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१.
सत्यानंद
पाठक,
गुवाहाटी- आह!
जाड
चलि
गेल!
२.दयाकान्त-ई छी मैथिल के
पहचान
१
सत्यानंद
पाठक,
गुवाहाटी
आह! जाड चलि गेल!
कहलखिन्ह बाबू साहब
त हुनक आह में देखलहुं
कतेक रास दुख
कतेक रास अफसोस
आ ओहि संग पसरल
बोतल सभ, बसिया थारी
जाहिमे कांट-कूश ओंघरायल
कहि रहल छल कथा जाडक
आह! जाड चलि गेल।
बाबू साहब कहलथिन्ह
जाड सन सोहनगर आर कुनो मौसम नहिं
घरे रहू सभ किछु अगा पाछा
घरक आगामे घूर
घरमे घुरक सामान
बस! बाबू साहब के की चाही।
दिन जखन
आंखि बन्न कऽलैत छलैक आ
चढैत रातिमे ठिठुरन
तेज भय जाइत छलैक तऽ
बाबू साहब गरमाए लगैत छलाह
आ जा धरि आंखि फुजल रहैत छलनि
देह गरमायल रहैल छलनि
आ दिन कऽ सेहो
ओहने हवा-बसात
ओहने करियौन मेघ
त दिन सेहो घरमे गरमायल रहैत छलैक
मुदा आई भोरे जखन
आंखि फुजलैन तऽ
नुकायल सूरज
भक्क दऽ सुझलैन।
आह! जाड चलि गेल।
चहकि उठल जकांताक बेटा
बेटी आ कनिया तखन
काजमे लागल छलथिन्ह
जकांताक बेटा
सूरज देखिते फुर्र सऽ घर सँ
निकलल।
माए-बहिन अचरजमे
ई छौंडा-एक मास सँ
घरमे छल दुबकल।
कोना फुर्ती आबि गेलै।
आ जकांताक बेटा
घर सँ सडक पर आबि
दुनू हाथ ऊपर उठा
कहि रहल छल
आह! जाड चलि गेल।
ई जाड ओहि जाड सँ बेसी
कनकनी वला छल।
दिन-राति एक्के
धस स अनवरत बहैत बसात।
तीरो सं चोख
सोझे जेना
छाती- पेट, पएर सँ होइत।
पंजरामे धंसि जाइत छलैक
बाबू साहबक दरवज्जा पर
अनवरत सुलगैत घूर दूरे सं देखि
संतोष करऽ पडैत छलैक।
जारनि सँ चूल्हि जडत
घूरक ले कतऽ सँ आयत
तऽ सांझ पडिते जखन
बसात तेज भऽ जाइत छलैक
दांत ठिठुरऽ लागैत छलैक
जकांताक बेटा
फलालैन केर फाटल गंजी सँ
उघरल देह केँ झांपक
प्रयास करैत चुल्हाक आगामे बैसल
मायक पांजडि सँ सटि जाइत छल।
पटिया पर देह के
संकोचने आ पटिया ओढने
जकांताक परिवार
बेढ वाला घरमे
एक दोसराके सटने राति काटि लैत छलैक
मुदा, जकांताक बेटा
अपन बाप सँ कहियो
ई पूछबाक साहस नहि केलक
जे अतेक जाडे ओ
अन्हरोखे दाऊन करऽ किएक
चलि जाइत छलैक
ओढय वाला पटिया तखन
से नहि भेटति छलैक।
मुदा आई-सभ खतम
किएक तऽ सुनू कहैत अछि
जकांताक बेटा
आह! जाड चलि गेल।
आह! जाड चलि गेल!
२
दयाकान्त
ई छी मैथिल के
पहचान
भरि दिन
चुन-तम्बाकू खेsता
चिबबैत रहताs
गुटका,
पान
जम्हरे देखु
थुकैत रहताs
मार्केट,
ऑफिस हो वा
मकान
ई छी मैथिल
के पहचान
बात-बात पर
झगरैत
रहताs
नहि बजवाक
कोनो ठेकान
एकबेर दोसर
डपिट दैन तs
लगताह भिजल
बिलारी समान
ई छी मैथिल
के पहचान
गाम
छोरि परदेश
बसै छैथ
तखनो नहि
दोसर सs
मिलान
भरि दिन
दोसरक निंदा करताs
टांग घिचाई
मे सत्तत प्रधान
ई छी मैथिल
के पहचान
मैथिलि बजवा
मे परहेज करताs
नहि छैन
दोसर भाषा के ग्यान
कह्बैंन ई
शब्द एना बाजु तs
कहताs
हम छी कोनो
अकान
ई छी मैथिल
के पहचान
अप्पन मेहनत
लगन के बल सs
कs
लैत छैत
कंपनी मे नाम
परमोसन
कs
बेर मे सदिखन
नहि रहैत
छैन बाँस सs
मिलान
ई छी मैथिल
के पहचान
सरकारी हो व
गैरसरकारी
भेटत मैथिल
उच्च स्थान
कोनो कजाक
आस राखब तs
नहि होयत
पुरा कुनु ठाम
ई छी मैथिल
के पहचान
सफल
प्रत्यासी के लिस्ट मे
सब सs
आगु
मिथिलाधाम
हिनक लगन,
प्रतिभाक
आगु
दैत अछि सब
दंडप्रणाम
ई छी मैथिल
के पहचान
नहि मैथिल
ककरो सs
पाछु
पाछु अछि
मिथिलाक गाम
रहलै हमर
भुगोल मे सदिखन
जिबछ,
कोशी,
कमला बालन
ई छी मैथिल
के पहचान
हमर मैथिलि
भाषा सन मिठगर
नहि अछि
कोनो दोसर ठाम
आपस मे सब
मैथिलि बाजु
चाहे लोक
मुनैया कान
ई छी मैथिल
के पहचान

