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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

विदेह नूतन अंक गद्य  

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अतिश कुमार मिश्र

नेपालक राज्‍य पुनर्संरचना मे मिथिला आ मैथिली

नेपाल अखन संघीय संरचनाके अन्‍तिम चरणमे अछि । संविधान सभा अन्‍तर्गतक राज्‍य पुनर्संरचना तथा राज्‍यक बाँड फाँड समिति देशके मिथिला भोजपुरा कोच मधेश सहित १४ टा राज्‍यक आवधारणा सहितक प्रतिवेदन संविधान सभामे प्रस्‍तुत कएलक अछि ।

नेपालक पूर्व झापा जिल्‍ला सँ पश्‍चिममे पर्सा आ दक्षिण मे भारतक सीमा धरिक पूर्वि मधेशक समथल भू भाग प्रस्‍तावित मिथिला भोजपुरा कोच मधेश राज्‍य अछि ।

ई राज्‍य राजनीतिक, समाजिक, सांस्‍कृतिक, जनसंख्‍या आ अन्‍य आवश्‍यक पुर्वाधारक रुपमे नेपालक सभ सँ समृद्ध राज्‍य हएत अहिमे कोनो दूमत नहि अछि ।

 

मिथिलाक इतिहास

मिथिला राज्‍यक इतिहास अति प्रचिन अछि । त्रेता युग सँ शुरु भेल मिथिलाक इतिहाँस राज्‍यक रुपमे भलेही नहि हुए मुदा भाषिक समृद्धताक कारण नेपाल आ भारतक सीमामे बटायल मिथिला क्षेत्र अपन अस्‍तित्‍व जिविते रखने अछि ।

प्राचिन मिथिला पूर्वमे कोशी, पश्‍चिममे गण्‍डकी, उत्तरमे हिमालय सँ दक्षिणमे गंगा धरि छल । जे बृहदविष्‍णुपुराणक मिथिला खण्‍डमे अहि प्रकारे उल्‍लेख अछि ।

 

गंगा हिमवर्तो मध्‍ये नदी पञ्‍च देशान्‍तरे ।

तैरभूक्तिरिति ख्‍यातो देशः परम पावन ः ।।

कौशिकीन्‍तु समारभ्‍य गण्‍डकीमधिगम्‍यबै ।

योजगनामि चतुर्विशत् ब्‍यायामः परिकीर्तित ः ।।

अहि सँ स्‍पष्‍ट होइत अछि जे प्रचिन मिथिलाक भूमि वर्तमान नेपालक मोरङ जिल्‍ला सँ पर्सा धरि तथा भारतक दरभंगा सँ पूर्णियाधरि छल ।

नेपालक मध्‍यकालिन इतिहासमे त्रिशक्तीके स्‍थ्‍ाापना भेल छल जाहिमे मिथिला राज्‍यक स्‍थान प्रमुख रहल पाओल जाइत अछि ।

दक्षिण भारतक कर्णाट वंसीय नान्‍यदेव सन १०९७ (११५४ वि.स.)मे बारा जिल्‍लाक सिमरौन गढ़के राजधानी बना सम्‍पूर्ण मिथिलाके समेटि कऽ तिरहुत राज्‍यक स्‍थापना कएलन्‍हि ।

कर्णाट बंशक शासन १३२४ धरि चलल ।

ओहिके वाद अहि राज्‍य पर भारतक मुगल सम्राट गयासुद्धिन तुगलक अनिषर आ ब्राहमण वंशक औनियार आ तकर बाद फेर सँ मुगल सभक अधिपत्‍य रहल छल ।

इम्‍हर मल्‍लकालिन नेपालक इतिहास मे यक्ष मल्‍ल दक्षिण क्षेत्रक विजय अभियानक समयमे मिथिला छिन्‍न भिन्‍न भेल छल ।

ओहि समयमे पश्‍चिमक मगरात सभ बीच एकटा नयाँ शक्तिक उदयभेल जकर नेतृत्‍व मुकुन्‍द सेन कएलन्‍हि । ओ पाल्‍पाकेँ राजधानी बना कऽ अपन राज्‍य विस्‍तारक क्रममे पाल्‍पा सँ मोरङ्गधरि राज्‍य स्‍थापित कएलन्‍हि ।

मुकुन्‍द सेनक मृत्‍युक बाद हुनक बेटासभ बीच राज्‍यक बटबारा भेल जाहिमे पुर्वि भाग मकवानपुर छोटका बेटा लोहाङ्गसेनक हिस्‍सामे पड़लन्‍हि ।

ओ तराइक दक्षिण आ पुर्वी भाग विस्‍तार कएलन्‍हि ।

जाहि अनुसार पूर्वमे टिस्‍टा नहि सँ काठमाण्‍डू उपत्‍यकाक दक्षिणी भू भाग, भारतक चम्‍पारण, सारज, मुजफ्‍फरपुर आ दरभंगाधरि कायम कएने पाओल जाइत अछि ।

