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१.
अमरकान्त अमर-संघीयतामे मैथिली भाषा
२.
अतुलेश्वर-
तीन तिरहुतिया तेरह पाक
३.
पूनम मण्डल-
स्थानीय कवि
परिषद (सलहेसबाबा परिसर- औरहा) वार्षिकोत्सव-
2012
१
अमरकान्त अमर
संघीयतामे मैथिली भाषा
नेपालक नयाँ संविधानमे जोड़ तोड़ सँ संघीयताक बात उठि रहल अछि । देशमे संघीय संरचना
भेलाक बाद मात्र सभक अधिकार सुनिश्चित होएबापर मिथिला आ मैथिली भाषाभाषीसभ आश्वस्त
अछि । तएँ संघीयताक विकल्प आब नहि रहल एतुका जनता सेहो अवाज उठा रहल अछि । तखन
संघीय संरचनामे राज्यकेँ कोना कऽ प्रदेशमे छुटिआओल जाए अखनोधरि विभिन्न दलसभबीच
मतान्तर देखल गेल अछि । किओ १४ टा राज्य होएबाक मुद्दा उठबैत छथि तऽ किओ ५ टा, किओ
३ टा आदी इत्यादी । मुदा अखन विचारमे मात्र सिमित रहि गेल अछि राज्य पुनरसंरचना ।
चाहे जे से देर सही दुरुस्त राज्य पुनरसंरचना आ नयाँ संविधानक कल्पना नेपाली जनता
कऽ रहल अछि ।
राष्ट्र भाषा नेपाली बाहेक नेपालमे दोसर राष्ट्रीय भाषाक रुपमे मैथिली भाषा अपन
सर्वोच्चता कायम कएने अछि । एहिमे ककरो दू मत सेहो नहि अछि । संघीयतामे गेला सँ
मैथिली भाषाकेँ विकास तीव्रगती सँ हएत । राज्य पुनरसंरचनामे जाहि रुप सँ मिथिला
प्रदेशक बात उठि रहल अछि, निश्चित मैथिली भाषाक विकास किओ नहि रोकि सकत । तखन
मैथिली भाषापर सभ दिन सँ कुठाराघात होइत आएल अछि । एहि सँ बचबाक लेल मैथिली
भाषाभाषीसभकेँ सदिखन सचेत रहय पड़त । परापूर्व कालहि सँ मैथिली भाषा समृद्ध रहलाक
बादो आन भाषा एनाकऽ लादल गेल जे मैथिली भााषाकेँ उपर उठयमे बहुतरास समस्याक सामना
करय पड़ल । ओना मिथिला क्षेत्रक मिथिलानीसभ अपन भाषा आ संस्कृतिकेँ अखनोधरि बचाबएमे
सफल छथि । तखन संघीयतामे मैथिली भाषाक स्थान कोन रुप सँ बढि सकत आ एकर प्रभाव केहन
हएत ताहिकेँ सम्बन्धमे सामाजिक समावेशीकरण अनुसन्धान कोषक सहयोगमे भाषा विज्ञान
सम्बन्धमे अनुसंधान कएनिहार भाषा विद् डा. प्रा योगेन्द्र प्रसाद यादवक कहब छन्हि
जे भाषाक आधारपर प्रदेशकेँ निर्माण कएल गेल तऽ मैथिली भाषा वर्तमान अवस्था सँ बहुत
सुदृढ आ व्यावसायीकरण दिस उन्मुख हएत । भाषाक आधारपर राज्य पुनरसंरचना कएल गेल तऽ
हरेक निकायमे सभगोटे सहज हएत कहैत ओ कहलन्हि जे प्रदेशमे सामनजस्यता, मिलमिलाक
संगहि भाषाक संगहि अन्य निकायसभमे सेहो विकासक दू्रतगति लेत । भाषाक आधारपर वा
समग्र मेधश एक प्रदेशक आधारपर प्रदेश निर्माण भेल तऽ मैथिली भाषा तुलनात्मक रुपमे
सभ सँ अग्रणी स्थानमे रहत भाषा विद् यादवक दावी छन्हि । सम्रग मधेश प्रदेशक निर्माण
भेल तऽ हिन्दी भाषाक वर्चश्व मिथिला क्षेत्रमे कायम हएत कएल गेल प्रश्नक जवावमे डा.
