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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक संपादकीय संदेश

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(c)२००४-१४.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन।

 

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संपादकीय

सगर राति दीप जरयक इतिहास- कथाक कथा

सगर राति दीप जरयक इतिहास जे रमानन्द झा रमण द्वारा परसल जा रहल अछि, ओइमे एकर प्रारम्भ केना भेलसँ लऽ कऽ अखन धरिक इतिहास मे बहुत रास विसंगति अछि। एकर प्रारम्भ केना भेलसँ लऽ कऽ अखन धरिक इतिहासमे बहुत गोटेक योगदान बढ़ा कऽ, बहुत गोटेक घटा कऽ,  बहुत गोटेक परिवर्तित कऽ कऽ प्रस्तुत कएल गेल तँ बहुत गोटे निपत्ता कऽ देल गेला। कहल गेल जे ई स्वायत्त संस्था अछि मुदा चेतना समितिक दिससँ रमण आ अजित आजाद सम्मिलित होइत रहला आ जतऽ  कियो माला नै उठेलक ओतऽ ई लोकनि चेतना समिति दिससँ माला उठेलन्हि आ संयोजकमे चेतना समितिक नाम नै आन नाम इतिहास बनबै लेल देल गेल। चेतना समिति (गौरीनाथक सूचनाक अनुसार) जखन गौरीनाथ, अग्निपुष्प आ प्रदीप बिहारी पर लिखित प्रतिबन्ध लगेलक तकरा बाद बिहारी द्वारा लिखित माफी ऐ मैरेज हॅाल ( चेतना समिति) सँ मांगल गेल, फेर हुनका रचना लेल नै, वरन ऐ कृत्य लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार देल गेल आ ओ सेहो ऐ मैरेज हॅालक प्रतिनिधि भऽ गेला। ई मैरेज हॉल साहित्य अकादेमीसँ मान्यताप्राप्त संस्था अछि! फेर ई तिकड़ी श्याम दरिहरे- प्रदीप बिहारी आ रमानन्द झा रमण- संग मिलि कऽ सगर रातिमे की सभ केलक से रमणक जातिवादी इतिहासमे नै भेटत।

की छल ओइ सगर रातिक रजिस्टरमे जकरा रमण कहि रहल छथि जे विभारानी हेरा देलन्हि। की ई रजिस्टर हेरा गेल बा हेरा जाइ देल गेल। मुदा किछु गप जे नै रमणकेँ बुझल छन्हि ने विभा रानीकेँ से अछि जे आरती कुमारी अपन मृत्युसँ २-३ दिन पहिने ओकर फोटो स्टेट उमेश मण्डलकेँ पठा देलखिन्ह। ओ चाहितथि तँ कोने झारे झाकेँ सेहो पठा सकैत रहथि,  मुदा हुनका झारेझा सभपर विश्वास नै छलन्हि, किए नै छलन्हि? कहल गेल छै जे शोनित अपन निशान छोड़िते अछि।

दरभंगा बला गोष्ठी , जे ३१ मइ २०१४ केँ दरिहरे- रमण- बिहारी द्वारा साहित्य अकादेमी आ ओकरा द्वारा मान्यता प्राप्त फर्जी मैथिली संस्था सभक संग रमण-दरिहरे-बिहारी सन-सन जातिवादी ब्राहमणवादी-कायस्थवादी तथाकथित साहित्यकार सभ द्वारा प्रायोजित रहत,  आ अो एे तरहक (दिल्लीक बाद) दोसर गोष्ठी रहत जकरा रमण-दरिहरे-बिहारी ८३म गोष्ठी सेहो कहता। अोतऽ "राडक़ सुख बलाय" आदि कथाक वाचन हएत। मेहथ बला गोष्ठी मे रमण-दरिहरे-बिहारी सन जातिवादी ब्राहमणवादी-कायस्थवादी प्रतिबन्धित छथि।

कहल जाइ छै जे सगर राति दीप जरय नव कथाकारक लेल ट्रेनिंग सदृश अछि। नव कथाकार कलमाएल जाइ छथि! मुदा सत्य की अछि? की एकर प्रवृत्ति साहित्य अकादेमीसँ भिन्न अछि? की ऐपर कब्जा लेल साहित्ये अकादमी सन छल प्रपंच नै होइ छल!

आ ७९म सगर रातिक हीरन्द्र झा आदि द्वारा बहिष्कार आ रमणक ओतै जातिवादी उद्घोष उमेश पासवानक नै, मैथिलीक विरोध छल, कब्जाक राजनीतिक प्रारम्भ ७९म सगर रातिसँ पहिनहियो छल। ७४म सगर राति -हज़ारीबागमे प्रदीप बिहारी माला उठेबाक प्रस्ताव केलन्हि आ से छल मात्र दोसराक प्रस्ताव खसेबा लेल। अपन ग्रुपक क़ब्जा लेल मात्र ई प्रस्ताव छल। ओ अपन प्रस्ताव अपन ग्रुपक पक्षमे आपिस लऽ लेलन्हि। ओ ई नाटक ७५म सगर रातिमे सेहो केलन्हि। तँ की ऐ ब्लैकमेलिंगक धंधामे हुनकर उपयोग कएल जा रहल छन्हि आकि ओ ऐ ब्लैकमेलिंगक धंधाक मुख्य कलाकार छथि? हुनकर रचनामे जान नै छन्हि मुदा घृणित राजनीतिमे जान छन्हि। आ साहित्य अकादेमी पुरस्कार एहने गुणपर देल जाइ छै, से चेतना समितिसँ माफी मांगि पएर पकड़ि ओ निर्लज्जतापूर्वक लेलन्हि। से ओ ऐ ब्लैकमेलिंग धंधाक मुख्य कलाकार छथि जकरा बुझल छै जे नीक रचना लिखबापर ध्यान देनाइ मूर्खता छै, ओइसँ प्राइज नै भेटै छै, साहित्य अकादेमी लेल जोड़-तोड़ चाही आ ओइमे ओ मास्टर छथि, मैथिली गेल तेलहण्डामे।

आ ऐ परिस्थिति मे नव कथाकारक ट्रेनिंग नै भेलै, जतेक लोक सगर रातिसँ जुड़ला ओइसँ बेसी हतोत्साहित कऽ मैथिली साहित्यसँ दूर कऽ देल गेला, नेट रिजल्ट माइनसमे रहल!

बहिष्कारक राजनीतिसँ सुपौल, देवघर आ नरहनक गोष्ठी प्रभावित रहल तँ कब्जाक राजनीतिक अन्तर्गत काठमाण्डूक सगर रातिमे कोनो स्थानीय साहित्यकारकेँ धीरेन्द्र प्रेमर्षि हवा नै लागऽ देलखिन्ह जे एहन कोनो गोष्ठी हुअएबला अछि, मनोज मुक्ति ई सूचित करै छथि। कबिलपुरक गोष्ठीमे सोमदेव आ रमानन्द रेणुकेँ नै बजाएल गेलन्हि। राजनन्दन लालदास कहै छथि जे सएह कारण छल जे आयोजक योगानन्द झा ऐ गोष्ठीक रिपोर्टकर्णामृतलेल नै पठेलन्हि, जखन कि दोसरा द्वारा आयोजित गोष्ठी सभक रिपोर्ट ओ पठबै छलखिन्ह। योगानन्द झापर कबिलपुरक कोन ग्रुपक प्रेसर छल? ओही ग्रुपक जेविद्यापति टाइम्सनाम्ना अपने छापू अपने पढ़ू पत्रमे ई न्यूज हुनका माध्यमे छपबेलक- “घरदेखियासँ आगाँ नै बढ़ि सकला बनैत बिगड़ैतक लेखक सुभाष चन्द्र यादव”- मोहन भारद्वाज मैथिली लेखक संघबनैत बिगड़ैतपर भेल गोष्ठीमे बजला। जखन कि नवेन्दु कुमार झा सूचित देलन्हि जे ओइ गोष्ठीमे बनैत बिगड़ैतपर मात्र अशोक आ तारानन्द वियोगीक आलेख आएल। ओना मोहन भारद्वाज आ योगानन्द झा ओइ गोष्ठीमे उपस्थित रहथि, आ आपसी गपशप-लूज टॉक भेल हेतन्हि जे गोष्ठीक कार्यक्रमक अन्तर्गत नै छल। २०१३ दिसम्बरमे साहित्य अकादेमी पुरस्कारक घोषणा भेल, योगानन्द झाकेँ कबिलपुर ग्रुप जूरी बनेलकन्हि आ बनैत बिगड़ैतक लेखक सुभाष चन्द्र यादवकेँ ई पुरस्कार कोना देल जइतन्हि!

सुभाष चन्द्र यादवक "बनैत-बिगड़ैत", साहित्य अकादेमी आ ओकर पुरस्कार: साहित्य अकादेमीकेँ सुभाष चन्द्र यादवसँ भतबड़ी छै। मनुक्खक मनुक्खसँ भतबड़ी होइ छै, मुदा जखन कोनो संस्थाक मैथिली विभाग कोनो मनुक्खक खास संकीर्ण वर्गक कब्जामे चलि जाइ छै तखन ओ संस्था सेहो मनुक्खे संग व्यवहार करऽ लगै छै। पछिला बेर नचिकेताक "नो एण्ट्री: मा प्रविश" क अन्तिम बेर छलै आ ऐ बेर सुभाष चन्द्र यादवक "बनैत-बिगड़ैत"क अन्तिम बेर। ऐ पोथीकेँ आब साहित्य अकादेमी पुरस्कार नै देल जा सकतै। कारण एकटा संस्थाकेँ एकटा पोथीसँ भतबड़ी भेल छै। मूल परम्परा सुखाएल इनारक बेंग छी जकर मृत्यु आसन्न छै। ने ऐसँ "नो एण्ट्री: मा प्रविश" क आ नहिये "बनैत-बिगड़ैत"क महत्व साहित्यिक रूपसँ कम हेतै। मिथिला राज्यक ढोंगी आडम्बरी नेता सभक लेल ओना ई खुशीक विषय थिक मुदा समानान्तर परम्परा लेल ई एकटा चेतौनी छी। की मिथिला राज्य सेहो समानान्तर परम्परासँ भतबड़ी करतै? की ओकरो स्वरूप साहित्ये अकादेमी सन रहतै? मिथिला राज्यक आडम्बरी सभकेँ ई उत्तर देबऽ पड़तै आ नै तँ ओकरो स्थिति सुखाएल इनारक बेंग सन हेतै!!!
मिथिला राज्यक लेल जँ अहाँकेँ क्यो धरणा दैत, सभा करैत देखाथि तँ हुनकासँ ई अवश्य पूछू जे "मिथिला यूनिवर्सिटी" "आकाशवाणी दरभंगा" आ "साहित्य अकादेमी" मे जे भऽ रहल अछि सएह "मैथिल ब्राह्मण मात्र लेल मिथिला राज्य" मांगैबलाक मिथिला राज्यमे हएत, से जे शंका सभकेँ छै से की असत्य नै छै,
आ ऐ लेल मिथिला राज्य आन्दोलन कर्मी घोषणा करथु जे कहियासँ साहित्य अकादेमीक संयोजिका आ मेम्बर सभक घरक सोझाँमे आमरण अनशन करबाक घोषणा कऽ अपन प्रतिबद्धताक प्रमाण उपलब्ध करेता।

