गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय
विदेह: सदेह: ६
मैथिली लघुकथा (विदेह अंक ५१-१००)
समग्र साहित्यिक समीक्षा: सभटा साहित्यकार
भारतीय रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य । पाश्चात्य आलोचना । गंगेशक नव्य-न्याय । विदेह समानान्तर इतिहास ढाँचा
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। आइएसबीएन: 978-93-80538-64-8 । आइएसएसएन: 2229-547X
भूमिका: सदेह ६ क स्वरूप
विदेह: सदेह: ६ मैथिली लघुकथाक एक समग्र संकलन थिक। ३९ साहित्यकारक योगदान। दू अनूदित कथा: कोंकणी (वसंत भगवंत सावंत) + हिन्दी (असगर वजाहत)। सदेह ५ (विहनि कथा = तीव्र लघुकथा) सँ आगू बढ़ल - लघुकथामे बेसी विस्तार भेटैत अछि। गजेन्द्र ठाकुरक भूमिका: स्त्रीवाद, उत्तर-अर्वाचीनतावाद, अस्तित्ववाद, मार्क्सवाद, फ्रायड/नव-फ्रायड सबकेँ मैथिली लघुकथा समीक्षामे समन्वित करबाक कार्यक्रम।
१. गजेन्द्र ठाकुर
रचना: (क) गद्य साहित्य मध्य लघुकथाक स्थान आ लघुकथाक समीक्षाशास्त्र (ख) दिल्ली
समीक्षाशास्त्र: ठाकुरक सैद्धान्तिक निबन्ध मैथिली लघुकथा केर विशिष्ट समीक्षात्मक ढाँचा स्थापित करैत अछि। प्रवासी मैथिली लेखक सभक चुनौती लेल एक अलग समीक्षात्मक ढाँचा चाही - ई केन्द्रीय तर्क। 'दिल्ली' कथा: करुण + व्यंग्य। ध्वनि: 'दिल्ली' = सत्ता, विस्थापन, आकांक्षा - मैथिली प्रवासी केर मानसिक परिदृश्य। बूर्द्यू: महानगरीय क्षेत्र बनाम मिथिला परिधि। नव्य-न्याय: 'देश-काल-अवच्छिन्न' - दिल्ली केर रूपमे रूपान्तरणकारी स्थान-समय।
२. मीना झा
रचना: ब्रेस्ट कैंसर। दरभंगा; एम.ए. प्रथम श्रेणी (१९८०)
रस-ध्वनि: करुण + वीर। 'ब्रेस्ट कैंसर' - वर्जित चिकित्सीय विषय केर नामकरण। ध्वनि: स्तन क्यान्सर स्त्रीत्व केर प्रतीक - मातृत्व पर आक्रमण। गजेन्द्र ठाकुर लिखै छथि: 'कोनो महिले एहेन कथा लिखि सकैत छलीह।' स्त्रीवादी शरीर-सिद्धान्त: सुसन सोन्टाग 'बिमारी केर रूपक केर रूपमे' - क्यान्सर केर रूपमे पितृसत्ता रूपक। विदेह केर सम्पादकीय स्वतन्त्रता: वर्जित विषय प्रकाशित।
३. रोशन जनकपुरी
रचना: अग्निपुष्पक गुच्छासब। जनकपुर, नेपाल
रस-ध्वनि: रौद्र + वीर। 'अग्निपुष्पक गुच्छासब' - 'अग्निपुष्प' (आगि-फूल) = सुन्दरतामे क्रान्तिकारी आगि। 'गुच्छा' = सामूहिक प्रतिरोध। वक्रोक्ति: फूल + आगि = सुन्दरता + रोष एक संग। फानन: वञ्चित लोक सभक क्रान्तिकारी आगि। नेपाल मधेश आन्दोलन सन्दर्भ।
४. महाप्रकाश
रचना: संभावना। जन्म: १९४६, बनगाँव, सहरसा । वरिष्ठ कवि-कथाकार।