प्रा. योगेन्द्र प्रसाद यादव कहलन्हि सम्रग मधेश प्रदेशक निर्माण भेल तऽ हिन्दी
मात्र सम्पर्कक भाष रहि सकत । हिन्दी सँ मैथिली भाषाकेँ ‘इगनोर’ नहि कएल जाएत कहैत
ओ कहैत छथि ,‘संघीय संरचनामे मैथिली भाषाक बाहेक अन्य स्थानीय भाषा सेहो विकास करत
।’ वर्तमान समयमे देखल गेल अछि जे प्राथमिक विद्यालयसभमे मातृ भाषामे अध्ययन
अध्यापन नहि भऽ रहलाक कारण विद्यार्थीसभमे मनोवैज्ञानिक त्रास उत्पन्न भेल हुनक कहब
छलन्हि । मनोवैज्ञानिक त्रासक कारण वच्चासभ विद्यालय जाए सँ हिचकिचा रहल अछि
अनुसंधानक क्रममे देखल गेल ओ जानकारी देलन्हि अछि । तहिना अपन भाषामे पढाई नहि भऽ
रहला सँ शिक्षामे गुणात्मक वृद्धि नहि भऽ रहल आ विद्यार्थीसभ सेहो नीक सँ नहि बुझि
रहल हुनक धारना छल ।
मातृ भाषामे शिक्षा ग्रहण कराओल गेल तऽ वच्चासभक मानसिक विकासक वृद्धि होएबाक संगहि
भाषिक विकास सेहो होइत अछि कहैत भाषा विद् योगेन्द्र प्रसाद यादव कहलन्हि भातृ
भाषाकेँ बीचमे रोकि अन्य भाषामे बुझेला सँ मानसिक असर सेहो पहुँचैत अछि
बतौलन्हि । अन्य देशसभमे कएल गेल अनुसंधानमे देखल गेल जे मातृ भाषामे शिक्षा दिक्षा
देला पर वच्चासभक दिमाग अन्य भाषाक तुलनामे बेसी तेज होइत अछि तएँ मातृ भाषाक
प्रयोग करयपर ओ जोड़
देलन्हि ।
मिथिला क्षेत्रमे मैथिली भाषाक लोप होइत देखल जा रहल प्रति ओ कहैत छथि जाहि भाषाकेँ
लोक सेवामे समोवश नहि कएल गेल, सरकारी काम काजक भाषामे प्रयोग नहि भेल आ अन्य
अवसरसभ प्राप्त नहि भेल तऽ ओ भाषाकेँ लोप होएबाक सम्भावना रहैत अछि ।
भारत, स्वीटजरलेण्ड आ केन्या सहितक देशसभमे संघीय संरचना भाषाक आधारपर कएल गेल कहैत
ओ कहलन्हि भाषाक आधारपर कएल गेल राज्य पुनरसंरचना स्थायित्व प्रदेशक निर्माण होएबाक
ओ दावी कएलन्हि अछि ।
तहिना संघीयतामे देश गेलापर मैथिली भाषाक विकास कोन रुप सँ आगा बढत ताहि सम्बन्धमे
मिथिला राज्य संघर्ष समितिक संयोजक प्राध्यापक परमेश्वर कापड़िक कहब छन्हि जे
संघीयतामे मैथिली भाषा, सांस्कृतिक असल पहिचान आ स्वायत्तताक वोध होएबे करत तएँ तकर
दोसर विकल्प खोजब भूत खेलाएब अछि ।
मैथिली भाषा अभिव्यक्तिक माध्यम मात्र नहि भऽ मैथिली भाषामे लौकिकता, सांस्कृतिकता,
कला, साहित्यसभकेँ स्पष्ट आ अनिवार्य छाही देखल जाइछ प्राध्यापक कापड़िक कहब छन्हि ।
ओ कहैत छथि मैथिला भाषामे सांस्कृतिक निजत्व छैक जकर संप्रेशन आन भाषामे नहिए भऽ
