
बद्रीनाथ राय ’अमात्य’
श्राद्ध
हम चित्ते चिन्तित भ' आकाश दिश तकैत निराश भ' सूतल छलहुँ।बोखार लागल छल,
आँखिसँ दहो बहो नोर वेगसँ बहैत छल।पथ्य पाइनक कोनो ओरियान नञि।स्वस्थताक
कामना केनिहार सेहो केओ नञि।परिवारक सब सदस्य हमर श्राद्धक भोजक भूखल
छला।आँङनमे विमर्श करैत सब सदस्य बैसल छला।विमर्शक विषय छल जे श्राद्ध कोना
होबक चाही?,श्राद्धक खर्चक इन्तजाम लेल गंभीर चिन्तन मंथन करैत सब चिन्तित
छला।कर्ता के बनता?एहि निर्णायक बिन्दुपर विमर्श करैत सब केओ अँटकल छला।हम
जाहि घरमे सूतल छलहुँ ताहिमे दूटा द्वार, एकटा पूरबसँ दोसर पश्चिमसँ जे
द्वार आँङनमे प्रवेश करबाक लेल छल। रास्ता कातमे घर भेलाक कारणे रास्ताक सब
गतिविधी स्पष्ट सुनना बुझना जाइत छल। हम सुनलहुँ जे हमर नाम पकड़िक' हमरा
केओ बजा रहल छल। आवाज कोनो परिचितक
छल।कोहुना उठबाक प्रयास
केलहुँ मुदा प्रथम प्रयासमे नञि उठल भेल। फेर पुन: हिम्मत बान्हि दोसर
प्रयासमे कोहुना उठि क बैसलहुँ। ताबत देखैत छी जे दरवाजा पर दूटा साइकिल
ठार कएल अछि। आगन्तुक जे हमर मिडिल इसकूलक सहपाठी छला। पुन: हमर नाम पकड़ि
जोरसँ आवाज देलनि।हम घुमिक' तकलहुँ, नजरिसँ नजरि मिलल।हमर मित्र सहटिक' लग
आबि पुछलनि। की होइत छऽ?हमर मित्र हमर देह छुबैत बजला, हौ तोरा बहुत बेसी
बोखार छऽ!दवाई दारू किछु लेलऽ की नञि?हमरा दिशसँ किछु जबाव नञि भेटलापर
मित्रके बुझबामे किछु भाङठ नञि रहलनि।ओ बजला-हौ तोहर शरीर टुटि गेल छऽ,बहुत
कमजोर भ गेल छऽ।मित्र पुछलनि-कतेक दिनसँ बोखार लगैत छऽ?मुदा हमरा जबाव
देबाक किछु सामर्थ्य नञि बाँचल छल।मित्र पुन: बजला, हौ केकरो मार्फद कमसँ
कम समादो पठेबाक चाही!रस्ता कातमे घर छऽ ,हमर ग्रामीणक एहि रस्तासँ बहुत
अबरजात छै।मित्रक बेर बेर प्रश्न पूछब आऔर हमरा द्वारा जबाव देबाक नञि
सामर्थ्य रहलाक कारणे हमर बहैत नोरक वेग आऔर बढ़ि गेल छल ।मित्र बजला कानऽ
जुनि।हम सब बात बुझलियै, तोहर नोर हमरा सबटा कहि देलक।प्रेम न्याय परोपकार
सदाचार लुप्त भेल जा रहल छै,मनुष्यमे स्वार्थपरता बहुत बेसी बढ़ि रहल छैक
,मनुष्यक विस्तारवादिता आऔर लालच के समक्ष प्रेम सदाचार लाचार आऔर सत्य
सुस्त भ सूति रहल छैक जे देश समाज आऔर मानवताके लेल घातक छै, निष्ठा बिष्ठा
सदृश उपहासित उपेक्षित भेल जा रहल छै।हमर सहपाठी मित्र अपन बेटा के हमर
परिचय दैत कहलथिन बौआ राजेश इएह तोहर अस्सल पीत्ती छथुन।हम हिनके पैरक
पुण्य प्रसादसँ मास्टर भेल छी।तोहर बाबा बोनिहार आऔर दा॓इ गोबर बिछनी
छलखुन।गोबर बिछ चिपड़ी पाथि, ओकरे बेच कोहुना गुजर होइत छलै,बुछऽ जे गोबरे
हमर जीवन छल। किताब किनबाक सामर्थ्य कहियो नञि भेल।हिनके किताबक भरोसे हम
इसकूल अबैत छलहुँ।हमर अन्हार सनक जिनगी अही चरणक कृपासँ इजोड़ भेल अछि। ई
चरण साधारण चरण नञि हमर चारूधाम थीक।तू गामक चौकपर जा आऔर हिनका लेल
दोकानदारसँ बुझिक' बोखारक दवाई नेने आबऽ।बौआ राजेश साइकिलसँ चौक दिश बिदाह
भेला। मित्र पुछलनि हौ भाइ कुर्ता साफ करबा लेबऽ से नञि!फटले छै ताँइ
की!साफ रहक चाही।लाबऽ हम साफ कराक' नेने एबऽ।मित्र हमर घामसँ भीजल मैल
महकैत कुर्ता के अपन झोड़ामे राखि लेलनि आऔर बजला --भाइ हम विवाहक निमित
बजार करबाक लेल मधुबनी जा रहल छी,भतीजीक विवाह छऽ आऔर पीठेपर भतीजाक विवाह
सेहो छऽ।दुन्नू दिन तोरा समधी मिलान करऽ पड़तऽ।काड सेहो छपा गेल छै,काडमे
तोहर नाम क्रमश: वरिष्ठ समधी आऔर स्वागतकर्तामे छैक। राजेशके दोकानदार
पुछलकनि जे किनक दवाई छैक?की उमर छै?राजेश हमर नाम दोकानदारके कहलकैन।हमर
नाम सुनितहिं एकटा देहाती डाक्टर जे तखन दोकानेपर छला बजला -हुनका देखभाल
केनिहारक अभाव छै।हम कतेको बेर हुनका लेल पूर्जा लिखने छी मुदा हुनका लेल
