गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय
विदेह: सदेह: ९
विदेह सदेह ९
विदेह मैथिली शिशु उत्सव
सम्पूर्ण रचनाकार-समीक्षा
विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क · गंगेशक नव्य न्याय · भारतीय · पाश्चात्य · चीनी · यहूदी (इसरायली) साहित्यिक समीक्षा सिद्धान्त
१. भूमिका — छह समीक्षा-दृष्टिक परिचय
विदेह सदेह ९, मैथिली शिशु-बाल-किशोर साहित्यक एकटा ऐतिहासिक संकलन थिक। श्रुति प्रकाशन, नई दिल्लीसँ २०१२ मे प्रकाशित ई पोथी विदेह पाक्षिक ई-पत्रिकाक अंक ५१–१०० मे प्रकाशित सामग्री सँ संचित अछि। ई पोथीक अध्ययन मात्र एकटा साहित्यिक समीक्षाशास्त्रसँ नै, अपितु छह सम्पूरक समीक्षा-दृष्टिसँ कएल जाएत — (अ) विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क, (आ) गंगेशोपाध्यायक नव्य न्याय, (इ) भारतीय काव्यशास्त्र, (ई) पाश्चात्य साहित्यिक समीक्षा, (उ) चीनी साहित्यिक समीक्षा, (ऊ) यहूदी-इसरायली साहित्यिक व्याख्याशास्त्र।
अ. विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क
गजेन्द्र ठाकुरक विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्कक केन्द्रीय प्रस्थापना अछि जे मिथिलाक साहित्यिक इतिहासक एकमात्र मुख्यधाराक दृष्टिसँ नहि, अपितु समानान्तर एवं प्रतिस्पर्धी दृष्टि बिन्दुसँ देखल जाएत। एहि अनुसार शिशु-बाल साहित्यक मूल्यांकन तखनि सम्भव होएत जखन हम राजकीय, उच्चजातीय, एवं केन्द्रीय आख्यानक पाश्र्वमे स्थापित लोक-कथा, लोक-गीत, एवं सीमान्त समुदायक आवाजक समानान्तर स्थान दी।
आ. गंगेशोपाध्यायक नव्य न्याय
मिथिलाक महाकवि-तार्किक गंगेशोपाध्याय (तेरहम शताब्दी) 'तत्त्वचिन्तामणि' मे प्रमाण-शास्त्रक नवीन व्याख्या देलथि। नव्य न्यायक अनुसार कोनो प्रतिज्ञाक प्रामाणिकताक परीक्षण 'व्याप्ति' (कारण-कार्य सम्बन्ध), 'पक्षता' (विषय-प्रासंगिकता), एवं 'हेतु' (आधार) सँ होइत अछि। बाल साहित्यमे एहि पद्धतिसँ कोनो रचनाक 'सत्यता-दावा', ओकर आन्तरिक तर्क-संगति, एवं पाठक-प्रभावक मूल्यांकन सम्भव अछि।
इ. भारतीय काव्यशास्त्र
भरतमुनिक नाट्यशास्त्रमे वर्णित नवरस-सिद्धान्त, आनन्दवर्धनक ध्वनि-सिद्धान्त, कुन्तकक वक्रोक्ति-जीवित, एवं मम्मटक काव्यप्रकाशक परम्परामे बाल साहित्यक मूल्यांकन सम्भव अछि। विशेषतः शृंगार, वात्सल्य, अद्भुत, एवं शान्त रसक दृष्टिसँ एहि संकलनक रचनाक मूल्यांकन करब अत्यन्त समीचीन अछि।
ई. पाश्चात्य साहित्यिक समीक्षा
टी.एस. इलियटक 'Tradition and the Individual Talent', रोलाँ बार्थक 'Death of the Author', आ मिखाइल बाख्तिनक बहुस्वरता (Polyphony) एवं संवादिता (Dialogism) — एहि त्रय-दृष्टिसँ पाश्चात्य समीक्षाक प्रयोग कएल जाएत। फेमिनिस्ट क्रिटिसिज्म, पोस्टकोलोनियल थ्योरी, एवं न्यू हिस्टोरिसिज्मक दृष्टिकोण सेहो प्रासंगिक अछि।
उ. चीनी साहित्यिक समीक्षा
कन्फ्यूशियसक 'जेंग मिंग' (Zhengming — नामक शुद्धता), दाओवादी चिन्तनक 'वू वेई' (Wu Wei — अकर्म-कर्म), एवं 'यि' (Yi — अर्थ-व्यंजना) — एहि त्रिक दृष्टिसँ चीनी परम्पराक प्रयोग होएत। जुआङझीक भाषा-सिद्धान्त अनुसार कोनो रचनाक परम सत्य भाषाक सीमाक परे अछि।
ऊ. यहूदी-इसरायली साहित्यिक व्याख्याशास्त्र
मिद्राश-परम्पराक पुनर्कथन (Midrash — पाठक पुनर्सृजन), वाल्टर बेंजामिनक 'एलेगरी' एवं 'मेसियैनिक टाइम', ज़ाक देरिदाक 'डिकन्स्ट्रक्शन' (जे यहूदी परम्परासँ गहरोमे जुड़ल अछि), एवं एमानुएल लेवीनासक 'अदरनेस' (Otherness) — एहि परम्पराक दृष्टिसँ बाल साहित्यक नैतिक एवं आध्यात्मिक आयामक मूल्यांकन कएल जाएत।
२. गजेन्द्र ठाकुर — 'शिशु, बाल आ किशोर साहित्य आ ओकर समीक्षाशास्त्र'
सम्पादक गजेन्द्र ठाकुरक ई परिचयात्मक निबन्ध समूचा संकलनक बौद्धिक नींव थिक। लेखक ऋग्वेदक आख्यानसँ लेसकर जातक-कथा, ऐसप, पंचतन्त्र, हितोपदेश, एवं आधुनिक बाल साहित्यक एक वैश्विक इतिहास प्रस्तुत कएलनि अछि।
विदेह समानान्तर इतिहास दृष्टि
लेखक सलहेस-कथाक क्षेत्रीय परिवर्तनक उल्लेख करैत देखबैत छथि जे लोक-नायक सलहेस 'राजा' सँ 'चोर' बनैत अछि, एवं एकर विपरीत। ई समानान्तर इतिहासक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण अछि — एके व्यक्ति विभिन्न सामाजिक दृष्टिसँ भिन्न-भिन्न रूपमे देखाइत अछि। ई बाल साहित्यमे सेहो प्रासंगिक अछि।
नव्य न्यायक दृष्टि
