विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

हितनाथ झाक जीवन ओ साहित्य

नारायण झा · 2024-11-01 · अंक 405

२५.नारायण झा-हितनाथ झाक जीवन ओ साहित्य
नारायण झा-संपर्क-8051417051)
हितनाथ झाक जीवन ओ साहित्य
विशिष्ट कोटिक साहित्यानुरागी, मैथिली साहित्यक पैघ अध्ययनकर्त्ता, मैथिली साहित्यक ऐतिहासिक दृष्टिएँ सचेष्ट विचारक, बैंकिंग क्षेत्रमे वरीय प्रबंधक पदसँ सेवानिवृत्त कुशल ओ दृष्टिसम्पन्न सर्जक व्यक्तित्व छथि-- हितनाथ झा। हिनक पिताक नाम पं. तारानाथ झा, माताक नाम भागीरथी देवी छनि। हिनक जन्म तिथि 06 जून 1956 ई. छनि। हिनक पिता पं. तारानाथ झा कोइलखसँ प्रकाशित प्रभात मासिक पत्रिकाक सम्पादक रहथि, तेँ कहल जा सकैत अछि जे साहित्यिक आ पत्रकारिताक वातावरण कौलिके छनि। विद्वान पिताक सन्तान, साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित विद्वान परम्पराक कुशल प्राध्यापक डा. भीमनाथ झाक अनुज छथि । हिनका सम्बन्धमे जखन विचारए लगैत छी तँ हिनक गुण एक-पर-एक मोन पड़ैत रहैए, से रोमांचित करैत अछि। जतबए हिनका आदिकालक साहित्य आ साहित्यकारक सम्बन्ध ज्ञान छनि, ओतबए मध्यकाल आ ओतबए आधुनिकसँ लए उत्तर आधुनिक काल धरिक साहित्य आ साहित्यकारक सम्बन्धमे ज्ञान छनि। कतेको बेर हम अपन शोध-कार्यक अवधिमे अपन जिज्ञासा हिनका लग रखैत रहलहुँ आ पहिनोसँ हमरा हिनक सम्बल भेटैत रहल अछि। एक-एक विषयपर भ्रम निवारण पलहि भए जाइत अछि। ततबए हिनक व्यक्तित्वमे पैघ-छोटक प्रति आदर-प्रेमक भाव छनि, से चकित करै वला छनि। सभक लेल आदरणीय छथि, सम्मानीय छथि, सभक उपकारी छथि। हिनकासँ मैथिली साहित्यक कोनो समयक, कोनो पोथीक सम्बन्धमे जानकारी पुछू, झट दए प्रतिउत्तर देबामे सक्षम छथि। हम हिनका 'मैथिली साहित्यक गूगल' कहि सम्मान देलियनि अछि। पढ़ाइ-लिखाइक पश्चात डिविजनल इनजिनीयर्स टेलीग्राफ, धनबादक कार्यालयमे जनवरी 1980सँ मई 1982 ई. धरि रहलथि। ओकर बाद इलाहाबाद बैंकमे जून 1982 ई.सँ जून 2016 ई.धरि रहलथि ताहि चाकरीक क्रममे उत्तरप्रदेश ,पश्चिम बंगाल सहित झारखण्डक अनेको जगहपर जा कार्य कएलथि, ताहिमे सभसँ बेसी समय सेवाक अवधि हजारीबागमे रहलनि। इलाहाबाद बैंकक हजारीबाग शाखाक वरीय प्रबन्धकक पदसँ जुलाइ 2016 ई. मे सेवानिवृत्त भए गेलथि। पहिल रचना 1965 ई.