दवाई किननाहर केओ नञि छैक।तखन राजेश बजला--श्रीमान एकबेर आऔर पूर्जा लिखल
जाए,हम फीस दैत छी। डॉक्टर फटाफट पूर्जा लिखलनि,राजेश फीस देलखिन,दवाई लेला
आऔर एक डिब्बा बिस्कुट ल' क' वापिस एला आऔर हमरा लऽग आबि कोन दवाई केना
खेबाक छै से हमरा बुझबैत राजेश बजला --काका खाली पेट दवाई नञि खेबाक
छै,बिस्कुट खाकऽ दवाई खाएब। हमर मित्र सहपाठी हमरा देखाक' दू सय रुपैया हमर
बिछाबनक नीचाँ रखैत बजला --एकरा राखऽ ,हम बाजार जाइत छी।साझमे हम वापसीमे
फेर भेंट करैत जेबऽ।तोरासँ हमरा बहुत विषयपर विमर्श करबाक अछि आऔर विशेष
बात साझमे करब,एतबा कहि हमर मित्र बाजार प्रस्थान केलनि।हमर उदासीनता भरल
मनमे अचानक आनंदक शीतल वसन्ती बसात बहए लागल, मित्रक स्नेह सिक्त भाव भरल
आमंत्रण आऔर शीतल संभाषनसँ बोखारसँ जरैत देह सेहो शीतल होमए लागल।मित्रक
देल विवाहक आमंत्रणसँ तत्काल त्रितापसँ मुक्ति भेटल।मरुस्थल भेल हमर
मर्मस्थल थोड़ेक हरियर भेल आऔर कल्पनाक फलदार वृक्ष पुष्पित पल्लवित होमए
लागल, मन हमर वृन्दावन बनि गेल। मन मयुर नृत्य करऽ लागल। समय कोन गतिमे
कोना बीतल नञि बुझलियै।हम गीत गुनगुनाइत रहि।केओ बाजल बौआ राजेश
!चमत्कार!चमत्कार!साक्षात हमर विधाता दहिन छथि। हम उनटिक' देखलौं हमर मित्र
पुत्रक संङ प्रसन्न मुद्रामें मुसुकी दैत ठार छला आऔर बजला भाइ हम तोहर
फटलाहा कुर्ता दर्जिये लग छोड़ि देलियै, बहुत फाटल छलैक, मित्र अपन झोरासँ
जोड़ा भरि नव सियाओल कुर्ता आऔर जोड़ाभरि नव धोवा धोती हमरा समक्ष रखैत
बजला हम त तोहर कुर्ता भजारक( नापक) बास्ते ल गेल छलियैक आब तुँ कोन दुखे
ओहन फाटल कुर्ता पहिरबऽ।आब तोहर बेटा मास्टर पुतौह मास्टर बेटी जमाए मास्टर
दुनू समधी सेहो मास्टर, समधीन सेहो एकटा पंचायत सेवक दोसर प्रखंड प्रमुख।
सब दिन सब कष्ट की हमरे सब लेल रहतैक ?सब दिन विधाता वामे रहथिन?बिछाबन पर
दवाई आऔर बिस्कुटक डिब्बा यथावत राखल देख राजेश बजला---काका दवाई ओहिना
पड़लै अछि।मित्र सेहो दवाई के यथावत राखल देख अकचकाइत बजला---एकरे कहै छै
चमत्कार जे हमरा लेल शुभ संकेत अछि।तुँ बिना दवाई खेने स्वस्थ भेलऽ आब हमर
बहुत भार हल्लुक भेल।हमरा तोरे सनक एकटा मार्गदर्शन केनिहार चाही।कारण हम
सोहल सुथनी छी मित्र पुन:प्रसन्न होइत बजला---हमर एकटा दरख्वास्त अछि से
तुँ अपन मंजूरी दहक आइ कुमरम(कुंभ भरण)सेहो छैक। कुमरमक विद्धक सब समान
झोरे मे छैक। हमर आग्रह जे तु एखने हमरा संङे प्रस्थान करितहक त बाते दोसरे
रहितैक कारण तुँही एहि सब आयोजनके मुख्य विधिकर छहक।राजेशक दुनू मामा मामी
मौसी सब आएल छैक। ओ सब तोरा भोरसँ खोज करै छथुन। तोरा गेलासँ वातावरण
आनन्दमय भ जेतैक।तुँही हमर आनंद मूर्ति छहक , काल्हि एबऽ से एखने किएक
नञि?आइ कुमरम छैक आऔर विद्धक सब समान बाजारसँ आएल झोरेमे छैक से सुनि हमरा
आश्चर्य भेल आऔर छगुन्ता सेहो लागल, हम बात टारैत बजलहुँ--हम एखन चलबासँ
असमर्थ छी, हम काल्हि भोरे पहुचब ।तुँ जतेक जलदी संभव हो विद्धक सब समानक
साथ समयसँ पूर्व घर पहुँचबाक लेल साइकिल के रास्ता पकराबऽ'। मित्र हमर
बातके गहियाक' पकरैत विरोधक स्वरमे बजला---हम गाड़ी भाड़ा करैत छी, काल्हि
किएक?एखने किएक नञि?हम देखलहुँ मित्रक आँखि नोरसँ डबडबाएल।राजेश अपन पिताक
स्वरक समर्थन करैत बजला--काका अपने एखने आऔर अवश्य चलियौक। बाबूजी दुखी
छथि।हम देखलहुँ राजेशक आँखि सेहो डबडबाएल, जे हमरा लेल धर्म संकटक स्थिति
छल, एहि धर्म संकटसँ तत्काल उबरब हमरा लेल कठिनाह बुझना गेल।हम सत्यमे झुठक
चासनी मिलाक' बात के विश्वसनीय बनबैत मित्रके कहलियनि ---हमर अस्वस्थताक
समाचार सुनि हमर सार हमरासँ भेंट करबाक लेल आबि रहल छथि,आइ हमर घर पर रहब
बहुत जरूरी छैक ।हमर मित्र हारि थाकि मन मसोरि साइकिल पर चढ़ला, एक हाथसँ