पटना, दिल्ली आ दरभंगामे प्राथमिक शिक्षामे आ दूरस्थ रूपेँ मैथिलीक पाठन लेल अनशन केनिहार सभ एकटा पैघ षडयंत्रक हिस्सा भऽ सकै छथि, मैथिलीक सिलेबसमे भऽ रहल अन्यायक प्रति हिनकर सभक चुप्पी सएह सिद्ध करैए। मैथिलीक सिलेबसमे वएह जमीन्दारक जीवनी आ चारिटा परिवारक स्तरहीन ब्राह्मणवादी कथा-कविता-नाटक देल जाइत रहतै, ओइ भूप सभ लेल अनशन केलासँ मैथिलीकेँ भऽ रहल हर्जा आर बढ़बे करतै। मैथिलीक जातिवादी सिलेबसक खिलाफ अनशन मात्रसँ मिथिला राज्यक ब्राह्मणवादी आन्दोलनी सभक कलंक मेटा सकै छन्हि। पटना, दिल्ली आ दरभंगामे प्राथमिक शिक्षामे आ दूरस्थ रूपेँ मैथिलीक पाठन लेल अनशन केनिहार सभक कार्यकलाप जाधरि स्प्ष्ट नै भऽ जाए, ओ सभ मूल धाराक एजेण्ट छथि सएह बुझबाक चाही, आ हुनका सभक प्रति ओही तरहक व्यवहार हेबाक चाही।

अशोक अविचल,  श्याम दरिहरे,  रमण आदि देवघरक आयोजक ओमप्रकाश झापर साहित्य अकादेमीक गोष्ठी केँ सगर रातिक मान्यता देबा लेल ब्लैकमेलिंगक कऽ ई शर्त रखलन्हि जे तखने ओ सभ ऐमे सम्मिलित हेता आ नै तँ बहिष्कार करता। मुदा आरती कुमारीक हत्याक बाद ई पहिल मौका छल बलैकमेलर सभकेँ हरदा बजेबाकआ समीक्षा-प्रतिसमीक्षासँ बढ़ैत ई गोष्ठी अभूतपूर्व सफलता प्राप्त केलक, बलैकमेलर सभक बहिष्कार ओकरा आर सबल बनेलकै। दरिहरे आयोजककेँ कहलन्हि जे साहित्य अकादेमीक गोष्ठी केँ मान्यता सगर रातिक रूपये भेटए, तइ लेल मैथिली लेखक संघ, पटनाक बैसकीमे रमणक कहलासँ ओ ऐलेल फोन केलखिन्ह। अविचल सेहो आयोजककेँ सएह कहलखिन्ह।

देवघर गोष्ठी ट्रेनिंग स्कूल सिद्ध भेल, रमण, दरिहरे आ बिहारी अबितथि तँ सिखितथि जे केना रचनामे ओ क्वालिटी आनि सकै छथि, मुदा ओ सभ प्रैकटिकल छथि, बुझल छन्हि प्राइज टा लेल लिखल जाइ छै आ से जोड़-तोड़सँ भेटै छै, क्वालिटीसँ नै, अविचलमे प्रतिभा लेशो मात्र नै छन्हि, हुनका कोनो ट्रेनिंग किछु नै दऽ सकतन्हि, से ओ नै आबि अपन टाइम बचेलथि आ से नीके केलथि।

सगर राति दीप जरयमे क्वालिटी आबि जाएत तँ बिहारी-दरिहरे-रमण सन मेडियोकरकेँ के पूछत, से ओ सभ राड़केँ सुख बलायक लेखक (!) क संग दोसर साहित्य अकादेमी गोष्ठी करता जतऽ ब्राह्मण युवा सभकेँ राड़केँ सुख बलाय सन नीक कथा केना लिखल जाए तकर ट्रेनिंग रमण-बिहारी-दरिहरे द्वारा देल जाएत। नीके अछि, मूर्ख सभक प्रवेश सगर रातिमे थम्हत। आ परोक्ष रूपेँ ऐ लेल मैथिली साहित्य रमण-बिहारी-दरिहरेक आभारी रहत।

दरिहरे-बिहारी-रमणक बहिष्कारक रणनीति द्वारा सगर रातिपर कब्जाक राजनीति आरती कुमारीक संग भागलपुरमे चलि सकल मुदा वएह राजनीति २ सालक बाद देवघरमे तेनाकेँ फेल भेल जे ओ सभ पहिने सगर रातिसँ पड़ाइन केलन्हि आ फेर निकालि देल गेला। ब्राहम्णवादी भाषाक रूपमे विश्वमे ख्यात ऐ साहित्यमे कोन प्रक्रिया चलि रहल अछि जे ई संभव केलक? सगर राति दीप जरयक ब्राहम्णवादी अनुष्ठानकेँ एकर स्वयंभू पुरोहित सभ द्वारा आरती कुमारीक बलि देल जा चुकल छल। भयक ऐ वातावरणमे ई परिवर्तन केना भेल जे रमण-बिहारी-दरिहरे नै बूझि सकला?

मैथिली भाषाक ब्राह्मणवादी चरित्रमे भाषाक संग ख़ूब खेल खेलाएल गेल छै। राड़क मतलब एतऽ छै (ब्राहम्णक नजरिमे) भुमिहार, राजपूत, कायस्थ सहित सभ आन जाति। अपन बच्चाकेँ यौ आ राड़क बुढ़बाकेँ हौ! कहबी मे सेहो बेइमानी, जेना- दस ब्राहम्ण दस पेट, दस राड़ एक पेट! मुदा हमर माँ कहै छथि जे ई कहबी मात्र ब्राहम्णमे छै, आन सभ कहै छथि- दस राड़ दस पेट, दस ब्राह्मण एक पेट। मुदा बिहारी सन मेडियोकर साहित्यकारकेँ ई सभ गप नै बुझल छन्हि- ओ बुझै छथि जे राड़केँ सुख बलाय तँ जगदीश प्रसाद मण्डलपर रमण-बिहारी-दरिहरे लिखबेने छथि। रमण आ दरिहरे तँ ठीक सोचै छथि मुदा बिहारी तँ कायस्थ छथि आ दरिहरे-रमणक परिभाषा अनुसार राड़केँ सुख बलाय जगदीश प्रसाद मण्डलक अतिरिक्त हुनके टा पर नै वरण समस्त मिथिलाक गएर ब्राहम्णकेँ देल गारि अछि।

विदेह घरे-घरे घुसि चुकल अछि, से ३१ मइ २०१४ केँ रमण-दरिहरे-बिहारीक "राड़केँ सुख बलाय" कथा गोष्ठीमे शामिल सभ ब्राहम्ण-छद्म कथाकारक लिस्ट हमरा ०१ जून २०१४ क भोरमे पठाउ।

आब आउ सगर रातिकेँ खतम करबाक साहित्य अकादेमीक मैथिली शाखा आ ओकरा द्वारा मान्यताप्राप्त फ़र्ज़ी संस्था सभक पर।

रमण साहित्य अकादेमीक मैथिली शाखासँ लाखक लाख असाइनमेण्ट क़ताक सालसँ लऽ रहल छथि, से हुनका ई भार देल गेलन्हि जे सगर रातिपर विदेहक प्रभावकेँ ओ ओहिना ख़त्म करथु जेना आरती कुमारीकेँ ओ बिहारी-दरिहरे संग मिलि कऽ ख़त्म केने रहथि। मुदा हुनकर एस्टीमेट ऐबेर गड़बड़ा गेलन्हि, मैथिली लग आब पाठक छलै, शक्ति छलै, स्तर छलै, से मेडियोकर रमण-बिहारी-दरिहरे नै बुझि सकला। ख़ून रंग आनै छै, चेन्हासी छोड़ै छै .....ख़ून खूनीकेँ ताकि लै छै़़़।

मिथिलामे दुर्गापूजामे मोटामोटी चन्दा ओसूलि कऽ पूजा होइ छै। बस रोकि कऽ चन्दा ओसूली सरस्वती पूजा लेल आब शुरू भऽ गेल छै, पहिने नै होइ छलै, कारण ई पर्व व्यक्तिगत निष्ठासँ सम्बन्धित छल। ओ निष्ठा यज्ञोपवीत करबा कऽ मूर्खतापूर्वक मोछैल आ क्लीन शेव (संगे पाग पहिरने!) विद्यापतिक कोनो तत्कालीन वेशभूषाक अध्ययनसँ रहित जातिवादी कलाकार द्वारा बनाओल फोटोपर माल्यार्पणक विद्यापति पर्वमे सेहो नै भेटत। ई विद्यापति पर्व सभ , जातिवादी रंगमंच, साहित्य अकादेमीक मैथिली शाखा, प्रज्ञा संस्थान, साझा प्रकाशन आ सगर राति दीप जरय मैथिलीमे कट्टरता बढ़ेलक आकि घटेलक?

विश्वकर्मा पूजा, दुर्गापूजा आदि ई दाबा नै करैए जे ओ सभ मैथिली लेल काज करै छथि। मुदा ई सभ समाजमे मिलि काज केना करी से सिखबैए। एकर विपरीत विद्यापतिकेँ यज्ञोपवीत करबाकऽ जे सांस्कृतिक संस्थापर कब्जाक राजनीति सिखाएल गेल से जातिवादी रंगमंचमे पैसल, कोलकाताक कुर्मी-क्षत्रिय समाज मैथिलीसँ अलग कऽ देल गेल। छिट्टाक छिट्टा पोथी आ सम्मान मैथिल ब्राहम्ण आ कर्ण कायस्थ लेल रिज़र्व भऽ गेल। दोसर जँ हिम्मत केलक तँ बूढ़ा सभ लफुआ युवाकेँ साहित्यकार बना कऽ हुलकाबऽ लगला। "राड़कँ सुख बलाय"क लेखक केँ श्याम दरिहरे, प्रदीप बिहारी आ रमानन्द झा रमण द्वारा हुलकाएब ऐ प्रक्रियाक टटका उदाहरण अछि। मुदा ई प्रक्रिया जे ५० सालसँ मैथिलीमे ब्राह्मणवाद आ कायस्थवादक संजीवनी बूटी छल कोना धराशायी भऽ गेल। मैथिली साहित्यमे एहन की भऽ रहल अछि, कोन ऐतिहासिक क्रिया- प्रतिक्रिया चलि रहल अछि जे ई संभव केलक, आ जे रमण-बिहारी- दरिहरे आ हुनकर सभक आका साहित्य अकादेमीक मैथिली विभाग आ जातिवादी रंगमंच नै बूझि सकल?