सकैत अछि । जकर उदाहरण मैथिली भाषाक होरी, छठि, सामा, जटजटिन, लगनी, सोहर, समदाउन,
लोकगाथा, लोक गीत रहल ओ उल्लेख कएलन्हि । ओ कहलन्हि एहिसभकेँ मैथिली बाहेक आन
भाषामे अुवाद नहि भऽ सकैत अछि ।
प्रजातन्त्र गणतन्त्र सँ बेसी एखन देशमे संघीयता चाही कहैत ओ कहलन्हि संघीयता सँ
अस्मिताकेँ पहिचान आ स्वात्तताक वोध होइत
अछि । संघीयतामे भाषिकता, जातियता, क्षेत्रीयता, ऐतिहासिकता आ पौराणिकताकेँ प्राकृत
रुप सँ देखाइ दैत अछि । भाषाक मामलामे मैथिलीकेँ सर्वसत्तावादिता नहि एतुका सभ भाषा
आ संस्कृतिककेँ संगहि एकर समायोजित स्वायत्तता मिच्छुन्नताक पक्षधर रहल
अछि । मैथिली भाषा भाषी नेपालमे एखन मोरङ्ग सँ लऽ कऽ रौतहट धरि रहल अछि । ओना
मैथिली भाषाक बात करी तऽ धनुषा, महोत्तरी, सिरहा, सप्तरी, मोरङ्ग, सुनसरी, रौतहट,
सलार्ही सहितक जिल्लामे बेसी प्रभाव देखल गेल अछि । तहिना मिथिला क्षेत्रक बात करी
तऽ पूर्वमे मोरंग सँ लऽ पश्चिममे बाराक सिम्ररौनगढधरि मान जाइत अछि । मैथिली भाषा
किछु वर्ष इम्हर सँ गती लेवएमे पाछा पड़ल देख गेल मुदा पहिचानक बात उठि रहल समयमे आ
संचारक्षेत्रक विकास भेलाकबाद मैथिली भाषाक विकास पुनः गती लेलक अछि । मैथिली
भाषापर अन्य भाषासभ लादल नहि गेल तऽ स्वतः मैथिली आ मिथलाक विकास हएत । समय समयमे
मैथिली भाषाकेँ कमजोर करय लेल मैथिलीएकेँ मगही कहि कऽ प्रचार कएल जाएत अछि । ओना
भाषा विद योगेन्द्र प्रसाद यादव मगही संक्रिर्णताक उपजकेँ संज्ञा देने छथि तऽ
प्राध्यापक परमेश्वर कापड़ि मगहि भाषा राजनीतिक विषपाद रहल बतौने छथि । चाहे जे से
मगहि कए नहि प्रचार कएल जाएत ओ मैथिलीए भाषा रहल सभ स्वीकार करैत छथि । तहिना
भोजपुरी भाषा मैथिलीपर सेहो भाड़ी भेल जा रहल अछि । मैथिलीक अगिंकाक रुपमे रहल कहल
जाएबला भोजपुरी भाषामे अश्लिलताक प्रभाव सँ मैथिलीपर भाड़ी पड़ि रहलाक बादो मैथिलीक
अस्तित्व अखनो बाचय सफल भेल अछि । मैथिली भाषाकेँ शासन प्रशासन, लोकसेवा आ अदालतक
संगहि संचारी भाषाक रुपमे प्रयोग भेलाक बाद मैथिली भाषाक प्रभाव क्षेत्र बहुत
व्यापक होएबाक सम्भावना अछि । आ एना भेलापर मैथिली भाषाकेँ विकास करय नहि पड़त स्वत
भऽ जाएत । मैथिली भाषाकेँ राज्य स्तर सँ दू भावनामे नहि राखल जाए तऽ एकर प्रभाव
काठमाण्डू सहित अन्य भाषाभाषाीमे सेहो लोकप्रिय
अछि । मैथिली भाषाकेँ अपन लिपी होएबाक संगहि एकर अपन निजत्व अछि ।
२.