साइकिलक हेन्डिल धेने दोसर हाथसँ आँखिक नोर पोछैत आसते पैडिल दैत बेरि बेरि
पाछू घुमि-घुमिक'हमरा दिश तकैत अपन गृहनगर लेल प्रस्थान केलनि। किछु दुर
गेलापर राजेश साइकिल रोकि ठाढ़ भ आवाज दैत बजला---काका काल्हि सवेरे स्नान
क नव वस्त्र पहिर तैयार रहब, हम दस बजे धरि गाड़ी पठा देब।मन जतबे आनन्दित
छल मनमे ओतबे अन्हार, विवाहक चिन्तासँ तबाह छलहुँ।चिन्ता चितासँ तत्काल
त्राण भेटब मुश्किल छल।अस्सल पित्तीक भूमिका निर्वहन करब कठिनाह बुझना
गेल।राति भरि चिन्ता चिन्तनसँ संघर्ष करैत प्रात केलहुँ।तखने एकटा ग्रामीण
मित्र आबि कहलनि----भाइ वृद्धा पेंशन आबि गेल छैक। दैनिक नित्य क्रियास
निवृत्त भ' पेंशन आनक लेल बैंक गेलहुँ। कूल चारि सय रुपैया पेंशन भेटल छल।
आब हमरा संङमे मित्रक देल टका मिलाक' छ सय रुपैया छल, आब थोड़ेक होस भेल।
दरवाजापर एलहुँ,देखैत छी जे हमर प्रतिक्षामे राजेशक पठाओल चमचमाइत गाड़ी
ठार छल। गाड़ी देखितहिं मन जे आनन्दित होमक चाही से हमरा ठक मुर्गी लागि
गेल।हम सोचलहुँ हमर परिचय हमर मित्र अपना बेटी जमाएके अस्सल पित्तीक आऔर
अस्सल ससुरक रुप मे देथिन। मुदा की हम अपन भूमिका अस्सल पित्तीक आऔर अस्सल
ससुरक रुपमे राखि सकब?जमाए गोर लगता हम की आर्थिक आशिर्वाद देबनि?जेकरा हमर
परिचय अस्सल पित्तीक रुपमे देल जेतैक ओकरा हम अस्सल पित्तीक की परिचय
देबैक?समैध मिलनमे हम अपन अस्सल समैधक प्रतिष्ठा कोना बचा सकब? एहि सब
प्रश्नक जबाव हमरा नञि भेटल। हमर दुनिया हमरा अन्हार सनक बुझना गेल। हम
तत्काल जड़वत भ गेलहुँ। डरेबर हमरा देखितहिं गाड़ीक शीशा पोछैत बाजल---काका
जलदी बैसियौ ,आब देरी नञि लगबियौ।हम मित्रक डरसँ डेराइत आऔर लजाइत डरेबर के
प्रार्थनापूर्वक कहलियैक--बौआ हम शारीरीक दृष्टिकोणसँ पूर्णरूपेण स्वस्थ
नञि ,अस्वस्थे छी।हम नञि जा सकब। पूर्ण स्वस्थ भेलापर शाझधरि अवश्य
पहुँचब।गाड़ी आपस गेल आऔर हमर माथा हल्लुक भेल। पुन: चिन्ता भेल जे हमर
अस्वस्थताक नाम सुनि जँ मित्र राजेशक संङ पुन: औता त हम की जबाव देबैक?हमर
अस्वस्थताक बात आब सत्य त नञि छैक, हम त स्वस्थ छी। हम त आर्थिक
दृष्टिकोणसँ अस्वस्थ छी।एहि असमंजसक स्थितिमे हमर दिन बीतल ,साझ भेल मुदा
हमर असमंजस बनले रहल।चिन्तासँ हमर अंतरात्मा भुस्साक आगि जकाँ नहुँ नहुँ
जरि रहल छल। अमावश्याक अनहरियामे हम चिन्तासँ आकण्ठ डूबल छलहुँ।सर्दियाएल
साँझ पूर्णरूपेण अपन पैर पसारि लेने छल।भोजन करबाक इच्छा नञि छल आऔर
परिवारिक उदासीनताक कारणे भोजन भेटबाक आशा सेहो नञि।एकटा नव कुटुम्ब एलाक
कारणे आङनक वातावरण हास्यमय छलैक। कुटुम्बक व्यंजन विन्यासमय थारी सजाओल जा
रहल छलैक।परिवारक हमहूँ एकटा सदस्य छी, परिवारक उत्थान उन्नतिमे हमरो किछु
योगदान छैक से केकरो ध्यान नञि रहलैक। हमहूँ अपन फाटल चद्दरि ओढ़ि पानि
पीबि शयनासन धेलहुँ।एक्कहि निने प्रात भेल।आइ हमरा किछु विशेष कार्यसँ
बाजार जेबाक छल। दैनिक नित्य क्रियासँ निवृत्त भ स्नान केलहुँ। बाजार जेबाक
लेल खाली पेट तीन कोस पैदल चलबासँ असमर्थ छलहुँ।राति भरिक भूखल छलहुँ
,स्नान केलाक वाद भूख तेज भेल। किछु जलपान करबाक इच्छा छल, मुदा केओ नञि
टेरलक। हमरा बाजार जेबाक आवश्यक छल जेना कोहुना बाजार पैदले प्रस्थान
केलहुँ।उठैत बैसैत बाजार पहुँचलहुँ।भूखल पेट पैदल चलबाक कारणे आऔर बोखारक
कारणे कमजोर भेल शरीर घमा गेल छल। एकटा गाछक नीचा किछुकाल सुस्तेलाक बाद
कपड़ा दोकान दिसक रास्ता धेलहुँ।हमर जे परिचित कपड़ा दोकानदार छला से
दुरेसँ देखितहिं आवाज देलनि। दोकान पहुँचबसँ पहिले दोकानदार संङे प्रणाम
पाती भेल। दोकानदार पूछला -----केमहर आएल छी?बहुत दिन वाद अपनेक दर्शन भेल।
हमरासँ कोनो नाराजगी छै की?शरीर बहुत कमजोर भ गेल अछि !
