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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)2004-2018.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

रबीन्द्र नारायण मिश्र- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपन्यास नमस्तस्यै (आगाँ)

 

रबीन्द्र नारायण मिश्र

रबीन्द्र नारायण मिश्रक

तीनिटा आलेख

 

संपत्ति हस्तांतरण

संपत्ति हस्तांतरणअधिनियम, 1882 १ जुलाइ १८८२सँ लागू भेल।संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम स्वैच्छिक हस्तांतरण-बिक्री, बन्हक (भरना), उपहार, अदला- बदली, चार्जपर लागू होइत अछि।विरासात, दिवालिआपन, जव्ती, न्यायलयक आदेशक अनुपालन हेतु,, वा इक्षा पत्र द्वारा कानूनक अनुपालनक हेतु कएल गेल संपत्तिक हस्तान्तरणपरसंपत्ति हस्तांतरण अधिनियमलागू नहि होइत अछि।

क्यो अपन संपत्ति किएक बेचैत अछि? पैसाक प्रयोजन भेला पर-जगजाहिर जबाब अछि।बेचएबलाकेँ उचित पैसा भेटि जाइक आओर किननाहरकेँ सही सलामत संपत्ति जेना जमीन, मकान, फ्लैट, भेटिजाइक जाहिपर किननाहर निर्वाध रूपसँ मालिकाना हक प्राप्त कए सकए, ओकर स्वेक्षा एवम् कानून सम्मत तरीकासँ ओकर ऊपभोग कए सकए।एहन नहि होइक जे कीननाहर सभटा पैसा दए दैक मुदा कीनल गेल संपत्तिपर क्यो आन अपन हक लए ठाढ भए जाइक, किंबा बलपूर्बक ओहि संपत्तिपर कव्जा बनओने रहए।कएबेर एहनो होइत अछिजे एकहिटा संपत्ति कैगोटाक हाथे बेचि देल गेल हो किंवा ओहि संपत्तिपर बैंक वा कोनो आओर व्यक्तिक कर्जा होइक आओर ओहि तरे ओ संपत्ति बन्हक पड़ल हो।ताहि हेतु ई आवश्यक अछि जे कोनो संपत्ति कीनबासँ पूर्व क्रेता उचित पूछताछ कए सुनिश्चित कए लेथिजे ओहि संपत्तिपर कोनो लफड़ातँ नहि अछि।

संपत्तिक हस्तान्तरणक समयमूलतः निम्नलिखित बातक ध्यान राखब जरूरी थिकः

१.बेचनाहरकेँ ओहि संपत्तिपर पूर्ण कानूनी अधिकार हेबाक चाही, ताहि हेतु ओकरासँ संपत्तिक मूल दस्ताबेजक मांग जरूर करबाक चाही, मात्र फोटोकाँपी देखिकए सौदा नहि तय कए लेबाक चाही।

२.सब-रजिष्ट्रारक कार्यालयसँ एहि बातक पक्काजानकारी लेबाक चाहीजे ओ संपत्ति भरना/बन्हकतँ नहि अछि।

३.सब-रजिष्ट्रारक कार्यालयसँ एहि बातक एहि बातक जानकारी सेहो लेबाक चाहीजे ओ संपत्ति कहीं पहिने ककरो हाथे बेचि देल गेल तँ नहि अछि?

४.एहि बातक जानकारी लेबाक चाहीजे बेचनाहर ओहि संपत्तिकेँ कतएसँआ केना प्राप्त केलक, ताहि दस्ताबेजकेँ देखि कए सुनिश्चित करबाक चाही जे बेचनाहर सही आदमीसँ ओ संपत्ति कीनने अछि, माने जे जकरासँ ओ ओहि संपत्तिकेँ कीनलक तकर ओकरा बेचबाक पूर्ण अधिकार रहैक कि नहि, अन्यथा काल्हि भेने क्यो सामने आबि कए कहि सकैत अछिजे ओहि संपत्तिमे हमरो हिस्सा छल, तकरा क्यो आन कोना बेचि देलक? एहन नहि हो जे पैसा खर्चो केलाक बाद लफड़ा भए जाए।

कोनो संपत्ति कीनबासँ पहिने की करबाक चाही?

१. पहिने ई पता करी जे ओ संपत्ति बेचनहारकेँ कतएसँ प्राप्त भेल? की ओ ओकरा कानून एवम् दस्ताबेजकअनुसार अधिकार प्राप्त व्यक्तिसँ कीनने अछि? ताहि हेतु विक्रयक अनुवंधक बजाप्ता निवंधन (सेल डीडक निबंधन) भेल अछि कि नहि? तकर प्रमाणस्वरूप दस्ताबेज देखल जाए।

२. बेचनहारकओहि संपत्तिपर कव्जा अछि के नहि?

३. ओहि संपत्तिकेँ बन्हक राखि कर्ज तँ नहि लेल गेल अछि, जँ लेल गेल अछि तँ कर्जक आपसी भेल कि नहि,

४. संपत्तिक उपर कोनो टैक्सबाँकी तँ नहि अछि?

५. जौं संपत्ति स्वअर्जित नहि अछि तँ ओहिमे आनो लोकक हिस्सा छैक कि बेचनहारएसगरे ओकर हकदार अछि,

६. संपत्तिक दाखिल खारिज बेचनिहारक नामे अछि कि नहि,

७. संपत्तिक वास्तविक नापीक अनुसार ओकर रकबा दस्तावेजमे देल गेल विवरणसँ मेल खाइत अछि कि नहि?

संपत्ति बेचनिहारक ओहि संपत्तिपर अधिकार सुनिश्चित कएलेलाक बाद कीननाहर एवम् बेचनिहार आपसमे एकटा सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करताह।ओहिमे क्रय विक्रयक सभटा शर्त लिखल जाएत, जेना संपत्तिक मूल्य, भूगतानक शर्त।उचित मूल्यक स्टांप पत्रपरसहमति पत्र पर बेचनाहर किननाहरक अतिरिक्त दूटा गवाहक हस्ताक्षर होएब जरूरी थिक।

कोनो संपत्तिक हस्तान्तरण हेतु निवंधनसँ पूर्व ओहि राज्यमे लागू कानूनक तहत सटांप पेपर लेब आवश्यकथिक।आइ-काल्हि स्टांप पेपर आनलाइन भेटि जाइत अछि।ताहि हेतु आनलाइन भूगतान कए ओकरजानकारी आनलाइन स्टांप पेपर विक्रेताकेँ देब जरूरी थिक। पेमेंटक सूचना प्राप्त होइते ओहि सुविधाकेन्द्र द्वारा स्टांप पेपरकेँ आनलाइन निकालिलेल जाइत अछि।एहि तरहे आसानीसँ भारी मूल्यक स्टांप पेपरकेँ प्राप्त कएल जा सकैत अछि।

स्टांप ड्युटीक गणना हेतु बेचल जा रहल संपत्तिक सर्किल रेटक आधार पर कएल जाइत अछि।जौं जमीनपर मकान सेहो बनल अछि तँ ओकर अलग-अलग गणना कएल जाइत अछि। विक्रय मूल्य, सरकारी सर्किल रेटदुनूमे जे ज्यादा होएत ताहि हिसाबसँ स्टांप ड्युटी लागत। तकर अलाबा निवंधन शुल्क सेहो अलगसँ देबए पड़ैत अछि।जौं सर्किल रेटक हिसाबसँ उचित स्टांप ड्युटी नहि देल जाइत अछितँ निवंधन खारिज भए सकैत अछि।

मुख्तारनामा(power of attorney) :

मुख्तारनामा/वकालतनामा (पावर आफ अटर्नी)क आधारपर कएल गेल संपत्तिक हस्तानान्तरण :

माननीय उच्चतम न्यायलय सूरज लैम्प एवम् इन्डस्ट्रीज बनाम हरियाणा सरकार एवम् अन्यक मामलामे निर्णय देलक अछि जे मुख्तारनामा (पावर आफ अटर्नी)क आधारपर संपत्तिक हस्तानान्तरण गैरकानूनी थिक।मुख्तारनामा (पावर आफ अटर्नी) मूलतः निकट सम्बन्धीजेना पिता, पुत्र, पत्नी वा खास मित्रक पक्षमे एहि हेतु कएल जा सकैत अछिजे संपत्तिकमालिक कोनो खास वजहसँ ओहि संपत्तिकक्रय विक्रयक निवंधनमेउपस्थित नहि भए सकैत अछि, (जेना कि क्यो विदेशमे हो )

(R.V. Raveendran, A.K. Patnaik, H.L. Gokhale IN THE SUPREME COURT OF INDIA CIVIL APPELLATE JURISDICTION SPECIAL LEAVE PETITION (C) NO.13917 OF 2009)

निवंधनक समय कीननाहर, बेचनाहरक अलाबा दूटा गवाहक उपस्थिति जरूरी अछि। ओहि गबाहक हस्ताक्षरकबाला (सेल डीड) पर जरूरी थिक। संपत्तिक क्रय विक्रयक निवंधनक समयमे कोनो कारणसँ बेचनिहार किंवा कीननाहर स्वयं उपस्थित नहि भए सकैत अछि तँ कोनो सम्बन्धी वा मित्रकेँ उचित मुख्तारनामा(power of attorney) दए ई काज करावोल जा सकैत अछि।

जौं विक्रय मूल्य पचास लाखसँ बेसी अछि तँ कीननाहरक ई कर्तव्य अछि जे विक्रय मूल्यक एक प्रतिशत काटि कए उचित चालान प्रपत्र द्वारा आयकर विभागमे आनलाइन वा बैकमे जमा कए देथि अन्यथा ओ आयकर विभागक चपेटमे  आबिसकैत छथि। एहि तरहेँ काटल गेल टाका आयकर विभाग द्वारा आयकर रिटर्न भरलापर कुल देय आयकरमे मिन्हा कए देल जाइत अछि।

सेल डीडक मसौदा :

सेल डीडक मसौदा तैयार करबामे प्रचुर सावधानी राखब जरूरी थिक। ओहिमे संपत्तिक चौहद्दी, रकबा, खाता नंबर, खेसरा नंबर, सहित ओकर पूर्बक मालिकक वर्णन हेबाक चाही।विक्रयमूल्य सहित वेचनिहार एवम् कीननाहरक विवरण हेबाक चाही।बेचनिहार द्वारा स्पष्ट घोषणा हेबाक चाही जे ओ ओहि संपत्तिक पूर्ण मालिक अछि, जे ओहि पर कोनो आन व्यक्तिक अधिकार नहि अछि, जे कोनो तरहक कानूनी विवाद ओहि संपत्तिपर नहि अछि, जे ओ संपत्तिपर कोनो कर्ज नहि बाँकी अछि, आदि, आदि। सेलडीडमे इहो लिखल जेबाक चाही जे ओ संपत्ति बेचनिहारक स्वअर्जित अछि, जौं से नहि अछि आओर ओ संपत्ति संयुक्त परिवारक पुस्तैनीसंपत्तिक हिस्सा अछि तखन ओकरा दियादी बटबाराकसंगे ई प्रमाण देबाक चाही जे ओ संपत्ति ओकरे हिस्साक अछि आओर ओहिपर कोनो आन पटिदारक हक नहि छैक।जौं ओहिमे आनो पटिदारक हिस्सा सामिल छैक, तखन ओहि संपत्तिक विक्रय पत्र (सेल डीड) पर सभ पटिदारक दस्तखत जरूरी अछि आन्यथा भविष्यमे ओहिपर कानूनी झंझटि भए सकैत अछि।सेलडीड (विक्रय पत्र)क निवंधनक बाद कीननाहर द्वारा बेचनिहारकेँ विक्रय मूल्यक पूरा भूगतानक बादेसेलडीड (विक्रय पत्र) कीननाहरकेँ देलजाइत अछि।

