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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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लालदेव कामत

एखन बजबाक समय अछि : पाठकीय प्रतिक्रिया

उपरोक्त कविता संग्रह मैथिली पोथी ९८ पृष्ठक य,जकर दाम २९० टाका आओर आई एस बी एन ९७८- ९३- ४८८६५-१८-२ नं० छै। तकरा २०२५ ई०मे प्रकाशित निर्मली सँ पल्लवी प्रकाशन केलक हेन। ऐ पोथीकेँ रचनाकार श्री प्रदीप पुष्प जी अपन माता - पिताकेँ समर्पित केलनि हय। तथ्यपूर्ण काव्यके रचैता कविवर प्रदीप पुष्प अपन नव रचना लगधक दू दर्जन सँ बेसियेक संग्रह " एखन बजबाक समय अछि" आनि पाठकक समक्ष परोसलनि अछ। एहि नवोदित कवि सह गजलकार केर परिचय पहिले जानि ली। मूलनाम प्रदीप कुमार जीके जन्म २३ फरवरी सन् १९८२ केँ श्री हरेराम मंडलजी आ श्रीमती लक्ष्मी देवी जीक घर भेलनि। हिनक बाबाजी संत प्रवर ननौर ग्राम - पंचायतक चर्चित मुखिया रहथि। मधुबनी जिलाक रूद्रपुर थानाक अन्तर्गत ई प्रसिद्ध गाम अहि। एतय मैथिली साहित्यक 'सगर राति दीप जरय ' बैनर तर त्रिमासिक मैथिली कथा गोष्ठी प्रदीप जी आयोजित करौने रहथि, आ अपन एक अंग्रेजी पोथीक लोकार्पण सेहो। हिनक साहित्यिक अभिरुचिक फलस्वरुप पहिल मैथिली भाषा मेँ पोथी 'मोनक देहरि पर' ग़ज़ल संग्रह २०२१ ई० मे छपल छन्हि, जकर दोसरो संस्करण बहरायल छैक। श्री प्रदीप जीक' साहित्यिक गुण प्रकाश आकाशवाणी आ दूरदर्शनके श्रोता - दर्शकगण बीच होईत रहलनि हेन। ओ नालन्दा खुला विश्वविद्यालय - पटना सँ हिन्दीमे स्नातकोत्तर आ रामपुर -जमालपुर (दलसिंहसराय) केर प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय सँ डी एल एड० कयने छथि। जीविकोपार्जन लेल पूर्वमे प्रखंड शिक्षक उत्क्रमित म०वि०विक्रमपट्टी - खानपुर (समस्तीपुर) आ २०२४ सँ स्नातक ग्रेड हिन्दी उ०म०वि०-रढ़ियाम - भसौर ,बेनीपुर(दरिभंगा) वर्तमानमे धकजरी (अंधराठाढ़ी) म विद्यालय अध्यापक छथि।
ऐ पाँतिक लेखक सँ पहिल भेंटघांट १० शाल पूर्व प्रदीप जीकेँ झंझारपुर मासीक काव्य गोष्ठीमे नूतन बरखक अवसर पर भेल रहन्हि। नियमित आयोजक श्री आनन्दजी माँछ - भातके बिझो संध्या काल करौलनि तँ प्रदीपजी बजलाह हम बिनु कंठीधारी दूधा वैष्णव छी। से प्रस्तुत हिनक कविता संग्रहक पोथीमे "बाबा" शिर्षककेँ पढ़हैत काल पाठक लोकनिके झलैक उठत ई दृष्टांत। पाँति द्रष्टव्य -: .... बाबा
बढ़ मोन पड़ै छी
अहाँ खेबा काल
हम जोगौने छी अहाँक
कहल आ आदेश
तेजने छी माँछ - माँसु आइयो धरि
तेँ दोस - महिनमे असगरे
बनल छी वैष्णव
मने बिनु कंठीक बबाजी ..........
भावसँ भरल हिनक कविता बढ़ सरस छन्हि, परिपक्व विचारकेँ कविताक माध्यम प्रस्तुत करबाक एक नायब तरीका ताकलाह अछि। ओना ओ गजल विधामे अपन बात बेसी गहिंरपन आ भावपूर्ण देखा चुकल छथि। हिनक अधिकतर कविता स्त्री विमर्श सँ ओतप्रोत छन्हि,जे पाठ शिर्षक 'यै अहाँ' , ओ नइ बँचैत अछि, सलमाक प्रति,तूँ.. आदि।
