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रमाकर चौधरी, सेवानिवृत्त चीफ मैनेजर, भारतीय स्टेट बैंक

 

मधुमेह/ ग्लायसेमिक इंडेक्स और ग्लायसेमिक लोड/ मधुमेह बिमारीक प्रथम चरण स्थिति/ मधुमेह बिमारी केर दोसर चरण (ऽtage)/ मधुमेह बिमारीक तेसर चरण/ मधुमेह बिमारीक चारिम अवस्था(ऽtage)/ मधुमेह बिमारीक पाँचम अवस्था(ऽtage)/ मधुमेह बिमारीक छअम अवस्था (stage)

मधुमेह

आइ हम मधुमेह बिमारी पर किछु आवश्यकीय बात बता रहल छी। सामान्यतः लोक सभ ई मानि रहल छथि जे, जं मधुमेह बिमारी भ गेल त ओ कहियो जरि सं ठीक नहि होयत आ सभ दिन दवाई खाईये पड़त। ई बात किछु हद्द तक सत्य मानल जा सकैत अछि, कारण अधिकतर लोक अपन स्वास्थ्य लेल नहि त जागरूक होमय चाहैत छथि आ ने अनुशासित। आइ देखि रहल छी जे ई मधुमेह बिमारी दिन प्रति दिन अपना आगोश मे क्रमिक रुपेण अधिक सं अधिक लोक के लऽ रहल अछि। हमरा जानतबे मधुमेह बिमारीक विषय मे पूर्ण जानकारी वैज्ञानिक दृष्टि सं हासिल करवाक चाही। ओकर पूर्णतया उन्मूलन हेतु खान-पान मे और रहन-सहन मे अनुकूल परिवर्तन केनाय आवश्यक अछि। एहि लेल जानकारी संग खान-पान आ रहन-सहन लेल स्वयं मे अनुशासित रहब सेहो परम आवश्यक अछि। ई बिमारी आइये नहि भेल अछि। ओकर इतिहास पुरान अछि। तखन आधुनिकता आओर विकासक क्रमे खान पान मे परिवर्तनक फलस्वरूप ओकर बहुतायता मे वृद्धि भेल अछि। आधुनिकताक क्रमे विज्ञानक क्षेत्र मे सेहो अधिकाधिक विकास भेल अछि। स्वास्थ्य विज्ञान मे शोध आओर अन्वेषणक फलस्वरूप अनेकानेक जटिल आओर गंभीर बिमारीक इलाज सहज आ बिमारी जरि सं उन्मूलन योग्य अछि। ओहि मे हमरा बुझने मधुमेह बिमारी सेहो उन्मूलन योग्य अछि। बहुत पूर्व मे वैद्य लोकनि बिमारी सभक इलाज जड़ी - बुटी, विभिन्न तरहक भस्म आ पथ परहेज सं करैत छलाह। ओ लोकनि मुख्यतया लक्षण आधारित इलाज करैत छलाह। बहुत पहिले मामूली संक्रमण आओर दुर्घटना सं लोक सभ बीमार होइत छलाह। कोनो कोनो संक्रमण ओहेन होइत छल जे गामक गाम साफ भ जाइत छल। स्वास्थ्य विज्ञान मे प्रगति भेला सं ई सब नियंत्रित भ गेल। ओही तरहें मधुमेह बिमारी हेतु सेहो वैज्ञानिक लोकनि सकारात्मक दिशा मे आगां बढि रहल छथि। सर्वप्रथम ई देखल गेल जे ओहेन मरीज जे खूब पानि पिवईत छलाह और हुनका अधिक पेशाव होइत छल। शरीर के तौल धीरे धीरे कम भ जाइत छल। किछु महिना मे हुनक मृत्यु भ जाइत छलनि। तत्कालीन चिकित्सक लोकनि हुनका उपवास करा, कम पानि पर राखि, मात्र हरियर तरकारी इत्यादि खुवा लक्षण आधारित इलाज करैत छलाह। बाद मे पाओल गेल जे ओहेन मरीज के पेशाव मे चुटटी लुधकैत अछि। तखन चिकित्सक लोकनि ओहि बिमारी केर नाम मधुमेह रखलनि। एहि बिमारीक कारण हेतु ओहि समय मे तरह तरह के अनुमान लगायल गेल। कियो अनुमान लगेलनि जे ई पाचन तंत्र केर खराबी सं, कियो कहलनि किडनी के खराबी सं, कियो कहलनि मस्तिष्क के खराबी सं। क्रमिक रूप मे अन्वेषण भेल गेल आ वैज्ञानिक लोकनि ओहि निष्कर्ष पर पहुँचलाह जे अगन्याशय (Pancrea) मे इन्सुलिन नामक हॉर्मोन होइत अछि तकर कमी सं मधुमेह बिमारी होइत अछि। बाद मे त ई हॉर्मोन वैज्ञानिक लोकनि प्रयोगशाला मे बनेवा लेल सफल भेलाह। ओहि सिद्धांत पर मरीज के इलाज केलनि, किछु हद्द तक सफलता जरूर भेटल परंच ई स्थायी इलाज संभव नहि भ सकल। वैज्ञानिक अन्वेषणक क्रम मे कार्बोहाइड्रट, प्रोटीन, वसा, खनिज और विटामिन एहि सभक भूमिकाक संदर्भ मे विस्तृत ज्ञान भेल आओर पाओल गेल जे खान पान मे उपलब्ध कार्बोहाइड्रट और चीनी केर अधिकता शरीरक रक्त मे चीनीक परिमाण बढ़वैत अछि। मधुमेह बिमारीक संदर्भ मे पूर्ण जानकारी लेबा सं पूर्व किछु निम्नलिखित जानकारी आवश्यक अछि।

