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१.
विनीत उत्पल-पुष्कर
२मनीष झा
"बौआभाई"-
ऋतुपति
बसंत (कविता)-
१

विनीत उत्पल 1978-
आनंदपुरा, मधेपुरा। प्रारंभिक शिक्षासँ इंटर धरि मुंगेर जिला अंतर्गत रणगांव आ तारापुरमे। तिलकामांझी भागलपुर, विश्वविद्यालयसँ गणितमे बीएससी (आनर्स)। गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालयसँ जनसंचारमे मास्टर डिग्री। भारतीय विद्या भवन, नई दिल्लीसँ अंगरेजी पत्रकारितामे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्लीसँ जनसंचार आऽ रचनात्मक लेखनमे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनफ्लिक्ट रिजोल्यूशन, जामिया मिलिया इस्लामियाक पहिल बैचक छात्र भs सर्टिफिकेट प्राप्त। भारतीय विद्या भवनक फ्रेंच कोर्सक छात्र। आकाशवाणी भागलपुरसँ कविता पाठ, परिचर्चा आदि प्रसारित। देशक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे विभिन्न विषयपर स्वतंत्र लेखन। पत्रकारिता कैरियर- दैनिक भास्कर, इंदौर, रायपुर, दिल्ली प्रेस, दैनिक हिंदुस्तान, नई दिल्ली, फरीदाबाद, अकिंचन भारत, आगरा, देशबंधु, दिल्ली मे। एखन राष्ट्रीय सहारा, नोएडा मे वरिष्ट उपसंपादक।
पुष्कर
पुष्करक घाटपर बैसल
ओहि साँझ पोखरिकेँ निङहारैत
लोक-वेदक मुद्राकेँ देखैत
वेदपुराण, वाल्मिकी रामायण आ
महाभारत मनमे घुमैत
एक-एक दृश्य मनकेँ उमंगित करैत रहैत
एहि ठाम ब्रह्म यज्ञ कईने छलाह
एहि ठाम भगवान राम पिता दशरथक श्राद्ध कएलन्हि
एहि ठाम श्रीकृष्ण दीर्घकाल धरि तपस्यामे लीन छलाह
एहि ठाम सुभद्राक अपहरण कऽ अर्जुन विश्राम कएने छलाह
चारू दिस अरावलीक पहाड़
सहृदय नाग पर्वतमालाक आंचरमे
बावन घाटक ई सरोवर
कतेक खिस्सा अपनामे
समेटने अछि
अगस्त्य, भतृहरि,
जमदाग्नि ऋषि
विश्वामित्र, कपिल
आ कण्व मनीषीक
तपस्या आ यज्ञ स्थली अछि
ई तीर्थराज पुष्कर जयपुर घाटसँ
सूर्यास्तक दृश्य
रामानुज संप्रदायक विशाल बैकुंठ मंदिरकेँ तारैत
आदि शंकराचार्यकेँ मन पाड़ैत
मन प्रफुल्लित आ उद्वेलित भऽ जाइत अछि
पुष्करक हवा-बसात, मंदिर आ घाटक दृश्य
गोकुलचंद पारेखक कएल जीर्णोद्धार मंदिर
आ आदि शंकराचार्यक स्थापित कएल ब्रह्माजीक मूरूत
एतए आबए बला लोककेँ मोन पाड़ैत अछि
कहबी ‘सारे तीरथ बार-बार, पुष्कर तीरथ एक बार’
२.
मनीष झा
"बौआभाई"
ऋतुपति बसंत (कविता)-
स्वागत अछि हे
ऋतुपति बसंत
वर्णनीय छी
अहाँ अनंत
स्वागत अछि
हे ऋतुपति बसंत
नवपल्लवक संग सुशोभित
मज्जर देखि होइत मनमोहित
बाट बटोही सहजहि आकर्षित
गाबथि वर्णन ऋषि-मुनि-संत
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसंत
वीणा वादिनी देलन्हि प्रवेश
वरमुद्रा में हरलन्हि क्लेश
ऋतुराजक छन्हि गुण विशेष
गुण वखानक कोनो ने अन्त
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसंत
मधुर सुगंध पसारैत महुआ
टिप-टिप झहरैत आमक मधुआ
गँहुमक खेतक हरियर बथुआ
तीसी सरिसव बनल महंथ
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसंत
रंग अबीरक संग में होली
बूढ सियानक अलगहि टोली
नेना भुटकाक टुनटुन बोली
माटि लेटायल छोटका जन्त
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसन्त
कुहू-कुहू कोइली गीत सुनाबय
मोर आ मोरनी पंख पसारय
बोल पपिहराक बड़ मन भावय
विहुँसैत "मनीष" निपोरैत दन्त
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसन्त

