
बद्रीनाथ राय
’अमात्य’
किएक सूतल छी यौ!
कर्मनिष्ठ कर्पूरी हमर महान।
कतऽ सूतल छी यौ!
कर्मनिष्ठ कर्पूरी हमर महान। । 1
शोषण चक्र चलै छै एखनो,
वंचित पिसा रहल छै।
हम छी दलित उपेक्षित शोषित,
अहीं हमर भगवान।।
कतऽ सूतल....... 2
अन्हरिया सिंहासन बैसल,
खा बैसल संसाधन।
बहुत विवशता वंचित के छै,
उगियौ पूनम चान।।
किएक सूतल...... 3
कुक्कुड़ व्यास पीठपर बैसल,
अजपा जाप करैए।
उपजल धान चरैए साँढ़े,
कहबैए श्रीमान ।।
कतऽ सूतल...... 4
हमर नोर झहरैए एखनो ,
नञि सरकार तकैए।
रास बिहारी मंडल काका,
करियौ उचित निदान। ।
कतऽ सूतल छी......। 5
कर्णक छै उपहासित जीवन,
शंम्बूक नित्य मरैए।
रोटीक टुकड़ा छीनल जाइए,
जागु दया निधान।।
कतऽ सूतल.......। 6
हँसी हमर अछि बन्हकी लागल,
अपमानित अछि जीवन।
घोर अन्हरिया के मुट्ठीमे,
बन्द सुरुज छै चान।।
कतऽ सूतल छी........। 7
नोरे मे बोरल जीवन अछि,
एखनो देह उघारे।
देखियौ एखनो कानि रहल अछि,
बहुजन के संतान।
कतऽ सूतल छी यौ......। 8
लाठीसँ संवाद होइत अछि,
सत्य बात के बाजत?
हम जे एखनो साँस लैत छी,
अहींके ई अवदान। ।
किएक सूतल छी.......। 9
छै समाजमे बहुत विषमता,
महग पानि खूँन छै सस्ता।
शोषितके भगवान अहीं छी,
वंचित के छी प्राण।।
किएक सूतल छी......। 10
हमर व्यथा सुनियौ यौ काका,
सत्ये बात कहै छी।
हम लहासके जगा रहल छी,
अद्भुत अछि अभियान। ।
किएक सूतल छी यौ.........। 11
बेंग बेङ बजैए जोरे एखनो,
कोयली मौन व्रती छै।
मत्स्य न्याय व्याप्त छै एखनो,
करू हमर उत्थान। ।
किएक सूतल छी यौ....। 12
अंगुठा काटल गेल हमरो,
अछि अवरुद्ध विकास ।
खूँनसँ लथपथ देह प्राण अछि,
विधा दियऽ नव दान।।
किएक सूतल छी.......। 13
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