विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

बहुजन कवि आ नाटककार राम श्रेष्ठ दीवाना : एक संक्षिप्त बायोग्राफी

लाल देव कामत · 2026-07-15 · अंक 446

बहुजन कवि आ नाटककार राम श्रेष्ठ दीवाना : एक संक्षिप्त बायोग्राफी
लाल देव कामत
बहुजन कवि आ नाटककार राम श्रेष्ठ दीवाना : एक संक्षिप्त बायोग्राफी

श्रीयुत् राम श्रेष्ठ दीवाना जीके जन्म तिथि : 0४ जनवरी १९५७ ई० छन्हि। माय : स्वर्गीय रामसखी देवी आ बाबू : स्वर्गीय तुलफी यादव गाम : जिरौल थाना : खिरहर, जिला : मधुबनी, बिहार पिन कोड : ८४७२३0 (भारत) मोबाइल/व्हाट्सऐप नं०-९८०१३९८३६३ मैथिली लेखन सँ हिंदी दिश उन्मुख भेलाह अछि। प्रकाशित पोथी सभ ,हिन्दी नाटक :- भूख लगी है रोटी दो
- राखी की कसम
- कान्ति की बलवेदी
- जरा याद करो कुर्बानी
- बगावत का झंडा
- ज़ालिम ज़माना
- भिखमंगों का हिन्दुस्तान
- आज़ादी ख़तरे में
- लोकनाट्य राजा सलहेस

काव्य एवं अन्य कृति :- कलुआ डोम
- प्रेम ना हाट बिकाय
- नेह की बारिश
- मोहब्बत रखैल नहीं होती
- मैं बुद्ध हूँ
- भूखे आदमी का शास्त्र लिख रहा हूँ
- ताजमहल मैंने भी बनाया
- आदमी कैसे दरिंदा हो गया
- आदमी के भेष में आदमखोर को देखा है
- मोहब्बत दिल की किताब है (काव्य संग्रह)

हिनक रचनाशीलता केँ परैख निम्न पुरस्कार आ सम्मान सब भेटलनि हेन।
- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर पुरस्कार (राजभाषा विभाग, बिहार सरकार, 2020–21)
- वरिष्ठ फैलोशिप सम्मान (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार)
- साहित्य सेवा सम्मान (बिहार राष्ट्रभाषा परिषद)
- लोकगीत लेखन सम्मान (बिहार सरकार)
- शहीद रामफल मंडल राष्ट्रीय पुरस्कार
- बाबासाहेब आंबेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप सम्मान (दलित साहित्य अकादमी, दिल्ली)
अन्य उपलब्धि एहि तरहेँ छन्हि :- १९९५ मे हुनकर दू नाटकक चेक भाषा मे अनुवाद भेलैन।
- "फाँसी पर गणतंत्र" पुस्तक 2००८ मे नोबेल पुरस्कार लेल नामांकित भेल रहनि।
- पूर्व सदस्य, हिन्दी सलाहकार समिति, भारत सरकार।
- पूर्व सदस्य, उत्तर मध्य सांस्कृतिक केन्द्र, इलाहाबाद, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार। हुनक बचपन-:
उपर लिख चुकल छी, हिनक जन्म ४ जनवरी १९५७ केँ बिहार राज्यक मधुबनी जिलाक जिरौल गाममे एकटा खेतिहर मजदूर परिवारमे भेल छन्हि। हुनक पिता स्वर्गीय तुलफी यादव निरक्षर छलाह आ माता स्वर्गीय रामसखी देवी सेहो निरक्षर छलीह। हिनक पिता दू भाइ छलाह। हुनकर पैघ भाइ स्वर्गीय सोनेलाल यादव रहथि। हुनकर जन्मसँ पहिनहि दुनू भाइ अलग-अलग भऽ गेल छलाह। शुरुआती समयमे पिता कुश्ती लड़ैत छलाह आ भैंस पोसैत छलाह। साझी परिवार लग करीब दस कट्ठा जमीन छलैन। हुनका तीनटा बहिनो छलैन,हुनक सभक विवाहमे पाँच कट्ठा जमीन बिकि गेलैक । बाँचल पाँच कट्ठामेसँ दू कट्ठा जमीन कोसी-कमला नहरमे चलि गेलैक । एहन स्थितिमे मात्रे तीन कट्ठा जमीन खेती योग्य बचलनि। परिवारमे कुल आठ गोट सदस्य छलैक। हुनक बाबा-मैयाँ जीवित छलनि। घरक आर्थिक अवस्था अत्यन्त दयनीय छलैन। कतेको बेर घरमे सोहारी (रोटी )बननाई सेहो संभव नहि होइत छलनि। तखन ओसभ लोकनि अलुआ उसैन कऽ खाइत रहैथ। शकरकंद केर सुतियाएल शीरकेँ सुखाकय,तकरा जांतमे पिसकय मीठगर रोटी पका खाईथ। हुनकर दादा स्वर्गीय चुलहाई यादव वृद्ध भऽ गेल छलाह। पिता दोसरक खेतमे मजदूरी करए जाइत छलाह। दिनभरिक खटनिक बदला कहियो एक किलो खेसारी, कखनो धान, आ कखनो आधा सेर चाउर अथवा मरुआक चिकस (आंटा) भेटैत छलैक। एतेक कम बुतात-अनाजसँ आठ गोट परिवारक पेट भरब बढ़ कठिन छलैक। हिनक परिवार घनघोर गरीबी आ भुखमरीसँ जूझि रहल छलनि। मुदा हिनक पिता अत्यन्त साहसी आ पथलतोर परिश्रमी छलाह। ओ हुनका गामेक विद्यालयमे नामांकन करौलनि।
पढ़ाइ-लिखाइमे ओ बहुत कमजोर रहथि। हुनका एखनों धरि मोन नहि पड़ैत छैक जे बालपनमे कखनो भरि पेट भोजन खाइबाक सौभाग्य भेटल होय। बचपने सँ हुनक पिता भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीसँ जुड़ि गेल छलाह। हुनका काका लगैत काउमरेड ज्ञानी यादव हरलाखी प्रखंडमे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीक सचिव छलाह। हिनका घर पर प्रायः कामरेड राजकुमार पूर्वे, बैधनाथ यादव, रामचन्द्र यादव, भोगेन्द्र झा आ तेज नारायण झा सन वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेतासभक आवागमन होईत रहैत छलैन। परिवेशक प्रभाव एहन पड़लैक जे दसमी कक्षा उत्तीर्ण करबाक बाद ओ स्वयं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीक सदस्य बनि गेलथि। हुनका घर पर मास्कोसँ प्रकाशित "सोवियत दर्पण" नामक पत्रिका अबैत छलैक, जाहिसँ हुनका सामाजिक आ राजनीतिक विचारधारासँ परिचित होयबाक अवसर भेटलैक।
मिडिल स्कूल पास करलाक बाद हुनक नामांकन उच्च विद्यालय, खिरहरमे आठम कक्षामे भेलनि। पढ़ाइक संग-संग राम श्रेष्ठ जी दोगादोगी पिता संग दोसराक खेतमे मजदूरी (बोईन) करए जाइत रहथि। हुनक माता सेहो खेतमे मजदूरी करैत छलीह। जहन परिवारक तीन तुर सदस्यकेँ काज भेटैत छलैन, तहन भोजनक व्यवस्था भऽ जाइत छलैक ; मुदा जखन काज नहि भेटैक, तखन भुखक पीड़ा असहनीय ,लहालोट भऽ जाइत छलैक।
