विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली मानकीकरण/ महाकुंभ

आचार्य रामानंद मंडल · 2025-02-01 · अंक 411 · पृष्ठ 30–34


मैथिली मानकीकरण
आइ कालि एगो नव मैथिली शोध संस्थान जोर शोर से मैथिली के मानकीकरण पर भीरल हय। नेपाल के अंतरराष्ट्रीय मैथिली भाषाविद डॉ रामावतार यादव,वरीय आलोचक डा रमानंद झा रमण,वरीय साहित्यकार डा भीमनाथ झा आ अन्य के समूह द्वारा मैथिली के स्थिरीकरण के लेल मानकीकरण के आवश्यकता बतैलन।समुह द्वारा मैथिली के वर्तनी के स्थिरीकरण के दिशा मे काज कैल गेल।इहो बताएल गेल कारक के विभिक्त जोर के लिखल जाए। कारण कि आबि मैथिली विश्व भाषा बन गेल हय।
परंतु समुह मैथिली के विभिन्न शैली यथा अंगिका, बज्जिका, खोरठा आ नागपुरी पर कोनो विचार न कैलन।समुह अतीत के विचार से प्रभावित हो अइ सभ के उपेक्षित कैलन जेना अतीत मे करैत रहलैन ।
मैथिली लोकभाषा के पाणणि के व्याकरण जेका संस्कृतनिष्ठ बनाके मैथिली के लोक से दूर कै देलन।अइ संदर्भ मे एगो घटना के स्मरण आवश्यक हय जे एकबार प्रसिद्ध साहित्यकार जगदीश प्रसाद मंडल के रचना के बर्तनी के बदल देल गेल रहय।परंच बाद मे इ विदेह पत्रिका वोइ रचना के हु बहु हु प्रकाशित कैलन।बाद मे जगदीश प्रसाद मंडल के उपन्यास पंगु पर साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत कैल गेल।
आब विचार के विषय इ हय कि केन्द्रीय मैथिली अर्थात मानक मैथिली जेकरा सोतीपुरा मैथिली कहल जाइ हय मे तत्सम शब्द के प्रयोग ज्यादा होइ हय जौं कि अंगिका -बज्जिका मे तद्भव आ देसी शब्द के प्रयोग होइ हय। वर्तनी मे जंहा मैथिली मे ण,ष,ऋ के प्रयोग कैल जाइ हय त इ बज्जिका मे ण,ष,ऋ के प्रयोग निषेध कैल गेल हय।ण के बदले न,ष के बदले स आ ऋ के बदले रि के प्रयोग कैल जाइ हय। तुलनात्मक अध्ययन कैला पर पायल जाइ हय कि एकरा उच्चारण से कोनो मतलब न हय बल्कि वर्तनी मे भिन्नता के द्योतक हय। एकटा गाम आ एकटा समाज के व्यक्ति के वर्तनी मे भिन्नता पायल जाइत हय। यथा - अतीत मे लोहना मधुबनी के विद्वान रमाकांत झा आ विद्वान कांचीनाथ झा किरण। वर्तमान मे वोही गाम के कथाकार अशोक आ शिवशंकर श्रीनिवास।
मिथिला के विभिन्न क्षेत्र वर्तमान मे बज्जिकांचल आ अंगिकांचल हो आ अतीत के मिथिला आ तिरहुत क्षेत्र के मैथिली भाषा भिन्नता के बोली कह के खारिज करनाई अपने पैर पर अपने कुरहर चलनाइ साबित होयत। भिन्न-भिन्न क्षेत्र के शब्द आ वर्तनी के समेकित करनाई आवश्यक प्रतीत होइ हय। शब्द आ वर्तनी के पर्यायवाची बनाबे के आवश्यकता हय।परंच वर्तनी के नाम पर वर्तमान संपादक महाकवि विद्यापति के अवहट्ट रचना के शुद्ध मैथिली बनाबे पर भिरल हतन।

