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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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संतोष कुमार राय 'बटोही'
भिक्षुक खबासक वंशावली (धारावाहिक संस्मरण)- (पहिल खेप)

गप्प ई छै जे हम सोचलियै आओर खोजलियै जे हमर जनम कोन खानदान मे भेल अछि। हमर पुरखा के छथि। हम मंगरौना मे भगिनमान छी। जखन कक्का सभ सँ पुछलियै जे अपना सभ मंगरौना केर भगिनमान कोना भेलहुँ अछि, हुनका सभ लग बेसी किछु जानकारी नहि छलैन्ह। ओ सभ कहलाह जे अपना सभ के पुरखा के बेटा नहि छलैन्ह। बेटिए टा छलैन्ह। भिक्षुक खबास मंगरौना गाम केँ बसेनिहार पाँच भैय्यारी मे सँ छलाह । गामक वंशावली बेनिहार सभ सेहो हमरा सभ केर संग बेमानी केलाथि। ओ अपन दियादक वंशावली बना लेलैत आओर अपना वंशावली मे अपन पाँच भय्यारी मे भिक्षुक खबासक उल्लेख सिर्फ केने छथि। हम पुछबो केलियैन्ह हुनका सभ सँ जे किछु आओर हमरा खानदानक किछु जानकारी अछि तँ कहल जाउ, परञ्च ओ कहलाथि हमरा तोहर खानदान सँ कोन मतलब । ओ सिर्फ अपन दियादक वंशावली केँ लेखन केलाथि आओर हमरा सभ केर लेल धृष्टराष्ट बनि गेलाह छथि । भिक्षुक खबास केर नीचा मे सिर्फ बेटी लिख कऽ छोड़ि देलथिन्ह।

हम सभ यानी हमर दियाद बेसी नहि छथि। एकेटा घरारी पर बसल छी। स्वर्गीय नागेश्वर राय हमर बाबाजी छलाथि। हमर बाबूजी स्वर्गीय चिरंजीव राय छलाथि। हम छोटे रही तँ बाबा स्वर्गवास भऽ गेलाह। कने-कने याद अछि जे दलान जगहजे अखन धरि अछि ओतऽ बाबा केँ गट्ठुल्ला जकाँ घर रहैन जे मरनासन्न अवस्था मे छेलैह। बाबा कलकता गेलाह आओर मोन खराब भेल रहैन्ह दवाई-दारू ठीक सँ नहि भेलैन्ह ओ कलकत्ते मे मरि गेलाह अछि। कालीघाट अश्मशान मे हुनका लकड़ी सँ जरौल गेल रहैन आओर देबार पर लिखल रहै स्वर्गीय नागेश्वर राय जखन हम छोट मे अपन मायक संग कलकत्ता गेल रहियै तँ देखलियै। बाबा केर किछु लारदुलार हमरा नहि भेटल । काकी सभ कहैत रहतिन्ह जे बाबा केँ खाई-पीयैय मे गाम पर दिक्कत भेल रहैन्ह , तँ ओ अपन बेटा सभ लग गेलाह जे किछु लाभ भेटत , परञ्च ओ कहै केँ गेल रहतिन्ह जे मोहनपुर वाली काकी कें आब हम नहि गाम नहि एबह। ठीके ओ फेर गाम घुमिक नहि एलाह । कलकत्ता जै बेर मे अपन घरक दाना हुनका नसीब नहि भेलैन्ह। दोसर घरक दाना खाऽकऽ ओ कलकत्ता गेलाह अछि।

दाय केँ हम नहि देखलियै। हमर जनम सँ पहिनहि ओ स्वर्गवास भेल छलीह। देवकृष्ण भैय्या केर जनम भेल रहैन्ह। हमर छोट बहिन जे हमरा सँ नमहर छथि हुनको जनम नहि भेल रहैन्ह। दाय कें पेट मे दरद भेलैन्ह माय बाध गेल छलीह । हुनका कियो बाधे मे हाक द के कहलकैन्ह जे रामकिशन माय मुरहद्दी वाली केँ दरद उठलैन्ह आओर मरि गेलथिन्ह। दाय गोर रहथिन्ह माय हमरा कहलीह।

अपन बाबूजी सँ पहिने हम अपन आदि पुरखा केँ लेल लिखऽ चाही छी। जानकारी देल गेल अछि जे हम नारायणपुर गाम जे झंझारपुर प्रखण्ड मे अछि ओत सँ हमर आदि पुरखा घर जमाय मंगरौना मे बसल छथि। घर जमाय बसला सँ ओ अपन गरिमा आओर अपन नव पीढ़ी केर विकासक दृष्टि नहि रखलाह। पाँचम हिस्सेदार रहैत, परञ्च अपन जमीन-जायदाद केँ सुरक्षित नहि रखि सकलाह। जमीन-जायदाद कम होयत चलि गेलै। किछु मजबुरी मे बेचलाथि, किछु दान केलाथि किछु कोंरियाठपन्नी केर कारणे बिका गेलै ।


 - संतोष कुमार राय ' बटोही '
; ग्राम - मंगरौना

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