किछु समय बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी हुनका अखिल भारतीय छात्र संघ, मधुबनी जिलाक अध्यक्ष बना देलकनि। एहि दायित्वक बाद ओ विद्यालय आ महाविद्यालयसभमे छात्रसभक बीच मार्क्सवादी विचारधाराक प्रचार-प्रसार करए लागलथि। राजनीतिक सक्रियता बढ़लाक कारण हुनकर पढ़ाइ प्रभावित भेलैन।
सन् १९७० मे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बंटाईदारी कानूनक अन्तर्गत "जमीन हड़प आन्दोलन" आरम्भ कएलक। पार्टी हमरा मधुबनी जिलाक सेमहली, भाला बैंगरा, हिसार आ खिरहर क्षेत्रमे भूमिहीन मजदूरसभक पक्षमे आन्दोलन चलाबैक जिम्मेदारी देलक।
ओ एहि गामसभमे जमींदारसभक सैकड़ों एकड़ जमीन पर लाल झंडा फहरौलथि। एहि कारण जमींदारसभ हुनका विरुद्ध लगभग दसटा मुकदमा दर्ज करा देलकैक।
मुकदमा वापस लेबाक उद्देश्यसँ हुनका पच्चीस एकड़ जमीन देबाक प्रलोभन सेहो देल गेलैक। मुदा कामरेड राजकुमार पूर्वे कहने रहनि— "ईमानदारी मार्क्सवादक पहिल शर्त अछि।" एहि शिक्षाकेँ जीवनक आदर्श मानि दिवानाजी ओ प्रस्ताव अस्वीकार कए देलथि।
आइयो जखन ओहि संघर्षक याद अबैत छैन, तखन ई सोचिकऽ संतोष होइत छैन जे हम अनेक गरीब ग्रामीणसभकेँ हुनक जमीनक अधिकार दिलाबयमे अपन योगदान देलहुँ। संघर्ष आ आन्दोलनक बीच ओ १९७५ मे मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कएलाह। तकर बाद १९८० मे कालिदास विद्यापति साइंस कॉलेज, उचैठ बेनीपट्टीसँ स्नातक आ १९८९ मे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगासँ स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कएलाह।
हुनका रंगमंचसँ गहिंर लगाव - जुराउ छलैन। एहि कारण ओ इप्टा (इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन) सँ जुड़ि गेलधि। अपन गाममे पहिल बेर पी.एन. जयसवाल लिखित नाटक "इन्कलाब चीख उठा" केर मंचन कएलाह। नाटकक सफल प्रस्तुति पर स्थानीय प्रशासन हुनका पाँच सय टाकाक पुरस्कार देलकनि।
तकर बाद ओ मिथिलांचलक दर्जनों गाममे पाँच दर्जनसँ अधिक नाटकक मंचन कएलाह। हुनका लगैत छलैक जे रंगमंच केवल मनोरंजनक माध्यम नहि, बल्कि समाज परिवर्तनक सशक्त हथियार अछि।
मिथिलांचलमे दलित नायक राजा सलहेस केर लोकनृत्य आ लोकगाथा अत्यन्त प्रसिद्ध अछि। बादक समयमे ओ राजा सलहेस पर गहन शोध कएलाह आ लेखन कार्य आरम्भ सेहो कएलाह। एहि शोध आ साहित्यिक योगदान लेल भारत सरकारक संस्कृति मंत्रालय हुनका "वरिष्ठ फैलोशिप सम्मान" सँ सम्मानित कएलकैन।
सन् १९८0 मे हुनक पहिल नाटक "भूख लगी है रोटी दो" पटना सँ प्रकाशित भेल रहय। ओहि वर्ष कलकत्तासँ प्रकाशित दैनिक "दैनिक प्रकाश" मे हुनक पहिल कविता प्रकाशित भेलनि।