कार्बोहाइड्रेट

शरीर संचालन हेतु शक्ति (Energy) केर आवश्यकता होइत छैक जे कार्बोहाइड्रेट सं भेटइत अछि। हम सब जे किछु भोजन करैत छी, ओकर कार्बोहाइड्रट अंश पाचनतंत्र मे विखंडित भ शक्ति केर सरलतम भाग ग्लूकोज मे परिवर्तित होइत अछि आओर ओ शोणित मे चल जाइत अछि। शोणित के माध्यम सं शरीर के प्रत्येक अंग मे शक्ति प्रदान करैक हेतु ग्लूकोज पहुँचि जाइत अछि। शोणित मे एहि ग्लूकोज के परिमाण सामान्य सं जाखन अधिक होइत अछि त हम कहैत छियैक जे ई मधुमेह थिक। रक्त परीक्षण मे जं परिमाण ७० से १०० मिली ग्राम प्रति डेसी लिटर अछि त ई सामान्य अछि। कखनो काल ग्लूकोज स्तर सामान्य सं नीचा सेहो आबि जाइत अछि जकरा निम्न रक्त सर्करा कहल जाइत अछि। अर्थात सर्करा असंतुलन मधुमेह बिमारी थिक।

इन्सुलिन

जखन शोणित मे ग्लूकोज के आवक प्रारंभ होइत अछि, ओकरा शरीर के प्रत्येक अंगक कोशिका मे प्रवेश करवैक लेल वाहक के रूप मे इन्सुलिन के काज पड़ैत छैक। एहि प्रक्रिया लेल हमर अगन्याशय सक्रिय भ ओहि लेल इन्सुलिन के आपूर्ति करैत छैक।

मधुमेहक प्रकार

टाइप -१ मधुमेह : जखन आनुवांशिक या अन्य कोनो कारण सं शरीर के अपन इन्सुलिन आवश्यकता सं बहुत कम रहैत छैक तखन शोणित के ग्लूकोज इन्सुलिन के अभाव मे कोशिका सभ मे नहि जा पवैत छैक आओर रक्त परीक्षण मे ग्लूकोज बढल अवैत छैक।

एहि तरहक बढल ग्लूकोज स्तर के टाइप -१ मधुमेह कहल जाइत अछि।

उपचार : एकर उपचार लेल चिकित्सक समीचीन खोराक मे इन्सुलिन दैत छथि।

टाइप -२ मधुमेह : जखन शरीरक अपन इन्सुलिन उपलब्धता प्रयाप्त रहलाक वावजूद शोणित मे सर्करा या ग्लूकोज स्तर सामान्य सं अधिक अवैत अछि त ओकरा टाइप-२ मधुमेह कहल जाइत अछि।

उपचार : एकर उपचार लेल चिकित्सक समीचीन खुराक मे दवाई लेवाक हेतु सुझाव करैत छथि। ई दवाई सं अपन अगन्याशय सक्रिय भ और अधिक इन्सुलिन आपूर्ति करैत अछि ताकि रक्त मे उपस्थित ग्लूकोज के शरीर के कोशिका सभ मे पहुंचा दैक आ रक्त मे उपस्थित सामान्य सं अधिक ग्लूकोज अपन सामान्य स्तर पर आवि जाय।

विशेष गर्भित तथ्य : (१) जखन शरीर मे प्रचुर मात्रा मे इन्सुलिन उपलब्ध अछि तखन कोन कारण सं टाइप-२ मधुमेह होइत अछि ?