सेन वंशक अन्‍तिम राजा दिग्‍बन्‍धन सेनक समयमे अर्थात सन् १७७१ मे  ई रान्‍ज्‍य तत्‍कालिन नेपालमे समाहित भऽ गेल ।

सन् १८१४ सँ १९१६ धरि चलल नेपाल आ अंग्रेज बीचक लडाई मे मिथिलाक मोरङ्ग छोडि सम्‍पूर्ण भू भागपर अंग्रेज कब्‍जा कऽ लेने छल ।

सन् १८१६कें सुगौली सन्‍धीक बाद मिथिलाक किछ भाग पून ः नेपालमे आएल जे वर्तमान नेपालक, मोरङ, सुनसरी , सप्‍तरी, सिरहा, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, वारा आ पर्सा अछि ।

 

राज्‍य पुनर्सरचना मे मिथिलाक अवस्‍था

संविधान सभाक राज्‍य पुनर्संरचना एवं राज्‍यक शक्ति बाँडफाँड समिति झापा सँ पर्सा धरि मिथिला भोजपुरा कोच मधेश राज्‍यक अवधारणा प्रस्‍तुत कएलक अछि ।

प्रस्‍तुत अवधारणा अनुसार अहि राज्‍यमे झापा, मोरङ्ग, सुनसरी, सप्‍तरी, सिरहा, धनुषा महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा आ पर्साके समावेश कएल गेल अछि ।

प्राचिन मिथिलाक नेपाल स्‍थित भूभागके केन्‍द्र बना कऽ बनाओल गेल अहि राज्‍यक राजधानीमे जनकपुरकेँ प्रस्‍ताव कएल गेल अछि ।

प्रमुख राजनीतिक दल एकीकृत नेकपा माओवादी आ एमालेक सहमतिमे समितिक वहुमत सँ अवधारणा पास भेल अछि ।

प्राचिन मिथिला सहित विभिन्‍न काल खण्‍डक इतिहासकेँ देखल जाय तऽ पूर्वके झापा छोडि अन्‍य जिल्‍ला मिथिला क्षेत्रमे रहल प्रमाणित होइत अछि ।

अखुनक कोशी पारक मोरङ, सुनसरी मैथिली भाषी क्षेत्र अछि । बिगतकेँ देखल जाय तऽ एतिहासिक, साहित्‍यिक आ साँस्‍कृतिक आधारसभ भेटैत अछि । मैथिली भाषा साहित्‍यक लेल स्‍वर्ण युग मानल गेल १३ अम शताब्‍दीकेँ मध्‍यमे जखन मैथिली भाषा अपन स्‍थान बना चुकल छल ।

ओहि समयमे विद्यापतिक समकालिन कविक रुपमे मोरङक लक्ष्‍मी नारायण, गोपीनाथ, वीरनारायण, धिरेश्‍वर, भिस्‍म कवि, गंगाधर आदी कविक स्‍थान अबैत अछि ।

अहि सँ ई प्रमाणित होइत अछि जे ओहि समयमे वर्तमानक सुनसरी आ मोरङ्ग सेहो मिथिला क्षेत्रमे छल । अर्थात अखुनक कोशी नदि मोरङ सँ पुर्व छलैक हएत आ बादमे कोशी अपन स्‍थान परिवर्तन कएने हेतैक ।

राज्‍य पुनर्संरचना समिति प्राचिन मिथिलाक इतिहासकेँ अपन आधार मानि मिथिला भोजपुरा कोच मधेशक राज्‍य आवधारणा प्रस्‍तुत कएने अछि आ राजधानी सेहो जनकपुरकेँ बनौने अछि ।

 

प्रस्‍तावित राज्‍यमे मैथिलीक अवस्‍था

सांस्‍कृतिक आ एतिहासिक दृष्‍टीकोण सँ समृद्ध मैथिली भाषाक इतिहास उल्‍लेख करब आवश्‍यक नहि बुझाइत अछि । ई.स. ८०० सय सँ शुरु भेल मैथिली भाषाक १२ सय वर्ष सँ वेशीक इतिहास अछि ।

मैथिलीक विकाश अहि गति मे भेल जे मिथिलाक अतिरिक्त अन्‍य क्षेत्रमे सेहो विस्‍तारित होइत गेल ।

१३ अम शताब्‍दीक उतारार्धमे मैथिली भाषा तत्‍कालिन नेपाल (काठमाण्‍डू उपत्‍यका पर) अपन अधिपत्‍य जमा चुकल छल ।

मुसलमान सभक आक्रमण सँ पराजित भऽ नेपाल पहुँचल हरिसिंहक रानी अपन नैहर भादगावमे शासन स्‍थापना कएलन्‍हि । हुनका संगे बहुत रास मैथिल विद्वानसभ कवि सभ सेहो उपत्‍यका प्रवेश कएने छल । ओही समय सिँ उपत्‍यकामे मैथिली भाषाक विकाश भेल पाओल जाइत अछि ।