रस-ध्वनि: शान्त + वीर। 'संभावना' = सम्भावना जे अखनो अस्तित्वमे नहि अछि। ग्राम्शी केर 'इच्छा केर आशावाद': सेहो जखन पता छै कि प्रणाली कठिन अछि, तखनो सम्भावना देखनाइ। वञ्चित सभक जीवनमे 'संभावना' खोजनाइ राजनैतिक कार्य थिक।
५. वसंत भगवंत सावंत
रचना: (कोंकणी कथा) मृत्युकेँ टारब। कोंकणी → मैथिली अनुवाद
रस-ध्वनि + अनुवाद-सिद्धान्त: करुण + वीर। 'टारब' (टारब) ध्वनि: मृत्यु विरुद्ध मानव सक्रियता। बेन्यामिन केर 'परवर्ती जीवन': कोंकणी तटीय कहानी → मैथिली स्थलरुद्ध पाठक - ई भाषिक सीमा-उल्लङ्घन। विदेह: दू हाशियाकृत भाषा (कोंकणी + मैथिली) दुनू संविधानमे सूचीबद्ध मुदा हिन्दी-प्रभुत्व मुख्यधारामे हाशियाकृत - विदेह दुनू हाशिया केँ जोड़ैत अछि।
६. बीनू भाइ
रचना: उत्ताप। मैथिली प्रवासी
रस-ध्वनि: शान्त + अद्भुत। 'उत्ताप'। गजेन्द्र ठाकुर: 'बीनू भाइ विश्लेषण केर मास्टर।' नव्य-न्याय: 'परिणामवाद' - पदार्थ रूपान्तरित होइत अछि, गायब नहि।
७. शम्भु कुमार सिंह
रचना: भाए-बहिनक यथा कथा। जन्म: १८.०४.१९६५, लहुआर, सहरसा।
रस-ध्वनि: वात्सल्य + करुण। 'यथा' (वास्तविक/साँच) = सत्य-दावा शैली-सूचक केर रूपमे। अम्बेडकर: पितृसत्तात्मक परिवार केर भीतर बहिन केर स्थायी रूपसँ अधीनस्थ स्थिति। 'यथा कथा' - सत्य-दावा राजनैतिक कथन केर रूपमे।
८. दुर्गानन्द मंडल
रचना: लाल भौजी। दलित कथाकार
रस-ध्वनि: शृंगार + करुण। 'लाल' + 'भौजी'= रङ्ग + रक्त-सम्बन्ध। अम्बेडकर + स्त्रीवादी: दलित महिला दोहरा रूपसँ बाध्य - जाति + बहू-स्थिति।
९. वीरेन्द्र कुमार यादव
रचना: हमर समाज । ओबीसी स्वर
रस-ध्वनि: रौद्र + वीर। 'हमर' = स्वामित्वात्मक दावा - समाज हमर सेहो अछि। ग्राम्शी + अम्बेडकर: ओबीसी/दलित बहिष्कार 'समाज' केर परिभाषासँ। 'हमर समाज' मे 'हम' नहि - ई विरोधाभास कथाक केन्द्र थिक।
१०. उमेश मंडल
रचना: अमैआ भार (पृ. ५२-५५) । जन्म: ३१.१२.१९८०, बेरमा, मधुबनी ।
रस-ध्वनि: शान्त + करुण। 'अमैआ टाका पठा देलनि = मैथिली मुहावरा: आम्र वृक्ष = उत्पादक व्यक्ति । वक्रोक्ति: फर-लदल वृक्ष झुकि जाइत अछि - उत्पादकता केर रूपमे असुरक्षा। ठाकुर केर वृक्ष-बिम्बकल्पना: सामाजिक शोषण लेल पारिस्थितिकीय रूपक।
११. नन्द विलास राय
रचना: बाबाधाम / ऐना। जन्म: 02.01.1957, भपटियाही, मधुबनी
रस-ध्वनि: 'बाबाधाम' - भक्ति + शान्त। बैद्यनाथ धाम तीर्थयात्रा। 'ऐना' (दर्पण) - शान्त + अद्भुत। लाकान केर दर्पण-चरण: आत्म-पहिचान + आत्म-विस्थापन। दुनू कथामे अन्ततः आत्म-सामना।