जमीन-मकानक क्रय विक्रय सामान्यतः कमे काल होइत अछि जाहिमे जीवन भरिक कमाओल धन लागि जाइत अछि। तेँ जरूरी अछि जे ई काज पूर्ण सावधानीक संगे कएल जाए। कागज-पत्तर ठीकसँ बनाओल जाए आ कीनल संपत्तिक कव्जा ठीकसँ लेल जाए जाहिसँ बादमे कोनो प्रकारक झंझटिमे नहि पड़ी।q

 


 

 

 

 

क्रान्तिदूत : कबीरदास

ओहि युगमे जखन धार्मिक कट्टरवाद चर्मोत्कर्षपर छल, जखनकि जाति-पातिक भेदबाव समाजक मान्यता प्राप्त केनहि छल संगहि समस्त विधि-विधानकेँ प्राभावित केने छल, कबीर दास एकहिबेर विद्रोहक विगुल बजा देलाह! ओहि युगमे जखन उच्च जातिक लोकक संपूर्ण समाज पर वर्चस्व छलैक, जखन धार्मिक, सामाजिक एवम् आर्थिक शक्ति पूर्णतः किछु व्यक्तिक हाथमे सिमटल छल, -कबीरदास बाजि उठलाहः

एक बूंद एक मल-मूतर, एक चाम एक गूदा।

एक जातिसे सव उपना, कौन वाभन कौन सूदा।।

व्यक्ति-व्यक्तिमे भेदभाव करब कबीरदासकेँ एकदम पसिन नहि छलनि। एहि दृष्टिसँदेखल जाए तँ ओ भक्तिकालक महान साम्यवादीछलाह।मानव-मानवमे विभेद उतपन्न करएबला धर्म, अन्धविश्वास वो वाह्य आडंवरक प्रति जतेक कठोर रुखिकबीरदास अपनओलनि ततेक किओ नहि अपना सकल।हुनकर कहब छलनि जे मानव मात्र एकहि ईश्वरक अंशअछि। प्रकृति सभकेँ एकरंग वनओने अछि, सभक सोनित एकहि रंग अछि, तखन ई विभेद किएक?

एकै पवन एक ही पानी, करी रसोई न्यारी जानी।

माटी सूँ माटी लै पोती, लागी कहौ कहाँ धूँ छोती।।

कबीरदासकेँ जाति विभेद एक्कोरत्ती पसिन नहि छलनि।जन्मभरि ओ पाखंड, सामाजिक अन्याय, जातीय विद्वेष, एवम् आर्थिक शोषणक विरोधमे लड़ैत रहलाह।वाभन, शुद्रक कथे कोन ओ तँ हिन्दू, मुसलमानक विभेदकेँ सेहो स्वीकार नहि करैत छलाह।

जौं तूँ वाभन वभनी जाया, तौ आन बाट है क्यो नहि आया।

जौं तूँ तुरक तुरकनी जाया, तौ भीतर खतना क्यो न कराया।।

कबीरदास उपदेशकवा पुजारी नहि छलाह।जीविकाक हेतु वो जुल्हाक धंधा करैत छलाह, जकरा सामाजिक धरातलपर पैघ काज नहि मानल जाइत छलैक।स्वयं कपड़ा बूनब एवम् दोसर हेतु मजूरीकए कपड़ा बूनबामे अन्तर छैक।कबीरदास कोनो मालिकक काज नहि करैत छलाह।ओ गृह उद्योगक स्वाभिमानक रक्षा करैत पेट भरैत छलाह।ओ अपन व्यवसायमे ततेक रमि गेल छलाह जे हुनक काव्यमे सदति ओही प्रकारक वस्तुसभक वर्णन अछि।एवम् प्रकारेण व्वसायजनित प्रतिष्ठाक सेहो हुनका कोनो परवाह नहि छलनि।

ओ सगर्व कहलाहः

जाति जुलाहा मति को धीर, हरषि-हरषि गुण रमै कबीर।

मेरे राम की अभै पद नगरी, कहे कबीर जुलाहा।

तू वाभन मैं कासी का जुलाहा।।

कबीर दास मौलिक विचारक छलाह।धर्मक वास्तविक तात्पर्यकेँ ओ बुझलाह आओर साधारण जनता धरि ओकरेभाषामे तकरा रखलाह।ताहि हेतु हुनका कोनो दुर्गति वाँकी नहि रहलनि।प्राणोक रक्षा कठिन भए गेलनि।परंतु ओ निर्भयतापूर्वक अपन विचारपर अडिग रहलाह। तत्कालीन समाजक किछुशक्तिशाली लोक कबीरदासक प्रवल विरोध कएलक। तेँ कबीरदासकेँ कहए पड़लनिः

कबिरा खड़ा बजारमे, लिआ लकुटि हाथ।

जो घर जारे आपना, धरै हमारे साथ।।

तमाम विरोधक बाबजूद कबीरदास रूकलाह नहि, अपन विचार लए कए आगू बढ़ैत रहलाह एवम् समयक कसौटीपर सही उतरलाह।

भक्त कबीरक ई अनुभव छलनि जे शास्त्र मर्यादाक संग संप्रदाय निष्ठा जुड़ल होइत अछि।शास्त्र एवम् संप्रदायक सीमानमे रहि कए मानव मात्रक हेतु भक्तिक सर्वसुलभ पथ प्रस्तुत नहि कएल जा सकैत अछि।भक्तिपथक दूटा महान अवरोधथिक-शास्त्र एवम् संप्रदाय जे भक्ति भावनाकेँ सरल सहज रहए नहि दैत अछि।कबीर सहजमे आस्था रखैत छलाह। हुनक लगाव कोनो प्रकारकरुढ़ि एवम् अन्ध मर्यादासँ नहि छलनि।अनुभवकक तराजूपर तथ्य एवम् सत्यकेँ परखि कए ग्रहण त्याग करब हुनकर जीवनक्रम छलनि। धार्मिक अन्धविश्वास एवम् ढ़ोंगकेँ ओ प्रवल विरोधी छलाह।

कंकड़ पाथर जोड़ि कए मस्जिद दिओ बनाय।

ता चढ़ि मुल्ला बांग देइ क्या बहिरो भयो खुदाइ।।

संगहि ओ इहो कहलाहः

पाथर पूजे हरि मिले तोँ मैं पूजूँ पहाड़।

तासे तो चक्की भली पिसे खाय संसार।।

प्रखर मानवतावादी कबीर धार्मिक प्रपंचकेँ चुनौती देलाह। निर्भीक एवम् तटस्थ भावसँ ओ समाजमे वढ़ि रहल ढ़ोंगक विरोध केलाह-

यह सब झुठी बंदगी, बिरथा पंच नबाज।

साँचै मारै झुठि पड़ि, काजी करै अकाज।।

करसे तो माला जपै, हिरदै बहै डमडूल।

पग तो पालामे गिरया, भजण लागी सूल।।

जप-तप संजम पूजा अरचा, जोतिग जग बौराना।

कागद लिखि-लिखि जगद भूलाना, मन ही मन न समाना।।

कबीरदास युग निर्माता छलाह। ओ पारंपरिक लीकसँ हटि कए समाजकेँ एकटा क्रांतिक मार्गपर अनलाह।गरीब-धनीक, ब्राह्मण-शूद्र, आदिक बीचमे वर्ग समन्वयक सहज मार्ग प्रस्तुत केलाह।मानवतावादक प्रचार कए धर्मक वास्तविक अर्थकेँ लोक बूझए, तकर प्रयास केलाह।ओ अपन समस्त जीवनकेँ परोपकार एवम् मानव कल्याणमे लगा देलाह।

मानवमात्रक कष्ट निवारणक हेतु ओ चिंतित रहैत छलाह।

सुखिआ सब संसारहै, खाबे अरु सोबै।

दुखिआ दास कबीर है, जागे अरु रोबे।।

अस्तु, ई तय अछि जे कबीरदास संत आ कवि तँ छलाहे सभसँ बढ़िकए ओ क्रान्तिकारी छलाह।समस्त समाजमे ओ एकटा नवचेतना आनए चाहैत छलाह।वर्ग विभेदकेँ नष्टकए समाजमे मानवतावादक स्थापनाचाहैत छलाह।ईश्वर एक छथि, मनुक्ख एक अछि, विभेद मानव निर्मित अछि-से हुनकर मंत्रवाक्य छल।

समाजक स्थितितँ तेहने छल जे ईश्वरक केबार किछुए लोक हेतु खुजैत छल।तेहन समाजमे ताल ठोकि अपनविचार कहि देब एवम् ओकरा व्यवहारमे आनब एकटा क्रान्ति नहि तँ की छल?प्रयोजन अछि समाजमे एहने व्यक्तित्वकेँ, जे हमरा लोकनिकेँ वर्तमान सामाजिक अन्त्रद्वंदसँ मुक्ति दए सकए।q

 


 

 

 

 

मकर संक्रांति

मकर संक्रान्ति सम्‍पूर्ण भारत ओ नेपालमे सर्वत्र कोनो-ने-कोनो प्रकारसँ मनाओल जाइत अछि। पौष मासमे जखन सूर्य मकर राशिमे अबैत छथि तखने ई पावनि मनाओल जाइत अछि। प्रतिवर्ष मकर संक्रान्ति १४ वा १५ जनबरीकेँ पड़ैत अछि।

तमिलनाडूमे मकर संक्रान्तिकेँ पोंगलकहल जाइत अछि। कर्नाटक, केरल एवम् आँध्रप्रदेशमे एकरा संक्रान्तिये कहल जाइत अछि। पंजाब आ हरियाणामे लोहड़ीकहल जाइत अछि एवम् एक दिन पहिने अर्थात् १३ जनबरीकेँ मनाओल जाइत अछि। उत्तर प्रदेशमे एकरा मूलत: दानक पावनिक रूपमे मनाओल जाइत अछि। प्रयागमे प्रतिवर्ष १४ जनबरीसँ माघमेला प्रारंभ होइत अछि। माघ मेलाक प्रथम स्‍नान १४ जनबरीसँ प्रारंभ भए कए अन्तिम स्‍नान शिवरात्रिकेँ होइत अछि। महाराष्‍ट्रमे एहि दिन विवाहित महिला अपन पहिल संक्रान्तिपर तूर-तेल वा नून अन्‍य सुहागिनकेँ दइ छथि। बंगालमे एहि दिन स्‍नानक बाद तिल दान करबाक प्रथा अछि।

एहि अवसरपर गंगासागरमे प्रतिवर्ष विशाल मेला लगैत अछि। असममे मकर संक्रान्तिकेँ माघ-विहूअथबा भोगाली विहूक नामसँ जानल जाइत अछि। राजस्‍थानमे एहि पर्वपर सुहागिन महिला अपन सासुकेँ वियनि दए आशीर्वाद प्राप्त करैत छथि। संगे कोनो सौभाग्य सूचक वस्‍तुकेँ चौदहक संख्‍यामे पूजन एवम् संकल्प कए चौदहटा ब्राह्मणकेँ दान दइ छथि।