सगर राति दीप जरय द्वारा ब्राहम्ण युवामे जे कट्टरता ढुकाओल जा रहल छल से जखन तोड़ल गेल तँ बिहारी- रमण- दरिहरे आ आका सभ बूझि नै सकल जे की भऽ रहल अछि आ अन्ततः ओ सभ अपन पेशेन्स खतम कऽ लेलन्हि। मुदा ऐबेर तँ दुनियेँ उनटल छल।

रहुआ संग्रामक कथा गोष्ठीमे रमणजी सहित सभ निर्णय लेलन्हि जे राति भरि कियो नै सुतता, मुदा भोजनसँ पहिने जखन सभ नामी(!!) कथाकारक पाठ कऽ सुति रहला तँ भोरहरबामे जे युवा सभ नामी कथाकार लोकनिक कथा सुनने रहथि, तिनकर नम्बर एलन्हि। आशीष अनचिन्हार जखन कथा पढ़ैले एला तँ संचालक ओंघा रहल छला आ मात्र अध्यक्ष शिवशंकर श्रीनिवास जागल रहथि, नै सुतबाक निर्णय लेनहार रमणजी फोंफ काटि रहल रहथि, जकर विरोधमे अध्यक्षक कहलाक उपरान्तो आशीष अनचिन्हार कथा पाठ करबा सँ मना कऽ देलन्हि, ओ पोस्ट माडर्न कथा बादमे "विदेह लघु कथा" मे प्रिन्टमे छपल।

मुदा ब्राह्मणवादी सेंसर प्रक्रिया एतेक जब्बर छै जे ने आयोजक, ने रमण आ ने अध्यक्ष-संचालकक फर्जी सगर रातिक इतिहासमे एकर वर्णन भेटत। अरुचिकर गपकेँ झँापि देबाक ब्राह्मणवादी प्रवृत्ति एकर कारण अछि।

८१ टा सगर राति भेबो कएल आकि नै, लोक हमरासँ पुछै छथि। पहिने डाकसँ रचना आबै आ से नामी (!!) कथा सभ पढ़ल जाइ छलै, जे युवा सभ सदेह आबथि तिनकर नम्बर एबे नै करन्हि, एबो करन्हि तँ सुतलाहा बेरमे, मुन्नाजी जखन एकर विरोध केलन्हि तँ वएह कहल गेल, गप झाँपू, रजिस्टरमे ओइ नै एनिहार सभक सेहो उपस्थिति दर्ज भेल तेँ। बहुत कथा गोष्ठीमे दसो टा कथाकार नै एला, मुदा उपस्थिति रजिस्टरमे बहुत रास उपस्थित भेटता, किछु एबे नै केला, किछु डाकसँ एला(!!) आ किछु हाजरी बना कऽ निपत्ता भऽ गेला सेहो। जेना युद्धमे ३००० सँ कम मुइने ओकरा युद्ध नै कहल जाइए, तहिना दस टा सँ कम उपस्थितिकेँ सगर राति केना कहल जा सकत? ८१ क संख्या बड्ड कम भऽ जाएत, ८१ बड्ड बेशी होइ छै, एतेमे तँ शान्त क्रान्ति भऽ जइतए, से किए नै भेल तकर कारण ऊपर देल अछि।

ऐ समानान्तर आन्दोलनमे हमरा सहयोग चाही बा विरोध, धनाकर ठाकुर आ गंगेश गुंजनक "आइडियोजिकल न्यूट्रेलिटी"क मतलब सेहो एकेटा छै, आ से छै समानान्तर धाराक विरोध।

आ इतिहास हमरो मूल्याँकन करत आ हुनको (विरोधी आ न्यूट्रल फिफ्थ कालमनिस्टक) ।

विदेहक सम्बन्धमे धीरेन्द्र प्रेमर्षिकेँ एकटा फकड़ा मोन पड़ल छलन्हि- "खस्सी-बकरी एक्कहि धोकरी"। राजा सलहेसक गाथामे जतऽ सलहेस राजा रहै छथि चूहड़मल चोर भऽ जाइ छथि आ जतऽ चूहड़मल राजा रहै छथि सलहेस चोर भऽ जाइ छथि। साहित्यक ब्राह्मणवाद जातिक आधारपर समीक्षा करैए, समानान्तर परम्पराक उदारवाद कट्टरता विरोधी अछि। समानान्तर परम्परा मिथिला आ मैथिलीक उदार परम्पराकेँ रेखांकित करैए तँ ब्राह्मणवादी समीक्षाकेँ मिथिलाक कट्टर तत्व प्रभावित करै छै। समानान्तर परम्पराक घोड़ा ब्राह्मणवादी समीक्षामे गधा बनि जाइए, आ ब्राह्मणवादी साहित्यमे तँ गधा छैहे नै, सभ घोड़ाक खोल ओढ़ने छै। आ सएह कारण रहल जे मैथिलीक सुखाएल मुख्य धाराक साहित्य दब अछि। आ सएह कारण रहल जे अतुकान्त कविता हुअए बा तुकान्त, बहरयुक्त गजल हुअए बा आजाद गजल; रोला, दोहा, कुण्डलिया, रुबाइ, कसीदा, नात, हजल, हाइकू, हैबून बा टनका-वाका सभ ठाम समानान्तर परम्परा कतऽ सँ कतऽ बढ़ि गेल; नाटक-उपन्यास-समीक्षा, विहनि-लघु-दीर्घ कथा सभ क्षेत्रमे अद्भुत साहित्य मैथिलीक समानान्तर परम्परामे लिखल गेल मुदा ब्राह्मणवादी सुखाएल मुख्यधारा आ जातिवादी रंगमंच छल-प्रपंच आ सरकारी संस्थापर नियंत्रणक अछैत मरनासन्न अछि।

बहुत लोक ऐ तरहक कमेण्ट पछिला ६ सालसँ दऽ रहल छथि जे आब विदेह बदलि गेलै, ओकरा सभ सन भऽ गेलै। विदेहक उद्देश्य ने बदलल छै आ ने बदलतै। कोन व्याख्या ककर तुष्टीकरण छै से स्पष्ट बिनु केने ऐ तरहक कमेण्ट कएल जाइत अछि। हुनकर आशा जँ ई रहैए जे मैथिली साहित्य केँ युवाक उत्साह विदेहक माध्यमसँ नव दिशा प्राप्त करत आ से आब लागि रहल अछि जे से आब व्यक्तिगत कुण्ठाक मंचक रूपमे दुरुपयोगी भऽ गेल अछि तँ ऐ सम्बन्धमे हमर यएह कहब अछि जे सत्यक कियो उपयोग कऽ सकैए आ कियो दुरुपयोग, जे हुनका दुरुपयोग आ व्यक्तिगत कुण्ठाक तुष्टीकरण आब लागि रहल छन्हि से बहुत गोटेकेँ ६ साल पहिनहियेसँ लागि रहल छन्हि, आ तकर व्याख्या हमरा लग यएह अछि जे ओ सभ मात्र विदेहसँ सिम्बोलिक विरोधक आशा करैत रहथि, असली परिवर्तन नै चाहनहारकेँ यएह असली ब्राह्मणवाद बुझेतन्हि, कारण बदलल पात्रसँ ब्राहम्णवादी मानसिकता उद्वेलित भऽ गेल छै, ओ गेल तँ हम अबितौं मुदा ई सभ के आबि गेल? अहाँकेँ बुझबाक चाही जे मैथिली आगाँ एलै, जकरा जतेक प्रतिभा छलै ओ विदेहक माध्यमसँ ततेक सिखलकै आ ततेक आगाँ बढ़लै आ बढ़तै। किछु लोक जँ स्वार्थक लेल विदेहसँ जुड़ला मुदा आनुवंशिक जाति श्रेष्ठता हुनकासँ विदेहक निश्छल प्रयासोक बावजूद नै गेलन्हि, आ जइ विदेहकेँ ओ साहित्य आन्दोलन बुझै छला (हृदयसँ नै) आ विदेहकेँ इमोशनल ब्लैकमेल, धमकी , हमरा आ हमरा परिवारकेँ ईमेल- फोनसँ गारि, छोड़ि कऽ जेबाक धमकी (छोड़ि कऽ जेबाक धमकी देनिहारमे संयोगसँ अखन धरि मात्र ब्राहमणे छथि जिनका लगै छन्हि जे सिमबोलिक प्रोटेस्ट धरि मात्र विदेह सीमित रहितए), जे आब अहँू वएह (!!), बुझलौं प्राइज़ लेल, फलनाकेँ दिआबए चाहै छिऐ, अपने लिअ चाहै छी, व्यक्तिगत राजनीति, विदेहक भला नै हएत, ई सभ ६ सालसँ सुनि- सुनि हमर कान पाकि गेल अछि। रामदेव झा आ अमर पहिनेँ कहैत रहथि, हम अपन कनियाँकेँ पुरस्कार दिआबऽ चाहै छिऐ, अपने लिअ चाहै छी, सभ हँसि देलकन्हि जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभाग निर्वस्त्र अछि, दोसराकेँ की सम्मानित करत तँ आब कहि रहल छथि जे उमेश मण्डल ,राजदेव मण्डल, बेचन ठाकुरकेँ हम पुरस्कार दिआबऽ चाहै छिऐ। मोहन भारद्वाज देवशंकर नवीनक सोझाँ कहै छथि जे गजेन्द्र ठाकुर पागले ने छै जेना लखन झा छलै। दरिहरे सेहो लाल बुझक्कर छथि, हुनका आब बुझबामे आबि गेलन्हि जे हमरा साहित्य अकादमी सँ झगड़ा अछि तेँ, व्यक्तिगत राजनीति तेँ। बिहारी मुन्नाजीकेँ फ़ोन करै छथि आ कहै छथि मात्र जगदीशे मण्डलकेँ किए आगाँ बढ़ाओल जा रहल अछि (!!) ब्राहम्णवादी मानसिकता ई छिऐ, जे जगदीश मण्डल मेरिटसँ नै, बढ़ेलासँ आगाँ बढल छथि जेना मैथिली साहित्यमे पहिने होइ छलै। प्रदीप बिहारी मुन्नाजीकेँ कहै छथि जे विदेह किए जातिवादी रंगमंचक विरोध करैए, किए समानान्तर परम्परा भऽ कऽ मूल परम्पराक गुणवत्ताक समीक्षा करैए, समानान्तर तँ मूलसँ मिलिते नै छै तँ किए हमर सभक नाम लै छी, अलग रहू, यएह छिऐ असल ब्राहम्णवाद- कायस्थवाद। चर्चे नै कर, काने बात नै दे!! आ ईहो संयोगे अछि जे जइ २-४ टा लोककेँ दिक्कत छन्हि से ब्राहम्णवादी प्रवृत्तक छथि, अनका ई दिक्कत किए नै छन्हि। पछिला ६ सालसँ विदेह जहिना छल ओहने रहत, अगिला कमसँ कम ३० साल धरि मैथिली साहित्य आब अहिना चलत। विदेहमे जकरा जे मेरिट छै ओ ओतेक बढ़त, चाहे ओ कोनो जाति, धर्म, क्षेत्रक होथि। विदेह जिनका बदलल लागि रहल छन्हि ओ स्वयंकेँ देखथु जे ओ तँ नै बदलि गेल छथि?