अतुलेश्वर
तीन तिरहुतिया तेरह पाक
मिथिला आ मैथिली भाषाक बाबा विश्वनाथक नगर काशीसँ पौराणिक संबंध रहल अछि। मिथिलाक लोक मोक्ष प्राप्तिक कामनाक लेल काशी वासक बड्ड बेशी महत्व दैत छलाह तँ दोसर दिशि एहिठामक लोकक उच्च शिक्षाक आकर्षणक केन्द्र छल काशी। एहि तरहेँ सोचल जाए सकैत अछि जे मैथिली भाषाक आधुनिक कालकेर विकास एहीठाम प्रारम्भ भए मैथिली भाषाक आधुनिकीकरणक निओँ पड़ल होएत। ई तँ सर्वविदित अछि जे मैथिलीक लेल आन्दोलनक प्रारम्भ आ आन्दोलनकें मिथिलाक लोकसँ जोड़बाक रणनीति काशीअहिसँ प्रारम्भ भेल । मुदा, हेमनिमे देखबामे आबि रहल अछि जे काशी मिथिलाक लोक-भावनासँ तँ निश्चित रुपेँ जुड़ल अछि, परञ्च लोकसँ नहि । मिथिलाक लोक आइ उच्च शिक्षाक हेतु जतए आन-आन ठाम जाइत छथि तँ तीर्थ करबाक लेल सेहो काशी सँ बेशी दक्षिण वा उत्तर दिशि। कहल जाइत छैक जे सामाजिक-धार्मिक वा अन्य भावना लोककें कोनो स्थान सँ जोड़ैत अछि। आइ काशीक प्रति मिथिलाक लोकक भावनामे ह्रास आयल अछि। काशी, जे कहिओ सभ मिथिलाबासीक हृदयमे बास करैत छल, आइ बहुतो दूर चलि गेल अछि।
हेमनिमे हम काशी हिन्दू विश्वविद्यालयमे एकटा कार्यशालामे गेल रही, लगभग पन्द्रह दिन ओतय रहलहुँ, मुदा हमरा ओ काशी नहि भेटल, जतए कहियो मिथिलाक लेल जागरण कयल गेल छल। बहुतो प्रयास कएलाक बादो नहि तँ केओ जागरणक चर्चा कयनिहार आ नहि केओ जागरण कयनिहारक। लागल जेना हुनकासभकेँ एहि प्रकारक कोनो जागरणक ज्ञानो नहि छनि। कारण कार्यशालामध्य जखन हम चर्च कएल जे कहियो मैथिली भाषाक पढ़ाइ एहि विश्वविद्यालय मे होइत छल, तँ से सुनि ओतय उपस्थित मैथिल आ अमैथिल अकचका गेलाह। अत्यन्त दु:ख भेल ई सोचि जे हमसभ कतबा सुस्त भए गेलहुँ अछि अपन मातृभाषाक प्रतिऐँ। एक दिशि आन भाषाभाषी गर्भमे नुकाएल अपन इतिहास बहार करबामे व्यस्त छथि आ हमसभ अपन इतिहासकेँ बिसरबामे। मोन पड़ल जे कहियो हमर सभक बुद्धिजीवी वर्ग अपन भाषा आ माटिकें सम्मान देबाक लेल लड़ैत छलाह, मुदा आजुक बुद्धिजीवी वर्ग बसुलिऐ धारकेर प्रकृत्तिसँ आबद्ध भए अपन माटि आ भाषाक चिन्तन छोड़ि चुकल छथि। कहबाक अभिप्राय जे कतेको संघर्ष सँ हमर-अहाँक पूर्वजलोकनि मैथिलीकें अखिल भारतीय साहित्यिक मंच सँ जोड़लनि। हुनकासभक सोच छल जे मैथिलीकेँ विस्तृत परिवेश प्राप्त होएतैक, जाहिसँ साहित्यिक समृद्धि होएत। मुदा, अत्यन्त कष्टक अनुभूति होइछ, जखन आजुक कर्णधारलोकनिकेँ ‘स्व’केर फेरमे पड़ल देखैत छी। किछु एहने सोचनीय स्थितिमे अपन उद्वेग जखन एकटा मित्र लग राखल तँ हुनक कहब छल जे ई तँ अदौसँ होइत आबि रहल अछि। हमसभ अपनेँ जाँघ पर कुरहरि चलएबामे बड़ आगू छी, भने किछु कालक हेतु किछु सुविधा प्राप्त भए जाए। हुनक कहब छल जे अहाँक चिन्ता साहित्य अकादमी पुरस्कारक स्थिति