VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह

Videha

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका — First Maithili Fortnightly eJournal

विदेह नूतन अंक सम्पादकीय
वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.विदेह ई-लर्निङ्ग
१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय
 

सदेह १ सम्पूर्ण साहित्यिक समीक्षा

[सभ साहित्यकारक रचनाक समीक्षा, भारतीय आलोचना, पाश्चात्य सिद्धान्त, गंगेशक नव्य न्याय, विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क]

[विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका | वर्ष २, मास १३, अंक २५, १ जनवरी २००९ | सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर]

 

१. आलोचना-फ्रेमवर्क

सदेह १ केर सभ साहित्यकारक विवेचन एहि चतुष्पाद फ्रेमवर्कसँ हएत:

(क) भारतीय काव्यशास्त्र: रस (भरतमुनि), ध्वनि (आनन्दवर्धन), वक्रोक्ति (कुन्तक), औचित्य (क्षेमेन्द्र)।

(ख) पाश्चात्य आलोचना: नव समीक्षा, संरचनावाद, उत्तर-औपनिवेशिकता, स्त्रीवाद, मार्क्सवाद, पर्यावरण-समीक्षा।

(ग) नव्य न्याय: गंगेश उपाध्यायक पक्षहेतुव्याप्तिदृष्टान्तनिर्णय तर्कशास्त्रक साहित्यिक अनुप्रयोग।

(घ) विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क: मैथिलीक स्वतन्त्र, कात-करोटक बिनु कतियेने साहित्यिक इतिहासक निर्माण।

१. प्रारम्भिक विवेचन: सदेह १ केर स्वरूप

'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (www.videha.co.in) मैथिली साहित्यिक इतिहासमे एकटा क्रान्तिकारी डेग थीक। गजेन्द्र ठाकुरक सम्पादनमे जनवरी २००८ सँ प्रकाशित एहि पत्रिकाक २५ अंकक (वर्ष २, मास १३, अंक २५, १ जनवरी २००९) चुनल अंशसँ 'सदेह १' नामक मुद्रित संकलन तैयार भेल अछि। एहिमे १०० सँ अधिक साहित्यकारक कथा, कविता, निबन्ध, गजल, साक्षात्कार, अनुवाद, आलोचना आदि समाहित अछि। ई संकलन मैथिली साहित्यक एकटा समानान्तर इतिहासक निर्माण करैत अछि जाहिमे मुख्यधाराक संग लोक-परम्परा, नव्य न्याय, आधुनिकता आ उत्तर-आधुनिकताक समागम भेल अछि।

आठम शताब्दीक सरहपादसँ लऽ कऽ एकविंश शताब्दीक राजकमल चौधरी, गंगेश गुंजन धरि मैथिली साहित्यक जे अखण्ड धारा अछि, ताहि धाराकेँ सदेह १ एकटा नव दृष्टिकोणसँ प्रस्तुत करैत अछि। एहि समीक्षामे हम भारतीय आलोचना (रस, ध्वनि, वक्रोक्ति, अलंकार), पाश्चात्य आलोचना (नव समीक्षा, संरचनावाद, उत्तर-औपनिवेशिकता, स्त्रीवादी आलोचना, मार्क्सवादी समीक्षा), मिथिलाक गंगेश उपाध्यायक नव्य न्यायशास्त्र आ विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्कक अनुप्रयोग करब।

२. आलोचना सिद्धान्तक परिचय

२.१ भारतीय आलोचना सिद्धान्त

भारतीय काव्यशास्त्रमे चारि प्रमुख सिद्धान्त प्रतिष्ठित अछि:

(क) रस सिद्धान्त (भरतमुनि):

भरतमुनिक नाट्यशास्त्रमे 'विभाव-अनुभाव-व्यभिचारी भावसँ रसक निष्पत्ति' होइत अछि। श्रृंगार, करुण, वीर, रौद्र, हास्य, भयानक, वीभत्स, अद्भुत आ शान्त ई नव रस मैथिली साहित्यमे सेहो विद्यमान अछि।

(ख) ध्वनि सिद्धान्त (आनन्दवर्धन):

'व्यंजनावृत्तिसँ प्रतीयमान अर्थ' ध्वनि थीक। काव्यमे व्यक्त अर्थसँ अतिरिक्त एक सूचित अर्थ होइत अछि जे आत्मा थीक।

(ग) वक्रोक्ति सिद्धान्त (कुन्तक):

'वक्रोक्तिः काव्यजीवितम्' काव्यमे सामान्य उक्तिसँ हटिकऽ विशेष ढंगसँ कहल गेल बात काव्यक प्राण थीक।

(घ) औचित्य सिद्धान्त (क्षेमेन्द्र):

'औचित्यं रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम्' प्रत्येक काव्य-तत्त्वक उचित प्रयोग काव्यक जीवन थीक।

२.२ पाश्चात्य आलोचना सिद्धान्त

(क) नव समीक्षा (New Criticism T.S. Eliot, I.A. Richards):

पाठ स्वायत्त अछि। लेखकक अभिप्राय नहि, पाठ केर अर्थ-सम्भव महत्त्वपूर्ण। Intentional Fallacy Affective Fallacy सँ बचैत पाठक आत्मनिर्भर होइत अछि।

(ख) संरचनावाद (Structuralism Saussure, L. Strauss):

भाषाक संरचनामे अर्थक उत्पत्ति। Signifier-Signified सम्बन्ध, Binary Oppositions (विरोध-द्वन्द्व) आ Deep Structure सँ साहित्यक विश्लेषण।

(ग) उत्तर-औपनिवेशिक समीक्षा (Postcolonialism Spivak, Bhabha):

उपनिवेशी शक्तिसँ उत्पन्न सांस्कृतिक विस्थापन, Hybridity, Subaltern Voice Cultural Hegemonyक विरुद्ध प्रतिरोध। मैथिली साहित्यमे मिथिलाक उपेक्षा एहि सिद्धान्तक आलोकमे महत्त्वपूर्ण भऽ जाइत अछि।

(घ) स्त्रीवादी आलोचना (Feminist Criticism Simone de Beauvoir, Elaine Showalter):

पितृसत्तात्मक समाजमे स्त्री-दृष्टिकोण, लिंग-भूमिकाक प्रश्न आ स्त्री-लेखनक स्वतन्त्र परम्पराक खोज।

(ङ) मार्क्सवादी समीक्षा (Marxist Criticism Luk, Althusser):

साहित्य आ सामाजिक-आर्थिक सम्बन्ध, वर्ग-संघर्ष, Ideology Superstructureक आलोकमे साहित्यिक पाठक विश्लेषण।

२.३ गंगेशक नव्य न्याय

मिथिलाक महान दार्शनिक गंगेश उपाध्याय (१३ शती) तत्त्वचिन्तामणिक माध्यमसँ नव्य न्यायशास्त्रक स्थापना कएलनि। नव्य न्यायक प्रमुख अवधारणा थीक 'प्रमाण' (ज्ञानक साधन), 'प्रमेय' (ज्ञानक विषय), 'संशय' (सन्देह), 'प्रयोजन' (उद्देश्य), 'दृष्टान्त' (उदाहरण), 'सिद्धान्त', 'अवयव' (तर्क-संरचना), 'तर्क' 'निर्णय' (निष्कर्ष)। साहित्य-समीक्षामे नव्य न्यायक अनुप्रयोग अर्थ थीक (१) कोनो साहित्यिक दाबीक तार्किक परीक्षण करब, (२) Vyāpti (व्याप्ति) अर्थात् नियम-सम्बन्ध चिन्ह, (३) Paksha-Sadhana (पक्ष-साधन) अर्थात् कोनो रचनाक काव्यात्मकताक प्रमाण ताकब।

२.४ विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क

गजेन्द्र ठाकुर-प्रणीत एहि फ्रेमवर्कक मूल प्रस्थापना थीक जे मैथिली साहित्यक इतिहास हिन्दी वा संस्कृत साहित्यक इतिहाससँ समानान्तर (parallel) अछि, नहि कि अधीनस्थ। एहि फ्रेमवर्कमे: (१) सरहपादसँ आधुनिकता धरि एक स्वतन्त्र रेखा, (२) मिथिला भूगोलक केन्द्रीयता, (३) डिजिटल आर्काइव द्वारा इतिहासक लोकतान्त्रिकरण, (४) नेपाल-भारत दुनू भागक मैथिलीकेँ एकट्ठा राखब, (५) नव्य न्याय परम्पराक संग आधुनिकताक संवाद सभ तत्त्व महत्त्वपूर्ण अछि।

२. सम्पादकीय: गजेन्द्र ठाकुर

विदेह ई-पत्रिकाक सम्पादक गजेन्द्र ठाकुरक सम्पादकीयसँ सदेह १ क प्रारम्भ होइत अछि। सम्पादकीयमे जानकारी देल गेल अछि जे १ जनवरी २००९ धरि विदेहक ७० टा देशसँ १,३६,८७४ बेर दर्शन कएल गेल।

नव्य न्यायक दृष्टिसँ:

पक्ष विदेह मैथिलीक श्रेष्ठतम डिजिटल मंच अछि; हेतु- वैश्विक पाठक-संख्या; व्याप्ति जे पत्रिका ७० देशसँ पढ़ल जाइत अछि से प्रभावशाली होइत अछि; निर्णय विदेह मैथिलीकेँ वैश्विक बनौलक।

विदेह फ्रेमवर्क:

'मैथिलीक मानक लेखन-शैली' (पृ. २४१) अनुभाग विदेहक भाषानीतिक आधारशिला थीक। मिथिलाक्षर आ देवनागरी दुनूमे प्रकाशन parallel history केर लोकतान्त्रिकरणक प्रतीक।

२.१ 'मैथिलीक मानक लेखन-शैली' अनुभाग

भाषाशास्त्र:

Saussure केर Langue Parole मानक (Langue) आ व्यवहार (Parole) केर सन्तुलन। Chomsky केर Language Planning। नव्य न्यायक 'Pramāna' भाषिक नियमक प्रमाण-आधार।  

३. सभ साहित्यकारक समीक्षा

३.१. गंगेश गुंजन

रचना: 'राधा' (ग-पद्य मिश्रित), गजल, वैचारिक मंथन

साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता गंगेश गुंजन (मूल नाम: गंगेश्वर झा) मैथिलीक सर्वाधिक बहुआयामी रचनाकार छथि। 'उचितवक्ता' कथा-संग्रह, 'बुधिबधिया' नाटक, 'राधा' हुनकर प्रमुख कृति थीक। रचनाक परिचय: 'राधा' (ग-पद्य मिश्रित), गजल, कविता: गंगेश गुंजन मैथिली साहित्यक सर्वाधिक बहुआयामी रचनाकार छथि। 'उचितवक्ता' कथा-संग्रहक हेतु साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त गुंजनजी मैथिलीक प्रथम चौबट्टिया नाटक 'बुधिबधिया'क लेखक छथि। एहि संकलनमे हुनकर मैगनम ओपस 'राधा' (ग-पद्य मिश्रित), कोसी-बाढि पर गजल आ वैचारिक मंथन समाहित अछि।

 भारतीय आलोचना:

'राधा'मे श्रृंगार-करुण रसक अद्भुत समागम 'बेचैनी राधाक, बेबस मनक प्रवाह मे, बहैत रहल, यमुना धार सन।' ध्वनि सिद्धान्तसँ राधा केवल भक्ति-काव्यक पात्र नहि, वैश्वीकरणक युगमे मैथिली-अस्मिताक रूपक थीक। वक्रोक्तिक सूक्ष्म प्रयोग 'कृष्ण निसाँमेथि' सन पंक्तिमे शब्द-शक्तिक तीन स्तर एकसंग।  'राधा' रचनामे श्रृंगार-रस आ करुण-रसक अद्भुत समागम अछि। राधाक मानसिक विकलता ('बेचैनी राधाक, बेबस मनक प्रवाह मे, बहैत रहल, यमुना धार सन') मे करुण-रसक चरम अभिव्यक्ति अछि। ध्वनि सिद्धान्तक दृष्टिसँ 'राधा' केवल भक्ति-काव्यक पात्र नहि, बल्कि वैश्वीकरणक युगमे मैथिली-अस्मिताक रूपक थीक। गुंजनजीक वक्रोक्ति अत्यन्त सूक्ष्म अछि 'कृष्ण निसाँमे छथि। कृष्ण माने निसाँ' एहि पंक्तिमे शब्द-शक्तिक लक्षणा-व्यंजना अर्थक तीन स्तर एक सँग चलैत अछि।

पाश्चात्य आलोचना:

Stream of Consciousness शैलीमे राधाक आत्म-संभाषण Virginia Woolf केर तकनीकसँ मेल खाइत अछि। Postcolonial दृष्टिसँ 'मैथिलीक नामपर शहीद बनवाक उपकम' मैथिली-अस्मिताक हाशियाकरणक विरोध। Feminist दृष्टिसँ राधा स्वायत्त विचारशील स्त्री थीक। नव समीक्षाक दृष्टिसँ 'राधा' एकटा self-contained text थीक जेकर अर्थ पाठक-अनुभव पर निर्भर करैत अछि। Stream of Consciousness शैलीमे लिखल 'राधा'क आत्म-संभाषण ('राधा...! एं ई की भेल कत सँ कोन आकाशवाणी') Virginia Woolf James Joyce केर स्मृति दियाबैत अछि। Postcolonial दृष्टिसँ राधाक लाचारी मैथिली-अस्मिताक हाशियाकरणक रूपक थीक 'मैथिलीक नामपर शहीद बनवाक उपक्रम। Feminist दृष्टिसँ राधा स्वायत्त विचारशील स्त्री अछि जे अपन मनसँ प्रश्न करैत अछि।

नव्य न्याय:

'राधा' काव्य थीक पक्ष; रस+ध्वनि+वक्रोक्ति तीनू विद्यमान- हेतु; विद्यापति पदावलीक समान दृष्टान्त; अतः उत्तम काव्य निर्णय। नव्य न्यायक व्याप्ति-तर्कसँ देखल जाय तँ 'राधा'क काव्यात्मकताक प्रमाण: (पक्ष) ई रचना काव्य अछि, (हेतु) एहिमे रस, ध्वनि, वक्रोक्ति तीनू विद्यमान अछि, (दृष्टान्त) विद्यापतिक राधा-कृष्ण पदावलीक समान, (निर्णय) अतः ई उत्तम काव्य अछि।

विदेह फ्रेमवर्क:

सरहपादसँ आधुनिकता धरि मैथिली साहित्यक अखण्ड धाराक प्रतिनिधि। फणीश्वरनाथ 'रेणु'क उद्धृत शब्द 'किछु छिनार छौरा सभक ई साहित्यिक यत्न' राहुल सांकृत्यायन परम्पराक विद्रोही चेतनाक प्रतीक अछि। गुंजनजी नव्य न्यायक मिथिला-परम्पराकेँ आधुनिक साहित्यसँ जोड़ैत विदेहक parallel history क अंग नैत छथि।

३.२. हृदय नारायण झा

हृदय नारायण झा मैथिली कवितामे सामाजिक-राजनैतिक चेतनाक प्रतिनिधि। रचना: लुप्तप्राय मैथिली लोकगीत आकाशवाणीक बी-हाई-ग्रेड कलाकार। परम्परागत योगक शिक्षाप्राप्त हृदय नारायण झाक लेख मैथिली लोकगीतक संरक्षणपर केन्द्रित।

भारतीय आलोचना:

लोक-रसक महान वर्गीकरण, एहि सभमे करुण, श्रृंगार, भक्ति रसक समागम। साहेबदासक पराती 'अजहुँ भजन चित चेत मुगुध मन' मधुरभक्ति रसक उत्कृष्ट उदाहरण।

पाश्चात्य आलोचना:

Ethnomusicology दृष्टिसँ मैथिली लोकगीतक दस्तावेजीकरणक माँग। 'फिल्मी गीतक धुनमे भगवती गीत सभक चलन' Popular Culture vs Authentic Culture केर संघर्ष। Walter Benjamin केर 'mechanical reproduction' सिद्धान्तक आलोकमे लोकसंगीतक संकट।

भारतीय-पाश्चात्य समन्वय:

वीर रस आ Protest Poetry क संयोग हिनकर विशेषता। सामाजिक न्यायक माँग मार्क्सवादी साहित्य-चेतनासँ सुसंगत।

विदेह फ्रेमवर्क:

मैथिली लोकगीतक Audio-Video दस्तावेजीकरणक आह्वान विदेहक Digital Archive प्रयासकेँ पूरक।

 ३.३. जितेन्द्र झा (जनकपुरधाम)

रचना: अंशुमाला साक्षात्कार, मैथिली सांस्कृतिक कार्यक्रमपर / बाढ़ि पर रिपोर्ताज

जनकपुरधाम, नेपालक जितेन्द्र झा मैथिली संगीतक वर्तमान अवस्थापर सूक्ष्म रिपोर्ताज तैयार कएने छथि।

सम्पूर्ण विवेचन:

अंशुमाला (दिल्ली विश्वविद्यालयमे संगीतमे एम.फिल) केर साक्षात्कारक माध्यमसँ 'हम सभ अपने भाषाकेँ हेय दृष्टिसँ देखैत छी तें हमर भाषा-साहित्य, गीतसंगीत आ संस्कृति पछुआ रहल अछि।' Parody बनाम Original Composition, आर्थिक संकट आ रंगमंचमे महिलाक स्थान तीनू प्रश्न उठाओल गेल। मैथिली लोकरंग मञ्च, नेपाल वन टेलीभिजन, मधेश स्पेशल एहि माध्यमसँ मैथिलीक Digital Reach विदेह फ्रेमवर्कक विस्तार।

 

३.४. जितमोहन झा (जन्म: ०२/०३/१९८५)

रचना: 'कन्या भ्रूण हत्या कृतिक संग खिलवार' (लेख), भक्तिगीत

मुम्बईमे एक लिमिटेड कम्पनीमे प्रतिष्ठित जितमोहन झाक लेख कन्या भ्रूण हत्याक समस्यापर।

भारतीय + पाश्चात्य:

Feminist + Marxist दृष्टिसँ '..पितृसत्ताक विरुद्ध इएह विद्रोहक स्वर थीक। 'कानून बनेलासँ निर्भयता निहि, स्वयं सामाजिक मानसिकता बदलब आवश्यक' Gramsci केर Hegemony सिद्धान्तसँ मेल। भक्तिगीत 'हमरा पर कएलहुँ बड़ उपकार' शान्त रसक उदाहरण।

३.५. ज्योति (ज्योति झा चौधरी, जन्म: ३० दिसम्बर १९७८)

रचना: कविता (हाइकू सहित), मिथिला चित्रकला

लन्डनवासी ज्योति झा चौधरी www.poetry.com सँ 'सम्पादकक चॉयस अवार्ड' प्राप्त। मिथिला चित्रकलामे पारंगत।

भारतीय आलोचना:

अनेक हाइकू 'तारा दूरसँ बुझाइत कतेक शीतल, वास्तवमे जड़ैत' वक्रोक्तिक सूक्ष्म प्रयोग। 'गामक सूर्यास्त', 'विशाल समुद्र', 'आधुनिक जीवनदर्शन', 'बाल श्रम', 'विकास' करुण रस प्रधान।

पाश्चात्य आलोचना:

Imagism (Ezra Pound) केर आलोकमे ज्योतिक हाइकू- प्रत्येक हाइकू एकटा Image, एकटा Moment 'पतझड़क आगमन', 'कोमल पंखुड़ी', 'नटखट समुद्र' Imagist कविताक मैथिली प्रतिनिधि।

विदेह फ्रेमवर्क:

लन्दनसँ मैथिली कविता विदेह parallel historyक वैश्विक विस्तार।

 

३.६. ज्योति प्रकाश लाल

रचना: 'आजुक समयमे कम्प्यूटर शिक्षाक महत्व' (निबन्ध)

जगतपुर, सुपौल (भारत)। विप्रो टेक्नोलोजी, हैदराबादमे सॉफ्टवेयर अभियन्ता।

समीक्षा:

'यदि अहाँ कम्प्यूटर नहि जानैत छी तँ अहाँ निरक्षर छी' यैह निबन्धक मूल प्रतिपाद्य। Technology Determinism क भारतीय-मैथिली सन्दर्भमे अनुप्रयोग। ई-मेल, कुरियरसँ डाकक विस्थापन Cultural Change केर Marxist विवेचन। नव्य न्यायक दृष्टिसँ: कम्प्यूटर साक्षरता = आधुनिक जीवनमे प्रमेय। विदेह फ्रेमवर्कसँ सङ्गत मैथिली डिजिटल साक्षरता।

३.७. दिगम्बर झा 'दिनमणि'

रचना: कविता आ गीत।

समीक्षा:

वीर रस आ सामाजिक प्रतिबद्धता हुनकर विशेषता। मैथिली काव्य-परम्परामे 'दिनमणि' नाम सार्थक प्रकाशक स्रोत। औचित्य सिद्धान्तसँ देखल जाय तँ जीवनक समस्या चित्रण हुनकर मुख्य विषय।

३.८. देवशंकर नवीन (जन्म: १९६२)

रचना: 'दद्दी पेनकँ मजगुत करबाक आवश्यकता' (निबन्ध), उदाहरण (सम्पादन), राजकमल चौधरी पर आलोचना

'ओ ना मा सी', 'चानन-काजर', 'राजकमल चौधरी (१९२९-१९६७) का रचनाकर्म' आलोचना-ग्रन्थ। 'उदाहरण' मैथिली कथा-संकलनक सम्पादन।

भारतीय आलोचना:

मिथिलाक सांस्कृतिक विरासतक विश्लेषण 'अतिथि-सत्कारमे मिथिलाक लोक अपना घरक थाड़ी-लोटा धरि बँहकी राखि देलनि।' मैथिलीमे औचित्य सिद्धान्त परस्पर सम्मान, सेवाभावक परम्पराक सूक्ष्म विश्लेषण।

पाश्चात्य आलोचना:

Comparative Literature केँ जोड़ैत नवीनजी एक नव Critical Framework निर्मित करैत छथि। Intertextuality (Julia Kristeva) एक रचनाकेँ दोसरसँ जोड़ैत विश्लेषण। Postcolonial दृष्टिसँ लेखन मिथिलाक उपेक्षित जन-जीवनक Subaltern Voice थीक। नवीनजीक आलोचना Intertextuality (पाठान्तर्सम्बन्ध) क सिद्धान्तकेँ अपनबैत एक रचनाकेँ दोसरसँ जोड़ैत अछि।

नव्य न्याय:

'मैथिलीमे प्रकाशनक अभावमे पत्र-पत्रिका छानि मारब कठिन' व्याप्ति-सिद्ध। नवीनजीक पद्धतिमे नव्य न्यायक 'अनुमान' (inference) क अनुप्रयोग स्पष्ट ।

३.९. देवांशु वत्स

रचना: चित्र-शृंखला (कॉमिक्स/ कॉमिक) नताशा, पहिने मैथिलीमे चित्रकथा छल, नाटकमे दू दृश्यक बीचबला हास्य कॉमिक सन हुनकर हास्य कॉमिक्सक आगमन।

नव पीढ़ीक आलोचक। मैथिली साहित्यक नव दृष्टिकोण।

विदेह फ्रेमवर्क डिजिटल माध्यमसँ मैथिली साहित्यक प्रसार।

 ३.१०. नागेन्द्र झा (पूर्णियाँ)

रचना: मोदानन्द झा 'पञ्जीकार' पर शोध-लेख

भारतीय + नव्य न्याय:

पञ्जी-व्यवस्था मिथिलाक विवाह-सम्बन्धक तार्किक पद्धति। नव्य न्यायक 'Vyāpti' (व्याप्ति) केर व्यावहारिक उदाहरण वंश-सम्बन्धक नियमबद्ध ज्ञान। 'पञ्जीकारक राय बिना विवाह नहि' सामाजिक epistemology DNA Research आ पञ्जी-व्यवस्थाक अद्भुत साम्य पाश्चात्य विज्ञानसँ मेल।

 ३.११. निमिष झा

रचना: हाइकू। विद्यापतिपर आलेख। युवा कवि। नव संवेदनशीलताक काव्य।

 

३.२ नीलिमा

रचना: भानस-भात। मखानक खीर, मेथीक परोठा, मुगलई कोबी, केसर पुलाव, मूरक परोठा। स्त्री-सृजनशीलता, मिथिलाक खानपान आ विश्वक खानपानक मेल।

स्त्रीवादी आलोचना:

Gynocriticism (Showalter) मैथिलीमे स्वतन्त्र महिला-खानपान लेखन परम्पराक प्रतिनिधि।

३.१३. नूतन झा

रचना: बराती-सत्कार। जानकी नवमीपर आलेख।

३.१४.न्ना त्रिवेदी (गुजराती कविता)

रचना: कविता, महिला कवि, गुजराती कविविदेह फ्रेमवर्कक व्याप्ति।

३.१४. परमेश्वर कापड़ि

रचना: अपन-अपन माय। नेपाल-मैथिलीक साहित्यकार। खाँटी शब्दावली।

३.५ पीयूष ठाकुर

रचना: गुजराती कविता।

३.. प्रकाश झा

रचना: बाल कविता

३.७ डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' (जन्म: २० जनवरी १९३८)

रचना: 'पञ्चदेवोपासक भूमि मिथिला' (शोध-निबन्ध)

साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार (२००४) प्राप्त।

भारतीय आलोचना:

पञ्चदेवोपासना (गणेश, विष्णु, सूर्य, शिव, भगवती) पर विद्वत्तापूर्ण निबन्ध। धार्मिक आस्थाक Anthropological विश्लेषण सप्तमातृका परम्परासँ दशमहाविद्या धरि मिथिलाक धार्मिक इतिहास।

पाश्चात्य आलोचना:

Cultural Anthropology + Religious Studies मिथिलाक पञ्चदेवोपासना भारतीय Syncretic Culture केर उत्कृष्ट उदाहरण। लौरियानन्दनगढ़, जनकपुर, कुशेश्वर स्थान Archaeological Evidence

विदेह फ्रेमवर्क:

नेपाल-भारत दुनूक मैथिली परम्पराकेँ एकत्र रखबाक विद्वत् प्रयास विदेह parallel history केर आधारस्तम्भ।

 

३.१८. प्रीति ठाकुर

मैथिलीमे चित्रकथाक जन्मदाता, मिथिला चित्रकला आ आधुनिक चित्रकला दुनूक समावेश।

३.१९ डॉ. प्रेमशंकर सिंह (जन्म: १९४२)

रचना: शोध-लेख।  मैथिलीक वरिष्ठ विद्वान-आलोचक। प्रेमशंकर सिंह मैथिलीक वरिष्ठ विद्वान छथि। सदेह १मे हिनकर शोध-लेख “बीसम शताब्दी मैथिली साहित्यक स्वर्णिम युग”

भारतीय आलोचना:

निबन्ध-विधामे हिनकर ललित शैली मैथिली गद्यक सौन्दर्य-चेतनाकेँ प्रतिष्ठित करैत अछि। साहित्यिक शोधमे औचित्य सिद्धान्तक परिपालन। ललित निबन्ध-शैलीमे मैथिली गद्यक सौन्दर्य-चेतना। औचित्य सिद्धान्त सभ विधामे समुचित भाव-व्यञ्जना।

३.२१ बिनीत ठाकुर (ललितपुर, नेपाल)

रचना: 'बाँकी अछि हमर दूधक कर्ज' (गीत-संग्रह) मिथिलाक्षर आ देवनागरी दुनूमे

मिथिलाक्षरमे प्रकाशन एहि पोथीकेँ विशिष्ट बनबैत अछि। नेपालक मैथिलीकेँ भारतीय धाराक संग जोड़बाक विदेह-प्रयास एहिसँ सिद्ध होइत अछि। मिथिलाक्षरमे प्रकाशन Script preservation + नेपालक मैथिलीकेँ भारतीय धारासँ जोड़बाक ऐतिहासिक प्रयास।

३.२२ बी.के. कर्ण (जन्म: १९६३)

रचना: 'संकट गुणक आ मैथिल' (आलेख)इण्डियन इन्स्टिट्यूट ऑफ पैकेजिंग, हैदराबादमे उपनिदेशक।

समीक्षा:

मिथिलाक आर्थिक विकासक Risk Analysis एकटा Data-driven आलेख। 'मैथिल पलायनसँ मैथिलीक आकस्मिक अन्त' Diaspora Studies '५ जिलाक जनसंख्या' Census Data सँ Literary Sociology Marxist दृष्टिसँ व्यापारी वर्गक अभावसँ मैथिल समाजक आर्थिक अवनति। नव्य न्यायक अनुमान Statistical Evidence सँ सामाजिक निष्कर्ष।

३.२३. भरत माँझी

रचना: ओड़िया कविता, आदिवासी-दलित-चेतनाक कवि।

समीक्षा:

Dalit Aesthetics हाशियाक जनताक जीवन-संघर्षक काव्याभिव्यक्ति। Subaltern Voice (Spivak) मैथिली अनुवाद साहित्यमे आदिवासी-दलित अनुभवक सशक्त प्रस्तुति।

३.२४. मनोज मुक्ति

रचना: 'स्मिताक लड़ाई' (कविता)

नेपालक मैथिली राजनैतिक कवि।

समीक्षा:

'पशुपतिनाथक देशमे होइछ व्यभिचार सब भेषमे' रौद्र रस आ सामाजिक विद्रोह। मधेश आन्दोलनक साहित्यिक प्रतिनिधित्व Subaltern Political Poetry। वीर रस 'सम्पूर्ण मैथिलमे नव चेतना भरैत, सबके लड़िहिटा पड़त।'

३.२५. महेन्द्र मलंगिया

रचना: नाटक, रंगमञ्च-निदेशन

'मैथिली नाटककारक रूपमे हमर ऊँचाइ धरि किओ नञि पहुँचि सकैत अछि।' स्वघोषित मैथिलीक Shakespeare मूलधाराक ब्राह्मणवादी व्यक्ति केन्द्रित नाटककार।

भारतीय आलोचना:

'हम दर्शककेँ लक्षित कऽ नाटक लिखैत छी' जनरंजकता (लोकरस) क सिद्धान्त। नाट्यशास्त्रक दर्शक-चेतनाक व्यावहारिक प्रयोग, मुदा ओइमे जातिवादी व्यंग्य जातिवादी सीमित दर्शक वर्गकेँ ध्यानमे राखि

पाश्चात्य आलोचना:

Bertolt Brecht केर Epic Theatre सँ तुलना दर्शककेँ सोचचा लेल मजबूर करैत रंगमञ्च। मुदा जनकपुरमे मिथिला नाट्य कला परिषदसँ सीमित दर्शक आ लक्ष्य समूह दिल्लीरि। मूलधाराक मैथिली नाटक Community Theatre केर प्रसारमे बाधा

