डा धनाकर ठाकुर
चेतना समितिक द्रोणाचार्य रमणजी
रमणजी पर पोथी निकलए आओर हम नहि लिखी से सम्भव नहि आओर हुनक समग्र मूल्यांकन सन झंझटटिया काज केओ करत नहि किन्तु रमणजी आधुनिक मैधिली काल जकरा हम 1973 सँ जनैत छी जहिया हमरा द्वारा वायरस पर मैथिली भाषामे उत्कृष्ट लेखक सृजन भए गेल संभवतः ओ रमणजीक साहित्यिक काल कहाओत जाहिमे ओ मैथिलीक राजदरबारी चेतना समितिक दरबारमे गुरुसम्पादकीय रोलमे रहलाह निर्विवाद, मधुर, सौम्य मैथिलीक बुद्धिमत्ताक प्रतीक ओ प्रस्तुतकर्ता तेँ जिनकर द्रोणप्रभामंडलीमे अनेक चेला चीनी भए गेलाह किन्तु श्वाँसहुँमे मैथिली बाँचनिहार गुरु गुड़हि रहि गेलाह बिना साहित्य अकादमी पुरस्कार पौने लगातार मैथिली लिखैत नगर गाम डगर-डगर सगर रातिमे मैथिलीक दीपक जरबैत जँ आधुनिक मैथिली आइ साहित्यिक रूपमे जे-जेना अछि ओहिमे कोनहुँ मैथिली प्राध्यापकक अपेक्षा गुरूतर काज केने छथि रिजर्व बैंक कर्मचारी रमणजी जे एतेक रिजर्व रहैत छथि कि केओ हिनका बुझिए नहि पाएल जे मैथिली लेल ओ की-की रिजर्वक रखने छथि। हिनका गुरु द्रोणाचार्य जिनक अधिक पटनिया शिष्य यदि कौरव सम नहि कही त आओर क्वचित् पांडव सम तथापि जहिया कहिओ मैथिली राज्यसभाक विवरण लिखल जैत मैथिलीक लालू दुःशासनीय चीरहरण भेल कोनहुँ प्रतिरोध नहि, गुरु द्रोणाचार्य आँखि मुनि रहबाक अतिरिक्त की करिताह, मिथिला राज्यक बात तऽ चेतना समिति लेल सांढ़क लाल कपड़ा यद्यपि ओहि भवनमे डा जयकान्त मिश्रकेँ संक्षरकमे मिथिला राज्य संघर्ष समितिक स्थापना हमरा द्वारा 8.1.1995 क भेल आओर हम प्रायः समितिक द्वारा एहि वा जाहि कारणसँ बारल रहल होइ रमणजीक हृदयमे ओतेक जे कोनहुँ अमैथिलहुँ छात्र भोरमे परीक्षा देब जाइत बाथरूम जेबाक आज्ञा मंगलक आओर बादमे हमर नाम लऽ लेलक त स्नान-जलपान करा अज्ञातहुँकेँ पठौनिहार उदार व्यक्तित्व जिनक हुनकरहि सन लोकक चलते ने आइ मैथिली वा काल्हि मिथिला राज्य होएत जाहि लेल बिना संग चेतना समितिक प्रतिबद्धता वांछित आओर एहि एकपंक्तीय लेखन एहि रम्य, सुरम्य मैथिली लेखक, सम्पादक, समालोचक, संगठक रमणजीकँ जिनक बिना मैथिलीक आधुनिक अर्धशताब्दीक कोनहुँ आकलन अपूर्णहि मानल जैत, कोनहुँ पुरस्कारसँ ऊपर वस्तु भए गेलाह जिनक नाम पर आइ ने काल्हि यैह समितिक पुरस्कार हैत भनहि ओ या हम ओ देखए रहि वा नहि।