ठाकुर जी बाल साहित्यक मूल्यांकन लेल जे प्रश्न उठबैत छथि — 'की बाल साहित्य अन्धविश्वासक बढ़ावा देइत अछि?', 'की ई जातिवादक विरुद्ध शिक्षित करैत अछि?' — ई प्रश्न नव्य न्यायक 'हेतु' (प्रमाण) परम्पराक अनुरूप अछि। प्रत्येक रचनाक मूल्यांकन एहि प्रश्नक कसौटी पर होएबाक चाही।
भारतीय काव्यशास्त्र दृष्टि
ठाकुरजी ब्रह्माण्डीय परिप्रेक्ष्य देइत लिखैत छथि जे 'यी सूर्य अरब-खरब आन सूर्यमेसँ एकटा मध्यम कोटिक तरेगण-मेडिओकर स्टार अछि।' ई अद्भुत रसक उद्रेक अछि — भरतमुनिक नाट्यशास्त्रमे जाहि 'विस्मय' सँ अद्भुत रस उत्पन्न होइत अछि, ओकर यथार्थ प्रयोग एतय देखाइत अछि।
पाश्चात्य दृष्टि
टी.एस. इलियटक 'Tradition and the Individual Talent' क सन्दर्भ स्वयं ठाकुरजी उद्धृत कएलनि अछि। ओ इलियटक मतक सँदर्भमे श्रीमती श्रीति ठाकुरक रचनाक मूल्यांकन करैत छथि। ई पाश्चात्य एवं मैथिली परम्पराक सम्मिलन थिक।
चीनी दृष्टि
लेखकक 'सरल शब्द, सरल भाषा, सरल विचार' — एहि त्रिसूत्रक सिद्धान्त कन्फ्यूशियसक 'जेंग मिंग' — नाम-शुद्धि एवं 'यि' — यथार्थ अर्थक आग्रहसँ मेल खाइत अछि। दाओवादी 'वू वेई' अनुसार उत्कृष्ट बाल-साहित्य ओ होइत अछि जे कृत्रिमता सँ मुक्त हो।
यहूदी-इसरायली दृष्टि
शंकराचार्यक कमंडलु-कथाक माध्यमसँ ठाकुरजी मिद्राश-परम्पराक उदाहरण प्रस्तुत करैत छथि — एक प्राचीन घटनाक पुनर्व्याख्या नवीन अर्थक सृजन करैत अछि। वाल्टर बेंजामिनक 'मेसियैनिक टाइम' अनुसार बाल-साहित्य भविष्यक पीढ़ीक लेल वर्तमानमे 'मोक्ष-बीज' बुआइत अछि।
३. ज्योति सुनीत चौधरी — ध्वनि-प्रतिध्वनि · अदृश्य बन्धन · नानीक खिस्सा (पाँच कथा)
ज्योतिजी संकलनक सर्वाधिक प्रतिभाशाली रचनाकार छथि। हिनकर रचनाक तीन भाग अछि — (क) ध्वनि-प्रतिध्वनि — एकटा पहाड़ी आख्यानकथा, (ख) अदृश्य बन्धन — एकटा मनोवैज्ञानिक गल्प, (ग) नानीक खिस्सा — भलुनिया मौसी, सिंदूरक पुल, एक राजाक सात मेहरी, पदसाया कुमारि, सुहान बोन — पाँच लोककथा।
विदेह समानान्तर इतिहास दृष्टि
'ध्वनि-प्रतिध्वनि' मे प्रतिध्वनि-चरित्र राजकुमारसँ प्रेम करैत अछि मुदा राजकुमार हुनकर बहिन ध्वनिसँ विवाह करैत अछि। प्रतिध्वनि पहाड़ीसँ कूदि प्राण दैत छथि, एवं हिनकर आत्मा पहाड़ी खाँचिमे भटकैत रहैत अछि। ई 'Echo' पुराण-कथाक मैथिलीकरण थिक — समानान्तर इतिहास अनुसार पाश्चात्य यूनानी मिथक एवं मैथिली लोककथाक बीच मौलिक साम्य अछि।
नव्य न्यायक दृष्टि
'अदृश्य बन्धन' मे माया — एक बाल-मनोवैज्ञानिक — अपन क्षेत्रीय ज्ञान (लोक-ज्ञान) एवं व्यावसायिक ज्ञानक बीच द्वंद्वक सामना करैत छथि। नव्य न्यायक 'व्याप्ति' अनुसार — 'व्यावसायिक सफलता' एवं 'व्यक्तिगत सुख' — एहि दुनूक बीच कारण-कार्य सम्बन्ध सीधा नहि अछि। माया अन्ततः मातृत्वक 'अदृश्य बन्धन' मे बँधि जाइत छथि — ई नव्य न्यायक 'पक्षता' (सर्वाधिक प्रासंगिक प्रमाण) थिक।
भारतीय काव्यशास्त्र
नानीक पाँचों खिस्सामे वात्सल्य रस प्रबल अछि — 'सुहान बोन' मे साधुबाबाक वरदान एवं अन्धी रानीक आँखिक पुनःप्राप्ति — ई करुण रसक चरमोत्कर्ष एवं ततपश्चात् शान्त रसक उत्थान थिक। ध्वनि-सिद्धान्त अनुसार 'सिंदूरक पुल' मे नाग-मणिक ध्वनि अनेक स्तरक अभिव्यंजना करैत अछि।
पाश्चात्य दृष्टि
'एक राजाक सात मेहरी' — एहि कथामे बाख्तिनक बहुस्वरता स्पष्टतः देखाइत अछि। सात रानीक आवाज, बड़कीरानीक षड्यन्त्र, सियारनीक मातृत्व, चिड़ोड़ीक पालन-पोषण — एहि बहुविध आवाजक सम्मिलनसँ एकटा जटिल कथा-संरचना निर्मित होइत अछि। फेमिनिस्ट क्रिटिसिज्म अनुसार छोटकी रानीक उपेक्षा एवं अन्तिम न्याय पितृसत्तात्मक व्यवस्थाक आलोचना थिक।
चीनी दृष्टि
'भलुनिया मौसी' मे दुखनी एवं सुखनीक विपरीत नियति दाओवादी 'वू वेई' — सहज कर्म — एवं लोभ-विनाशक सिद्धान्तक अनुरूप अछि। दाओ दे जिंग (Tao Te Ching) अनुसार जे व्यक्ति स्वाभाविक रूपसँ दूसराक सेवा करैत अछि, ओकरा स्वतः पुरस्कार मिलैत अछि।
यहूदी-इसरायली दृष्टि
'पदसाया कुमारि' मे पानक पाताल-राजकुमारीक रूपान्तरण — ई यहूदी कब्बाला परम्पराक 'एन सोफ' (सीमाहीन ईश्वरीय सत्ता) एवं सृष्टि-खेलक अनुरूप अछि। लेवीनासक 'अदरनेस' अनुसार 'पहुनाइ' राजकुमारी — जे 'पहुना' अर्थात् 'अन्य' अछि — ओ ओकर 'अदरनेस' (परकीयता) क सर्वोच्च प्रतीक अछि।
४. यूटी कुमारी — 'राहुलजी एक नजरिमे' आ 'कैदी'
यूटी कुमारी सहायक शिक्षिका, संस्कृत मधुराम इंटर विद्यालय, वालपाड़ा, मधेपुरा — हिनकर दू रचना संकलनमे संगृहीत अछि।
'राहुलजी एक नजरिमे' — समीक्षा