ओतवे नहि मल्‍ल शासन कालमे अर्थात १३ अम शताब्‍दीक उतरार्ध सँ लऽ कऽ आधुनीक नेपाल एकीकरणक समय (१७६८ ई.) धरि नेपालक राज काजक भाषा सेहो मैथिली रहल ।

आ वर्तमान अवस्‍थामे सेहो मैथिली भाषा नेपालीक बाद दोसर स्‍थान पर अछि ।

२०५८ सालक जनगणना अनुसार नेपालक १२.३० प्रतिशत जनता मैथिली भाषा बजैत अछि ।

जे कुल जनसंख्‍या २ करोड़ ३१ लाख ५१ हजार ४२३ क १२.३० प्रतिशत अर्थात २८ लाख ४७ हजार ६२५ अछि । मैथिली भाषिक सम्‍पूर्ण क्षेत्रके समेटिक वनाओल गेल मिथिला भोजपुरा कोच मधेशक कुल जनसंख्‍या ६७ लाख ६१ हजार ६७५ अछि । अर्थात प्रस्‍तावित अहि राज्‍यमे मैथिली भाषाक प्रमुख स्‍थान अछि ।

२०५८ सालक जनगणना सर्लाही आ रौतहट जिल्‍लाकेँ बज्‍जीका भाषाक सूचिमे रखने छथि जे कुल जनसंख्‍याक १.५ प्रतिशत अर्थात २ लाख ३१ हजार ५ सय १४ होइत अछि । जकरा मैथिली भाषाक विद्वानसभ विभेदकारी नेपालक राजनीतिकेँ परिणाम मानि रहल छथि । हुनका सभक तर्क छन्‍हि जे बज्‍जीका भाषा मैथिली भाषक सहबोली अछि ।  तहिना नेपाली आ भोजपुरी बाहेक अहि क्षेत्रमे बाजलजाय बला , थारु, दोनवार, अंगिका सहितक भाषासभ सेहो मैथिलीएक सहबोली रहल हुनकासभक दावी छन्‍हि ।

जँ मैथिलीक  संग सहबोली भाषाकेँ सेहो मिला देल जाय तऽ अहि राज्‍यक करिव आधा जनसंख्‍या मैथिली भाषीक हैत । बाकी आधामे अन्‍य भाषा । प्रस्‍तावित अहि राज्‍यमे भोजपुरी भाषाक सहो महत्‍वपूर्ण स्‍थान अछि एकरा नकारल नहि जा सकैया ।

नेपालक कुल जनसंखयाके ५.८५प्रतिशत अर्थात १३ लाख ५६ हजार ६ सय ७३ भोजपुरी भाषी अछि ।

जनसंख्‍याक आधारमानि कऽ प्रस्‍तावित अहि राज्‍यक मुख्‍य भाषा मैथिली हैत से लगभग पक्‍का अछि ।

 

प्रस्‍तावित राज्‍य सँ मैथिलीक अपेक्षा

कोनो भाषाके दिर्घकालिन बनएबाक लेल ओहि भाषाके जनजनसँ जोडव आवश्‍यक होइत अछि । आ जनमुुखि बनएबाक लेल रोजिरोटी सँ जोरब, राज्‍यक अधिकारीक अर्थात कामकाजी भाषा बनाएब अछि । बोलीचालीक भाषामे मात्र सिमित होइत गेल मैथिली भाषा जँ अहि राज्‍यक मुख्‍य भाषा बनैत अछि तऽ मैथिली भाषाक लेल नव स्‍वर्णिम युगक शुरुवात हैत ।

मुदा अखनो विघ्न बाधासभ आवि सकैत अछि ।

मधेशवादी दलसभ अहि पुनर्संरचनाके स्‍वीकार नहि कऽ रहल अछि । तऽ किछ आन दल सभ सेहो एकर विरोधमे अछि ।

अपना भाषाके स्‍थापित करएबाक लेल समिति सँ प्रस्‍तवित संरचना यथावत संविधानसभा सँ स्‍वीकृत होइक  तहि लेल  सम्‍पूर्ण मैथिली भाषीकेँ एक जुट भऽ आगा आएव आवश्‍यक अछि ।

मिथिला राज्‍य स्‍थापना संघर्ष समिति सहित मैथिली भाषाक क्षेत्रमे कार्यरत संघ संस्‍थाक प्रमुख दायित्‍व बनैत अछि जे अहिके लेल आगा आवय,

प्रस्‍तावित राज्‍य मे अन्‍यभाषी सभ सेहो छथि । तएँ हुनक भाषाके संरक्षणक विश्‍वास दियबैत मैथिली भाषाके स्‍थापित करायब आवश्‍यक अछि । मुदा काज कठीन अछि । एहि चुनौतीकेँ स्‍वीकार करहि परत।