प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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अंक ३५७ पर टिप्पणी

मनोज पाठक
सादर नमन, सस्नेह स्मरण। जखन लिंक आयल छल तऽ वेबसाइट पर जा कऽ देखने रही। नीक अंक बनल अछि। पढने जें कि दुइये टा आलेख रही, श्री आशीष जीक आ कुणाल भैयाक। आब पीडीएफ प्रति मोबाइल संग संग घूमैत रहत आ पूरा अंक पढि टिप्पणी करब। अहांक माध्यमसं मैथिली साहित्य जगतमे व्यापक परिवर्तन अयलैक अछि। तथाकथित आलोचक आ विद्वान एकरा नहि गछता मुदा मैथिली भाषा ओ साहित्य अपन डिजिटल स्वरूपमे जे एखन घनगर भेल अछि ओहिमे अहांक एकान्त अनवरत तपक प्रभाव सर्वाधिक छैक। विदेह संख्यात्मक ओ गुणात्मक दुनु तुला पर प्रचुर साहित्य रचलक। एकर निरन्तरता ओ नव नव संभावना लेल सदैव खुजल अबाधित मंच मीलक पाथर अछि मैथिली भाषा ओ साहित्यक लेल। सस्नेह।

शुभ नारायण झा

सर पढ़लौं। सबहक आलेख। बहुत नीक लागल। अपने सब एते पुण्य कायल जे कोनो रंगकर्मी हेतु विशेषांक निकालल । भले हुनक साहित्यिक प्रतिभा के ध्यान राखि अपने ई अंक निकालने होइ। बहुत बहुत धन्यबाद।

(शुभ नारायण जी- ओना तँ प्रेमलता मिश्र प्रेम विशेषांक हुनकर साहित्यिक नै मात्र रंगमंचीय प्रतिभाकेँ ध्यानमे रखैत निकालल गेल अछि, मुदा हुनकामे साहित्यिक प्रतिभा मूल धाराक बहुत साहित्यकारसँ बेशी छन्हि, खास कऽ हुनकर संस्मरणात्मक साहित्य, संजोग देखू जे ऐ बर्खक साहित्य लेल नोबल एकटा महिलाकेँ मात्र संस्मरण लिखबा लेल भेटल छन्हि। मूल धाराक रंगमंचकर्मीमे मूल धाराक साहित्यकार सन बहुत रास समस्या छन्हि मुदा ओ मूलधाराक साहित्यकार सन कोनो हालतिमे अकर्मण्य नै छथि।- सम्पादक)

ग्रुप कैप्टन (डॉ) विवेकानन्द झा
क्षमा करू गजेंद्र बाबू ! कने टा विज्ञान व औषधि शास्त्र की पढ़लहुँ कि मैथिली साहित्य सं वंचित भऽ गेल छी। ३० वर्ष के वायुसेना सेवा व ७ वर्ष के वैज्ञानिक अनुसंधान व विकास कार्य हमरा साहित्य सं बहुत दूर पहुँचा देने अछि। हमर मैथिली साहित्यिक ज्ञान बड़ ओछ अछि। संलग्न विषय वस्तु हमर समझ के परे अछि, कोनो मंतव्य देमे मे असमर्थ छी। क्षमा करू।
आशीष अनचिन्हार

"मैथिलीपुत्र प्रदीप" जीपर केंद्रित मोनोग्राफ जे प्रेमशंकर झा "पवन" द्वारा लिखल जा रहल अछि तकर स्वागत। आगू ई केहन रहत तकर उत्सुकता बनल अछि। जेना कि मोनोग्राफ प्रमाणिक होइत छै तँइ पवनजीसँ उम्मेद जे ओ हरेक तथ्यकेँ लिखता, हुनकर हरेक पोथीक चाहे ओ प्रकाशित हो कि अप्रकाशित ओकर सूची एहिमे देताह। हुनकर जीवन केर ओहन पक्ष जे एखन धरि नै आएल समाजक सामनेमे सेहो ओ देताह। आगूक अंश आ पूरा मोनोग्राफ पढ़बाक लेल जल्दिए भेटत से उम्मेद अछि।

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