ई राहुल सांकृत्यायनक जीवनी-लेख अछि। लेखिका राहुलजीक बहुआयामी प्रतिभाक वर्णन करैत छथि — इतिहास, दर्शन, राजनीति, साहित्य सभमे हिनकर योगदान अतुलनीय रहल। पाश्चात्य फेमिनिस्ट दृष्टिसँ — राहुलजीक पत्नी ए.एम. लोलाक साथ साइबेरियामे विवाह — पितृसत्तात्मक बन्धन तोड़बाक एकटा स्त्रीवादी आख्यान सेहो अछि।
'कैदी' — समीक्षा
'कैदी' मे एकटा चित्रकार ईसा मसीहक चित्र लेल बच्चाक खोजमे निकलैत अछि, शैतानक चित्र लेल वर्षों बाद उपयुक्त चेहरा भेटैत अछि — एवं ओ व्यक्ति ओहि अनाथ बच्चे निकलैत अछि। एहि कथाक मूल अर्थ — मानवीय सौन्दर्य एवं अधमता एके आत्मामे सह-अस्तित्व रखैत अछि। यहूदी 'टिक्कुन ओलम' (Tikkun Olam — जगतक मरम्मत) की परम्पराक अनुसार पापी एवं पुण्यात्मा एकटा बच्चाक दुई रूप छथि।
५. भावना नवीन — 'हमर प्रिये नेना भुटका'
एहि भाषण-रूपी लेखमे भावना नवीन बाल-दिवसक अवसर पर बच्चा सभक अपन मातृभाषा मैथिलीसँ दूर होएबाक पीड़ाक सशक्त चित्रण कएलनि अछि।
विदेह समानान्तर इतिहास
लेखिका उर्दूक उदाहरण दैत देखबैत छथि जे उर्दू पढ़ल बच्चा तेजमे पानि माँगैत मरि गेल — मातृभाषाक परित्यागक परिणाम भयावह होइत अछि। ई भाषाई उपनिवेशवादक विरुद्ध प्रतिरोधक आख्यान थिक।
पाश्चात्य एवं पोस्टकोलोनियल दृष्टि
फ्रेन्ट्ज़ फेनोन (Fanon) एवं होमी भाभाक पोस्टकोलोनियल सिद्धान्त अनुसार औपनिवेशिक मानसिकता बच्चामे मातृभाषाक प्रति हीन भावना उत्पन्न करैत अछि। भावना नवीन एहि मनोवैज्ञानिक उपनिवेशवादक विरुद्ध चेतावनी दैत छथि।
६. डॉ. रमण झा — गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा / तरेगन आ मिथिलाक लोकदेवता (समीक्षा)
डॉ. रमण झाक तीन समीक्षा एहि संकलनमे संगृहीत अछि — श्रीति ठाकुरक 'मैथिली चित्रकथा', 'गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा', एवं 'मिथिलाक लोकदेवता' पोथीक विस्तृत समीक्षा; संगहि जगदीश प्रसाद मण्डलक 'तरेगन' संकलनक समीक्षा।
'गोनू झा' चित्रकथाक समीक्षा
गोनू झाक कथाक चित्रात्मक प्रस्तुति बच्चा सभक लेल अत्यन्त उपयुक्त अछि। झाजीक समीक्षा मे टी.एस. इलियटक परम्परा-दृष्टिक उल्लेख उल्लेखनीय अछि। श्रीति ठाकुरक रचनात्मकता एहि अर्थमे अतुलनीय अछि जे एहि शैलीमे पूर्ववर्ती कोनो रचना उपलब्ध नहि छल।
'तरेगन' संग्रहक समीक्षा
जगदीश प्रसाद मण्डलक 'तरेगन' — मैथिलीमे प्रथम सम्पूर्ण विहनि-कथा संग्रह — एहि संकलनमे विस्तृत समीक्षा पाबैत अछि। झाजी ओकरा 'नैतिक शिक्षा-दायक मैथिली पथ-दर्शक पोथी' मानैत छथि।
७. गंगेश गुंजन — 'लाट साहेबक किरानी'
गंगेश गुंजन मैथिली साहित्यक वरिष्ठतम रचनाकारमे सँ एक छथि। 'लाट साहेबक किरानी' एकटा सामाजिक यथार्थवादी कथा थिक जाहिमे एकटा नगरक पुलपर भिखमंगा लोकनिक स्थिति एवं हुनकर मानवीय गरिमाक प्रश्न उठाओल गेल अछि।
विदेह समानान्तर इतिहास
पुलपर बैसल भिखमंगा सभ — टंगटुट्टी बुढ़िया, कोढ़ियाभिखारी, अन्धी स्त्री — एहि सभक आवाज इतिहासक 'समानान्तर धारा' थिक जे मुख्य इतिहासमे लुप्त रहैत अछि। गुंजनजी एहि समानान्तर आवाजक साहित्यिक रूप दैत छथि।
नव्य न्यायक दृष्टि
'लाट साहेबक किरानी' कथाक अन्तिम दृश्यमे — कोढ़ी भिखारी सभ लाट साहेबक किरानीक सुझाव पर 'पिजुआह हाथ' (रोगग्रस्त हाथ) सँ धनी लोकक हाथ छूबैत दौड़ैत छथि। नव्य न्यायक 'व्याप्ति' अनुसार — 'पापक भय' एवं 'दूसराक कष्ट' — एहि दुनूक बीचक सम्बन्ध एहि कथामे प्रमुख तर्क-बिन्दु अछि।
बाख्तिन-दृष्टि
कथाक अन्त — किरानीक ओहि राजधानीसँ विदा होएब — बाख्तिनक 'नॉन-फिनलाइज्ड' (अपूर्ण) चरित्र-शास्त्रक उदाहरण अछि। किरानी एहि अनुभवसँ परिवर्तित होएत अछि, मुदा परिवर्तनक दिशा अनिश्चित रहैत अछि।
लेवीनास-दृष्टि
लेवीनासक अनुसार 'अदर' (परकीय) — जे कोढ़ी, अन्धा, विकलांग अछि — ओकर मुखमण्डल (Face) हमरा नैतिक दायित्वमे आबद्ध करैत अछि। गुंजनजीक कथा एहि नैतिक आह्वानक साहित्यिक प्रतिरूप थिक।
८. शिव कुमार झा 'टिल्लू' — तरेगन देखाइए · दहीक ठोप · खोइंछक लेल साड़ी · नारियर गाछ · मिथिलाक लोकदेवता · तरेगन
'टिल्लू' जीक रचना-संग्रह एहि संकलनमे सर्वाधिक विविध थिक। हिनकर छह रचना बाल मनोविज्ञानक विभिन्न पक्षक मर्मस्पर्शी चित्रण प्रस्तुत करैत अछि।
'तरेगन देखाइए' — मिथिला-परम्परा एवं बाल-नटखटी
१९८७क बाढ़ि-त्रस्त मिथिलामे बच्चा-दल होलिका-दहन लेल खोपड़ी चोरेबाक प्रसंग — ई कथा मैथिली बाल-साहित्यक क्लासिक बनि गेल अछि। गुंजनजी द्वारा उद्धृत 'तरेगन देखाइए' — अर्थात् चकाचौंध देखाओल — एहि पदबन्ध मे संस्कृति, नटखटपन एवं लोक-स्मृतिक अद्भुत सम्मिलन अछि।