मकर संक्रान्तिक माध्‍यमसँ भारतीय सभ्‍यता एवम् संस्‍कृतिक विविध रूपमे आभास होइत अछि। एहेन धारणा अछि जे मकर संक्रान्तिक दिन शुद्ध घी एवम् कम्‍बलक दान केलासँ मोक्षक प्राप्ति होइत अछि।

माघे मासे महादेव: यो दास्‍पति वृहकम्‍वलम्‍

स भुक्त्‍वा सकलान भोगान अन्‍ते माक्ष प्राप्पति।।

पुराणक अनुसार मकर संक्रान्तिक पर्व व्रह्मा, विष्‍णु, महेश, गणेश, आधशक्ति आ सूर्यक आराधना एवम् उपासनाक पावन व्रत अछि जे तंत्र-मंत्र-आत्‍माकेँ शक्‍ति प्रदान करैत अछि। संत-महर्षि लोकनिक अनुसार एकर प्रभावसँ प्राणीक आत्‍मा शुद्ध होइत अछि, संकल्प शक्‍ति बढ़ैत अछि, ज्ञान तंतु विकसित होइत अछि। मकर संक्रान्ति अही चेतनाकेँ विकसित करएबला पावनि अछि। ई सम्‍पूर्ण भारतमे कोनो-ने-कोनो रूपे मनाओल जाइत अछि।

पुराणक अनुसार मकर संक्रान्तिक दिन सूर्य अपन पुत्र शनिक घर एक मासक हेतु जाइत छथि, कारण मकर राशिक स्‍वामी शनि छथि। यद्यपि ज्‍योतिषीय दृष्टिसँ सूर्य आ शनिक ताल-मेल संभव नहि अछि, तथापि एहि दिन सूर्य स्‍वयं अपन पुत्रक घर जाइत छथि। पुराणमे आजुक दिन पिता पुत्रक सम्‍बन्‍धमे निकटताक प्रारंभक रूपमे देखल जाइत अछि।

मकर संक्रान्तिक दिन गंगाकेँ पृथ्‍वीपर आनएबला भगीरथ अपन पूर्वजक तर्पण केने छलाह। हुनक तर्पण स्‍वीकार केलाक बाद एही दिन गंगा समुद्रमे मिलि गेल रहथि। तँए एहि दिन गंगा सागरमे मेला लगैत अछि। विष्‍णु धर्मसूत्रक अनुसार पितरक आत्‍माक शान्तिक हेतु एवम् अपन स्‍वास्‍थवर्द्धन ओ सबहक कल्याणक हेतु तिलक प्रयोग पुण्‍यदायक एवम् फलदायक होइत अछि। तिल-जलसँ स्‍नान करब, ‘तिलक दान करब, तिलसँ बनल भोजन, जलमे तिल अर्पण, तिलक आहुति एवम् तिलक उवटन लगाएब।

एहि दिन भगवान विष्‍णु असुरक अन्त कए युद्ध समाजिक घोषणा केने छलाह। ओ राक्षस सबहक मुड़ीकेँ मंदार पर्वतमे दबा देने रहथि। एतदर्थ एहि दिनकेँ अशुभ एवम् नकारात्‍मकताकेँ समाप्त करबाक दिनक रूपमे देखल जाइत अछि।

सूर्यक उत्तरायण भेलाबाद देवता लोकनि व्रह्म मुर्हुत उपासनाक पुण्यकाल प्रारंभ होइत अछि। एहि कालकेँ परा-अपरा विधाक प्राप्ति काल कहल जाइत अछि। साधनाक हेतु एकरा सिद्धिकाल सेहो कहल जाइत अछि। एहि समयमे देव प्रतिष्‍ठा, गृह निर्माण, यज्ञकर्म आदि पवित्र काज कएल जाइत अछि।

रामायण कालसँ भारतीय पत्र-पत्रिकामे दैनिक सूर्योपारायणक प्रचलन अछि। रामचरितमानसमे भगवान राम द्वारा गुड्डी उड़ेबाक कार्यक उल्‍लेख सेहो अछि। मकर संक्रान्तिक वर्णन वाल्‍मिकी रामायणमे सेहो भेल अछि।

राजा भगीरथ सूर्यवंशी छलाह। ओ भगीरथ तप-साधनाक द्वारा पापनाशिनी गंगाकेँ पृथ्‍वीपर आनि अपन पूर्वजक उद्धार केने छलाह। राजा भगीरथ अपन पूर्वजक गंगाजल, अक्षत, तिलसँ श्राद्ध-तर्पण केने छलाह। तहिआसँ मकर संक्रान्तिक स्‍नान आ मकर संक्रान्तिक श्राद्ध-तर्पणक परंपरा चलि रहल अछि।

कपिल मुनिक आश्रमपर मकर संक्रान्तिक दिन माँ गंगाक पदार्पण भेल छल। पावन गंगाजलक स्‍पर्श मात्रसँ राजा भगीरथक पूर्वजकेँ स्‍वर्ग प्राप्ति भेलनि।

कपिल मुनि वरदान दैत बजलाह-

मातृ गंगे त्रिकाल तक लोक सबहक पापनाश करतीह एवम् भक्‍तजनक सात पुश्तकेँ मुक्ति एवम् मोक्ष प्रदान करतीह। गंगाजलक स्‍पर्श, पान, स्‍नान ओ दर्शन सभ पुण्‍यदायक फल प्रदान करत।”

सूर्यक सातम किरण भारतवर्षमे आध्यात्‍मिक उन्नतिक प्रेरणादायी अछि। सातम किरणक प्रभाव भारतवर्षमे गंगा-जमुनाक मध्‍य अधिक समय तक रहैत अछि। एहि भौगोलिक स्थितिक कारण हरिद्वार आ प्रयागमे माघमेलाक आयोजन होइत अछि। पितृतुल्‍य भगवान भास्‍कर दक्षिणायनसँ उत्तरायणमे जाइत काल उर्जामयी प्रकाश पृथ्‍वीपर वर्षा करैत छथि। अतुल्‍य शक्‍ति श्रोत प्रकृति रातिकेँ छोट एवम् दिनकेँ पैघ करए लगैत छथि। पृथ्‍वीमाता उदरस्‍थ आनाजकेँ पकबए लगैत छथि। चारू तरफ शुभे-शुभ होइत रहैत अछि। एहेन अद्भुत समयमे मकर संक्रान्तिक पर्व मनाओल जाइत अछि।

सक्रान्तिक दिन पंजाबमे लोहड़ीक नामसँ मनाओल जाइत अछि। पंजाबक अतिरिक्‍त ई पावनि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दक्षिणी उत्तर प्रदेश आ जम्‍मू काश्‍मीरमे सेहो धूम-धामसँ मनाओल जाइत अछि। पारंपरिक तौरपर लोहड़ीफसलक रोपनी आ ओकर कटनीसँ जुड़ल एक विशेष पावनि अछि। एहि दिन वॉंनफायर जकाँ आगिक ओलाव जरा कए ओकर चारूकात नृत्य कएल जाइत अछि। बालक सभ भांगड़ावालिका सभ गिद्धा नृत्य करैत छथि। लोहड़ीक आलावक आसपास लोक एकट्ठा भए दुल्‍ला-भट्ठी प्रशंसामे गायन करैत छथि।

केतेको गोटेक मान्‍यता अछि जे लोहड़ीशब्‍द लोई (सत कबीरक पत्नी) सँ उत्पन्न भेल मुदा अनेक लोक एकरा तिलोड़ीसँ उत्पन्न मानै छथि, जे बादमे लोहाड़ी भए गेल।

लोहड़ीक ऐतिहासिक सन्‍दर्भ सुन्‍दरी-मुंदरी नामक दूटा अनाथ कन्‍या छली। ओकर काका ओकर विवाह नहि करए चाहैत छल अपितु ओकरा राजाकेँ भेँट कए देबए चाहैत छल। ओही समयमे हुल्‍ला भट्टी नामक एकटा उफाँइट छौड़ाकेँ नीकठाम बिआह कए देलक। वएह उफाँइट वरपक्षकेँ बिआहक हेतु मनाओलक आ जंगलमे आगि जरा कए दुनू कन्‍याँक बिआह करओलक। कहल जाइत अछि जे दुल्‍ला शगुनक रूपमे गुड़ देलक। भावार्थ जे उफाँइट होइतो दुल्‍ला भट्टी निर्धन वालिका सबहक कन्‍याँदान केलक एवम् ओकरा अपन कक्काक अत्‍याचारसँ बँचओलक।

लोहड़ीक दिन बच्चा सभ दुल्‍ला भट्टीक सम्‍मानमे गीत गबैत घरे-घर घुमैत अछि। बच्चा सभकेँ मिठाइ एवम् अन्‍य वस्‍तु सभ दैत अछि। जँ कोनो परिवारमे कोनो खास अवसर जेना बच्चाक जन्‍म, विवाह आदि अछि तँ लोहड़ी आर धूम-धामसँ मनाओल जाइत अछि। सरिसवक साग आ मकईक रोटी खास कए एहि अवसरपर बनाओल जाइत अछि।

तामिलनाडूमे एहि समय पोंगलमनाओल जाइत अछि। प्रचूर मात्रामे अन्नक उपजापर भगवान सूर्यकेँ धन्‍यवाद ज्ञापन हेतु पावनिक आयोजन कएल जाइत अछि। तामिलनाडूक अलावा पुडुचेड़ी, श्रीलंका, विश्व भरिमे पसरल तमिल लोकनि एकरा मनबैत छथि। ओइ पोंगलमे चारि दिन तकमाने १४ सँ १६ जनवरी तकमनाओल जाइत अछि।

इन्‍द्र देवताक सम्‍मानमे पहिल दिन भोगी उत्‍सव मनाओल जाइत अछि। पोंगल दोसर दिन माटिक वर्तनमे दूधमे चाउर पका कए खीर भगवान सूर्यकेँ आन-आन वस्‍तु संगे चढाओल जाइत अछि। एहि अवसरपर घरक आगूमे कोलम (अपना ओइठामक अरिपन जकाँ) बनाओल जाइत अछि। पोंगलक तेसर दिन मट्ठू पोंगल कहल जाइत अछि। एहि दिन गायकेँ नाना प्रकारसँ सजा कए ओकरा पोंगल खुआएल जाइत अछि। चारिम दिन कन्तुम पोंगल कहल जाइत अछि। घरक महिला सभ स्‍नानसँ पूर्व हरदिक पातपर मिठाइ, चाउर, कुसियार हरदि आदि राखि कए अपन भाय लोकनिक कल्याण कामना करैत छथि। भाइक हेतु हरदि, चून, चाउरक पानिसँ आरती करैत छथि आ ई पानि घरक आगूमे बनल कोलमपर छिड़कि देल जाइत अछि।