विदेह फ्रेमवर्क:

जितेन्द्र झा जनकपुरक आलेखमे 'जावत धरि हमर कलम चलैत रहत ताधरि मैथिली नाटककारक रूपमे हमर सिंहासन अटल।' आदि मूलधाराक आत्ममुग्ध रचनाकारक विशेषता। नेपालमे मैथिली रंगमञ्चक parallel history जेना उपेन्द्र भगत नागवंशी, सरोज खिलाड़ी, भ्रमर आदि हुनकर मूलधाराक विरुद्ध ठाढ़

युवा कवि। नव काव्य-प्रयोग।

 ३.२६. मायानन्द मिश्र

रचना: 'अहाँ की छी' (कविता), सदेह १ मे हिनकर साक्षात्कार (डॉ शिव प्रसाद यादव द्वारा)'मिथि-मालिनी' पत्रिकाक प्रसंगमे हिनकर दृष्टिकोण प्रस्तुत भेल अछि अछि।

विदेह फ्रेमवर्क:

'मिथि-मालिनी'सँ जुड़ल हिनकर दृष्टि 'स्थानीय लेखक-मण्डलकेँ अधिकाधिक प्रोत्साहन भेटक चाही' विदेह फ्रेमवर्कक लोकतान्त्रिक साहित्य-निर्माणक आदर्शसँ सुसंगत अछि। 'मिथि-मालिनी' पत्रिकाक माध्यमसँ स्थानीय साहित्यिक मञ्च विदेह parallel history केर पूर्ववर्ती प्रयास।

३.२७. डॉ. मित्रनाथ झा (जन्म: १९५६)

रचना: 'विदेह-वैभव' (कविता) मिथिला शोध संस्थान, दरभंगामे पाण्डुलिपि विभागाध्यक्ष।

भारतीय आलोचना:

'विदेह-वैभव' 'विद्या-वैभव केर गरिमासँ सर्वथा पुक्त जे सिद्ध भूमि' वीर + शान्त रसक समागम। मिथिलाक दार्शनिक-साहित्यिक विरासतपर गर्व-गान।

विदेह फ्रेमवर्क:

'भग्न चिन्तन' कविता 'लेखनीक आइ दुर्दशा देखि एकान्त मौन भए कनैत छी' लेखकक सामाजिक उत्तरदायित्वक स्वीकृति।

३.२८. मुखीलाल चौधरी (बुटवल, नेपाल)

रचना: 'समझौता नेपाल भोर' गीति-एल्बमक समीक्षा, नेपाली मैथिली संगीत-आन्दोलनक समीक्षक।

समीक्षा:

नेपालक संघीय गणतन्त्रक प्रारम्भिक दौरमे मैथिली गीतक भूमिकाकेँ रेखांकित करैत 'भोर' एल्बमक समीक्षा। 'जतय हिन्दुओ राखि ताजिया, मान दिअए इस्लामके' साम्प्रदायिक सद्भावक गीत सहिष्णुता। Rupa Jha, Dhire Premershri, Rajendra Vimal आदिक गीतक तुलनात्मक विश्लेषण।

३.२९. डॉ पालन झा

रचना- आध्यात्मिक निबन्ध, साहेब रामदास

भारतीय आलोचना:

वैदिक दर्शन 'निष्काम कर्म' (गीता अध्याय १८) क सरल मैथिली व्याख्या संग साहेब रामदासक ४७८ पदक विश्लेषण भक्ति रसक सभ स्तर। 'मधुरं रस' कृष्ण-भक्तिक चरम अभिव्यक्ति।

नव्य न्याय:

वेद-उपनिषदक 'प्रमाण' (ज्ञानक साधन) विवेचन तत्त्वचिन्तामणिक दार्शनिक परम्पराक आलोकमे। मोक्ष-मार्गक तार्किक विश्लेषण।

विदेह फ्रेमवर्क:

मिथिलाक आध्यात्मिक परम्पराक संरक्षण parallel history मे धार्मिक-सांस्कृतिक आयाम।

 

३.३०. डा. रमानन्द झा 'रमण'

रचना: 'बहुत दिनक बाद मिथिलाक ग्रामांचलमे सगर रातिक दीप जरयक आयोजन'

मैथिलीक 'सगर रातिक दीप जरय' आन्दोलनक इतिहासकार। 'सगर रातिक दीप जरय' अद्यतन आन्दोलनक इतिहासकार आब छथि उमेश मण्डलदुनू गोटेक 'सगर रातिक दीप जरय’ क इतिहास विदेह पेटारमे उपलब्ध अछि।

समीक्षा:

'सगर रातिक दीप जरय' मैथिली कथाक सामूहिक उद्यम। Collective Memory (Maurice Halbwachs) सामुदायिक स्मृतिक साहित्यिक दस्तावेज, २००८ मे रहुआ संग्राम मे अशोक कुमार झा ’अविचल’ द्वारा एकर आयोजन भेल छल। विदेह parallel history एहि आन्दोलनकेँ कमजोर करयबला पक्षकेँ उजागर कएलक

[ई पुछलापर जे तखन विभूति आनन्द, हीरेन्द्र कुमार झा, दमन कुमार झा आ अशोक कुमार मेहता केना १११म सगर राति दीप जरयमे पहुँचला, तँ ओ सभ सूचित केलनि जे तइ लेल ऐ चारू गोटेक करार अशोक अविचलसँ भेलन्हि जे ओ एकरा ११२ म सगर राति दीप जरय लिखता, मुदा ओ कोनो आमंत्रणमे से नै केलन्हि आ बैनरपर ऊपरमे छोट सन 'क्रम ११२' लिखलन्हि। तइपर संचालक हीरेन्द्र कुमार झा क उसकेलापर अध्यक्ष विभूति आनन्द समेत दमन कुमार झा आ अशोक कुमार मेहता २-३ घण्टा बाद खा पी कऽ ओतऽ सँ प्रस्थान कऽ गेला, मुदा समानान्तर धाराक सभ कथाकार भोर धरि गोष्ठीमे रहि एकरा सफल बनबेलन्हि। एतऽ ई स्पष्ट कऽ दी जे ई कृत्य हीरेन्द्र कुमार झा पहिनहियो केने छथि जे विदेहमे अभिलेखित अछि [८९म सगर राति दीप जरय, औरहा (लौकही), १५.५.२०१३, संयोजक- उमेश पासवान; हीरेन्द्र झा द्वारा क्रमांक ९० नै केलापर गोष्ठीक बहिष्कार आ हुनका उसकेलापर अशोक कुमार मेहता सेहो बहिष्कार केलनि]। एतऽ ईहो स्पष्ट कऽ दी जे हीरेन्द्र कुमार झा लूज टॉक करैमे माहिर छथि आ अपना सङे आयल लोकक विषयमे, कनियो जँ ओ सभ एम्हर-ओम्हर गेला, तँ ढाकीक ढाकी विषवमन करै छथि। संगहि ईहो स्पष्ट कऽ दी जे समानान्तर धाराक लेखक लोकनिक सगर राति दीप जरयमे आगमनसँ पूर्व, जखन हीरेन्द्र कुमार झा सभक बोलबाला छलन्हि, गोष्ठीमे सभ खा पी कऽ सूति जाइ छला आ मात्र कथा पढ़निहार असगरे जागल रहै छला, जकर विरोधमे आशीष अनचिन्हार कथा पढ़बासँ मना कऽ देने रहथिन्ह, मुदा मूलधारा भोरमे जे न्यूज देलक तइमे ई गप नै आयल। ई सभटा खेरहा हमर पोथी प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग-२ मे अभिलेखित कएल गेल अछि जे उपलब्ध अछि http://videha.co.in/pothi.htm पर। साहित्य अकादेमी द्वारा गत दस बर्खसँ समानान्तर धाराक एकमात्र स्थल सगर राति दीप जरय केँ गीड़ि लेबाक प्रयास कएल जा रहल अछि। आगामी ११२म 'सगर राति दीप जरय'क आयोजन श्री रामचन्द्र रायक संयोजकत्वमे हुनक पैतृक गाम- सहुरिया (अन्धराठाढ़ी) मे 'मार्च' २०२३ मासक अन्तिम शनि दिन हएत, से सर्वसम्मतिसँ निर्धारित भेल। हीरेन्द्र कुमार झा अपन ब्लैकमेलिंग आगाँ सेहो पूर्ण निष्ठासँ जारी राखलनि जखन ०२.०१.२०२३ केँ रामचन्द्र रायकेँ फोन कऽ आगामी गोष्ठीक क्रमांक ११२ नै ११३ करबाक दुष्टतापूर्ण ब्राह्मणवादी आग्रह केलन्हि आ डरेलन्हि, जइ सँ कोनो तरहेँ साहित्य अकादेमीक गोष्ठीकेँ सगर राति दीप जरयक मान्यता भेटि जाय, फेर ०५.०१.२०२३केँ घट्टी मानलन्हि। साहित्य अकादेमी हुनकर दस बर्खसँ जारी ऐ कुत्सित प्रयासक मेहनताना दैत हेतन्हि आ जँ नै देने छन्हि तँ आगाँ देतन्हि। विदेहक आगामी साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक मे सभ गपक खुलासा हएत।

 

ऐ सम्बन्धमे ई स्पष्ट कऽ दी जे अशोक अविचल ऐ गोष्ठीक आयोजन पूर्ण रूपसँ व्यक्तिगत रूपेँ केने रहथि। दिल्लीक साहित्य अकादेमीक गोष्ठी जे टैगोरक १५० जयन्ती बर्खमे आयोजित भेल आ जकरा साहित्य अकादेमी अपन वार्षिक रिपोर्ट आ आय-व्यय खातामे अपन गोष्ठीक रूपमे वर्णित केलक आ तकर पाइक वितरण देखेलक आ ऑडिटरसँ अप्रूव करेलक, जे सही मदमे टैगोरक कार्यक्रम लेल खर्च भलै (सगर राति दीप जरय लेल नै) केँ सगर राति दीप जरयक रूपमे मान्यता देबा लेल मूल धाराक पुरस्कार/ असाइनमेण्ट लोलुप आ ब्राह्मणवादी लोक गत दस बर्खसँ अपस्याँत छथि, से एक बेर फेर असफल भेल।  -(विदेह अंक ३६२ सम्पादकीय)]

साहित्य अकादेमीक मैथिली विभाग आ आन सरकारी आ गएर सरकारी ब्राह्मणवादी संस्था सभसँ लाभान्वित आ ओकरा सभक शहपर हीरेन्द्र झा आदि द्वारा दरभंगामे २९.०६.२०२४ शनि ३०.०६.२०२४ (रवि) केँ एकर अपहरण कऽ लेल जेबाक एक बेर फेर साजिश भेल। जखन माला उठबै लेल प्रस्ताव अबै छै तखन ओइपर सभ कथाकारसँ मत मांगल जाइ छै, मुदा से नै भेलै एतऽ। ब्राह्मणवादी कथाकार सभ हीरेन्द्र झा केर संग साजिशमे शामिल भऽ गेला, वा रमेश आदि कथाकार सन बौक बनल रहला, जेना द्रौपदी चीरहरण मे भीष्म आ द्रोण बौक भऽ गेल रहथि। उमेश मण्डल रमेशक कथा “कैलास मंडलक फिलिप्स रेडियो” पढ़ने छथि [देखू विदेह अंक ४४१- गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली लेल दलित साहित्य समीक्षाशास्त्र-२ (संदर्भ: प्रभास कुमार चौधरीक 'इन्द्रधनुष', अशोकक 'प्रतिलोम' आ रमेशक 'कैलास मंडलक फिलिप्स रेडियो'/ दलित साहित्य समीक्षाशास्त्र, भारतीय समीक्षाशास्त्र, पाश्चात्य समीक्षाशास्त्र, गंगेशक नव्य न्याय आ विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्कक परिप्रेक्ष्यमे)] आ हुनका भ्रम रहन्हि जे कमसँ कम रमेश एकर विरोध करता; ओ हुनकासँ हस्तक्षेप करबाक आग्रहो केलन्हि, मुदा रमेश मूड़ी गोति लेलन्हि।

[आचार्य रामानंद मंडल – (सगर राति दीप जरय दरभंगा विवाद)

सगर राति दीप जरय दरभंगा आयोजन शुरूये से विवादित भे गेल रहल हय। कि ई कार्यक्रम दिन मे होय।अइला कि रात मे कुछ लोग बारह बजे के बाद सुत रहय हय।महिला आ वृद्ध पुरुष के भाग लेवै मे दीक्कत होइ हय। आउर कुछ लोग त पोथी लोकार्पण के बाद अपन घर चल जाइत हय। अंतोगत्वा सगर राति दीप जरय छौ बजे सांझ से छौव बजे सुबह तक आयोजित भेल। आगंतुक कथाकार के संयोजक द्वय साहित्यकार अशोक कुमार मेहता आ साहित्यकार हीरेन्द्र झा स्वागत करैत रहलन। कार्यक्रम के शुरूआत दीप प्रज्ज्वलन से भेल। दिवंगत मिथिला -मैथिली विभूति के श्रद्धांजलि अर्पित कैल गेल। पोथी लोकार्पण कैल गेल। साहित्यकार डॉ महेंद्र नारायण राम के अध्यक्षता में संचालन   साहित्यकार कमल मोहन चुन्नू जी कैलन। साहित्यकार भीम नाथ झा उद्बोधन कैलन। महराजा कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति जी वैदिक कथा से लेके आधुनिक कथा पर प्रकाश डाल लैन।तीन गो पंजी बनल रहय।दू गो पर हस्ताक्षर आ एगो पर कथा पाठ के विवरण। परंपरागत रूप से पहिले एकैटा पंजी में उपस्थिति आ कथा पाठ दर्ज़ होइत रहल हय। कार्यक्रम के शुरूआत वरीय कथाकार के कथा बाचन से प्रारम्भ भेल। यथा -साहित्य अकादमी से पुरस्कृत जगदीश प्रसाद मंडल के कथा आदि। त्वरित समीक्षो भेल। कथा पाठ आ समीक्षा चलैत रहल। मध्यांतर मे भोजन भेल। भोजनोपरान्त कथा पाठ आ समीक्षा होइत रहल।कुल ४४ कथाकार ४५  कथा के पाठ कैलन। त्वरित कथा समीक्षा भेल। समीक्षा आ समीक्षा शैली आ हाव भाव से कुछ कथाकार असहमत आ रंज देखल गेल। अंत मे सगर राति दीप जरय के अगिला कार्यक्रम के लेल बिना प्रस्ताव पारित के अध्यक्ष द्वारा घोषणा कैल गेल कि अगिला कार्यक्रम साहित्यकार कमल मोहन चुन्नू जी के संयोजकत्व में पटना मे आयोजित होयत।वरीयतम साहित्यकार जगदीश प्रसाद मंडल जी अइसे असहमति जतैलन।परंच कार्यक्रम के संयोजक साहित्यकार हीरेन्द्र झा दीप साहित्यकार कमल मोहन चुन्नू के सौंप देलैन।  दीप हस्तांतरण मे संयोजक साहित्यकार अशोक कुमार मेहता अनुपस्थित रहलन।साहित्यकार जगदीश प्रसाद मंडल अनेक साहित्यकार संग कार्यक्रम के बहिष्कार क देलन। कार्यक्रम आ साहित्यकार के अंतिम फोटो शेसन न भेल। सगर राति दीप जरय साहित्यकार के अखाड़ा बन गेल आ दीप बन गेल ट्राफी।- -आचार्य रामानंद मंडल, सीतामढ़ी।]

मैथिली_साहित्यक_इतिहासक_लोकार्पण आ #सगर_राति_दीप_जरय_दरभंगाक_गोष्ठी

आइ लगभग चालीस वर्षक बाद मैथिलीमे इतिहासक पोथी लिखल गेल अछि। डॉ. विजयेन्द्र झाकेँ ऐ पुनीत कार्य लेल कोटिश: धन्यवाद.. आभार...। विजयेन्द्र बाबू हमर पड़ोसी छैथ। हिनक गाम चिकना रेलवे स्टेशनसँ सटले बिरौल छिऐन। ओना ई पोथी किछु दिन पुर्वहि प्रकाशित भेल अछि आ केतेको ठाम ऐ पोथीकेँ देखबाक मौका सेहो हमरा भेटल अछि मुदा एकर लोकार्पण नहि भेल छेलै से 29.6.2024 केँ दरभंगामे भेलइ। ऐ पोथीक लोकार्पणमे हमरो रहबाक छल। ई पूर्व निर्धारित छेलै जे लोकार्पणक कतारमे पाँच गोटा रहता जइमे हमहूँ (राम विलास साहु) रहबै। मुदा से नहि भऽ सकल, किएक कार्यक्रमक संयोजनमे संकीर्णतावादी आ जातिवादी व्यवहार की की केलक से सर्वविदित अछिए। आइ 34 वर्षक सगर रातिक इतिहासमे सभ पोथीक लोकार्पण एकसंग माने एक सत्रमे होइत रहल अछि।
हमरा दू दिन पूर्वहि सूचना भेटि चुकल छल जे डॉ. विजयेन्द्रबाबू द्वारा लिखित मैथिली साहित्यक इतिहास (आदिकाल आ मध्यकाल)क लोकार्पण दरभंगामे होएत आ लोकार्पणक कतारमे कुल पॉंच गोटा रहता। जइमे पहिल डॉ. भीमनाथ झा, द्वितीय श्री जगदीश प्रसाद मण्डल, तृतीय श्री कमलेश झा आ नन्द विलास राय तथा पंचममे हमर नाओं माने राम विलास साहु।
‘सगर राति दीप जरय’क कथा गोष्ठीमे हम 2010 इस्वीसँ भाग लैत आबि रहल छी। आइ धरिक एकोटा आयोजन हम फोंक नहि जाए देलौं। आइ धरिक कुल मिला कऽ जोड़बै तँ 39-40 टा गोष्ठीमे भाग लेलौं अछि। बेरमा गाममे 71 आयोजन जगदीशबाबूक संयोजकत्वमे भेल छेलै। तहीठामसँ लगातार भाग लैत रहल छी। हम अपना संयोजनमे दू-तीन बेर ऐ कार्यक्रमक आयोजक सेहो करबौने छी। किनकौं प्रति कोनो दूजा-भाव नहि रखलौं आ हमरा खूब जश सेहो भेटल अछि। मैथिलीक सेवक सभकियो एक छिया, सहोदर छिया, एहेन भाव हमर आइ धरिक रहल अछि। हम जहिया कहियो अपना संयोजनमे कार्यक्रम केलौं तँ अही भावे केलौं जइसँ हमरा जशो खूब भेल। अहिना सभठाम होइतो आबि रहल अछि मुदा से दरभंगामे 29 जूनक शनि दिन जे गोष्ठी भेल तइमे हीरेन्द्रजी नहि होमए देलखिन।
‘सगर राति दीप जरय’क 111म कथागोष्ठीक पछाति जे आयोजन भेल सहुरिया-नवटोलीमे, ओतए सर्वसम्मतिसँ एकर गिनती (आयोजन क्रम)केँ गौन कएल गेल। ऐसँ एकटा ई फैदा भेलै जे सभकियो आबए-जाए लगला। अही तरहेँ गोष्ठी आगू बढ़ल आबि रहल छल। बिनु गिनतीक आयोजन हुअ लगल छल। सहुरिया-नवटोली (अन्धराठाढ़ी)क बाद नहरी (खुटौना)मे भेल, नरहिया (लौकही)मे भेल, बेरमा (लखनौर) आ निर्मली (सुपौल)मे सेहो अही तरहेँ आयोजन भेल। एक-पर-एक विद्वान साहित्यकार आ साहित्यप्रेमी लोकनि गोष्ठीमे भाग लेलैन, डॉ. अशोक अविचलजीक इच्छा रहैन जे अही तरहेँ गोष्ठी हुअए आ हएबो शुरू भऽ गेल छल। मुदा निर्मली बाद जखन दरभंगामे, हीरेन्द्रजीक संयोजनमे गोष्ठी भेल तँ ओ पुन: ई काज करए लगला। माने आयोजन क्रमक चर्चा शुरू कऽ देलैन। बैनरपर 118म आयोजन अंकित छल से सभकियो देखनहि हेबइ। उद्घाटन भाषण दैत डॉ. भीमनाथ झा एकर भर्त्सना सेहो केलैन। ओ स्पष्ट शब्दमे बजला- ‘सगर राति दीप जरयक गिनती नइ महत्व नहि रखैत अछि। मूल अछि जे कथागोष्ठी चलैत रहए, दीप जगमगाइत रहए’। खाएर जे किछु मुदा दरभंगामे तेतबे नहि भेल।
सभठाम उद्घाटन सत्रक पछाति पोथी लोकार्पण सत्र आरम्भ होइत अछि। तैबीच जतबा जे पोथी आएल रहल सभकेँ पोथीकेँ मैथिलीक धरोहर बुझि क्रमश: सबहक लोकार्पण एकसंग होइए। दरभंगा से नहि भेल। गोष्ठीक संयोजक हीरेन्द्रजी कहलैन जे ऐ पोथी (मैथिली साहित्यक इतिहास)क लोकार्पण बादमे हेतइ। हम मेहताजीसँ पुछलयैन जे एना किए दू भागमे पोथीक लोकार्पण होएत? तैपर ओ कहलैन जे से सभ हीरेन्द्रेजी कहता। खाएर जे किछु। लगभग साढ़े आठ बजेसँ पूर्वहि पहिल फेजमे लगभग दर्जन भरि पोथीक लोकार्पण भेल। पछाति बहुत लोक चलि गेलाह। सभागारमे बैसल हम सोचैत रही जे आखिर इतिहासक पोथीक लोकार्पण कखन होएत, जनतबमे छल भीमबाबू सेहो रहता, मुदा ओ तँ आब जा रहल छैथ।
लगभग 12 बजे रातिमे संयोजक अपनहि माने हीरेन्द्र कुमार झा, अमलेन्दु शेखर पाठक आ अध्यक्षक संग दू गोटा आर, पोथी लऽ कऽ ठाढ़ भऽ फोटो खिंचा लेलैन आ हॉंइ-हॉंइ अपना-अपना बैगमे पोथी राखि लइ गेलाह। ई क्रिया लगभग 30 सेकेण्डक पेसतरे सम्पन्न भऽ गेल..! ई दृश्य देखि हमरा छगुन्ता लागि गेल आ हम उमेश मण्डलकेँ कहलयैन जे देखि लेलिऐ ने। तैपर ओ (डॉ. उमेश मण्डल) उठि कऽ ठाढ़ होइत बजला, ‘एना केना लोकार्पण करबा देलिऐ इतिहासक पोथीकेँ।’ तैपर तथाकथित अध्यक्ष महिन्दर राम बजला- “कतेक सुन्दर तँ लोकार्पण भेल हेँ।” तैपर उमेश मण्डल कहलकैन जे “यौ श्रीमान ऐ पोथीक लोकार्पण हेतु लेखक स्वयं हमरा प्रतिनिधि बनौल अछि आ से जनतब संयोजककेँ सेहो लिखितमे देने छैन। ओ कहने छैथ जे मेल-पॉंच करि कऽ पॉंच गोटासँ लोकार्पण करबए लेल। तैठाम आयोजके-संयोजक आ मंच संचालके-सभ मिलिकऽ सभकियो अपनहिमे पोथी बॉंटि लइ गेलौं। कहू, एहेन दृश्य जे कियो देखता तँ की कहता?”
तैपर ओ कहलखिन- “हँ तँ दू गोटाकेँ बजाउ ने आ हैया लिअ पोथी, अदैल-बदैल कऽ फोटो खिंचा लिअ।”
ई कहैत ओ अप्पन हाथक पोथी बढ़ा देलखिन। तैसंग डॉ. सुरेन्द्र भारद्वाज सेहो अपना हाथक पोथी लऽ कऽ ठाढ़ भऽ बजला- “ईहो पोथी लेल जाए।”
बड़बढ़ियॉं, लोकार्पणक ऐ विस्तृत क्रममे श्री कमलेश झा, श्री नन्द विलास राय आ हमर नाम (राम विलास साहु) ल बजौल गेल।
हौ बाबू, फोटो तँ खिंचा गेल मुदा पोथी हमरा हाथसँ महिन्दर राम लऽ लेलैन। महिन्दरजीकेँ चुन्नूजी मोन पाड़ि कहलकैन- ‘सर पोथी लऽ लिअ।’ डॉ. सुरेन्द्र भारद्वाजजी मुदा अप्पन ओ प्रति कमलेशबाबूकेँ दऽ देलखिन। हम सभ रहि गेलौं छुच्छे। ओना, तइसँ हमर मन बेसीकाल छोट नहि रहल। थोड़े काल जरूर उदास जकॉं रहलौं। पछाति पूर्णरूपेँण ठीक भऽ गेलौं। हँ, गोष्ठी जखन उसरल, माने अन्तिम कथा पाठ आ तैपर त्वरित समीक्षा एलाक बाद जखन समापनक घोषणा भेल तेकर बादक बाद जे भेल आ तइसँ जे उदासी चढ़ल से आइ धरि चढ़ले अछि।
‘सगर राति दीप जरय’क गोष्ठीमे कहबे केलौं जे हम 2010 इस्वीसँ लगातार अबैत-जाइत रहलौं अछि। कोनौंठाम एहेन अप्रजातांत्रिक निर्णय लऽ ऐगला आयोजनक घोषणा नहि होइ छल, जे दरभंगामे भेल। आगामी आयोजनक लेल बिनु प्रस्ताव आमंत्रित केनहि, जनसमूहक सहमति बिनु लेनहि अध्यक्षसँ घोषणा करबा देल गेल जे ऐगला गोष्ठी डॉ. कमलमोहन चुन्नूक संयोजकत्वमे पटनामे होएत.!
जगदीशबाबू (श्री जगदीश प्रसाद मण्डल)केँ ई नीक नहि लगलैन आ ओ ठाढ़ भऽ कऽ प्रतिवाद केलखिन। मुदा तैपर हिनका संग जे वर्ताव कएल गेल ओ अत्यन्त दु:खद अछि। ओइ समय लगभग 19 आदमी सभमिलाकऽ रहल हएब, जइमे करीब 15-16 आदमी उठि कऽ विदा भऽ गेलौं। तीन-चारि आदमी रहि गेला जे दीप आ पंजीकेँ कसकसाकऽ पकड़ने रहला। दीप-आ पंजी तँ पुन: कीनल जा सकैए तँए परिस्थिति देखि हमरालोकनि निर्णय लेलौं जे ऐगला आयोजन सितम्बरमे फुलपरासमे हमसभ करब।
दरभंगा गोष्ठीक विसंगतिक समाचार समाजमे पसरल। अही क्रममे विजयेन्द्र बाबूकेँ सेहो अपन पोथी-लोकार्पण सम्बन्धि विसंगतिक पता लगलैन। ओ फोन केलाह। हमरा पुछलैन तँ हम हुनका सभ बात कहलयैन तैपर ओ कहलैथ जे हम शीघ्र एक प्रति पोथी पठा रहल छी।
वएह पोथी आइये, अखने हमरा हाथ आएल अछि। मनमे बेहद खुशी भेल। सोचलौं जे ऐ खुशीमे अहूँसभकेँ साझी करी...। हम एकबेर पुन: विजयेन्द्रबाबूकेँ धन्यवाद आ साधुवाद दइ छिऐन। जय मैथिली।
- राम विलास साहु]


[बिल्कुल सही लिखलहुं ।आयोजकक मानसिक संकीर्णता देखल गेल मैथिली साहित्यक लोकार्पणमे आ अगिला आयोजन लेल । परम्परागत रूप सं दीप देल जाइछ अगिला संयोजक के ।से नहि भेल ।अहांक निर्णय सही अछि।- कमलेश झा]


[दरभंगा कथागोष्ठी मे भेल विमर्श के प्रसंग मे सही तथ्यक लेखन नहि भेल अछि।जखन आंहां सब उठि क' विदा भ' गेलिऐक,हम आ.श्री जगदीश बाबू के आ उमेश जी के दोबारा बजा क' अनलियनि।फेर दू-तीन मिनट गप्प भेलै।श्री बर्णवाल जी आ दरभंगा कथागोष्ठी अध्यक्ष आ.महेंद्र ना राम जी,बैसले छलाह। मुदा, 'दुनू पक्षक अपन-अपन प्रस्ताव आ जिद्द पर अड़ल रहलाक चलतें', फेर चि.उमेश जी,अपन पिताजीक संग चलिए देलनि। आ एम्हरुको प्रस्ताव पर हम कोनो मोलायम रुखि नहि देखल। तें,एना भेल आ एकता भंग भ' गेल। हमर,एहना स्थिति मे कोनो भूमिका नहि रहल। तेँ,मौन...! अहाँ सब जाइ लेल बेसी हड़बड़ायल रहिऐक। बैसितिऐक,त'आर गप्प होइतै जरुर.....! श्री मेहता जी आ श्री हीरेन्द्र भाइ,त' एकताक प्रयास पहिने केनहि रहथि, तखने संयुक्त आयोजन दरभंगा मे भेल छल!
बहुत बेसी पोथीक लोकार्पण, कथापाठ आ विमर्श के प्रभावित करिते अछि। दुनू दिसुक आयोजनक निरंतरता बनल अछि। एकताबद्ध भेनाइ त' नीक बात छैके। मुदा,जिद्द त' गुटबाजी के जन्म दैतहिं छै!- रमेश]
[उत्तर: विदेह अंक ४४१ केर पूरा सम्पादकीय पढू, मेहता जी दीप चोरि मे शामिल नहि छला, साजिशक पता सभकें रहै अशोक अविचल, हीरेन्द्र झा आ कमल मोहन चुन्नू सोझे साजिश मे शामिल रहथि आ अहाँ मौन भऽ परोक्ष रूपे। अशोक अविचल आ हीरेन्द्र झा केर एक दशकक कुत्सित प्रयास की सफल भऽ गेलै? अहाँक उत्तर सऽ स्पष्ट अछि जे ओइ कुत्सित प्रयास कें अहाँ “जिद्द त ऽ गुटबाजी के जन्म दैतहि छै!” (विस्मयादि बोधक सहित) लिखि ऽ सामान्य करबाक प्रयास केने छी । अपन मूड़ी गोति लेलाक बाद भीष्म आ द्रोण सेहो एहिना केने रहथि।]
[एकरा 'दीप चोरि'क विशेषण देब, एकदम उचित नहि।ई अहाँक तामस थिक। प्रस्ताव सबहक समक्ष, बहुमत स' पारित भेल छल,जाहि स' अहाँ सब,असहमत रही!- रमेश]