पर्यावरणीय वनस्पतिमे सनातनी व्यवस्था अनुकूले जतय बड़ - पिपर गाछक बिशालताक पैघौत देखबाक परम्परा बनल रहल अछि; ताहिठाम कवि बिनु पंजी व्यवस्थाक समान्य लोकक मोनमे दुइबक अनिवार्यता अदौ सँ उपस्थित रहल एक प्रतीकक तुलना करैत नहिं अघाय छथि। आओर बहुजनमे सचेत होय ले संदेशक संचार कयने छै। शोषण केर विरूद्ध पाँतिक गरहैन एहि तरहेँ भेल य -:
.... तैयो निर्विकार भावे उपस्थित रहल हरेक पूजामे
बेरि - बेरि नोचा कऽ अपन छोटछीन देह
उखड़बा कऽ अपन बाँहि
गमाकऽ अपन नवजात
बनल रहल सनातनी व्यवस्थाक संवाहक
आस्थाक बलिवेदी पर ..कटैत
तेजैत रहल प्राण सभदिन .........!
मनुख छी हम 'कवितामे' कविक संत्रास उजागर भेल अछि ,जे पढ़ैतकाल अहाँक रूईयां - रूईयां भुटैक जाएत। पछुआयल मानवके दोहण - शोषण जे प्रायोजित छै, से सत्ताधारी विधायक जे नै करा छोड़य! दढ़ ओ बांचल रहैत आयल जे चारण - गानमे डुबल रहल हेन। तेँ बगुला आ हाँसमे अन्तर बुझबाक खगौट जनेलाह हें।
ओ नइ बँचैत अछि.... शिर्षक कवितामे डेग - डेग पर मनुख केँ अवघात सँ प्रभावित होईत चिन्तित छथि ; कविजी तेसर अन्तरामे बेटी केँ सब किछु सँ बँचैत पपियाह मोनक अधलाह नेत सँ नै बाँचैत हेबाक मनोवैज्ञानिक दर्शन रखबामे समर्थ भेलाह हेन। संग्रहक सब कविता एक सँ एक उपरा उपरी आ पठनीय छैक। पल्लवि प्रकाशनके मुद्रण त्रुटि सँ सुधी पाठककेँ शव्दक अर्थ असहज करैत छैक,तेँ भविष्यमे पुर्नमुद्रण मेँ किछु संशोधन कय सुधार आवश्यक अछि। यथा - तूँ .. शिर्षकमे सुनने केँ सुन ने होयत। बितैत उमर आ हम पाठमे ड़ केर जगह ड अक्षर आनो ठाम भ' गेल छै। कविता लेखन केर दौड़मे मैथिली साहित्यमे वाढ़ि आयल छैक,अकविता विधामे शव्द ,शिल्प ,कथ्य केँ अनुप्रमाणिकताक संग रचै ले आब रस , अलंकार,लक्षणा - व्यंजना नहि परवाह कयल जाईछ। कवि जीक निशन्न रचना तुलनात्मक रुपेँ सभक रचना सँ पृथक स्थान बनौने अछि।
 

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साहित्य अकादेमीक संकीर्ण मैथिली भाषा विभागसँ विदेह (मैथिली साहित्यक समानान्तर मंच) ऐ अर्थमे सेहो फराक अछि जे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिका सन सहभाषाकेँ संग लऽ कऽ मिथिलाक बोली-वैविध्यक समग्र चित्र देल जाइत अछि। विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक भाषा विज्ञान, रचना आ व्याकरण मैथिलीक संग देल गेल अछि मैथिलीक एकटा समानान्तर व्याकरण, रचना आ भाषा विज्ञान (ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाकेँ संग लऽ कऽ)- गजेन्द्र ठाकुर, संगे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक साहित्य ई-प्रकाशित आ समीक्षित सेहो होइत अछि।– गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक, विदेह ISSN 2229-547X
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