समयक संग हुनकर साहित्यिक यात्रा विस्तृत होइत गेलैन। आईधरि हुनक चौदहटा नाटक, छहटा कविता संग्रह, पाँचटा ग़ज़ल संग्रह आ चारिटा लोककथा संग्रह प्रकाशित भऽ चुकल अछि। हुनक रचना देशक कतेको प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित भेल अछि, जाहिमे हंस, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, आज, आर्यावर्त, दलित विमर्श, जनशक्ति, भीम लहर, लाल गुलाब, दैनिक प्रकाश, सूरज-चाँद आदि प्रमुख छैक।

हुनक दू टा नाटक— "आजादी ख़तरे में" आओर "राखी की क़सम" — केर १९९५ मे चेक भाषा मे अनुवाद भेल। चेक गणराज्यक राष्ट्रपति महामहिम हावेल महोदय स्वयं 15 मार्च 1995 केँ पत्र पठा कऽ हुनका सम्मानित कएलनि।
सन् २०१८ मे हुनक कविता संग्रह "फाँसी पर गणतंत्र" केँ ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा द्वारा नोबेल पुरस्कार लेल नामांकित कएल गेल।

हिनका 200८ सँ 20११ धरि भारत सरकारक हिन्दी सलाहकार समिति केर सदस्यक रूपमे सेहो मनोनीत कएल गेल रहय। जमीन आन्दोलनक संग-संग ओ अपन पढ़ाइ जारी रखलनि। सन् १९७५ मे ओ मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कएलाह। तत्पश्चात् १९८० मे कालिदास विद्यापति साइंस कॉलेज, उचैठ (बेनीपट्टी) सँ स्नातक आ १९८९ मे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा सँ स्नातकोत्तर परीक्षा पास कएलाह।
छात्र जीवनमे हुनका रंगमंचक प्रति अभिन्न रुचि उत्पन्न भेलनि। एहि कारण ओ इप्टा (इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन) सँ जुड़ि गेलाह। अपन गाममे पहिल बेर पी. एन. जयसवाल लिखित नाटक "इन्कलाब चीख उठा" केर मंचन कएलाह। ई प्रस्तुति अत्यन्त सफल रहल, जाहि कारण स्थानीय प्रशासन हुनका पाँच सय रुपैयाक पुरस्कार देलकनि। एहि सफलता सँ उत्साहित भऽ ओ बादमे दर्जनों गाममे पाँच दर्जनसँ अधिक नाटकक मंचन कएलाह।
मिथिलांचलमे दलित लोकनायक राजा सलहेस केर लोकनाट्य अत्यन्त प्रसिद्ध रहल अछि। एहि परंपरासँ प्रेरित भऽ ओ राजा सलहेस पर गहन अध्ययन आ शोध कएलाह तथा एहिक आधार पर लेखन आरम्भ कएलाह। एहि महत्त्वपूर्ण कार्य लेल संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हुनका "वरिष्ठ फैलोशिप सम्मान" प्रदान कएने रहैन।
सन् १९८० मे हिनक पहिल नाटक "भूख लगी है रोटी दो" पटना सँ प्रकाशित भेलैन। ओहि वर्ष कलकत्ता सँ प्रकाशित दैनिक "दैनिक प्रकाश" मे हुनक पहिल कविता सेहो छपल।