जल्‍लीकट्टू मट्टू पोंगल दिन पोंगल पर्वक एक हिस्‍साक रूपमे खेलल जाइत अछि। एहि लेल ग्रामीण सभ पहिनेसँ साँढ़केँ खुआ-पिआ कए तैयार केने रहैत छथि। एहिमे मूलत: केतेको गामक मन्‍दिरक साँढ़ (कोविल कालइ-तमिल नाम) भाग लैत अछि। जल्‍लीकट्टूक तीन अंग होइत अछि : वाटि मन्‍जू विराट्टू, वेली विराट्टू आ वाटम गन्‍जु विराट्टू। वाटि मन्‍जु विराट्टूमे साँढ़केँ जे व्यक्ति किछु दूरीपर किछु समय तक रोकि लइ छथि, से विजेता होइ छथि। वेली विराट्टूमे साँढ़केँ खाली मैदानमे छोड़ि देल जाइत अछि आ लोक ओकरा नियंत्रणमे करबाक प्रयास करैत अछि। वाटम मन्‍जुविराट्टूमे साँढ़केँ नमगर रस्‍सीसँ बान्‍हि देल जाइत अछि, आ खिलाड़ी सभ ओकरा नियंत्रित करबाक प्रयास करैत छथि।

सम्‍पूर्ण देश जकाँ मिथिलांचलमे सेहो मकर संक्रान्तिक पर्व मनाओल जाइत अछि। गाम-घरमे एकरा तिला संक्रांति सेहो कहल जाइत अछि। अंग्रेजी नया सालक ई पहिल पावनि होइत अछि। लोकक घरमे नव अन्न भेल रहैत अछि। पहिनहिसँ लोक चूड़ा कुटा कए एहि पावनिक तैयारी केने रहैए। अपना एहिठाम माघ मासकेँ अत्यन्त पवित्र मास मानल जाइत अछि। बूढ़-बूढ़ महिला सभ भोरे-भोर जाड़-ठाढ़केँ बिसरैत पोखरिमे डुबकी लगबै छथि। गाममे कएटा मसोमात, वृद्धा सभकेँ थर-थर कँपैत स्‍नान करैत देखैत छलिएनि। सभसँ मनोरंजक दृश्‍य तँ तखन होइत छल, जखन ओ सभ महादेवक माथपर जल ढाड़ैतकाल गाम-घरक सभटा झगड़ा सोझराबएमे लागल रहैत छली। जानह हे महादेव! हमरा पेटमे किछु नहि अछि। हमर मोन गंगासन निर्मल अछि मुदा एहेन अत्‍याचारक निपटान तूँहीं करियह।

..पता नहि, महादेव सुनितो छलखिन की नहि। मुदा हमरा ई सभ सुनि कए जरूर वकोर लागल रहैत छल।

बच्चामे पावनि सभ अद्भुत आनन्‍दक विषय रहैत छल। सभसँ सरल ओ आनन्‍ददायी होइत छल तिला संक्रांति। भोरे-भोर पोखरिमे जा कए डुबकी लगाउ। माइक हाथे तिल-चाउर खाउ। तिल-चाउर खुअबति काल माए पुछथि-

तिले-तिले बहब की नहि?

ताहिपर कहिअनि-

खूब बहब।”

विध समाप्त। तकरबाद चुरलाइ, तिलबा इत्‍यादि भरि मोन खाउ...।

कएक दिन पहिनहिसँ चुरलाइ, तिलबा (तिललाइ) आ लाइ (मुरहीक लाइ) बनेबाक कार्यक्रम प्रारंभ भए जाइत छल। घरक वातावरण चुरलाइक सुगन्‍धसँ परिपूर्ण। एहि पावनिमे सभसँ विशेषता ई अछि पावनिक सामग्री बनि गेल तँ ओकरा लेल बेसी प्रतीक्षा नहि करए पड़ैत अछि। दिनमे व्राह्मण भोजन होइत छल। व्राह्मण कियो आसे-पासक लोक होइत छलाह, कारण भरि गाममे भोजे रहैत छल। बट्टा भरि-भरि घी खिचड़िमे देल जाइत। संगे तरह-तरह केर पकवान सभ सेहो रहैत छल।

हमरा गाममे किछु गोटे ओइठाम तिला संक्रान्तिमे जिलेबी बनैत छल। भोजमे खिचड़िक संग जिलेबी खेबाक बच्चा सभकेँ अद्भुत उत्‍साह रहैत छल। खिचड़िमे ततेक प्रचूर मात्रामे घी रहैत छल जे भोजनक बाद हाथ साफ-साफ धोनाइ कठिन। पावनिक कएक दिन बादो धरि चूरालाइ आ तिलबाक आनन्‍द भेटैत रहैत छल।

एहि पावनिमे चूड़ा, दही, खेबाक सेहो परंपरा अछि। चूरा-दहीक वर्णन करैत खट्टर कका कहलखिन जे जखन पातपर चूड़ाक संग आम, धात्रीक अँचार ओ तरकारी परसल जाइत अछि तँ बुझू जे अन्‍हरिया आबि गेल। तकर बाद जखन दही परसाएल तँ बुझू जे इजोरिया। जेना पातपर चन्‍द्रमा उतरि गेलाह। ऊपरसँ जँ मधुर राखि देल जाए ओ कौर पेटमे गेल तँ पुछू नहि। पुरा सोनित ठण्ढा जाइत अछि आ आत्‍मा तृप्त भए जाइत अछि।

मिथिलांचलमे एहि पर्वकेँ मनेबाक अद्भुत परंपरा अछि। चुरलाइ खाउ, चुरा-दही खाउ, खिचड़ि खाउ, जे खाउ, जखन खाउ...।

वस्‍तुत: ई आनन्‍दक पर्व थिक जे कोनो-ने-कोनो रूपे सम्‍पूर्ण भारतपवर्षमे मनाओल जाइत अछि। सूर्यक तेजक मकर संक्रान्तिसँ जहिना बढ़ैत रहैत अछि, तहिना सभ लोक-वेदक सुख बढ़ैत रहए, सएह एहि पावनिक ध्‍येय थिक।

 

 

रबीन्द्र नारयण मिश्रक

दूटा लघुकथा

पढ़ू पूत चण्डी

समय एक गतिसँ आगा बढ़ल जा रहल अछि। मुदा हम-अहाँ ओकर प्रवाहमे कहि नहि कतए पहुँचि जाइत छी। जेना कोनो तेज धारमे छोट-मोट कतेको वस्तु स्वत: दहाइत कहाँ-सँ-कहाँ पहुँचि जाइत अछि, वएह हाल एहि जिनगीक अछि।

अहाँ की केलहुँ? घूरतर बैसल प्राय: नित्य साँझमे गामक कैटा बूढ़सभ आपसमे चर्चा करैत छलाह।

क्यो किछु, क्यो किछु कहैत। गप्प-सप्प बिबादक रुप धरैत आ अन्ततोगत्वा कहिओ काल झंझटोक संभावना भए जाइत। सभसँ ढीठ ओ दबंग ठीठरकका पहलमान वो अपढ़ छलाह आ ओहि घूरक महफिलमे डंकाक चोटपर कहितथि-

पढ़ू पूत चण्डी जासे चले हण्डी।

सद्य: लाभमे पूर्ण आस्था छलनि। भोरमे बच्चा महिष चरौलक आ साँझमे एक डाबा गरम-गरम दूध। एहिसँ नीक शास्त्र की भए सकैत छल? सभ पढ़ाइ-लिखाइ व्यर्थ। कहिआ पढ़त आ कहिआ कमाएत..? मुदा, ओहीठाम हीरा कक्काक स्वर एकदम दोसर रंग छल। धिया-पुता पढ़त तँ विचारवान होएत आ सुखी रहत।

गाममे ओहि घूरक चर्चा चर्चित छल। दूनू गोटासँ साँझमे जँ बैसितथि तँ अपन-अपन दर्शनक अनुसार जरूर बजितथि आ परिणाममे विवाद होइत।

ठीठरकका दबंग ओ लठैत छलाह। जबरदस्त खेती-पथारी रहनि। धिया-पुता सभ बेस मोट-सोंट आ लंठ। सभ खेतीमे लागल रहैत छल। परिवार सुखी छल। हुनका तुलनामे हीरा कक्काक हालत पातर छल। धिया-पुता सभ स्कूल-कॉलेजमे पढ़ि रहल छल। खेती-पथारी कोनो खास नहि। तेँ कखनो काल ठीठर कक्काक कथन ठीक बुझाइत छलनि। मुदा दूनू गोटे अपन-अपन विचारपर दृढ़ छलाह।

हीरा ककाकेँ अपन धिया-पुताक बड़ आशा छलनि। आ तेँ अपन सम्पूर्ण शक्तिसँ धिया-पुताकेँ शिक्षा व्यवस्थामे लागल रहैत छलाह।

समय बितैत गेल आ हुनकर सभ नेना सभ पढ़ि-लिखि यथायोग्य नीक-नीक स्थानपर पहुँचलाह। ओमहर ठीठरक गृहस्ती दिन-प्रति-दिन गड़बड़ाइत गेल। वृद्धावस्थाक जोर पकड़ितहि पुत्र सभ आपसमे लड़ैत रहैत छलाह। बात बिगड़ैत देखि वो सभकेँ फराक-फराक कए देलखिन। जमीन-जथा बँटि गेल।

बीस बर्खक बाद आइ ने हीरा बाबू छथि आ ने ठीठरकका। मुदा सुनबामे बहुत किछु आएल। ठीठरकका बड़ कष्टमे मरि गेलाह। बेटा सभ खेत-पथार बेचि लेलक आ पेट पोसबाक हेतु गामसँ पड़ा गेल। हीरा बाबू सेहो सुखी नहि भए सकलाह। धिया-पुता सभ पढ़लक-लिखलक जरूर मुदा सभ अपनामे व्यस्त। ककरो बूढ़ाक व्यथापर सोचबाक समय, इच्छा ओ सामर्थ्य नहि भेलैक। क्यो कलकत्ता तँ क्यो बंबई। पाँचो बेटा पाँचटा शहर धेने छलाह। सुनबामे ईहो आएल जे मझिला बेटा लखनउमे मकान बना लेलक अछि। हीरा बाबू ओहिना एसगर टकटक तकैत बिदा भए गेलाह।

ओहि स्कूलमे मौलाना-जोलहाक बेटा सेहो हमरा सभहक संगे पढ़ैत छल। पढ़एमे सामान्य छल मुदा अत्यन्त सज्जन वो संवेदनशील। कै दिन गामसँ स्कूल जाइत काल वो भेटि जाइत। मुदा वो स्कूल नियमित नहि जाइत छल। कै दिन बाधमे ओकरा हम सभ हर जोतैत देखियैक। हँसियो लागय आ दुखो भए जाए। कहिओ काल ओकर पिता सेहो भेटि जाइत, एकटा आग्रहक संग-

बौआ, माहटर साहेब बाबूसँ कहि देबै जे हमर बचबा आज नै जाएत।

पुछिऐक-

किए?”