सगर राति दीप जरयमे अलिखित संविधानक नामपर बहुत रास खेल भेलै। ई मुख्य रूपेँ कथावाचनक गोष्ठी छिऐ मुदा एतऽ आलोचनात्मक आलेख पढ़बाक सेहो अनुमति छै आ से जँ अहाँक नाम रमण अछि तखने टा, से जखन कबिलपुर गोष्ठीमे मुन्नाजी विहनि कथा पर आलेख पढ़बाक अनुमति मांगलन्हि तँ से अनुमति नै भेटलन्हि, आ एतऽ अलिखित संविधानक सोंगर लेल गेल, आ तकर दूटा कारण, एक तँ मुन्नाजीक नाम रमण नै छियन्हि, दोसर विहनि कथाक कनसेप्ट विदेह द्वारा आगाँ बढ़ाओल जा रहल अछि से तकर विरोध, किए ने ओ कनसेप्ट कतबो वैज्ञानिक होइ।

झंझारपुर गोष्ठी मे जे एला तिनकर कथाक पाठ नै भेलन्हि मुदा डाकसँ आएल कथाक पाठ भेल, आ जँ अहाँ अविनाश छी सुमन-अमरकेँ गारि लिखै छी यात्रीक नामपर , तँ अहूँ कथाकार, कवि सभ , नै रहितो , छी, देवघर गोष्ठीक संयोजकत्व सेहो बोनसमे अहाँकेँ भेटत। से घोंघरडीहा गोष्ठीमे जिनका सभकेँ कथा नै पढ़ऽ देल गेलन्हि, ओ सभ युवा एकर विरोध केलन्हि, किछुकेँ कथा पढ़ऽ देल गेलन्हि आ जिनका नै पढ़ऽ देल गेलन्हि से अगिला कथा गोष्ठीसँ एनाइ बन्द कऽ देलन्हि।

जे सभ मैथिली फिल्म आ डोक्यूमेण्टरीक नामपर लोकसँ पाइ ठकलन्हि से रमण-दरिहरे-बिहारीक विदेहक विरोधमे संगी छथि, जे युवा प्राइज लेल मैथिलीयोमे लिखलन्हि, जातिवादी सभसँ मिलि साहित्य अकादेमीक युवा पुरस्कार लेलन्हि ओ तँ स्वाभाविक रूपे हुनकर संगी हेता।

विदेह उमेश मण्डल आ जगदीश प्रसाद मण्डलक कान्हपर बंदूक राखने अछि, यूज़ कऽ रहल अछि, आ जँ हुनकर सभक रचना नै छपऽ देल जाइत, "तिल बहब ने" छपबासँ पहिने, सकरबाबल जाइत, तखन सभ ठीक छल। ब्राहम्णवादी सभ जकाँ विदेह कोनो काज केलासँ पहिने "तिल बहब ने" क शर्त-क़रार नै करबैए आ सएह कारण अछि , नव ब्राह्मणवादी ई नै बूझि सकला, धू, एहनो क़तौ भेलैए। बिनु जान-पहिचान, भेंट- घाँटक मात्र मैथिलीक नामपर सभ एकत्रित भऽ गेल से हुनका अजगुत लगलन्हि।

प्रदीप बिहारी मुन्नाजीकेँ कहै छथि आ ई विचार रामदेव झाक सेहो छन्हि जे जखन विदेह, साहित्य अकादेमीक समानान्तर पुरस्कार शुरू कैए देलक तखन साहित्य अकादेमी लेल शोर किए? माने ओकरा बकसि देल जाए! अशोक अविचल शिवकुमार जीकेँ कहै छथि जे मायानाथ झा, आनन्द कुमार झा ( ऐमे गुणनाथ झा जोड़ि लिअ) आदि जिनका सभक चर्चा विदेह केलक, सभकेँ साहित्य अकादेमी पुरस्कार भेटलै, तँ हुनका उत्तर भेटल छलन्हि, जँ हुनकर सभक नाममे झा नै मण्डल रहितन्हि तँ की ई संभव छल?

आ साहित्य अकादेमी कोनो मनुक्ख नै छिऐ जकरा संग भतबरी कएल जाएत आ ने ककरो पैतृक संपत्ति जकर उपयोग ब्राहम्ण कायस्थक तथाकथित साहित्यकारकेँ ख़ैरात बँटबा लेल आब कएल जा सकत।

आ हमरा विषयमे जखन सभकेँ बुझबामे आबि गेलन्हि जे नै रौ, ई अपना सभ सन नै अछि, विदेह अपना सभ सन नै छौ, तँ हुनका सभ केँ आर चिन्ता लागि गेलन्हि! रौ कहीन जे, ईहो सभ हमरे सभ सन, कहीं ई, ई जे अपने प्राइज़ लेब' चाहैए बा दोसराकेँ दिआबऽ चाहैए....

ब्राह्मणवाद मैथिलीकेँ गीरि गेलै, आ सभकेँ बुझल छै जे दूटा सहोदरो एक रंग नै होइए, से पूरा जाति नीक बा अधला हेतै ई कनसेप्ट विदेहक नै छै, ओ तँ ब्राह्मणवादी कनसेप्ट छिऐ।

अतुलेश्वर झा छथि ओना तँ ब्राहम्णवाादक विरोधमे रहथि मुदा पाग आ विद्यापतिक हमर लेख क बाद कष्ट भऽ गेलन्हि, हुनकर मानब रहन्हि जे पागेपरसँ मौर ओढ़ाएल रहै छै मौर जे गएर ब्राह्मणक विवाहमे प्रयुक्त छिऐ से पागे छिऐ। मुदा जखन हुनका हम कहलियन्हि जे मौर कोढ़िलासँ बनै छै पूर्णियाँक ब्राह्मणमे बरसातिमे सेहो मौर विवाहिता महिला द्वारा पहिरल जाइ छै, तँ मिथिलाक  संस्कृतिसँ अपन अपरिचय सिद्ध भेलाक बादो पागक साहित्यिक राजनैतिक सभामे प्रयोगक पक्षमे रहला। आ एहेन बहुत रास लोक छथि, प्रेम चन्द्र पंकज आ अभय दासकेँ कोनो ने कोनो बात लऽ कऽ विदेहसँ घृणा भऽ गेलन्हि, आ ई गप ओ सभ मुन्नाजीकेँ सूचित केलन्हि जे ओ लोकनि विदेह पढ़नाइ आब छोड़ि देलन्हि, प्राय: आब ओ सभ चोरा नुका कऽ विदेह पढ़ै छथि,कारण सभ गतिविधिक जानकारी हुनका सभकेँ रहै छन्हि।

सगर रातिमे यात्री दिससँ सुमन-अमर केँ गारि देनहार आ अमर- सुमन दिससँ यात्रीकेँ गारि देनहार, मैथिली साहित्यमे ब्राहम्णवाद बचेबाक लेल विदेहक विरुद्ध दरिहरे- रमण- बिहारीक संग आबि गेल छथि अंतिम लड़ाइ लड़बा लेल।

रमण, बिहारी आ दरिहरेक कथा गोष्ठीक तिथि ८२ म सगर राति दीप जरयक तिथि ३१ मइ २०१४ घोषित भेलाक बाद भेल। ऐ तीनू लग मौलिकताक सर्वथा अभाव अछि। कोनो नव चीज ई लोकनि सोचि नै सकै छथि, हँ प्रतिक्रियावादी, धुरफंदी चीज करबामे ई लोकनि सभसँ आगाँ छथि। से रमण ७९ म कथा गोष्ठी ओरहामे विदेह साहित्य आन्दोलनक खिलाफ गोलैसी करबाक प्रयास केलन्हि, गोष्ठी प्रारम्भ हेबासँ पहिने सायास अही काज लेल पहुँचला, आ बजैत फिरला जे विदेह साहित्य आन्दोलन-तान्दोलन नै छिऐ, खाली गजेन्द्र ठाकुर आ जगदीश प्रसाद मण्डल अपन नाम करऽ चाहै छथि, जे उत्तर भेटलन्हि तकर बाद ओ परदाक पाछाँ चलि गेला, जातिवादी बयान देलन्हि, हीरेन्द्र झाक उसकेलासँ अशोक मेहता सेहो ओइ गोष्ठीक बहिष्कार केलन्हि, इच्छा तँ रमणोक रहन्हि बहिष्कार करबाक मुदा हुनकर गाड़ी ड्राइवर समधियौर लऽ कऽ चलि गेलन्हि, से कारण ओ मुन्नाजीकेँ कहलखिन्ह।

शंकरदेव झा बहुत पहिने सूचित केने रहथि जे, जे रमण प्रबोध नारायण सिंहकेँ प्रबोध नारायण सिंह एण्ड कम्पनी कहै छला आ सएह आब नचिकेताक बडीगार्ड बनल छथि। ई अवसरवादिता रमणक चरित्रमे छन्हि से जखन ओ दरिहरे आ बिहारीक संग अपन साहित्य अकादेमीक मैथिली विभाग आ ओकरा द्वारा मान्यता प्राप्त फ़र्ज़ी संस्था द्वारा संपोषित कथा गोष्ठीक घोषणा केलन्हि तँ ओ सभ ३१ मइ २०१४ क तिथिये सोचि सकला, तकर दू टा कारण छलै, हुनका सभमे मौलिकताक अभाव जे हिनकर सभक रचनामे सेहो दृष्टिगोचर होइत अछि, दोसर घृणित अवसरवादिता आ जातिवादी सोच। दरिहरे कहै छथि जे सगर राति हुनकर दलान अछि, ओइमे सर्वहाराक प्रवेश हुनका लेल कष्टकर छन्हि, बिहारीक कष्ट अही बात लऽ कऽ छन्हि जे पहिने एक दू टा कम्पटीटर छल तँ अस्तित्व जोड़-तोड़सँ बनबै छला, आब तँ मामिले खत्म, रमण कतेक छल-प्रपंचसँ मोहन भारद्वाजकेँ सगर रातिसँ बाहर केलन्हि, मुदा आब नव समीक्षक सभ आबि गेला। से यात्री दिससँ अमर-सुमनकेँ गारि पढ़ऽ बला आ अमर- सुमन दिससँ यात्रीकेँ गारि पढ़ैबला, ई दुनू ब्राहम्णवादी ग्रुप मैथिली साहित्यक विदेह साहित्य आन्दोलनक विरुद्ध मैथिली साहित्यमे जातिवादितापर ऐ घोर संकटक कालमे एक होथि, ई इच्छा राखैत "रमण- बिहारी- दरिहरे" कथा गोष्ठीक घोषणा केलन्हि, मुदा गजेन्द्र ठाकुर, विदेह आदि हुनका सपनामे डरबै छलन्हि से ओ एकटा चोरि केलन्हि, तिथिक चोरि, से किछु गोटे तँ कम हेतै जे सगर रातिमे ३१ मइ २०१४ केँ "रमण- दरिहरे- बिहारी" द्वारा घृणा कएल जाएबला गजेन्द्र ठाकुरक गाममे ओइ राति नै जा सकता। बड़ा आएल छथि आन्दोलनी, ब्राह्मणवादी घुरछीमे तेनाने फँसेबनि जे रमण- बिहारी- दरिहरेकेँ मोन रखता। हौ बाबू यएह छी असली विलेन, एकरा ख़त्म करू, विदेह आन्दोलन खतम आ मैथिली साहित्यपरसँ ब्राह्मणवादक पकड़ खतम हेबाक ख़तरा खतम, मैथिली जिबियेकेँ की फ़ायदा जँ अपना सभक वर्चस्व रहबे नै करए, अखन यात्री ग्रुप, अमर-सुमन ग्रुप नै करू, सभ ऐ संकटमे मिलि जाउ, बादमे झगड़ा करब, नै तँ गजेन्द्र ठाकुर खोप सहित कबूतराय नम: कऽ देत।