देखि भए रहल अछि, मुदा ई तँ बहुतो दिनसँ होइत आबि रहल अछि। पुरस्कार प्राप्त करबाक हेतु गुटबाजी करए पड़त, नहि तँ चकोर बनि ओसक बुन्नकेर आशामे जीवन व्यतीत भए जाएत। मैथिली मे आई धरि जतेक अकादमी पुरस्कार भेटल अछि, ओकर जँ उचित मूल्यांकन कयल जाय तँ देखब जे बेशीतर मात्र गुटक प्रसंशक वा हुनक दया पात्रहि पुरस्कारसँ सिंचित भेलाह अछि, एहि हेतु चाहे केहनो साहित्यकार वा साहित्य होथु, हुनक बलिदान देल गेल। ओहि मित्रक एकटा आर बात बहुत दुखदायी छल जे मैथिलीक जाहि पुस्तककें साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल अछि, ओहि मे किछु लेखकक पुस्तककेँ छोड़ि बाँकी पुस्तकक अनुवाद जखन दोसर भाषामे कयल जायत तँ दोसर भाषा-भाषी इएह सोचताह जे मैथिली मे अखनि लेखन आरम्भ भेल अछि, किएक तँ ओ पुस्तक रचनाकारक प्रारम्भिके चरणक होइत छनि। हुनक ई समालोचना सुनि हमरा भेल जे यदि ई भावना सत्य तँ कि मैथिली अपन परिवेशकेँ बढ़ा नहि सकत? सङहि सोचनीय विषय इहो जे एहि भाषाक प्रतिभा गुटबाजीक फेरासँ उबरबाक हेतु दोसर भाषाक दिस आकृष्ट नहि भए जाथि। हमरा जनैत एकर एकमात्र उपाय अछि जे माँ मैथिली एहि तथाकठित मठाधीशलोकनिकेँ सद्बुद्धि देथुन जे ओ सभ अपन व्यावहारिक पक्षमे पारदर्शिता आनथि, पहिनेँ माँ मैथिलीक हित देखथु, तखन अपन। ओना मैथिलक हेतु तँ कहले गेल अछि जे ‘तीन तिरहुतिया तेरह पाक’, जकरा साहित्य अकादमी पुरस्कारक चयन समितिक सदस्यलोकनिक मध्य चरितार्थ होइत देखि एतबा सोचबाक हेतु बाध्य कएलक।
काशी मे घुमबाक समय जे मैथिल भेटैत छलाह आ जखनि हुनका लोकनिसँ मैथिली मे गप्प करैत छलहुँ तँ एकटा अलग आनन्द भेटैत छल(ओ मैथिल मात्र बुद्धिजीविए नहि अपितु साधारण मजदूर वर्गक सेहो होइत छलाह ), ओतेक आनन्द जे गंगा आ विश्वनाथ दर्शन सँ नहि भेटैत छल। एहीक्रममे मकर संक्रान्ति दिन अस्सी घाट पर रिक्शा चालक पासवान जीक गप्प मोन पड़ैत अछि, जनिक उक्ति छल जे हमर भाषा मैथिली बड़्ड मीठ छैक, मजबूरी आ पेटक कारणेँ मैथिली छोड़ि दोसर भाषा बजैत छी। हुनक एहन उक्ति सुनि हम पुन: सोचबाक हेतु बाध्य भेलहुँ जे जँ एहिना पढ़ल-लिखल व्यक्तिओ सोचथि, तँ माँ मैथिलीक केहन दिन होएतनि? अन्त मे आदरणीय साकेतानन्दजीक आकस्मिक देहावसान बड़ कष्टप्रद, काशीमे हुनका अवसानक मादे चर्चा करैत डा. अजय मिश्र कहलन्हि जे एकटा सहज लोक चलि गेलाह मैथिली संसारसँ। ठीके, राजशी ठाठ-बाट छोड़ि आमजनक जीवन व्यतीत करैत साकेतानन्दजीक सौम्य मुखमंडल आगाँ नाचि उठल। मुदा, ई तँ ईश्वरेच्छा। हुनकहि हाथ सद्गति, सद्बुद्धि आ सद्भावना, प्रार्थना जे मैथिलीक तथाकथित भाग्यनिर्मातालोकनिकेँ मुक्त हाथेँ बाँटथु सद्बुद्धि।
३.
पूनम मण्डल
स्थानीय कवि परिषद (सलहेसबाबा परिसर- औरहा) वार्षिकोत्सव- 2012.
