प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

मनोज झा मुक्ति
कथा-नह केश


गाममे अफरा तफरी मचल छै । घरघरमे एतवे चर्च भरहल छै जे आब कि हेतई ? बातो त ओहने छल । एहिसँ पहिने कहियो एहन विवाद गाममे नई देखल गेल छलै ।

किछुदिनसँ सामान्यरुपमे विमार रामानन्द मिसरके देहान्त आई भिनसरमे भेलनि । विवाद एहि बातक छल जे रामानन्द बाबूके मुखाग्नि के देतनि ?

मिसरजीक गन्ती गामक कहवैकामे होइत छलनि । निम्न मध्यमवर्गीए परिवारक होइतो जिल्लाभरिमे अपन हटले पहिचान छलनि मिसरजीकेँ । सन्तानकरुपमे दूटा बेटा आ दूटा बेटी छलनि । छोट बालक अनजातिमे विवाह कएने छलनि, ओहि विवाहमे मिसरजी दूनु प्राणी सहभागि भेल रहथि । आ तकरे बहन्ना बनाविक जेठ बालक मायबापक नामपर नह केश करालेने रहनि, नाता सम्बन्ध मायबाबूसँ तोडि़ लेने रहनि ।

छोटका ननकिरवाक विवाहसँ पहिनही जेष्ठ बालकक जीद्दके देखैत दूनु बेटाके अंशवण्डा कदेने रहथिन्ह मिसरजी । जेठ बालकक ईच्छा अनुसार बिनु जिउका निकालने दूनु बेटाक नामपर आधाआधा सम्पति कदेने रहथिन्ह । शर्त ई रहैक जे सम्पति दूनु बेटाक नामपर भेलाक वादो, मिसरजी दूनूप्राणी आजीवन खेतक उबजा खएताह आ दूनू बेटा प्रतिमास पाँच–पाँच सौ टका तिमनतरकारी वास्ते देतनि । अंशवण्डा जहिया भेल रहैक तहिया जेठ बालक कोनो विदेशी अफिसमे काज करनि आ मोट पाई कामाइन, छोट बालक वेरोजगार रहनि । पारिवारिक पालनपोषणलेल मिसरजीद्वारा लेलगेल बैंकक कर्जके सेहो आधाआधा कयलजएवाक जेठ बालकक प्रस्ताव अएलनि । मिसरजीक ईच्छा विपरीत छोट बालक अपन जेष्ठ भ्राताक आकांक्षा अनुरुप मिसरजी दुनूप्राणीके सहमतिमे लाबि, कर्जक पाइयक बदलामे खेत जेठका भायक नामपर कऽदेलकनि । छोट बालकक विवाहकवाद अपन हिस्साक खेतक उबजा सेहो जेष्ठ बालक अपने उठब लगलनि आ मायबाबूसँ नाता सम्बध तोडि़ लेलकनि । अंशवण्डाक समयमे प्रतिमास पाँचसौ गछल टका एक्को मास जेष्ठ बालक नई देलकनि । छोट त हूनकासबसंगे रहिते छलनि ।

मिसरजीक देहान्तक बाद जेष्ठ बालक कर्ताक भूमिका निर्वाह करबाकलेल देहान्तक खबरि सुनिते गामपर उपस्थित भऽगेल रहनि । मुदा, छोट बालक जेठकाके मिसरजीके मुखाग्नि देबाक बातसँ सहमत नई भेलनि आ ई नौवत आएल छल ।

गामक किछु व्यक्तिक कहब छलनि जे पिताके मुखाग्नि देवाक अधिकार जेष्ठ बालकके होइत छन्हि, ताँए जेष्ठ बालकके मुखाग्नि देवासँ केओ नई रोक सकैय । एम्हर, छोटका बालकके प्रश्न समाजसँ छल, ूएक्कहि व्यक्ति, एक्कहि व्यक्तिक नामपर कए वेर नह केश करौतैक ? जे अपन जिविते रहल मायबाबूक नामपर श्राद्ध कऽ कऽ नह केश करालेने होए, ओ ओहि मायबाबूकेँ मुखाग्नि देवाक अधिकारी कोना अछि ?ू

ओना जेठ बालकद्वारा मायबाबूक नामपर नह केश कराओलगेल बात गामक अधिकांश गोटेके बुझल छलनि ।

स्कूलक प्राँगण गामक लोक आ बाट चलनिहारसँ खचाखच भरिगेल छल । किछुगोटे परम्परा आ संस्कृतिके दोहाई दैत ई विचार व्यक्त कयलन्हि, ूमिसरजीक जेष्ठ बालक गल्ती त कयलक मुदा, कि करबैक ? अपना समाजमे सबदिनसँ जेठे पुत्र मुखाग्नि दैत अएलैय, ताँय जेष्ठे बालक एकर अधिकारी अछि ।ू