तत्पश्चात् हुनक चौदहटा नाटक, छहटा कविता-संग्रह, पाँचटा ग़ज़ल-संग्रह तथा चारिटा लोककथा-संग्रह प्रकाशित भऽ चुकल छन्हि। हिनक रचना हंस, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, आज, आर्यावर्त, दलित विमर्श, जनशक्ति, भीम लहर, लाल गुलाब, दैनिक प्रकाश, सूरज-चाँद आदि अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित भेल अछि।
सन् १९९५ मे हुनक दू नाटक— "आज़ादी ख़तरे में" आ "राखी की कसम"— केर चेक भाषामे अनुवाद कराओल गेल। चेक गणराज्यक राष्ट्रपति महामहिम वैक्लाव हावेल १५ मार्च १९९५ केँ पत्र पठा कऽ एहि उपलब्धिक लेल हुनका सम्मानित कएलकनि।
सन् २०१८ मे हुनक कविता-संग्रह "फाँसी पर गणतंत्र" केँ ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा द्वारा नोबेल पुरस्कार लेल नामांकित कएल गेल।
बादमे ओ भारत सरकारक हिन्दी सलाहकार समिति केर सदस्य सेहो मनोनीत भेलाह आ अपन साहित्यिक, सांस्कृतिक आ सामाजिक सक्रियता निरंतर जारी रखलाह। हुनकर सम्पूर्ण जीवन संघर्ष, अभाव आ पीड़ासँ भरल रहल छन्हि। कॉलेजक समयमे ओ प्रतिदिन दस किलोमीटर पैइरे चलि कऽ पढ़ए जाइत रहथि। हुनका घरसँ कॉलेजक दूरी लगधक दस किलोमीटर छल। हिन
कॉलेजमे नामांकन कराबए लेल बाबूजी हुनका दस टाका देने छलाह। मुदा किताबक आवश्यकता एतेक अधिक छल जे ओ ओहि टाकासँ नामांकन कराबएक बदला एकटा पोथी किनि लेलाह। बादमे कॉलेजक प्राचार्य प्रोफेसर गोविन्द चौधरी हिनक परिस्थिति बुझि हर प्रकारेँ सहायता कएलनि। आन शिक्षकसभ सेहो हुनका प्रति अत्यन्त स्नेहशील छलाह। छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित होयबाक कारण स्नातक पूरा होए धरि हुनका लगभग कोनो खर्च नहि करए पड़ल।
ओहि समयक एकटा घटना आइयो हुनका मोनमे ताजा छैन। घरमे खाए लेल किछुओ सामग्री नहि छलैन। हुनक परीक्षा चलि रहल छलैक। ओ भूखल-पियासल कॉलेज पहुँचि परीक्षा देलथि। परीक्षा समाप्त भेला पर साँझ करीब चारि बजे घर घुरैत रहथि। सावन मास छलैक, बाटमे मूसलाधार वर्षा शुरू भऽ गेल रहैक । ओ एकटा आमक बगैचामे वर्षासँ बचबाक प्रयास करैत रहथि।
ओहि समय एकाएक गाछसँ दूटा पाकल आम खसि पड़लैक। हुनका एहन प्रसन्नता भेलनि जे कहब कठिन होएत। एकटा आम ओतहि खा लेलनि , आ दोसरका अपन बहिन लेल लऽ कऽ घर अएलाह। वर्षामे भीजला'क कारण रातिमे तेज ज्वर भऽ गेलैन। रातिभरि पीड़ासँ तड़पैत छटपटाइत रहलाह। माय लगातार हुनकर सेवा जलपटी करैत रहलीह। भोरमे पिता अपन लोटा बन्धहक राखि औषधि आनलनि। औषधि खयलाक बाद रसे-रसे ज्वर उतरैत ठीक भेलाह।
सन् १९७५ मे हुनक दादाजीक निधन भऽ गेलनि। हुनकर पंचदान श्राद्ध-भोजभात लेल पिता दू हजार टाका कर्ज केलनि। परम्पराक अनुसारे पिता ओकर मुण्डन करा देलकनि। भोजक तैयारी पूर्ण भऽ चुकल छल। मुदा जातिक किछु लोकसभकेँ पता चललैक जे ओ 'टिक' (शिखा) सेहो कटबा लेने छैक। ओसभ एकर अर्थ ई निकाललक जे ई हिन्दू नहि रहल, हरसठे मुसलमान भऽ गेलैक।