मे " हे माँ भारतकेँ बचाउ" भारत पाकिस्तानक युद्धक स्थितिक समय लिखलनि जखन पाँचमे कक्षामे पढ़ैत रहथि। सार्वजनिक रूपसँ सेहो एही रचनाक पाठ उमापति पुस्तकालय कोइलखमे कएने रहथि, जाहि गोष्ठीक अध्यक्ष रहथि श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'आ मुख्य अतिथि रहथि काशी कान्त मिश्र 'मधुप'। हिनक साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधि सेहो सराहनीय छनि। हजारीबागक मैथिली साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधिमे सक्रिय छथि संगहि 'नवचेतन समिति' हजारीबागमे 1984 सँ संयोजक, महासचिव आदि विभिन्न पदपर बनल छथि। तकर बाद कतेको ऑनलाइन-ऑफलाइन मंचक माध्यमेँ साहित्यिक क्रियाकलापक प्रस्तुति कए चुकल छथि आ नीक जकाँ सक्रिय छथि। रचनाकार हितनाथ झाक पहिल रचना 'मिथिला मिहिर'क(1970) नेना भुटका चौपाड़िमे बाल साहित्य प्रकाशित भेल छलनि। निरन्तर स्मारिका, पत्र-पत्रिकामे जेना--मिथिला मिहिर, जानकी, मिथिला टाइम्स, बागमती -दामोदर टाइम्स पत्रिका सभमे प्रकाशित भेल छनि आ आकाशवाणी हजारीबागसँ कविता, कथा, वार्ता प्रसारित भेल छनि। एखनहुँ घर-बाहर, देसिल बयना, तीरभुक्ति, मिथिलांकुर, मिथिला दर्शन, अनुप्रास, अरुणिमा, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश, लहरि, भारती-मण्डन आदि अर्पण, झारखण्ड मैथिली मंच, झारखंड मिथिला मंच, आदि संस्था सभक स्मारिकामे रचना, पोथी समीक्षा प्रकाशित होइत रहैत छनि। बरोबरि साहित्य अकादेमीक सेमिनार सभमे सहभागिता देने छथि आ दइयो रहल छथि।
हिनक पोथीक रूपमे कृति सभ प्रकाशित छनि, जे एहि प्रकारेँ अछि-- सम्पादित कृति-
1. 'मैथिली इतिहासक रेखांकन'(2003)-- विविध साहित्यिक विधागत एगारह गोट आलेख लेखक-समीक्षक केर आलेख-समीक्षा एहि पोथीमे संकलित-सम्पादित कएने छथि। जाहि विषय सभपर आलेख संग्रहित अछि ओ लेखक-प्राध्यापक, अध्येता-शोधार्थी सभक लेल उपयोगी अछि। एहि पोथीक प्रकाशन नवचेतन समिति हजारीबाग, झारखण्डसँ भेल अछि। एहि पोथीक संग सम्पादनमे नाम छनि चन्देश्वर कर्ण जीक। एहि पातर सन पोथीक एक विशेषते कहल जाए जे एहिमे आयल आलेख मात्र गीत विधा छोड़ि प्रायः सभ विधापर संकलित अछि, सेहो महत्त्वपूर्ण लेखक लोकनिक। एहि पोथीक विषय-सूची हम सेहो परसि रहल छी-- मैथिली साहित्यक भूमिका- प्रो० जयदेव मिश्र, मैथिली गद्यक विकास - प्रो० आनन्द मिश्र, मैथिली काव्यक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि -प्रो० रत्नेश्वर मिश्र, मैथिली पत्रिका : तीसवर्ष तीस बिन्दु - प्रो. भीमनाथ झा, एकैसम शताब्दीमे प्रवेश करैत मैथिली कथा -डॉ. विभूति आनन्द, मैथिली नाटकक स्वरूप आ स्थिति -डॉ. अरविन्द कुमार सिंह झा, मैथिली उपन्यासक विकासक्रम - डॉ. अशोक कुमार मेहता , मैथिली बाल साहित्य : एक अवलोकन - डॉ. दमन कुमार झा, मैथिली लोक साहित्य- प्रेमचन्द्र पंकज, मैथिली लोक कला- ज्योत्स्ना चन्द्रम , झारखण्ड मे मैथिली : ठौरतकैत मैथिलीजन अबुअ दिशुमम - पंचानन मिश्र।