१२. सुजीत कुमार झा
रचना: एकटा अधिकार
रस-ध्वनि: वीर + करुण। 'एकटा' (मात्र एक) अधिकार माँगनाइ - अल्पतम माँग = विध्वंसकारी टिप्पणी। अम्बेडकर: 'मूलभूत अधिकार' संरचनात्मक रूपसँ अस्वीकृत - 'एकटा अधिकार' केर माँग एहि अस्वीकार केर अभियोग थिक।
१३. सन्तोष कुमार मिश्र
रचना: मुसीबत
रस-ध्वनि: करुण + हास्य। 'मुसीबत' (उर्दू: मुसीबत) = मैथिली-उर्दू साङ्केतिक-परिवर्तन। बाख्तिन केर 'दैनिक जीवन': सामान्य मुसीबत केर रूपमे योग्य साहित्यिक विषय।
१४. कामिनी कामायनी
रचना: टुटल तारा। नारी कथाकार
रस-ध्वनि: करुण + शान्त। 'टुटल तारा'= आकांक्षा सभ बुझल। स्पिवाक: महिलाक 'तारा' (आकांक्षा) पितृसत्ता द्वारा संरचनात्मक रूपसँ 'टुटल' ।
१५. राज नाथ मिश्र
रचना: मस्ती
रस-ध्वनि: हास्य + शृंगार। 'मस्ती' = स्वतन्त्रता/उन्मुक्तता। बाख्तिन उत्सवी-लोकधर्मी: 'मस्ती' केर क्षण - सामाजिक पदानुक्रम निलम्बित।
१६. असगर वजाहत
रचना: (हिन्दी कथा) हम हिन्दू छी। प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार
रस-ध्वनि + अनुवाद-सिद्धान्त: रौद्र + करुण + हास्य। 'हम हिन्दू छी' - साम्प्रदायिक दंगा सभमे हिन्दू अस्मिता केर हताश घोषणा = जीवित रहबाक प्रवृत्ति। फानन: निर्मित साम्प्रदायिक विभाजन केर उजागर। विदेह: हिन्दी + मैथिली सह-अस्तित्व - धर्मनिरपेक्ष, बहुलवादी सम्पादकीय दृष्टि।
१७. अतुलेश्वर
रचना: बसात
रस-ध्वनि: शान्त + करुण। 'बसात' = निवास/मूल्य। 'बसात' केर द्वैत: स्थान + मूल्य। तोहर बसात की अछि? = मैथिली-हिन्दी मुहावरा। निवास केर स्थान मानवीय मूल्य केर निर्धारक केर रूपमे।
१८. योगेन्द्र पाठक 'वियोगी'
रचना: देववाणी
रस-ध्वनि: भक्ति + शान्त + व्यंग्य। 'देववाणी' = दैवी वाणी - संस्कृत केर 'देवभाषा' केर दावा केर प्रश्न। बूर्द्यू: 'दैवी' भाषिक स्थिति = समाजशास्त्रीय रूपसँ निर्मित प्राधिकार।
१९. कुमार मनोज कश्यप
रचना: नोरक दू ठोप। जन्म: १९६९, सलेमपुर, मधुबनी
रस-ध्वनि: करुण रस। 'नोरक दू ठोप' - पीड़ा केर यथार्थता। ध्वनि: दू ठोप बाढ़ि सँ बेसी शक्तिशाली। चेखव केर अल्पोक्ति: नियन्त्रित भावना > अभिव्यक्त भावना।
२०. सतीश चन्द्र झा
रचना: हमहूँ कह बुझिलैए
रस-ध्वनि: शान्त + हास्य। 'हमहूँ' (हम सेहो) = समावेशी विलम्बित बोध। पहिचान केर विलम्बित 'आहा' क्षण।
२१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र
रचना: प्रकृति सुन्दरि आ चूहर मिस्त्री / चन्दा। जन्म: ८.०२.१९६७