एहि आधार पर हुनका पिता आ परिवारकेँ जातिसँ बहिष्कृत कऽ देल गेलैक। घरमे चारूकात चिन्ता आ शोकक वातावरण बनि गेलैन। एहि कठिन समयमे ओ निश्चय कएलाह जे तैयार भेल भोज गामक दलित भाइ-बहिन सभकेँ खुआयब। ओ सभ प्रायः कम्युनिस्ट पार्टीसँ जुड़ल छलाह। से ओ सभकेँ सम्मानपूर्वक भोजन करौलाह।
एहि घटनाक बाद यादव समाजमे भारी हलचल मचि गेलैक। ओहि दिनसँ राम श्रेष्ठ जीअपन नामक संग 'यादव' लिखब छोड़ि देलाह आ अपन साहित्यिक नाम 'राम श्रेष्ठ दीवाना' अपनौलाह। ई नाम केवल नाम नहि, बल्कि सामाजिक अन्याय आ जातिगत भेदभावक विरुद्ध हुनकर प्रतिरोधक प्रतीक बनि गेल य। कम्युनिस्ट पार्टीसँ हुनक वैचारिक मतभेद धीरे-धीरे बढ़ैत गेल। सन् १९७५ मे तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधीजी देशमे आपातकाल लागू कएलनि। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आपातकालक समर्थन कएलक, मुदा ओ एहि निर्णयसँ सहमत नहि रहला।
ओहि वर्ष ओ खिरहर उच्च विद्यालयसँ मैट्रिक परीक्षा दैत रहथि। छात्रसभक संग विचार-विमर्श कऽ ओ विद्यालयमे तालाबंदी करबाक निर्णय लेलनि। एहि आन्दोलनक कारण प्रशासन हुनका गिरफ्तार करबाक तैयारी कऽ रहल छल।
एक राति लगभग दस बजे ओ विद्यालयक छात्रावासमे भोजन कऽ रहल रहथि। ओहि समय विद्यालयक चपरासी अशर्फी कामैत दौड़ैत आबि कहलकनि—“पुलिस अहाँकेँ पकड़ए आबि रहल अछि, जल्दी भागू- पराउ।”
ओ बिनु समय गँवौने अन्हारक लाभ उठा कऽ पानिसँ भरल एकटा डबरामे कूदि पड़लाह। डाँड़सँ ऊपर धरि पानि छलैक। धोती आ कमीज पूरे भीजि गेलनि। ओतयसँ लगभग दू किलोमीटर दूर एकटा आमक बगैचामे पहुँचलाह। ओतए एकटा लहासक चिता जरि रहल छलैक।
ओ नास्तिक विचारधारासँ प्रभावित भऽ चुकल रहथि, तेँ भूत-प्रेतक कोनो भय नहि छलनि। चिताक आगिसँ अपन भीजल कपड़ा सुखेलाह आ रातिक लगभग दू बजे ओतयसँ निकलि नन्दी भौजी चौक टपैत तिसियाही उच्च विद्यालयक छात्रावासमे पहुँचि गेलाह।
ओतए शिक्षक श्री रामाशीष महतोजी हुनक सहायता कएलकनि। ओ हमरा एकटा चदैर देलकनि आ किछु दिन धरि गुप्त रूपसँ शरण सेहो देने रहनि। बाहर एकतारे मूसलाधार वरखा भऽ रहल छलैक। बादमे जानकारी भेटलनि जे ओहि राति पुलिस हुनका घर पर सेहो छापा मारने छलै, मुदा ओ पकड़ाइ सँ बाँचि गेलाह।