मुदा की गजेन्द्र ठाकुरकेँ खतम केने मैथिली साहित्य आन्दोलन खतम भऽ जाएत? की परिवर्तनक धारा जे भयंकर रूपेँ विदेह द्वारा छोड़ि देल गेल छै ओकर अस्तित्व गजेन्द्र ठाकुरसँ अलग नै भऽ गेल छै, गजेन्द्र ठाकुरकेँ खतम केलासँ की ओकरा रोकल जा सकत? साहित्य अकादेमीसँ फ़ोन आएल जे ओकर मैथिली विभागमे जे गड़बड़ी भऽ रहल छै ओइले साहित्य अकादेमी कोना ज़िम्मेवार अछि? किछु गोटेक फ़ोन आएल जे ओ सभ सगर रातिक अतिरिक्त रमण-दरिहरे-बिहारीक साहित्य अकादेमी संपोषित गोष्ठीमे सेहो जाए चाहै छथि कारण ओ पब्लिक फंडसँ आयोजित होइ छै, आ जँ सगर रातिक तिथि हम बदलि दी रमण-दरिहरे-बिहारी नाम्ना तिथि चोर की करता? आरती कुमारी संग कएल टॅार्चरक बाद रमण-बिहारी-दरिहरेक मोन जे बहसल से किए नै बूझि सकल ऐ परिवर्तनकेँ? मेडियोक्रिटी नै जानि कतऽ लऽ जेतनि तीनूकेँ।

मिथिला यूनिवर्सिटी आकाशवाणी दरभंगा आ साहित्य अकादेमी मे जे भऽ रहल अछि सएह "मैथिल ब्राह्मण मात्र लेल मिथिला राज्य" मांगैबलाक मिथिला राज्यमे हएत, से जे शंका लोककेँ छै से असत्य नै छै।
साहित्य अकादेमी मैथिलीक पतन लेल जे काज केलक अछि आ कऽ रहल अछि तकरा मौन आ मुखर सम्बोधन केनिहारक संख्या आंगुर पर गानल जा सकैत अछि। "सगर राति दीप जरए" समानान्तर परम्पराक बौस्तु रहए तकर प्रयास हेबाक चाही, साहित्य अकादेमी पोषित मुख्यधारा लग ने लेखक छै आ ने पाठक आ ने प्रतिभा। ओकर इतिहास लेखनमे एहेन एहेन लोक आ पोथीक वर्णन भेटत जकर अस्तित्व नै छलै, से मूल धारा अपन इतिहास लेखनमे कोनो गनती करबा लेल स्वतंत्र अछि । राधाकृष्ण चौधरी आ सुभाष चन्द्र यादवक संग कएल छलक विरोध ओइ धारामे नै भेलै,
कारण ओ "स्टेटस को" समर्थित लोकक संगठन छिऐ। साहित्य अकादेमीक गोष्ठी मूल धाराक लेल सगर रातिक गोष्ठी भऽ सकैए समानान्तर धाराक लेल नै।

मैथिली आ मिथिलासँ प्रेम करैबला अधिसंख्यक समानान्तर परम्परा सम्बन्धी वर्ग "गरिखर" मुख्यधाराक डरे साहित्य अकादेमी गोष्ठीकेँ "सगर राति दीप जरए" केर मान्यता नै दऽ सकत।

मैथिलीक मूल "गरिखर" परम्परा मे २० टा लेखक छै आ पाठक एक्कोटा नै, ई बीस गोटा बीस ग्रुपमे विभक्त अछि, सभ आपसमे कुकुड़-कटाउझ करैत रहैत अछि, मुदा विदेहक विरोधमे एक भऽ जाइत अछि आ साहित्य अकादेमीक पक्षमे भऽ जाइत अछि।
"
सगर राति दीप जरय" यएह एकटा संस्था छै जतऽ नन्दविलास राय सेहो जा सकै छथि आ जगदीश प्रसाद मण्डल सेहो। मूल धारा युवा ब्राह्मण साहित्यकार सभमे जातिवादिताक विष घोरि रहल अछि, आ ऐ सँ ओइ युवा सभकेँ अपने नोकसान भऽ रहल छन्हि। जइ लेखकमे प्रतिबद्धताक कमी अछि, जेना अमलेन्दु शेखर पाठक, अरुणाभ झा सौरभ आ दिलीप झा लूटन से ओइ जालमे फँसि गेला। अरुणाभ झा सौरभ आ दिलीप झा लूटन केँ युवा पुरस्कार भेट गेलन्हि। मैथिलीकेँ आब की घाटा हेतै, स्वाहा तँ कइये देने रहै, सुधारक सेहो गुंजाइश नै छै, तेँ ओ सभ कोनो सॉफ्टनेस डिजर्व नै करैए। मुदा ई चमचागिरी समानांतर धाराक युवा (ब्राह्मण वा गएर ब्राह्मण) मे भेटब असम्भव (जँ ब्लैक शीपकेँ छोड़े दी)
, ई युवा  तुर्क मंच सापेक्षीय चरित्रक निर्वाह नै करै छथि।

अमलेन्दु शेखर पाठक आ दिलीप कुमार झा लूटन क कविता संग्रह साहित्य अकादेमी प्रकाशित केलक, ई बात फराक जे ओइ समयमे ब्राह्मण आ गएर ब्राह्मण वर्गमे बहुत युवा रहथि जे बेशी प्रतिभाशाली रहथि मुदा प्रकाशन लेल हिनके दुनूकेँ साहित्य अकादेमीक मैथिली विभाग चुनलक। तथापि ई दुनू गोटे किछु कवितामे आशा जगेलथि, मुदा लेखकीय प्रतिबद्धताक अभावक कारण ओ आशा धूमिल भऽ गेल। जखन जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ गुआहाटीमे मुख्य अतिथि बनाओल गेलन्हि तँ बैजू आदिक विरोध आयोजककेँ सहऽ पड़लन्हि आ ओइ वीडियो रेकॉर्डिंगमे ब्लैकआउटक मादे जखन हम आयोजककेँ पुछलियन्हि तँ ई जानकारी भेटल, आ जखन ब्लैक आउट खतम भेल तँ अमलेन्दु शेखर पाठक निर्लज्जतापूर्वक कहैत सुनल गेला "सपनोमे नै सोचने हेतै.." इत्यादि.." आ बैजू आदि दस गोटे ओइपर निर्लज्जतापूर्वक ठहाका लगेलन्हि, ई वीडियो विदेह वीडियोमे उपलब्ध अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल क स्टेचरक अमलेन्दु शेखरक मेण्टर सभ सेहो नै बनि सकता आ विद्यापति पर्वक मुख्य अतिथि भेनाइ जगदीश जीक नै ओइ विद्यापति पर्वक लेल सम्मान छल। खएर .. मुदा तकर बाद दरभंगाक विद्यापति पर्वपर (बैजूक विद्यापति सेवासंस्थानक विद्यापति पर्व) जखन नन्द विलास राय पहुँचला तँ अमलेन्दु हुनका अपमानित करैत मंचे पर कहलखिन्ह " अमलेन्दु अहाँकेँ पोस्टकार्ड लिखि कऽ बजेने  रहथि!!!" आ ऐ गपक चर्चा नन्द विलास राय कमलेश झाक संस्थाक सम्मान समारोहमे केलन्हि जतए भीमनाथ झा आदि सभ उपस्थित रहथि। अखनो अमलेन्दु आकाशवाणी दरभंगाक मैथिली विभाग मे जे जातिवादी स्वरक प्रचार कऽ रहल छथि से लेखकीय प्रतिबद्धताक विरुद्ध अछि। जँ समानान्तर परम्परा साहित्य अकादेमी गोष्ठीकेँ मान्यता नै दऽ रहल अछि तँ ऐ सँ मिथिलापर ई कलंक तँ दूर भेबे कएल जे हम सभ "स्टेटस कोइस्ट" छी, आब अधिसंख्यक वर्ग ओइ कुकृत्यसँ अपनाकेँ दूर राखऽ चाहैए।

मैथिली साहित्य आ इतिहास दू खण्डमे बँटि गेल अछि। लोक जेना गांधीजीक विरोध कऽ महान बनऽ चाहैए तहिना विदेहक विरोध कऽ कए सेहो। साहित्य अकादेमीक गोष्ठीकेँ "सगर राति दीप जरए" केर मान्यता भेटै ओइ लेल कमलेश झा सन "कम्यूनिस्ट" आ ढेर रास "मैथिल ब्राह्मण मात्र लेल मिथिला राज्य आ मैथिली भाषा" मांगैबला ब्राह्म्णवादी (कम्यूनिस्ट ब्राह्मणवादी सेहो) अपस्यांत छथि। मुदा समानान्तर धाराक इतिहास लेखन मे साहित्य अकादेमीक गोष्ठीकेँ "सगर राति दीप जरए" केर मान्यता नै देल जा सकत। मूल धाराक इतिहास लेखन मे ओ साहित्य अकादेमीक गोष्ठी लेल संख्यामे "एक" नै "अनेक" संख्याक वृद्धि कऽ सकै छथि|

झंझ-मंझ:

Arvind Thakur

हम आएब ! अवश्य आएब ! 81/82 क चक्करक बादो आएब ! 

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Umesh Mandal, रवि भूषण पाठक and 2 others like this.


 

Gajendra Thakur kono 81-82 ka chakkar nai chhai. ee 81 m chhiyai, sahitya akademi goshthi ke sagar raatik manyata nai del jaa sakat.

February 8 at 9:54pm · Like · 2

Shyam Darihare EE manyata debak adhikar kon sanstha wa vyakti ke chani. Anere ekta neek andolan ke duri karbak prayas band kayal jaybak chahi. sagar rati deep jaryak madhyame apan rajniti karab nindniy thik.

