हमर आदति अछि जे हम अपन लेख सभमे लिंक लगा दैत छियै मुदा एहि संस्मरणमे हम लिंक नहि लगाएब कारण जे बात हम कहि रहल छी से बात प्रायः सभकेँ बूझल हेतनि, आ जिनका नहियो बूझल हेतनि से कहबाक ढंगसँ बूझि जेता।
बर्ख 2016 मे एकटा नव कवि (मुदा उमिरगर) अपन एक पोस्ट केलाह कविता रूपमे, हम ओहिपर कमेंट कएल जे ई आमिर खान केर फिल्म पी.के केर डायलाग अछि। हम जाहि कविक चर्च कऽ रहल छी ओ हमर विरोधमे आजाद गजल सभ सेहो लिखने छथि ई मानि कऽ जे बहरयुक्त गजल गजलक विरोध माने आशीष अनचिन्हारक विरोध छै। से बेस घमर्थन भेलै आ जेना मुख्यधाराक बाल-वृद्ध सभ अनचिन्हार, विदेहक विरोधमे केकरो समर्थन दऽ दैत छथिन ओहू ठाम सएह भेलै।
बर्ख 2018 मे ओही कविकेँ चेतना समिति, पटना द्वारा 'कीर्ति नारायण मिश्र सम्मान' भेटलनि। तँ हम अपन फेसबुकपर साधारण पाठककेँ संबोधित करैत एक पोस्ट लिखलहुँ जाहिमे हमर कथन छल जे जाहि कविकेँ उक्त पुरस्कार भेटलनि अछि तिनक एक कविता फिल्मी डायलागकेँ नमरा कऽ बनल अछि, पाठक जखन ओहि कविक कविता पढ़थि तऽ जाँचि लेथि जे कहीं ओ चोरीक विचार तऽ नहि पढ़ि रहल छथि।
आब एहि पोस्टक बाद जे हंगामा हेबाक रहै से भेलै। उक्त कवि अपन फेसबुकपर हमर विरोधमे सेहो पोस्ट लगेलाह, आ जेना मुख्यधाराक बाल-वृद्ध लेखक सभ अनचिन्हार-विदेहक विरोधमे अबैत छलाह तहिना एलाह। आ अही पोस्टमे एकटा कमेंट हमरा अभरल जे हितनाथ झा केर छलनि, ओ कमेंट एना अछि-
"ओह ! की बाजू ? कोना कहब इग्नोर करू । नीके कयलहुँ जवाब दय । अहाँकेँ जे पढ़ने अछि , पढ़ैत अछि , अहाँक प्रतिभा जनैत अछि । चोरिक आरोप fb पर किछु लिखबाक स्वतंत्रताक दुरुपयोग अछि । कचड़ाकेँ लोग dustbin मे फेकि दैत छैक , से dustbin मे जा चुकल अछि , बहुतो साहित्यकार द्वारा । कल्हियो अहाँक चर्चा राँचीमे केने रही मौलिक चिंतन आ नीक कविताक प्रसङ्ग । शुभ हो ।"
एहि कमेंटसँ हम हितनाथ झाजीक नाम पहिल बेर देखलहुँ-सुनलहुँ। ओना जँ हितनाथजीक उपरोक्त कमेंट पढ़ल जाए तँ साफ बुझना जाइत छै जे ओ हमर विचार, हमर काज आदि सभ जानै छथि आन माध्यमसँ। ईहो ओ जानै छथि जे आशीष अनचिन्हार लेल दोसर लेखक सभ की सोचै छथि। एहि कमेंटसँ एकटा महत्वपूर्ण बात ईहो बात पता चलि रहल अछि जे आशीष अनचिन्हारक काज लेल मैथिलीसँ जतेक भेटबाक चाही तकरा सायास, खडयंत्रपूर्वक रोकल गेल छै, कथित रूपें डस्टबीनमे फेकल गेल छै आ के-के रोकने छै, के-के कथित रूपसँ डस्टबीनमे फेकने छै तकरो खबरि हितनाथ जीकेँ छनि।
मुदा हितनाथ जीक ई कमेंट पढ़ि हमरा हँसी लागल। हँसी एहि दुआरे जे जखन हितनाथजीकेँ हमरा बारेमे एतेक बूझल छनि तँ एकटा बात ओ किए बिसरि रहल छथिन जे हम बेर-बेर लिखित आ मौखिक दूनू माध्यमसँ कहैत रहलियै जे हमर साहित्यक मूल्यांकन हमर मरलाक बाद 50-60 साल बाद हेतै। ई बात हम एखन नै, बहुत पहिनेसँ कहैत आबि रहल छियै जे फेसबुकपर लिखित तौरपर भेटत। लिखित छोड़ू हमर विचार, हमर काजे ई गवाही देत जे कमसँ कम हम अपन कोनो काज कोनो तात्कालिक प्राप्ति लेल नहि करैत छी। भऽ सकैए जे हमरा बारेमे जे सभ हितनाथजीकेँ सूचना दैत हेतैन से ई बात नुका लेने हेतैन।