भोरक करीब चारि बजे ओ नहरक काते-कात चलैत नेपाल सीमाक नजदीक पिपरोन गाम पुंगलाह आ ओतयसँ जनकपुर (नेपाल) चलि गेलाह। जनकपुरमे हुनक सहपाठी मित्र दिनेश सिंह रहैत छलाह। हुनके घरमे ओ लगधक चारि मास धरि गुप्त रूपसँ रहलाह। कठिन परिस्थितिक बीच मित्रक सहयोग आ अपन धैर्यक बल पर ओ सुरक्षित रहलाह। दि०२ दिसम्बर १९७२ केँ मधुबनी जिलाक सेलीबेली गाममे एक अत्यन्त दुःखद घटना घटल छल। ओतुक्का महंथक षड्यंत्रमे सात गोट कम्युनिस्ट कार्यकर्ताक हत्या कऽ देल गेल रहैक । एहि शहादतक पीड़ा हुनक मोन पर गहींर प्रभाव छोड़लकैक। ओ हुनक स्मृतिमे एक कविता लिखलाह, जाहिक प्रारम्भिक पंक्ति छल—
"सब कहैत छथि संतू जी,
बड़ वीर मरदाना छलाह।"
संतू जी एकटा विद्यालयमे शिक्षक छलाह, मुदा समाज परिवर्तनक उद्देश्यसँ नौकरी छोड़ि कम्युनिस्ट आन्दोलनमे सक्रिय भऽ गेल छलाह। एहि घटनासँ दिवाना जीकेँ सामाजिक न्याय आ संघर्षक महत्वक गहन अनुभूति भेलैक।
सन् १९७६ मे हुनको पिता हैजासँ गम्भीर रूपसँ बीमार पड़ि गेलाह। ओहि समय ओ घरसँ दूर मजदूरी कऽ अपन पढ़ाइ - लिखाय चला रहल रहथि। समाचार भेटिते ओ स्थानीय चिकित्सक डॉ. श्याम नारायण कामति केँ संग लऽ कऽ घर पहुँचलाह। डाक्टर साहेब लगातार उपचार कएलनि आ तीन दिनक अथक प्रयासक बाद पिताजी केँ होश आएलनि।
डाक्टरक फीस देबाक लेल ओ अपन फुलही लोटा आ थारी तीस टाकामे बन्धक राखि देलाह। मुदा डॉ. कामत एको टाका लेबाक अस्वीकार कऽ देलनि। केवल एतबे नहि, पिता लेल आवश्यक पथ्य-पानीक व्यवस्था सेहो अपन खर्चसँ करौलनि। हुनकर ई मानवीय व्यवहार हुनका जीवनभरि महानताक प्रेरणा दैत रहलनि।
बादमे ओ हुनक सहयोगसँ प्रेमचन्दक लगभग सभ उपन्यास पढ़लथि। हुनक आग्रह पर डॉ. कामतजी अनेक गरीब लोकक निःशुल्क उपचार सेहो करैत रहलाह। से ओ त्योंथ पंचायतक मुखिया आ कम्युनिस्ट पार्टीक नेता सेहो छलाह।
हुनक पड़ोसी पंचायत मनपौरक मुखिया कामरेड राधाकान्त मिश्र सेहो अत्यन्त संवेदनशील आ जनपक्षधरता व्यक्ति छलाह। हुनक संग ओ अनेक सामाजिक आन्दोलनमे भाग लेलाह। ओ हुनकर कविता पढ़ैत छलाह आ साहित्यक प्रति विशेष रुचि रखैत छलाह।
हुनक गामक लोककलाकार भूला यादव अपन पत्नीके निधनक बाद, एक विधवा चमार समुदायक महिलासँ पुनरवियाह कएलनि। एहि वियाहक विरोधमे गामक अधिकांश लोक हुनका समाजसँ निकालबाक निर्णय लेलकैक। भूला यादव हुनका सँ सहायता लेल आएलाह। ओ स्पष्ट रूपसँ हुनकर पक्षमे ठाढ़ भऽ गेलाह।
दोसर दिन ओ हुनका बेनीपट्टी न्यायालय लऽ गेलाह आ कानूनक अनुसार हुनक विवाह सम्पन्न करौलाह। प्रशासन सेहो एहि कार्यमे सहयोग देलकनि। मुदा एहि साहसिक कदमक परिणामस्वरूप एक सप्ताह बाद किछु असामाजिक तत्व रातिमे हुनकर झोपड़ीमे आगि लगा देलकैक। हुनक घर, बहुमूल्य पुस्तकसभ आ नाटकक अनेक पाण्डुलिपि सभ भस्म भऽ गेलैन।
