मुख्य सामग्रीपर जाउ · Skip to main content
VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
Twitter / X Facebook Archive
विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
विदेह नूतन अंक
विदेह ई पत्रिकाक नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू: [Windows / Linux: Ctrl + F5 / Ctrl + Shift + R  ·  macOS: Command (Cmd) + Option + E + F5 / hold Shift + Click the Refresh button]


 

जगदानन्द झा "मनु"

२ टा गजल

हम अहाँकेँ देखिते सुधि बिसरि गेलौं

लेसने बिन आगि सौंसे पजरि गेलौं 

 

प्राण लेलक आँखि मिलनाइ हरजाइसँ

खा कऽ मोने मोन मुँगबा पसरि गेलौं 

 

अछि जकर मुस्की इजोते सगर चकमक

मोरिते मुँह पानि बिन हम  पिछरि गेलौं 

 

स्वर्ग भेटल अहाँ बिन नरक भेलै 

छोरि सुख बैकुंठकेँ झट ससरि गेलौं

 

देख निरमल नेह हुनकर हिया गदगद

बुझि सफल ‘मनु’ भेल सपना झहरि गेलौं

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम 2122-2122-1222)

 

 

पोथीक तर दबि पढ़ुआ सगर मरि गेल

जे प्रेममे  डूबल जीविते तरि गेल 

 

सदिखन जतय मनमे छल डरक आतंक 

अबिते अहाँके नव फूल फल फरि गेल

 

धरती तपल छल जे पानि बिन तरसैत

हथियाक हँसिते बरखा निमन परि गेल

   

आनक सुखक चिंता बेस अप्पन दुखसँ

डाहसँ कतेको घर तेल बिन जरि गेल 

      

पाथरसँ ‘मनु’ शाइर बनि रहल अछि आब

तोरासँ जे  मृगनयनी  नजरि लरि गेल 

 

(बहरे सलीम, मात्राक्रम - 2212-2221-2221)

-जगदानन्द झा ‘मनु’, मो० न० +९१ ९२१२-४६-१००६

 

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।