महाकुंभ
सनातन धर्म मे छह बर्ष पर अर्धकुंभ आ बारह बर्ष पर कुंभ के विधान हय। अर्धकुंभ छह बर्ष पर प्रयागराज आ हरिद्वार में लगय हय।उत्तर प्रदेश सरकार कुंभ के नाम महाकुंभ क देलन हतन। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मे आइ काल महाकुंभ लागल हय।
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के उपरांत अमृत कलश प्राप्त भेल रहय। अमृत पान के लेके देव आ दानव मे पहिले हम त पहिले हम पान करब के लेल संघर्ष भे गेल।छीना झपटी में अमृत कलश से अमृत के बूंद चार स्थान पर गिर पड़ल। चार स्थान प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन आ नासिक हय। अमृत वितरण के लेल देव विष्णु मोहिनी रूप धारण क के अमृत वितरण कैलन।
कुंभ स्नान मे नागा साधु के प्राथमिकता देल जाय हय।२०२५मे कुल छह शाही स्नान हय। पौष पूर्णिमा १३जनवरी २०२५के प्रथम शाही आ द्वितीय मकर संक्रांति १४ जनवरी २०२५ के स्नान संपन्न भे गेल हय। तृतीय मौनी अमावस्या २९ जनवरी २०२५, चतुर्थ वसंत पंचमी ०३ फरवरी २०२५ पंचम माघी पूर्णिमा १२ फरवरी २०२५ आ अंतिम शाही स्नान २६फरवरी २०२५के हय।
वर्तमान महाकुंभ से आयल समाचार में सोशल मीडिया पर कुछ समाचार काफी बायरल हय।जैमे एगो माला बेचेबाली बंजारण लरकी मोनालिसा नाम से चर्चित हय। जेकर सुंदरता खास क के नीलगर आंख शोहरत बटोरले हय।वोकर सुंदरता के कारण वोकर ब्यापार सेहो प्रभावित भेल।वोकर कहना हय कि लोग हमर भिडियो बनबैय परंच माला न खरीदय हय।आब हमर भिडियो वोहे बनायत जे हमरा से कम से कम एगो माला खरीदत।आइ मोनालिसा महाकुंभ के मोहिनी बनल हय।
दोसर आइआइटियन बाबा मुकेश सिंह खुब बायरल हय।वो अपन बुद्धिमत्ता से लोग बड प्रभावित क रहल हय।परंच कुछ उटपटांग बयान से हुनका संबंधित अखाड़ा से निष्कासित क देल गेल त दोसर अखाड़ा अपना लेलक।अपना पिता के बारे मे व्यक्त विचार सनातन परंपरा के विपरीत हय।
तेसर नकली साधु के नाम पर लोग साधु से बदतमीजी कैल देखल जा रहल हय।
चौथा अघोरी नागा लोग के काफी प्रभावित क रहल हय।
पंचम माडल लरकी हर्षा नकली जटा के कारण विवादित रहल।वोकरा संबंधित अखाड़ा से निष्कासित कैल गेल।
महाकुंभ में प्राकृतिक आपदा अगलगी चर्चा में रहल।दू गो सेक्टर में आग लग गेल। सैकड़ों टेंट काटेज आ कुटिया जल के राख भे गेल। आपदा प्रबंधन के तत्परता से कोनो जान के हताहत न भेल। एकटा महिला कहैत पायल गेल कि जे हम वस्त्र पहिनले छी वोकरा छोड़ के कुछियो न बांचल।हमर भगवान सेहो जर के राख भे गेल।
सम्प्रति पंद्रह सौ लोग नागा साधु बनलन। एगो फिलमी हिरोइन ममता कुलकर्णी सेहो किन्नर महामंडलेश्वर बनलन।
मौनी अमावस्या २९ ननवरी २०२५के भगदड़ मे प्राप्त सूचना के आधार पर १२ श्रद्धालु के मृत्यु भे गेल आ सैकड़ों घायल भे गेल।
महाकुंभ लागल हय।
-आचार्य रामानंद मंडल सीतामढ़ी।

Suggested citation: आचार्य रामानंद मंडल. “मैथिली मानकीकरण/ महाकुंभ.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 411, pp. 30–34, 2025-02-01. https://www.videha.co.in/research/2025/411/मैथिली-मानकीकरण-महाकुंभ.htm

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