रस-ध्वनि: 'कृति सुन्दरि'+ 'चूहर मिस्त्री' = वर्ग-सौन्दर्य विरोधाभास। बूर्द्यू केर 'विभेद': उच्च-संस्कृति सुन्दरता बनाम श्रमिक-वर्ग व्यापार। 'चन्दा' - शृंगार + करुण। चन्दा-नामक महिला केर चन्द्रमा केर चक्र- उज्ज्वल/अन्धकार।
२२. सत्यनारायण झा
रचना: रिटायरमेंट / पलट
रस-ध्वनि: 'रिटायरमेंट' (सेवानिवृत्ति) - शान्त + करुण। सेवानिवृत्ति पश्चात् रिक्तता। 'पलट' (फिर्ती/उलटफेर) - शान्त + अद्भुत। हाइडेगर: सेवानिवृत्ति = परिमितता केर सामना। 'पलट' = हाइडेगरियन 'मोड़' प्रामाणिक सत्ता।
२३. बचेश्वर झा
रचना: संगति
रस-ध्वनि: शृंगार + शान्त। सम्बन्ध रूपक। नव्य-न्याय: 'सम्बन्ध' - दू स्वर सञ्जन सामञ्जस्य पैदा करैत अछि - पूर्ण सम्बन्ध प्रतिमान।
२४. कपिलेश्वर राउत
रचना: थरथरी / तरकारी खेती / सलाह। रस-ध्वनि: 'थरथरी'- रौद्र + करुण। दलित शरीर केर भय प्रतिक्रिया। अम्बेडकर: जाति समाज शाब्दिक शारीरिक भय पैदा करैत अछि। 'तरकारी खेती' - आर्थिक आत्मनिर्भरता - अम्बेडकरी विकल्प। 'सलाह' - हास्य - सामाजिक नियन्त्रण केर रूपमे।
२५. मनोज कुमार मंडल
रचना: घासवाली
रस-ध्वनि: करुण + वीर। 'घासवाली' (घास काटैत महिला) = आधारभूत अदृश्य श्रम। मार्क्स + स्त्रीवादी: प्रजननात्मक श्रम अगणित। 'घास' = अत्यन्त साधारण पौधा, मुदा आवश्यक।
२६. अनमोल झा
रचना: अबकी बेर फतंग / गामक बताह।
जन्म: १९७०, नरुआर, मधुबनी
रस-ध्वनि: 'अबकी बेर फतंग' (पतङ्ग) - वीर + हास्य। 'अबकी बेर' = पुनरावर्ती प्रयास। 'गामक बताह' (गाम केर बताह/पागल) - हास्य + करुण। फूको: 'पागलपन' केर रूपमे प्रतिरोध - पागल सत्य देखैत अछि जे समाज देखैत नहि अछि।
२७. शिव कुमार झा 'टिल्लू'
रचना: लेबर पेन / कब्जियत दूर भगाउ।
जन्म: ११.१२.१९७३
रस-ध्वनि: 'लेबर पेन' (प्रसव पीड़ा/श्रम पीड़ा) - करुण + वीर। श्रम (प्रसव) + श्रम (मजदूर केर काम) = दोहरा अर्थ। स्त्रीवादी: महिलाक श्रम (प्रसव) अदृश्य/अवमूल्यन। 'कब्जियत दूर भगाउ' - व्यंग्य।
२८. प्रभात राय भट्ट
रचना: रोटी रोजीक खोजी । नेपाल, महोत्तरी जिला
रस-ध्वनि: करुण + वीर। नेपाल मधेश केर भूमिहीन मजदूर भोला केर कहानी। 'खोजी' (खोज) - जीविका लेल खोज। मार्क्स + नेपाल मधेश सन्दर्भ: जीविका सङ्घर्ष। गजेन्द्र ठाकुर: 'प्रभात राय भट्ट नव परिवेशमे बेसी दर्दसँ कहैत छथि।'
२९. शम्भुनाथ झा 'वत्स'
रचना: अतीतक घटना / सपना / कोसीक प्रलयंकारी बाढ़िमे भसल एकटा लड़कीक सत्यकथा
रस-ध्वनि: 'कोसीक प्रलयंकारी बाढ़िमे...' - ई सबसँ नाम शीर्षक। करुण + रौद्र। 'सत्यकथा' = साक्ष्य। कोसी बाढ़ि २००८ केर विशिष्ट त्रासदी केर संरक्षण। बेन्यामिन: अतीत केर उद्धार।