दोकानदार अपन एकटा कार्य कर्ताके चाह बिस्कुट अनबाक आदेश देलखिन। चाह
बिस्कुट खेलाक वाद मन आश्वस्त भेल। दोकानदार पुन: बजला--आब बाजु केमहर आऔर
कोन काजसँ आएल छी?हम कहलियनि --एक खण्ड शाड़ी लेबाक अछि।दोकानदार बजला--
केहेन शाड़ी ?केकरा लेल ?हम कहलियनि---हमर एकटा मित्रक बेटाक विवाह छै,
कनिञा लेल शाड़ी चाही।दोकानदार कहलनि--तहन नीक शाड़ी बनारसी होमक चाही।हम
कहलियनि--मात्र हम छ सय अनने छी। दोकानदार बजला--अहाँ जे अनने छी से
दियौक,नञि देबैक सेहो चलतै, खगता अछि त जे अनने छी सेहो आपस नेने जाउ ,नीक
शाड़ी छैक ,एगारह सय दाम छैक, शाड़ी ल जाउ। शाड़ी लेलहुँ आऔर गामक रस्ता
धेलहुँ।दोकानदार हमरा दिश इशारा करैत अपन एकटा कार्य कर्ताके आदेश दैत बजला
जे हिनका लेने जाहुन गामक चौकपर उतारि दिहक।कार्यकर्ता दोकानक उधारी वसुलीक
लेल जाइत छला ,हमरा अपन गाड़ीमे बैसौलनि आऔर हमरा अपन गामक चौकपर उतारि
उधार वसुलीमे गेला।हम भूखल पेट मन्दे गतिसँ चलैत घर एलहुँ पता लागल जे हमर
मित्र पिता पुत्र अपन भाग्यपर पश्चाताप करैत आएल छला आऔर बाजि गेलाह अछि जे
हमरेपर पंचैती बैसौता आऔर हमहीं हुनक पंच रहबनि, मुदा राजेश हमर मित्रके
बुझबैत बाजल छला जे जरुर कोनो विशेष कारणे बाजार गेल छथि,बेसी किछु चिन्ता
करबाक प्रयोजन नञि छैक, काल्हि देखल जेतैक।साझ भेल किछु भोजन भेटल, भोजन
केलहुँ भूखल पेट थाकल देह भोजन करिते निनसँ देह भसियाइत छल, बिछाबन करबाक
होस नञि रहल अखड़े पटियापर निन आबि गेल।भोर भेलापर हमरा जगाओल गेल, आँखि
खुजल देखलहुँ सामने हमर मित्र ठार छला। मित्र हँसैत बजला----- किएक भागल
फिरै छहक?एखन आब तुँ पकड़ा गेल छ । काल्हि हम आएल छलहुँ केओ कहने छला जे ओ
बाजार गेल छथि। बाजार जेबाक की प्रयोजन छलैक ?एखन हम तोरा नेनेहिं जाएब।
हमरा घरके भीतरसँ मित्रके जबाव भेटलनि--ओ कतहु नञि जेता। हुनका भेंट करबाक
लेल एकटा अपेक्षित आबि रहल छथि।हम मनमे मन्थन केलहुँ जे एहि उपेक्षा भरल
उपेक्षित जीवनमे के अपेक्षित आबि सकैत छथि?हमर मित्रक फुलाएल मन सूखल फूल
सन सुखा गेलनि आऔर बजला --भाइ हमरा आब की करबाक चाही?हम कहलियनि--हम निर्णय
तोरे पर छोड़लहुँ , मुदा हमरा की करबाक चाही?मित्र बजला --हमर सब मनोरथ
माटिमे मिलि गेल,बाँकी जे अछि सेहो माटिये मे मिलत तहिना बुझना जा रहल
अछि।हम देखलहुँ मित्रक आँखिमे नोर छलनि।हुनक आँखि सावन भादब सन बरैस रहल
छलनि।इ नोर हमरा लेल कोनो दृष्टिकोणसँ कल्याणकारी नञि छल आऔर दोषी हम छलहुँ
।मित्र आइ हमरा समक्ष दोसर बेर कानल छला।मित्रक नोर देखि हमरो कना गेल।हम
कहलियनि---हम साझधरि जेना कोहुना अवश्य पहुँचबाक प्रयास करब। हमर आश्वासन
सुनि हमर मित्र थोड़ेक आश्वस्त भेलापर हमरासँ निहोरा करैत बजला --भाइ तोहर
देह देखबाक लेल सबहक मन लागल छैक। आइ राजेशक विवाह छैक, तोरा नञि एलापर हमर
जीवन निरर्थक भ जाएत।मित्र अपन साइकिल धेलनि आऔर गृहनगरक लेल प्रस्थान
केला।किछु कालक वाद हमर छोट सार एला जे शिक्षक छला अबितहिं पुछलनि---बोखार
ठीक भेल?हम अहाँके लेबाक लेल आएल छी।हम एखन विभागीय कार्यसँ बहुत व्यस्त
रहैत छी। एखन प्रभारी छी,प्रभारके भारसँ दबल छी।कतौ जेबाक एबाक लेल अवकाशक
अभाव रहैत अछि।आकस्मिक अवकाशमे आएल छी।हम बेसी काल नञि थम्हिं सकैत छी।हम
कहलियनि----हम एखन कत्तौ नञि जाएब। हमर सार अपन बहिनसँ भेंट करबाक लेल आँङन
गेला, बहिनके अपन व्यस्ताक बात बुझबैत बजला -----हम पाहुनके लेबाक लेल आएल
आएल छी।बहिन आग्रह केलखिन जे हमहूँ जाएब मुदा एखन नञि।सब शाड़ी फाटल
अछि,कतौ एबाक जेबाक लेल एकोटा नीक शाड़ी नञि अछि।अन्तत: हमर सार निर्णय
लेलनि जे तखन हम पाहुन के चारि दिनक वास्ते लेने जेबनि ।बहिन कहलथिन जे
हुनक भाइ भातिज गार्जियन छथिन्ह, हमर किछु नञि चलैत अछि।केओ एखन गामपर नञि
छैक,केकरासँ पूछल जेतैक?बिना हुनका सबके पूछने नञि ल जाहक। किछु कालक वाद
हमर भातिज एला, हमर सार हमरा ल जेबाक आदेश हमर भातिजसँ लेलनि आऔर हमरा ल
गेला।हम रास्तामे सार के कहलियनि जे हमरा साझधरि वापिस एबाक अछि,मुदा बहुत
छटपटेलापर तीन दिन बाद हमर सार हमरा नाराज भेलापर फुर्सत देलनि।भोरे सात
बजे विदाह भेल छलहुँ, बससँ आठ बजे अपन घर एलहुँ ।बहिनक लेल हमर सारक देल