'दहीक ठोप' — समूहक दबाव आ बाल-मनोविज्ञान
एहि कथामे बालक-दल एकटा भरिया (दही वाहक) क दही छीनैत अछि। नव्य न्यायक 'पक्षता' — अर्थात् प्रासंगिक तथ्य — एहि अर्थमे उल्लेखनीय अछि जे 'पितृ-मृत्यु भय' (जे बच्चाक दल उत्पन्न करैत अछि) ओ तर्क नहि, भावना-संचालित झूठ अछि। ई बाल-मनोविज्ञानक गहन अन्वेषण थिक।
'खोइंछक लेल साड़ी' — मातृ-प्रेम एवं बालक-साहस
एहि कथाक टिप्पणी दुर्गानन्द मण्डलजी दैत छथि जे कथाक साथकता एवं यथार्थता कथाकारक स्वयंक जीवनानुभवसँ प्राप्त होइत अछि। दाओवादी 'चेंग' — सत्यता — एहि कथाक सबल पक्ष अछि।
'नारियर गाछ' — पर्यावरण चेतना
त्याग बाबूक नारियल-वृक्ष उखाड़बाक प्रसंग — ई पर्यावरणीय चेतनाक मैथिली साहित्यमे एक दुर्लभ उदाहरण थिक।
९. डॉ. शेफालिका वर्मा — विविध गद्य-पद्य
डॉ. शेफालिका वर्माक बहुसंख्यक रचना संकलनमे संगृहीत अछि — 'आनक बड़ाइ', 'साबरमती आश्रम' (यात्रा-वृत्तान्त), 'मूर्ख राजा आ ओकर बेटा', 'देश-प्रेम', 'गोनू झा चित्रकथा समीक्षा', 'बाल दिवस'।
'आनक बड़ाइ' — गुरु-शिष्य संवाद
एहि लघुकथामे गुरु शिष्यक कंजूसी (स्तुति नहि करब) क उपाय बतबैत छथि — दूसराक तारीफ करब स्वयंक उदारता बढ़ाइत अछि। ई कन्फ्यूशियसक 'रेन' (Ren — मानवता-सौन्दर्य) एवं 'यि' (Yi — उचित व्यवहार) क अनुरूप अछि।
'साबरमती आश्रम' — गाँधी-आख्यान
ई यात्रा-वृत्तान्त इतिहास-लेखन एवं व्यक्तिगत स्मृतिक सुन्दर सम्मिश्रण अछि। लेखिका एहि तीर्थ-समान स्थानक अनुभव मैथिली पाठकक समक्ष सजीव कएलनि अछि।
'मूर्ख राजा आ ओकर बेटा' — बाल-साहस एवं परिणाम
राजाक चारि पुत्रक साहसिक यात्रामे तीनक मृत्यु — ई कथा बाल-जिज्ञासाक परिणामक यथार्थ चित्रण थिक। बेंजामिनक 'एलेगरी' अनुसार एहि कथाक प्रत्येक प्रसंग एकटा नैतिक अर्थक प्रतीक थिक।
'देश-प्रेम' — जापानी सैनिकक बलिदान
एहि कथामे जापानी सैनिक खाई भरबाक हेतु एक-एक कूदि जाइत छथि। ई एकटा विवादास्पद कथा थिक — एकटा पाश्चात्य दृष्टिसँ ई देश-भक्तिक चरम अभिव्यक्ति थिक, मुदा मानवाधिकारक दृष्टिसँ सैनिकक बलिदान का महिमामण्डन प्रश्नवाचक अछि।
१०. काश्यप कमल (पवनकान्त झा) — 'बाबूक सुनाएल खिस्सा'
काश्यप कमल अपन पिताक सुनाएल छह कथा मैथिली पाठकक समक्ष प्रस्तुत कएलनि अछि — सहस्रमुखक दीप, गप्पक अर्थ, जहियासँ काल धेलक, नीक करी तँ पैघ के?, पढ़बे टा नै करी ओकरा गुनबो करी, अकिलक मोल।
'सहस्रमुखक दीप' — श्रम-सम्मान
मजदूरक 'सहस्रमुखक दीप' — पुआरक जलोत एकटा श्रमिक-गरिमाक अत्यन्त सुन्दर रूपक थिक। मार्क्सवादी दृष्टिसँ — श्रमक सम्मान एवं राजदरबारक औपनिवेशिक दृष्टि — एहि दुनूक बीच एकटा वर्ग-संघर्ष अन्तर्निहित अछि।
'गप्पक अर्थ' — संगीत एवं नीति
नटुआक गीत राजकुमार एवं राजकुमारीक हत्या एवं पलायनक संकल्पक उचित दिशा देइत अछि। ई भारतीय ध्वनि-सिद्धान्तक उत्कृष्ट उदाहरण थिक — गीतक शब्दार्थसँ परे ध्वन्यर्थ अत्यन्त गहन अछि।
'अकिलक मोल' — बुद्धिमत्ता बनाम अनुभव
बृद्ध मन्त्री एवं युवा मन्त्रीक बीच नागिनक बच्चाक परीक्षण — ई नव्य न्यायक 'पूर्ण ज्ञान' (Paksha + Hetu + Vyapti) क सिद्धान्तक व्यावहारिक उदाहरण थिक। बृद्ध मन्त्री एकहि बेरमे सम्पूर्ण सूचना लाबैत छथि — ई 'आवश्यक तथ्य' एकत्रण थिक।
११. दुर्गानन्द मण्डल — पारस · राखी · स्वतन्त्रता दिवस
दुर्गानन्द मण्डलजीक तीन रचना — 'पारस' (सामाजिक यथार्थवाद), 'राखी' (भाई-बहन सम्बन्ध), 'स्वतन्त्रता दिवस' (राजनीतिक व्यंग्य) — एहि संकलनमे संगृहीत अछि।
'पारस' — चाहवाला शिक्षक
पारस — चाह बेचैत-बेचैत बी.ए., एम.ए. करैत, अन्ततः शिक्षक बनैत अछि — ई 'पारस-मणि' (छूलापर सोना बना देबाक गुण) रूपकक मैथिली साहित्यमे अत्यन्त सुन्दर अनुप्रयोग थिक। कन्फ्यूशियसक 'जुन्जी' (Junzi — आदर्श व्यक्ति) एहि चरित्रमे सजीव होइत अछि।
'राखी' — राखीक वास्तविक अर्थ
लेखक राखीक वास्तविक अर्थ — आत्मिक रक्षासूत्र — पर बल दैत छथि। मिद्राश-परम्पराक पुनर्व्याख्याक अनुसार राखी-परम्पराक मूल आध्यात्मिक अर्थकें नवीन सन्दर्भमे प्रासंगिक बनाओल जाइत अछि।
'स्वतन्त्रता दिवस' — राजनीतिक व्यंग्य
ई रचना सर्वाधिक तीक्ष्ण व्यंग्य थिक — 'झूठा लोकक झूठा भाषण' एवं 'स्वतन्त्रताक वास्तविक अर्थ' — एहि दुनूक बीच विरोधाभास। बेंजामिनक 'मेसियैनिक टाइम' अनुसार — वास्तविक स्वतन्त्रता अखनो भविष्यमे प्रतीक्षारत अछि।