19 hours ago · Like

Gajendra Thakur श्याम दरिहरे जी। सगर राति दीप जरयकेँ साहित्य अकादेमीक बंधक बनेबाक कोनो प्रयास बा ओइ प्रयासक समर्थन क्षम्य नै छै। सगर रातिक माध्यमसँ जे राजनीति कएल जा रहल छल ओकरा ध्वस्त क' देल गेल अछि। सुपौल सगर रातिमे जातिवादी स्वरकेँ रमानन्द झा रमण जी द्वारा देल मौन समर्थनक बाद सगर राति ओरहा मे रमानन्द झा रमण जी द्वारा जे जातिवादी स्वर उठाएल गेल रहै जे ओ श्रोत्रिय रहलाक बादो पासवान ऐठाम जा क' हुनका आ सगर राति पर अहसान केलनि ई सभ गप सगर रातिमे असहनीय अछि।

19 hours ago · Like

Shyam Darihare Sagar rati deep jaraya kahiyo kakro badhak wa gulam ne chhalaik aa ne kakaro satta chhaik je ee kay sakat. Maithilik je sthiti chhaik tahi me ehan vivad uthayab ghaatak chhaik. jani bujhi kay kichhu lok ehi aandolan ke hathiyabay aa prachar payba lel apsyant chhathi. sagar raati deep jaray jahina chhaik tahina rahay del jay. Rajniti tuarat band ho. Badhiya likhbak badla rajniti karab nindniy thik.

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Gajendra Thakur श्याम दरिहरे जी। चारि गोटे मिलि क' एक दोसराक कथाक बाहबाही करै छला, मात्र एक्के जातिक ई गोष्ठी छलै, क्वालिटीक ओत' अभाव छलै आ ओ राजनीतिक अखारा छल, सर्वहारा वर्ग एकरासँ दूर रहै,नव कथाकार नै जुड़ि रहल छला, किछु गोटे एकरा हथियेने छला, आ सएह सभ आब कब्जा छुटला पर हाक्रोश क' रहल छथि; यएह एकर स्वरूप रहै, एकर स्वरूप ओहिना रह' देल जाइ से अहाँक इच्छा अछि? मैथिली आगाँ बढ़ए आ ओकरा पर लागल जातिवादी कलंक दूर होइ ओइ सँ अहाँक कोनो सरोकार नै। सभ जाति सभ क्षेत्रक लोक मैथिलीसँ आ सगर राति सँ जुड़ि रहल छथि, ओइसँ अहाँकेँ प्रसन्नता नै अछि? आन्दोलन केँ राजनीति आ राजनीतिकेँ आन्दोलन कहिया धरि अहाँ बुझैत रहबै?

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Shyam Darihare sagar rati deep jaray ne rajnitik manch chhaik aa ne sarkari rahat kendra. Je neek likhat takar naam hetaik. Neek rachnak prashansa hetaik. Ehi me jativad, sarvhara aadi shabdavalik prayog vaih lok kay sakait achhi jakra rachana karm sa nahi apitu matra rajniti sa matlab hoik. Kharab rachnak yadi keo godhiyanbadak adhar par wah wahi kartaik t se prabudh pathak swikar nahi kartaik. Ehi me jatik kon sawal chhaik. sawal matr rachanak gunvatta chhaik. Anere aamil pibak kono jarurati nahi. Jati aa sarvhara shabd aanika ahan lekhan kary me seho aarakshanvadi rajniti aani rahal chhi. Bhashak ehan seva lel badhai.Yadi kono truti ehi me chhaik t okar samadhan hobak chahi muda mathdukhi chhorabay lel aatmhatya ghor anuchit achhi. Hamra kon chij say sarokar achhi takar chinta me aahan kiyak parait chhi. Rajniti aa andolan me antar bujhbak hamara aahan atek abgati nahi achhi se t aab nahiye achhi.

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Gajendra Thakur सगर राति दीप जरय राजनीतिक मंच नै छै, आ नहिये सरकारी राहत केन्द्र; मुदा साहित्य अकादेमी राजनीतिक मंच बनि गेल छै आ मैथिल ब्राह्मणक किछु कट्टर तत्त्व जकर रचनामे कोनो जान नै छै तकरा साहित्य अकादेमी राहत सेहो प्रदान करैए। आ जे ओइ साहित्य अकादेमी आदि सरकारी संस्थासँ बिनु रचनाक श्रेष्ठाक राहत लेबा लेल लालायिय छथि ओ जाति आधार पर सगर रातिकेँ ओकर बंधक बनब' चाहै छथि। सर्वहारा आ जाति शब्दक चर्चा साहित्यमे नै हेबाक चाही ई सुनैत सुनैत हमर कान पाकि गेल अछि। जकर रचनामे जान नै होइ छै, जकरा पाठक नै छै, गोधिया बना क' जे सड़ल पाकल रचनापर प्रशंसा पेबाक आदति धेने अछि, तकरा आन्दोलन राजनीति बुझेतै, जे सुखाएल इनारक बेंग छथि, हुनका मैथिली केँ पाठक भेटने सभसँ बेशी कष्ट छन्हि, कारण गोधियाँ सभपर पाठक हँसि रहल छन्हि। मात्रक एक जातिक (मैथिल ब्राह्मणक किछु कट्टर तथाकथित साहित्यकारक) आरक्षण जाधरि मैथिली लेल छलै (साहित्य अकादेमीमे अखनो धरि छै) तकर पक्षमे आ तकरा हाथे सगर रातिकेँ बेचबापर बिर्त लोक जखन "लेखनमे आरक्षण" क विरोध करै छथि तँ अपन तर्कक घुरछीमे अपने फँसि जाइ छथि, हुनका अपन जातिक सड़ल पाकल साहित्य श्रेष्ठ लगै छन्हि आ तकर विरोधकेँ ओ "मथदुक्खी छोड़ाबए लेल आत्महत्या" कहै छथि, आ जँ सत्य सोझाँ आनल जाए तँ तइपर अपन "आमिल पीबि क'" बजबाकेँ ओ दोसराक आमिल पीब कहै छथि। आ त्रुटि लेल समाधान लेल अहाँ हुनकर पएर पकड़ू, कारण मैथिलीकेँ ओ लोकनि मारि क' सुखाएल इनार रूपी साम्राज्यक मठाधीश बनल छथि, आ भाषाक तइ रूपेँ सेवा केलाक लेल ओ बधाइ सेहो चाहै छथि!! अहाँकेँ कोन चीजक सरोकार अछि से स्पष्ट अछि, आ कोन चीजक अवगति सेहो स्पष्ट अछि।

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Shyam Darihare Shyam Darihare Aahank aakrosh bharal bhasha say bujhait achi je aahan kono vyaktigat karne sahitya akadmik virudh jhanda uthene chhi. Se hamra nahi bujhal chhal aane bujhay chahait chhi. Ham baat matr Sagar rati deep jaryak kay rahal chhi. Aahan bat ke sahitya akadmi dis lay ja rahl chhi. Aahan hamara bich kono prichay seho nahi achhi tain binu janane vyaktigat tippani sa bachbak chahi. Takhan ekta baat kahab je ankar dalaan chhinikay hathiya kay chichiyabay sa badhiya je apana butta sa swayngak ekta nishkalank, aa jati varg vihin dalaanak nirman kay ohi par taal thoki se besi purusharthak baat. Hamra sa kono mathadhish galat thapri pitba let se sattha ehi duniya me kakro nahi chhaik. Ehan kono mathadhish ekhan dhari janam nahi lelkaiak achhi. Aahan ke katahu abharay t suchit karb. kono lobh lalach lel bhashai rajniti karybala lok Darihare lag thadh hobak pahine seho ek say ber sochat kiyak t hamara janayvala keo ehan himmat nahi karat. Aa agar karat t ..... Binu kono parichayak etek baat apne sunaol se dhanyvaad.

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Gajendra Thakur अहाँकेँ बुझाइत अछि बा अहाँ सएह बुझ' चाहै छी, आ से अहाँ किए बुझ' चाहै छी से स्पष्ट अछि। अहाँकेँ अपन भाषा आक्रोशित नै बुझाइए, आ दोसराक तर्क किए आक्रोश बुझाइए सेहो स्पष्ट अछि। हम सगर राति दीप जरय क गप क' रहल छी, आ कारण सुनेलौं जे अहाँ बा कियो साहित्य अकादेमीक गोष्ठीकेँ सगर राति कोन कारणसँ बनाब' चाहै छथि, मैथिली केँ पाठक भेटलै, ओ एक जातिक घुरछीसँ बाहर निकललै, ओकर स्तर भारत आ नेपालक आन भाषाक साहित्यक समक्ष एलै, तँ ऐ सँ अहाँकेँ खुशी किए नै अछि? अहाँसँ हमरा व्यक्तिगत परिचय नै अछि आ कएक बिलियनक विश्वमे सभक सभसँ परिचय संभव नै छै तैयो अहाँ व्यक्तिगत टिप्पणी करै छी आ से आरोप दोसरा पर किए लगबै छी, सेहो स्पष्ट छै। सगर राति किछु गोटेक दलान रहै, ई स्वीकारोक्ति अहाँक विषयमे बहुत किछु कहि जाइए, आ अहाँ किए चिचिया रहल छी तकरो विषयमे टिप्पणी करैए। अहाँसँ कोनो मठाधीश थोपरी नै पिटबा रहल अछि,लोभ लालच बला अहाँ सँ सटि नै सकैए, आ जँ से सटत तँ तकरा अहाँ गरदा छोड़ा देबै; मुदा तखन अहाँ ई किए क' रहल छी। एकर कारण ई तँ नै अछि जे ओकर सभक सोच आ आइडियोलोजी अहाँक आइडियोलोजी सँ मेल खाइत अछि, आ जे से अछि तँ अहाँक ई स्वीकारोक्ति दुखद अछि आ ओइ आइडियोलोजीसँ हमर मतभिन्नता आजन्म रहत।