शाड़ी के हुनका बहिनके सुपूर्त करैत हम अपन गेरुआक(तकिया) नीचा नुकाक' राखल
बनारसी शाड़ीके लेलहुँ आऔर यथावत मित्रसँ भेंट करबाक लेल तत्काल विदाह
भेलहुँ।पहुँचलापर हमर मित्र जे दरवाजापर समैध संङे बतियाइत बैसल छला,हमरा
देखितहिं अति प्रसन्न होइत बजला---राजेश दौड़ह!दौड़ह!तोहर काका एलखुन!राजेश
आँङनसँ एला,हमरा देखितहिं ओहो खुबे प्रसन्न होइत प्रणाम केलनि।मित्रक दुनू
समैध संङे प्रणाम पाती कुशल समाचार आऔर परिचय भेल। मित्र अपन दुनू समैधके
हमर परिचय दैत बजला ---इएह छथि अहाँ लोकनीक अस्सल समैध आऔर राजेशक
पीत्ती।हमरा आऔर दोसर कोनो भाइ बहिन नञि अछि।एकटा हमर छोट भाइ आऔर बहिन
गरीबी के कारण दवाइके अभाबमे कालक गालमे समा गेल अछि ।हम देखलहुँ हमर मित्र
कालक गालमे समाएल अपन भाइ बहिनके स्मरण करैत गंभीर छला ,हुनक आँखिमे नोर
छलनि जेकरा ओ बेर बेर अपन गमछासँ पोछैत छला।राजेश आँङन गेला हमर एबाक
सूचनासँ सबके सूचित केलनि।समैध आऔर लोकनियाक लेल जे जलपानक ओरियान होइत छल
ओकरा तत्काल स्थगित काएल गेल। अंङनामे चहल-पहल बढ़ि गेल छल।सब केओ एकदोसरके
जलदी करबाक आदेश आऔर परामर्श दैत छलथि।अंङनामे आनंदक बाढ़ि आबि गेल छल।
सबहक व्यग्रता बेचैनी बढ़ल छल।किनको हमरा देखबाक लेल, केओ स्वागत करबाक लेल
इच्छुक , किनको हास्य विनोद करबाक इच्छा,केओ किछु पूछबाक लेल , केओ रंग
घोरि रंग देबाक लेल सब अपन अपन योजनाबद्ध तरीकासँ तैयार छलि।हड़बरीक कारण
बर्तन बासन हाथसँ खसैत छल, सबहक दबल स्वरमे बजबाक ध्वनि दरवाजापरसँ साफ साफ
सुनल जाइत छल।राजेश आबि बजला--काका आँङन चलियौक।हम राजेशक संङ अंङना
गेलहुँ।मित्र पुरना घरारी छोरि दस कट्ठाक बीचमे पोखरिया पाटन सर्वतोभद्र
पक्का पिटुआ मकान बनौने छलाह। मकानक पछबरिया ओसारापर बड़का गोल मेज जेकर
चारूकात गोट आठ गद्दीदार आधुनिक कुर्सी लागल छल।आठो कुर्सीमे एकटा सब
कुर्सीसँ अलग विशेषता युक्त विशेष कुर्सीपर राजेश हमरा बैसौलनि।राजेशक
बड़की मामी जे लोक संहारक सिंङार केने आबि हमरा बगलमे बैसैत बजली---हमरा
कतौ दोसर ठाम बैसबाक इच्छा छल मुदा के बैसाओत?हम कहलियनि से किएक?अहाँके
जाहि ठाम जाहि कुर्सीपर बैसबाक इच्छा हो बैस सकैत छी,अपने कही त हम अपन
कुर्सी छोड़ि दोसर कुर्सीपर बैसब।राजेशक छोटकी मामी हमरा समक्ष शर्बत रखैत
बजली--हुनका अहाँक कोरामे बैसबाक इच्छा छनि।एतबा बाजि चङेरामे सजाक' गोट
दसक प्लेटमे अलग अलग मिठाइ आऔर फल मेज पर हमरा समक्ष आनि रखली।हम
कहलियनि-----एतेक राश मिठाइ आऔर फऽलक पहाड़ हमरा समक्ष लगेबाक की
प्रयोजन?एहि पहाड़के के ढ़ाहत?मित्र आबि बजला---तोरा जे खेबाक छ से खा बाद
बाँकी छोड़ि दहक, नोकसान नञि हेतैक सब हाथे हाथ प्रसाद बुझि खा
लेतैक।राजेशक छोटकी मामी बजली---किएक छोड़ता?हिनका पाँच दिन पहिले एबाक
चाही छलनि ,से आइ देह देखबक लेल एलाहा। हिनक हिंस्सा जे मिठाइ घर मे राखल
छैक, खेलाक बादे एहिठामसँ ससरि सकैत छथि।नञि खेता त हम हिनका लेल काँरी
रखने छी, काँरीसँ खुवेबनि। हम एकटा अलग प्लेट मंङा गोट चारि रसगुल्ला दु
बर्फी निकालि खेलहुँ पानि पीबि हाथ धोलहुँ।हमर मित्र चाह अनबाक आदेश केलनि
मुदा हमरा चाह पिबाक इच्छा नञि छल हमरा मनाही केलाक बादो एकटा सुशीला
सुन्दरी शारीरीक चुस्ती चंचलता युक्त मुदा वैधव्यताक आगिमे जरैत चन्द्रमुखी
चाह आनि हमरा समक्ष रखैत स्नेहमयी वाणीमे विनय आऔर विनोदपूर्वक हमरे समक्ष
एकटा खाली कुर्सीपर बैसैत बजली--हम अपने हाथसँ अपने सन नोनगर चाह बनेलहुँ
अछि, हम चन्द्रमुखीके देखितहिं निर्दय राहु बनि गेलहुँ।ओ शरीरसँ कृषकाय छलि
मुदा शरीरसँ सट्टल वस्त्रमे पूर्णरूपेण युवती लगैत छलि।हुनक वस्त्रक रंङ
आऔर पहिरबाक ढ़ंङसँ विरह विदग्धा विधवा वनिता बुझना जाइत छलि।हमर मित्र
बजला ----भाइ चाह पीब लहक, हिनका नाराज नञि करहक।एहि चाहमे प्रेम समर्पण
सबटा छैक। आइ इ प्रथम दिन प्रसन्न छथि। विवाहक चारि साल बादे इ विधवा भ
गेली।विधवा भेलाक वादे नोकरी आऔर पुत्र रत्नक प्राप्ति भेल छलनि।अपन सासुर
परिवारक जेठ पुतौह आऔर राजेशक छोटकी मौसी छथि।अपने गामक प्राथमिक
विद्यालयमे शिक्षिका छथि।भरल पुरल परिवारक छैक। आइ हिनके बदौलत हिनक एकटा