तकर जवाबमे पनपिआइ गमछामे बन्हने हर जेातइत अपन बेटा दिसि इसारा करैत।

कै दिन हमरा संगे वो स्कूल जाइत। रस्तामे भेँट भए जाइत छल। गमछामे पाँच-छहटा किताब ओ किछु कॉपी बन्हने हमरा देखैत घरेसँ आबाज दैत-

हमहँ चलब। ठाढ़े रहब।

आबाज सुनि कए हम-सभ पाकरी गाछक तरमे सुस्ताए लगैत छलहुँ। स्कूल पहुँचि सभसँ पछिलका सीटपर वो बैसि जाइत छल। आ कै दिन तँ सभ घण्टीमे मारि खाइत रहैत छल। बिना कोनो आक्रोश आ प्रतिकृयाक कै दिन कहितिऐक-

एना मारि किएक खाइत रहैत छह! नीकसँ पढ़ाइ करह।

मुदा वो हमर-सभहक बात सुनि किछु-किछु अकाट्य तर्क दए दैत छल।

बहुत दिनक बाद ओकरा एक दिन चौकपर रिक्सा लगौने देखलियैक। हमरा देखि ओकरा उत्साह भेलैक। प्राय: ओकरा भेलैक जे ई यात्रीपर ओकरा बिशेष अधिकार छैक। एक बेर हमरा मोन भेल जे ओही रिक्सासँ चली मुदा आत्मा सिहरि गेल। हमर वो सहपाठी रिक्सा चलाओत आ हम ओहिपर बैसल रहब। आ हम कात भए गेल रही। किछुए कालक बाद ओकर बूढ़ पिता एक गठ्ठर कपड़ा लेने आएल। प्राय: हमरा नहि चिन्हि सकल। ओहि रिक्सापर गठ्ठर राखि बाप-बेटा मिलि कए बीड़ी पीबए लागल। समयक एतेक अन्तरालक बादो बाप-बेटाक स्नेह बनल छल। हमरे सभहक संगे किछु वरिष्ठ विद्यार्थी सभ सेहो स्कूल जाइत छलाह। जाहिमे सँ कै गोटा मैट्रिकमे चारि-पाँच बेर फेल कए क्रान्तिकारी भए गेल छलाह। गाममे छोटका लोक सभकेँ संगठित कएक ओ सभ महा उपद्रव ठाढ़ कए देने छल। कैटा पैघ गृहस्थक हर-जन बन्द भए गेल छल। पनिभरनी सभ आँगनमे काज नहि करत आ भरिआ भार लए कए नहि जाएत। जकर घर जाहि जमीनपर छैक से तकर हेतैक। ई हेतै वो हेतै आ भए कए रहतै। दिन राति गाममे घोल-फचक्का होइत रहैत...।

सभसँ बड़का आफद बड़का मालिककेँ भेल रहनि। वो एकदम चिंतित भए गेल रहथि। दिन-राति हुनका ओहिठाम भण्डारा चलैत रहैत छल। इलाकाक पहलमान ओ लंठक जमघट रहैत छल।

समय बीतलाक संग-संग वो क्रान्तिकारी सभ शान्त भए गेलाह। अधिकांश कतहुँ-कतहुँ चाकरी कए रहल छलाह आ एकाधटा अकाल मृत्युक सेहो शिकार भए गेलाह।

बड़ीकाल बैसल इएह सभ सोचैत रही कि दिनेश भाए भेट भए गेलाह। ओ हीरा बाबूक जेठ भातिज छलाह आ अंतकालमे वएह बेचारेक सेवा केने रहथि। हीरा बाबूक छोट पुत्र टुना हमर सहपाठी छलाह। हुनके प्रति गप्प होमए लागल। कहलाह जे वो तँ बहुत दिनसँ लंदनमे रहैत अछि। बड़का हाकिम भए गेल अछि आ बहुत रास पैसा कमाइत अछि। मुदा कै बर्खसँ गाम नहि आएल अछि।

पुछलियनि-

हीराबाबूक काजमे आएल रहथि की नहि?”

नहि आएल रहथि।

छगुन्तामे पड़ि गेलहुँ। पुछलऐक- किएक?”

कहि नहि!मुदा मृत्युसँ दू-तीन बर्ख पूर्व आएल छलाह। गाम डोलि गेल रहए। जाइत काल बहुत रास टाका पिताकेँ दैत रहथिन मुदा ओ नहि लेलखिन।

बिच्चेमे चौंकैत पुछल-

कारण?”

कहाँ दनि कहलखिन जे ई पैसा अहीं राखू। काज आओत। जाहि पैसाक कारण अहाँ एतेक दूर चलि गेलहुँ, गाम-घर,माए-बाप ओ सभ किछु त्याग कए देलहुँ ताहि पैसाकेँ व्यर्थ हमरापर किएक नष्ट कए रहल छी। टुना तहिआसँ घुरि कए गाम नहि अएलाह।

मुदा ठीठर ककाकेँ की भेल?”

की कहूँ!सभ बेटा घर छोड़ि पड़ा गेल। करबो की करितैक। गामपर किछु नहि बाँचल रहैक। असगर ठीठर कका काहि कटैत रहैत छलाह। जेठकी पुतोहु थोड़-बहुत सेवा कए दैत छलखिन।

एक बेर फेर ठीठर कका भीमकाय ओ हुनक आप्त वाक्य मोन पड़ि गेल-

पढ़ू पूत चण्डी, जा से चलए हण्डी।

शरीरमे बड़ थाकान बुझि पड़ैत छल, कहि नहि कखन नीन्न आबि गेल।

¦


 

 

 

मुख्यमंत्रीक स्वप्न

की करी किछु फुरा नहि रहल अछि..! प्रेसबला सभ पाछू पड़ि गेल अछि। जतए जाउ ओतहि ई सभ पहुँचि जाएत। मुख्यमंत्रीजी बाजि उठलाह। पुन: अपन प्रेस सचिवकेँ बजौलखिन-

मिस्टर सिंह। अहाँ एकटा विज्ञप्ति अखबारमे प्रकाशित करबा दियौक जे प्रेसक आदमी मुख्यमंत्रीसँ सम्बन्धित ओही समाचारकेँ प्रकाशित कराबथि जे हुनकर सरकारी कारोबारसँ सम्बद्ध होइक आ जकरा छापब जनताक हेतु नितान्त आवश्यक होइक। संगहि ईहो समाचार प्रकाशित करबाओल जाए जे हमर व्यक्तिगत कृया कलाप छापए बला समाचार पत्र ओ सभ व्यक्तिक विरूद्ध कार्रवाई कएल जाएत।

उत्तरमे प्रेस सचिव बाजि उठलाह-

ठीक सर। प्रेस बला सभकेँ कहि नहि की भए गेल छैक? एकरा सभकेँ सबक सीखेनाइ बेस जरूरी थिक। हम आइए ई विज्ञप्ति प्रकाशित करबा दैत छियैक।

हद भए गेल!कहि नहि, प्रेसबला सभकेँ की भए गेलैक अछि।

अहीं कहू अपना सभमे बलिदान देबाक तँ पुरान प्रथा छैक आ ताहि बातकेँ लए कए प्रेसबला सभ छापि देलकै अछि आ सौंसे देशमे हरविर्ड़ो मचि गेल। जे तिवारीजी अपन कुर्सी बचएबाक हेतु छागरक सोनितसँ स्नान कएलनि अछि। लगैत अछि जे प्रेसबला सभकेँ सबक सीखबहि पड़त। मुदा कोना? काल्हि एहि विषयपर बिस्तारसँ विचार-विमर्श कएल जएतैक।

मैडम। प्रेस विल तँ अहींक आज्ञासँ लगाओल गेल।

मुदा जाहि तरहक विरोध एकर भए रहल अछि से तँ अप्रत्याशित अछि। लगैत अछि हमरा नव मुख्यमंत्रीक नियुक्ति करहि पड़त।

हम तँ अहाँक शरणमे सदिखन रहलहुँ अछि। कही तँ एहि विलकेँ आपस लए ली?”

एकर बादो हम ई आश्वासन नहि दए सकैत छी। फेर गप्प कएल जेतैक।

-क्यो महिला स्वर एतबा कहि कए टेलीफोन काटि देने छल। एकर बादे माननीय भूतपूर्व मुख्यमंत्रीजीक निन्न उपटि गेलनि। सभटा बीतल गप्प सीनेमाक रील जकाँ सपनामे देखार भए रहल छलनि। असलमे हुनकर कुर्सीसँ हटब एकटा तेहन मार्मिक प्रसंग छल जे हुनका निरंतर ओझरौने रहैत छल।

ओना जहिआसँ ओ मुख्यमंत्री भेलाह तहिएसँ हुनका भयावह स्वप्न सभ आबए लागल छलनि। विपक्षी दलक नाकेबन्दी मजबूत भए गेल छलनि आ सत्तादलमे सेहो कै गूट भए गेल छल मुदा साहसक बले ओ आगा बढ़ैत जाइत छलाह। अकस्मात गाड़ीक पहिया धसैत देखलनि तँ वो ओकरा उखारबाक कोनो कम प्रयास केलनि से बात नहि, मुदा भावी प्रवल। कर्णोक रथ तँ एहिना धसि गेल रहनि। बेस संक्रमण कालमे ओ जहाँ ने आगू बढ़लाह कि रथक पहिआ धसए लागल। ठीक एकदम वएह हाल माननीय भूतपूर्व मुख्यमंत्रीजीकेँ भेलनि।

भए सकैए जे हमर गप्प अहाँकेँ तीत लगैत हो। अपने लोकनि भावुक नहि होइ। माननीय भू.पू. मुख्यमंत्रीजी कुर्सी बचएबाक हेतु कोन कुकर्म छोड़लाह?

कहबी छैक जे ने दौड़ चली ने ठेसि खसी। मुदा मुख्यमंत्रीजीकेँ ई गप्प के बुझेतनि। ओहि दिन अखबार पढ़ैत छलियैक तँ एकटा बेस नमगर अपील पढ़लहुँ। धूर्तताक चरम सीमा छल। मैथिलीमे समाचार पत्र निकालताह।

यौ महामहोपाध्यायजी। अपनेकेँ ई बुद्धि किछु दिन पूर्व किएक नहि भेल? की अहाँ जनताकेँ ओतेक मुर्ख बुझि रहल छियैक जे अहाँ ओकरा भुतिएने फिरिऐक। एकदम नहि। आब जमाना बदललै। खैर! देर अएलहुँ दुरुस्त अएलहुँ। मुदा ई तँ कहू जे ओहि समाचार पत्रमे की की खबरि छपतैक? मुख्यमंत्री पदक पुन: प्राप्तिक हेतु जँ अहाँ कोनो यज्ञ करबैक तँ ओकरा प्रमुखतासँ छपबैक वा नहि? आशा अछि जे एहि बेर ओ समाचार मैथिलीमे प्रकाशित समाचार पत्रक मुख्य पृष्ठपर अपने छापब।

ओहि दिन गाममे बैसार रहैक। नवतुरिआ सभ मैथिलीक प्रचार-प्रसारक हेतु बेस आन्दोलन केने छलाह। माननीय भू.पू. मुख्यमंत्रीजी प्रमुख वक्ता छलाह। वो बाजक लेल ठाढ़े छलाह कि क्यो दौड़ल आएल। कहलक-

दिल्लीसँ फोन आएल अछि।

ओ मंचपरसँ धड़फड़ाइत उतरए लगलाह ओ एही क्रममे लूढ़कियो गेलाह। फेर वएह नारी स्वर। फेर वएह हतप्रभ भू.पू. मुख्यमंत्री...।

एमहर बैसारीमे हल्ला छलैकजे भू.पू. मुख्यमंत्रीजी किछु महत्वपूर्ण घोषणा करताह। सम्भवत: ओहि अप्रत्याशित फोनक कारणसँ बैसारक कर्यवाहीपर गम्भीर प्रभाव पड़ल आ बैसार साधारण भाषणक बाद स्थगित भए गेल।

ओहि दिनुका बैसारक बाद भू.पू. मुख्यमंत्रीजी बहुत दिन धरि चुप रहलाह। पछिला महिना मुख्य पृष्ठपर समाचार छपल छल। ओकर किछु महत्वपूर्ण अंश प्रस्तुत अछि-

 

दिनांक २ मई सन् १९७६

आइ मुकुल पटना अएलाह। परम सन्तोष अछि जे हम हुनका प्रशन्न कए सकलहुँ। ओना हमर प्रतिद्वन्दी लोकनि हमरापर लागल छथि मुदा जाधरि मुकुल हमरापर नहि विगरताह ताधरि क्यो किछु नहि कए सकैत छथि। तेँ हुनका प्रशन्न करबाक हेतु जान लगा दी।

 

दिनांक १२ सिदम्बर १९८१

मैथिलीक अधिकार हेतु किछु मैथिल आएल छलाह। आखिर मैथिलीक की महत्व अछि? हमरा ई सभ तँ एकदम नीक नहि लगैत अछि, मुदा कएल की जाए। व्यक्तिगत हमरा मैथिल, मैथिलीसँ कोनो लगाव नहि अछि। हँ, जँ क्यो अपन सम्बन्धी होथि वा दोस्त-महिम होथि तँ तिनका नीक-सँ-नीक पद दिआबी आ मदतिओ करी। मैथिली, मैथिली चिचिएलासँ की होएत?