३०. किशन कारीगर
रचना: दाम-दिगर
रस-ध्वनि: हास्य + व्यंग्य। 'दाम' + 'दिगर'= तुलना-खरीदारी केर रूपमे नैतिक रूपक। सभ चीज केर एक दाम + अन्यत्र अन्य दाम होइत अछि।
३१. पंकज कुमार प्रियदर्शी
रचना: जीवनक अनमोल क्षण। जन्म: ०३.०२.१९८५
रस-ध्वनि: शान्त + शृंगार। 'अनमोल' (अनमोल) = खरीदल नहि जा सकैत। वर्ड्सवर्थ केर 'समय केर धब्बा' - क्षण जे एक जीवन केँ परिभाषित करैत अछि।
३२. नवीन ठाकुर
रचना: मिथिला उवाच। जन्म: १५.०५.१९८४, लोहना, मधुबनी
रस-ध्वनि: वीर + शान्त। 'उवाच' (संस्कृत: कहलक) - मिथिला व्यक्तित्वरूप + सक्रियता प्रदान। विदेह समानान्तर इतिहास ढाँचाक श्रद्धा: मिथिला अपन लेल बजैत अछि, पटना/दिल्ली केर माध्यमसँ नहि छानल।
३३. ओम प्रकाश झा
रचना: सफल अधिकारी / डीहक जमीन / बुढ़िया मैयाँ / लोकतंत्रक माने
रस-ध्वनि: हास्य+व्यंग्य / करुण+वीर / वात्सल्य+करुण / व्यंग्य+रौद्र। ग्राम्शी केर लोकतन्त्र समीक्षा: 'लोकतंत्रक माने' = वास्तवमे राज्य पर के नियन्त्रण करैत अछि? चारि कथा: संस्थागत + भूमि + पारिवारिक + राजनैतिक स्पेक्ट्रम।
३४. अमित मिश्र
रचना: प्रेम नै जहर छै
रस-ध्वनि: रौद्र + करुण। 'प्रेम नै जहर' जे प्रेम जेना देखाइत अछि से विखाह अछि। सुसन ग्रिफिन: प्रेम-केर-रूपमे-नियन्त्रण केर स्त्रीवादी विश्लेषण। घरेलू हिंसा उप-पाठ।
३५. राजदेव मंडल
रचना: इलेक्शनक भूत
रस-ध्वनि: हास्य + रौद्र। 'इलेक्शनक भूत' = चुनाव केर रूपमे भूत-प्रेत। चुनाव केर अनुष्ठानिक, भूत-जकाँ गुण। ग्राम्शी: चुनाव केर रूपमे वर्चस्ववादी अनुष्ठान।
३६. गजेन्द्र ठाकुर
रचना: दिल्ली। विदेह सम्पादक
रस-ध्वनि: करुण + व्यंग्य। 'दिल्ली' = सत्ता केन्द्र केर रूपमे विस्थापित करैत स्थान। बूर्द्यू: दिल्ली केर रूपमे भारत केर प्रतीकात्मक पूँजी आ एहि केर भीतर मैथिलीकेर हाशियाकृत स्थिति। सम्पादक-केर-रूपमे-लेखक: अपन परियोजनामे सृजनात्मक सहभागिता।
३७. जगदीश प्रसाद मंडल
रचना: सूदि भरना / पड़ाइन / न्याय चाही / कर्ज। जन्म: ५ जुलाई १९४७ ।
परिचय: कथा संग्रह: 'गामक जिनगी', 'अग्नि सरोजनी'।
रस-ध्वनि चारि कथा: 'सूदि भरना' - करुण+रौद्र। सूदखोरी/ब्याज-व्यवस्था केर विध्वंसकारी समीक्षा। 'पड़ाइन' - करुण। पलायन। 'न्याय चाही' - रौद्र+वीर। कहियो प्राप्त नहि। 'कर्ज' (ऋण) - करुण। ऋण-बन्धन।