[दीप देलाक बाद जखन बिना प्रस्ताव लेने ब्राह्मणवादी कथाकार द्वारा दीप चोरि भ ऽ गेल आ समानान्तर धारा द्वारा बहिष्कार भेल तकर बाद बचल ब्राह्मणवादी कथाकार सभक बहुमत नै सर्वमत छल । ओना ई पूर्व प्लानिंग रहै, आ तें बेचारे मेहता जी घसकि गेल छला, वा हटा देल गेल छला विदुर सन । पूरा विदेह अंक ४४१ केर संपादकीय पढू आ ओतऽ रेफर कएल विदेह पुरान संपादकीय पढू सभ साजिश स्पष्ट भ ऽ जायत। ओना की चुन्नू आ हीरेन्द्र सन ब्राह्मणवादी साहित्यकार केर कथा गोष्ठी “सगर राति दीप जरय” केर समानान्तर धारक संकल्पनाक संग चलि सकल, ज’ अहाँ ओइसऽ संतुष्ट छी त ऽ हमरो शुभकामना लिअ आ प्रसन्न होउ जे सगर राति अहाँ सभ लग अछि, ओना नव दीप आबि गेल छै, असल सगर राति कोन छै, एक जाति बला वा मिथिलाक सभ गोटेक से निर्णय अहाँ कें लेबाक अछि ।]

[रमेश:अहांक पक्ष 'जिद्द आ अहं'बला अछि,तें अपने-स, अपने के 'पांडव' मानि लैत छी। तैओ,हम अपना भरि,'सफाइ' देलहुं। शेष, 'मुख्य कर्त्ता-धर्त्ता लोकनि',अध्यक्ष डा महेन्द्र ना राम,श्री मेहता जी,श्री हीरेन्द्र कु झा,आदि कहताह।आब,अइ स' बेसी किछु हमरा नहि कहबाक अछि। 'ओ सब' 'चुप्प' छथि,से ओ सब जानथि..!- रमेश]
[उत्तर: मिथिला सृजन पूर्व नियोजित षड्यंत्रक विषय मे अहूँकें जानकारी हेबे करत, मेहता जी कें रहनि तें ओ घसकि गेला वा विदुर सन हटा देल गेला, महेंद्र नारायण राम/ अशोक कुमार मेहता तऽ रामसेवक सिंह जी सऽ बादमे सगर-तगर रातिक फेर मे पड़य लेल नहि कहने रहथिन से ओहो विदुरे रहथि से हीरेन्द्र आ चुन्नू रहय दुर्योधन आ दु:शासन आ अहाँ सभ कें कष्ट जे कैलाश मण्डल रेडियो बाहि पर लटका लेलक त ऽ अहम् बला भऽ गेल पांडव स्वयं कें मानि रहल अछि, मुख्य कर्ताधर्ता पर छोड़ि अहाँ बचि नै सकइ छी]
 

सगर राति दीप जरय पहिल सँ अखन धरिक कथा यात्रा

 

१. मुजफ्फरपुर, २१.०१.१९९०, प्रभास कुमार चौधरी; २. डेओढ़, २९.०४.१९९०, जीवकान्त; ३. दरभंगा, ०७.०७.१९९०, डॉ. भीमनाथ झा, प्रदीप मैथिली पुत्र, विजयकान्त ठाकुर; ४. पटना, ३.११.१९९०, गोविन्द झा, दमनकान्त झा; ५. बेगुसराय, १३.०१.१९९१, प्रदीप बिहारी; ६. कटिहार, २२.०४.१९९१, अशोक; ७. नवानी, २१.०७.१९९१, मोहन भारद्वाज; ८. सकरी, २२.१०.१९९१, प्रो. सुरेश्वर झा, डॉ. राम बाबू; ९. नेहरा, ११.१०.१९९२, ए.सी. दीपक; १०. विराटनगर, १४.०४.१९९२, जीतेन्द्र जीत; ११. वाराणसी, १८.०७.१९९२, प्रभास कुमार चौधरी; १२. पटना, १९.१०.१९९२, राजमोहन झा; १३. सुपौल- १, १८.१०.१९९३, केदार कानन; १४. बोकारो, २४.०४.१९९३, बुद्धिनाथ झा; १५. पैटघाट, १०.०७.१९९३, डॉ. रमानन्द झा 'रमण' ; १६. जनकपुर, ०९.१०.१९९४, रमेश रंजन; १७. इसहपुर, ०६.०२.१९९४, डॉ. अरविन्द कुमार 'अक्कू'; १८. सरहद, २३.०४.१९९४, अमिय कुमार झा; १९. झंझारपुर, ०९.०७.१९९४, श्यामानन्द चौधरी; २०. घोघरडीहा, २२.१०.१९९४, डॉ. नारायणजी; २१. बहेरा, २१.०१.१९९५, कमलेश झा; २२. सुपौल (दरभंगा) , ०८.०४.१९९५, कमलेश झा; २३. काठमांडू, २३.०९.१९९५, धीरेन्द्र प्रेमर्षि; २४. राजविराज, २४.०१.१९९६, रामनारायण देव; २५. कोलकाता (रजत जयंती, २८.१२.१९९६), प्रभास कुमार चौधरी; २६. महिषी, १३.०४.१९९७, डॉ. तारानन्द वियोगी/ रमेश प्रायोजित; २७. तरौनी, २०.०६.१९९७, शोभाकान्त; २८. पटना, १८.०७.१९९७, प्रभास कुमार चौधरी; २९. बेगूसराय, १३.०९.१९९७, प्रदीप बिहारी; ३०. खजौली, ०४.०४.१९९८, प्रदीप बिहारी; ३१. सहरसा, १८.०७.१९९८, रमेश; ३२ पटना, १०.१०.१९९८, श्याम दरिहरे; ३३. बलाइन; नागदह, ०८.०१.१९९९, पदम सम्भव; ३४. भवानीपुर, १०.०४.१९९९, डॉ. जिष्णु दत्त मिश्र; ३५. मधुबनी, २४.०७.१९९९, सियाराम झा 'सरस', डॉ. कुलधारी सिंह; ३६. अन्दौली, २०.१०.१९९९, कमलेश झा; ३७. जनकपुर, २५.०३.२०००, रमेश रंजन; ३८.  काठमांडू, २५.०६.२०००, धीरेन्द्र प्रेमर्षि; ३९. धनबाद, २१.१०.२०००, श्याम दरिहरे एवं रामचन्द्र लालदास; ४०. बिटठो, २१.०१.२००१, डॉ. अक्कू प्रो.विद्यानन्द झा; ४१. हटनी (घोघरडीहा), १९.०५.२००१, प्रो. योगानन्द झा/अजित कु.आजाद; ४२. बोकारो, २५.०८.२००१, गिरिजानन्द झा 'अर्धनारीश्वर',  मिथिला सा. परिषद्; ४३. पटना, किरणजयंती, ०१.१२.२००१, अशोक, चेतना समिति, पटना; ४४. राँची, १३.०४.२००२, कुमार मनीष अरविन्द; ४५. भागलपुर, २४.०८.२००२, धीरेन्द्र मोहन झा; ४६. पटना, (विद्यापति भवन पटना), १६.११.२००२, अजित कुमार आजाद; ४७. कोलकाता, २२.०१.२००३, कर्णगोष्ठी, कोलकाता; ४८. खुटौना, ०७.०६.२००३, डॉ. महेन्द्र नारायण राम; ४९. बेनीपुर, २०.०९.२००३, कमलेश झा; ५०. दरभंगा, २१.०२.२००४, डॉ. अशोक कुमार मेहता; ५१. जमशेदपुर, १०.०७.२००४, डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी; ५२. राँची, ०२.१०.२००४, विवेकानन्द ठाकुर ; ५३. देवघर, ०८.०१.२००५, श्याम दरिहरे एवं अविनाश; ५४. बेगूसराय, ०९.०४.२००५, प्रदीप बिहारी; ५५. पूर्णियाँ, २०.०६.२००५, रमेश; ५६. पटना, ०३.११.२००५, अजीत कुमार आजाद; ५७. जनकपुर (नेपाल) , १२.०८.२००६, रमेश रंजन; ५८. जयनगर, ०२.१२.२००६, नारायण यादव; ५९. बेगूसराय, १०.०२.२००७, प्रदीप बिहारी; ६०. सहरसा, २१.०७.२००७, किसलय कृष्ण; ६१. सुपौल-२, ०१.१२.२००७, अरविन्द ठाकुर; ६२. जमशेदपुर, ०३.०५.२००८, डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी; ६३. राँची, १९.०७.२००८, कुमार मनीष अरविन्द; ६४. रहुआ संग्राम (मधुबनी), ०८.११.२००८, डॉ. अशोक अविचल; ६५. पटना, कथा गंगा-३, २१.०२.२००९, अजित कुमार आजाद/ चेतना समिति; ६६. मधुबनी, ३०.०५.२००९, दिलीप कुमार झा; ६७. समस्तीपुर, ०५.०९.२००९, रमाकान्त रय 'रमा'; ६८. सुपौल- ३, ०५.१२.२००९, अरविन्द ठाकुर; ६९. जनकपुर, ०३.०४.२०१०, राजाराम सिंह 'राठौर'; ७०. कबिलपुर (दरभंगा) , १२.०६.२०१०, डॉ. योगानन्द झा; ७१. बेरमा (झंझारपुर), ०२.१०.२०१०, जगदीश प्रसाद मण्डल, स्थानीय साहित्य प्रेमी; ७२. सुपौल, ०४.१२.२०१०, अरविन्द ठाकुर; ७३. महिषी, कथा राजकमल, ०५.०३.२०११, विजय महापात्र; ७४. हजारीबाग, १०.०९.२०११, श्याम दरिहरे; ७५. पटना, हीरक जयन्ती, १०.१२.२०११, अशोक एवं कमलमोहन 'चुन्नु'; ७६.चेन्नै, १४.०७.२०१२, विभा रानी; ७७. दरभंगा, किरण जयन्ती, ०१.१२.२०१२, अरविन्द ठाकुर ; ७८. घनश्यामपुर, ०९.०३.२०१३, कमलेश झा; ७९. औरहा (लौकही), १५.५.२०१३, उमेश पासवान; ८०. निर्मली (सुपौल), ३०.११.२०१३, उमेश मण्डल, स्थानीय साहित्य प्रेमी; ८१. देवघर, (बिजली कोठी, बम्पासटॉन, देवघर), २२.०३.२०१४, ओम प्रकाश झा; ८२. मेंहथ, (झंझारपुर), कथा बौध सिद्ध मेहथपा, ३१.०५.२०१४, गजेन्द्र ठाकुर; ८३. सखुआ-भपटियाही, ३०.०८.२०१४, नन्द विलास राय/फागुलाल साहु/सूरज नारायण राय 'सुमन'; ८४. बेरमा (मधुबनी), २०.१२.२०१४, शिवकुमार मिश्र, स्थानीय साहित्य प्रेमी; ८५. भागलपुर, (श्याम कुंज, द्वारिकापुरी भागलपुर), ०४.०४.२०१५, ओम प्रकाश झा ; ८६. लकसेना (मधुबनी), २०.०६.२०१५, राजदेव मण्डल 'रमण', सत्यदेव 'सुमन' ; ८७. निर्मली (सुपौल), १९.०९.२०१५, उमेश मण्डल, स्थानीय साहित्य प्रेमी ; ८८. मध्य विद्यालय- डखराम (बेनीपुर), ३०.०१.२०१६, कमलेश झा, अमर नाथ झा ; ८९. लौकही, २६.०३.२०१६, उमेश पासवान एवं प्रेम कुमार साहु; ९०. लक्ष्मीनियाँ (मधुबनी), १८.०६.२०१६, राम विलास साहु, स्थानीय साहित्य प्रेमी; ९१. गोधनपुर (मधुबनी) २४.९.२०१६, दुर्गानन्द मण्डल; ९२. नवानी (मधुबनी), ३१.१२.२०१६, अजय कुमार दास 'पिन्टु'; ९३. रतनसारा (घोघरडीहा), २५.०३.२०१७, राजदेव मण्डल, स्थानीय साहित्यानुरागी ; ९४. लौफा (मधेपुर), २४.०६.२०१७, डॉ. योगेन्द्र पाठक वियोगी, स्थानीय प्रेमी  ; ९५. जलसैन डुमरा (मधुबनी), ०९.९.२०१७, नारायण यादव; ९६. धबौली (लोकही) १६.१२.२०१७, राधाकान्त मण्डल ; ९७. बेरमा (लखनौर) २४.३.२०१८, कपिलेश्वर राउत, बेरमा ग्रामवासी ; ९८. सिमरा (झंझारपुर), १६.६.२०१८, डॉ. शिव कुमार प्रसाद ; ९९. मुरहद्दी, (बड़की टोल), २२.९.२०१८, प्रो. प्रीतम निषाद , १००. निर्मली (तेरापंथ भवन), २२.१२. २०१८, उमेश मण्डल, नवरत्न वेंगानी, मनीष जालान ; १०१. झिटकी (मधुबनी) ३०.३.२०१९, भारत भूषण झा  ; १०२. मझौरा, (मधुबनी), २९.०६.२०१९, जय प्रकाश मण्डल, आलोक कुमार; १०३. रामपुर (मधुबनी), २८.९.२०१९, उमेश नारायण कर्ण 'कल्प कवि' ; १०४. वलम नगर-महदेवा (लौकही), १४.१२.२०१९,प्रेम कुमार साहु,उमेश पासवान; १०५.दरभंगा (सीतायन सभागार), १३.०२.२०२१, कमलेश झा ; १०६. हटनी (घोघरडीहा, मधुबनी), २५.०९.२०२१, लालदेव कामत; १०७. बेलहा (फुलपरास), २५.१२.२०२१, जीवकान्तक स्मृतिमे, उमेश मण्डल, ई. शैलेन्द्र मण्डल; १०८. मधुरा (मधुबनी), २६.०३.२०२२, डॉ. श्रीशंकर झा; १०९. ननौर (मधुबनी), २५.०६.२०२२, प्रदीप पुष्प; ११०. सोनवर्षा (लौकही), २४.०९.२०२२, अच्छेलाल शास्त्री, स्थानीय साहित्य प्रेमी; १११. रहुआ संग्राम (मधुबनी) ३१.१२.२०२२, अशोक अविचल; ११२. नवटोली (शिवा पंचायत, अन्धरा ठाढ़ी) २५.०३.२०२३ श्री राम चन्द राय; ११३. नहरी (खुटौना), २५.०६,२०२३, श्री नारायण यादव, श्री ललन कु. सल्हैता; ११४.                 नरहिया (लौकही), ०१.१०.२०२३, श्री राम विलास साहु; ११५. बेरमा (झंझारपुर), ३०.१२.२०२३, श्री कपिलेश्वर राउत, श्री ब्रह्मानन्द प्रसाद; ११६. निर्मली (सुपौल), श्यामा कम्पलेक्स सह विवाह हॉल, २३.०३.२०२४, डॉ. उमेश मण्डल, श्री अखिलेश कु. चौधरी; ११७. दरभंगा, २९.०६.२०२४, हीरेन्द्र कुमार झा, डॉ. अशोक मेहता; ११८. रतनसारा (फुलपरास) २१.०९.२०२४, दुर्गानन्द मण्डल, राजीव कुमार, शिव कुमार राय; ११९. सहरसा (अभिनव विवाह भवन, विद्यापति नगर, सहरसा), २८.१२.२०२४, गोसाँई मण्डल, रामेश्वर प्रसाद मण्डल आ दिग्विजय कुमार सिंह; १२०. मधुबनी, स्थान: सुधीर मेमोरियल हॉल, रीजनल सेकेण्डरि स्कूल, ०५.०४.२०२५, प्रो. (डॉ.) शुभ कुमार वर्णवाल, डॉ. राज कुमार भारती, डॉ. राम शृंगार पाण्डेय; १२१. केवटना, स्थान: उत्क्रमित मध्य सह +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर, केवटना, घोघरडीहा, मधुबनी (बिहार), २८.०६.२०२५, श्री नारायण प्रसाद सिंह, कुमार राजीव रंजन, घनश्याम चौधरी; १२२. निर्मली (सुपौल), २०.०९.२०२५, ई. आशुतोष कुमार, प्रो. (डॉ) जय प्रकाश साहु; १२३. शिवनगर (निर्मली), २७.१२.२०२५, प्रो. राम सेवक सिंह, श्री कपिलेश्वर प्रसाद सिंह; १२४. नरहिया (लौकही), २८.०३.२०२६, श्री उमेश पासवान; १२५. मझौरा, (राजनगर) [२७-२८ जून २०२६ मे प्रस्तावित] ।

३.३१. राजेन्द्र पटेल

रचना: गुजराती कविता

 

३.३२. राजेन्द्र विमल

रचना: गीत ('जगमग ई सृष्टि करए, तखने दीवाली छि')

वरिष्ठ साहित्यकार-गीतकार।

समीक्षा:

'राम-शक्ति आगुमे, रावण ने टिकि सकत' वीर रस। 'प्रेम चेतना जागि पड़ए' सामाजिक आशावाद। भक्ति-काव्य परम्परासँ लोक-जागरणक गीत विद्यापति परम्पराक आधुनिक विस्तार।

३.३३. डा. राम दयाल राकेश

रचना: 'छठ पाबनि' (सांस्कृतिक निबन्ध)

संस्कृतिविद् आ मैथिली-हिन्दी लेखक।

भारतीय + पाश्चात्य:

छठ पाबनिक Anthropological विश्लेषण 'सूर्यकेँ अर्घ्य देबाक प्रथा जाति-धर्म समभावक सुरक्षा' सामाजिक समावेश। Cultural Anthropology (Clifford Geertz) Thick Description। नदीमे ठाढ़ भऽ सूर्यकेँ अर्घ्य Eco-spirituality

मधेसी सांस्कृतिक पहचानपर विद्वत्तापूर्ण विवेचन। Anthropology Cultural Studies क दृष्टिसँ महत्त्वपूर्ण।

३.. राम नारायण देव

रचना: कविता

 ३.५ राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (जन्म: १९५१)

रचना: अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन आ नेपाल, फ्लैश बैक (कथा)

नेपालक जनकपुरधामक वरिष्ठ साहित्यकार रामभरोस कापड़ि 'भ्रमर' मैथिलीक महत्त्वपूर्ण स्तम्भकार छथि।

विदेह फ्रेमवर्क:

नेपाल-भारत दुनूक मैथिलीकेँ एक सूत्रमे पिरोएबाक प्रयास विदेहक नेपाली प्रतिनिधि। नेपाल-भारत दुनूक मैथिली साहित्यकेँ एक सूत्रमे पिरोएबाक जे विदेह-प्रयास थीक, 'भ्रमर'जी ओहि प्रयासक एकटा नेपाली प्रतिनिधि छथि

३.. रामलोचन ठाकुर

रचना: ’पास करबाक लेल’ कविता, किछु हाइकू

वरिष्ठ मैथिली कवि।

समीक्षा:

क्षेमेन्द्रक औचित्य सिद्धान्त भावक उचित प्रस्तुति। काव्यात्मक स्वर।

३.. रामजी चौधरी

रचना: विविध भजनावली।

३.. रामान्य झा 'रामरंग' (स्वर्गीय) प्रसिद्ध अभिनव भातखण्डे

रचना: विद्यापति संगीत-परम्पराक साक्षात्कार

'रामरंग' जी मैथिली संगीत-परम्पराक महान ज्ञाता। गंगेश गुंजनजीद्वारा आ गजेन्द्र ठाकुर द्वारा मृत्युपूर्व लेल गेल अन्तिम साक्षात्कार। 'रामरंग' जी मैथिली संगीत-परम्पराक महान ज्ञाता छलाह। सदेह १ मे प्रकाशित हिनकर अन्तिम साक्षात्कार विद्यापति-संगीतपर अत्यन्त मूल्यवान दस्तावेज़ थीक।

भारतीय आलोचना:

श्रृंगार + भक्तिक अद्भुत समागम। रसक दृष्टिसँ 'विद्यापित संगीत लोकरंजनक हेतु उच्चकोटिक एवं गायन के वास्ते बनल छैक' यैह जन-रंजकता (लोकरस) क परिभाषा थीक। श्रृंगार आ भक्ति रसक अद्भुत समागम विद्यापतिमे मिलैत अछि।

पाश्चात्य आलोचना:

Ethnomusicology Regional Music परम्पराक संरक्षण। Globalisation ('भू-मण्डलीकरण') केर खतरासँ मैथिली संगीतकेँ बचेबाक आग्रह Cultural Preservation Ethnomusicology क दृष्टिसँ विद्यापति-संगीत Regional Music परम्पराक उत्कृष्ट उदाहरण थीक। Globalization ('उपभोक्तावाद, बाजारवाद, भू-मण्डलीकरण') क खतरासँ मैथिली संगीतकेँ बचेबाक हिनकर आग्रह Cultural Preservation क पाश्चात्य आन्दोलनसँ मेल खाइत अछि।

विदेह फ्रेमवर्क:

'रामरंग'जीक निधन सदेह १ क प्रकाशन दिवस (१ जनवरी २००९) पर भेल एकटा युग-अन्तक प्रतीक। विदेह एहि साक्षात्कारकेँ संरक्षित राखि parallel history क एक अनमोल पृष्ठ बचौलक।

३.. रूपा धीरू

रचना: कविता अङ्गेजल काँट

समीक्षा:

सकारात्मक गीत। महिला स्त्री-प्रतिनिधित्व। Feminist Cultural

३.. रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'

रचना: कविता- बूथ कैप्चरिंग

३.४१. डा. रेवती रमण लाल

रचना: कविता- मधुश्रावणी।

समीक्षा:

३.. रोशन जनकपुरी

रचना: कविता- डर लगैए

नेपाल-मैथिली काव्य-परम्पराक प्रतिनिधि।

३.. लक्ष्मी ठाकुर

रचना: मिथिला चित्रकला

स्त्रीवादी आलोचना:

मिथिला चित्रकला + काव्य Visual Art Literary Art केर समागम। महिलाक सृजनात्मक स्वायत्तता।

३.४४. वासुदेव सुनानी

रचना: उड़िया दलित कविता।

 

३.. विद्यानन्द झा

रचना: कविता- सृष्टि चक्र

३.. विनीत उत्पल

रचना: साक्षात्कार-पत्रकारिता (राजमोहन झासँ ऐतिहासिक संवाद)

मैथिली Oral History Journalism केर उत्कृष्ट उदाहरण

समीक्षा:

Journalism + Literature Oral History (Alessandro Portelli) केर सिद्धान्त। राजमोहन झाजीसँ साक्षात्कारमे मैथिली साहित्यक समीक्षाक समस्याकेँ उजागर कएल।

३.. विभा रानी

रचना: नाटक- भाग रौ।

मैथिलीक प्रमुख महिला नाटककार

स्त्रीवादी आलोचना:

Gynocriticism स्त्री-दृष्टिकोणसँ लेखन। सामाजिक दबाव आ स्त्री-अनुभवक कथा। 'मैथिलीमे स्त्रीगण केँ साहित्य लेखनमे जरूर अएबाक चाही'[(राजमोहन झा)] एहि आह्वानकेँ विभा रानी साकार करैत छथि। Elaine Showalter केर 'Gynocriticism'क दृष्टिसँ विभा रानी मैथिलीक स्वतन्त्र महिला-लेखन परम्पराकेँ प्रतिष्ठित करैत छथि। स्त्री-अनुभव आ सामाजिक दबाव हिनकर कथाक प्रमुख विषय।

विदेह फ्रेमवर्क:

'मैथिलीमे स्त्रीगण केँ साहित्य लेखनमे जरूर अएबाक चाही' (राजमोहन झा) विदेह एहि आह्वानकेँ विभा रानी सन लेखिकाक प्रकाशनसँ पूरा करैत अछि। विदेहक महिला-लेखन प्रोत्साहन नीतिक जीवन्त उदाहरण।

३.. वृषेश चन्द्र लाल (जन्म: २९ मार्च १९५५, 'विश्वेश्वर')

रचना: 'फेकनाक दियाबाती' (कविता)

नेपालमे लोकतन्त्रक लेल १७ बेर गिरफ्तार, लगभग ८ वर्ष जेल। तराई-मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।

भारतीय आलोचना:

'फेकनाक दियाबाती'मे फुलझड़ी-अनार भुइँपटका बीच एक भूख बच्चाक दृश्य करुण रस। 'एकता माने सभलेल नै खाली एकटालेल' वक्रोक्ति।

पाश्चात्य आलोचना:

Revolutionary Poetry Pablo Neruda, Bertolt Brecht परम्पराक मैथिली प्रतिनिधि। Postcolonial Mao, Gramsci सँ मेल खाइत Political Verse

विदेह फ्रेमवर्क:

नेपालक मैथिल राजनैतिक संघर्षक साहित्यिक दस्तावेज parallel history मे राजनैतिक आयाम।

३.. छवि झा / कुमुद सिंह

रचना: 'मिथिला चित्रकला: अर्थक अधिकता आ साथर्कता' (शोध-लेख)

भारतीय आलोचना:

मिथिला चित्रकलाक 'पुरैन', 'कोहबर', 'अरिपन' सांकेतिक भाषाक विश्लेषण। पञ्जी-व्यवस्था आ कमल, वंश-वृद्धिक कामना। लोक-कलाक शास्त्रीय परम्पराक सम्बन्ध।

पाश्चात्य आलोचना:

Art History + Cultural Studies Vicomte (1977), Caroline Brown, Erickson आदि विदेशी विद्वानक मिथिला चित्रकलाक अर्थक गलत व्याख्याक खण्डन। 'पश्चिमक लोक एहि चित्रकलाकेँ परिभाषित नहि कऽ सकैत छथि' Cultural Authenticity Feminist Art History महिला-कलाकारक स्वायत्त ज्ञान-परम्पराक रक्षा।

नव्य न्याय + विदेह:

चित्रकलाक अर्थ-विवेचनमे 'प्रमाण' (Authentic knowledge) केर स्रोत स्थानीय महिला। विदेह मिथिला चित्रकलाक Digital Documentation

३.. आभाष लाभ (जनकपुरधाम)

रचना: मैथिली गायन, संगीत

मैथिलीक प्रसिद्ध गायक। 'रे छोड़ा तोरा बज्जर खसतौ' केर १५ लाख प्रतिक बिक्री। मैथिली गायन, संगीत-परम्परा

जनकपुरक प्रसिद्ध गायक आभाष लाभ मैथिली गीत-संगीतक प्रमुख स्वर थछथि। सदेह १मे  हिनकर साक्षात्कार मैथिली संगीतक वर्तमान स्थितिपर प्रकाश दैत अछि।

भारतीय आलोचना:

जनरंजकता (लोकरस) बिक्रीक मेट्रिक्स कलाक लोकप्रियताक साक्ष्य। विद्यापति संगीत-परम्पराक आधुनिक विस्तार। 'रे छोड़ा तोरा बज्जर खसतौ' जेहन गीतक १५ लाख प्रतिक बिक्री यह जन-रंजकता (लोक-रस) थीक। विद्यापति संगीत-परम्परासँ जोड़ैत आभाषजी मैथिली संगीतक अखण्ड धाराकेँ आगाँ बढ़बैत छथि।

पाश्चात्य आलोचना:

Popular Culture vs Authentic Culture 'प्यारोडी मौलिककेँ साफ-साफ खतम कऽ दैत अछि।' Cultural Preservation Cultural Studies क दृष्टिसँ Parodic Culture क विरुद्ध Original Composition केर पक्षमे हिनकर स्पष्ट मत ('प्यारोडी मौलिककेँ साफ-साफ खतम कऽ दैत अछि') महत्त्वपूर्ण अछि। Popular Culture vs. Authentic Culture क द्वन्द्व स्पष्ट अछि।

३.५१. आशीष अनचिन्हार

रचना: कविता, गजल।

३.५२. उदय नारायण सिंह 'नचिकेता'

रचनाक परिचय: नाटक, केन्द्रीय भाषा संस्थानक निदेशक

प्रो. उदय नारायण सिंह 'निचकेता' केन्द्रीय भाषा संस्थान मैसूरक निदेशक छथि। सदेह १ मे हिनक नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश

३.५३. मानक मैथिली

भाषा-सिद्धान्त:

Chomsky केर Generative Grammar + Saussure केर Structuralism मैथिली भाषाक मानकीकरण। साहित्यक माध्यमसँ भाषिक अधिकारक प्रश्न उठेनाइ। Chomsky केर Generative Grammar Saussure केर भाषा-सिद्धान्तक आलोकमे मैथिली भाषाक मानकीकरण यएविदेहक क्षेत्र थीक।

विदेह फ्रेमवर्क:

'मैथिलीक मानक लेखन-शैली' अनुभाग (पृ. २४१) विदेह फ्रेमवर्कक भाषा-नीतिक आधारशिला थीक। 'मैथिलीक मानक लेखन-शैली' (पृ. २४१) विदेह फ्रेमवर्कक भाषा-नीतिकेँ संस्थागत वैधता।

३.. उमेश कुमार महतो

रचना: लोक कथा।

३.. तूलिका

रचना: मिथिला चित्रकला। 

३.. अंकुर काशीनाथ झा

रचना: कविता

युवा कवि। मैथिली नव काव्य-परम्पराक प्रतिनिधि।

३.७ अजय सरवैया

रचना: गुजराती कविता

३.. अजीत कुमार झा

रचना: कविता

३.. अनलकांत

रचना: लघुकथा

३.. अबू सुथार

रचना: गुजराती कविताक मैथिली अनुवाद

गुजराती-मैथिली सांस्कृतिक सेतु।

पाश्चात्य:

Comparative Literature + Translation Studies अनुवादक माध्यमसँ मैथिलीमे अन्य भारतीय भाषाक समागम।

गुजराती कविताक मैथिलीमे समागम Comparative Literature Translation Studies क उदाहरण।

३.६०. अमरेश यादव

रचना: कविता

३.६१. अमित कुमार झा

रचना: लघुकथा।

३.६२. अयोध्यानाथ चौधरी

रचना: लघुकथा। 

३.६३. अशोक दत्त

३.६४. एन. अरुणा (जन्म: १९४९, निजामाबाद)

रचना: 'ई सेहो अछि प्रवास' तेलुगुसँ अंग्रेजी (जयलक्ष्मी पोपुरी); अंग्रेजीसँ मैथिली (गजेन्द्र ठाकुर)

तेलुगुमे पाँचटा कविता-संग्रह। ओस्मानिया विश्वविद्यालयमे अध्यापन।

पाश्चात्य + भारतीय:

'ई सेहो अछि प्रवास मात्र अमेरिके-टामे प्रवासक नहि। नारीक जीवनेमे अछि एकटा प्रवास' Feminist Poetry Diaspora Literature 'अहाँ घुरि सकैत छी कखनो काल, मुदा बनि मात्र पाहुन।' Translation Studies अनुवादमे भाव-सम्प्रेषण। World Literature (Goethe) तेलुगु अंग्रेजी मैथिली।

३.६५. ओम प्रकाश झा

रचना: आलेख।

३.६६. कमलानन्द झा (हिन्दी विभाग, सी.एम. कॉलेज, दरभंगा)

रचना: 'मैथिली समस्याक टोह लैत कथा-संकलन: उदाहरण' समीक्षा मेडियोकर- साधारण।

समीक्षामे ध्यान रखबाक वस्तु छल:

'मैथिलीमे श्रेष्ठ कथाक अभाव नहि' राजकमल चौधरी, धूमकेतु, गंगेश गुंजन, तारानन्द वियोगी, अशोकक कथाक सूक्ष्म विश्लेषण। 'यथार्थ कोनो कथाकेँ विश्वसनीयता देबाक बदलामे ओकरा भीतरसँ संवेदना निचोड़ि अनैत अछि।' स्त्री-चेतनाक दृष्टिसँ लिलीरेक 'विधिक विधान' आ देवशंकर नवीनक 'पेम्पी' Feminist Critique, सभटा दोख नवीनजी स्त्रीपर फेकि दैत छथि अशोकक रचना: 'तानपूरा' (कथा)। 'तानपूरा'मे मध्यवर्गीय ढोंगकेँ तार-तार करबामे पूर्णतः सफल। समीक्षा: 'तानपूरा' — विनोद बाबूक संगीत-प्रेम आ हुनकर पुत्री-विरोध — Hypocrisy केर विश्लेषण। 'बिना कोनो उपदेश आ नैतिक आग्रहक कथा मध्यवर्गीय कुत्सित मानसिकताक दुर्ग भेदन करैत अछि।' — Marxist Critique। पाश्चात्य आलोचना: 'उदाहरण' समीक्षामे Comparative Literature — राजस्थानी कथाकार विजयदान देथा आ हिन्दी उदय प्रकाशसँ मैथिली कथाकेँ जोड़ैत  एक नव Critical Framework निर्मित करैत।

रमेश: रचना: कथा: 'नागदेशमे अयनाक व्यवसाय'- अतियथार्थ आ इतिवृत्तिक सीमातोड़ प्रयास। पाश्चात्य आलोचना: Magic Realism + Surrealism केर प्रयोग। Fantasy Realism केर मिश्रण - मैथिली कथामे नव प्रयोगशीलता।

३.६७. काशीकान्त मिश्र 'मधुप'

डॉ पालन झा जी केर सौजन्यसँ हुनकर पद्यमय चिट्ठी।

३.६८. कुमार मनोज कश्यप

रचना: लघुकथा, गजल।

३.. कुमार शुशान्त

रचना: गद्य।

३.७०. कृपानन्द झा (जन्म: १९७०, मधुबनी)

रचना: 'चौकपर आणविक समझौता' (व्यंग्य)

मीरा बाई पोलिटेकनिक, दिल्लीमे पुस्तकाध्यक्ष। अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक जेनरल सेक्रेटरी।

समीक्षा:

Indo-US Nuclear Deal पर गाक चौकपर बहस Vernacular Discourse 'एहि समझौतामे किछु एहन प्रावधान जरूरी अछि' राजनीतिक चेतना। Marxist Critique 'आणविक इन्धनक सम्स्याक समाधान' बनाम वैकल्पिक ऊर्जा। नव्य न्यायक तर्क-पद्धति गाक साधारण जन द्वारा जटिल विषयक विश्लेषण।

३.७१. कृष्णमोहन झा

रचना: कविता

३.७२. केदारनाथ चौधरी (जन्म: ३ जनवरी १९३६, नेहरा, दरभंगा)

रचना: 'माहुर' (उपन्यास, अंश)

'चमेली रानी' (२००४), 'करार' (२००६), 'माहुर' (२००८) तीनटा उपन्यास।

भारतीय आलोचना:

'माहुर' उपन्यासक अंश रंजना विधवा त्रासदी। करुण रस + करुणाक चरम 'हे भगवान! हम ई की कएल? किएक हम मीट कीनल?' पश्चाताप आ ग्लानिक मार्मिक चित्रण।

पाश्चात्य आलोचना:

Realist Novel 'पानापुर' गामक सामाजिक यथार्थ। Gender + Power काली कान्त ओझा (पुजारी) केर घरक शोषणक सूक्ष्म चित्रण। Feminist Analysis कामिनीक विवशता।

३.७३. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र (जन्म: ८ फरवरी १९६७)

रचना: 'यायावरी' नॉर्थ कछार हिल्स यात्रा-वृत्तान्त। 'मैथिली फोकलोर एन्थ्रोपोलोजी ऑफ म्यूजिक' पर पीएचडी। ४०० सँ बेशी निबन्ध प्रकाशित।

भारतीय आलोचना:

यात्रा-वृत्तान्त-विधाक मैथिली परम्परामे नव योगदान। नॉर्थ कछार हिल्सक ११ आदिवासी जनजातिक सांस्कृतिक विरासत।

पाश्चात्य आलोचना:

Ethnography ११ जनजाति (दीमासा, ह्मर, जेमी नागा, कुकी, बाइते, कार्बी, खासी, ह्रांगखाल, वैफी, खेलमा, रोङमेई)क जीवन। Eco-criticism जटिंगा पहाड़ीपर चिड़ैक सामूहिक आत्महत्याक रहस्य। 'Shoot these birds with your camera, not with bullets' पर्यावरण-संरक्षण।

विदेह फ्रेमवर्क:

असमक मैथिली Cultural Documentation विदेह parallel history केर भौगोलिक विस्तार।

३.७४. शंभु कुमार सिंह

रचना: कविता, कथा

 ३.७५. शक्ति शेखर

रचना: आलेख

३.७६. शिव प्रसाद यादव (भागलपुर)

रचना: मायानन्द मिश्रसँ साक्षात्कार

३.७७. शीतल झा

रचना: निबन्ध

 ३.७८. शीला सुभद्रा देवी

रचना: तेलुगु कविता।

३.७९. शेख मोहम्मद शरीफ

रचना: तेलुगु कथा। मैथिलीमे अनुवाद माध्यमसँ मुस्लिम साहित्यकारक प्रतिनिधित्व।

समीक्षा:

'मिथिलाक लोक' सांस्कृतिक विविधता। 'जतय हिन्दुओ राखि ताजिया, मान दिअए इस्लामके' सद्भाव। Communal Harmony + Cultural Pluralism

३.८०. शैलेन्द्र मोहन झा

रचना: हास्य कविता

३.८१. श्याम सुन्दर 'शशि'

रचना: रिपोर्ताज, कतारक भेड़ चरवाहा।

 ३.८२. श्यामल सुमन

रचना: कविता

३.८३. श्रीधरम् (जन्म: १९७४)

रचना: कथा।

३.८४. सच्चिदानन्द यादव

रचना: कविता

३.८५. सतीश चन्द्र झा

रचना: कविता

३.८६. सन्तोष मिश्र

रचना: कविता, गजल

३.८७. सुभाष चन्द्र यादव

रचना: कथा

हिनकर कथामे सामाजिक यथार्थवाद प्रमुख।

मार्क्सवादी आलोचना:

Gramsci Subaltern अवधारणासँ यादवजीक कथा-संसार जाहिमे हाशियाक जनताक जीवन-संघर्ष केन्द्रमे अछि महत्त्वपूर्ण साहित्यिक-राजनैतिक हस्तक्षेप थीक।

पाश्चात्य आलोचना::

Gramsci + Spivak Subaltern voice केर सशक्त अभिव्यक्ति।

३.८८. सुभाष साह

रचना: रिपोर्ताज।

३.८९. सुशान्त झा

रचना: बलिराजगढ़ पर आलेख, मिथिला मंथन।

३.९०. सूर्यनाथ गोप

रचना: कविता

३.९१. हिमांशु चौधरी

रचना: कविता

युवा पीढ़ीक प्रतिनिधि कवि। हिमांशु चौधरी युवा पीढ़ीक प्रतिनिधि कवि छथि।

पाश्चात्य आलोचना:

New Generation Poetry क अर्थमे हिमांशु मैथिलीमे आधुनिक संवेदनशीलताकेँ अभिव्यक्त करैत छथि। New Generation Poetry आधुनिक संवेदनशीलता। Urban Experience केर काव्याभिव्यक्ति।

 

४. सामग्री-संश्लेषण

४.१ रस-सिद्धान्तसँ सदेह १ केर समीक्षा

श्रृंगार: गंगेश गुंजन (राधा), काशीकान्त मिश्र 'मधुप'। करुण: राजमोहन झा, केदारनाथ चौधरी, रामभरोस 'भ्रमर', रामलोचन ठाकुर। वीर: मनोज मुक्ति, वृषेश चन्द्र लाल। रौद्र: बिनीत ठाकुर। भयानक: कोसी-बाढ़ि रचना। हास्य: काशीकान्त मिश्र। भक्ति-शान्त: मैथिलीपुत्र प्रदीप, प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन'। अद्भुत: कैलाश कुमार मिश्र (जटिंगा)। नव्य न्यायक सिद्धान्त: सदेह १ पूर्णरसात्मक (नव रसयुक्त) संकलन थीक। सदेह १ मे सभटा नव रसक उपस्थिति अछि: गंगेश गुंजनक 'राधा'मे श्रृंगार-करुण-शान्त,हृदय नारायण झा केर गीतमे रस-माधुर्य, आ छठि पर्वक विश्लेषणमे भक्ति-शान्त रस। नव्य न्यायक 'सिद्धान्त' (established theorem) यएह अछि जे मैथिली साहित्य पूर्णरसात्मक (Full of all Rasas) थीक।

४.२ ध्वनि-वक्रोक्तिक दृष्टिसँ

गंगेश गुंजनक 'राधा' ध्वनि सिद्धान्तक सर्वोत्कृष्ट उदाहरण। आभाष लाभक 'प्यारोडी' विरोध वक्रोक्तिक व्यावहारिक अनुप्रयोग। गंगेश गुंजनक 'राधा' ध्वनि सिद्धान्तक सर्वोत्कृष्ट उदाहरण थीक जाहिमे व्यक्त अर्थसँ परे मैथिली-अस्मिता, भूमण्डलीकरण आ प्रेम-दर्शनक व्यंजित अर्थ विद्यमान अछि। वक्रोक्तिक दृष्टिसँ राजकमल चौधरी मैथिलीमे सर्वाधिक 'वक्र' (unconventional) लेखक थिकाह, उदाहरण संकलन द्रष्टव्य

४.३ Postcolonial-Feminist-Marxist त्रिकोण

Postcolonial: मैथिली स्वयं एक Postcolonial Text हिन्दी राष्ट्रवादक विरुद्ध। Feminist: विभा रानी, नीलिमा, ज्योति, छवि झा, रूपा धीरू। Marxist: वृषेश चन्द्र लाल, सुभाष चन्द्र यादव, कृपानन्द झा, बी.के. कर्ण। मैथिली भाषा-साहित्य स्वयं एक Postcolonial text थीक हिन्दी राष्ट्रवादक दबावमे कइएक दशक धरि हाशियापर रहल मैथिली संविधानक आठम अनुसूचीमे शामिल भेलासँ अपन मुक्ति पेलक। विदेह ई-पत्रिका Digital Decolonization क माध्यम थीक।

४.४ स्त्रीवादी दृष्टिसँ

सदेह १ मे महिला लेखन: विभा रानी, प्रीति, प्रीति ठाकुर, नीलिमा आदिक रचना स्त्री-दृष्टिकोणकेँ प्रतिनिधित्व करैत अछि। विभा रानी द्वारा महिला रंगमंच केर उत्थान सेहो उल्लेखनीय।

४.५ नव्य न्यायक दृष्टिसँ: सम्पादकीय-तर्क

गजेन्द्र ठाकुरक सम्पादकीय नव्य न्यायक 'अनुमान' (inference) 'उपमान' (analogy) पर आधारित अछि: (पक्ष) विदेह मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ मंच थीक; (हेतु) एहिमे ७० देशसँ १,३६,८७४ बेर दर्शन भेल; (दृष्टान्त) इंटरनेटपर पछिला स पाक्षिक अंक उपलब्ध; (व्याप्ति) जे पत्रिका वैश्विक पाठकसँ जुड़ैत अछि से प्रभावशाली होइत अछि; (निर्णय) विदेह मैथिलीकेँ वैश्विक बनौलक। नव्य न्यायक समग्र मूल्यांकन: सदेह १ क सम्पादकीय तर्क नव्य न्यायक क्रमबद्ध अनुमान पर आधारित: पक्ष (विदेह श्रेष्ठतम मैथिली मञ्च) हेतु (७० देशसँ पाठक) दृष्टान्त (इन्टरनेटपर सभ अंक उपलब्ध) निर्णय (विदेह मैथिलीकेँ वैश्विक बनौलक)।

४.६ विदेह समानान्तर इतिहास: सम्पूर्ण मूल्यांकन

भौगोलिक विस्तार: मिथिला (बिहार-नेपाल), दिल्ली, मुम्बई, लन्दन, हैदराबाद, असम सभ ठामक मैथिली एक मञ्चपर। साहित्यिक विविधता: कथा, कविता, निबन्ध, गजल, नाटक, अनुवाद, लोकसंगीत, चित्रकला, यात्रावृत्तान्त, शोध-लेख सभ विधा समाहित। पीढ़ी-विस्तार: वरिष्ठ (गंगेश गुंजन, राजमोहन झा) सँ युवा (जितमोहन झा, हिमांशु चौधरी) धरि। लोकतान्त्रिक समावेश: ब्राह्मण-कायस्थसँ यादव-दलित धरि, पुरुष-महिला सभ। डिजिटल आर्काइव: इतिहास-निर्माणक नव माध्यम। विदेह समानान्तर इतिहास: मूल्यांकन: सदेह १ विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्कक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण थीक: (१) सरहपाद-विद्यापति परम्परासँ आधुनिकता (गंगेश गुंजन) धरि अखण्ड रेखा; (२) भारत-नेपाल दुनूक मैथिलीकेँ एकट्ठा राखब; (३) १०० साहित्यकारक प्रजातान्त्रिक समावेश; (४) डिजिटल आर्काइव द्वारा इतिहास-निर्माण; (५) नव्य न्यायक मिथिला परम्पराकेँ आधुनिक साहित्यसँ जोड़ब।

५. उपसंहार

'सदेह १' मैथिली साहित्यक एक अभूतपूर्व संकलन थीक। एहिमे १०० सँ अधिक साहित्यकारक रचना समाहित अछि जे मिलिकऽ एक सम्पूर्ण साहित्यिक विश्व-दृष्टि बनबैत अछि।

भारतीय काव्यशास्त्रक दृष्टिसँ नव रसक पूर्ण उपस्थिति, ध्वनि-वक्रोक्तिक सूक्ष्म प्रयोग। पाश्चात्य सिद्धान्तक दृष्टिसँ Postcolonial, Feminist, Marxist, Eco-critical Translation Studies केर अनुप्रयोग। गंगेशक नव्य न्यायक दृष्टिसँ प्रमाण-आधारित साहित्य-विवेचन। विदेह parallel history केर दृष्टिसँ मैथिली साहित्यक स्वायत्त, सम्पन्न, वैश्विक इतिहास।

'सदेह १' एक ऐतिहासिक दस्तावेज थीक जे आगूक पीढ़ीकेँ साहित्यिक विरासत, आलोचनात्मक दृष्टि आ भाषिक गर्वक त्रिवेणी सौंपैत अछि।

युवा पीढ़ीक कवि-कथाकार मैथिलीक भविष्य थीक। हिनकर रचना सभमे शहरीकरण, विस्थापन, वैश्वीकरणक प्रभाव आ पहचान-संकटक अभिव्यक्ति भेटैत अछि। ई सभ साहित्यकार मैथिलीक भूगोल विस्तार (बिहार, नेपाल, दिल्ली, झारखण्ड) केर प्रतिनिधित्व करैत छथि।

'सदेह १' मैथिली साहित्यक इतिहासमे एक महत्त्वपूर्ण मील-पत्थर थीक। एहि संकलनमे भारतीय काव्यशास्त्रक नव रस, ध्वनि-वक्रोक्तिक परम्परा आ पाश्चात्य साहित्य-सिद्धान्तक नव समीक्षा, संरचनावाद, उत्तर-औपनिवेशिकता, स्त्रीवाद आ मार्क्सवाद दुनू परम्पराक संगम दृष्टिगत होइत अछि।

मिथिलाक गंगेश उपाध्यायक नव्य न्यायशास्त्र एहि संकलनमे दुइ स्तरपर कार्य करैत अछि: (क) साहित्यिक तर्कशास्त्रक रूपमे रचनाक काव्यात्मकताक प्रमाण-मीमांसा; (ख) सम्पादकीय दृष्टिक रूपमे विदेहक वैधताक तार्किक प्रतिपादन।

विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क जे मैथिली साहित्यकेँ हिन्दी वा संस्कृतक छाँहमे नहि, अपितु एक स्वतन्त्र धाराक रूपमे देखैत अछि सदेह १ मे पूर्ण रूपेण साकार भेल अछि। गंगेश गुंजनक 'राधा', राजमोहन झाक कथा-दर्शन, रामभरोस 'भ्रमर'क नेपाली-मैथिली परम्परा, आभाष लाभक संगीत-चेतना, विभा रानीक स्त्री-दृष्टि सभ मिलि कऽ एक सम्पूर्ण साहित्यिक विश्व-दृष्टि बनबैत अछि।

अन्तमे, नव्य न्यायक 'निर्णय' ह अछि: सदेह १ विदेहक मुद्रित संस्करण मैथिली साहित्यक वर्तमान-भूत-भविष्यक संगम-स्थल थीक। ई संकलन आगूक पीढ़ीकेँ साहित्यिक विरासत, आलोचनात्मक दृष्टि आ भाषिक गर्वक त्रिवेणी सौंपैत अछि।

सन्दर्भ:

विदेह (पाक्षिक), वर्ष २, मास १३, अंक २५, १ जनवरी २००९, सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर |

 तत्त्वचिन्तामणि गंगेश उपाध्याय (मिथिला, १३वीं शती)

 नाट्यशास्त्र भरतमुनि | ध्वन्यालोक आनन्दवर्धन |

वक्रोक्तिजीवित कुन्तक

Orientalism Edward Said |

The Location of Culture Homi Bhabha

 The Theory of the Novel Georg Luk|

Literary Theory: An Introduction Terry Eagleton

 A Literature of Their Own Elaine Showalter |

The Second Sex Simone de Beauvoir

..........