·              Gangesh Gunjan प्रिय गजेन्द्र जी!
'
उचितवक्ता ' के एक बेर फेर बाज' पड़ि गेल । माफी चाही।
अहाँक आदर हम अहाँक मिथिलाँचल-हित साधक युगीन संस्थापना कार्यक लेल करैत छी।
से अहीं, आ मात्र अहीं टा कएल अछि।अहाँक एहि कृति-लेख कें, चाहियो क' क्यो,
कोनो तुच्छ तर्क बा तथाकथित मिथिलाँचल हितैषी-प्रेमी लेख लिखि क' मेटा नहि
सकैत छथि। से निर्विवाद । से किनको बुतें अहाँ सँ पैघ काज कैये क' संभव हेतनि।
तेँ अहाँ सँ एखनो हमर उमीद नै खत्म भेलय । अपन ताही अग्रज-स्नेहाधिकार सँ
आग्रह करैत छी जे एहन सृजन हीन,अनुर्वर विषय ल' ' विवाद अहाँक वास्तविक
योगदानक क्षमता-प्रतिभाक बेकार मे क्षय क' रहल अछि।तकर मात्सर्य अछि हमरा।अहाँ
मैथिली आ मिथिलाँचलक " श्रेष्ठ आ कालान्तर जीवी " कार्य करबा लेल आएल छी। तेँ।
एहि सम्पूर्ण विवाद पर हम शायर मोमिनक एक टा अपन अति प्रिय शे-ए-र कहैत अपन
इच्छा व्यक्त करै छी-
"
मर चुक कि कहीं तू ग़मे हिज्राँ से छूट जाए / कह्ते तो हैं भले की वो लेकिन
बुरी तरह।" बेशी लोक उचितो बात केँ नितान्त अरुचिकर वाणी आ तेवर मे करबाक
अभ्यासी होइत छथि। हमरा जनैत एही मे मुख्य मुद्दा हेरा जाइ छैक।तेँ
फेर वैह -"बात जँचय हमर तं हमरा संतोष । अन्यथा मोन सँ निष्काशित क' देब ।"
सस्नेह,

2014-03-14 11:07 GMT+05:30 Gajendra Thakur <

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Gajendra Thakur गंगेश गुंजन जी। गारिक डरे भागलासँ सृजनहीन, प्रतिभाहीन लोकक वर्चस्व फेरसँ काएम भऽ जेतै।

डॉ. आरती कुमारी (१९६७-२०१२)क काल्हि रातिमे मृत्यु भऽ गेलन्हि। पति श्री अनिल कुमार रॉय आ पुत्र अनुराग कुमार आ पुत्र उज्जवल प्रकाश केँ छोड़ि ओ चलि गेलीह। हुनकर मृत्युसँ मैथिली साहित्य जगत सन्न अछि। हुनकर एकटा पोथी प्रकाशित अछि "मैथिली मुक्तक काव्यमे नारी"। महिषीमे ७३म सगर राति दीप जरय क माला ओ भागलपुर लेल उठेने रहथि, आ तकरा बाद ओ अस्वस्थ भऽ गेलीह, कोलकातामे ऑपरेशन भेलन्हि। किछु सामन्ती प्रवृत्तिक लोककेँ हुनकर  सगर राति दीप जरय क माला  उठेनाइ नै अरघलन्हि आ हुनका द्वारा भागलपुरक साहित्यकारसँ माला उठेबासँ पहिने नै पुछबाक, आ "जँ भागलपुर मे  सगर राति दीप जरय हएत तँ कियो नै आएत" आदि गप कहि मानसिक वेदना पहुँचा कऽ दीप आ रजिस्टर लऽ लेल गेल, आ सगर राति दीप जरय भागलपुरमे नै भऽ सकल। आ  सगर राति दीप जरय पर जे ग्रहण लागल से अखन धरि लागले अछि। हम सभ कहनहियो रहियन्हि जे जँ अहाँ भागलपुरमे  सगर राति दीप जरय करय चाहै छी तँ निश्चिन्त भऽ करू, सभ पहुँचत, मुदा ओ कहने रहथि जे ओ  सगर राति दीप जरय करय चाहै छथि, मुदा विवादमे नै पड़य चाहै छथि। स्व. आरती कुमारीकेँ कृतघ्न समाज दिससँ श्रद्धांजलि।

Shyam Darihare 74wa SAGAR RATI DEEP JARAY-- 10 SEPT 2011. Sthan:- HAZARIBAGH. ( Patna ke taraf sa Hazaribagh me pravesh sa pahile N.H. par Vinoba Vhave University Gate chhaik. University gate sa ek minat baab dahina me ekta barka maidan chhaik waih chhaik HOME GUARDS TRAINING CENTRE. Ohi Gate par sipahi sa puchhari karu o hall dhari pahuncha det. SAB MAITHILI KATHAKAR aa KATHPREMI LOKaNIKE SADAR HAKAR. Like · · Unfollow Post · August 11, 2011 at 3:48am Shefalika Verma and Kislay Krishna like this. Arvind Thakur बढियां खबर ! बधाइ !रोमन लिपि मे लिखबाक अनेक खतरा छै,एकटा एतहु देखाइत अछि -कथाप्रेमी कें कठप्रेमी पढय मे बेसी सुविधा बुझाइ छै|सभ गोटे देवनागरी मे लिखबाक हिस्सक बनाबी त नीक |हम गोष्ठी मे आयब,दरिहरे जी| August 11, 2011 at 7:29am · Like · 2 Hirendra Kumar Jha Bhagalpurak arth ahzaribag hit chhaik ? August 13, 2011 at 1:13am via · Unlike · 2 Hirendra Kumar Jha Bhagalpurak arth Hazaribagh kona bhay sakait chaik ? ehi san ta prathak samapti bhay jayat. punarbichar karu. Hirendra August 13, 2011 at 1:15am via · Unlike · 1 Ajit Azad aarti ji goshthi karba me saksham nai chhaith. hunke se puchhla par ee bha rahal chhaik. aarti ji gambhir roop se bimar chhaith aa kolkata me 3 maas se ilaaj kara rahlih achhi. August 13, 2011 at 6:10am · Like Kislay Krishna ee ektaa vikalp rup me sojha aayal achhi.... August 13, 2011 at 8:07am · Like Gajendra Thakur आरती जी २४ सितम्बर केँ गोष्ठी करबा लेल तैयार छथि तकरा बादो हुनका सँ मौका छीन कऽ मात्र दस दिन पहिने गोष्ठीकेँ हजारीबाग लऽ जेबाक की प्रयोजन..? Hirendra Kumar Jha जी सँ हम सहमत छी..आब जखन १० सितम्बर तिथि घोषित भऽ गेल तखन आब ओ पाछाँ हटि जाथि से अलग बात, मुदा की हुनका ई भरोस देल गेलन्हि जे अगिला गोष्ठी वएह करेतीह? हम पहिनहियो कहने रही जे हुनकासँ बिना पुछने कोनो निर्णय नै लेबाक चाही..यदि हजारीबागमे गोष्ठी हुअए तँ सशर्त हुअए जे अगिला गोष्ठी आरती जी करेतीह..ई दवाब जे अहाँक अहठाम २४ सितम्बर केँ कियो नै आएत/ अहाँ भागलपुरमे ककरोसँ नै पुछलिऐ..आदि बना कऽ हुनकासँ जबरदस्ती हँ कहेबाक कोनो मतलब नै.. August 17, 2011 at 7:39am · Like Ajit Azad jahiya 10 setamber ke ghoshna bhel...tahi se ek ghanta pahine tak aarti ji lag date final naih rahain. ham fon kayliyai ta o kahlih je AAI RAIT ME HAM AHAN KE KAHAB...KARAN JE EK GOTE HAMRA AARTHIK SAHYOG KARBA LEL CHHAITH...YADI O GACHHI LETAH TA HAM 19 YA 20 SEPTEMBER KE KARAB. ham puchhaliyain 19 ke ya 20 ke? o kahalain EHI DOONU TITHI ME SE JAHIYA SHAIN PARTAIK TAHIYA. ham kahaliyain je ehi doonu tarikh ke shain nai parait chhaik. takhan o garbara gelih. hamhi kahaliyain je 24 ke bha sakait achhi muda durga puja 28 se chhaik...ki ahan 3 september ya 10 september me se kono din kara sakait chhi? o taiyar nai bhelih. ham kahaliyain je takhan ahan 24 ke kareba lel swatantra chhi...aa ham aybo karab muda besi lok nai autah...dosar gap je ekhno tak ahank date final nai achhi ( karan, o takhno ber-ber kahait chhalih je ham ek gote se baat karab takhan date ghoshit karab). ham hunak swasthya aa aarthik sthiti ke dekhait kahaliyain je ahan baad me jahiya thik bha jayab tahiya karab. o kahalain JE HAM SANJH ME AHANKE FINALLY KAHAB. baad me o ohi samay pradip bihari ji ke sabhta baat kahalkhin. pradip ji hunka bujhelkhin je ahan ekra presstige issue nai banau...sabh ahank heet me kaih rahlah achhi. o maini lelkhin aa register hunke patheba lel sahmat bhelkhin. ekar baad pradip bihari ji turat hamra fon kaylain je aarti ji taiyar chhith je agila goshthi hazaribagh me hoiek. pradip ji hunka eeho kahalkhin je ahan ee gap ajit ji ya raman ji ke seho kaih diyoun muda o kahalkhin je ham VIDEHA me kaih dait chhiyaik, sabhke khabar bha jaytaik. ham aai tak videha me hunak kono statement nai parhal. hamra lagait achhi je ehi mamla ke tool nai del jai...o yadi agila goshthi karay chahait chhaith ta o karaith, ehi me kakro kiyaik kono aapatti hetaik. ee goshthi june me hebak rahaik...arthat may me date ghoshit bha jaybak chahi chhal. o june me 10 aa 11 ke saharsa me sahitya acsdemik seminar me aayal chhalih...ham takhno hunaka puchhaliyain je kahiya karbaik goshthi...o july me karbak baat kahlain. tabat tak hunak mon kharab bala baat nai rahaik. julu me kolkata me o kavita path karba lel bimarik avastha me aayal chhlih. takhno ham puchhne rahiyain je kahiya karab goshthi? o kahalain je september tak ta ham kolkate me rahab (under treatment). takar baade karab. August 17, 2011 at 10:55am · Like Ajit Azad ek ber ehi tarhak ghatna aar bhel chhaik. dr dhirendra ji janakpur me karbaik prastav darbhanga goshthi me delkhin muda 4-5 maas tak o nai kara saklah takhan pt. govind jha daman kant jha jik sahyog se patna me karoune rahaith. aarti jik paksha me sabh achhi muda hunak sthiti thik nai chhain...ehi mamila me bhagalpurak lok besi nik se kaih sakait chhaith.