 

१४ अक्टुबर १९८२

बिहार बेस विवादास्पद राज्य अछि। मोन तँ होइए जे एहि पदकेँ छोड़ि जा कए आराम करी, वा पुन: अपन पहिलुका पेशामे लागि जाइ। मुदा एतेक आमदनी छैक एहि काजमे जे अन्यथा सातो जन्ममे नहि भए सकैत अछि। प्रेसबला सभ पाछू पड़ि गेल अछि। की करी बुझा नहि रहल अछि?

 

१ जनवरी १९८४

देखा चाही नव बर्ख की की रंग लबैत अछि। मुख्यमंत्री पदसँ हटलाक बाद तीव्र वैराग्य भए रहल अछि। खने मोन करैत अछि जे राजनीतिसँ सन्यास लए ली। खने मन करैत अछि जे युद्वाय कृत निश्चयक पुनरावृत्ति कए दी। एकटा उपाय सुझि रहल अछि। मैथिलीक प्रचारमे पदयात्रा किछु सज्जन चला रहल छथि। हुनके संग धरी। गामे-गाम मैथिलीक नामे हमरो प्रचार भइए जाएत। सुनबामे आएल अछि जे दड़िभंगा लग एकटा बड़ सिद्ध तांत्रिक छथि। हुनकोसँ किछु परामर्श करब। आगा जगदम्बाक ईच्छा।

 

कैदिनसँ थाकल-झमारल भू.पू. मुख्यमंत्रीजी ओहि दिन दुपहरियामे कनेके आँखि मुनने छलाह कि सपनाए लगलाह। साक्षात् महिषासुर मर्दिनी कत्ता लए घुमि रहल छलीह। शत्रुक संहार करैत छलीह। नवका मुख्यमंत्रीक नाशक हेतु षडयंत्र जोर-सोरसँ चलि रहल छल। जतहि देखू ततहि भू.पू. मुख्यमंत्रीजीक स्वागतमे स्वागतद्वार सभ बनल छल। मैथिलीक प्रचार खूब भेलैक। भू.पू. मुख्यमंत्रीजीक नामक नगारा चारूकात बाजि रहल अछि। चुनाव घोषणा भए गेलैक। बड़का-बड़का उद्योगपति सभ अपन भविष्यक आशापर पर्याप्त चन्दा दए रहल छथि।

एहि सबहक परिणामो बहरेलैक आ हम पुनश्च मुख्यमंत्री भए गेलहुँ। सपथ ग्रहण समारोहमे किछु मैथिल सभ उपद्रव करए चाहैत छलाह कि पुलिस लाठीचार्ज कए देलक...।

एतबहिमे भू्.पू. मुख्यमंत्रीजी सपनेमे गरजए लगलाह कि हुनक नीन्न खुजि गेल। उठलाह तँ वएह रामा वएह खटोला। पुनर्मुषिकोभव।

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१६ अगस्त १९८४

रबीन्द्र नारायण मिश्रक

नमस्तस्यै

आगाँ...

३५.

जाबे अरुणओ एडली लन्दनमे पढ़ाइ-लिखाइ करैत रहए ताबे दुनू गोटे दू देह आओर एक आत्मा छल। अरुण सोचैक तँ एडली बजैक। एडली सोचैक तँ अरुण बजैक। दुनूक दोस्ती से परमान चढ़ल जे दोसर सभकेँ इर्ष्या होमए लगलैक। क्यो-क्यो चौल करैक जे ई दुनू कहीं आपसेमे ने बिआह कए लिअए। जाधरि ओ सभ संगे रहल दिन रातिक कोनो पता नहि चलैक। दुनू संगे पढ़ए, संगे टहलए आओर संगे खाए यद्यपि दुनूकेँ छात्रावासमे अलग-अलग कोठरी रहैक मुदा बेसी काल दुनू एक्केठाम रहए। प्रेमक पराकाष्ठा कहल जाए तँ हर्ज नहि।

मुदा एकर सभक प्रेमक बीचमे आबि गेलैक एंगल। एंगल एडलीक मित्र छलैक। ओ एडलीक शिक्षको रहैक। मुदा ताहिसँ की? पाश्चात्य संस्कृतिमे ई सभ चलैत छल। अरुणक एडलीक संग घनिष्टताक कारण एंगलक अरुणो लग उठब बैसब होइते छल। देखए सुनएमे अरुण आकर्षक छलहे संगहि ओकर प्रतिभाक चर्च सगरे कालेजमे छल।

एक दिन एडली ओ एंगल पिकनिक मनाबए लन्दनक लगीचक झील जा रहल छल। एंगल कहलकै जे अरुणोकेँ संग कए लेल जाए। एडली ई प्रस्ताव अरुण लग रखलक तँ ओ सहर्ष तैयार भए गेल। तीनू झीलक कातमे बैसल छल। जाड़क समयमे हल्लुक रौद ओकरा सभपर पड़ि रहल छल। झीलक चारूकात अर्द्धनग्न जोड़ी सभ अपना-आपमे मस्त छल। क्यो ककरो देखत से होश नहि रहए।

एहन मनमोहक ओ उत्तेजक वातावरणमे एडली, एंगल ओ अरुण एक दोसरकेँ देखि रहल छल। एंगलकेँ की फुरेलैक जे ओ अरुणकेँ हाथ धए खिचलक आओर चलैत गेल। एडली देखिते रहि गेल। तहिआसँ अरुणक एंगलसँ आकर्षण बढ़िते गेल। साँझमे एडली, एंगलमे कहा-सुनी भेलैक। मुदा एंगल अपन जिद्दपर अड़ि गेलैक। ओ अरुणक प्रति अपन आकर्षणक आगू किछु नहि सोचि सकल। एडली ओकर पुरान दोस्त रहैक, मुदा सेहो पाछु रहि गेलैक। एडली बाजी हारि चुकल छल।

एडली बुधियार छल। ओ बातकेँ बतंगर बनबएमे विश्वास नहि करैत छल। अस्तु स्थितिसँ समझौता करैत ओ अरुणसँ अपन मित्रता बनओने रहल। एंगलसँ विचार करएमे सेहो कोनो लाभ नहि छलैक। तेँ सभ चुपचाप सहि गेल। तकर लाभ ओकरा भेलैक। गाहे-बगाहे एंगल ओकरो ध्यान रखैत रहल। एवम् प्रकारेण अरुण, एडली आओर एंगलक तिकड़ी बनि गेल, ताबे ओहिना रहल जाबे अरुण लन्दनमे रहए।

अरुण प्रशासकीय सेवामे उत्तीर्ण भए गेल छल। तकर बाद ओकरा अपन देश आपस अयबाक रहैक। एंगल संगहि जयबाक हेतु जिद्द कए देलकै। एडली सेहो एहि हेतु अरुणकेँ बुझओलक। अन्तगोगत्वा अरुण ओ एंगल संगहि दड़िभंगा आएल। एडली ओतहि रहि गेल।

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३६.

पूर्व निर्धारित कार्यक्रमक अनुसार दड़िभंगामे प्रगतिशील जागरण मंच ओ जनजागरण मंचक राष्ट्रीय कार्यकारिणीक सम्मेलन बजाओल गेल। देश भरिसँ ज्ञात-अज्ञात करीब पाँचसए प्रतिनिधिभाग लए रहल छलाह। दड़िभंगाक राज मैदान टेंटक शहर बनि गेल छल। कतहु लाल, कतहु हरिअर झंडा फहरा रहल छल। राष्ट्रभक्तिसँ भरल ओजस्वी गीत सभ बजाओल जा रहल छल। एहि वातावरणमे रहि-रहि कए तरह-तरहक सूचना प्रसारित भए रहल छल।

जनाधार पार्टीक सेहो आमंत्रित कएल गेल छल। परन्तु ओ सभ एहिमे भाग ली, नहि ली से दुबिधामे रहि गेलाह। स्वतंत्रताक लड़ाइ एकजुट भए लड़ब ई तँ नीक बात रहैक, मुदा नेतुत्वक समस्या ओझड़ाएल रहैक। अन्ततोगत्वा तय भेल जे ओ सभ फिलहाल यथावतक स्थितिमे रहत। माने अपन अलग आस्तित्व बनओने रहत। मुदा जनाधार पार्टीक नव निर्वाचित मुखिआ चेतन व्यक्तिगत स्तरपर आएल छल। ओकरा संगे दू-चारि गोटे आओर आबि गेल रहए।

कार्यक्रम प्रारम्भ होइते बंदे मातरम्-क नारासँ धरतीसँ आकाश एक भए गेल। सभ एक स्वरसँ सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्” गबैत गबैत भाव विभार भए गेल। तकर बाद राजकुमार विस्तारसँ राष्ट्रीय परिदृष्यक वर्णन करैत दुनू मंचक अंदरुनी स्थितिक चर्चा केलाह आओर घोषणा केलाह जे आइसँ दुनू मंचक विलय भय गेल अछि। आब एहि मंचक नाम राष्ट्रवादी दल रहत।

एतबे बात ओ कहने छल कि उमा अपन संगे १५-२० टा महिलाक संगे नारा लगबैत मंच धरि पहुँच गेलि। हुनका सभक हाथमे पट्ट छल जाहिपर मोट-मोट आखरमे लिखल छल-

स्त्रीक सम्मान बिना स्वतंत्रताक गप्प निरर्थक थिक।

उमाकेँ एहि तरहेँ आओर महिला सभक संगे एहि तरहेँ आक्रमण देखि सभ सकदम भए गेलाह। बैसारक कार्यवाही रुकि गेल। जे जेना छल, तहिना रहि गेल। लगलैक जेना सम्पूर्ण वातावरणकेँ लकबा मारि देने हो। राजकुमार ओ मास्टर साहेबकेँ किछु फुरेबे नहि करनि।

बैसारमे भाग लैत अधिकांश लोक उमाक समर्थनमे बाजए लगलाह। ओहिमेसँ किछु गोटे तँ उमा लग आबि ओकरे संगे नारा लगबएलगलाह। आब की होएत?