१२. वृषेश चन्द्र लाल — 'गोलबा' आ 'एकदन्त हाथी आ नौलखा हार'
वृषेश चन्द्र लालजीक दू रचना संकलनमे सर्वोत्कृष्ट श्रेणीमे आबैत अछि।
'गोलबा' — मानव-पशु सम्बन्धक गहन आख्यान
एहि कथामे गोलबा — एकटा नवजात बछड़ा — 'बड़कीमाई' (घरक मालकिन) के अपन माँ मानैत अछि। पूरा कथा बछड़ाक दृष्टिकोणसँ कहल गेल अछि, ओकर पाल-पोसाइ, हर्ष, एवं अन्तमे बलिदान — ई मैथिली बाल-साहित्यक एक महाकाव्यिक रचना थिक। कन्फ्यूशियसक 'रेन' — प्राणीमात्रक प्रति करुणा — एहि रचनामे परम रूपमे व्यक्त अछि।
'एकदन्त हाथी आ नौलखा हार' — राजकुमारी इन्द्रकुमारीक साहस
गोरखा राजकुमार पृथ्वीनारायण शाहक विवाह-प्रस्ताव एवं राजकुमारी इन्द्रकुमारीक साहसिक प्रतिरोध — ई ऐतिहासिक कथा मैथिली स्त्री-शक्तिक अत्यन्त प्रेरणादायक चित्रण थिक। 'नारी वस्तु नहि — सृष्टिक बीज अछि' — ई पंक्ति फेमिनिस्ट क्रिटिसिज्मक स्वर थिक।
१३. जगदानन्द झा 'मनु' — 'चोन्हा' (बाल उपन्यास)
'चोन्हा' मैथिलीक उत्कृष्ट बाल-उपन्यासमे से एक अछि। संजय नामक नेत्र-दुर्बल बालकक जीवन-संघर्ष एहि उपन्यासक केन्द्रमे अछि।
विदेह समानान्तर इतिहास
दिल्लीक झुग्गी-बस्तीमे रहनिहार मैथिल प्रवासी परिवारक जीवन — ई विदेह समानान्तर इतिहासमे 'विस्थापित मैथिली समाजक आख्यान' थिक जे मुख्यधारा इतिहासमे स्थान नहि पाबैत अछि।
नव्य न्यायक दृष्टि
संजयक माता-पिता हुनकर नेत्र-दुर्बलताक कारण खोजबाक बदले 'बहाना करैत अछि' — ई 'अज्ञान' (Non-cognition) क नव्य न्यायीय श्रेणी थिक। ज्ञानक अनुपस्थिति एहि परिवारमे उपचारक अनुपस्थितिक कारण बनैत अछि।
भारतीय मनोविज्ञान
करुण रस एहि उपन्यासक प्रबल आधार थिक। संजयक पीड़ा 'चोन्हा' (टेढ़-आँखि) उपनाम — ई करुणाक उत्तम काव्यात्मक प्रयोग थिक।
यहूदी दृष्टि
'टिक्कुन ओलम' — जगत-सुधारक कार्य — संजयक स्वयं रोटरी क्लब आँखि-अस्पताल खोजब, तिफिनक पैसा बचेनाइ — ई 'मेसियैनिक' स्वयं-उद्धारक कथा थिक।
१४. जगदीश प्रसाद मण्डल — 'बुढ़िया दादी' आ 'मान' (कथा) आ 'तरेगन' (संग्रह)
जगदीश प्रसाद मण्डल मैथिली बाल-साहित्यक ओ स्तम्भ छथि जिनकर 'तरेगन' संग्रह डॉ. रमण झाजी 'मैथिली बाल-साहित्यक पथ-दर्शक' मानैत छथि।
'बुढ़िया दादी' एवं 'मान' — ग्राम-जीवनक यथार्थ
ग्रामीण दादी-नाती सम्बन्धमे लोक-संस्कृतिक सुन्दर अभिव्यंजना। चीनी कन्फ्यूशियन 'ज़ियाओ' (Xiao — पितृभक्ति/माता-पिता-वरिष्ठ-सम्मान) एहि कथाक मूल मूल्य थिक।
'तरेगन' संग्रहक विस्तृत समीक्षा
'तरेगन' — सम्पूर्ण पोथीक अवलोकन कएलापर एकरा मात्र बाल-कथा-संग्रह नहि मानल जा सकैछ। दर्शनक सभ विधाक सरल भाषामे चित्रण कएल गेल अछि। 'उद्धारा' कथामे महाभारतसँ कालजयी प्रतीकक निकालब 'हंस' आचार्यक कार्य थिक।
१५. अनिल मल्लिक — 'दादीक गीत'
अनिल मल्लिक एकटा अत्यन्त भावुक एवं सांस्कृतिक रूपसँ महत्त्वपूर्ण रचना प्रस्तुत कएलनि अछि — हिनकर दादी प्रत्येक भोर एकटा विशेष लोकगीत गाबैत छलीह जे पूरे गाँवक जागबेलाक घड़ी बनि गेल रहए। दादीक देहान्त पश्चात् ओ गीत हुनकर हस्तलिखित रूपमे मात्र शब्द बनि रहि गेल।
यहूदी मिद्राश दृष्टि
दादीक गीत — 'उठू हे फूलकुमैर रानी, झाड़ि दिअ अँगना' — ई एकटा 'सैक्रेड टेक्स्ट' (पवित्र पाठ) थिक जेकर मिद्राश-व्याख्या हर पीढ़ी नए अर्थ निकालैत अछि। 'रिह गेल एकटा अन्तहीन प्रतीक्षा — की दादी फेर औतीह?' — ई बेंजामिनक 'मेसियैनिक प्रतीक्षा' थिक।
१६. डॉ. शशिधर कुमार 'विदेह' — दक्षिणी ध्रुव पर मनुष्यक पएरक सए वर्ष · उड़िने सकी पर चिड़ै छी हम · अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस · चन्दा मामा
डॉ. शशिधर कुमार 'विदेह' एहि संकलनमे सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं भाषाई चेतनायुक्त रचना प्रस्तुत कएलनि अछि।
'दक्षिणी ध्रुव पर मनुष्यक पएरक सए वर्ष' — विज्ञान-कथा
अन्टार्कटिका अभियानक विज्ञान-आख्यान मैथिली बाल-साहित्यमे अत्यन्त दुर्लभ थिक। ई विज्ञान-बोध एवं साहित्यिक प्रस्तुतिक सफल सम्मिश्रण थिक।
भाषाई चेतना
'अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' — ई कविता-लेख मातृभाषा-संरक्षणक आग्रह थिक। पोस्टकोलोनियल दृष्टिसँ — मातृभाषाक सम्मान एवं भाषाई आत्म-सम्मान — एकटा वैश्विक चुनौती थिक।
१७. बिपिन कुमार झा — 'ऐ चराचर जगतमे मनुष्य के?' आ 'सुखक मृगमरीचिका'
'ऐ चराचर जगतमे मनुष्य के?'