एतेक भारी क्षतिक बादो हुनकर पिता हुनक मनोबल बढ़बैत कहलनि—“बेटा, हम तोहर संग छी।” हुनकर ई विश्वास हिनका जीवनक कठिनतम क्षणमे सेहो संघर्ष करबाक शक्ति देलकनि। जीवनक बादक वर्ष सभमे हुनका अनेक व्यक्तिगत कठिनाइ सभक सामना करए पड़लनि हय। फेरो सन् २०१९ मे एहन घटना सेहो घटलैन, जाहिमे हुनक अनेक पुस्तक, पाण्डुलिपि आ साहित्यिक सामग्री नष्ट भऽ गेलैक । ई घटना हुनक साहित्यिक जीवन लेल अत्यन्त पीड़ादायक छलैक , मुदा ओ अपन लेखन आ सामाजिक प्रतिबद्धतासँ पाछाँ नहि हटलथि।
सन् १९९९ मे ओ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीसँ इस्तीफा दऽ देलनि। तत्पश्चात् राष्ट्रीय जनता दल (राजद.) सँ जुड़लथि, मुदा समयक संग हुनका ओतहु वैचारिक असहमति अनुभव भेलैक। हुनका विश्वास छलनि जे समाजमे वास्तविक परिवर्तन समानता, न्याय, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता आ भारतीय संविधानक मूल आदर्शक आधार पर सम्भव अछि।
जीवनक साधल अनुभव सभ हुनका महात्मा बुद्धक करुणा, कबीरक निर्भीकता, संत रैदासक समतावादी दृष्टि, कार्ल मार्क्सक सामाजिक चिन्तन, ज्योतिराव फुले आ सावित्रीबाई फुलेक शिक्षा आन्दोलन, पेरियारक तर्कवाद, जगदेव प्रसादक सामाजिक न्याय, वाल्टेयरक विचार-स्वतंत्रता, नेल्सन मंडेलाक संघर्ष आ जननायक कर्पूरी ठाकुरक जनसेवा, गहिंरपनसँ प्रभावित कए्यलकनि हय ।
एहि महान व्यक्तित्व सभक विचारकेँ अपन जीवनक मार्गदर्शक बना कऽ ओ बौद्ध दर्शनक दिशा अपनौलनि। डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकरक संविधानवाद, सामाजिक समता आ मानवाधिकारक आदर्श हुनक सम्पूर्ण जीवनक प्रेरणास्रोत बनि गेलैन।
हुनक सम्पूर्ण जीवन विपणता, भूख, संघर्ष, सामाजिक अन्यायक विरोध, साहित्य-सृजन आ जनआन्दोलनक यात्रा रहल अछि। एहि अनुभव सभ सँ हुनका कवि, नाटककार आ समाजक प्रति उत्तरदायी लेखक बनौलकनि हेन।
आइयो हुनक परम विश्वास छैन जे लेखनी समाज परिवर्तनक सबसँ प्रभावशाली माध्यम य । जँ साहित्य पीड़ित, शोषित आ वंचित लोकक आवाज बनि सकैत छैथ, तँ ओ अपन वास्तविक उद्देश्य पूरा करैत अछि।
एहि विश्वासक संग ओ सदिखन मानवता, समानता, बंधुत्व आ न्यायपूर्ण समाजक स्थापना लेल संघर्षरत छथि।
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
२.६. लाल देव कामत-

Suggested citation: लाल देव कामत. “बहुजन कवि आ नाटककार राम श्रेष्ठ दीवाना : एक संक्षिप्त बायोग्राफी.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 446, 2026-07-15. https://www.videha.co.in/research/2026/446/बहुजन-कवि-आ-नाटककार-राम-श्रेष्ठ-दीवाना-एक-संक्षिप्त-बायोग्राफी.htm

मूल विदेह अंक / Original issue