एकै बात, एकै घटना दस मँहे सुनलासँ दस रंगक भऽ जाइत छै, बहुत संभव जे हमरा बारेमे हितनाथजीकेँ जे सूचना भेटैत होनि ताहिमे दस मूँहक प्रभाव हो। बादमे हम आ हितनाथजी फेसबुकपर लिस्टमे एलहुँ तकर बाद ओ सीधा-सीधी हमर विचार, हमर काज देखए लगलाह आ हमहूँ देखए लगलियनि। एक समय एहनो एलैए जे ओ विदेह विशेषांक लेल लगातार लिखैत रहलाह आ आब ईहो समय छै जे अहाँ सभ विदेहक हितनाथ झा अंक पढ़ि रहल छी। हम ईहो दोहरा दी जे हमरा लेल वा विदेह लेल कोनो विचारधारा मायने नहि रखैत अछि। जँ हमरा सभहक विरोधियो विचारधारा बला लोक नीक काज कऽ रहल छथि तँ हुनकर प्रोत्साहन लेल हमरा सभ अपन व्यक्तिगत ईगो वा फुसियाही अहंकार त्यागि दैत छी। सच मानू जँ हितनाथजी कोनो मुख्यधाराक लेखक लेल एहन बात लिखने रहितथिन तँ ओ लेखक पूरा जीवन लेल हिनका संगे दुश्मनी पोसि लेने रहितनि, मुदा...
बेसी हमरा किछु नहि कहबाक अछि। हम तऽ बस ई सोचि रहल छी जे ओहि समयमे हितनाथजीकेँ जे-जे अनचिन्हारक विषयमे जते जे कहने हेथिन से सभ आइ विदेहक ई अंक पढ़ि की सभ सोचता से वएह सभ जानथि, मुदा हम फेर दोहरा दी जे हम अपन कोनो काज कोनो तात्कालिक प्राप्ति लेल नहि करैत छी। तँइ जे सभ गलत करबाक मोन बनेने छथि से सभ सचेत भऽ जाथि, हुनकर गलती बकसल नहि जेतनि।
तऽ कुल मिला कऽ हितनाथ झाजीकेँ हम एना चिन्हलियनि आ से दूनू गोटेक बीच इएह इंटरनेटे माध्यम अछि। भेंट-घाँट केर हम अभ्यासी नहि छी से हमर कमजोरी अछि। कामना अतबे जे अतबे चीन्हा-परिचयमे हमरा लोकनि मैथिलीकेँ किछु नव आ सार्थक दऽ सकियै।
दू टा विषयांतर-
1) हम या कि विदेह कोनो साहित्यिक चोरकेँ नै नुकाबै छी। मोन हेबे करत जे विदेशी कविताक नकल कऽ मैथिलीमे अपन कविता कहऽ बला अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक चोर पंकज पराशरक खुलासा सेहो विदेहे केने छल। अइ खुलासाक बादो पराशरक ई कृत्य चलल आ मिथिलाक नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्रक शोध ग्रंथ सभसँ तथ्य सभ बिना क्रेडिट देने पराशरक उपन्यास लिखाएल 'जलप्रांतर' नामसँ। गजेन्द्र ठाकुर अपन नवीनतम पोथी 'नित नवल दिनेश मिश्र' मे एहि बातकेँ प्रमाण सहित दऽ रहल छथिन, पाठक एकरा विदेहपर पढ़ि सकैए छथि। पाठककेँ जानि कऽ आश्चर्य हेतनि जे पंकज पराशरकेँ साहित्य अकादमीमे मैथिली दिससँ सदस्य बनाएल गेल छलै किछु बर्ख पहिने। मैथिली साहित्य केर मुख्यधारा ने साहित्य केर हित चाहै छै आ ने मैथिलीक।
2) एखने किछु दिन पहिने हिंदीमे एकटा गैस-बोखार आदि बेमारी बला कविता भाइरल भेल छल, मैथिलीक किछु अजीर्ण बुद्धि बला बूढ़ कवि सभ लहालोट भेल छलाह मुदा बादमे पता चललै जे ओहो कविता एकटा फिल्मक डायलागकेँ नमरा कऽ लिखल गेल छै। हरेक भाषामे ई बेमारी छै आ जखन एहन चोरी पकड़ाइत छै तखन समर्थक खास कऽ बूढ़ सभ मैदानमे आबि जाइत छथि से साहित्य लेल घातक।