एहि दार्शनिक बाल-कथामे ब्रह्माजी पशु-सभाक समक्ष मनुष्यक श्रेष्ठताक कारण — 'परिवर्तनशीलता' — बतबैत छथि। गजेन्द्र ठाकुरक परम्परामे ई कथा नव्य न्यायक 'व्याप्ति' — कारण-कार्य — क उत्कृष्ट बाल-उपयोग थिक।
'सुखक मृगमरीचिका' — देवदत्त बसुक संस्कृत कथाक मैथिली अनुवाद
संस्कृतसँ मैथिली अनुवाद बिपिन कुमार झाजी कएलनि अछि। नीमक कड़वाहटक प्रतीक — 'संसारो अही नीमक गाछ जकाँ अछि' — एहि उपदेशमे भारतीय काव्यशास्त्रक 'उपदेश-काव्य' परम्पराक सुन्दर अनुसरण अछि।
१८. नवीन ठाकुर — 'चन्दा मामा आ चन्द्रमा'
एहि संकलनक सर्वाधिक दार्शनिक लेख। 'चन्दा मामा' — बाल-काव्यक भावनात्मक उपनाम — एवं 'चन्द्रमा' — वैज्ञानिक यथार्थ — एहि दुनूक बीच तनावमे लेखक 'सामंजस्य' खोजैत छथि।
दाओवादी दृष्टि
लेखकक निष्कर्ष — 'चन्दा मामा रहिथ आकि चन्द्रमा, की फरक पड़ैत छै, छिऐ तँ एकैगो' — ई दाओवादी 'एकत्व' (One-ness) क स्वीकृति थिक। जुआङझी कहैत छलाह — सत्य एवं भ्रम दुनू 'एके ताओ' केर अंश छथि।
१९. गजेन्द्र ठाकुर — 'तरहरिमे परीलोक'
सम्पादक-रचनाकारक रूपमे ठाकुरजीक एहि कथाक शीर्षक 'तरहरिमे परीलोक' — लोक-कथाक 'परीलोक' (Fairy World) एवं तरहरि (सब्जी-जड़ी) — दुनूक सम्मिश्रण अत्यन्त रोचक रूपक थिक।
विदेह समानान्तर इतिहास
'तरहरि' — एकटा साधारण शब्द — एवं 'परीलोक' — एकटा अलौकिक अवधारणा — एहि दुनूक संयोजन विदेह फ्रेमवर्कक 'साधारण एवं असाधारणक समानान्तरता' क प्रतीक थिक।
२०. डॉ. अभयधारी सिंह — 'अभिनव वर्ष'
ई लेख ग्रेगोरियन कैलेण्डरक इतिहास एवं भारतीय विक्रमी संवतक श्रेष्ठताक तर्कसंगत प्रस्तुति थिक।
नव्य न्यायक दृष्टि
लेखक ग्रेगोरियन, यहूदी, चीनी, मिस्री, पारसी एवं भारतीय कालगणनाक तुलनात्मक विश्लेषण करैत नव्य न्यायक 'तुलनात्मक प्रमाण' प्रस्तुत करैत छथि। भारतीय कालगणना सर्वाचीनतम होएबाक ऐतिहासिक तर्क अत्यन्त सुदृढ़ अछि।
२१. बाल-काव्य: पंकज कुमार झा, रमाकान्त राय रमा, महाकान्त ठाकुर, डॉ. जया वर्मा एवं अन्य
एहि संकलनमे ३०+ कविता एवं गीत संगृहीत अछि। सभक संक्षिप्त समीक्षा:
पंकज कुमार झा — 'माए गइ माए'
माँक विरह-गीत — करुण रसक उत्कृष्ट अभिव्यंजना। 'माए गइ माए' — तीन शब्दमे समस्त वात्सल्यक व्यंजना थिक।
रमाकान्त राय रमा — 'उल्लूक शिकारी'
उल्लूकें शिकारी बनाएब — एहि विलोमार्थक रूपकमे बाल-हास्य एवं व्यंग्यक सुन्दर सम्मिश्रण।
महाकान्त ठाकुर — 'स्नेहक सरगम', 'खगता भगतसिंहक', 'अपन भूमि'
देश-भक्ति एवं प्रकृति-प्रेमक भाव प्रभावशाली शैलीमे। 'ज्ञान-दीप' — ज्ञानक महिमागान।
डॉ. जया वर्मा — 'बेटी'
'बेटी' कविता — स्त्री-शक्तिक ओजपूर्ण उद्घोष। फेमिनिस्ट क्रिटिसिज्म अनुसार ई मैथिलीमे स्त्री-चेतनाक महत्त्वपूर्ण रचना थिक।
चन्द्रशेखर कामित — 'भात छै नाम-नाम'
गजेन्द्र ठाकुरक अनुसार काव्यात्मक प्रवाहमे कामितजी सभसँ आगाँ छथि। ई निर्णय सुपुष्ट प्रतीत होइत अछि।
शान्तिलक्ष्मी चौधरी — बाल गज़ल, कुहर, बरखा रानी
गज़ल-विधाक मैथिलीमे सफल प्रयोग। 'कुहर' एवं 'बरखा रानी' प्रकृति-काव्यमे उत्कृष्ट रचना।
मुक्ती कामत — 'जड़ैत ज्योत'
'नै खेबै तरकारी, रोटी / हमरा नूने रोटी खाए दे... माए गे, हमरा तूँ पढ़ैं लेल जाए दे' — ई बाल-जिज्ञासाक उत्कृष्ट काव्य-अभिव्यंजना थिक।
शंभूनाथ झा — 'न्यूटनक सिद्धान्त'
विज्ञान-काव्यक मैथिलीमे अत्यन्त दुर्लभ प्रयोग। न्यूटनक गुरुत्वाकर्षण मैथिली बाल-काव्यमे — ई अद्भुत रचनात्मकता थिक।
स्वे आलम गौहर — 'नेना भुटकाक लेल एकटा सुन्दर कविता'
एहि मुस्लिम लेखकक कविता संकलनमे मैथिलीक धर्म-निरपेक्ष स्वरूपक प्रमाण थिक।
२२. चित्रकला — तुनीशा प्रियम · गुंजन कर्ण · ज्योति सुनीत चौधरी · गणेश ठाकुर · अनुपमा प्रियदर्शिनी · श्वेता झा चौधरी · श्वेता झा (सिंगापुर) · प्रवीण कुमार ठाकुर · कैलाश कुमार कामत · मोना पाण्डेय · इरा मल्लिक