छोटका दियोर दरोगा छनि।दग्ध भेल दाम्पत्य जीवनके कारण इ रंगीन दुनिया हिनका
लेल बेरंङ छैक। राधिका राजेशक मौसी जे एकटा साधिका रहितहुँ अपन परिवारक
अभिभाविकाके रुपमे पालन करैत छलि, अपन आँखिक नोर पोछैत बजली--राजेशक मौसा
सूर्य चन्द्रमा अग्णिके साक्षी राखि आजीवन भर्ता रुपमे संङ रहबाक वचन देने
छला मुदा आइ ओ हमरा छोड़ि दोसर नायिकाक संङ महासेज पर महा निनमे सूतल
छथि,हमहूँ पंच तत्वके साक्षी राखि सब सुखसँ वंचित रहि कोहुना जिबैत छी। इ
पुरुष सत्तात्मक समाज हमरा संङे की न्याय केलक?जखन इ पुरुष समाज बुढ़मे
दशरथ बनता तखन एकटा विधवा वनिता यौवनावस्थामे द्रौपदी किएक नञि?जखन एकटा
नारीके विधवा भेलापर सांसारिक सब सुखसँ वंचित राखल जाइत अछि, तखन पुरुष
विधुर भेलापर की त्याग करै छथि?इ एकटा प्रपंची लोकक बनाओल विधान थीक।
चन्द्रमुखी राधिका हमरा समक्ष प्रश्नक पहाड़ लगबैत बजैत बजैत चन्द्रमखीसँ
ज्वालामुखी भ गेलि छलि।हम हुनक चान सनक चेहराक चिन्तन करैत कहलियनि--इ
रूढ़िवादी समाजक बनाओल विधान छियैक, एकरा के टारत?तखन संसोधन करबाक बहुत
बेसी आवश्यक छै। संसोधनक नाम सुनि राधिका रमणी रिसियाइत बजली---संसोधन
किएक?एहि विषमतामूलक विधानके पूर्णरूपेण बदलब जरुरी छैक। हमर वैधव्यताक आऔर
दयनीय दशाक इ चेतना शून्य समाज एखन धरि की समीक्षा केलक?समाजके किछु
परिवर्तनवादी क्रान्तिकारी विचार हमरा सनक विधवाक लेल अवश्य गढ़बाक चाही
अन्यथा वैधव्यताक आगिमे जरैत देहक संङ इ पुरुष प्रधान समाज सेहो जरिक'
भष्मीभूत भ जाएत।राधिका आइ अखाड़ामे उतरल छलि आऔर हमरा ओ अपन
प्रतिद्वन्द्वी पहलवान बुझैत छलि।हम हारि मानि लेने छलहुँ मुदा ओ हमरा
छोड़क लेल तैयार नञि छलि।राधिकाक एक तरफा वाकयुद्ध विराम लेबाक नाम नञि लैत
छल।हमर मन आब उबि गेल छल।हम ओहिठामसँ उठबाक विचार करैत छलहुँ,ताबत एकटा
नवयौवना नवविवाहिता आबि सबके प्रणाम करैत हमरो प्रणाम केलनि जे मिथिलाक
संस्कारसँ युक्त नञि बेटी नञि पुतौह सनक बुझना जाइत छलि मुदा शाड़ीमे
शिक्षित सुशीला आऔर सौम्य स्वभावक लगैत छलि।हमर मित्र बजला--कनिञा इएह छथि
अहाँक अस्सल ससुर।हम कनिञाके आशीर्वाद दैत हम अपन लाओल बनारसी देलियनि।हमर
मित्र अपन पुतौहके बुझबैत बजला--- कनिञा इ शाड़ी साधारण शाड़ी नञि,प्रसाद
बुझियौक ,एहि शाड़ीक परसादे जीवनमे कहियो कोनो अवसाद नञि आओत ।शाड़ीके
अवसाद निवारक बुझियौ। कनिञा हमर देल शाड़ीके आस्था श्रद्धासँ आनन्दित होइत
स्नेहसँ हृदय आऔर माथसँ स्पर्श करैत बजली--हम अपन अस्सल साउसक दर्शन आऔर
आशीर्वाद चाहैत छी।हम कहलियनि--समयानुकूल सेहो हेतैक। कनिञा प्रसन्न होइत
अपन कोहबर गेली। किछु कालक बाद मित्रक बेटी जमाए आबि प्रणाम केलनि।हम
आर्थिक आशिर्वाद देबाक लेल जेबीमे हाथ देलहुँ की जमाए पहिले बाजि
उठला--जेबीमे हाथ देबाक प्रयोजन नञि छैक,हम शिक्षक छी हमरा जे भेटक चाही छल
से भेटल,संभव हो त हमरा सेवा करबाक मौका भेटक चाही।हम दिनक पूर्वाहनमें गेल
छलहुँ बातचीतक संदर्भमें अपराहन भ गेल छल। हम मित्रके कहलियनी जे हम आब
चलब। मित्र अकचकाइत बजला--?किएक कोन जरुरी काज छैक? हमर पंचायत केलाक बादे
एहिठामसँ तुँ ससरि सकैत छऽ। पंचायतो एक सप्ताह बादे हेतैक। हम कहलियनि--कोन
पंचैती?केकरापर?की दोष आऔर के छथि मान्य पंच?हमर मित्र हँसैत बजला
----पंचैती तोरे पर बैसतै आऔर हमर मान्य पंच सेहो तुँही रहबहक।तोरा गेलापर
हमर पंचैती के करत? हम मित्रके कहलियनि--मुदा हमर दोष की?मित्र एहिवेर
नाराज होइत बजला--विवाहमे तोरा नञि एलाक कारणे हम असगर तबाह भ' गेलहुँ।हमर
इच्छा छल जे सब दायित्व तोरापर थोइप सबठाम सब काज लेल तोरे अगुआ बनाबी आऔर
हम अपने गौण रही,मुदा से नञि भेल। राजेशक विवाहमे तोरे मंचपर बैसाबी ।हम
बरियाती संङ बैसी। कोनो बात या विचार हमरासँ नञि,तोरासँ पूछल जेबाक
चाही।मित्रताक एकटा नव मजगूत इतिहास रचबाक इच्छा हमर नञि पूर्ण भेल।मित्रके
हम माफी मंङैत निहोरापूर्वक कहलियनि--सब बात ठीक, हम दोषी छी। हमरा लेल की
दण्ड छैक से बाजऽ।मित्र एहिवेर फेर हँसैत बजला----से निर्णय लेबाक क्षमता
हमरा नञि अछि,इ निर्णय राजेशक मामी मौसीक अधिकार क्षेत्र मे अबैत छैक।किछु
कालक बाद राजेशक मृगनयनी मामी आबि हमरा बातमे ओझरौलनि आऔर पिकबयनी मौसी एक