मास्टर साहेब स्वयं उठि कए उमा लग गेलाह। जन भावनाक आदर करैत उमाकेँ मंचपर लए अनलखिन। तकर बादे बैसारक कार्यवाही प्रारम्भ भेल।

चारूकातसँ लोक उमाक समर्थनमे आबि गेल आओर आग्रह करए लागल जे उमाकेँ नवोदित राष्ट्रवादी दलक अध्यक्षा बनाएल जाए। मास्टर साहेब, राजकुमार उमासँ मंत्रणा कए हुनका राष्ट्रवादी दलक अध्यक्ष चूनि लेल गेल। उमा देवीक जयसँ वातावरण गुंजायमान भए गेल।

राष्ट्रवादी दलक गठनसँ जनाधार पार्टीमे आपसी सिरफुटौअल बढ़ि गेल। पार्टी कतेको गुटमे बँटि गेल छल। पार्टीमे किछु गोटे राष्ट्रवादी दलक संगे विलएकपक्षधर रहथि। एहिसँ स्वतंत्रता आन्दोलन प्रखर होइत। मुदा पार्टीक बूढ़ नेता सभ चाहथि जे यथावत बनाओल रहए देल जाए कारण ओ सभ अपन अपन कुर्सीकेँ संकटमे नहि देबए चाहथि।

उमाकेँ राष्ट्रवादी पार्टीक अध्यक्षा बनबाक समाचार अरुणकेँ जासूसक माध्यमसँ भेटलैक। ओ अत्यन्त विचलित भए गेल। उमाक एहि तरहक प्रतिकृयाक ओकरा आशा नहि छल।

महौलकेँ गड़बड़ाइत देखि अरुण एंगलक संगे किछु दिनक हेतु लन्दन सरकारी यात्रापर चलि गेलाह। हमर माए दुखित पड़ि गेल छल। ओकरा असगरमे बहुत दिक्कत भए रहल छलैक। तेँ किछु दिनक हेतु हम अपन नैहर गेलहुँ जाहिसँ माएकेँ सेवाक अवसर भेटए। एक युगक बाद हम नैहर गेल रही। हमरा देखिते हमर माए बहुत प्रशन्न भेल। लगलैक जेना तुरन्त ठीक भए गेल। टन-टन बाजए लागलि।

असलमे ओ एकाकीपनसँ उबि गेल छलि। फेर दिआदसभ सेहो तंग करनि। सम्पत्तिमे हिस्सा नहि दैक जाहिसँ ओ बहुत दुखी छलि। हमर अपन पित्ती सेहो गुजरि गेलाह। हुनका तीनटा बेटीए रहनि। अस्तु, हमर सभक समस्त सम्पत्तिकेँ हमर पितिऔत काका हरपि लेबए चाहैत छल।

माएक स्वास्थ ठीक भेल। ओमहर हमरा सासुरसँ विदागिरीक हेतु समाद आबि गेल छल। मासो दिन नैहरमे नहि भेल छल। मुदा कै बेर विदागरीक हेतु आदमी आबि चुकल। अन्तमे ओ स्वयं आबि गेलाह आओर हम सासुर विदा भए गेलहुँ।

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३७.

वृन्दावन बिहारी लाल की जय।निरंतर भजन, कीर्तन ओ प्रवचनमे तल्लीन भजनानन्ददासजी महराज अध्यात्मिक पराकाष्ठापर पहुँच गेल रहथि। एकहि जीवनमे व्यक्तित्वक एहन रूपातंरण कमे सूनएमे अबैत अछि। किन्तु जन्म-जन्मक संस्कार जेार मारैत अछि। जीवनक कतेको रहस्य अछि जकर गणितीय व्याख्या असम्भव। परन्तु सद्य: सत्य इएह छल जे एकटा डकैत गरम सिंह महान कृष्णभक्त भए गेलाह।

ततबे नहि लोक कल्याण हेतु सर्वस्व, समस्त सामर्थ्यकेँ अर्पित कए देने छलाह। जहिना ओहि आश्रममे धनक बर्खा होइत छल तहिना ओहि पैसाक जन कल्याण हेतु खर्च कए देल जाइत छल। कहबी छैक :

पानी बाढ़े नावमे, घरमे बाढ़े दाम

दोनो हाथ उलिचिये, एही सयानो काम।

एहि कथानकक भजनानन्दजी महराज एकटा जीवन्त उदाहरण छलाह। अपना लेल किछु नहि। तेरा तुझको अर्पणकेँ चरितार्थ करैत छलाह, अपन आश्रममानव जातिक कल्याण हेतु उपलब्ध कए देने छलाह।

आश्रममे तँ भजन किर्तन चलिते रहैत छल। भण्डारा चलिते रहैत छल। भक्तगण सभ मृदंग, ढोलक, पखावज ओ झालि बजाए कृष्ण नाम संकिर्तन करिते रहैत छलाह। समस्त वातावरण ततेक धार्मिक ओ भावनापूर्ण रहैत छल जे ओहिठाम अएनिहार कोनो, केहनो व्यक्ति शान्तिक अनुभव करैत छल।

मुदा भजनानन्दजी एतबेपर नहि ठहरल छलाह। ओ अपन राष्ट्रक प्रति कर्तव्यसँ सेहो सचेत छलाह। हुनकर कहब छलनि जे जाधरि भारतमाता परतंत्रताक बेड़ीसँ जकड़ल छथि, ताधरि स्वर्गो व्यर्थ थिक। मुक्तिक कामना अन्याय थिक।

के बोले मा तुमि अबले...।नहि, नहि, भारत माता अवला कदापि नहि भए सकैत छथि। कोटि, कोटि हुनक संतान हुनक प्रतिष्ठा ओ स्वतंत्रताक रक्षा हेतु र्स्वस्व त्याग करए हेतु कृतसंकल्प अछि। देश स्वतंत्र भए कए रहत।भारत माताक जय! वन्दे मातरम्- इएह कहि हुनकर प्रवचनक अन्त होइत छल।

राष्ट्रवादी दलक आर्थिक समस्याक समाधान तँ भजनानन्ददासजी महराजक आश्रमक माध्यमसँ भए जाइत छल। महराजजीक एकटा भक्तक दड़िभंगामे तीन महलक भवन छलैक। ओ तीनू महल भजनानन्दजी प्रेरणासँ राष्ट्रवादी दलकेँ दान कए देलक। स्वयं दुनू व्यक्ति दिन-राति राष्ट्र सेवामे लागि गेल। फिरंगी सभ एक हिसाबे हिलि गेल छल। ओकरा सभकेँ राष्ट्रवादी दलक बढ़ैत शक्तिसँ ततेक व्याकुलता भेलैक, ततेक भय भए भेलैक जे इज्जतिसँ देश छोड़बाक रस्ता ताकय लागल।

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३८.

अरुण एंगल केर संग लन्दन हवाइ अड्डापर पहुँचले छल कि एडली हवाइ अड्डापर पहुँच गेल। लगैत छल जेना ओ बहुत दिनसँ एहि अवसरक प्रतिक्षामे छल। ओकर फाटल- फाटल हरिअर ऑंखि बहुत किछु कहि रहल छल। हवाइ अड्डासँ अरुण ओ एंगल वहिर्गमन द्वारपर एडलीक स्वागतसँ अभिभूत छलाह।

अरुण सरकारी काजसँ जोगार लगाए लन्दन गेल छल। ओहिठाम आवास सहित आओर आवश्यक सुख-सुविधाक प्रबन्ध छल। ओसभ ओतहि जेबाक हेतु उद्यत छल परन्तु एडली अड़ि गेल। ओकर बात काटबओकरा सभक बसमे नहि छल।

अस्तु, ओ सभ एडलीक बात मानि ओकर घर दिसि विदा भेल। अरुण लेल ओकर घर नव नहि छल। लन्दन प्रवासक दौरान ओ सभ कतेको दिन ओतए रहल छल। अबैत जाइत छल। एक हिसाबे ओ सभ ओकर पारिवारिक मित्र भए गेल छल। लन्दन पहुँचि अरुणकेँ उसास तँ भेलैक। कमसँ कम उमाक घात-प्रतिघातसँ तात्कालिक राहत भेटलैक। संगे पुरान दोस्त सभसँ भेँट-घॉंट होइत रहलैक। ओकरा सभक संगे बिताओल मधुर, स्नेहिल समयकेँ पुन: सद्य: जीबाक अवसर भेटलैक। सरकारी कामकाज तँ बहाना छल।

एक दिन एडलीक ओहिठाम रहि अरुण सरकारी अतिथि गृहमे चलि आएल। एंगल ओ एडली ओतहि रहल। ई दुनू तँ पुरान दास्त छल। बहुत दिनक बाद एकठाम भेल छल। लगलै जेना बिर्डो उठि गेल। दुनूकेँ गप्पक अन्ते नहि होइक। गप्पेटाक बात रहितए तँ कोनो बात नहि। लगबे नहि करैक जे अरुण ओकरे संगे आबि कए कतहुँ आनठाम रुकि एंगलक प्रतीक्षा कए रहल अछि।

आखिर लन्दन, लन्दन छैक। ओहिठामक अन्मुक्त वातावरणमे बढ़ल, पढ़ल एंगल ककरो हेतु बान्हल छेकल कतेक रहि सकितैक? एहनमे तँ अरुण स्वयं सोचि सकैत छलाह। मुदा भावी प्रवल। जे हेबाक छल से भेल। दुखक बात तँ ई छल जे एहूकात गाड़ी घिसिर-फिसिर करैत छल। ओहिकात तँ सद्य: उमा गरजि रहल छलैक। अरुण सचमुचमे बेचारा भए गेल छल। कहबी ठीके छै- ने दौड़ि चली, ने ठेंसि खसी।

एक सप्ताह बहुत नहि होइत छैक। देखिते देखिते शनि, रबि आबि जाइत छैक। पाँच दिनका खटैनी दू दिनका सप्ताहान्त अवकाशमे गलि जाइत छैक। अरुण सेहो पाँच दिन लन्दनक सरकारी काजमे व्यस्त रहल मुदा शुक्रक साँझ अएलापर माथ ठनकलै। आब की कएल जाए? एंगलक अएबाक गप्प कोन, फोनो नहि केलकै। ओ तँ एडली संगे तेना कए रमि गेलैक जे आगा- पाछा किछुक सुधि नहि रहलैक।

अरुण जखन एडलीक ओतए पहुँचल तँ पता लगलैक जे ओ सभ लन्दनसँ बाहर चलि गेल अछि। कतए गेल से घरक लोक ने अपना मोने किछु कहलकै आ ने अरुण पुछलक। ओहिठामक समाजमे बेसी खोध-बेधक परम्परा नहि छैक। बहुत रास बात व्यक्तिगत रहि जाइत अछि।

अरुण गुम्म छल। ओकरा एहि बातकेँ आब आभास भए रहल छलैक जे अपन सभक माटि-पानिमे जन्मल, पोसाएल पुरुखक बिआहक एहन कल्पना रहैत छैक जाहिमे ओकर स्त्री आजन्म ओकरा प्रति निष्ठावान रहैक, ओ जे चाहए सएह करैक, मुदा ई तँ लन्दन छै। से बात बहुत बिलंबसँ बुझए आबि रहल छलैक।