संकलनमे ११ चित्रकारक रचना संगृहीत अछि। श्वेता झा चौधरीक मिथिला चित्रकला सर्वश्रेष्ठ श्रेणीमे आबैत अछि। ज्योति सुनीत चौधरीक छह चित्र — जे हुनका स्वयं बनाओल — एहि संकलनक आत्मा थिक।
चीनी सौन्दर्यशास्त्रक दृष्टि
मिथिला-चित्रकलामे चीनी 'यि' (Yi — अर्थ-व्यंजना) एवं 'जिंग' (Jing — शान्त-सौन्दर्य) — दुनूक अनुरूप परम्पराक मौलिक चित्रण अछि। रेखाक सरलता एवं रंगक जीवन्तता मिथिला-कलाक मूल गुण थिक।
२३. मुक्ताजी, अचना कुमर, शबनम श्री — संक्षिप्त समीक्षा
मुक्ताजी — 'पथ दर्शन'
एकटा विद्यालय-सांस्कृतिक कार्यक्रममे बच्चाद्वारा हिन्दी फिल्मी गीत 'आवारा हूँ' गेनाइ देखि लेखकक विचलन — ई मैथिली सांस्कृतिक पहचानक संकटक यथार्थ आख्यान थिक।
अचना कुमर — 'विज्ञान' (दादीसँ सुनल कथाक पुनर्लेखन)
एकटा विद्वान ब्राह्मणक 'आसनम् भु: चालयन्' (बैसबासँ पूर्व बिछौन झाड़ू) श्लोक जीवन-रक्षा करैत अछि — ई लोक-ज्ञान एवं संस्कृत-शास्त्रक सम्मिलन थिक।
शबनम श्री — 'कम्प्यूटरक खेल'
कम्प्यूटर शिक्षाक बाल-सुलभ परिचय — अत्यन्त सरल एवं प्रभावशाली लेखन। कन्फ्यूशियसक 'शिक्षाक लोकतन्त्रीकरण' — ई रचना ओहि आदर्शक प्रतिनिधि थिक।
२४. अनमोल झा, विनीत उत्पल, डॉ. अभयधारी — बाल-लेख
अनमोल झा — 'भांडाफोर'
एहि लघुकथामे बूढ़ दादा जे आगन्तुकक परिचय माँगैत छथि — एहि प्रसंगमे एकटा टुकड़ा-टुकड़ा दोकानदार पर्दाफाश भेल। नव्य न्यायक 'परिज्ञान' (ज्ञान-प्राप्ति) एकटा विनोदी प्रसंगमे सम्पन्न होइत अछि।
अनमोल झा — 'अपन गाम', 'मामा गाम'
ग्राम-जीवनक पुनर्स्मरण — विस्थापित मैथिल युवाक अनुभव। दाओवादी 'घर' (Homeland) एहि कविताक केन्द्र-बिन्दु थिक।
विनीत उत्पल — 'कतए गेल फिल्मक बाल-कलाकार'
हिन्दी सिनेमाक इतिहास — 'जागृति', 'बूट पालिश', 'तारे जमीन पर' आदि — मैथिली पाठकक समक्ष। ई मनोरंजन-शिक्षाक माध्यमसँ बाल-विश्वक रोचक खोज थिक।
२५. अन्य कवि-लेखक लोकनि
नवीन कुमार 'आशा', राजदेव मण्डल, चन्दन कुमार झा, मनोज कुमार मण्डल, प्रभात राय भद्र, मिथिलेश कुमार झा, अमित मिश्र, आशुतोष मिश्र, देव शुभवंश — एहि सभक रचना संकलनमे एकटा सुगठित बाल-काव्यक परम्परा निर्मित करैत अछि।
राजदेव मण्डल — 'मुनियाँक चिन्ता' आ 'कथीक गाछ'
ग्रामीण बाल-जीवनक यथार्थ एवं पर्यावरण-चेतना — दुनू एहि रचनामे समाहित।
मनोज कुमार मण्डल — 'खेल'
बाल-खेल एवं उत्साहक सुन्दर काव्यात्मक चित्रण।
देव शुभवंश — 'गतिक रहस्य'
विज्ञान-काव्यक एकटा आओर उत्कृष्ट उदाहरण।
२६. समग्र समीक्षा — छह दृष्टिसँ संकलनक मूल्यांकन
अ. विदेह समानान्तर इतिहास — समग्र दृष्टि
एहि संकलन मैथिली बाल-साहित्यक इतिहासमे कएक समानान्तर आख्यान एकत्रित करैत अछि — लोककथा (ज्योतिजी), भिखारी-आख्यान (गंगेश गुंजन), विस्थापित मैथिल (मनुजी), नारी-प्रतिरोध (वृषेशजी), एवं दलित-वंचित समुदायक अप्रत्यक्ष स्वर। सम्पादकीय दृष्टिकोण समावेशी एवं प्रगतिशील थिक।
आ. गंगेशक नव्य न्याय — समग्र दृष्टि
संकलनक रचना सभमे 'ज्ञान', 'अज्ञान', एवं 'तर्क' — एहि तीनू प्रकारक उपयोग भिन्न-भिन्न रूपमे देखाइत अछि। 'अकिलक मोल', 'ऐ चराचर जगतमे', 'सुखक मृगमरीचिका' — एहि तीनू रचनामे नव्य न्यायक प्रत्यक्ष प्रयोग अछि। एहि संकलनक 'अभिनव वर्ष' — कालगणनाक तार्किक तुलना — नव्य न्यायक तुलनात्मक प्रमाण-पद्धतिक उत्कृष्ट अनुप्रयोग थिक।
इ. भारतीय काव्यशास्त्र — समग्र दृष्टि
नौ रसमे सर्वाधिक प्रयुक्त — वात्सल्य (नानीक खिस्सा, गोलबा, चोन्हा), करुण (दादीक गीत, पारस, माए गइ माए), अद्भुत (विज्ञान-काव्य, तरहरिमे परीलोक), एवं वीर (एकदन्त हाथी, स्वतन्त्रता दिवस) रस। ध्वनि-सिद्धान्त अनुसार अनेक रचनाक अर्थ-व्यंजना बहुस्तरीय अछि।
ई. पाश्चात्य साहित्यिक समीक्षा — समग्र दृष्टि