बाल्टी रंङ घोरि माथपर ढ़ारि देलनि। हमर मित्र प्रशन्न होइत
बजला--बस!बस!हमर पंचैती भ' गेल, हमरा न्याय भेटल। मुदा आब जलपान समय छैक।
जलपान आएल, फेर नाना प्रकारक फल आऔर मधुरक पहाड़ हमरा समक्ष लगाओल गेल।
मित्र हमर भीजल वस्त्रके बदलि लेबाक आग्रह करैत राजेशक मामीके नव वस्त्र जे
हमरा लेल राजेशक विवाहमे विदाइ भेटल छलै अनबाक आदेश केलनि।राजेशक मामी
विदाइमे भेटल सब वस्त्र हमरा समक्ष रखैत बजली-----धोती पहिरक लुरि अछि की
नञि,कही त 'हम पहिरा दी।हम मर्दके शाड़ी पहिराक' नचेबाक लुरि रखैत
छी।वस्त्र बदललाक बाद हम अपन विशेष आसनपर बैसलहुँ ।मित्र हरियर होइत
बजला---आब तुँ लगैत छ' राजेशक अस्सल पीत्ती सनक।पूरा दिन हास्य विनोदमे
कोना बीतल से नञि बुझलियैक। जलपान केलाक बाद मित्र अपन घर सब घुमौलनि
राजेशक विवाहमे भेटल समान फल मधुरक भाड़ देखबैत बरियाती लेल बनल रसगुल्ला
गुलाब जामुन जे बरियातीक भोजनोपरान्त उबरल छलै से देखैत बजला--पचासक किलो
रसगुल्ला आऔर ओतबे गुलाब जामुन बाँचल छैक मुदा नोकसान नञि हेतैक, एखन खूब
नमहर गोट पच्चीस आदमीक आश्रम छैक। मित्रक सब घर विभिन्न संसाधनसँ भरल देखि
हमरो खूबे प्रसन्नता भेल। मित्र बजला ----राजेश आऔर कनिञा भारतीय प्रशासनिक
सेवा परीक्षा देलनि अछि,जँ चयनित भेली त' सोनामे सुगंध अन्यथा शिक्षक
शिक्षिका त' छथिये। हम अभावमे अवश्य रहलौं मुदा अभावक कारण स्वभाव
स्वाभिमान संस्कार कहियो नञि नष्ट केलहुँ।आब तोहर आशिर्वादक प्रसादे सबटा
भेल ,कोनो किछुओ के कमी नञि रहलैक।कनिञाक वौद्धिक कुशाग्रतासँ बुझना जाइछ
जे ओ अवश्य चयनित हेती मुदा राजेश पर नञि आशा अछि,आब देखक चाही किनकर
भविष्य कतेक उज्जवल?मित्र हमर कर्मठ कर्मयोगी छला, विद्यालय जेबासँ पूर्व
आऔर विद्यालयसँ एलाक बाद तरकारी खेतीमे खूब परिश्रम करैत छला जे हुनक
समृद्धिक कारण छलनि मुदा हुनका बुझना जाइत छलनि जे इ सबटा आशिर्वादक
प्रसादे होइत अछि। ओ अपन सब उपलब्धिक श्रेय हमरा आऔर हमर देल आशिर्वादके
दैत छला।बीचहिमे राजेशक बड़की मौसी जे अनियंत्रित यौवन भारसँ दबल काम
पिड़िता कामिनी रुप राशि सौन्दर्यसँ रम्भा सन छलि पाछूसँ अपन नरम हाथसँ हमर
हाथक अंङुरी पकड़ि बजली---चाह बनि गेल छैक, आब चाहपर चर्चा हेतैक ।राजेशक
मामी हम मौसी पहिलेसँ आबि बैसल छलि हम कहलियनि--चर्चाक विषय की राखल गेल
अछि?राजेशक मामी हमर अंङुरी पकड़ि घिचने यथास्थान बैसबैत बजली----आजूक
चर्चाक विषय अछि दगाबाज मर्द!हम कहलियनि---दगाबाज मर्दे किएक?नारी किएक
नञि?नारियोक दगाबाजीक बहुत राश प्रमाण पाओल गेल अछि। नारीक दगाबाजीक नाम
सुनितहिं राजेशक विधवा मौसी राधिका चण्डी बनि बजली---हम की दगाबाजी
केलहुँ?हमरा किएक वैधव्यताक आगिमे पुरुष प्रधान समाज द्वारा जिबिते जराओल
जा रहल अछि?हमर श्रीहीन देह कोन काजक ?हमहूँ कहियौ कोनो घरके लक्ष्मी
छलहुँ।हम हुनक उग्र रुप देखि डेराइत कहलियनि---अहाँ एखनो लक्ष्मी छी मुदा
विधवाक वेदनाके बुझैत पंडितक पुरान आऔर वेदक विधानके विशेष परिस्थितिमे
गंभीर विमर्श करैत बदलब बहुत जरुरी छैक।फेर ओ खिसियाइत बजली ---इ भेल एकटा
विधवाके नैतिक शोसण करबाक लेल तुष्टिकरण नीति।एखन धरि पुरुष प्रधान समाज
विधवा देहक वैधव्यताक आगिमे मे अपन हाथ सुखबैत आएल अछि आऔर कलंकिनी मात्र
नारीके कहल गेल अछि।हमर मित्र अपन सारि राधिकाके खिसियाएल सनक बजैत देखि
बजला--मुदा सबटा दोष हमर भाइ पर थोपब उचित नञि,बहुत दिनक बाद आइ इहो कने
प्रसन्न छथि। इहो संतानहीनताक आगि मे जरैत छथि।हिनको दुख ध्यातव्य आऔर
श्रव्य छैक।संयुक्त परिवार मे चारि भाइक भैयारीमे भतीजा भतीजीक बीच गंजन
सहैत कोहुना जिबैत छथि।
एतबा सुनितहिं राजेशक विधवा मौसी राधिका पश्चाताप करैत डेराइत हमर पैर छुबि
प्रणाम करैत हमरासँ माफी मंङैत (क्षमायाचना करैत)बजली ---हमरा आक्रोशमे
बहुत बजा गेल।हम कहलियनि--अपनेक आक्रोश यथार्थ छल।हमर मित्र बजला ----सब
केओ आगिमे जरैत अछि,केओ वैधव्यताक आगिमे, केओ संतानहीनताक आगिमे,केओ अनंत
आकांक्षाक आगिमे,हमहूँ जरैत छी आगिमे ,हमरो जीवन कोनो जीवन थीक एहिसँ
कुक्कुड़ बानरे नीक ।मित्रक व्यथा हमरा बुझल छल जेकर चर्चा करैत ओ हमरा
