विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

बीहनि कथाक शास्त्रीय पक्षक निर्धारक- श्री भवनाथ झा

मुन्नाजी · 2025-10-15 · अंक 428 · पृष्ठ 183–187

(मैथिली बीहनि कथा केर अगुआ एवं लेखक। संपर्क-9958396353)
बीहनि कथाक शास्त्रीय पक्षक निर्धारक-श्री भवनाथ झा
बीहनि कथा विधाकें एखन धरि बहुतो लेखक / समालोचक आ विद्वान भिन्न मतें परिभाषित केने छथि। जाहिमे प्रमुख नाम अछि- स्व. श्री राज, घनश्याम घनेरो, मुन्ना जी, राज कुमार मिश्र, भवनाथ झा, डा. नारायण जी, कथाकार अशोक...! मुदा बीहनि कथा गद्य साहित्यक जाहि शास्त्रीय पक्ष पर ठाढ़ अछि ओकर पूर्ण श्रेय जाइत छनि श्री भवनाथ झा 'भवन' जीकें। जेना रेल एकटा निर्धारित पटरी धेने दौगैत गंतव्य दिस बढ़ैत रहैए। ओकरा क्षणे-क्षण पटरी बदलबाक खगता नै होइछ। ओना गंतव्य प्राप्ति हेतु बेर पर ओहो पटरी बदैल लैत अछि। ठीक तहिना साहित्य सेहो साहित्यकार द्वारा निर्धारित लीक पर गंतव्य दिस बढ़ैत एकटा निर्धारित परम्पराक निबहता करैए।
मैथिली साहित्यक एकमात्र अपन विधा "बीहनि कथा" परम्परागत सब विधा सँ इतर अपन स्वतंत्र विधाक रूपमे स्थापना पौलक। ताहि लेल बनौलक नव बाट। पारम्परिक सब बाट छोड़ि नव लीक पर चलब शुरू केलक। मुदा ओ नव बाट पुरना कुबाट पर चलनिहार द्वारा लतखुर्दनि कएल जाइत रहलै। कतेको उठा पटक, जोड़-तोड़ पछाति एकटा नव बाट बना ओइ सुबाट पर चलि मोकाम दिस बढ़ल। आ कुबाट सँ इतर अपन एकटा नव साहित्यिक परम्परा कायम क' पौलक। जकर मैथिली साहित्यक आधुनिक समय मे महत्वपूर्ण खगता रहै।
कोनो लोककैं सामान्य जीवन जीबा लेल जेना सामाजिक पक्षक अवलोकन वा अँगेजब आवश्यक। तहिना साहित्य विधा लेल शास्त्रीय पक्षक निर्धारण, ओकरा अँगेजब आ उघब आवश्यक। बीहनि कथा अपन प्रारम्भिक चरण मे हिन्दी लघुकथाक नकलची आ कुबाट पर चलनिहार सँ ठाम-ठीम दबाएल जाइत रहल। से नकलक ओइ अवयव सँ जकर कोनो परिभाषा, मापदण्ड आ लिखित कोनो अस्तित्व नै। सब ठाम, सबटा मौखिके खेला-बेला। से चोरकेँ संग दैत चोरक मसियौतक घाल-मेल। जहन कि "बीहनि कथा" मैथिलीक माटि-पानि आ अपन खाँटी शब्द सँ उत्पन्न आ उत्पति-विकास सँ ल' कऽ एक सए शब्दक कथा तत्व सँ भरल ओ पूर्ण कथा हेबाक परिभाषा संग निर्धारित भ' अंगेजल गेल। एकरा स्थायी आ चिरकालिक रूप आ स्वतंत्र विधाक निर्धारण हेतु शास्त्रीय पक्षक खगता भेल। ओइ खगता पूर्तिक लेल आगू एलाह बहुभाषाविद विद्वान आ बीहनि कथा विधाक प्रारम्भकर्ता मे सँ एक श्री भवनाथ झा उर्फ भवन जी।
बीहनि कथा शब्दक उत्पत्ति आ परिभाषा
डा. भवनाथ झा संस्कृतसँ बीहनि केर अर्थ देखबैत छथि। हुनका मोताबिक- "संस्कृतक 'ब्रीही' शब्दक अर्थ होइछ- बीज। आ मैथिलीमे- बीहनि / बीहन / बीहैन ओही शब्दक मूलमे निहित। ऐ प्रकारें बीज / बीजम् संस्कृते शब्द थिक। यथा- यज बीजै: सहस्त्राक्षं- महाभारत"
आगू डा. भवनाथ झा बीहनि कथाक परिभाषा दैत कहैत छथि: -
"बीहनि माने बीज/ बीया। जाहिमे विकास करबाक गुण निहित होइछ। मुदा ओ पूर्ण विकसित नै रहैछ, समयान्तरे विकसित होइछ। ओकरामे एक सँ अनेक आ पुष्ट / संपूर्ण हेबाक गुण रहैत छै तेनाहिते बीहनि कथा- एहन कथा जे अनेक कथा, यथा- कथा, उपन्यासकें जन्म देबाक क्षमता राखए। आ ओ कथातत्व सँ पुष्ट अधिकतम सए शब्द मे लिखल कथा हो से बीहनि कथा भेल। अन्यथा नै। तें बीहनि कथाक अन्त खुजल (open ended) होइछ। ओहिमे निष्कर्ष नै होबक चाही। निष्कर्ष पाठक पर छोड़ि देल जाइछ।"