विदेह: सदेह: २
मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०
समग्र साहित्यिक समीक्षा: सभटा साहित्यकार
भारतीय रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य | पाश्चात्य आलोचना | गंगेशक नव्य-न्याय | विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर | विदेह ई-पत्रिका, अंक २६-५०, २०१०
भूमिका: सदेह २ क स्वरूप
विदेह: सदेह: २ (ISBN: ९७८-९३-८०५३८-०९-९) विदेह ई-पत्रिकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचनाक संग्रह थिक। सदेह ३ (पद्य) क विपरीत एहि खण्डमे साक्षात्कार, आलोचना, इतिहास-लेखन, लोकगीत-शोध, यात्रा-वृत्तान्त, रंगकला-समीक्षा, भाषाशास्त्र सब गद्य विधाक समागम अछि। ४१ साहित्यकारक रचना एहिमे समाहित अछि।
एहि समीक्षामे चारि frameworks उपयोग कएल गेल अछि: (क) भारतीय रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य सिद्धान्त; (ख) पाश्चात्य आलोचना Gramsci, Bourdieu, Benjamin, Spivak, Bakhtin, Foucault, Luk, Freire; (ग) गंगेश उपाध्यायक नव्य-न्याय ज्ञान-मीमांसा; (घ) विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क।
१. जीवकान्त
साक्षात्कार विनीत उत्पल द्वारा (पृ. १-७) | साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता, 'तकैत अछि चिड़ै'
परिचय
जीवकान्त (जन्म: २७ जुलाई १९३६, अभुआढ़, सुपौल) मैथिलीक सबसँ प्रतिष्ठित कवि सभमे छथि। 'तकैत अछि चिड़ै' (२००३) हेतु साहित्य अकादेमी पुरस्कार; मधुबनीक डेओढ़मे पालन-पोषण; ४० वर्षमे ६०-७० पोथीपर टिप्पणी।
रस-ध्वनि विश्लेषण:
एहि साक्षात्कारमे करुण + वीर + शान्त रसक त्रयी अछि। ध्वनि: 'हमर कविता आखिरमे टर्न लैत अछि' काव्य-संरचनाक deep structure क संकेत। वक्रोक्ति: 'सोनारक काज लोहारक हथौड़ीसँ नहि भऽ सकैत' मैथिली आलोचनाक वर्तमान दुर्दशापर एक devastating indictment। औचित्य: साक्षात्कार-विधाक माध्यमसँ आजीवन साहित्यसेवीक autobiography naturally emerge होइत अछि।
पाश्चात्य आलोचना
Gramsci क 'organic intellectual': जीवकान्त academy सँ नहि, गामक अनुभवसँ निकसल छथि। 'मार्क्सवाद उत्तम विचार, मुदा हिंसाक पक्षमे बेसी' एहिमे एक nuanced post-Marxist position अछि जे Gramsci आ Lohia दुनूकेँ synthesize करैत अछि।
नव्य-न्याय
गंगेशक 'व्याप्ति': 'जे ग्रामीण अनुभवसँ लिखैत अछि से authentic होइत अछि' ई व्याप्तिक 'दृष्टान्त' हुनकर अपन जीवन थिक। साक्षात्कारमे 'तर्क-वितर्क' (Navya-Nyaya debate format) सँ रामायणपर discourse क उल्लेख।
विदेह समानान्तर इतिहास
साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त करबाक बावजूद जीवकान्त कहैत छथि जे 'अकादेमीक politics नहि जनैत छी, गाममे रहैत छी' ई Videha Parallel History Framework क spirit थिक। विदेहे एहन कविकेँ canonical space देलक।
२. राजमोहन झा (जन्म: २७ अगस्त १९३४)
साक्षात्कार गजेन्द्र ठाकुर द्वारा (पृ. ८-१०) | साहित्य अकादेमी पुरस्कार 'आई-काल्हि-परसू'
रस-ध्वनि
शान्त + बौद्धिक जिज्ञासाक संगम। ध्वनि: मैथिली साहित्यक structural problems क पर्दाफाश जे कहल गेल तकर ध्वनि ओहिसँ बेशी। वक्रोक्ति: आलोचना-विधापर टिप्पणी करैत ओ स्वयं व्यवस्थाक हिस्सा छथि double-edged critique।
बाख्तिन / Benjamin
बख्तिन केर डायलॉग कल्पना: गजेन्द्र ठाकुरक साक्षात्कार पद्धति दू literary generations क transition document बनबैत अछि। Benjamin: digital archive मे preserve हेबाक बाद ई primary source बनि जाइत अछि।
३. रामान्य झा 'रामरंग' (जन्म: १९२८)
गप-शप गजेन्द्र ठाकुर सँ (पृ. ११) | विद्यापति संगीत-परम्परा
रस-ध्वनि
शान्त + भक्ति रस विद्यापति संगीत-परम्पराक एक living embodiment। ध्वनि: 'रामरंग' नामे पूरा साहित्यिक-आध्यात्मिक identity गुम्फित अछि।
Benjamin / Oral Tradition
Benjamin केर 'aura' मौखिक परम्पराक जीवन्त आभा रामरंगजीक Vidyapati singing tradition मे सबसँ प्रत्यक्ष। १९२८ मे जन्मल संगीत-साधकक स्मृतिकेँ Videha archive मे स्थान देनाई literary archaeology थिक।
४. जितेन्द्र झा
तीन लेख जनकपुरमे चक्काजाम कवि गोष्ठी; प्रिय पाहुन; आशाक किरण: सौभाग्य मिथिला (पृ. १२-१४)
रस-ध्वनि
वीर + शान्त रस। 'आशाक किरण' वक्रोक्ति: मिथिलाक present darkness केँ illuminate करबाक आकांक्षा। 'चक्काजाम', a poetic image) literary event report।
Bourdieu / विदेह फ्रेमवर्क:
जनकपुर (नेपाल) क कवि-गोष्ठी रिपोर्ट साहित्यक cross-border dimension देखबैत अछि। विदेहक core pan-Maithili mission केर प्रदर्शन।
५. अमरनाथ झा
तीन लेख हाँ ई तँ कहियो नहि देखने रही; विष्णु भाकर जी सादगीक प्रतिमूर्ति; आचार्य पंकज (पृ. १५-१९)
रस-ध्वनि
करुण + शान्त रस स्मरण आ श्रद्धांजलि। 'हाँ ई तँ कहियो नहि देखने रही' ध्वनि: पहिलहि बेर भेल अनुभव सबहसँ precious। 'विष्णु भाकर जी सादगीक प्रतिमूर्ति' biographical meditation।
Benjamin / Navya-Nyaya
Benjamin: जे व्यक्ति गेल, हुनका याद रखनाई political act। गंगेशक 'प्रत्यक्ष': अमरनाथ झाक personal testimony एक valid pramaana किताबसँ बेशी।
६. तूलिका/ स्वास्तिका:
रचना (पृ. २०-२१) | नारी-स्वर, चित्रकला।
रस-ध्वनि
शृंगार + करुण नव नारी-कण्ठक आवाज। 'तूलिका' (painter's brush) नाम स्वयं वक्रोक्ति: लेखनी painting करैत अछि। Showalter केर gynocriticism: बिना apology क नारी internal world express।
७. चन्द्रेश
संवेदनशील मोनकेँ छुबैत हुगली ऊपर बहैत गंगा (पृ. २२-२८)
रस-ध्वनि
'हुगली ऊपर बहैत गंगा' ध्वनि: गंगा केवल नदी नहि, सम्पूर्ण उत्तर-भारतीय civilisational memory। शान्त + करुण। वक्रोक्ति: 'हुगली' मे 'गंगा' देखनाई geography केँ metaphysics मे transform केनाइ।
Benjamin / Navya-Nyaya
Benjamin केर 'urban floor': Chandresh हुगलीक किनारसँ memory collect करैत। गंगेशक 'अनुव्यवसाय' (meta-cognition): ने केवल गंगा देखनाई बल्कि देखनाईकेँ सेहो observe केनाइ।
८. फूल चन्द्र झा 'प्रवीण'
मैथिली शिशु साहित्य लोक (पृ. २९-४१)
रस-ध्वनि
वात्सल्य रस। वक्रोक्ति: 'शिशु साहित्य' एक serious literary category मात्र 'बच्चासभक गप' नहि। Benjamin केर childhood theory: बाल-साहित्य future citizens केर imagination shape करैत।
विदेह फ्रेमवर्क
Sahitya Akademi mainstream मे बाल-साहित्य secondary। Videha मे equal space मिलनाई parallel history framework केर democratic impulse।
९. केदार कानन
जगदीश प्रसाद मंडलक कथा 'पछतावा'पर एक दृष्टि (पृ. ४२-४३)
रस-ध्वनि
शान्त + बौद्धिक precision। जगदीश प्रसाद मंडलक कथापर close reading। वक्रोक्ति: आलोचक कथाक 'पछतावा' थीम केँ अपन critical lens सँ deconstruct करैत छथि।
New Criticism आ नव्य-न्याय
T.S. Eliot केर New Criticism: text-focused, intention-independent। गंगेशक 'साध्य-सिद्धि': आलोचनाक assertion + हेतु + दृष्टान्त text सँ logically present।
१०. प्रेमशंकर सिंह (जन्म: १९४२)
जयकान्त मिश्र: जीवन आ साहित्य-साधना (पृ. ४४-६६) | २२ पृष्ठक विस्तृत जीवनी-आलोचना
रस-ध्वनि
वीर + शान्त रस। ध्वनि: 'साहित्य-साधना' (literary austerity) साहित्य तपस्या थिक। वक्रोक्ति: जयकान्त मिश्रक जीवन describe करब = मैथिलीक cultural history describe करब।
Bourdieu / नव्य-न्याय
Bourdieu केर literary field: Jaykant Mishra केर cultural capital केर detailed mapping। गंगेशक 'पञ्चावयवी अनुमान': literary biography एक extended argument पक्ष + हेतु + दृष्टान्त + उपनय + निर्णय।
विदेह फ्रेमवर्क
एक canonical figure केर counter-canonical lens सँ re-examination single-author monographक विकल्पक रूपमे long-form criticism।
११. डा. रमानन्द झा 'रमण'
तन्त्रनाथ झा/सुभद्र झा जन्मशतवार्षिकी (पृ. ६७-७६)
रस-ध्वनि
करुण + शान्त। ध्वनि: 'शतवार्षिकी' सौ वर्ष पश्चात् याद केनाइ एक moral act। Benjamin केर messianic time: dead writers केँ याद रखनाइ 'redemption' थिक।
विदेह आर्काइव
'सगर रातिक दीप जरय' आन्दोलनक इतिहासक संग रमण जी (आब ’सगर राति दीप जरय’क इतिहास डॉ उमेश मण्डल अद्यतन कऽ रहल छथि।) मैथिली literary history केर living archive छथि।
१२. श्यामसुन्दर शशि
श्रद्धांजलि आह उमा! वाह उमा!; डा. धीरेश्वर झा 'धीरेन्द्र'क ६ अम वार्षिकीपर (पृ. ७७-८०)
रस-ध्वनि
'आह उमा! वाह उमा!' 'आह' (anguish) + 'वाह' (admiration) एक्के श्वासमे complicated grief। करुण प्रधान। वक्रोक्ति: 'वाह' श्रद्धांजलिमे celebration of life।
Bakhtin / Carnival
बाख्तिनक carnivalesque: 'आह-वाह' केर juxtaposition मे death + celebration एक संग।
१३. नवेन्दु कुमार झा
चेतना समितिक आम सभामे नव पदाधिकारी; भाषाई अकादेमीक विकास (पृ. ८१-८२)
रस-ध्वनि
वीर रस Maithili language activism केर reporting। 'चेतना समिति' वक्रोक्ति: institutionalised consciousness एक paradox। Gramsci केर civil society: counter-hegemonic institutions केर documentation।
विदेह फ्रेमवर्क
Maithili activism केर real-time documentation Videha कें एक 'living archive' बनबैत।
१४. सुशान्त झा
मैथिली भाषा-संस्कृतिक रक्षा; हमर सपनाक मिथिला; मैथिलीकेँ लऽ कऽ किछु असुविधाजनक प्रश्न (पृ. ८३-८७)
रस-ध्वनि
वीर + करुण। 'असुविधाजनक' सत्य बजनाई स्वयं वक्रोक्ति। गंगेशक 'संशय': title एक epistemic doubt केर state निश्चित तथ्य नहि, uncomfortable questions।
Spivak
Maithili केर 'subaltern' position 8th Schedule language मे गेलाक बादो; जे फेर वएह marginalized 'असुविधाजनक' truth-telling एहि subaltern voice केर articulation।
१५. डॉ. शम्भु कुमार सिंह
आलेख: आधुनिक मैथिली नाटकमे चित्रित: निर्धनताक समस्या (पृ. ८८-९०)
रस-ध्वनि
करुण + बौद्धिक vigour। वक्रोक्ति: 'निर्धनता' केवल economic condition नहि existential crisis।
Luk/ नव्य-न्याय
Luk केर critical realism: Maithili नाटकमे poverty केर representation। गंगेशक 'व्याप्ति-ग्रह': 'जे Maithili आधुनिक नाटक थिक से प्रायः poverty depict करैत अछि' evidence text सँ।
१६. आशीष अनचिन्हार
आलोचना: अन्हारपर इजोतक कहियो विजय नहि (पृ. ९१-९४) |
रस-ध्वनि
'कहियो' (never) absolute negation existentialist statement। रौद्र + शान्त रसक unusual combination। Derrida केर deconstruction: 'अन्हार/इजोत' binary केँ deconstruct करनाई 'neither' position।
विदेह फ्रेमवर्क
Videha Parallel History Framework मे mainstream optimism (awards = 'light winning') केँ question केनाइ counter-canonical gesture।
१७. हृदय नारायण झा
मिथिलाक लुप्तप्राय गीत गर्भसँ छठिहार धरि; सोहर आ खेलउना; विआह संस्कारक गीत; विषहारा गीत (पृ. ९५-१०८) | १४ पृष्ठक संकलन
रस-ध्वनि
वात्सल्य + करुण + शान्त lifecycle songs। ध्वनि: 'लुप्तप्राय' cultural mortality केर metaphor। वक्रोक्ति: 'गर्भसँ छठिहार धरि' जन्मसँ पहिने मृत्युसँ बाद धरिक complete human lifecycle map।
Benjamin / Feminist
Benjamin केर 'Storyteller': traditional community केर voice संरक्षण। Spivak: सोहर, बिआह गीत मुख्यतया महिला गीत, ओइ महिला केर स्वर जे mainstream canon मे कहियो नहि आएल।
विदेह समानान्तर इतिहास
मैथिली मौखिक परम्पराक digital archiving सबसँ महत्त्वपूर्ण archival contribution। जे literary history books मे नहि आएत से Videha archive मे रहत।
१८. डॉ. गंगेश गुंजन
जयकान्त मिश्रपर विशेष; कविक आत्मोक्ति: कविताक अएना विनीत उत्पलक कविता संग्रहपर (पृ. १०९, ११४-११६)
परिचय
गंगेश गुंजन (साहित्य अकादेमी, 'उचितवक्ता', 'बुधिबधिया', 'राधा') मैथिलीक बहुआयामी रचनाकार।
रस-ध्वनि
'कविताक अएना' (mirror) वक्रोक्ति: कविता mirror + ओ mirror खुद mirror mise en abyme; (फ्रेंच भाषा मे एकर अर्थ होइत छैक "अतल खधाइ मे खसाएब") कला आ साहित्य मे एकटा स्व-संदर्भित (self-referential) तकनीक छैक। एहिमे एकटा "दर्पण प्रभाव" (mirror effect) उत्पन्न कएल जाइत छैक, जतय कोनो चित्र, कथा, वा संरचनाक एकटा प्रति ओकरे भीतर समाहित रहैत छैक।। शान्त+बौद्धिक precision। गंगेशक 'परोक्ष प्रमाण': विनीत उत्पलक unrevealed intentions केँ texts सँ infer करैत।
१९. विद्या मिश्र
जयकान्त मिश्रपर विशेष; होलीपर विशेष (पृ. १०९, ११३)
रस-ध्वनि:
शान्त + श्रद्धा। 'होलीपर विशेष' मे हास्य + शृंगार। वक्रोक्ति: होली मे social hierarchies temporarily dissolved। Bakhtin केर carnival: Holi एकटा perfect carnivalesque घटना।
२०. डा. चन्द्रेश शाह
होलीक सन्देश (पृ. १११-११२)
रस-ध्वनि:
हास्य+शृंगार। 'सन्देश' (message) वक्रोक्ति: होली केर रंग सभ मे एकटा संदेश decode करबाक आमंत्रण। Saussure केर semiotics: होलीक रंग सभ= signifiers; सांस्कृतिक अर्थ= signifieds।
२१. रामभरोस कापड़ि 'भ्रमर' (जन्म: १९५१)
तीन लेख: संचार एवं साहित्य मे समावेशी स्वरूप; यात्रा प्रसंग; साझा प्रकाशनमे विद्यापति (पृ. ११७-१२५)
रस-ध्वनि:
वीर + शान्त। 'समावेशी' demand केनाइ= present situation exclusionary छैक वक्रोक्ति। Benjamin: 'साझा प्रकाशनमे विद्यापति' translation-as-afterlife।
Gramsci / विदेह फ्रेमवर्क:
ग्राम्शीक 'cultural hegemony': media केर Maithili exclusion counter करबाक अनुरोध। 'भ्रमर' Videha केर cross-platform experiment केर active participant छथि।
२२. डा. कल्पना मणिकान्त मिश्र
मातृभाषा (पृ. १२६-१२७)
रस-ध्वनि
वात्सल्य + वीर। 'मातृभाषा' भाषाक mortality = माँक mortality emotional intensity केर उच्चतम बिन्दु। Spivak केर 'mother tongue' politics: Maithili claim एक political assertion।
नव्य-न्याय
गंगेशक 'शब्द प्रमाण': 'मातृभाषा' शब्द स्वयं testimony मैथिली बाजयबला केर अपन भाषा संग maternal bond।
२३. भीमनाथ झा
मखानक खानि ई मिथिला; चन्दा झा, हरिमोहन झा मिलि कऽ (पृ. १२८-१३५)
रस-ध्वनि
वीर + शान्त। 'मखानक खानि' मखान (fox nut) मिथिलाक unique agricultural identity। वक्रोक्ति: 'खानि' (treasure) मिथिला स्वयं एकटा खानि। स्थान सिद्धांत (Place theory): भूदृश्य (landscape) साहित्यिक कल्पना केँ आकार दैत अछि।
२४. प्रकाश चन्द्र
रंगदृष्टि; दिल्ली; मिथिलामे रंगकलाक समकालीन दृष्टि (पृ. १३६-१४०)
रस-ध्वनि
अद्भुत + वीर। 'रंगदृष्टि' ध्वनि: देखबाक तरीका स्वयं ideology। Benjamin केर 'aura': मिथिला चित्रकलाक मूल ritual context versus mass-reproduced commodities। Semiotics: मैथिली साहित्य, कला, आ मिथिलाक सांस्कृतिक विन्यास मे माछ (fish), कमल (lotus), आ हाथी (elephant) मात्र प्रतीक नहि, बल्कि एकटा समृद्ध संकेत प्रणाली (sign system) केँ देखबैत अछि। १. माछ (Fish): प्रजनन आ शुभक प्रतीक: मिथिलाक लोक-संस्कृति मे माछ केँ अत्यंत पवित्र आ मंगलकारी मानल जाइत अछि। प्रजनन आ वंश-वृद्धि: माछ ढेर रास अण्डा दैत अछि, तें ई "प्रजनन क्षमता" (fertility) आ वंशक विस्तारक प्रतीक थिक। तांत्रिक महत्व: तांत्रिक साधना मे माछ केँ 'पञ्चमकार' मे सँ एक मानल गेल अछि, जे ज्ञान आ शक्तिक द्योतक अछि। साहित्यिक संदर्भ: मैथिली कविता आ कथा मे माछ केँ अक्सर "नयन" (मृगनयनी नहि, झषलोचनी) आ चंचलताक उपमा देल जाइत अछि।
२. कमल (Lotus): पवित्रता आ अद्वैत दर्शन: कमल मिथिलाक पोखरि आ मिथिलाक दर्शनक अभिन्न अंग अछि। कादो मे निर्मलता: कमल कें "अलिप्तता" क प्रतीक मानल जाइत अछि- संसार रूपी कादो मे रहितो ओकर अपवित्रता सँ दूर रहब। अरिपन मे स्थान: मिथिलाक लोक-चित्रकला (मधुबनी पेंटिंग) मे 'अष्टदल कमल' केँ केंद्र मे राखल जाइत अछि, जे ब्रह्मांडीय ऊर्जाक केंद्र थिक। सौन्दर्यशास्त्र: मैथिली साहित्य मे नायिकाक मुख वा चरणक तुलना प्रायः कमल सँ कएल जाइत अछि, जे ईश्वरीय सौंदर्यक संकेत दैत अछि।
३. हाथी (Elephant): ऐश्वर्य आ स्थिरता: हाथी केँ शक्ति, बुद्धिमत्ता, आ मर्यादाक प्रतीक मानल जाइत अछि। राजकीय वैभव: प्राचीन मैथिली साहित्य आ लोक गाथा मे हाथी 'ऐश्वर्य' (prosperity) आ राजाक शक्तिक परिचायक अछि। कोहबरक प्रमुख हिस्सा: मिथिलाक 'कोहबर' (विवाह कक्ष) मे हाथीक चित्र अंकित कएल जाइत अछि, जे नवविवाहित जोड़ाक जीवन मे स्थिरता आ संपन्नताक कामना करैत अछि। धार्मिक जुड़ाव: गणेशक रूप मे हाथीक मस्तक बुद्धि आ विघ्ननाशक शक्तिक संकेत दैत अछि।
निष्कर्ष: मैथिली संकेत प्रणाली मे ई तीनू तत्व मिलि क' जीवनक पूर्णता केँ परिभाषित करैत अछि: माछ (सृष्टि), कमल (अध्यात्म), आ हाथी (भौतिक संपन्नता)। ई चिन्ह सब मात्र सजावट नहि, वरन् मिथिलाक सामूहिक अवचेतनक भाषीय आ दृश्य लिपि थिक।
२५. जगदीश प्रसाद मंडल
संस्कार-लोकगीत आ गीतनाद (पृ. १४१-१४५)
रस-ध्वनि
वात्सल्य + शान्त। 'गीतनाद' (song-resonance) ध्वनि: sound जे human consciousness मे resonate करैत अछि। वक्रोक्ति: lifecycle songs = society केर moral philosophy केर sonic expression। भारतीय नाद-ब्रह्म concept: sound divine energy थिक।
विदेह फ्रेमवर्क:
Fiction writer = folklorist = cultural theorist Videha's interdisciplinary literary categories।
२६. पंचानन मिश्र
मऊ वाजितपुरसँ विद्यापतिनगर परिवर्तन-यात्रा; मिथिलाक कतिआएल सिद्ध पीठ (पृ. १४६-१५१)
रस-ध्वनि
वीर + शान्त। 'कतिआएल' (neglected) ध्वनि: sacred sites केर abandonment civilisation केर अवनतिक synecdoche। Lefebvre केर 'Production of Space': स्थानक नाम बदलब एकटा political act।
२७. गोपाल प्रसाद
फराक मिथिला राज्यक गठन किएक नहि?; हिन्दी, मैथिली, मिथिला, बिहार ओ मैथिल लोकनिसँ अपेक्षा (पृ. १५२-१५४)
रस-ध्वनि
रौद्र + वीर। 'फराक मिथिला राज्य' ध्वनि: 'फराक' मे पूरा separatist political philosophy। वक्रोक्ति: 'किएक नहि?' प्रश्न स्वयं manifesto।
Fanon / नव्य-न्याय
Fanon केर national consciousness: cultural nationalism → political nationalism। गंगेशक 'साध्य-साधन': 'फराक मिथिला' (साध्य) केँ प्राप्त करबाक 'साधन' केर तार्किक mapping।
२८. प्रोफेसर राधाकृष्ण चौधरी
मिथिलाक इतिहास (पृ. १५५-१६६) | ११ पृष्ठक Maithili History
रस-ध्वनि
शान्त रस scholarly historical narrative। ध्वनि: मिथिला केर इतिहास वर्णित केनाइ= मैथिली साहित्यिक परम्पराक ऐतिहासिक grounding। Foucault केर power/knowledge: History writing is never neutral, इतिहास लेखन कहियो तटस्थ नहि होइत अछि।
विदेह समानान्तर इतिहास
Videha Parallel History Framework केर सर्वोत्कृष्ट explicit instantiation: मिथिलाक स्वतंत्र ऐतिहासिक trajectory, समानान्तर, not derivative of, हिन्दी वा संस्कृत मुख्यधारा।
२९. अमन कुमार झा
रिपोर्ट (काठमाण्डू) (पृ. १६७)
रस-ध्वनि
वीर + अद्भुत। वक्रोक्ति: नेपालक राजधानीमे मैथिली साहित्यिक रिपोर्ताज काठमाण्डू राजनीतिक केन्द्रमे, मैथिली कात-करोटमे। विदेह ओहि सत्यक दस्तावेजीकरण करैत अछि जे गप मुख्यधाराक मीडियासँ जुड़ल लोक अण्ठा दैत छथि।
३०. सुजीत झा
सुनिल मल्लिक सफल व्यक्ति; ६ अम शताब्दीक लोक नायक वृत्तचित्रमे (पृ. १६८-१७१)
रस-ध्वनि
वीर + अद्भुत। 'सफल व्यक्ति' मिथिला आधारित व्यक्तिक सफलता एकटा counter-narrative। Bourdieu: मैथिलीक परिप्रेक्ष्यमे भाषिक+ सांस्कृतिक राजधानीक आर्थिक राजधानीमे परिवर्तन।
३१. रामलोचन ठाकुर
समकालीन मैथिली-कथाक यथार्थ-उर्फ यथार्थक-कथा (पृ. १७२-१७६)
रस-ध्वनि
शान्त + बौद्धिक। वक्रोक्ति: 'यथार्थ-उर्फ यथार्थक-कथा' reality's story OR story's reality? दुनू व्याख्या वैध अछि। Luk केर critical realism versus naturalism। गंगेशक 'सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष': literary realism = philosophical realism।
३२. बिपिन झा
आवश्यकता अछि मैथिली शब्दतन्त्र निर्माणक (पृ. १७७-१७८)
रस-ध्वनि:
वीर। 'शब्दतन्त्र निर्माण' नव शब्द आ पुरान शब्दक तन्त्र। 'आवश्यकता' = urgent demand, मात्र सुझाव नहि। Chomsky केर language planning: कोन word accept, कोन reject।
३३. शीतल झा
गामक अधिकारी....भैया....पोखरि....चम्पा फूल.... (पृ. १७९-१८१)
रस-ध्वनि
शीर्षक सेहो एकटा कविता चारिटा चित्र ellipsis (.....) लोप-चिन्ह वा शब्द-लोप Ellipsis एकटा एहन साहित्यिक आ भाषाई उपकरण थिक जाहि मे किछु शब्द वा वाक्यांश केँ जानि-बुझि क' छोड़ि देल जाइत अछि, मुदा पाठक ओकर अर्थ संदर्भ सँ बुझि जाइत छथि; सँ संयुक्त। शान्त + शृंगार। ध्वनि: ellipsis = unsaid space जाहिमे स्मृति जीवित रहैत अछि। Bakhtin केर chronotope: village space केर specific temporality।
३४. कुमार राधारमण
पाकिस्तानमे सेक्स-विचार (पृ. १८२-१८४)
रस-ध्वनि
अद्भुत + बीभत्स। वक्रोक्ति: मैथिलीक साहित्यिक परम्परामे sexuality केर सोझाँ-सोझीं चर्चा taboo-breaking। Foucault केर 'History of Sexuality': sexuality discourse एकटा power-knowledge nexus।
विदेह फ्रेमवर्क
विदेह केर सामाजिक रूपसँ संवेदनशील विषय प्रकाशित करबाक willingness censorship-free editorial policy।
३५. श्रीमती कुमुद झा
उच्चैठ भगवतीक महात्म्य (पृ. १८५-१८६)
रस-ध्वनि:
भक्ति + शान्त। 'महात्म्य' एक विशिष्ट मैथिली साहित्यिक विधा। वक्रोक्ति: नारी-लेखिका द्वारा female deity केर महात्म्य = gendered spiritual authority claim। भक्ति परम्परा केर feminist dimension।
३६. शम्भू झा 'वत्स'
गार्हस्थ जीवनक समस्या (पृ. १८७-१८८)
रस-ध्वनि
करुण + शान्त। ध्वनि: गृहस्थ जीवन केर समस्या वर्णित करब = सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्थाक critique। वक्रोक्ति: व्यक्तिगत कष्टकेँ public discourse मे आनब। अम्बेडकर: गार्हस्थ समस्या। प्रायः जाति, लिंग, आ आर्थिक असमानता मे जड़ि जमेने।
३७. नागेन्द्र लाल कर्ण
गायन, कथक, सितार वादन; सांस्कृतिक कार्यक्रम-गिटार-वादनक प्रस्तुति (पृ. १८९-१९०)
रस-ध्वनि
अद्भुत + शृंगार। गायन + कथक + सितार = मिथिलाक synesthetic सांस्कृतिक परम्परा। Benjamin केर 'aura': live performance केर unreproducible presence documentation मे आंशिक survival।
३८. डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी
विद्यापतिक फोटोकेँ लोक सभामे लगएबाक मांग (पृ. १९१)
रस-ध्वनि
वीर। ध्वनि: संसद मे एकटा मध्ययुगीन मैथिली कविक भाव-भंगिमा केँ प्रधानता दैत चित्र लगेबाक मांग। मिथिलाक राजनैतिक प्रतिनिधित्वक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति। वक्रोक्ति: एक फोटो मैथिल समुदायक वैध राष्ट्रीय दृश्यताक प्रतिनिधित्व करैत।
३९. भालचन्द्र झा
हमर शिक्षण-यात्रा (पृ. १९२-२०५) | १४ पृष्ठक शैक्षणिक आत्मचरित (Educational Autobiography)
रस-ध्वनि
शान्त + करुण। 'यात्रा' शिक्षण लक्ष्य नहि, यात्रा। वक्रोक्ति: 'हमर' आत्मकथात्मक अधिकार (autobiographical possession): एक खाढ़ीक कथा।
Freire / विदेह फ्रेमवर्क
Paulo Freire केर 'Pedagogy of the Oppressed': शिक्षाक चुनौती, साहित्यिक विधाक रूप मे शिक्षक-आत्मकथा, विदेहक साहित्यिक लोकतंत्रीकरणक ठोस उदाहरण।
४०. गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादक)
मैथिली समीक्षाक आवश्यक तत्व; सम्पादकीय-सन्देश (पृ. २०६-२५५)
परिचय
गजेन्द्र ठाकुर मैथिली मे एकर अर्थ आ संदर्भ एहि प्रकार अछि: "विदेहक संस्थापक-संपादक एकटा समालोचक (critic), संपादक (editor), आ मैथिली भाषा नियोजक, तीनू रूपमे।
रस-ध्वनि
शान्त + बौद्धिक अति-आवश्यकता। 'आवश्यक तत्व' जे नहि अछि ओकर माँग । सम्पादकीयमे वीर रस ७० देश, डिजिटल उपलब्धि, आत्मविश्वासी संपादकीय स्वर, साहित्यिक चोरिक विरोध।
नव्य-न्याय
गंगेशक 'प्रमाण-शास्त्र' criticism theory मे directly operative। 'आवश्यक तत्व' = valid criteria for criticism = pramana criteria।
विदेह समानान्तर इतिहास सबसँ महत्वपूर्ण
सम्पादकीय-सन्देश Videha Parallel History Framework केर living document थिक। ७० देश, २,१९,८९१ views, २०० लेखक एक counter-institution केर emergence document। साहित्य अकादेमीक उर्ध्वाधर hierarchy केर विरुद्ध विदेहक horizontal network।
४१. विनीत उत्पल
साक्षात्कार-कर्ता;
रस-ध्वनि
शान्त रस empathetic listener। प्रश्न open-ended, non-leading जे Jivakant केँ authentic voice emerge करबाक space दैत अछि।
Bakhtin / विदेह फ्रेमवर्क
बाख्तिनक dialogic imagination: विनीत उत्पलक genuine curiosity ओहि Bakhtinian space create करैत अछि जाहिमे Jivakant स्वतंत्रतासँ बजैत छथि। विदेहक नव खाढ़ीक प्रतिनिधित्व।
उपसंहार: सदेह २ क समग्र महत्व
सदेह २ मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१० ४१ साहित्यकारक एकटा असाधारण संकलन थिक। सदेह ३ (पद्य) क विपरीत एहिठाम तर्क अछि, narrative अछि, documentation अछि, advocacy अछि।
तीन प्रकारक स्वर: (क) Senior canonical figures जीवकान्त, राजमोहन झा, गंगेश गुंजन, परम्परा केर जीवंत प्रतिमूर्ति ; (ख) Mid-career scholars रामलोचन ठाकुर, आशीष अनचिन्हार, हृदय नारायण झा परम्पराकेँ आगाँ बढ़बैत; (ग) New voices विनीत उत्पल, नवेन्दु कुमार झा tradition केँ transform करैत।
चारि फ्रेमवर्क केर संश्लेषण: भारतीय रस-ध्वनि सैद्धान्तिक गद्यमे सेहो लागू। पाश्चात्य सिद्धान्त (Gramsci, Bourdieu, Benjamin, Spivak, Bakhtin, Foucault, Luk, Freire)। प्रत्येक रचनाक राजनीतिक-सांस्कृतिक आयाम केँ देखार केनाइ। नव्य-न्यायक माध्यम सँ साहित्यिक समालोचनाक तार्किक संरचनाक परीक्षण। विदेहक समानांतर इतिहास ढाँचा (Parallel History Framework) सब रचना सभ केँ एकटा लोकतांत्रिक आ प्रति-मानक (counter-canonical) अभिलेखागार मे एकीकृत करैत अछि।

विदेह: सदेह: ३
मैथिली पद्य २००९-१०: समग्र साहित्यिक समीक्षा: सभटा साहित्यकार
भारतीय रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य सिद्धान्त | पाश्चात्य आलोचना
गंगेशक नव्य-न्याय | विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर | विदेह समानान्तर साहित्य आन्दोलन
भूमिका: सदेह ३ क परिचय
विदेह: सदेह: ३ (विदेह ई-पत्रिकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल आ सम्पादित कएल) मैथिली पद्यक एक अनुपम संकलन थिक जे २००९-१० क रचनाक प्रतिनिधित्व करैत अछि। एहिमे ७५सँ बेशी कविक रचना संग्रहित अछि जे मैथिली कवितاक विविध आयामकेँ प्रतिबिम्बित करैत अछि मधेश आन्दोलनसँ लऽ कऽ दलित चेतना धरि, नारी-मुक्तिसँ लऽ कऽ प्रगतिवादी भावना धरि, लोक-परम्परासँ लऽ कऽ अभिनव अक्षर धरि।
एहि समीक्षामे प्रत्येक साहित्यकारक रचनाकेँ चारि पूरक दृष्टिकोणसँ देखल जायत: (१) भारतीय रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य सिद्धान्त; (२) पाश्चात्य आलोचना, बूर्द्यू (Bourdieu) स्पिवाक, बाख्तिन, ग्राम्शी, बेन्यामिन, फानन, अम्बेडकर; (३) गंगेश उपाध्यायक नव्य-न्याय ज्ञान-मीमांसा; आ (४) विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क, जे साहित्य अकादेमीक प्रतिष्ठान-विरोधी समानान्तर साहित्यिक विमर्शकेँ रेखांकित करैत अछि।
सदेह ३ केवल एक काव्य-संग्रह नहि ई विदेह आन्दोलनक एकटा घोषणापत्र थिक जाहिमे ७५ टा भिन्न-भिन्न आवाज मैथिली कविताक विविध रंग देखबैत अछि।
१. महेन्द्र कुमार मिश्र
रचना: राजनीतिक कविता | पूर्व सांसद, नेपाल
परिचय
महेन्द्र कुमार मिश्र नेपालक पूर्व सांसद छथि। हुनकर कविता मधेशक राजनीतिक आ सामाजिक पीड़ाकेँ व्यंग्यक भाषामे प्रस्तुत करैत अछि। 'चेला चन्द्राचार्य आ दलाल राखू अपनेटा संग' ई पंक्ति मधेशी नेतृत्वक पाखण्डकेँ सीधे उजागर करैत अछि।
रस-ध्वनि विश्लेषण
मिश्रजीक कवितामे वीर रस आ रौद्र रसक प्राधान्य अछि। ध्वनिक स्तरपर 'जनतामे रहत रंग' एक repetitive structure अछि जे सभ बेर नव अर्थ ग्रहण करैत अछि पहिने उपहास, तखन आक्रोश, अन्तमे चेतावनी। वक्रोक्ति स्पष्ट अछि लोकतन्त्र आ भोग-तन्त्रक आपसी प्रतिस्थापन एक कड़ु व्यंग्य थिक।
पाश्चात्य आलोचना-दृष्टि
ग्राम्शीक 'हेजेमनी' आ 'काउन्टर-हेजेमनी'क फ्रेमवर्कसँ मिश्रजीक कविता मधेशी जनताक वर्ग-चेतनाकेँ जागृत करबाक प्रयास करैत अछि। फाननक 'रेचड्‌ ऑफ द अर्थ'क दृष्टिसँ हुनकर कविता ओहि लोकक अछि जिनका अपन देशमे 'दोसर' मानल जाइत छनि।
नव्य-न्याय (गंगेश उपाध्याय)
गंगेशक व्याप्ति (pervasion) क अवधारणा लागू करैत: मिश्रजीक कवितामे 'नेता = शोषण'क व्याप्ति अछि, आ 'गिरिजा झुकल, चन्द्र झुकल' एहि व्याप्तिक अनुमान (inference) अछि। नव्य-न्यायक पक्ष ई थिक जे जे अनुमान सही प्रमाणसँ समर्थित हो, से विद्या थिक कवितामे राजनीतिक सत्य एक प्रमाण जकाँ काज करैत अछि।
विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क
विदेह फ्रेमवर्कमे मिश्रजीक रचना एक अल्पसंख्यक/सबाल्टर्न आवाज थिक जे साहित्य अकादेमीक मुख्यधारा मैथिली कैनन सँ भिन्न अछि। नेपालक मधेश आन्दोलनक कविता भारतीय मैथिली साहित्यक अकादेमी-मान्य धारामे नहि अबैत अछि, विदेह एहि आवाजकेँ canonical space देलक। इएह विदेहक राजनीतिक आ साहित्यिक योगदान थिक।
२. रोशन जनकपुरी
रचना: चप्पल आ सड़क | जनकपुर, नेपाल
कविताक सारांश। 'चप्पल आ सड़क' एक दलित-विरोधी शोषण-विरोधी कविता थिक जाहिमे 'चप्पलवाली माँ'क आँखिमे पहिने आशा फेर आक्रोशक यात्रा अछि। साधारण चप्पलक बिम्बमे वर्ग-संघर्षक पूरा दुनिया समाहित छैक।
रस-ध्वनि
करुण रस प्रधान अछि। 'आक्रोशक गीत लिखाइते रहबाक चाही' ई सक्रियताक आह्वान अछि। वक्रोक्ति: 'चप्पलवाली माँ' एक साधारण छवि थिक मुदा एहिमे वर्ग-पहचान आ प्रतिरोध दुनू समाएल अछि।
स्पिवाक / अम्बेडकर
गायत्री स्पिवाकक 'Can the Subaltern Speak?' क फ्रेमवर्कसँ जनकपुरीक कविता एक सबाल्टर्न महिलाक आवाजकेँ कवितामे स्थान दैत अछि। अम्बेडकरक सामाजिक न्यायक दृष्टिसँ 'चप्पल' एक दलित रूपक बनि जाइत अछि दलित अस्मिता आ प्रतिरोधक प्रतीक।
विदेह फ्रेमवर्क
जनकपुरी नेपालक मैथिली कवि सभमे छथि। विदेह नेपाल-भारत सीमापर बाजल मैथिलीकेँ एकटा unified literary space देलक। ई कविता विदेहक cross-border मैथिली पहचान-निर्माणमे योगदान करैत अछि।
३. ओम कुमार झा
रचना: थर थर कापि रहल छौ तोहर पएर। मधेश आन्दोलन कविता
रस-ध्वनि:
वीर रस + रौद्र रसक संगम। 'थर थर कापि रहल' एक शक्तिशाली वक्रोक्ति थिक जे शत्रुकेँ डरपोक सिद्ध करैत अछि। ध्वनि: 'पच्चीस शहीदक खून कहि रहल छैक' मृत शहीदक आवाज ध्वनि-स्तरपर कवितामे उपस्थित अछि।
फानन / ग्राम्शी
फाननक colonial identity क फ्रेमवर्कसँ मधेशी जनताक 'दू सए अड़तीस बरखक गुलामी' एक colonial narrative थिक जे झाक कविता तोड़ि दैत अछि। ग्राम्शीक 'organic intellectual'क अवधारणा: झा ओहन आवाज छथि जे जनताक संग मिलिकऽ बजैत अछि।
४. प्रेम विदेह ललन
रचना: एकइसम सदीक नाम | सामाजिक समीक्षा
रस-ध्वनि
बीभत्स रस + हास्य रसक मिश्रण। 'नाङट उघार ललन सदी अछि भऽ रहल' ललन (कवि-व्यक्तित्व) एहि सदीक 'नग्न सत्य' देखैत अछि। ध्वनि: नोर भीतर, हँसी बाहर बला satirical tone पूरा कवितामे बनल रहैत अछि।
बेन्यामिन / बाख्तिन
वाल्टर बेन्यामिनक 'Angel of History' जकाँ दृष्टि: ललनक कविता प्रगतिक विपरीत देखैत अछि। बाख्तिनक dialogism सँ: 'अनपढ़मे भाई ईमानदारी, पढ़लहबा जिलासँ देशधरि लूटि रहल' दू विरोधाभासी आवाज एक-दोसरकेँ चुनौती दैत अछि।
५. सुदीप कुमार झा
रचना: दूटा पद | सौन्दर्य कविता
रस-ध्वनि
शृंगार आ करुणक द्वन्द्व पहिल कवितामे स्वप्न-सृष्टि, दोसरमे आँखिक भीजल पलकमे अनिर्वचनीय पीड़ा। ध्वनि पूर्णतः काज करैत अछि: लड़कीक आँखिक भिजनाइ कोनो हेरायल सम्बन्धक ध्वनि दैत अछि जे शब्दमे नहि कहल गेल।
स्पिवाक नारीवादी दृष्टि
स्पिवाकक postcolonial feminist दृष्टिसँ: दोसर कवितामे पहाड़सँ देखैत लड़की एक सबाल्टर्न gaze थिक जे प्रकृति आ समाज दुनूकेँ ऊपरसँ नहि, बराबरसँ देखैत अछि। ई 'the gaze from below' थिक।
६. अयोध्या नाथ चौधरी
रचना: एक भूमि जोड़ एक सत्य। बराबर दू क्षण | एक परिवोधन आ शेष कविता
रस-ध्वनि
शान्त रस आ बीभत्स रसक असाधारण मिश्रण। 'विवेक कखनो कोनो खिड़कि दऽ उड़िया गेल' विवेकक अकस्मात प्रस्थान एकटा Kafkaesque image थिक। वक्रोक्ति: 'किताब बनाकऽ पढ़लहुँ' साधारण कार्य एतऽ existential self-examination क रूपक बनि जाइत अछि।
नव्य-न्याय
गंगेशक 'ज्ञान-लक्षण प्रत्यक्ष' (mediated knowledge) क अवधारणा एहि कवितामे लागू होइत अछि: जे 'जानि लेलहुँ'क अनुभव अछि से direct perception नहि, वरन् कवितामे mediated knowledge थिक।
७. प्रशान्त मिश्र
रचना: क्षणिका
रस-ध्वनि
शान्त रस प्रधान। क्षणिकाक brevity स्वयं एक वक्रोक्ति थिक कम बाजिकऽ बेशी कहब। ई मैथिलीमे haiku सँ कने दूर आ तेलुगुक नन्नीलुसँ लग परम्पराक रचना थिक।
८. कुमार मनोज कश्यप
रचना: वसन्ती दोहा; निहि सुति रहब अहाँ चद्दरि तानि | दोहा परम्परा
रस-ध्वनि
शृंगार रस आ वीर रस वसन्तमे सौन्दर्य, जागरणमे वीर-भाव। दोहा-फॉर्म अपन brevity सँ ध्वनिक शक्ति बढ़बैत अछि। वक्रोक्ति: 'चद्दरि तानि' एक रोमाण्टिक छवि थिक जे जागरणक urgent appeal क संग contrast मे अछि।
विद्यापति परम्परा
कश्यपक दोहा-रचना विद्यापतिसँ सोझ lineage देखबैत अछि। विदेह फ्रेमवर्कमे ई परम्पराक नवीनीकरण थिक, विद्यापतिक शृंगारिक पदावली आ कश्यपक सामाजिक-जागरण दोहा एक्के धारासँ अछि।
९. कल्पना शरण
रचना: एकटा हेरायल सखी | नारी स्वर
रस-ध्वनि
करुण आ शृंगारक संगम वियोग-शृंगारक शास्त्रीय मैथिली परम्परामे। ध्वनि: 'हेरायल सखी' केवल एक व्यक्ति नहि ओ बचपन, निर्दोषता, वा कोनो हेरायल वस्तुक symbolic उपस्थिति थिक।
नारीवादी दृष्टि
स्पिवाकक 'Women's Voice'क फ्रेमवर्कसँ: सखी-कविता मैथिलीमे एक space थिक जाहिमे महिला अपन भावनात्मक वास्तविकताकेँ पुरुष-मध्यस्थता बिना व्यक्त करैत छथि।
१०. बिनीत ठाकुर
रचना: गीत | गीत परम्परा
रस-ध्वनि
बिनीत ठाकुरक गीत मैथिली गीत-परम्परामे अछि सुरीला, लयबद्ध, सांकेतिक। शृंगार रस प्रधान। वक्रोक्तिमे लोक-रूपकक प्रयोग।
विदेह फ्रेमवर्क
गीत परम्परा साहित्य अकादेमीक canonical prose/katha format सँ भिन्न अछि। विदेह गीतकेँ सेहो canonical space देलक जे मैथिली लोक-परम्परा आ आधुनिक साहित्यिक परम्पराक bridge थिक।
११. सतीश चन्द्र झा
रचना: ई जीवन | जीवन-कविता
रस-ध्वनि
करुण आ शान्त रस, जीवनक क्षणभंगुरतापर ध्यान। शास्त्रीय मैथिलीमे जीवन-चर्चाक परम्परामे ई एक आधुनिक योगदान थिक।
१२. बी.के. कर्ण
रचना: मिथिलाक लेल एक ओलम्पिक मेडल | खेल-चेतना कविता
रस-ध्वनि
वीर रस प्रधान क्षेत्रीय गौरव आ खेल-महत्वाकांक्षा। ध्वनि: 'ओलम्पिक मेडल' केवल एक खेल-उपलब्धि नहि ओ मैथिली क्षेत्रीय पहचानक वैश्विक मान्यताक रूपक थिक।
बूर्द्यू (Bourdieu)/ सांस्कृतिक पूँजी
Pierre बूर्द्यू (Bourdieu) क 'cultural capital'क दृष्टिसँ: कर्णजीक कविता मिथिलाक लेल एक नव'capital' माँगैत अछि खेलमे मान्यता। ई मैथिली पहचान-राजनीतिक एकटा आयाम थिक।
१३. सुबोध ठाकुर
रचना: हम गामेमे रहबइ | ग्राम-प्रेम कविता
रस-ध्वनि
'हम गामेमे रहबइ' मे वात्सल्य आ शान्त रस गाम सँ प्रेम आ प्रतिरोध दुनू। वक्रोक्ति: गाममे रहनाई शहरी-पलायनक युगमे एक राजनीतिक कार्य थिक।
विदेह फ्रेमवर्क
विदेहक core ideology मे मिथिलाक ग्रामीण आधारकेँ preserve केनाइ शामिल अछि। सुबोध ठाकुरक ई कविता विदेहक 'गाम-चेतना'केँ आवाज दैत अछि।
१४. निमिष झा
रचना: असमर्पित उन्माद; बुद्ध आ आतंक | अन्तर्संघर्ष कविता
रस-ध्वनि
'असमर्पित उन्माद' मे शृंगार-वियोग + करुण। 'बुद्ध आ आतंक' मे शान्त रसक contrast रौद्र रसक संग बुद्धक शान्ति आ आजुक हिंसाक बीच तनाव। ध्वनि: बुद्धक 'आतंक' सँ सामना, की शान्तिक जवाब हिंसा थिक?
बेन्यामिन / द्वन्द्वात्मकता
वाल्टर बेन्यामिनक dialectical image क अवधारणा: बुद्ध (भूत) आ आतंक (वर्तमान) क छविमे एक 'dialectical flash' अछि जे इतिहासक continuity आ discontinuity दुनू एक संग देखबैत अछि।