समक्ष बेर बेर पश्चाताप करैत कनैत बजैत छला --भाइ हम जेकर संतान छी जे हमरा
अपन गरीबीमे अपन पेट काटि पोसलक पढ़ौलक तेकरा हम की संतान सुख देलियैक?ओ
लोकनि हमर विवाहक बादे साल भरिक भीतर किएक महा प्रस्थान केलनि?हमर बेटा
बेटीके अपन दाय बाबाके देखबाक सपना कहिया पूर्ण हेतैक?हमर मित्रक मुखमंडल
पर गंभीर भाव पसरल छलनि। हम हुनक गंभीरता भंग करैत कहलियनि--हे हम आब चलब
कहि उठिक 'ठार भेलहुँ। एतबा कहितहिं हमर दुनू बाँहि दुनू दिशसँ राजेशक मौसी
आऔर हमर मित्र पकड़िक ' बैसा देलनि।राजेशक विधवा मौसी कटाक्षक व्यंगवाण
चलबैत अपन कोमल कंठसँ बजली--हमरा दासी रुपमे अपनेक चरणक सेवा करबाक लेल शरण
भेटत?हुनक एहि कथनमे व्यंग कम वेदना बेसी छलनि।हम संतानहीनताक आगिमे जरैत
संयुक्त परिवारमे भाइ भतीजा भतीजीक बीच गंजन सहैत जिबैत छी से सुनलाक बाद
राजेशक विधवा मौसीके हमरा प्रति आकर्षण आस्था श्रद्धा बढ़ि गेल छलनि।हमर
मित्र हमरा बलजोरी बैसबैत राजेशके बजौलनि।राजेश एला, हमर मित्र हुनका कानमे
किछु कहलकनि राजेश अपन मायके सूचित केलनि।राजेशक मामा लोकनि जे भिनसरसँ हमर
मित्रक समैधके स्वागतमे लागल छला सेहो एला। सब केओ हमरा घेरने ठार छला
।राजेश के विश्वास छलनि जे हमर काका हमर बात नञि कटता। राजेशो आबि
बजला---काका आइ नञि जाउ।हम कहलियनि--बौआ राजेश हम संतानहीन संयुक्त
परिवारमें भाइ भातिज पर आश्रित छी। हम आब अबैत रहब मुदा एखन जाएब।राजेशक
मामा- मामी,मौसा-मौसीक मन बहुत मलीन छलनि।मित्र दुखी होइत बजला---तुँ वसन्त
लेने आएल छलऽ' पतझड़ देने जाइत छ'।राजेशक माय संकोचसँ हमरा समक्ष नञि एली,
ओ बेस नमहर मोटा बान्हि हमरा लेल तैयार केने छलि।साइकिलसँ मोटा पहुँचेबाक
भार राजेशक मामाके भेटलनि।मित्र राजेशक कनिञा आऔर राजेशक हाथ हमरा पकड़बैत
बजला ------इ दुन्नू हाथ तोहर, आइके बाद तुँ अपनाके संतानहीन नञि
बुझहक।राजेशोके कहल गेलनि--बौआ हमर देल वचनके पालन दायित्व आऔर
निष्ठापूर्वक हिनक प्रतिष्ठाक ध्यान रखैत होमक चाही।एहि देहपर फाटल बल्कल
वस्त्र आऔर आँखिमे नोर देखब हमरा बर्दास्त नञि अछि ।कनिञा आऔर राजेश अपन
दायित्वक स्वीकारोक्ति दैत बजला--- दायित्व निर्वहन करब कोनो बहुत बेसी
कठिनाह नञि छैक, हम भीषण प्रतिज्ञापूर्वक दृढ़तासँ प्राथमिकतापूर्वक
दायित्वक निर्वहन करब,अपनेक देल वचन निरर्थक नञि सत्य सार्थक रहत।मित्र
राजेशक कथनसँ प्रसन्न भेला,हमरा धोती कुर्ता गंजी गमछा चद्दरि विदाइ
देलनि।बीच्चहिमे राजेशक विधवा मौसी बाजि उठली---राजेशक हाथ पकड़ल गेल मुदा
हमर हाथ के पकड़त?हम किएक उपेक्षित?ओ बजिते रहली मुदा हम चुप्पे रहलहुँ,
कारण हुनक प्रश्नक अनुकूल हमर ज्ञानक कटोरीमे सक्षम नञि छल ओ फेर
निवेदनपूर्वक एकटा शाल एक जोड़ धोती आऔर किछु टाका हमरा समक्ष रखैत
बजली---हमर श्रद्धा सुमन छोटछीन प्रेमोपहार स्वीकार करियौक।हमर मित्र
राधिकाक देल उपहार आऔर अपन देल विदाइके एकटा झोरामे दैत बजला----एकबेर चाह
चलतै की?हम कहलियनि आब किछु नञि कहैत उठिक' ठार भेलहुँ।राजेशक कनिञा आबि एक
जोर शाड़ी दैत बजली---इ हमर अस्सल साउसक वास्ते।मित्र शाड़ीके झौरामे राखि
देलनि।हम ओसारसँ उतरि अंङनासँ बहरेबाक लेल डेग नमहर केलहुँ।पाछुसँ राजेशक
माय थपरी पिटैत हमर मित्र के एक जोर शाड़ी देखबैत किछु इशारा केलखिन।मित्र
ओहो शाड़ी के झोरामे कसलनि।मित्र विदाह केलनि मुदा बेटी विदाहक दृश्य छल।
सब केओ दुखी छलथि।हम डेग नमहर करैत मित्रक कृतज्ञताक भारसँ दबल दलान पर
एलहुँ।मित्रक दुन्नू समैध संङे प्रणाम पाती भेल। मित्र हमरा झोरा दैत
बजला--हमरा बिसरिहक नञि।हमर मन गाम एबाक लेल औगताएल छल बिना किछु बजने
प्रस्थान केलहुँ।झोरा भारी लागि रहल छल।बाटमे पियासल बटोही सन थाकिक'बैसि
गेलहुँ आऔर बैसितहिं चिन्तनमे डूबि गेलहुँ।हम मित्रक कृतज्ञतासँ लज्जित
छलहुँ।हुनक कृतज्ञताक अनुरूप हमरा द्वारा कएल उपकार बहुत छोट छल।एकटा
छोटछीन उपकारक कृतज्ञताक स्वरूपे एतेक पैघ प्रतिफल भेटब अकल्पनीय छल जे
हमरा प्रत्यक्ष रुपे भेटल छल।हमर मित्रमे देवत्व छलनि,ओ हमरा देवता बुझना
जाइत छला ओ पूज्य वन्दनीय छला आऔर हम अपनाके अधम बुझैत छलहुँ।
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।