(संस्कृतक शिक्षिका, विद्वान एवं समीक्षक)
माटिक सुवास
�माटिक सुवास� अपन नामक अनुरूप गामकेॅं केन्द्रमे राखि लिखल लघु उपन्यास अछि। किछु प्रसंग छाड़ि देल जाइ, किछु अतीतक स्मृति कात क� देल जाइ त� पाठककेॅं सर्वत्र गाम भेटैछ।गामक गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, राजनीतिक कदाचार आ अंधविश्वास त� भेटबे करत, संगहिॅं भेटत ओतुका वातावरणक अन्हार देखि इजोत अनबाक कोशिश, परिवेशमे व्याप्त मानसिक गंदगी साफ करबाक प्रवृत्ति, दृढ़ निश्चय आ तदनुरूप परिश्रम सेहो ।ई दोसर पक्ष एहि उपन्यासक आत्मा अछि।समर्थ व्यक्तिक मोनमे गाम-घर लेल किछु करबाक ऊहि जन्म लै,ओ सेवानिवृत्तिक बादे सही, मुदा गाम घुरथि,अरजल पाइक किछु अंश,अपन ज्ञान, अनुभव आ कुशलताक लाभ गाममे रहनिहारकेॅं देथि,ई लेखिकाक अभिप्रेत छनि । राजनीतिक कुचक्र, पारिवारिक मूल्यक ह्रास आदि बहुत रास बाधाक बादो उपन्यासकेॅं सुखान्त रखबाक पाछू संभवतः लेखिकाक हृदयमे ई विश्वास छनि जे ई सभ संभव अछि, कोशिश त� करू!
उपन्यास प्रारंभ होइत अछि सिंगापुर बाली काकीक गाममे रहब शुरू करबासॅं, संगहिॅं अपन संतानसभकेॅं अपन माटिसॅं दूर रखबाक आ गामक प्रति दायित्व नहि निमाहबाक कचोटसॅं।अपन गलती सुधारबा लेल ओ प्रत्येक स्तर पर काज करब शुरूह करैत छथि,घ�र छोड़ै बाली तुलसीक प्रति संवेदना आ संरक्षणसॅं,परिवारेमे यौन- उत्पीड़नक ग्रास बनलि कजरी आ धनसाहि बालीक पक्षसॅं पुलिसमे रिपोर्ट करबासॅं आ स्त्रीकेॅं आत्मनिर्भर बनयबा लेल बहुत तरहक कौशल-शिक्षाक व्यवस्था आदि करबासॅं। तकर बाद नाटकीय ढंगसॅं पोताक गामक यात्रा,पटनेसॅं एमडी करबाक योजना,पुतहुक अनर्गल गारि-श्राप, दुर्घटना,कोमामे जायब,बेटा-पुतहुक एकैस बरख बाद गाम घुरब आ गाममे अस्पताल आ राइस-मिल बनैबा लेल पाइ खर्च करब आदि घटित होइत अछि।
एहि सभ रमणगर घटनाक उपस्थापनक संग लेखिका समाजक यथार्थ सेहो सोझां रखैत चलैत छथि।ओ पकड़ौआ बियाह आ वैधव्यक दंश भोगैत डॉ सुष्मिता,बुच्चन बाबूक जमीनक लोभमे नेताजी संग मिलि चालि चलब,नेताजीक चुनाव जितबा लेल छोटकुन सन अपराधीक संग- साथ,अनेक निरपराध लोकक लहाश पर अपन जीतक गोटी बैसायब,ससुर- भैंसुरक विकृत यौनाकांक्षाक शिकार धनसाहि बाली,जकरा प्रेमी बुझैत छली,तकर जबर्दस्ती भोग्या बनलि तुलसी आदि बहुत रास सामाजिक कुरीति सहज ढंगसॅं परसैत कथा आगू बढ़़बैत छथि।
पोथीक भाषा समय आ पात्रानुरूप अछि, रोचक ढंगसॅं बढ़ैत कथानक मनलग्गू त� अछिए,ठाम-ठीम चिंतन करबा लेल विवश करैत चलैत अछि।कहल जा सकैत अछि जे श्रीमती मुन्नी कामत उपन्यास-लेखनक दिशामे थोड़ेक आर मेहनति करती त� नीक प्रभाव छोड़ि सकैत छथि।
एकटा पाठकक दृष्टिसॅं जॅं हम कही त� कतौ- कतौ किछु अस्पष्टता ओझराबै अछि।कथाक बढ़ैबा काल कजरीक हत्या-प्रसंग आ तुलसीक दुर्घटना अथवा शोषणक परिस्थिति,चंदनक तुलसीक संग दुर्व्यवहार आदि प्रसंग पर कनेक स्पष्टता जॅं रहितै त� पाठकक मोनमे बेशी तृप्ति होइतै।
जॅं किछु ओहन पक्ष पर गप करी जतय परिमार्जनक खगता बुझना गेल त� ओ अछि हिन्दी आ अंग्रेजीक बहुल प्रयोग! पात्रक परिस्थितिक अनुसार जॅं ई भाषा राखब उचित छल त� ओतय शुद्धताक ध्यान राखब सेहो जरूरी! उच्च शिक्षा प्राप्त लोकक भाषामे त्रुटि साहित्यिक दृष्टिसॅं बहुत नीक नहि मानल जाइत अछि।किछु प्रसंग ध्यातव्य अछि-
(- 'How are you my son what is the holiday? How many days off, spend some time with mother and father too. '
Where does father have time for me, that's why kept me in boarding school childhood.I am just coming India doesn�t want to spend along in the boarding room, this time with you. (पृ.सं.27)
भावनाओं को ठेस पहुंचेगा? तारीफों की पहाड़,चिंता इंसान को खोखला कर देता है,आपके जैसा हिम्मत, सारा जमीन,कमजोरी मायने नहीं रखता,साक्त स्त्री)
आदि कतोक एहन स्थान अछि जतय भाषा ठीक कएल जयबाक चाही।
पितिऔतक स्थान पर सहोदरक प्रयोग सेहो अखरैत अछी-!बुच्चन हम तोहर सहोदरक संगे पैघ भाइ सेहो छियौ(पृ.सं.51, पंक्ति 6)
कतौ कतौ भौगोलिक अस्पष्टता सेहो अछि,जेना सिंगापुर, मलेशिया आदि देशक बीच भ्रमक स्थिति
(मलेशियामे रहि रहल ओकर माम घुरियो क� नहि अबैत छै।�.
सिम्मीके माय-भाइ भौजाइ सभ सिंगेपुरमे रहै अछि पृ.सं.45)
ई सभ पक्ष रखबाक एकमात्र ध्येय ई जे दोसर संस्करणमे एकर सुधार भ� सकय।
मुन्नी जीकेॅं एही नव साहित्यिक बाट पर मजगूतीसॅं बढ़ल डेग लेल बहुत बहुत अभिनन्दन आ बधाई।ई निरंतर सृजनशील रहथु, शुभकामना।