टी.एस. इलियटक 'परम्परा-व्यक्तित्व' द्वंद्व — लोककथा-परम्परा एवं व्यक्तिगत रचनात्मकताक सम्मिश्रण — संकलनमे सर्वत्र दृश्यमान अछि। बाख्तिनक बहुस्वरता 'लाट साहेबक किरानी' एवं 'एक राजाक सात मेहरी' मे स्पष्ट अछि। फेमिनिस्ट क्रिटिसिज्म 'बेटी', 'एकदन्त हाथी', एवं 'अदृश्य बन्धन' मे प्रासंगिक अछि।
उ. चीनी साहित्यिक समीक्षा — समग्र दृष्टि
कन्फ्यूशियनवादी 'जुन्जी' (आदर्श व्यक्ति) — पारस, टिल्लूजी, मण्डलजी — एहि सभक नायक। दाओवादी 'वू वेई' — सहज कर्म एवं लोभ-त्याग — सम्पूर्ण लोककथा-परम्परामे। जुआङझीक भाषाई सीमाक दर्शन — 'चोनहा' उपन्यासमे एवं 'अदृश्य बन्धन' मे स्पष्ट।
ऊ. यहूदी-इसरायली साहित्यिक दृष्टि — समग्र दृष्टि
मिद्राश-पुनर्कथन — नानीक खिस्सा, दादीक गीत, 'विज्ञान' कथा — लोककथाक पुनर्सृजन। बेंजामिनक 'मेसियैनिक टाइम' — 'स्वतन्त्रता दिवस', 'राखी', 'अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' — एहि सभमे भविष्यक मुक्तिक प्रतीक्षा। लेवीनासक 'अदरनेस' — 'लाट साहेबक किरानी', 'चोन्हा', 'गोलबा' — हाशिये पर रहनिहारक प्रति नैतिक दायित्व।
२७. निष्कर्ष
विदेह सदेह ९ — विदेह मैथिली शिशु उत्सव — मैथिली बाल-साहित्यक इतिहासमे एकटा दुर्लभ संकलन थिक। एकर वैशिष्ट्य बहुआयामी अछि:
(क) वैविध्य — कथा, कविता, निबन्ध, जीवनी, चित्रकथा, यात्रा-वृत्तान्त, उपन्यास, विहनि-कथा — सभ विधा एकत्रित।
(ख) भाषाई उत्कृष्टता — सरल, खाँटी मैथिलीक प्रयोग जाहिमे संयुक्ताक्षर एवं ङ-ञक उचित व्यवहार।
(ग) सांस्कृतिक संरक्षण — मिथिलाक लोककथा, लोकगीत, लोकदेवता एवं पर्व-त्योहारक जीवन्त दस्तावेजीकरण।
(घ) सामाजिक चेतना — जातिवाद-विरोध, नारी-सशक्तीकरण, भाषाई आत्मसम्मान, पर्यावरण-बोध।
(ङ) अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टि — विज्ञान, इतिहास, राजनीति, दर्शन — सभमे वैश्विक दृष्टिकोणक समावेश।
छह समीक्षा-दृष्टिसँ एहि संकलनक अध्ययन सिद्ध करैत अछि जे मैथिली बाल-साहित्य केवल 'क्षेत्रीय' नहि — ओ सार्वभौमिक मानवीय मूल्यक वाहक थिक। विदेह समानान्तर इतिहास फ्रेमवर्क एहि रचनाक 'अनकहल' आवाजक प्रति सचेत अछि। गंगेशक नव्य न्याय एहि रचनाक तर्क-संगति परखैत अछि। भारतीय रस-सिद्धान्त एहि रचनाक सौन्दर्यात्मक उत्कर्ष मापैत अछि। पाश्चात्य समीक्षा एकर संरचनात्मक एवं विचारधारात्मक जटिलता उद्घाटित करैत अछि। चीनी परम्परा एकर सहज-ज्ञान एवं नैतिक दर्शनक मूल्यांकन करैत अछि। एवं यहूदी-इसरायली परम्परा एकर पुनर्व्याख्याक असीमित सम्भावना देखबैत अछि।
अन्तमे — 'गोलबा' क अन्तिम यात्रा, 'चोन्हा' क आँखिक उजास, 'दादीक गीत' क स्मृति, 'लाट साहेबक किरानीक' नैतिक क्रान्ति, 'एकदन्त हाथी' क राजकुमारीक साहस — ई सभ मिलि कए एकटा 'विदेह मैथिली शिशु उत्सव' रचैत अछि जे भविष्यमे मैथिली बाल-साहित्यक आधारशिला रहत।
— समाप्त —
सन्दर्भ-सूची
१. गजेन्द्र ठाकुर (सम्पा.) — विदेह मैथिली शिशु उत्सव (विदेह सदेह ९), श्रुति प्रकाशन, नई दिल्ली, २०१२।
२. गंगेशोपाध्याय — तत्त्वचिन्तामणि (तेरहम शताब्दी), सम्पा. कामेश्वर नाथ मिश्र।
३. भरतमुनि — नाट्यशास्त्र, चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान।
४. आनन्दवर्धन — ध्वन्यालोक, सम्पा. के. कृष्णमूर्ति।
५. T.S. Eliot — 'Tradition and the Individual Talent', 1919.
६. Mikhail Bakhtin — The Dialogic Imagination, University of Texas Press.
७. Walter Benjamin — Illuminations, Schocken Books.
८. Emmanuel Levinas — Totality and Infinity, Duquesne University Press.
९. Lao Tzu — Tao Te Ching, D.C. Lau (trans.), Penguin Classics.
१०. Zhuangzi — The Complete Works, Burton Watson (trans.), Columbia University Press.
-Gajendra Thakur, editor, Videha [be part of Videha www.videha.co.in JOIN VIDEHA WHATSAPP CHANNEL
-गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp/ Arattai no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।