मार्क्स / अम्बेडकर दलित ग्रामीण मानचित्रण: मार्क्स केर आदिम संचय + अम्बेडकर: सूदखोरी = प्राथमिक दलित शोषण शैली। 'सूदि भरना' + 'कर्ज' = आर्थिक हिंसा केर दू टा चेहरा। 'न्याय चाही' - दलित न्याय केर माँग स्थायी रूपसँ विलम्बित। मंडल केर ४ कथा = समग्र दलित ग्रामीण सामाजिक मानचित्र: आर्थिक + सामाजिक + कानूनी + मनोवैज्ञानिक।
नव्य-न्याय: गंगेशक 'न्याय': एहिठाम न्याय = कानूनी/सामाजिक न्याय। तार्किक दावा: 'ई स्थिति अन्यायपूर्ण अछि' - ई एक ज्ञान-मीमांसीय दृढ़ोक्ति जे प्रमाण माँगैत अछि।
३८. आशीष अनचिन्हार
रचना: काटल कथा।
रस-ध्वनि: अद्भुत + रौद्र। 'काटल कथा' आत्म-कथा। कोनो सेन्सर्ड कहानी केर कहानी लिखनाइ। फूको: सेन्सरशिप = विमर्शमे सत्ता केर हस्तक्षेप। विदेह: सेन्सरशिप- मुक्त स्थान केर महत्व अभिव्यक्त।
३९. विनीत उत्पल
रचना: बेसिक इन्स्टिंक्ट। विदेह अनुवाद विभाग सम्पादक
रस-ध्वनि: शृंगार + अद्भुत। 'बेसिक इन्स्टिंक्ट' - अङ्ग्रेजी शीर्षक मैथिलीमे! हलिउड चलचित्र पुनर्सन्दर्भित। फ्रायड केर 'प्रवृत्ति': मूल प्रवृत्ति = फ्रायडियन 'इद्'। पाश्चात्य चलचित्र + मैथिली साहित्य = सांस्कृतिक संकरता।
४०. कुमार भास्कर
रचना: लछमिनीया । संकलनक अन्तिम रचना
रस-ध्वनि: वात्सल्य + करुण। 'लछमिनीया' देवी केर साधारण महिला नाम। ध्वनि: समृद्धि देवी (लक्ष्मी) आ ओकर नाम पर रखल गरीब महिलाक बीचक अन्तर। लोक-स्त्रीवादी: साधारण महिलाकेँ देवी केर नाम देबाइ = आकांक्षा बनाम वास्तविकता केर अन्तर।
उपसंहार: सदेह ६ क समग्र महत्व
सदेह ६ मैथिली लघुकथा - ४० लेखक (३९ + गजेन्द्र ठाकुर) केर योगदान सँ मैथिली लघुकथाक एक सम्पूर्ण परिदृश्य। विशेष: मीना झाक वर्जित चिकित्सीय विषय; असगर वजाहत (हिन्दी) साम्प्रदायिक हिंसा; वसंत भगवंत सावंत (कोंकणी) अन्तर-भाषिक; विनीत उत्पलक अङ्ग्रेजी शीर्षक; जगदीश प्रसाद मंडलक ४ समग्र दलित ग्रामीण कथा।
चारि ढाँचा केर संश्लेषण: रस सिद्धान्त लघुकथामे विशिष्ट रस। पाश्चात्य सिद्धान्त (फ्रायड, फूको, ग्राम्शी, फानन, बूर्द्यू, स्पिवाक, बाख्तिन, मार्क्स) एक-एक कथाक सामाजिक प्रक्रिया उजागर करैत अछि। नव्य-न्याय कथाक ज्ञान-मीमांसीय दावा सभक परीक्षण करैत अछि। विदेह समानान्तर इतिहास ढाँचा: दलित, महिला, नेपाल, कोंकणी, हिन्दी, पागल, प्रवासी सब एक लोकतान्त्रिक मान्य-परम्परागत स्थान।
-Gajendra Thakur, editor, Videha [be part of Videha www.videha.co.in JOIN VIDEHA WHATSAPP CHANNEL
-गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp/ Arattai no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA
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