2. 'कोइलख' (ग्रामगाथा-2017)-- 'कोइलख' पोथी ग्रामगाथाक अन्तर्गत उत्तम पोथी अछि। ओना हम एहि पोथीकेँ ग्राम्य-इतिहास सेहो कहि सकैत छी। एहि पोथीकेँ चारि भागमे बाँटिकए पढ़लासँ सभ बात फरिच्छ भए जाएत जेना-- कोइलखक पूर्व ख्यातिप्राप्त सन्तति, वर्तमानक ख्यातिप्राप्त सन्तति, कोइलखमे कार्यरत संस्था आ संगठन तथा परिशिष्ट। परिशिष्टमे छौ विद्वानक उत्तम आलेख संकलित अछि, जे एहि पोथीक वैशिष्ट्ये कहल जेतै। सभ तथ्य आ तत्व कोइलखसँ सम्बद्ध अछि, पढ़िकए खूब नीक लागत। पोथीक सभ पक्षमे कोइलखक महत्त्वक नीक जकाँ यथार्थ रूपमे विश्लेषित कएल गेल अछि, कतहुसँ अतिशयोक्ति नहि बुझाएत। 'कोइलख' पोथीक लेखक हितनाथ झाक सम्बन्धमे डा. कैलाश कुमार मिश्र 'मिथिला दर्शन' पत्रिकामे लिखैत ( मिथिला दर्शन- पृष्ठ सं. 27) छथि--"हितनाथ झाक बैंक अधिकारी होयब सेहो एहि पोथी लेल नीक साबित भेल। कोना ? से एना जे ई प्रत्येक व्यक्तिसँ संबंधित सूचनाकेँ बहुत संक्षेपमे, तथ्यपरक आ ईमानदारीसँ वर्णन कयने छथि।पाठककेँ एको शब्द बेसी अथवा विषयक सीमासँ बाहर नहि लगैत छैक।" दू सए दस पृष्ठक एहि पोथीक प्रकाशन प्रियदर्शी प्रकाशन, पटनासँ भेल अछि। कोइलखक धरती अदौकालसँ वर्त्तमान समय धरि, सभ क्षेत्रमे अपन सन्ततिक कार्य-योगदानसँ जागृत अवस्थामे रहल अछि। कोनो क्षेत्रक बात हो, सभ क्षेत्रमे अतुलनीय योगदान देखाइत अछि। प्रशासनिक क्षेत्र, रक्षा क्षेत्र, न्याय क्षेत्र, तंत्र क्षेत्र, साहित्यिक क्षेत्र, विज्ञान-गणितक क्षेत्र, ज्योतिष क्षेत्र, चिकित्सा क्षेत्र, अभियांत्रिकी क्षेत्र, राजनीति क्षेत्र, सामाजिक कार्य आदि क्षेत्र सभमे एहि गामक लोक अभूतपूर्व योगदान दए रहल छथि। एतेक पैघ उपलब्धि आ कार्य आनहु गाम-समाजक लेल अनुकरणीय अछि। ताहि सारस्वत प्रतिभाकेँ एकठाम पोथीमे आनि विलक्षण कार्य कएलनि अछि। पोथीमे पारिजात-हरणक रचयिता म.म. उमापति उपाध्यायसँ लए कए पद्मश्री डा. मोहन मिश्र आओर सिनेमा आ थियेटरक संसारसँ नरेन्द्र झा धरिक कृतित्वक विश्लेषण अछि। पोथीमे कोइलखक आठो मन्दिरक संग मस्जिदोक संगहि ईदगाहक सेहो वर्णन अछि। जल-प्रबन्धनक हेतु एक्कैस गोट पोखरिक वर्णन सेहो अछि। स्कूल, पोस्टऑफिस आदि सरकारी संस्था-संस्थानक सम्बन्धमे सेहो बात आयल अछि। एहि तरहेँ कहल जा सकैछ जे ग्रामगाथाक रूपमे एकटा श्रेष्ठ पोथी अछि-- 'कोइलख'।