-चोर रोशन कुमार झा अखनो नै हटेलक जगदीश प्रसाद मण्डलक ओकरा (चोर रोशन कुमार झा ) द्वारा कएल चोरिक लघुकथा सभ अपन ई-पत्रिका (ब्लॉग)सँ- साहित्यिक जगतमे ऐ सँ घोर क्षोभ अछि- -चोर रोशन कुमार झाक चोरिक सबूत नीचाँ लिंकमे अछि जे ओ अखन धरि अपन ई-पत्रिका (ब्लॉग) सँ डिलीट नै केलक अछि।

 http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/rikshaavala.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/jivika.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_7993.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_9212.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_4646.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_691.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_88.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_7693.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_4876.html

http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_31.html

 

ई धूर्त रोशन कुमार झा ई सभ रचना जगदीश प्रसाद मण्डलक "गामक जिनगी" सँ चोरा कऽ अपन ई-पत्रिकामे छपने अछि जेकर लिंक ऊपर देल गेल अछि। गामक जिनकीकेँ मैथिलीक पहिल टैगोर पुरस्कार भेटल छै।

पहिनहियो एकर संगी रणजीत चौधरी मुन्नाजीक रचनाक लगातार चोरिमे पकड़ाएल अछि, जे अजित आजादक  मिथिलाक अबाज ग्रुपपर अखनो अछि। अजित आजाद मुन्नाजीकेँ कहने रहथिन्ह जे ओ रणजीत चौधरीकेँ बैन करता आ चोरिक रचनाकेँ डिलीट करता, मुदा हुनकर कार्यालसँ से अखन धरि से नै भेल तावत ओही कार्यालयसँ ई नबका चोर रोशन कुमार झा आबि गेल।

"राड़केँ सुख बलाय" क लेखक अछि ई रोशन कुमार झा आब रौशन मैथिल!!) ई कथा ओकर मूल ब्राह्मणवादी शुद्ध वर्तनीमे नीचाँ देल जा रहल अछि-

राअर के सुख बले

पढुआ काका किछु काज स दरभंगा आयल छलाह . जखन सव काज भ गेलैन त बस पकर्बाक लेल बस स्टैंड गेलाह , मुदा गामक बस छुट्टी गेलैन .

पधुआ काका हमरा फ़ोन केलैने ? रोशन कतय छ: ? हम आकाशवाणी लग ठाढ़ छि ? हाउ हम तोहर घरे बिसरी गेलिय . तो आबी क हमरा ल जा .

जखन हम पढुआ काका क ल के घर पर आय्लाहू त घर पर लाइन छल .चुकी गर्मी काफी छल ताहि कारने पंखा चला हुनका लग बैसी गेलहु आ हुनका अपन कंप्यूटर पर फसबूक के खोली हुनका देखाबय लाग्लाहू ?

अचानक ललका पाग केर देखैत देरी हुनक मन गडद-गडद भ गेलैने . ओ कह्लैने जे की " इ थिक मिथिला वासी केर पहचान , आ पाग पहिर्ला स बाढ़ी जाइत अछि मान "

हम कहलियैक , काका किछू लोक केर कथन अछि जे की पाग मात्र उपनयन , विवाह में पहिरे वाला एक टा परिधान अछि जे की बाभन आ लाला सब मे पहिरल जाइत अछि ?

ओ कह्लैने हौ जे इ गप करैत अछि ओ पागल हेताह ?

हम कहलियैक , कका ओ सब पढ़ल लिखल आ पैघ-पैघ साहित्यकार छैथ आ विदेह सनक पत्रिका सेहो निकालैत छैथ ?

किछु काल केर उपरान्त पढुआ कका कह्लैने जे की एकटा , दूटा ओही महानुभाव केर नाम त कहक जे सब पाग केर मिथिला केर मान नहीं बुझैत अछि आ मात्र ओकरा जातिगत स जोरी रहल अछि ?

हम कहलियैक आशीष अनचिन्हार , उमेश मंडल , पूनम मंडल प्रियंका झा आ विदेह केर सम्पादक गजेन्द्र ठाकुर .

कका कह्लैने हौ अहि मे त कोनो पैघ साहित्य कार लोकनि केर नाम कहा अछि ?

कका आजुक समय केर इ सब करता धर्ता छैथ साहित्य जगत के .

हौ यदि आजुक साहित्य केर करता एहन छैथ त नहीं जानी की होयत भविष्य मे ?

हमरा सब केर समर में हरिमोहन झा , नागार्जुन , दिनकर सब सनक महान रचना कार लोकिन छलाह . से इ सब कोनो हुनका स पैघ छैथ जखन ओ लोकिन पाग पहिर अपना केर गौरवान्वित बुझैत छलाह तखन आजुक नौसिखुआ सब के की औकात ?

ओ कह्लैने हौ बाऊ ब्रह्मण एकर विरोध किअक क रहल अछि से नहीं जानी मुदा जिनकर बाप दादा कहियो पहिर्बे नहीं केने हैथ हुनका त अवस्य ने असोहाथ बुझेतैन .

ओहुना मिथिलाक गाम घर मे कहल जाइत अछि जे की " राअर केर सुख बले "

 

कथा वाचन- लेखन पाठशाला (बाल कथाक विशेष संदर्भमे)

 

मैथिलीमे कथा वाचन, विशेष कऽ नेना भुटका लेल बाल कथा वाचनक परम्परा बड्ड पुरान रहल अछि। लोक गाथाक रातिक राति, दिनक दिन प्रदर्शन, बाल सुलभ मोन लेल ओकर छोट वर्जनक गद्य-पद्य मिश्रित एक आ बेशी राति चलैबला दादी-नानीक कथा, दादी-नानी आ बाबा-बाबूक सुनाएल आन लोककथा एकर विभिन्न रूप अछि जे मिथिलाक बालक-बालिकाक मोन मोहने अछि। ऐसँ विपरीत सप्ता डोरासँ लऽ कऽ मधुश्रावणी आ बिहुलाक कथाक जानकारी मात्र बालिके धरि सीमित अछि, एक्के घरमे रहितो किछुए बालक मौगियाहा संज्ञा भेटबाक डरक संग ऐ कथापाठमे सम्मिलित हेबाक साहस करै छथि।

कथाक बीच गीत, कहबी, खेल सेहो होइए। खेल कथाक बालक- बालिका सभ द्वारा वाचन-गायन होइत अछि, आ खेला सेहो चलिते रहैत अछि, कोनो दादी-नानीक प्रवेश नै, कोनो बाबू-बाबा, बेदराक खेलमे घुसि नै सकै छथि।

कथापाठक एतेक सुन्दर परम्पराक अछैत मैथिली बालकथा किए असफल भऽ गेल, बा अखन धरि असफल अछि। जँ लिली रे केँ छोड़ि दी तँ ई कहैत कनियो संकोच नै जे साहित्य अकादेमी पोषित, से ओ छपाई हुअए बा पुरस्कार, मैथिली बाल कथा साहित्य , बाल साहित्य अछिये नै। आ जँ अहाँमे प्रतिभा नै अछि तँ अनुवाद करू, मुदा प्रायोजित अनुवादक स्तर एहन जे बच्चाक बापक दिन नै छिऐ जे एक्को पैराग्राफ़ पढ़ि लिअए, तते ने मुँह कोचिआबए पड़ै छै।

साहित्य अकादेमीसँ २४ भाषासँ संकलित बाल कथा निकालल गेल। मैथिलीयोक कोटा छै आ रामदेव झा दुनू बापुतक बालकथा कोना नै रहत, नाटक संग्रह एतै तँ फट नाटक तैयार, तही तर्जपर। लिली रे क कथा मुदा सुन्नर अछि। मैथिलीक ऐसँ बदनामी होइ छै, दुनियाँ बुझैए जे मैथिलीक कथाकार बाल कथाक माने बुझबे नै करै छथि।

८२ म सगर राति दीप जरय बालकथा केन्द्रित रहत। ओइ संदर्भमे बाल कथा वाचन-लेखन पाठशालाक आरम्भ कएल जा रहल अछि।

विदेह शिशु उत्सवमे जगदानन्द झा मनु क चोनहा आएल छलन्हि। बाल मनोविज्ञानपर आधारित ई उपन्यास बाल कथा लिखनहार लेल पाठ्यक्रमक समान अछि, केना कथा आगाँ बढ़ाओल जाए, आ समाप्त कएल जाए, कथा वस्तुक नवीनता एकरा विशिष्ट बनबैए। विदेह शिशु उत्सव ऐ लिंकपर उपलब्ध अछि:-

https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/

से बालकथाक लेखन एना हुअए जे ओ पढ़ै आ सुनै, दुनूमे नीक लागए। ई क्लोजेट नाटक सन हेबाक चाही, जे मंचन लेल नै, असगरे पढ़बाले बा किछु गोटे संग ज़ोर-जोरसँ सुनबा-सुनेबा लेल लिखल जाइए।

सरल विचार, सरल शब्दावली आ सरल भाषा श्रेष्ठ बाल कथा लेखनक चाभी अछि।

जेना ऋगवेदक जल प्रलय, मनु आ महामत्स्यक कथा, सरस्वती नदी, अरायुक्त रथक विवरण, ई सभ आरम्भिक बाल कथाक आकृति देखबैत अछि तहिना अवेस्ताक गिलगमेशक कथा सेहो। ऋगवेदोसँ पहिने गाथा, नाराशंसी आदिक मौखिक साहित्य छल आ ओइ लेल ऋगवेदमे गाथापति, गाथिन आदिक प्रयोग अछि।

"पंचतंत्र" आ ओकर किछु कथाक पुनर्लेखन "हितोपदेश" सँ बहुत पहिने जातक कथा बाल कथा कहलक आ सेहो चिड़ै चुनमुनीक संग मालजाल आ जानवरक माध्यमसँ, ओना जातकक उद्देश्य बौद्ध धर्मक प्रचार सेहो रहै। अही तरहेँ पंचतंत्र बाल कथा कहैत कहैत स्त्री-शूद्रक प्रति पूर्वाग्रह कथामे पैसेलक, आ तेँ ओकर पुनर्लेखनक आवश्यकता अनुभूत भेल। ऋगवेदक आख्यान संवादकेँ जन्म दै छल, जे पौराणिक कथा ख़त्म कऽ देलक आ तेँ ओइ पौराणिक कथा सभक पुनर्लेखन अखुनका हिसाबे हेबाक चाही।

आधुनिक बाल कथा केहुन हुअए?

ओइमे आधुनिक विज्ञान द्वारा पसारल नीक तत्वक संग पर्यावरण चेतना सेहो हेबाक चाही। माने कथा बुद्धिपरक नै व्यवहारपरक हेबाक चाही।

बालकथामे मनोरंजन आ ज्ञानक समावेश लेल विज्ञान, समाज विज्ञान परक कथा लिखबाक आवश्यकता अछि। बच्चा अपन धरोहरिकेँ बुझए, तेँ लोक कथा, परीकथा, जादू कथा कहल जा सकैए मुदा ई अंधविश्वास नै बढ़बए तइ तरहेँ ओकर लेखन पुनर्लेखन हेबाक चाही।

 


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विदेह भाषा सम्मान २०१-१ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कार)

२०१ बाल साहित्य पुरस्कार श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल।

२०१ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल।

२०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल।


२०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल।





मोहनदास:
https://docs.google.com/a/videha.com/viewer?a=v&pid=sites&srcid=dmlkZWhhLmNvbXx2aWRlaGEtcG90aGl8Z3g6NjQ0NzliM2I1MTIyZTg1ZA


(विदेह ई पत्रिकाकेँ ५ जुलाइ २००४ सँ खन धरि ११ देशक १,६२६ ठामसँ ८५,६२२ गोटे द्वारा ४३,६३१ विभिन्न आइ.एस.पी. सँ ३,७४,६०६ बेर देखल गेल अछि; धन्यवाद पाठकगण। - गूगल एनेलेटिक्स डेटा।)


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गजेन्द्र ठाकुर

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