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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

विदेह नूतन अंक पद्य

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श्री कालीकान्त झा "बुच"

कालीकांत झा "बुच" 1934-2009

हिनक जन्म, महान दार्शनिक उदयनाचार्यक कर्मभूमि समस्तीपुर जिलाक करियन ग्राममे 1934 . मे भेलनि  पिता स्व. पंडित राजकिशोर झा गामक मध्य विद्यालयक

प्रथम प्रधानाध्यापक छलाह। माता स्व. कला देवी गृहिणी छलीह। अंतरस्नातक समस्तीपुर कॉलेज,  समस्तीपुरसँ कयलाक पश्चा बिहार सरकारक प्रखंड कर्मचारीक रूपमे सेवा प्रारंभ कयलनि। बालहिं कालसँ कविता लेखनमे विशेष रूचि छल  मैथिली पत्रिका- मिथिला मिहिर, माटि- पानि,भाखा तथा मैथिली अकादमी पटना द्वारा प्रकाशित पत्रिकामे समय - समयपर हिनक रचना प्रकाशित होइत रहलनि। जीवनक विविध विधाकेँ अपन कविता एवं गीत प्रस्तुत कयलनि।साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा प्रकाशित मैथिली कथाक इतिहास (संपादक डा. बासुकीनाथ झा )मे हास्य कथाकारक सूची मे, डा. विद्यापति झा हिनक रचना ‘‘धर्म शास्त्राचार्य"क उल्लेख कयलनि । मैथिली एकादमी पटना एवं मिथिला मिहिर द्वारा समय-समयपर हिनका प्रशंसा पत्र भेजल जाइत छल । श्रृंगार रस एवं हास्य रसक संग-संग विचारमूलक कविताक रचना सेहो कयलनि  डा. दुर्गानाथ झा श्रीश संकलित मैथिली साहित्यक इतिहासमे कविक रूपमे हिनक उल्लेख कएल गेल अछि |



गै खुशबू !!

(बाल साहि‍त्‍य)

 

बाबा मालबावू नाना छौ कमाल बाबू गै

पप्‍पा रोकड़ि‍या लग नानी मारौ टाल बावू गै।

बाबा खाति‍र चाहक गि‍लास

लबलब लबनी नाना पास

नानी चुक्‍का ढारौ बान्‍हि‍-बान्‍हि‍ रूमाल बाबू गै।

बावा लेलनि‍ मॉछे कीन,

नाना खेलनि‍ मुरगा तीन

नानी भनसा घरमे लगा रहल छौ ताल बावू गै।

बाबा वॉचथि‍ वेद पुरान

नाना पढ़थि‍ नेवाज कुरान

नानी मुल्‍ला जीसँ पूछि‍ रहल छौ हाल बावू गै।

नाना भोरे भगला बाहर

नानी सॉझे पहुँचलि‍ ठाहर

ई सभ कहए आएल वि‍द्याधर आ लाल बावू गै।

                       

 

वंदना

(बाल साहि‍त्‍य)    

अम्‍ब, अहाँक महि‍माक मधुर वर गीत कोना हम वालक गाबी?

समुचि‍त शब्‍द ने आबि‍ रहल अछि‍, सप्‍तक स्‍वरालाप नहि‍ पाबी।।१।।

तोरेमे स्‍ति‍त्‍व बनल, तोँ रखलह जठरक उमड़ल सरमे

रहल एहब हम कमल बनल, नि‍ष्‍चय रसभरल सुशील घरमे।।

जन्‍मए काल नाल लागल छल-तकर प्रणाम जनौलनि‍ बाबी।।

अम्‍ब, अहॉंक महि‍माक मधुर गीत कोना हम वालक गाबी।।२।।

टूटल गँट, पॉंक छूटल, दल गमकि‍ गेल महमह गहवरमे

सुनल देवि‍, ताेँ सूँधि‍ लेलह, संतुष्‍ट भेलहुँ, छल हास अधरमे

आइ अहॉंक नि‍रमाल बनल छी खसल, हमर चलि‍ गल नवावी।

अम्‍ब, अहॉंक महि‍माक मधुर वर गीत कोना हम वालक गाबी? ।।३।।

दुर्दिन बनि‍ बटबीज खसल, जनमल, बढ़ि‍ गेल, वि‍शाल बनल अछि‍

आलि‍ंगन-अपवर्ग, अंकक स्‍वर्ग, मर्त्‍यपद छोड़ा चलल अछि‍

कहह कहह देवि‍, कि‍ए, एहि‍ कुलकुठारसँ छह वेदावी?

अम्‍व, अहॉंक महि‍माक मधुर वर गीत कोना हम बालक गाबी? ।।४।।

नव-मासक अवि‍राम भारकेँ, कएलह वहन मधुर मुस्‍कीसँ

हमरा ठोरक तरल मैल लगलह प्रि‍यतर चाहक चुश्‍कीसँ

फाड़ि‍ दैह वरू आइ जननि‍, हम तोरे देहक पत्र जवावी?

अम्‍ब, अहॉंक महि‍माक मधुरवर गीत कोना हम बालक गाबी? ।।५।।

 



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