3. त्रिवेणी ( सम्पादित आलेख संग्रह- 2020)-- त्रिवेणीकान्त ठाकुर मेमोरियल ट्रस्ट, हजारीबागक एकटा ओहन संस्था अछि जे साहित्यिक गतिविधिकेँ जीवन्त रखने मैथिली संग आनो भाषामे उत्कृष्ट योगदान देनिहार-देनिहारिकेँ पुरस्कृत करैत आयल अछि। आओर ई संस्था त्रिवेणीकान्त ठाकुरक सम्मानमे चलि रहल अछि। त्रिवेणीकान्त ठाकुर एकटा निर्भीक वक्ता, कुशल शिक्षक आ विराट व्यक्तित्व रहथि। ताहि त्रिवेणीकान्त ठाकुर मेमोरियल ट्रस्ट, हजारीबाग संस्थाक हितनाथ झा संयोजक छथि, से कुशल संयोजक छथि। विचारमे अएलिन जे एहि संस्थासँ जे लोकनि सम्मानित-पुरस्कृत छथि, तनिका सम्बन्धमे, तनिकर सम्पूर्ण उपलब्धिक ध्यानमे रखैत आलेखक संकलन निकालल जाए, सएह कएलनि आ एहि 'त्रिवेणी' पोथीक सम्पादन कएलनि। पोथीमे आलेखक संकलन अछि, जनिका त्रिवेणीकान्त ठाकुर मेमोरियल ट्रस्टसँ पुरस्कार भेटल छनि आ ओहि व्यक्ति सभक लेल देल गेल प्रशस्ति पत्रक सेहो संकलन कएल गेल अछि। आलेख शीर्षक आ आलेख लेखकक नाम एहि तरहेँ अछि-- सम्पादकीय- हितनाथ झा, कुमार मनीष अरविन्द- नारायण झा, विद्यानाथ झा 'विदित'- धीरेन्द्रनाथ मिश्र, पंचानन मिश्र- सुशांत कुमार, सियाराम झा 'सरस'- नारायण झा, बुद्धिनाथ झा(मैथिलीमे महाभारत)- भीमनाथ झा, शिवदयाल सिंह 'शिवदीप'- रतन वर्मा, शम्भु बादल- सुशील कुमार, भारत यायावर- गणेश चन्द्र राही,
अमल सेनगुप्त (साक्षात्कार)- रतन वर्मा, अजित कुमार बनर्जी - राकेश ठाकुर, अब्दुल अली मुनीरुल होदा "अली मुनीर "- फरहत हुसैन खुशदिल, फरहत हुसैन 'खुशदिल' - जयगोविन्द मिश्र। 'त्रिवेणी' पोथी ठीके त्रिवेणी अछि जतए पुरस्कृत लेखकक अवदान, ओहिपर नीक लेखक द्वारा आलेख लिखल आ पुरस्कृत लेखकक प्रशस्ति पत्र एकहि ठाम संकलित अछि, जे कतेको दृष्टिकोणेँ महत्त्वपूर्ण अछि।
4. राजापोता बलगर (बालकविता संग्रह- 2024) -- रचनाकार हितनाथ झा बालकविता संग्रह 'राजापोता बलगर'मे बालमनकेँ सोहाइ वला, बौआ-बुच्चीक ठोरपर उचरै वला, सरल-सहज ओ उद्देश्यपरक बालकविता सभकेँ सहेजलनि अछि। हितनाथ झा स्वयं एक सिद्धहस्त पाठक छथि, हिनका सभ कोटिक पाठकक स्वाद बुझल छनि। तेँ ओ बालमनकेँ सेहो नीक जकाँ जीबिकए बालकविता लिखलनि अछि। संग्रहक सभ कविता उत्तम अछि जे धियापुता सभ पढ़ि अपन ज्ञान तँ बढ़ेबे करत संगहि मनोरंजन सेहो कए सकत।