एडली ओ एंगल स्कूटरपर लन्दनसँ करीब चालीस किलोमीटर दूर एकटा रिजार्टमे ठहरए हेतु जा रहल छल कि एकटा तेज गतिसँ चलैत कार ओकरा टक्कर मारि देलकै। टक्कर ततेक जबरदस्त छल जे स्कूटर पचरा भए गेल। हेडली ओहीठाम कै पलटी खेलक मुदा कोनो बेसी चोट नहि लगलैक। परन्तु एंगल हवामे कै फीट ऊँचाइ धरि फेका गेल आओर धरामसँ नीचा बीच सड़कपर खसल। ई तँ संयोग छलैक जे पाछुसँ अबैत दोसर कारक वाहन चालक एकाएक ब्रेक लए लेलक नहि तँ ओतहि ओ टुकड़ी-टुकड़ी भए जाइत।

एहि दुर्घटनामे एंगलक दहिना जॉंघक हड्डी टुटि गेल छलैक। कनी- मनी चोट तँ सौंसे देहमे छलैक। एडलीक हालत सेहो ठीक नहि छलैक। क्रमश: दुनू पैर फुलि गेलैक जाहिसँ चलबामे असोकर्य होइत छलैक।

कहुना कए स्थानीय पुलिस एकरा सभकेँ लन्दनक प्रतिष्ठित अस्पतालमे भर्ती करओलक। अरुणकेँ सेहो पुलिस द्वारा सूचना भेटल। ओ तुरन्त अस्पताल पहुँचल। ओ एंगलक हालत देखि दुखी भए गेल। जाबे एंगल अस्पतालमे रहल ताबे ओहो ओतहि रहल। मुदा तकर बादक चिन्तासँ ओ व्यग्र रहए लागल।

शुरूमे अरुणक कार्यक्रम छलैक जे ओ तीन-चारि मासमे अपन देश आपस आबि जाएत। मुदा गाम-घरसँ जे समाचार सभ भेटैक आओर जाहि प्रकारेँ उमा उग्रसँ उग्रतर भए रहल छलि, ओकर मोन बेचैन भए जाइक, कोनो समाधान नहि फुराइक।

संयोग एहन भेलैक जे अंग्रेजसभकेँ खुफिआ रिपोर्ट भेटलै जे अरुणकेँ हितमे नहि छल। ओकरा सभकेँ अरुणक गति-विधिपर सन्देह भए गेल छलैक। तेँ ओकरा कम-सँ-कम साल भरिक हेतु लन्दनमे रहबाक आदेश कए देलक।

सरकारी आदेश छलैक, तेँ अरुणकेँ कोनो विकल्पो नहि रहैक। ओकर मोन निरन्तर अपन गाम-घरपर टांगल रहैत छलैक। तथापि ओ अपना आपकेँ लन्दनमे व्यस्त कए लेलक। दिन भरि कार्यलयमे समय बीति जाइत छल। साँझ कए समय बिताबक हेतु एतए बहुत जोगार सभ छलैक।

एंगल अस्पतालसँ छुटि कए अरुणक डेरापर अएलैक। मुदा ओकरा नीकसँ चलल नहि होइक। डाक्टरक परामर्शक अनुसार ओकरा फिजिओथिरैपीक प्रयोजन रहैक। सभ सुविधा आसे-पासमे उपलब्ध छल। मुदा घरमे बैसल-बैसल ओ तंग भए रहल छलि। कोनो उपायो नहि रहैक। अरुण कार्यालय चलि जाइक। दिन भरि ओ एसगरि कहुनाक समय बिताबथि।

एहिना एक दिन ओ उदासघरमे किछु पढ़ि रहल छलि कि एडलीक फोन आएल। एंगल ओकरा तुरन्त आबए हेतु आग्रह केलक। एडली बिना विलम्ब केने ओतए आबि गेल। दिनभरि दुनू गोटाकेँ गप्प-सप्पमे समय कोना बीति गेल सेपता नहि चलल। साँझमे ओ अपन घर आपस जेबाक इच्छा व्यक्त केलक। ताबत अरुण सेहो आबि गेल रहए। अरुण ओ एंगल दुनू गोटे ततेक आग्रह केलकै जे ओ ओहीठाम रहि गेल। एंगल, एडली संगे तेहन तल्लीन भए जाइक जे अरुणकेँ करए हेतु किछु रहिए नहि जाइक। कखनहुँक ओहो गप्पमे लारि देबाक प्रयास करैक मुदा ओकरा सभक हेतु धनिसन।

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३९.

अरुण लन्दन चलि गेल से समाचार हमरा सभकेँ खबासिनीक माध्यमसँ भेटल। एहि बेर ओ बहुत दिनपर आएल छलि। गप्प-सप्पक क्रममे कहए लागलि जे हमर माए सम्पत्तिमे बँटबारा हेतु बहुत हल्ला केलकै। मुदा हमर पितिऔत काका टस सँ मस नहि होइत छैक। ओकर कहब जे बेटीक बिआह भइए गेल। तखन अहॉंकेँ खोरिसक अतिरिक्त किछुके अधिकार नहि अछि। कतेको बेर बैसार भेलैक। पंचसभ सेहो ओकरे संग भए गेलैक। बहुत रास सम्पत्ति तँ ओ अपना नामे करा चुकल छल।

ई बात सभ जखन हुनकर कानमे गेलनि तँ दड़िभंगामे मोकदमा कए देलाह। दड़िभंगाक नामी ओकिल मोना बाबू हमर सभक केस लड़ि रहल छलाह। कोर्टसँ नोटिस जारी भेल। हमर पितिऔत काकाकेँ दिआद सभ बहुत कहलकै। अनततोगत्वा ओ पसीजल आओर पाँच बीघा जमीन हमरा माएकेँ देबाक हेतु तैयार भए गेल। ओ एहि प्रस्तावकेँ मानि लेलाह। जतए हम सत्तरि बीघाक उत्तराधिकारी रहितहुँ कतए मात्र पाँच बीघापर समझौता करए पड़ल। कोनो विकल्पो नहि छलैक। कानूने तेहने छलैक।

समय बीतैत देरी नहि होइत अछि। देखिते-देखिते हमर बच्चा सभ जबान भए गेल। तीनू बेटीक पढ़ाइ पूरा भए गेल। ओ सभ अपन अपन रूचिक विषयमे एमए पास कए चुकल छलि। एकमात्र पुत्र सेहो इंजीनियरिंगमे पढ़ैत छल। एकरा सभक पढ़ाइ-लिखाइमे अरुणक गम्भीर योगदान छलैक। आर्थिक चिन्ता तँ कहिओ होमए नहि देलक।

पढ़ि-लिखि तँ गेल मुदा आब की कएल जाए। ई समस्या विकट छल। कारण ओहि समयमे बेटीक पढ़ाइ-लिखाइ बिरलैके क्यो करैत छल। से हम सभ केलहुँ आओर जेना-तेना पार लागि गेल। मुदा भविष्यक संघर्ष आओर प्रवल लगैत छल।

इएह सभ सोचैत रही कि हमर तीनू बेटी गाम आएल। ओकरा सभकेँ देखि मोन गदगद भए गेल। सभक व्यक्तित्वमे अद्भुत चमक छलैक। आत्मविश्वाससँ भरल छल। विद्यासँ ओकरा सभकेँ बहुत आत्मशक्ति प्राप्त भए गेलैक आओर ओ सभ जीवनमे किछु स्थान बनबए हेतु कृतसंकल्प लगैत छलि।

जहियासँ राष्ट्रवादी दल बनल, जनाधार पार्टीक जनाधार तेजीसँ खसकि रहल छल। राष्ट्रवादी दलक कमान उमाक हाथमे पड़िते चारूकातक स्त्रीगण खास कए मध्यवर्गीय परिवारक, ओहि दलसँ जुड़ए लागलि। लगैक जेना देशमे क्रान्ति आबि गेल अछि।

शिक्षा नहि, पारिवारिक सम्पत्तिमे हिस्सा नहि, घरसँ बाहरो निकलबाक परिस्थिति नहि, आखिर एहि बातक प्रतिकार तँ भेनहि रहैक। अस्तु, अवसर भेटिते एक दिस तँ बन्देमातम्”केर नारा लगैत तँ दोसर दिस स्त्री सम्मानक रक्षाक चर्चा सेहो जोर पकड़ने जाइत छल।

फिरंगी सभ एहि बातसँ चिन्तित छल। ओकरा सभकेँ किछु फुरेबे नहि करैक जे एहि परिस्थितिसँ कोनो निपटी। तखन ओ सभ सोचलक जे जनाधार पार्टीक मदति लए आपसेमे उठापटक कराओल गेल।

जहिआसँ चेतन जनाधार पार्टीक अध्यक्ष भेल छल, ओकर फिरंगी सभसँ पहिल भेँट-धॉंट रहैक। मुदा फिरंगीसभ ओकरा प्रभावमे नहि आनि सकल।

राष्ट्रवादी दलक प्रभावसँ हमर तीनू बेटी- हीरा, वाणी ओ गंगा प्रभावित छलीह। देश ओ समाजक हेतु किछु करबाक इच्छा हुनका सभकेँ उद्वेलित कएने छल। उच्च शिक्षा प्राप्त कए ओ समाजक दुर्दशाकेँ बेसी नीकसँ बुझैत छलीह। अस्तु, ओ सभ सभ काजकेँ पाछु कए उमाक संग भए गेलीह। राष्ट्रवादी दलक सक्रिय सदस्यता ग्रहण कए गाम-गाममे घूमए लगलीह।

आब उमा एसगरि नहि छलीह। छोट, पैघ, जवान, बूढ़ सभ ओकरा संग दए रहल छलैक। असलमे गाम-गाममे पसरल एहि अन्यायसँ मुक्तिपाबक एकटा अवसर आबि गेल छल। जतहि देखू बन्दे मातरम्” केर नारा लागि रहल अछि। भारत- माताक जयगान भए रहल अछि। एकहि स्वरमे समाजमे युग-युगसँ पसरल वैमनस्यता, भोदभाव, शोषणक विरुद्ध आक्रोश सेहो तीव्रतर भए रहल अछि। क्यो-क्यो कहैत छल जे समाजकेँ बिखण्डित करबाक ई फिरंगी सभक नव हथकंडा अछि।

राष्ट्रवादी दलमे महिलाक पैठसँ सभसँ बेसी प्रशन्नता भजनानन्ददासजीकेँ भेलनि। हजारो सालसँ यातनापूर्ण जीवन जीबए हेतु विवश स्त्रीगणकेँ अभिव्यक्ति एकटा साधन भए गेल छल राष्ट्रवादी दल। जखन कखनो नव प्रयोग होइत अछि, चाहे ओ सही हो, गलत हो, जे हो, ओकर विरोध, प्रतिरोध होइते अछि। मुदा ओहो विकासक एकटा पदचापे बुझबाक चाही। अन्ततोगत्वा मनुक्खक प्रयास सफल होइते अछि। से नहि होइत तँ मनुक्खक विकास नहि भए सकैत अछि। आदिकालसँ लोक परिस्थितिसँ संघर्ष केलक आओर आगा बढ़ल अछि।

भजनानन्ददासजी भक्ति, अध्यात्म ओ राष्ट्रवादक प्रखर घ्वजवाहक भए गेल छलाह। गाम घरमे भए रहल सामाजिक, राजनीतिक घटनाक्रमसँ आश्रममे अएनिहार लोकक माध्यमसँ ओ पूर्ण अवगत छलाह। हुनकर एहि उदारताक लाभ राष्ट्रवादी आन्दोलनकेँ भेटि रहल छल। एही बात सभकेँ ध्यानमे रखैत राष्ट्रवादी दलक अगिला बैसार वृन्दावनमे करबाक निर्णय भेल।

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