डा. भवनाथ झा आगू बीहनि कथाकारसभकेँ साहस दैत कहैत छथि "हम खोंइचा छोड़ा फरिछा देलौं। आब अहाँ लोकनि डेग बढ़बैत चलू।..... कने आओर दूर! हँ कनिके दूर बस! मोकाम हासिल भेले बुझू ।"
हुनकर डेगमे हमर सबहक डेग मिज्झर भेल/ संग भेल। हुनकर डेग क्रमिके ऐ बाट सँ हेराइत-बेराइत गेल। आ ओ शोधार्थी आ संगे धर्मायण संग डेग बढ़बैत ओइ मे लीन भ' गेलाह। बीहनि कथा हुनक कलम पर ठमकि वा विलगि गेल। आ ओ हुनक स्मृति पटल पर जा विरमि सन गेल। मुदा भाइ, ने हेरेला आ ने बेरेला ओ बीहनि कथा पर नजरि गरौने, नजरि लगबैत रहलाह। हमरा सबकेँ ठाम ठीम बेर पर ऊँच-नीच होइत देखितै टोकारा दैत रहलाह।- हे यौ,...... हुनकर ई / ओ रचना, बीहनि कथा छै?
हमहूँ, जखन जे कोनो काज बीहनि कथा पर करी त' हुनका सँ रचना / विचारक जिज्ञासा करैत रहलौं। ओ बहुत दिन धरि आश पुरबैत रहला। मुदा कालान्तरे व्यस्ततावश कहियो काल निराश करैत रहलाह। धीरे धीरे मूँह फेरैत... मूँह मोड़ि लेलनि। मुदा जहन ऐ विधाकें फड़िछेबाक रहै छै तहन हम सब हुनके ज्ञान / परिभाषा / व्याख्याकें आगाँ क' विश्वस्त वा निश्चिंत होइत छी।
निंदा करै बलाकें नीन्न नै अबै छै। भवन जी मैथिली / मिथिला सँ जुड़ल प्राचीन ग्रन्थक संदर्भ सोझाँ अनै छथि। ओ मूल मुद्दाक गप करै छथि। ओ मिथिला/ मैथिलीक प्रामाणिक आ पौराणिकताक गप करै छथि। जाहि सँ स्वघोषित विद्वानकें अपन पएर तरहक जमीन धँसैत सन भान होइत छनि। आ तहन ओ सब गोधियाँ बना अपन निन्न कामै क' हिनका नीचा देखब' लगै छथि। मूलत: विज्ञानक छात्र जहन संस्कृतक संग गप करै छथि तहन शास्त्रीय आ वैज्ञानिक दुनू पक्ष मिझरा सोझाँ अबैए। ई कोनो गोरपुजाइ आ कि हवा हवाइक गप कखनो, कहियो नै करै छथि।
हम सब आशान्वित छी जे भवन जी, अपन पहिलुके तेवरमे बीहनि कथामे निरन्तरता आनथि। जाहि सँ ऐ विधाक बाधक व्यक्तिक मूँह पर जाबी लागि सकै। जे एकर उत्पत्ति / विकास आ शास्त्रीय पक्ष पर पक्षपात करै छथि। हुनक निरंतरता सँ बीहनि भकरार भ' धनमंडलक आश राखत। आ ऐ विधाकेँ जहन हिनका सन एकटा विद्वान, श्रेष्ठ लेखकक प्रश्रय भेटतै तहन नवसिखुआ लेखककें सीखबाक आ लिखबाक प्रेरणा सेहो भेटतै। आ ई विधा तहन आओर निश्शन भविष्यक कल्पनाकेँ यथार्थक दर्शन करबाओत।
संपादकीय टिप्पणी- बीहनि कथाकेँ नीकसँ जनबाक लेल आशीष अनचिन्हार द्वारा लिखित "बीहनिकथा की छै" लेख उपयोगी हएत जे कि विदेहक बीहनि कथा विशेषांक-2, अंक 317, 1 मार्च 2021 मे प्रकाशित भेल रहै। एकर अतिरिक्त विदेहक बीहनि कथा विशेषांक-1, अंक 67, 1 अक्टूबर 2010 सेहो पाठककेँ पढ़बाक चाही।

Suggested citation: मुन्नाजी. “बीहनि कथाक शास्त्रीय पक्षक निर्धारक- श्री भवनाथ झा.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 428, pp. 183–187, 2025-10-15. https://www.videha.co.in/research/2025/428/बीहनि-कथाक-शास्त्रीय-पक्षक-निर्धारक--श्री-भवनाथ-झा.htm

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