संग्रहक एक बालकविता शीर्षक 'चुनि ली अप्पन 'रोल'मे कतेक नीक सन्देश देबाक कोशिश कएने छथि जे देखबाक जोग अछि। एतय ओ कहबाक प्रयास कएलनि अछि जे सभक रुचि अलग-अलग होइत छैक। संगहि कहबाक प्रयास कएलनि अछि जे अहाँ अपन रस्ता स्वयं चुनैत छी, से कोन रस्ता चुनबाक अछि स्वयं निर्णय करू। एहि कर्मप्रधान युगमे यशदायक बाट चूनब वा अयशदायक, ओ निर्णय अपनहि हाथमे अछि। बहुत नीक सन्देश देबाक यत्न कएलनि अछि। कविता देखल जाए--
"ककरो बटर पनीर मसाला, ककरो कबकब ओल।
ककरो शांति स्वभाव पसिन तँ ककरो लबलब लोल।।
ककरो झाँपन नीक न लागय, ककरो दाबल खोल।
बाँसुरीक सुर ककरो भावय, ककरो ढबढब ढोल।।

ककरो अनकर टेटर सूझय, ककरो अप्पन गोल।
ककरो पूनम चान तँ ककरो गूज्ज अन्हारे टोल।।
ककरो चुबइछ लेर-ढेर तँ ककरो मन सन्तोष।
ककरो रकटल प्राण मान ले' तँ ककरो ले' रोष।।

ककरो चिक्कन चनुमनु आङन, ककरो भरले झोल।
ककरो कचरमकूट भोजनक, कतहु उपासल भोर।।
ककरो मनमे धनक पिपासा, कोनो आँखिमे नोर।
ककरो न्यायक भरल तराजू , कतहु अनीति-अङोर।।

ककरो गायन कानक कटु तँ ककरो बोल अमोल।
ककरो काज बढ़ै अछि चुपचुप, तँ ककरो अनघोल।।
मनुखक दुहू प्रकार होइत अछि, चुनि ली अप्पन 'रोल'।
यश-अपयश दुनू बजबैए, कोन पसिन अछि टोल।। "
ई पुस्तक मैत्रेयी प्रकाशन, दिल्लीसँ एहि बरख 2024मे प्रकाशित भेलनि अछि। अन्तमे हम कहए चाहब जे रचनाकार हितनाथ झा एकटा ओहन सृजनधर्मी लोक छथि जे स्वयं तँ सृजन करिते रहैत छथि, संगहि मैथिली साहित्यक मध्य, साहित्यकार द्वारा भए रहल सृजनक मूल्यांकन सेहो क्रमानुसार कए रहल छथि, जे सैकड़ोक संख्यामे हेतनि। 2023मे 58 पोथी आ 01 पत्रिकाक पाठकीय समीक्षापर आधारित पोथी 'लेख-रेख' सेहो प्रकाशित भेलनि, जे प्रायः एकठाम एक पोथीमे एतेक संख्यामे प्रकाशित ई सम्भवतः पहिल संग्रह थिक। अनुवादक सेहो छथि किएक तँ अनुवाद विधामे एक पोथी 'कविता : शम्भु बादलक' केर सुन्दर अनुवाद कए सोझाँ 2023मे अनने छथि। आइ-काल्हि जखनकि प्रबुद्ध पाठकोक संख्या घटले जा रहल छैक, ताहि परिस्थितिमे हिनक महत्व विराट छनि। हिनक साहित्यिक यात्रा अनवरत एहिना निर्बाध चलैत रहनि। हिनक सुखद जीवनक हम कामना करैत छियनि।
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

Suggested citation: नारायण झा. “हितनाथ झाक जीवन ओ साहित्य.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 405, 2024-11-01. https://www.videha.co.in/research/2024/405/हितनाथ-झाक-जीवन-ओ-साहित्य.htm

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