सबहक बात सुनिरहल मुखियाजी मिसरजीक छोट बालककेँ अपन पक्ष रखवाक आदेश देलकनि । अपना स्थानपर ठाढ़ होइत मिसरजीक छोट बालक सभके सम्बोधन करैत कहलथि,ू एखनिधरि समाजमे केओ कोनो जघन्य गल्ती कऽलेलाक बाद कि करबै ? गल्ती भेलै । माफी मंगौक । आदि ईत्यादि कहैत समाजमे गल्ती कयने लोकके माफी दैत अएलै, ताँए गल्ती कयनिहार एकर फायदा उठवैत गल्तीपर गल्ती करैत आएल, अपन कर्तव्यसँ मुकरैत अएबाक संस्कारमे दिनानुदिन बढ़ोत्तरी होइत गेल । समाजक एहने उदार भावक फायदा उठबैत समाज दुषित भऽगेल अछि । जकरा जखन जे मोन लागल ओ अपराध करैत गेल । जीवितमे कहियो नूनधरिक आग्रह नई कयने बेटा, मायबाबूकेँ बिनु जिउका निकालनही आधा सम्पति लऽकऽ नाता तोडि़लने बेटा, जिवीतेमे मायबाबूक श्राद्ध कऽदेने घोषण करैत ‘नह केश’ करौने बेटाक हाथसँ मुखाग्नि देवयबाक बात जेसब कऽरहलछी से समाजमे केहन संस्कार देबऽ चाहैत छियै ? समाजमे ई आ एहन गल्तीके माफी दऽ एहि प्रकारक प्रवृतिके जौं प्रोत्साहन करबाक काज होइत रहतै त अप्पन हिस्सा लऽकऽ मायबाबूसँ सम्बन्ध नई रखनिहारक संख्या बढ़ैत–बढ़ैत समाजसँ मायबाबूकप्रतिक बेटाक कर्तव्यक बात बिलीन नई भऽजएतैक ? भाय आ बाँस त ओहने बँटल रहबाक प्रकृतिए बनौने छैक, त भायसँ मनमोटाव भऽगेलापर मायबाबूके अनदेखी करब कतेक उचित ? एहन–एहन बेटाके परम्पराक नामपर मरनोपरान्त मुखाग्नि देवाक अधिकार किन्नहु नई भेटवाक चाही ।ू

बैसारमे उपस्थित अधिकांश लोकक थपड़ीसँ स्कूलक प्राँगण गड़गड़ागेल । माहौल पूर्णरुपेन शान्तिक चदरि ओढिलेलक । कानाफुसीक गुलगुलाहटि वातावरणमे कौतुहलता आनि देने छल । फरकीपर चढल मिसरजीक अन्त्येष्ठीक समयमे सेहो बिलम्ब भऽरहल छलनि ।

मुखियाजीके बेंतक सहारा लैत ठाढ़ होइत देखि वातावरणमे मौनता पसरिगेल । सबकियो निष्प्राण जकाँ होइत मुखियादिसँ टकटक्की लगाक देखऽलागल । ठाढ़ भऽ मुखियाजी कहऽलगलाह,ूमिसरजी आ हूनका दुनू बेटाक खेरहा ओना सबके बीसो वर्षसँ बुझले अछि । सबबातके गौर करैत, समय आ समाजक मनोभावके देखैत हम जे निर्णयपर पहुँचलछी से अपने सबहक समक्ष रखैत छी ।ू नमहर स्वाँसलैत मुखियाजी अपन बात आगु बढयलाह,ू ओना मुखाग्नि देवाक अधिकार अपना सबहक संस्कारमे जेष्ठे सन्तानके रहल अछि । जेष्ठ सन्तानद्वारा जीवित मायबाबूसँगे कुकृत्य एवम् दूव्र्यवहार कयलाकबादो मुखाग्नि देवाक परम्पराक नामपर जाहि प्रकारसँ आईधरि माफी दैत समाज आएल अछि, तकरे कारण आजुक दिन हमरासबके देखऽपड़ल अछि । जे बेटा जिवीत मायबाबूके सेवा नई करत, सम्बन्ध नई राखत, कोनो बहन्नामे जिवीते मायबाबूक नामपर श्राद्ध एवम् ‘नह केश’ कराओत ओहन बेटा जेष्ठे किया नई हुए, मुखाग्नि देवाक अधिकारी नई बनाओल जाए । एहन एहन कुसंस्कारी बेटाके जँ एखुनको समयमे माफ कयल जाए त समाजमे जएह संस्कार बाँचलखुचल अछि तकरा बचौनाई कठीन होएत । अतः मिसरजीके मुखाग्नि देवाक अधिकार जेष्ठ बालक गमाचुकल हमर बुझाई अछि ।ू एतेक कहैत चुप्प भऽ ठाढ़े रहलाह आ स्कूलक प्राँगणमे बैसल लोकसबदिस नजरि घुमाक देखऽ लगलाह । प्राँगणमे उपस्थित लोकसब अपन कर्तल ध्वनीसँ मुखियाजीक फैसलाकेँ अनुमोदन कएलक आ मिसरजीकेँ मुखाग्नि देवाक अधिकारी छोट बालकके बनाओल गेलनि ।

 

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।