प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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सुषमा ठाकुर



स्वतंत्रता


बहुत गौरवक बात ऐछ सब भारतवासी के लेल
जे सब क्यो स्वतंत्रताक पचहत्तरवां अमृत महोत्सव
मना रहल छी। अखुनका समय में भारत हरेक क्षेत्र में
आगू बढि रहल ऐछ। विश्व में अपन अलग नाम अलग
छाप छोड़ने ऐछ। बहुत संघर्ष और त्याग बलिदानक
बाद भारत माता के अंग्रेजक चंगुल से मुक्त कराओल
गेलैन आओर भारत माता स्वतंत्र भेली ।मुदा
एकटा प्रश्न सदिखन मोन मे चलैत रहैये कि
स्वतंत्र देश में रहितो बहुतो भारतवासी स्त्री
अपन स्वतंत्रता के लेल संघर्ष कऽ रहल‌ छैथ।
बहुत दुर्भाग्यपूर्ण ऐछ। जाबेत धरि हिनका
सबके अपन जीनगीक जीयै के पूरा अधिकार
नहि भेटतैन ताबेत धरि स्वतंत्र देश में रहितो
परतंत्र छैथ। प्रयास करू सब क्यो जे इ असमानता
दूर हुवे आओर ओहो सब अपना के स्वतंत्र बुझहैथ।
जहिया इ असमानता दूर भऽ जाएत तहिया सही
रूपमे हरेक भारतवासी स्वतंत्र कहायब।
जय हिन्द जय भारत

मुस्कान


नहि जानि कतए हेरायल मुस्कान
एमहर ओमहर सगरो ताकल
बाट-बटोही सबतैर पुछल
हारि-थाकि के विवश भऽ बैसल
कतौ नहि भेटल मुस्कान
नहि जानि कतए हेराएल मुस्कान
सोइच-सोइच के मोन अकुलाएल
भूख-प्यास ,नीन्न , सुख शांति पराएल
कोन कोण में ऐछ नुकाएल
भटकि रहल मुस्कान
नहि जानि कतए हेराएल मुस्कान
राति ओ सपना में आएल
देखि के ओकरा नयन जुड़ाएल
हर्षित भऽ नोर डबडबाएल
घुरि घर आ मुस्कान
नहि जानि कतए हेराएल मुस्कान
ब्यर्थ चिंतन के तऽर दबाओल
सचेत चेतना के सुताओल
ब्यथित भऽ ओ अंतर्मन के घर बनाओल
रूसिके ठोर छोड़ि भागि गेल मुस्कान
नहि जानि कतए हेराएल मुस्कान।

 

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