१५. कामिनी कामायनी
रचना: चन्दा | नारी स्वर
रस-ध्वनि
'चन्दा' मे शृंगार रस नारी काव्याभिव्यक्ति। वक्रोक्तिमे चन्दा एक प्रिय हेतु रूपकक रूपमे। औचित्य: मैथिली नारी कवितक शास्त्रीय परम्परामे ई सटीक बैसैत अछि।
१६. डॉ. शम्भु कुमार सिंह
रचना: लोरी; अतीत; आस | बाल साहित्य आ स्मृति कविता
रस-ध्वनि
'लोरी' मे वात्सल्य रस, 'अतीत' मे करुण, 'आस' मे शान्त। तीनूमे एक continuity अछि बचपन, स्मृति, भविष्य। 'लोरी' मे मैथिली लोक-परम्पराक नवीनीकरण। ध्वनि: लोरी मात्र सुतएबाक गीत नहि ओ एक पीढ़ीसँ दोसरमे मूल्यक transmission थिक।
१७. निशाप्रभा झा
रचना: भगवती गीत (लोकगीत संकलन) | लोक परम्परा
रस-ध्वनि
निशाप्रभा झा भगवती लोकगीतक संकलन कएलनि जे मैथिली लोक-परम्पराक एक महत्वपूर्ण preservation थिक। ई केवल कविता नहि, एक सांस्कृतिक पुरालेखीय कार्य थिक।
बेन्यामिन / मौखिक परम्परा
बेन्यामिनक 'oral tradition' आ 'storytelling'क सिद्धान्तसँ: निशाप्रभा झाक लोकगीत-संकलन ओहि 'aura' कें preserve करैत अछि जे printed text मे हेरा जाइत अछि। विदेहक digital archiving एहि क्षतिकेँ minimize करैत अछि।
१८. विवेकानन्द झा
रचना: कविता आ की सुजाता; चान आ चारी | प्रेम आ सामाजिक कविता
रस-ध्वनि
'कविता आ की सुजाता' मे एक interesting meta-literary प्रश्न अछि: कविता बेशी महत्वपूर्ण अछि वा 'सुजाता' (एक व्यक्ति/पहचान)? शृंगार + बौद्धिक जिज्ञासाक संगम। 'चान आ चारी' मे चान्दनी आ युवती/साथी (चारी) क बीच रोमाण्टिक क्रीड़ा।
१९. मणिकान्त मिश्र 'मनिष'
रचना: मिथिला वन्दना | वन्दना परम्परा
रस-ध्वनि
मैथिली वन्दना-परम्परामे 'मिथिला वन्दना' एक प्रशस्तिपरक रचना थिक शान्त आ भक्ति रस। वक्रोक्तिमे वन्दनाक शब्द मिथिलाक हेरायल वैभवक ध्वनि दैत अछि।
विदेह फ्रेमवर्क
मिथिला वन्दना मैथिली क्षेत्रीय पहचान-राजनीतिक एक महत्वपूर्ण अंग थिक। विदेह फ्रेमवर्कमे ई 'मिथिला = मैथिली' पहचानक affirming gesture थिक।
२०. आशीष अनचिन्हार
रचना: गजल; किछु गद्य कविता | गजल आ गद्य कविता
परिचय
आशीष अनचिन्हार विदेह आन्दोलनक सबसँ महत्वपूर्ण गजल-कविसभमे छथि। हुनकर मैथिली गजल 'अनचिन्हार आखर' आन्दोलनक नींव थिक।
रस-ध्वनि
गजलमे शृंगार + वियोग। प्रत्येक शेर एक सम्पूर्ण विचार थिक (औचित्य), आ रदीफ-काफियाक संरचनामे ध्वनि repetition क माध्यमसँ काज करैत अछि। 'गद्य कविता' मे शृंगारसँ परे एक राजनीतिक चेतना सेहो अछि।
बाख्तिन / Dialogism
बाख्तिनक dialogism सँ गजल स्वाभावतः dialogic form थिक मक्तामे कवि अपन नाम लऽ स्वयं सँ गप करैत छथि। अनचिन्हारक गजलमे ई self-referential dialogue मैथिली गजलक एक defining feature थिक।
विदेह समानान्तर इतिहास
अनचिन्हारक योगदान जे ओ मैथिली गजलक prosody (बहर, काफिया, रदीफ) कें systematize कएलनि आ विदेहक माध्यमसँ propagate कएलनि। ई साहित्य अकादेमीक institutionalised काव्य-रूपक एक शक्तिशाली विकल्प थिक।
२१. वौएलाल साह
रचना: मधेशक आवाज | मधेश आन्दोलन कविता
रस-ध्वनि
वीर रस + रौद्र रस मधेशक आवाज। वक्रोक्तिमे 'मधेशक आवाज' एक व्यक्तिक नहि, पूरा जनसमूहक आवाज थिक।
फानन / सबाल्टर्न
फाननक 'national consciousness'क फ्रेमवर्कसँ: साहक कविता मधेशक collective identity कें articulate करैत अछि जे colonial/brahmanical hegemony क विरुद्ध एक counter-narrative थिक।
२२. सन्तोष कुमार मिश्र
रचना: हमर मीत | मित्र-भाव कविता
रस-ध्वनि
'हमर मीत' मे मधुर रस मित्रताक गर्मजोशी। सरल भाषा, गहींर उतरैत भावना। औचित्य: सरलता स्वयं एहिठाम काव्य-गुण थिक।
२३. हेमांग आश्विनकुमार देसाइ
रचना:गुजराती कविता: समीकरण | गुजराती-मैथिली आदान-प्रदान
रस-ध्वनि
'समीकरण' एक गणितीय रूपकसँ जीवनक सामाजिक समस्याकेँ देखैत अछि। अद्भुत रस। ध्वनि: 'समीकरण' (equation) जीवनमे सब किछु balanced नहि अछि, ई imbalance ही समस्या थिक।
बूर्द्यू (Bourdieu)/ Field Theory
बूर्द्यू (Bourdieu) क 'field' अवधारणासँ: देसाइक मैथिलीमे लेखन एक inter-field exchange थिक गुजराती आ मैथिली literary fields क बीच। विदेह एहि inter-field dialogue कें institutionalise कएलक।
२४. अशोक चौधरी
रचना (शीर्षकहीन) | मौनक शक्ति
रस-ध्वनि
अशोक चौधरीक रचनाक कोनो शीर्षक नहि देल गेल जे स्वयं एक वक्रोक्ति थिक। Silence as statement. शान्त रस जे नहि कहल गेल से सेहो किछु कहैत अछि।
नव्य-न्याय
गंगेशक 'अभाव' क अवधारणा एहिठाम सोझे लागू होइत अछि: शीर्षकक अभाव एक विशेष प्रमाण थिक 'नाम-अभाव' स्वयं एक statement थिक।
२५. उपेन्द्र भगत नागवंशी
रचना: बुढ़वा | दलित स्वर
रस-ध्वनि
'बुढ़वा' (बूढ़ा आदमी) एक दलित परिप्रेक्ष्यसँ लिखल कविता थिक जाहिमे एक वृद्ध गरीब व्यक्तिक जीवनक पीड़ा अछि। नागवंशीक दलित आवाज मैथिली कवितामे एक महत्वपूर्ण counter-canonical आवाज थिक।
अम्बेडकर / फानन
अम्बेडकरक सामाजिक न्यायक फ्रेमवर्कसँ: 'बुढ़वा' मे ओ system देखाइत अछि जाहिमे दलित लोकक बुढ़ापा सेहो dignity सँ नहि होइत अछि। फाननक 'decolonization of the mind'क दृष्टिसँ ई कविता दलित चेतनाक साहसी अभिव्यक्ति थिक।
विदेह समानान्तर इतिहास
साहित्य अकादेमीक मैथिली canonical space मे दलित आवाजक ऐतिहासिक हाशियाकरण रहल अछि। नागवंशीक space सबसँ महत्वपूर्ण counter-canonical gesture थिक।
२६. डॉ. सुरेन्द्र लाभ
रचना: इतिहास; इन्कलाब | ऐतिहासिक आ राजनीतिक कविता
रस-ध्वनि
'इतिहास' मे वीर + करुण रस इतिहासक क्रूरता आ प्रतिरोध दुनू। 'इन्कलाब' मे रौद्र + वीर रस। वक्रोक्ति: 'इन्कलाब' कें मैथिलीमे कहनाई स्वयं एक राजनीतिक कार्य थिक।
ग्राम्शी / बेन्यामिन
ग्राम्शीक 'war of position'क फ्रेमवर्कसँ: लाभक कविता इतिहासकेँ एक contested terrain मानैत अछि। बेन्यामिनक 'brushing history against the grain' सँ: 'इतिहास' कविता मुख्यधारा narrative कें उलटा देखैत अछि।
२७. सरस्वती चौधरी 'रचना'
रचना: सम्बन्धक कोनो सूत्र | नारी दृष्टि
रस-ध्वनि
'सम्बन्धक कोनो सूत्र' (सम्बन्धक कोनो ताग) एकटा dee personal कविता थिक ऋण्यता (relationships) क fragility आ continuity क बीच। वियोग-शृंगार प्रधान। ध्वनि: 'सूत्र' (ताग) एक thin thread थिक जे सब किछु प्रेम, सम्बन्ध, पहचान बान्हि कऽ रखने अछि।
नारीवादी दृष्टि
सरस्वती चौधरीक कविता मैथिली नारीक आन्तरिक जगतकेँ ओ भाषा दैत अछि जे domestic space मे सिमटि जाइत अछि। स्पिवाकक 'subaltern woman'क अवधारणासँ ओ नारी जे सम्बन्धक 'सूत्र' सँ बँधल अछि।
२८. डॉ. अजित मिश्र
रचना: मिथिला-धाम | तीर्थ आ परम्परा कविता
रस-ध्वनि
'मिथिला-धाम' मिथिलाकेँ एक पवित्र तीर्थक रूपमे देखैत अछि भक्ति रस + शान्त रस। वक्रोक्ति: 'धाम' (पवित्र स्थल) मिथिलाक भौगोलिक वास्तविकता आ सांस्कृतिक पहचान दुनू थिक।
२९. सुनीलकुमार मल्लिक
रचना: घड़ी | समय-कविता
रस-ध्वनि
'घड़ी' एक minimalist कविता थिक समयक existential महत्वपर। शान्त रस। ध्वनि: घड़ी केवल timepiece नहि ओ mortality क reminder थिक।
३०. राजकमल चौधरी
रचना: बही-खाता; एकटा प्रेम-कविता | अप्रकाशित रचना (सौजन्य डॉ. देवशंकर नवीन)
परिचय
राजकमल चौधरी (१९२९-१९६७) मैथिली साहित्यक एक titan छथि हुनकर दू टा अप्रकाशित कविता डॉ. देवशंकर नवीनक सौजन्यसँ एहिठाम प्रस्तुत अछि। 'बही-खाता' हुनकर जीवन-दर्शनक एक concentrated expression थिक।
'बही-खाता' क विश्लेषण
'बही-खाता' मे जीवनकेँ एक 'लाल बही' (red ledger) मे दर्ज केनाइ जाहिमे पाप-पुण्य, इच्छा-वासना सब account मे अछि। ई Kafkaesque image थिक जीवन एक bureaucratic record बनि गेल। ध्वनि: 'कविता लिखबाक ई लाल-बही / थिक हमर जीवन-खाता' कविता आ जीवन एक्के अछि।
'एकटा प्रेम-कविता' मे वियोग-शृंगार आ अनिर्वचनीय emotional longing। 'एकटा म्लान-मुख स्त्री, अनचिन्हार' एक 'अपरिचित महिला'क छवि। ध्वनि: ई अनचिन्हार स्त्री की थिक? हेरायल प्रेम? मृत्यु? एक idealized feminine image? ई ambiguity कविताकेँ timeless बनबैत अछि।
बाख्तिन / Polyphony
राजकमल चौधरीक कवितामे बाख्तिनक 'polyphony' स्पष्ट अछि कइएक टा आवाज एक संग बजैत अछि। 'बही-खाता' मे व्यापारी, mystic, कवि, पापी सब एक्के speaking voice मे समाएल अछि।
नव्य-न्याय
'बही-खाता' मे गंगेशक 'विशेषता' (particularity) क अवधारणा: ledger क सभ entry एकटा particular event थिक जीवनक कोनो moment universal नहि, सब specific आ named अछि।
विदेह समानान्तर इतिहास
राजकमल चौधरीक अप्रकाशित रचनाकेँ विदेहमे प्रकाशित केनाइ ई exactly Videha Parallel History Framework केर कार्य थिक। जे mainstream canon मे नहि आएल, ओकरा विदेह canonical space देलक। ई literary archaeology थिक।
३१. जीवकान्त (जीवकान्त झा, जन्म १९३६)
रचना: वनदेवी; जन-जन याचक | साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता (१९९८)
परिचय
जीवकान्त (पूर्ण नाम जीवकान्त झा, जन्म २५.०७.१९३६, अभुआढ़, सुपौल) मैथिलीक स्वतन्त्रता-पश्चात् सबसँ महत्वपूर्ण कवि सभमे छथि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार (१९९८), किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५)। हुनकर काम ग्रामीण वास्तविकता, आदिवासी विस्थापन आ पर्यावरण चेतनाक संगम थिक।
'वनदेवी' क विश्लेषण
'वनदेवी' मैथिली कवितामे एक landmark रचना थिक। एक आदिवासी महिला जे जंगलमे भटकैत अछि, शहरमे हवेलीमे झाड़ू-पोछा दइ लेल जाइत अछि, आ एहि प्रक्रियामे अपन 'वन' हेरा दैत अछि। कविताक closing image: 'शहर ओकरा चिबा कए सुता दैत छैक / ओकर खून चाटि कए नेहाल होइत छैक' ई मैथिलीमे फाननक भाषा थिक।
रस-ध्वनि
करुण रस प्रधान मुदा ई मात्र sympathy नहि, ई political करुणा थिक जे action demand करैत अछि। ध्वनि: 'वनदेवी' (वन-देवी = forest goddess) ओ आदिवासी महिला थिक जे अपन natural world सँ torn अछि। एहि displacement मे एकटा cosmic grief अछि। वक्रोक्ति: 'Motor मे / तेल जकाँ जरैत अछि वनवासी-जन' human bodies as fuel for urban machinery।
फानन / स्पिवाक / अम्बेडकर
फाननक 'Wretched of the Earth': जीवकान्तक वनदेवी ओ व्यक्ति थिक जिनका modernity अपन धरतीसँ उखाड़ि देलक। स्पिवाकक subaltern theory सँ: ई आदिवासी महिला 'बाजि' नहि सकैत अछि ओ कवितामे सेहो मौन अछि; कविता हुनका विषयमे बजैत अछि, हुनकर आवाज नहि। अम्बेडकरक 'annihilation of caste' सँ: वनदेवीक दुर्दशा एक जाति-आधारित exclusion क natural result थिक।
नव्य-न्याय
गंगेशक 'परोक्ष अनुमान' (inference from unseen) एहिठाम लागू होइत अछि: हम वनदेवीकेँ सोझे नहि देखैत छी हम बोनमे कुहेस, खाली bucket, युवा पुरुषक अनुपस्थिति देखैत छी आ एहिसँ वनदेवीक story infer करैत छी। इएह एहि कविताक epistemological शक्ति थिक।
विदेह समानान्तर इतिहास
जीवकान्तक काज साहित्य अकादेमी award प्राप्त करबाक बादो विदेहमे प्रकाशित होइत अछि ई विदेहक non-exclusive approach देखबैत अछि। विदेह canonical आ counter-canonical दुनूकेँ space दैत अछि।
३२. रूपा धीरू
रचना: सर्व-पीड़ा | नारी स्वर दर्द कविता
रस-ध्वनि
'सर्व-पीड़ा' (सभक पीड़ा) एकटा collective pain केर कविता थिक नारीक, समाजक, सृष्टिक। करुण रस। वक्रोक्ति: 'सर्व' (all) ई केवल एक महिलाक दर्द नहि, ई universal pain थिक।
३३. अन्नावरन देवेन्दर
रचना: पानि अछि, मात्र आँखिक नोर | अश्रु-कविता
रस-ध्वनि
'पानि अछि, मात्र आँखिक नोर' एक minimalist कविता जाहिमे पानि/अश्रुक रूपक बहुत किछु कहैत अछि। करुण रस। ध्वनि: 'मात्र आँखिक' (only from the eyes) ई एक particular, personal grief थिक।
३४. अमरेश यादव
रचना: आह्वान | आह्वान कविता
रस-ध्वनि
'आह्वान' वीर रसक कविता थिक एक आह्वान, एक पुकार। वक्रोक्तिमे 'आह्वान' केवल एक शब्द नहि ओ एक political summons थिक।
ओ.बी.सी. / यादव पहचान
अम्बेडकरक framework सँ: हुनकर 'आह्वान' OBC communities कें अपन राजनीतिक पहचान reclaim करबाक call थिक।
३५. श्यामल सुमन
रचना: मैथिली दोहा | दोहा परम्परा
रस-ध्वनि
'मैथिली दोहा' कबीर आ विद्यापतिक दोहा परम्पराक नवीनीकरण थिक। शान्त रस। दोहाक brevity मे ध्वनिक maximum काज होइत अछि। विदेह फ्रेमवर्कमे दोहा परम्पराकेँ आधुनिक मैथिलीमे revive केनाइ Videha's folk-modernism project क हिस्सा थिक।
३६. हिमांशु चौधरी
रचना: बाल गीत; तोँ स्वतन्त्र छेँ | बाल साहित्य
रस-ध्वनि
वात्सल्य रस बाल साहित्यक primary रस। 'तोँ स्वतन्त्र छेँ' मे एक interesting twist अछि: बच्चाकेँ freedom क सन्देश देनाइ एक liberatory pedagogy थिक। वक्रोक्ति: बच्चाक 'स्वतन्त्रता' केवल खेल नहि ओ future civic identity क बीज सेहो थिक।
३७. दयाकान्त
रचना: पाँच लाख बौआक दाम | दहेज विरोधी कविता
रस-ध्वनि
'पाँच लाख बौआक दाम' (बेटाक कीमत पाँच लाख) एक क्रूर दहेज-विरोधी satire थिक जाहिमे एक बेटाकेँ 'पाँच लाख क दाम' बला मानल जाइत अछि। बीभत्स + हास्य रस। वक्रोक्ति: 'बौआक दाम' एक commodity रूपक थिक। ध्वनि: जँ बेटाक कीमत 'पाँच लाख' अछि तँ बेटीक कीमत की? ई unspoken प्रश्न कविताक सबसँ powerful ध्वनि थिक।
अम्बेडकर / नारीवादी
अम्बेडकरक patriarchy क critique आ नारीवादी दृष्टि दुनूसँ ई कविता मैथिली समाजमे gender relationships क commodification कें expose करैत अछि।
३८. अजित कुमार झा
रचना: ओ तँ मुहेँक बड़जोड़ छथि | राजनीतिक व्यंग्य
रस-ध्वनि
'ओ तँ मुहेँक बड़जोड़ छथि एक political satire थिक एक नेता जे केवल बड़-बड़ वादा करैत अछि मुदा किछु करैत नहि। Refrain 'नेताजी किछु कऽ कऽ देखाबथि!' ई कवितामे एक वक्रोक्ति थिक।
बाख्तिन / Carnivalesque
बाख्तिनक carnivalesque क अवधारणासँ: ई कविता एक carnival थिक जाहिमे नेताक authority क मखौल उड़ाओल जाइत अछि। Refrain structure एक comic timing दैत अछि जे political mockery कें intensify करैत अछि।
३९. सुमित आनन्द
रचना: जेम्हरे देखू तेम्हरे लाइन!! | व्यंग्य कविता
रस-ध्वनि
'जेम्हरे देखू तेम्हरे लाइन!!' एक humorous-satirical कविता थिक जाहिमे आधुनिक भारतक 'queue culture' क मखौल अछि। अन्तमे 'सभसँ बड़का शमशानमे लाइन' ई last punchline एक sharp satirical dart थिक। हास्य + बीभत्स रस। ध्वनि: 'लाइन' केवल waiting नहि ओ bureaucratic dehumanization क symbol थिक।
४०. विजया अर्याल
रचना: आजुक जीवन | नेपालसँ मैथिली कविता
रस-ध्वनि
'आजुक जीवन' एक existential कविता थिक जाहिमे जीवनकेँ 'मृत्युसँ सापट माँगिकऽ' जिनाई बतायल गेल अछि। शान्त + बीभत्स रस। 'प्रतेक दिन मृत्युसँ सापट माँगिकऽ / बाँकी रूपमे बाँचि रहल अछि जीवन' life as perpetual debt to death।
४१. सरोज खिलाडी
रचना: मनक बात मनमे | नारी अन्तरंग
रस-ध्वनि
'मनक बात मनमे' एक confessional कविता थिक एक नारी जे अपन प्रिय सँ बात नहि कऽ सकलीह, अखन regret मे अछि। वियोग-शृंगार + करुण। 'अएनाक सोझाँ हम किए मुस्किआइ छी?' mirror as confidant। वक्रोक्ति: mirror ही ओ space थिक जाहिमे suppressed self बजैत अछि।
नारीवादी मनोविज्ञान
'अएना' (दर्पण)क motif Lacan क 'mirror stage' क प्रयोग नारीक पहचान-निर्माण आ हुनकर सामाजिक रूपसँ लादल मौनक बीच tension देखबैत अछि।
४२. उमेश मंडल
रचना: गनियारि पिसबाक गीत; तेलकसाय लगबैक गीत; दसमासी सोहर | लोक गीत
परिचय
उमेश मंडल विदेहक सहायक सम्पादक आ मैथिली लोक-साहित्यक एक महत्वपूर्ण compiler छथि। सदेह ३ मे हुनकर तीन टा लोक-गीत अछि पीसबाक गीत (गनियारि), तेल निकालबाक गीत (तेलकसाय), आ जन्म-माह गीत (दसमासी सोहर)। ई मैथिली मौखिक परम्पराक एकटा invaluable archive थिक।
रस-ध्वनि
वात्सल्य रस + शृंगार रस लोक-गीतक primary rasas। 'दसमासी सोहर' मे गर्भावस्थाक सभ मासक वर्णन एक unique narrative structure थिक। वक्रोक्ति: domestic काज (पिसनाइ, तेल निकालनाइ) महिला श्रमकेँ एक poetic act मे transform करैत अछि।
बेन्यामिन / मौखिक परम्परा
बेन्यामिनक 'The Storyteller' सँ: उमेश मंडलक लोक-गीत संकलन ओहि 'aura' केँ preserve करैत अछि जे printed text मे हेरा जाइत अछि। विदेहक digital archiving एहि क्षतिकेँ minimize करैत अछि।
विदेह समानान्तर इतिहास
उमेश मंडलक लोक-गीत preservation विदेहक सबसँ महत्वपूर्ण archival योगदानसभमे एक थिक। साहित्य अकादेमी canonical मैथिलीमे modernist poetry कें prefer करैत अछि विदेह लोक-साहित्यकेँ equally canonical position देलक।
४३. रूपेश कुमार झा 'थ्रेथ'
रचना: खेली सप्पत जा भुइयाँ थान | बाल साहित्य
रस-ध्वनि
वात्सल्य रस बालकक खेल-दुनिया। 'भुइयाँ थान' (धरती/जमीन) मे खेल ई ग्रामीण बचपनक एकटा honest portrayal थिक।
४४. विनीत उत्पल
रचना: मनुख आ माल; समाजक ई रूप | सामाजिक यथार्थ कविता
रस-ध्वनि
बीभत्स रस समाजक deterioration देखबाक disgust। वक्रोक्ति: 'मनुख आ माल' commodity form क human form सँ तुलना। ई Marx क commodity fetishism क मैथिली काव्य equivalent थिक।
४५. राजदेव मंडल
रचना: आह; ज्ञानक झंडा; झाँपल अस्तित्व; रहब अहाँ सभक संग; नदीक माछ; बाट-बटोही; सीमा परक झूला; चीड़ीक जाति | सर्वाधिक कविता
परिचय
राजदेव मंडल सदेह ३ क सर्वाधिक prolific कवि छथि ८ टा कविता! ई स्वयं हुनकर प्रतिबद्धताक एक testimony थिक। हुनकर कविता राजनीतिसँ पर्यावरण, personal pain सँ social critique धरि पसरैत अछि।
रस-ध्वनि विश्लेषण
'आह' मे करुण रस। 'ज्ञानक झंडा' मे वीर रस ज्ञानक विजय-यात्रा। 'झाँपल अस्तित्व' मे बीभत्स + करुण suppressed existence क दर्द। 'चीड़ीक जाति' मे एक असाधारण वक्रोक्ति: 'जाति' (caste/species) दुनू अर्थमे चिड़ियाक species आ मनुष्यक जाति एक संग।
अम्बेडकर / पर्यावरण
'चीड़ीक जाति' मे अम्बेडकरक caste critique आ ecological consciousness क असाधारण संगम: चिड़ै सेहो 'जाति' मे बान्हल अछि? वा चिड़ै ओहि लोकसभक रूपक थिक जे caste system मे 'चिड़ै' (शक्तिहीन) छथि?
विदेह समानान्तर इतिहास
राजदेव मंडल मैथिलीक ओहन कवि छथि जे साहित्य अकादेमीक mainstream मे नहि आएल, विदेह हुनका एक prolific आवाजक रूपमे present कएलक। इएह exactly विदेहक parallel history mission थिक।
४६. शेफालिका वर्मा
रचना: बाजी; अनबुझल; संग चाहे जे होइ; वचनक मास | नारी कवि
परिचय
शेफालिका वर्मा (जन्म ९ अगस्त, १९४३, भागलपुर) मैथिलीक सबसँ significant नारी कविसभमे छथि। 'बाजी' क विश्लेषण
'बाजी' एक philosophical कविता थिक 'ई हमर देश थिक' सँ शुरू भऽ कऽ समाजक deterioration आ मनुष्यक मनुष्यसँ दूरी धरि। 'आदमीक जंगल बढ़ि रहल / गाछ बृच्छ कटि रहल' ई ecological रूपक एक संग physical environment आ human social environment दुनूक लेल थिक।
रस-ध्वनि
बीभत्स रस प्रधान आधुनिक सभ्यताक decay पर। वक्रोक्ति: 'राम कतए चलि गेला' रामक गेनाइ एक symbol थिक सब किछु नैतिकताक जे हेरा गेल। ध्वनि: 'बाजी दुनूमे लागल अछि / के कतेकों आगू' जनसंख्या वृद्धि बनाम पेड़-कटाई, ई एक absurd 'race' थिक।
स्पिवाक / Eco-Feminism
स्पिवाकक eco-feminism क फ्रेमवर्कसँ: वर्माक कवितामे nature-destruction आ नारी-अवस्था एक linked condition थिक। 'सीता आइयो जरि रहल अछि' Sita एक eternal sufferer क रूपमे, अखनो जरैत अछि। ई feminist myth-critique मैथिलीमे rare थिक।
नव्य-न्याय
'अनबुझल' (unexplained) मे गंगेशक 'संशय' (doubt/uncertainty) क अवधारणा central थिक: कविताक protagonist एक 'अनबुझल' थिक unresolved, unexplained presence।
४७. महाकान्त ठाकुर
रचना: की चाहलौं; उदारीकरण | उदारीकरण-विरोधी कविता
रस-ध्वनि
करुण + बीभत्स रस आर्थिक हताशाक pathos। 'उदारीकरण' मे वक्रोक्ति: उदारीकरणक शब्दमे 'freedom' केर connotation अछि, मुदा कवितामे ई गरीबी आ विस्थापनक कारण थिक। ध्वनि: आर्थिक 'स्वतन्त्रता'क पाछाँ आर्थिक बन्धन थिक।
ग्राम्शी / पूँजीवाद समीक्षा