दिनांक- 27 जनवरी 2012 (शुक्र दिन) स्थानीय कवि परिषदक चारिम वार्षिकोत्सव-2012क अवसरपर सम्मान समारोह आ कवि सम्मेलन श्री उमेश पासवानक संजोजकत्वमे सुसम्पन्न भेल। स्थान- सलहेसबाबा परिसर- औरहा, प्रखण्ड- लौकही, जिला- मधुबनी, समए- 11: 00 बजे (पूर्वाहन)सँ संध्या 5 बजे धरि कार्यक्रम चलैत रहल। कार्यक्रमकेँ दीप प्रज्वलित क' विधिवत् उद्घाटन केलनि वनगामा (उत्तरी) पंचायतक मुखिया श्री दयानंद साह आ सरपंच श्री नूनू साहजी। मैथिली साहित्यक श्रेष्ठ कथाकार, नाटकरकार, उपन्यासकार आ कवि श्री जगदीश प्रसाद मंडल, एकैसम् शताब्दीक पहिल दशकक सर्वश्रेष्ठ कवि श्री राजदेव मंडल आ कवि श्री अच्छेलाल शास्त्री जीकेँ नव वस्त्रक संग प्रो राधाकृष्ण चौधरी लिखित ‘मिथिलाक इतिहास’ आ मैथिली साहित्यक सर्वश्रेष्ठ बाल-साहित्य ‘मिथिलाक लोकदेवता’ (श्रीमती प्रीति ठाकुर) पोथीसँ सम्मानित कएल गेलनि। सम्मान समारोहक अध्यक्षता केलनि श्री मिथिलेश सिंह (शिक्षक, मध्य विद्यालय- महदेवा, मधुबनी) आ मंच संचालन श्री दुर्गानंद मण्डल आ संजीव कुमार शमा।
कार्यक्रमकेँ आगाँ बढ़ाओल गेल श्री राधाकान्त मण्डलक स्वलिखित स्वागत गीत- हे मिथिलावासी कविवर, स्वागत हमर स्वीकार करू....सँ। ‘आशासँ फूलक माला लेने हम ठाढ़......’ सुन्दर गीतसँ प्रो. उपेन्द्र नारायण अनुपमजी सेहो स्वागत केलनि। तकरबाद स्वागत भाषण प्रस्तुत केलनि प्रो. कपिलेश्वर साहु जी आ स्वागत कविताक अतिविशिष्ठ पाठ केलनि- श्री रामविलास साहुजी। पहिल सत्रक समापनक बाद दोसर सत्र प्रारम्भ भेल जइमे लगभग 2 दर्जनसँ बेसी कवि लोकनि अपन-अपन नूतन कविताक पाठ केलनि जे ऐ तरहेँ भेल-
अवकाश प्राप्त शिक्षक- श्री दुखन प्रसाद यादव- गरीबी, गणतंत्र, हमर भारत छै, श्री नंदविलास राय- मानवता, शिक्षित बेरोजगार, लक्ष्मी दास- लौटिया, अखिलेश कुमार मण्डल- जिनगी, रामविलास साहु- प्रेमक भूखल, माघक जाड़, हमर गाम घर, उमेश मण्डल- आगाँ अबै जाउ, आत्म विश्वास, अढ़ाइ हाथ, प्रो. उपेन्द्र नारायाण साह- छी कनी, प्रो. कपिलेश्वर साह- गामक घटक, श्री विरेन्द्र कुमार यादव- मारल बुइध, श्री हेमनारायण साह- व्यथा, श्री कुसुम लाल मंडल- ठाढ़ी, श्री राजदेव मंडल- कामना, श्री अच्छेलाल शास्त्री- हवा बहैत अछि सन-सन-सन, श्री जगदीश प्रसाद मण्डल- किछु सिखू किछु करू, उमेश पासवान- रगड़ा, संजीव कुमार शमा- भेल छने अन्हार, गप मजगर कह, प्रो. रमेश कुमार मंडल- आत्म-हत्या, अहिना श्री आशीष कुमार सिंह, श्री अमरनाथ यादव, संजय कुमार सिंह, सोनेलाल यादव, रामप्रवेश मंडल, राधाकान्त मंडल आदि।
ऐ अवसरपर लौकही थानाध्यक्ष श्री राज किशोर बैठा, श्री गुप्ता प्रसाद सिंह, एस. आइ. लौकही, मधुबनी, छिन्नमस्तिका एफ.एम, राजविराज, नेपालसँ आएल प्रमोद प्रियदर्शी, भूतपूर्व सरपंच श्री रामनारायण यादव, शिक्षक श्री सत्य नारायण मण्डल, डंगराहा पंचायतक भूतपूर्व मुखिया श्री रामप्रीत मंडल जीक संग-संग लगभग पाँच सएसँ ऊपर लोक समारोहमे भाग लेलनि।
‘विदेह’ मैथिली पोथी प्रदर्शनीसँ ग्रामीण सभमे काफी हर्ष देखबामे आएल।
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