
डा. किशन कारीगर
बेलज्ज पिछलगुआ भरिया सब (कविता)
बाप/दादा/ पित्ती सब दिन
लोक बोली बजलै बुझलकै
आ तेकर बेटा (कनकिरबा) उ सब?
मानकी मैथिली लिखै बजै जाइए?
की तोरा अप्पन लोक बोली शैली
लिखैत बजैत कोन बातक डर होइ छौ?
आ की निरलज्ज भेल मंच लोभे
खूब मानकी मैथिली किए लिखै बजै छही?
जेकरा सबहक मानक छियै
त उ अप्पन बोली शैली प्रचार दुआरे
मानकी दललपनी तक करै जेतै
लेकिन तूं सब किए मानकी देखौंस क रहलीही?
एहेन लेखक साहित्यकार हेबाक कहेबाक
होहकारी चलेन आबो छोड़ै जाइ जो.
अप्पना माइक बोली के बिसैर मैथिली मानक
लाजे डूब मइर जो रे पिछलगुआ सब
मैथिली साहित्यकार कहबै मंच लोभ दुआरे?
तूं सब त माइक बोली के तिरस्कार सहलिही ?
कहअ त सप्पत खा जे कोनो दिन?
बारहो बरण समावेशी मैथिली लै किछ बजलिही?
आबो कनी लाज क ले रै पिछलगुआ सब
अप्पन माइक बोली शैली के जिआ के राख
पब्लिको तोहर किरदानी जनै छौ
जो रे बेलज्ज मानकी पिछलगुआ भरिया सब
- डा. किशन कारीगर, मूल नाम- डा. कृष्ण कुमार राय)
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