ग्राम्शीक 'cultural hegemony' सँ: उदारीकरण मात्र आर्थिक नीति नहि ओ एक ideological hegemony थिक जिनका हम 'प्रगति' कहैत छी। महाकान्त ठाकुरक कविता एहि hegemony क counter-narrative थिक।
४८. स्व. कालीकांत झा 'बुच' (१९३४-२००९)
रचना: विरक्ति; पोताक अट्ठहास; दीनक नेना | स्मारक प्रस्तुति
परिचय
स्व. कालीकांत झा 'बुच' (१९३४-२००९) समस्तीपुर जिलाक करियन गामसँ छलाह महान दार्शनिक उदयनाचार्यक कर्मभूमि। हुनकर निधन २००९ मे भेलनि सदेह ३ मे ई एक posthumous tribute थिक।
'विरक्ति' क विश्लेषण
'विरक्ति' १९९० मे अपन अर्धांगिनीक मृत्युक पश्चात् लिखल गेल कवितामे नोट अछि: 'विशेष:- स्व. कवि एहि कविताक रचना सन् १९९० ई. मे अपन अर्धांगिनीक मृत्युक वियोगमे कएलनि।' ई एक personal elegy थिक जे शास्त्रीय मैथिली वियोग-कविताक परम्परामे fit बैसैत अछि।
रस-ध्वनि
करुण रस अपन गहनतममे personal loss universal statement मे परिवर्तित। 'पोताक अट्ठहास' मे contrast: एक दिस पोताक शैतानी हँसी, दोसर दिस बूढ़ दादाक ironic commentary। वात्सल्य + शान्त रस। 'दीनक नेना' (गरीबक बच्चा) मे करुण + वीर रस।
विदेह समानान्तर इतिहास
'बुच' क posthumous inclusion विदेहक archival mission क एक poignant example थिक: हुनका academic posthumous anthology वा national anthology क इन्तजार नहि करऽ पड़लनि विदेह तत्काल preserve कएलक।
४९. मनीष ठाकुर
रचना: विरह गीत | वियोग परम्परा
रस-ध्वनि
'विरह गीत' मैथिली वियोग-कविताक परम्परामे अछि। शृंगार-वियोग रस प्रधान। गीत form मे melodic quality ध्वनिकेँ amplify करैत अछि।
५०. चन्द्रकान्त मिश्र
रचना: जागु-जागु मैथिल | जागरण कविता
रस-ध्वनि
'जागु-जागु मैथिल' एक political call-to-action कविता थिक वीर रस। ई मैथिलीक जागरण genre क कविता थिक जाहिमे लोककेँ अपन सांस्कृतिक आ राजनीतिक पहचानक लेल जागि उठबाक आह्वान अछि।
विदेह फ्रेमवर्क
विदेह आन्दोलनक एक core mission थिक मैथिली सांस्कृतिक आ भाषाई पहचानकेँ revive केनाइ। चन्द्रकान्त मिश्रक कविता सोझे एहि mission कें support करैत अछि।
५१. कुसुम ठाकुर
रचना: चुल बुली कन्या बनि गेलहुँ; अभिलाषा | नारी जिज्ञासा
रस-ध्वनि
हास्य + शृंगार रस एक नारीक playful self-discovery। दुनूमे नारी agency क affirmation अछि। स्पिवाकक framework सँ ई 'claiming of agency' क gesture थिक।
५२. शिव कुमार झा 'टिल्लू'
रचना: चश्माक बोखार; हिंसक नानी; कोप भवनमे कनियाँ; श्रेयसीक विलाप | विविध रंग
रस-ध्वनि
'टिल्लू'क चारू कविता भिन्न-भिन्न world मे अछि: 'चश्माक बोखार' शृंगार रस; 'हिंसक नानी' हास्य + बीभत्स (dark comedy); 'कोप भवनमे कनियाँ' रौद्र + शृंगार (domestic conflict); 'श्रेयसीक विलाप' करुण (वियोग)। ई range देखबैत अछि जे टिल्लू एक versatile कवि छथि।
५३. धर्मेन्द्र विह्वल
रचना: बाबाक अवसान; ओकरासभक अन्त होबाक चाही | सामाजिक आक्रोश कविता
रस-ध्वनि
'बाबाक अवसान' (पिताक निधन) मे करुण रस। 'ओकरासभक अन्त होबाक चाही' मे रौद्र रस oppressors क विरुद्ध आक्रोश। दुनूमे एक moral urgency अछि।
अम्बेडकर
'ओकरा सभक अन्त होबाक चाही' मे अम्बेडकरक annihilation of caste क भाषा resonate करैत अछि, ओहि लोकसभक 'अन्त' चाहब जे exploitation क system चलबैत छथि।
५४. रघुनाथ मुखिया
रचना: अनुत्तरित प्रश्न; कविताक शीर्षक जकाँ | Meta-कविता
रस-ध्वनि
'अनुश्रित' (Unannounced) आ 'कविताक शीर्षक जकाँ' दुनू meta-literary अछि: कविताक बारेमे कविता। ई मैथिलीमे एक rare postmodern gesture थिक। शान्त रस + बौद्धिक जिज्ञासा।
बाख्तिन / Meta-Narration
बाख्तिनक metafiction क अवधारणासँ: मुखियाक कविता अपन स्वयं केर कृतृमता पर comment करैत अछि, ई मैथिलीमे rare modernist self-awareness थिक।
५५. लक्ष्मण झा 'सागर'
रचना: चुट्टीधारी | सबाल्टर्न कविता
रस-ध्वनि
'चुट्टीधारी' करुण रस। वक्रोक्ति: चुट्टीधारीक wandering existence एकटा larger displacement क रूपक थिक।
स्पिवाक / सबाल्टर्न
स्पिवाकक subaltern framework सँ: 'चुट्टीधारी' ओ working-class figure थिक जिनका mainstream literature नहि देखैत अछि। समानान्तर धारा ओकरा canonical space देलक।
५६. विभूति आनन्द
रचना: एक-दू-तीन...नओटा कविता; प्रतिपक्ष: १-९; मदारी युग; नब पीढ़ी आदि | साहित्य अकादेमी पुरस्कार २००६
'प्रतिपक्ष: एक' क विश्लेषण
'प्रतिपक्ष: एक' एक deeply personal confession थिक घर आएल थाकल-हारल आदमीकेँ की चाही? Classical music, गर्म चाह, सुकून, कनियाँक तनावरहित चेहरा, मित्रक स्मृति, भविष्यक स्वप्न मुदा किछु नहि होइत अछि। 'हम यन्त्र-मानव बनल सन जीब लागल छी' machine-man बनब modernity क रूपक थिक।
रस-ध्वनि
'प्रतिपक्ष' series मे शान्त रस + बीभत्स रस alienation क existential dread। 'प्रतिपक्ष: दू' मे राजनीतिक complexity: जखन 'पक्ष' आ 'प्रतिपक्ष' मे कोनो फर्क नहि तँ की करबाक चाही? 'मदारी युग' मे: हम सब एक circus मे perform कऽ रहल छी।
नव्य-न्याय
'प्रतिपक्ष: दू' मे गंगेशक 'विपरीतव्यभिचारी हेतु' (counter-example) क अवधारणा central थिक: जखन पक्ष आ प्रतिपक्ष दुनू एक्के जगह ठाढ़ भऽ जाथि, तँ logic breakdown भऽ जाइत अछि।
हीन भावना, मूलधाराक कन्नारोहट आ दोसरापर /खास कऽ महिलापर दोख देबाक मूलधाराक परम्परा विभूति आनन्द कवितामे अछि।
५७. रमण कुमार सिंह
रचना: गुमशुदगी रिपोर्ट | Missing-Person कविता
रस-ध्वनि
'गुमशुदगी रिपोर्ट' (Missing Person Report) एक unusual कविता थिक एक police report क form मे? वा एक metaphorical 'missing' report? ई ambiguity कविताक central move थिक। करुण + अद्भुत रस।
५८. मायानाथ झा
रचना: मातृगिरा | मातृभाषा कविता
रस-ध्वनि
'मातृगिरा' (माँक आवाज/मातृभूमि) मे शान्त + वात्सल्य रस मातृभाषा आ मातृभूमि दुनूक संगम। वक्रोक्ति: 'गिरा' (आवाज/वाणी) केवल language नहि ओ सांस्कृतिक पहचान आ वंश-परम्परा थिक।
५९. सच्चिदानन्द 'सौरभ'
रचना: देखू नै...; भोरक आसमे; अन्हारक संग रहैत रहैत | काव्यात्मक Trilogy
रस-ध्वनि
तीनू कविता एक trilogy जकाँ: 'देखू नै', 'भोरक आसमे', 'अन्हारक संग रहैत रहैत'। तीन stages: avoidance, hope, resignation। ध्वनि: 'अन्हार' केवल रात नहि ओ राजनीतिक, भावनात्मक, existential darkness सेहो थिक।
६०. अशोक दत्त
रचना: बाल गीत (३); ओधि उपाड़ | बाल साहित्य आ व्यंग्य
रस-ध्वनि
तीन बाल गीत मे वात्सल्य रस। 'ओधि उपाड़' मे हास्य रस satirical piece। वक्रोक्ति: बाल गीत सरल भाषामे complex मूल्य सिखबैत अछि।
६१. शीतल झा
रचना: टी..ऽऽ..स | नेपालसँ गजल-प्रेरित कविता
रस-ध्वनि
'हमरोमे अहूमे एकटा टी..स अछि' एक mystery: प्रेम? राजनीति? पहचान? ध्वनि deliberate रूपसँ ambiguous थिक। 'पुजारीक हाथमे अमृत कहाँ विष अछि' religious authority पर प्रश्न!
६२. शम्भु नाथ झा 'वत्स'
रचना: मिथिलाक दशा; मोनसँ पढ़ू बढ़ू; मिथिला बचाउ; बेरोजगारीक समस्या। साहित्याचार्य, वेदविद्
'मिथिलाक दशा' क विश्लेषण
'मिथिलाक दशा' मे मिथिलाक सांस्कृतिक deterioration क एक vivid lament थिक मण्डन, विद्यापति, धोती, दुपट्टा, वैदिक धुन सब किछु 'डिस्को' खा लेलक। 'अहीं कहू हम जीबैत छी?' एक existential प्रश्न।
रस-ध्वनि
करुण रस + बीभत्स रस (cultural loss पर disgust)। वक्रोक्ति: 'डिस्कोक पाछाँ देश बिका गेलैए' एक hyperbole मुदा एक cultural truth। परम्परा बनाम आधुनिकता क tension।
६३. डॉ. योगानन्द झा
रचना: घर | घर-कविता
परिचय
डॉ. योगानन्द झा (जन्म ११ जनवरी १९५५, दरभंगा) एक prolific writer आ researcher छथि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार अनुवादक लेल (२००५)। 'घर' (Home/House) हुनकर philosophical कविता थिक।
'घर' क विश्लेषण
'घर' एक दीर्घ कविता थिक जाहिमे 'घर' deterioration क रूपक थिक जे केवल एक घरे टा नहि, बल्कि समाज, लोकतन्त्र, राष्ट्रीय अखण्डता सभक 'घर' थिक। 'यैह हमर घरक थिक नक्शा / हृदय हमर टूटल अछि' हृदय as home, टूटल।
रस-ध्वनि
करुण रस प्रधान ९ stanzas मे एक slow mounting grief। सभ stanza एक्के refrain सँ बन्द होइत अछि: 'यैह हमर घरक थिक नक्शा / हृदय हमर टूटल अछि'। ई refrain एक ध्वनि थिक सभ बेर वएह घाव। वक्रोक्ति: 'केओ नृप होय हमे का हानी / कखनो ई संवाद / हमर जातिक लोक थिका ई / कखनो उठय विवाद' राजनीतिक passivity क satirical critique।
नव्य-न्याय
'घर' मे गंगेशक 'अव्यभिचारी सम्बन्ध' (invariable relation) क अवधारणा: 'घरक टूटनाइ' आ 'हृदयक टूटनाइ' मे एक अव्यभिचारी सम्बन्ध थिक एक संग दोसर अवश्य होइत अछि। ई काव्यात्मक व्याप्ति थिक।
६४. वीरेन्द्र मल्लिक
रचना: गतिशीलता | परिवर्तन कविता
रस-ध्वनि
'गतिशीलता' एक brief, minimalist कविता थिक। 'आब हम ओ नहि रहलहुँ / किछु आओर भऽ गेलहुँ / से की यौ? / ओ आने लोक कहत।' ई एक postmodern maneuver थिक: self-transformation जे outsider define करत। शान्त रस + existential openness।
बाख्तिन
बाख्तिनक dialogism सँ: 'ओ आने लोक कहत' हमर पहचान दोसरक आवाजसँ बनैत अछि। ई Bakhtinian insight थिक जे 'I am defined by the Other's gaze'।
६५. गंगेश गुंजन
रचना: राधा-१६म खेप | महाकाव्य-श्रृंखलाक एक fragment
रस-ध्वनि
गंगेश गुंजनक 'राधा' शृंखलाक सदेह ३ मे 'राधाक १६म खेप' अछि।
शृंगार-वियोग रस। ध्वनि: 'राधा' मात्र एकटा पौराणिक पात्र नहि ओ मिथिलाक नारीक universal condition क symbol थिक। वक्रोक्ति: birth itself a form of suffering ('माएक गर्भसँ आयल') परम्परागत Hindu कल्याण-दृष्टि नहि, ई existentialist questioning थिक।
विदेह फ्रेमवर्क
गंगेश गुंजनक 'राधा' series मैथिलीक विद्यापति-आधारित शृंगार परम्पराक एक आधुनिक continuation थिक मुदा एहिठाम राधा एक passive subject नहि, ओ अपन अस्तित्वपर प्रश्न करैत छथि। विदेहमे एहि feminist revision कें space भेटल।
६६. कीर्तिनारायण मिश्र
रचना: अकाल | सामाजिक अकाल कविता
रस-ध्वनि
'अकाल' एकटा hard-hitting कविता थिक: 'सड़कपर हाँड़ी चिबबैत / छौंड़ा सभ / कुकूर आ पुलिसकेँ / डण्डा देखा रहल अछि' street children कुकूर आ police दुनूकेँ एक्के डण्डा देखबैत। करुण + रौद्र रस। वक्रोक्ति: 'बाँझ सरकार / विदेशक आश्वासनसँ / विवाह रचा रहल अछि' निःसन्तान सरकार विदेशी वादासँ विवाह करैत।
अम्बेडकर / Marx
'अकाल' मे भूख एक राजनीतिक category थिक, केवल natural disaster नहि। अम्बेडकर आ Marx दुनू कहलनि जे scarcity manufactured थिक। मिश्रक कविता एहि manufactured scarcity कें सोझे expose करैत अछि।
६७. स्व. प्रशान्त
रचना: करू की वृद्ध अथबल छी | पूर्णियाँक कवि
रस-ध्वनि
करुण + हास्य रस एक वृद्ध व्यक्तिक ironic self-portrait। 'सुदमिया माय माय जे आयल छलथि / नैहरसँ महफापर चढ़िकऽ / तिनका साइकिलपर चढ़ि देखि / सड़कक कातमे दुबकल छी' पहिने palanquin, अखन bicycle ई generation gap क एक funny image थिक।
नव्य-न्याय
'मोकामा पुल बनि गेने / सिमिरिया घाटक स्टीमर जकाँ / अकार्य भेल बैसल छी' जखन bridge बनल, ferry useless भेल। ई गंगेशक 'बाधा' (obstacle/replacement) क अवधारणा थिक: modernity एक नव'साधन' थिक जे पुरान 'साधन' कें irrelevant कऽ दैत अछि।
६८. कालिनाथ ठाकुर
रचना: सून मिथिलाञ्चल..... | मिथिला आन्दोलन कविता
परिचय
कालिनाथ ठाकुर (जन्म २४-०६-१९४६, सर्वसीमा, मधुबनी) JK Synthetics Ltd., कानपुरमे १९७३ सँ १९९५ धरि काज कएलनि। अखन 'सारस्वत साधना' मे संलग्न।
'सून मिथिलाञ्चल' क विश्लेषण
ई एक political call-to-action कविता थिक मिथिलाक खेती, लोक, नेता, सभक दशाक विविध चित्रण। 'पूँजीपति बाबू भैया / नेता मुखिया / कर्ता-धर्ता/ पालनकर्ता' ई power structure क एक sardonic portrait थिक। 'लाठि लगाकऽ / सादा कागत पर / औँठा निशान / लगबाबथि / महाजन सादा कागचपर औंठा लगबाबैत छथि, ई सूदखोरीक indictment थिक।
रस-ध्वनि
करुण + रौद्र रस। वक्रोक्ति: 'सून मिथिला चल' 'चल' आ 'चाल' (trick) दुनू अर्थमे मिथिला एक 'चाल' (scheme) थिक? ई ambiguity कविताकें richer बनबैत अछि।
६९. अरविन्द ठाकुर 'अरबिन'
रचना: गजल १-४ | मैथिली गजल चारिटा गजल
परिचय
अरविन्द ठाकुर 'अरबिन' मैथिली गजलमे एक महत्वपूर्ण नाम छथि। चारि टा गजल सदेह ३ मे जे हुनकर range देखबैत अछि: व्यक्तिगत पीड़ा, राजनीतिक टिप्पणी, दार्शनिक चिंतन आ बाढ़िक बिम्ब। शास्त्रीय गजल संरचना: रदीफ-काफिया। मुदा बहरक अभाव।
गजल १ क विश्लेषण
'कोना अजुका दिन ससरतै, राति कटतै हओ भजार' दिन एक अजीब numbness मे गुजरैत अछि। 'एक-एकटा पल हमरा लेल सूनामीक हार' हर पल एक tsunami जकाँ। शास्त्रीय गजल संरचना: रदीफ-काफिया।
गजल २: दिल्ली व्यंग्य
'लगैए एहि ठामक सभ कान दिल्ली भऽ गेलै' repeated radif 'दिल्ली भऽ गेलै' सब किछु 'दिल्लीकृत' भऽ गेल। Powerful वक्रोक्ति: दिल्ली centralisation आ homogenisation क symbol थिक।
गजल ४: बाढ़ि कविता
'बाढ़िमे छप्पर निप्पटा, भेटल तारपोलीन खराप' specific material details (तारपोलीन, दाल, चावल, मुखिया) संग बाढ़ि क छवि। ई social realist गजल थिक जे परम्परागत romantic/philosophical गजल form सँ unusual थिक।
विदेह समानान्तर इतिहास
साहित्य अकादेमी गजलकेँ मैथिलीमे officially recognize नहि कएलक विदेह केलक।
७०. कुमार पवन (डॉ. पवन कुमार झा)
रचना: निहि बिसरैछ; काल्हि तँ रवि छै | प्रेम आ प्रकृति कविता
परिचय
डॉ. पवन कुमार झा (जन्म २७/१२/१९५८, मुरैठा, दरभंगा)। PGT हिन्दी, केन्द्रीय विद्यालय कटिहार। एक दशकक मौनक बाद २००८ मे लेखनक दोसर पारी शुरू।
'नहि बिसरैछ' क विश्लेषण
'नहि बिसरैछ' एक दीर्घ कविता थिक जाहिमे मुज़फ्फरपुर स्टेशनपर एक ट्रेन scene अछि एक १० बरखक दुबर-पातर बच्चा ट्रेन मे चढ़ल, बहैत नाक, फाटल शर्ट। कवितामे specific sensory details क कमाल: 'जाड़क ओ टिठुरैत कनकनायल भोर', 'अवध आसाम एक्सप्रेस'।
रस-ध्वनि
करुण रस मुदा ई नहि बिसरैबला करुण थिक। 'नहि बिसरैछ' memory as an ethical act: कवि ओहि बच्चाकेँ नहि बिसरत। वक्रोक्ति: 'नहि बिसरैछ'क की मतलब? केवल याद? वा एक political commitment to not forget the poor?
बेन्यामिन
वाल्टर बेन्यामिनक 'On the Concept of History' सँ: ई ट्रेनक यात्रा इतिहासक 'emergency brake' थिक भूतकालक पीड़ाकेँ याद रखनाइ ओ प्रायश्चित (redemptive act) थिक जे बेन्यामिनक theses मे central थिक।
७१. श्री विद्यानन्द झा
रचना: कोशीक ताण्डव; दहेज दानव | प्रकृति आ सामाजिक कविता
रस-ध्वनि
'कोशीक ताण्डव' कोसी बाढ़ि-आपदाक कविता थिक जे बिहारमे एक recurring tragedy थिक। 'ताण्डव' = शिवक मृत्यु-नृत्य ई elemental destruction थिक। रौद्र + करुण रस। वक्रोक्ति: 'ताण्डव' (नृत्य) एक positive शब्द थिक, मुदा एहिठाम death-dance थिक।
'दहेज दानव' straightforward दहेज-विरोधी कविता। करुण + बीभत्स रस।
७२. मो. गुल हसन
रचना: सभटा चौपट भऽ गेल | मुसलिम मैथिली आवाज
रस-ध्वनि
'सभटा चौपट भऽ गेल' एक satirical lament थिक जाहिमे सब किछु 'चौपट' (बरबाद) भऽ गेल। 'सभटा चौपट' refrain एक वक्रोक्ति थिक: 'चौपट' (ruined) एक लोक-शब्द थिक जे एहिठाम एक devastating political commentary बनि जाइत अछि। बीभत्स + हास्य रस।
बूर्द्यू (Bourdieu)/ धार्मिक बहुलता
बूर्द्यू (Bourdieu) क 'symbolic violence'क दृष्टिसँ: मो. गुल हसनक मैथिलीमे लिखनाई एक act of reclaiming belonging थिक एक एहन साहित्यिक परम्परामे जे ऐतिहासिक रूपसँ Hindu-brahmin dominated रहल अछि।
विदेह फ्रेमवर्क
विदेहक editorial policy मे Muslim, Dalit, OBC, नारी सब आवाजकेँ equal space देनाइ central रहल अछि।
७३. मनोज कुमार मंडल
रचना: बहीन | भाई-बहिन कविता
रस-ध्वनि
'बहीन'मे वात्सल्य + करुण रस भाई-बहिनक ऋण्यताक एक tender portrait। एहि ऋण्यताकेँ मैथिलीमे कवितामे आनब औचित्यक एक perfect example थिक ई topic एहि form मे naturally fit बैसैत अछि।
७४. आमोद कुमार झा
रचना: मैथिल नइँ छोटका | पहचान कविता
रस-ध्वनि
'मैथिल नइँ छोटका' (मैथिली नहि छोटका) एक पहचान कविता थिक ई 'छोटका' के थिक? जिनका 'मैथिली नहि' बुझाओल गेल? ई ambiguity कविताक central प्रश्न थिक। करुण + अद्भुत रस।
भाषाई पहचान
मैथिलीकेँ ८ म अनुसूचीमे शामिल करबाक पश्चात् सेहो पहचान-राजनीति complex अछि। आमोद कुमार झाक कविता एहि complexity कें पकड़ैत अछि।
७५. गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादक)
रचना: आकाश मध्य लिखल हमर लेख | सम्पादक-कवि
परिचय
गजेन्द्र ठाकुर विदेहक सम्पादक आ सदेह ३ क editor छथि। हुनकर अपन कविता 'आकाश मध्य लिखल हमर लेख' एहिमे शामिल अछि जे सम्पादक आ कवि दुनूक एक unique position थिक।
'आकाश मध्य लिखल हमर लेख' क विश्लेषण
आकाशमे लिखनाई ephemeral लेखन। ई कविता ठाकुरक अपन साहित्यिक पहचानक एक meditation थिक। सम्पादक जे स्वयं सेहो कवि छथि, एहि dual role क tension कवितामे महसूस होइत अछि।
रस-ध्वनि
शान्त + अद्भुत रस। 'आकाश मध्य लिखल' sky-writing transient, unpreservable थिक। ध्वनि: की मैथिली साहित्य सेहो आकाशमे लिखल ephemeral? वा विदेह आ सदेहक archival project एक 'आकाश-लेखन'केँ 'preserve' करैत अछि?
बाख्तिन
सम्पादकक अपन कविता शामिल केनाइ एक meta-literary act थिक ठाकुर ई कहि रहल छथि जे विदेह/सदेह केवल archival project नहि, ओ एक living literary creation थिक जाहिमे सम्पादक सेहो participate करैत छथि। ई बाख्तिनक 'author as character'क अवधारणा थिक।
नव्य-न्याय
गंगेश उपाध्यायक नव्य-न्यायमे सम्पादक आ कवि दुनूक लेल एक प्रमाणक जरूरत अछि। ठाकुरक कविता हुनकर 'व्यक्तिगत प्रमाण' थिक- "संपादकीय आत्म-साक्ष्य- संकलनक नेपथ्य सँ संपादकक कथन" कहल जा सकैत अछि। [editor's personal testimony within the very anthology he has assembled.]
विदेह समानान्तर इतिहास
ठाकुरक सदेह ३ मे अपन कविता शामिल केनाइ Videha Parallel History Framework केर एक defining moment थिक: सम्पादक मात्र इतिहास केवल नहि लिखैत, ओ इतिहासक हिस्सा सेहो छथि। ई विदेह आन्दोलनक एक founding philosophical statement थिक।
उपसंहार: सदेह ३ क समग्र महत्व
सदेह ३ मैथिली पद्य २००९-१० ७५ कविक एक असाधारण संकलन थिक जे मैथिली कविताक पूरा range कें एक जगह present करैत अछि। एहिमे राजनीतिक आवाज (महेन्द्र कुमार मिश्र, ओम कुमार झा, कालिनाथ ठाकुर), पारिस्थितिकीय आवाज (जीवकान्त, कीर्तिनारायण मिश्र), नारीवादी आवाज (शेफालिका वर्मा, कल्पना शरण, सरोज खिलाडी), दलित आवाज (उपेन्द्र भगत नागवंशी, राजदेव मंडल), मुसलिम आवाज (मो. गुल हसन), गजल आवाज (आशीष अनचिन्हार, अरविन्द ठाकुर), लोक-परम्परा (उमेश मंडल, निशाप्रभा झा), बाल-साहित्य (हिमांशु चौधरी, अशोक दत्त), senior canonical कवि (जीवकान्त, राजकमल चौधरी) आ नव आवाज सब एक संग अछि।
चारि framework क synthesis जे एहि समीक्षामे कएल गेल अछि से देखबैत अछि: (१) भारतीय रस सिद्धान्त मैथिली कविताक emotional-aesthetic DNA कें पकड़ैत अछि; (२) पाश्चात्य critical theory [बूर्द्यू (Bourdieu) , स्पिवाक, बाख्तिन, ग्राम्शी, बेन्यामिन, फानन, अम्बेडकर] social-political dimensions कें illuminate करैत अछि; (३) गंगेशक नव्य-न्याय epistemology कवितामे knowledge-construction क logic कें देखैत अछि; (४) Videha Parallel History Framework देखबैत अछि जे ई संकलन मैथिली साहित्यमे एक institutional counter-hegemony क हिस्सा थिक।
विदेह आन्दोलनक सबसँ बड़ योगदान ई थिक जे ओ एहि ७५ कविकेँ एक single canonical space देलक जाहिमे साहित्य अकादेमी laureates (जीवकान्त, आदि) आ नव, अप्रकाशित, सबाल्टर्न आवाज दुनू एक संग अछि। ई 'inclusion without exclusion' विदेहक defining characteristic थिक आ सदेह ३ ओकर एक monument थिक।

......

गंगेश उपाध्यायक तत्त्वचिन्तामणि

गंगेश उपाध्यायक तत्त्वचिन्तामणि चारि खण्डमे विभाजित अछि- . प्रत्यक्ष (सोझाँ-सोझी), () अनुमान, () उपमान (तुलना केनाइ) () शब्द (मौखिक गवाही)। वैध ज्ञान प्राप्त करबाक ई चारिटा साधन ऐ चारि खण्डमे अछि।

खण्ड एक
प्रत्यक्ष

गङ्गेशक आह्वान: त्रिमूर्ति शिवक आह्वानसँ ई खण्ड शुरू होइत अछि।आ तेँ आह्वानक विषयपर चर्चा शुरू होइत अछि। ई मानल जाइत अछि जे कोनो परियोजनाक प्रारम्भमे भगवानक आह्वानसँ ई कार्य पूर्ण होइत अछि।

आपत्तिः जे कोनो आह्वान कोनो काज पूरा करबाक कारण अछि, से सकारात्मक बा नकारात्मक संगतिक माध्यम सँ स्थापित नै कएल जा सकैत अछि, किएक तँ एहनो भेल अछि जे कोनो आह्वानक बिना सेहो कोनो काज पूरा कएल गेल।
आपत्तिक उत्तर: एकर कारण ई अछि जे ई आह्वान पूर्व जन्ममे कयल गेल छल/ हएत।

आपत्तिः नै, ई तँ घुमघुमौआ तर्क अछि, आ ओनाहितो कोनो काज पूरा केना होइत अछि तकर अनुभवजन्य कारण सभ आह्वानकेँ अनावश्यक सिद्ध करैत अछि।
आपत्तिक उत्तर: ई प्रमाण जे आह्वान कार्य पूर्ण हेबाक कारण छै, तइमे दू चरणक अनुमान शामिल अछि। पहिल, ई जे ई शिष्ट लोक द्वारा निन्दित नै अछि वरन हुनका सभ द्वारा सेहो आह्वानसँ कार्य प्रारम्भ कएल जाइत अछि। तखन ई अनुमान लगाओल जा सकैत अछि जे काज पूरा भेनाइ फल अछि किएक तँ ई नियमित रूप सँ इच्छित अछि, आ आन कोनो फल उपलब्ध नै अछि।

आपत्ति: ई तर्क काज नै करत कारण ई पहिनेसँ ज्ञात अछि जे आह्वानक अछैतो काज पूर्ण भऽ सकैत अछि, कारण-सम्बन्ध कोनो तर्कसँ स्थापित नै कएल जा सकैत अछि।
आपत्तिक उत्तर: हम सभ ऐ तर्क (जे आह्वान कार्य पूर्ण करबैत अछि) क समर्थन लेल वैदिक आदेशक आह्वान करैत छी। मुदा कोनो एहन वैदिक कथन नै भेटैत अछि। से अनुमान कएल जा सकैत अछि जे ऐ तरहक आह्वान सुसंस्कृत लोक सभ द्वारा शुरू कएल गेल आ कएल जाइत अछि।

प्रार्थना देह (जेना प्रणाम), वाणी (गायन) आ मस्तिष्क (ध्यान) सँ होइत अछि। मुदा कोनो ईश्वरमे विश्वास केनिहार सेहो कार्य सम्पन्न कऽ लैत अछि, तँ की ओ पूर्व जन्ममे आह्वान/ प्रार्थना  केने हएत? आ आह्वानक बादो कखनो काल कार्य सम्पन्न नै होइत अछि, से की ढेर रास बाधा ओइ साधारण आह्वानसँ दूर नै भेल हएत?

ऐ तरहक तर्कसँ प्रारम्भ भेल छल ई ग्रन्थ, -८ सय बर्ख पहिने!

Genealogical records kept in Mithila suggest that he had a wife and three sons and a daughter. One child was the famous Nyaya author, Vardhamana. Gangesa apparently achieved quite some fame during his lifetime, referred to as "jagad-guru," which would be the rough equivalent of "Distinguished University Professor" for the educational institutions of his time.

[Phillips, Stephen, "Gangesa", The Stanford Encyclopedia of Philosophy (Summer 2020 Edition), Edward N. Zalta (ed.), URL  ]

"Gangesha Upadhyaya was the Jagadguru (Universal Teacher), but he was also the Paramguru (Supreme Teacher). Aside from him, the title of Paramguru was only later conferred upon Nutan Vachaspati (the successor of Vriddha Vachaspati).

However, the injustice done to Gangesha by Ramanath Jha and Udaynath Jha 'Ashok' occurred in the 20th and 21st centuries, the adverse consequences of which logicians like Stephen Phillips were cursed to endure.

It should be noted here that Stephen Phillips is the first person to have completed a full English translation of all four volumes of the Tattvachintamani."

[Jewel of Reflection on the Truth about Epistemology: A Complete and Annotated Translation of the Tattva-cinta-mani, Bloomsbury Academic (2020)]

"V.P. Bhatta has also completed the full translation of all four volumes of the Tattvachintamani as of 2025: [(1) Pratyaksha (Perception), (2) Anumana (Inference), (3) Upamana (Comparison), and (4) Shabda (Verbal Testimony/Word)]."[Word The Sabdakhanda of Tattva Cintamani (2 Vols Set) 2005; Perception The Pratyaksa Khanda of The Tattva Cintamani 2012 (2 Vols Set); Inference the Anumana Khanda of the Tattva Cintamani (2 Vols Set) 2021 & Inference of God and Comparison The Isvaranumana and The Upamana Khanda of The Tattva Cintamani (2 Vols Set) 2025 [by V. P. Bhatta with Introduction, Sanskrit Text, Translation And Explanation;  Published by Eastern Book Linkers, Delhi].

HONOUR KILLING OF GANGESH UPADHYAYA (FIRST BY RAMANATH JHA, THEN BY UDAYANATH JHA 'ASHOK' (A PARALLEL HISTORY OF MITHILA AND MAITHILI LITERATURE, WHY TODAY ITS NEED BEING FELT MORE INTENSELY?)

I was not surprised, though I must have been when I saw a monograph on Gangesh Upadhyaya, whose copyright is being held by Sahitya Akademi, the author of the monograph is Udayanath Jha ' Ashok'. I thought that Udayanath Jha ' Ashok', who has been given Bhasha Samman also, by the same Sahitya Akademi, would do some justice. But truth and research seem elusive in Sahitya Akademi monographs, at least that I found in this monograph.

I searched and searched through chapters, that now the author will show courage. But the author like Ramanath Jha seems ashamed of the roots and offspring of Gangesh Upadhyaya. He tries to confuse the issue, but there is no confusion now at least since 2009. But in 2016 Sahitya Akademi seems to carry out the casteist agenda. Udayanath Jha mockingly pretends to search his name, lineage etc, where nothing is there to search for, yet he could not muster the courage, to tell the truth, and ends up just repeating the facts in 2016 that Dineshchandra Bhattacharya already has published way back in 1958.

The honour killing of Gangesh Upadhyaya by Prof. Ramanath Jha is being taken forward by Sahitya Akademi, Delhi in a most hypocritical way.

Ramanath Jha's obscurantism vis-a-vis Panji is evident from one example. The inter-caste marriage in Panji was well known to him (but he chose to keep the Dooshan Panji secret- which has been released by us in 2009), and it was apparent that the great navya-nyaya philosopher Gangesh Upadhyaya married a "Charmkarini" and was born five years after the death of his father (see our Panji Books Vol I & II available at http://videha.co.in/pothi.htm ). Sh. Dinesh Chandra Bhattacharya writes in the "History of Navya-Nyaya in Mithila". (1958)

"The family which was inferior in social status is now extinct in Mithila----- Gangesha's family is completely ignored and we are not expected to know even his father's name-----...As there is no other reference to Gangesa we can assume that the family dwindled into insignificance again and became extinct soon after his son's death." [1958, Chapter III pages 96-99), which is a total falsehood. He writes further that all this information was given to him by Prof. R. Jha, and he seemed thankful to him.

The following excerpt from Our Panji Prabandh (parts I&II) is being reproduced below for ready reference:

 -

"Maharaja Harasimhadeva belonged to the Karnat dynasty of Mithila. In Jyotirishwar Thakur’s Varna-Ratnakara, Harasimhadeva was portrayed as the hero or king. Born in 1294 AD, he ascended the throne in 1307 AD. Following his defeat by Ghiyasuddin Tughlaq in 1324–25 AD, he fled to Nepal.

He was the official founder of the Panji-Prabandha (the genealogical record system) among the Brahmins, Kayasthas, and Kshatriyas of Mithila. For this purpose, Gunakar Jha for the Maithil Brahmins, Shankardatt for the Karna Kayasthas, and Vijaydatt for the Kshatriyas were the first to be appointed.

Inspired by Harasimhadeva—who was a descendant of Nanyadeva, the founder of the Karnat dynasty in 1019 Shaka (as noted in the verse Nanda-Indu-Shunya-Shashi Shaka Varshe i.e., 1019 Shaka)—the scholars of Mithila decided to initiate the current form of the Panji-Prabandha in 1248 Shaka (1326 AD).

Later, in the current era, some intellectually driven individuals influenced Mithilesh Maharaja Madhav Singh in 1760 AD to order the Panjikars (genealogists) to compile the Shakha Pustaks (branch books). Following this (sometimes described as 1600 Shaka or 1678 AD, but actually around 1800 AD after Madhav Singh's time), a new Brahmin sub-caste named Shrotriya emerged in Mithila."

So, the Srotriyas as a sub-caste arose around 1800 CE as per authentic panji files. Sh. Anshuman Pandey [Gajendra Thakur of New Delhi provided me with digitized copies of the genealogical records of the Maithil Brahmins. The panjikara-s whose families have maintained these records for generations are often reluctant to allow others to pursue their records. It is a matter of 'intellectual property' to them. I was fortunate enough to receive a complete digitized set of panji records from Gajendra Thakur of New Delhi in 2007. [Recasting the Brahmin in Medieval Mithila: Origins of Caste Identity among the Maithil Brahmins of North Bihar by Anshuman Pandey, A dissertation submitted in partial fulfilment of the requirements for the degree of Doctor of Philosophy (History) in the University of Michigan 2014].

Later these Panji Manuscripts were uploaded to Videha Pothi at www.videha.co.in and google books in 2009).

The so-called Maharajas of Darbhanga were permanent settlement zamindars of Cornwallis, and there were so many in British India, but in Nepal there were none. In the annexure of our book (Panji Prabandh vol I&II), we have attached copies of genealogy-based upgradation orders (proof of upgradation for cash). So, before 1800   CE, there was no shrotriya sub-caste in British India and there is no such sub-caste within Maithil Brahmins in Nepal part of Mithila even today. Shrotriya before that referred to "some vedic education stream" in British India, in Nepal it still has that meaning.

ORIGINAL PANJI REFERENCES ARE PLACED BELOW:

DOOSHAN PANJI- THE BLACKBOOK

1

Sarisav

178/2

Valiyas Chamru

maternal village of Gangadhar

sarisav

Sakradhi

Panichobh

Darihara

Pali

Narwal

Bhavnath

 

Nathu 

Gangu

Kanh

Helu

Horai

Chand

Kamalnayan

Kishai

Unknown

238//05

Visho

Goge

Rud

Chand

Maternal Village of Ram

Deodhar

 

Table (1-97) of the Dooshan Panji, The Black Book by Gajendra Thakur;2023] Explanation of Example 1:

"Gunawati Himsha [Gunawati Himsha in Dooshan (impure secret book) Panji (geneology book)] belonged to a different caste (Aan Jatik); her marriage took place with Chamaru of the Valiyasa Mool, and from this union, a son named Gangadhar was born. His daughter was married to Nathu of the Sarisav Mool, and they had a son named Visho. Furthermore, Visho’s daughter married Gangu of the Sakaradhi Mool, resulting in a son named Goge.

Goge’s daughter married Kanhu of the Panichobh Mool, and they had a son named Rud (Rudra). Rud’s daughter married Helu of the Darihara Mool, and they had a son named Chand. Chand’s daughter married Horai of the Pali Mool, resulting in a son named Ram—though the maternal details (Matrik) of Ram are unknown.

The offspring (daughter) of Ram then married Chand of the Narwal Mool. Their son, Devadhar, became completely pure (Purnatah Shuddha) in the sixth generation."

 

 

49

188/2

Charmakarini (from the Charmakar clan)

Mandar

Babhaniyam

Chhadan

Gangesha, the author of Tattvachintamani.

Chaadan Gangeshak

Nain

Ratnakar’s Maternal root unknown

Gangesha

 

Vallabha

Bhavai

Maheshwar

 

 

 

 

Jive

 

50

Charmakarini

Sodarpur

Alay

Mandar

Naraun

Panichobh

Khandvala

Deeh Darihara

Brahmpur

Korai

Medha

Shankar

Gadu

Afel

Mushe

Vidyapati

Ratnakar

Matikar

Mangu

Mandar

189/1

Govind

Shrinath

Vasudev

Jadu

Ramapati

Surpati’s mother [Charmkarini]

 

 

Gangu-Medha

 

This text is a significant genealogical record from the Maithil Brahmin Panji (ancient scrolls) concerning the family of Gangesha Upadhyaya, the founder of the Navya-Nyaya (New Logic) school of Indian philosophy.


"Record 21//10: From the Chhadan Mool (lineage) comes Jagadguru Gangesha, the author of Tattvachintamani.

From the Chhadan root, the wife (Vallabha) of Gangesha, the author of Tattvachintamani, was Charmakarini. It is recorded that Gangesha, the author of Tattvachintamani, was born five years after the passing of his father (Pitri Parokshe Panch Varsh Vyatite); he was the offspring of the lineage connected with Charmakarini Medha.

From the Chhadan root, Mahamahopadhyaya (M.M.) Gangesha, the author of Tattvachintamani.

'Information regarding Mahamahopadhyaya (M.M.) Gangesha, the author of Tattvachintamani, is available from the Ancient Panji.'"

"Gangesha was born five years after the passing (absence) of his father—this is an ancient scribal note found in some places."["Pitri parokshe panch varsh vyatite Gangeshotpatti iti prāchīn lekhaniya kutrāpi"- In Dooshan (impure secret) Panji]

Devānand Pañjī 39-2: "Chhādan-sañ Jagadguru Guru Gageś sutāy Babhaniyām-sañ Jayāditya sut Sādhukar patnī."

Devānand Pañjī 339-3: "Jagadguru Gageś sut Supan dau Bhaṇḍārisam-sañ Harāditya dau. Putra sutā-cha Gorā Jajivāl sañ Jīve patnī e sut Sandagahi Bhaveśvar. Atrāsthāne Supan-bhrāt Hariśarmma dāriti kvachit Jajivāl grām."

"Chhādan-sañ Tattva Chintāmai kāraka Gageśak Vallabhā Charmakāriī pit paroke pañca vara vyatīte Tattva Chintāmai kāraka Gageśotpatti"["Charmakāriī Medhāk santānak lāgime chalanhi"]

"Tattva Chintāmai kāraka Ma. Ma. Pā. Gageśak viayak lekh prāchīn pañjī-sañ upalabdh"

Devānand Pañjī 339-3: "Devānand Pañjī 339-3 Jagadguru Gageś sut Supan dau Bhaṇḍārisam-sañ Harāditya dau. Putra sutā-cha Gorā Jajivāl-sañ Jīve patnī e sut Sandagahi Bhaveśvar. Atrāsthāne Supan-bhrāt Hariśarmma dāriti kvachit Jajivāl grām."

Devānand Pañjī 30-5: "Devānand Pañjī 30-5 Chhādan-sañ Upāyakāraka Ma.Ma. Pā. Varddhamān sutā-cha Khaṇḍavalā-sañ Viśvanāth sut Śivanāth patnī Gageś—Ma.Ma. Varddvamān / Supan / Hariśarmma."

"Record 21//10: Jagadguru Gangesha, the author of Tattvachintamani, from the Chhadan lineage."

"Mahaprabhu. Gangesha Upadhyaya—Chhadan (Mool), Chhadan (Gram). Udayanacharya—Nanautivar (Mool), Nanauti (Gram) [Kariyan, Samastipur]."

"Jajivāl-sañ Sandagahi Bhaveśvar Chhādan-sañ Tattva Chintāmai kāraka Gageś sut Supan dau Jallakī-sañ Sādā Mahidhar 341."

 

Gangesh, the author of the Tattvachintamani, wrote one text equivalent to 12,000 texts. Now come to the fact mentioned in the Panji- it clearly states that Gangesh of Tattvachintamani was born five years after the death of his father and he married a tanner, so why did Ramanath Jha hide this from Dinesh Chandra Bhattacharya? Vardhamana, son of Gangesh, calls Gangesh sukavikairavakananenduh. But the conspiracy under which the poems of a famous scholar like Gangesh are not available today is clear from the example given above. Vasudev of Bengal was a classmate of Pakshadhar Mishra of Mithila, he came to study in Mithila, passed the shalaka examination and received the title of sarvabhaum. Vasudeva memorised the tattvachintamani of Gangesh and the nyayakusumanjali karika of Udayana. Pakshadhar and other Mithila teachers did not allow writing (copying) tattvachintamani. Raghunath Shiromani, a disciple of Vasudeva, took the right of certification after he defeated his guru Pakshadhar Mishra in a scriptural debate (shastrartha). The Navya Nyaya school was founded in Navadvipa by Vasudeva-Raghunath. Pakshadhar Mishra was a contemporary of Vidyapati (distinct from the Padavali writer who was of the pre-Jyotirishwar period) who wrote in Sanskrit and Avahatta. And the arrival of Mithila students of Bengal from Bengal stopped after Raghunath Shiromani. Gangesh Upadhyaya enjoyed 'param guru' as well as 'jagad guru' titles, the highest titles of the time and as per Panji only Vacaspati Mishra II was the other person who enjoyed the title of 'param guru'. The extinction of Navya-Nyaya School from Mithila, as described above, was a revenge of nature against the honour killing of Gangesh Upadhyaya and his family.

[Translation of the Maithili Short Story, 'Shabdashastram' (based on the true Panji records of Gangesh Upadhyaya) was done by the author Gajendra Thakur himself: published as 'The Science of Words'  Indian Literature Vol. 58, No. 2 (280) (March/April 2014), pp. 78-93 (16 pages) Published By: Sahitya Akademi]

 

-Gajendra Thakur, editor, Videha [be part of Videha www.videha.co.in JOIN VIDEHA WHATSAPP CHANNEL

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-गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp/ Arattai no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA

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मैथिलीक वर्तनी

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मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि|

IGNOU  इग्नू       BMAF-001

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Maithili (Compulsory & Optional)

UPSC Maithili Optional Syllabus

BPSC Maithili Optional Syllabus

मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक)

मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य)

मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक)

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यू. पी. एस. सी. (मेन्स) ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज

यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २

Test Series-1- गजेन्द्र ठाकुर

Test Series-2- गजेन्द्र ठाकुर

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NTA-UGC/ UPSC/ BPSC Maithili Optional- गजेन्द्र ठाकुर

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मैथिली समीक्षाशास्त्र (भाग-, अनुप्रयोग)

मैथिली प्रतियोगिता

[Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)]

(Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates)

(ज्योतिरीश्वर, विद्यापति गोविन्ददास सिलेबसमे छथि रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।)

(बद्रीनाथ झा शब्दावली मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली)

(वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज संस्कृति)

(वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति)

(वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी)

(वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत)

(वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री)

(वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण)

(वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास)

(वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार)

(तिरहुता लिपिक उद्भव विकास)

अनुलग्नक---    अनुलग्नक- -

(मैथिली दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-, भाग-'', क्रम-])

[मैथिली हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल]

मैथिली-हिन्दी वार्तालाप ( घण्टा)

मैथिली

बांग्ला

असमिया

ओड़िया

हिन्दी

उर्दू

नेपाली

संस्कृत

संथाली

NTA_UGC_NET_Maithili_01

NTA_UGC_NET_Maithili_02

GS (Pre)

Topic 1 

........................

यू.पी.एस.सी. आन प्रतियोगिता परीक्षा लेल देखू:

विदेह इण्डेक्स (विदेह १-४४० आ सदेह १-३७ केर रचनाक अनुक्रमणिका)

विदेह:सदेह १७

विदेह:सदेह २१

विदेह:सदेह २३

विदेह:सदेह २६

विदेह:सदेह २९

विदेह:सदेह ३०

विदेह:सदेह ३२

विदेह:सदेह ३३

विदेह:सदेह ३४

विदेह:सदेह ३५

.......................

General Studies

भारतक संविधान (सौजन्य भारत सरकार)
भारतक संविधान (मैथिली)
भारतक संविधान (अंग्रेजी-हिन्दी)

NCERT-Environment Class XI-XII

NCERT PDF I-XII

Sansad TV

http://prasarbharati.gov.in/

http://newsonair.com/ 

...................

Other Optionals

IGNOU eGyankosh

...................

पेटार (रिसोर्स सेन्टर)

.................

मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमानाथ मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक)

डॉ. कमला चौधरी-मैथिलीक वेश-भूषा-प्रसाधन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक)

डॉ योगानन्द झा- मैथिलीक पारम्परिक जातीय व्यवसायक शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक)

डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक)

मैथिली शब्द संचय- डॉ श्रीरामदेव झा (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक)

दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा

परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा

English Maithili Computer Dictionary (Complete)- Gajendra Thakur

Maithili English Dictionary- गोविंद झा

राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature

राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास

जयकान्त मिश्र- A History of Maithili Literature Vol. I

राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) (यू.पी.एस.सी. सिलेबस)

दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस)

प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) (CIIL Site आर्काइव)

सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ

शिव कुमार झा 'टिल्लूअंशु-समालोचना

डॉ बचेश्वर झा- निवन्ध-निकुञ्ज

डॉ. रमानन्द झा 'रमण'

दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु

फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:-

रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा

कुमार पवन (साभार अंतिका)

पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा)     

डायरीक खाली पन्ना

अनूदित साहित्य (आन भाषासँ)

......

गद्य पद्य भारती खण्ड १ आ २ (विदेह सदेह २८ & विदेह सदेह ३७)

[विभिन्न भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य रचना (खण्ड-१) & (खण्ड-२) (विदेह www.videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सँ)]

विदेह सदेह २८

GADYA PADYA BHARTI 1

विभिन्न भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य रचना (खण्ड-१) (विदेह www.videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सँ)

https://store.pothi.com/book/editor-gajendra-thakur-gadya-padya-bharti-1/

विदेह सदेह ३७

GADYA PADYA BHARTI 2

विभिन्न भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य रचना (खण्ड-२) (विदेह www.videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सँ)

https://store.pothi.com/book/translator-gajendra-thakur-gadya-padya-bharti-2/

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अनूदित साहित्य (आन भाषासँ)

गद्य पद्य भारती खण्ड १ आ २ (विदेह सदेह २८ & विदेह सदेह ३७) [खण्ड १ ISBN No: 978-93-341-0402-8; खण्ड २ ISBN No: 978-93-5890-150-4]

विदेह:सदेह २८ (अनूदित गद्य पद्य खण्ड- विदेह अंक -३५० सँ)

 

विदेह:सदेह ३७ (अनूदित गद्य पद्य खण्ड- विदेह अंक -३५० सँ)

A PARALLEL HISTORY OF MITHILA & MAITHILI LITERATURE [TOME 1-4; VOLUMES 1-100] BY GAJENDRA THAKUR

[Series ISBN Number: 978-93-5812-486-6]

 

GOOGLE PLAY BOOK [TOME 1-4; VOLUMES 1-100]

https://play.google.com/store/books/details?id="uvjREQAAQBAJ"

AMAZON KINDLE [TOME 1-4; VOLUMES 1-100]

https://www.amazon.in/dp/B0GX2XRKM7

POTHI HARDBACK

POTHI TOME 1 [VOLUMES 01-25]

https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-parallel-history-mithila-maithili-literature/

POTHI TOME 2 [VOLUMES 26-50]

https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-parallel-history-mithila-maithili-tome-2/

POTHI TOME 3 [VOLUMES 51-75]

https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-parallel-history-mithila-maithili-literature-volume-1-100-tome-3-volume-51-75-b/

POTHI TOME 4 [VOLUMES 76-100]

https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-parallel-history-mithila-maithili-literature-volume-1-100-tome-4-volume-76-100-/

 

बाल साहित्य (अनुवाद- द्विभाषिक- मैथिली-अंग्रेजी)- गजेन्द्र ठाकुर

अनुवाद  (मैथिली):

1. भारतोल्लक राजकुमारी, (बिनु शब्दक), (बाल साहित्य), (2022)

2. मू परियोजना (तिरहुता लिपि), (2023)

3. मू परियोजना (देवनागरी लिपि), (2023)

4. मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका, (बाल साहित्य),  (2022)

5. सुनू , (बाल साहित्य), (2022)

6. घर सभ , (बाल साहित्य), (2022)

7. एकटा नीक दिन, (बाल साहित्य), (2022)

8. चलू हम तँ ठीक छी ने! , (बाल साहित्य) ,(2022)

9. की अहाँ चिड़ै सभकेँ देखने छी?, (बाल साहित्य), (2022)

10. टोस्ट , (बाल साहित्य), (2022)

11. बड़ीटा! कनियेटा!, (बाल साहित्य), (2022)

12. एतऽ हम सभ रहै छी , (बाल साहित्य), (2022)

13. भारतोल्लक राजकुमारी, (बाल साहित्य), (2022)

14. वुयो , (बाल साहित्य), (2022)

15. कच-कच कचाक, (बाल साहित्य), (2022)

16. चुन्नू-मुन्नूक नहेनाइ, (बाल साहित्य), (2022)

17. नेना जे बैलूनसँ डेराइत छल , (बाल साहित्य) ,(2022)

18. अद्भुत फिबोनाची अंक-शृंखला, (बाल साहित्य), (2022)

19. हारू , (बाल साहित्य), (2022)

20. अखन नै, अखन नै!, (बाल साहित्य), (2022)

21. जन्मदिनक उत्सव भोज, (बाल साहित्य), (2022)

22. मोट राजा पातर-दुब्बड़ कुकुड़, (बाल साहित्य), (2022)

23. बचिया जे अपन हँसी नै रोकि सकैत छलि , (बाल साहित्य), (2022)

24. अंग्रेजी, (बाल साहित्य), (2022)

25. हम सूँघि सकै छी, (बाल साहित्य), (2022)

26. छोट लाल-टुहटुह डोरी, (बाल साहित्य), (2022)

27. करू नीक, भोगू नीक , (बाल साहित्य) , (2022)

28. सभटा बिलाड़िक दोख अछि! , (बाल साहित्य) , (2022)

29. चोभा आम!, (बाल साहित्य), (2022)

30. हमर टोलक बाट , (बाल साहित्य) , (2022)

31. जखन इकड़ू स्कूल गेल, (बाल साहित्य),  (2022)

32. माछी फेर आउ टाटा!, (बाल साहित्य),  (2022)

33. अमाचीक जुलुम मशीन सभ , (बाल साहित्य) ,(2022)

34. टिंग टोंग, (बाल साहित्य),  (2022)

35. पाउ-म्याऊ-वाह, (बाल साहित्य),  (2022)

36. कुकुड़क एकटा दिन, (बाल साहित्य), (2022)

37. हमरा नीक लगैए, (बाल साहित्य),  (2022)

38. रीताक नव-स्कूलमे पहिल दिन, (बाल साहित्य), (2022)

39. कनी हँसियौ ने! , (बाल साहित्य) ,(2022)

40. लाल बरसाती, (बाल साहित्य), (2022)

41. भूत-प्रेतक नाट्यशाला, (बाल साहित्य), (2022)

42. आउ पएर गानी, (बाल साहित्य), (2022)

43. कतऽ अछि अंक 5?, (बाल साहित्य), (2022)

मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक:

1. https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका), (बाल साहित्य), (2022)

2. https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!चलू हम तँ ठीक छी ने!), (बाल साहित्य), (2022)

3. https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन), (बाल साहित्य), (2022)

4. https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ), (बाल साहित्य), (2022)

5. https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ चिड़ै सभकेँ देखने छी?), (बाल साहित्य), (2022),

6. https://www.youtube.com/@videha_ejournal  पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल, (2022)

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NCERT BHASHA SANGAM

NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations)

पं लक्ष्मीपति सिंह (सौजन्य रमानन्द झा "रमण")

हिन्दी-मैथिली-शिक्षक

मैथिली सीखू Learn Maithili

Maithili Pathshala

Maithili Pathshala by Vandana Jha

मैथिली-हिन्दी वार्तालाप Maithili-Hindi conversations (3 Hours घण्टा)

मैथिली-हिन्दी वार्तालाप (३ घण्टा)

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प्रकाशन 

डिजिटल-पोथी

CIIL

अखियासल (रमानन्द झा रमण)

जुआयल कनकनी- महेन्द्र

प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस)

सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन अरविन्द ठाकुर

मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा

Archive.Org (विजयदेव झा)

Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Audio-Video Archive

IGNCA

Maithili English Dictionary

विदेह सदेह

विज्ञान रत्नाकर

तीरभुक्ति

OLE Nepal's e-Pustakalaya

पोथीक लिंक

IGNCA-ASI (search keyword Mithila)

History of Navya-Nyaya in Mithila

Studies in Jainism and Buddism in Mithila

Mithila in the Age of Vidyapati

Cultural Heritage of Mithila

Mithila under the Karnatas

Temple Survey Project ASI- English Hindi

मैथिली साहित्य संस्थान

दर्शनीय मिथिला (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक)

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आकाशवाणी मैथिली समाचार

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विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात)

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