एकर उत्तर अछि शरीर कोशिका मे इन्सुलिन प्रतिरोध उत्पन्न भ गेलैक अछि, अर्थात कोशिका मे ग्लूकोज प्रवेश करेवाक हेतु अगन्याशय द्वारा सामान्य रुपेण उत्सर्जित इन्सुलिन हॉर्मोन सक्षम नहि भ पावि रहल छैक। दवाई देला उपरान्त अगन्याशय के सक्रियता बढ़ा और अतिरिक्त इन्सुलिन आपूर्ति होइत छैक। ओहि सं शोणित मे उपस्थित अधिक ग्लूकोज अगन्याशय द्वारा प्रदत्त अतिरिक्त इन्सुलिन के सहयोग सं कोशिका सभ मे चल जाइत छैक। फलस्वरूप शोणित केर ग्लूकोज स्तर सामान्य भऽ जैत अछि।

() आखिर शरीरक कोशिका इन्सुलिन प्रतिरोध कोन कारण सं करैत छैक?

कोशिका के आवश्यकता सं अधिक ग्लूकोज नहि चाही। अगर जबरदस्ती अधिक ग्लूकोज कोशिका मे जेतैक तखन लिपिड, कॉलेस्टॉरोल और ट्राइग्लीसराइड् अधिक वनय लगतैक। एहि सब कारण सं कोशिका प्रतिरोध करय लगैत छैक। अगर खान पान मे नियंत्रण नहि आ सिर्फ दवाई पर निर्भर भऽ मधुमेह प्रवंधन करैत छी ई उचित नहि। तें मधुमेह के एक प्रोग्रेसिव बिमारी कहल गेल अछि। क्रमिक रुपेण पहिले मधुमेह फेर रक्त चाप फेर लिपिड प्रचुरता फेर हृदय ,किडनी लिवर संबंधित अनेकानेक बिमारी।

() की सम्भव अछि जे मधुमेह के पूरा पूरी ठीक कयल जा सकैत अछि?

बिल्कुल सम्भव अछि। खान पान सं अगर कोशिका द्वारा इन्सुलिन प्रतिरोध शून्य कऽ लैत छी त संभव अछि जे मधुमेह पूर्णतया ठीक भऽ जायत। खान पान ओहेन हेबाक चाही जाहि मे कार्बोहाइड्रट कम होइक आ प्रोटीन इत्यादि अधिक। एहि सब पर ध्यान देबाक लेल कोनो खाद्य पदार्थ के ग्लाईसेमिक लोड आओर ग्लाईसेमिक इंडेक्स कतेक अछि ई बुझि प्रति दिन आहार लेबाक चाही। अगर मधुमेह नहि भेल हो तं अधिकतम १०० ग्लाईसेमिक लोड खाना प्रति दिन, जं मधुमेहपूर्व (Prediabetic ) के स्थिति मे छी तं कुल ५० ग्लाईसेमिक लोड खाना प्रति दिन आओर जं मधुमेह सं ग्रसित छी तं कुल २५ ग्लाईसेमिक लोड खाना प्रति दिन समुचित होयत।

एहि तरहें मधुमेह पूर्णतया नियंत्रित भ सकैत अछि।

 

ग्लायसेमिक इंडेक्स और ग्लायसेमिक लोड

वास्तविक मे जतेक खाद्य पदार्थ उपलब्ध अछि, ओहि मे कार्बोहायड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज एवं विभिन्न प्रकारक विटामिन सभ पाओल जाइत अछि। कार्बोहायड्रेट सर्करा या ग्लूकोज़ केर मुख्य स्रोत होइत अछि। चीनी  या ग्लूकोज शोणित मे बहुत तेज रफ्तार सँ शोणित मे प्रवेश करैत अछि। तें सर्करा एवं ग्लूकोज के प्रवेश रफ्तार के मानक मानल गेल अछि। अर्थात जँ कियो १०० ग्राम चीनी  ग्रहण करैत छथि त हुनक शोणित ग्लूकोज १०० के गति सँ बढ़ैत अछि। ओही मानक अनुसार प्रत्येक खाद्य मे उपलब्ध कार्बोहाइड्रेट आओर ओहि मे युक्त चीनी  कतेक तेजी सँ शोणित मे चीनीक   स्तर बढ़बैत अछि ओ ग्लाइसेमिक इंडेक्स कहल जाइत अछि। जाहि खाद्य के ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होइत अछि ओ शोणित केर चीनी  स्तर कम बढ़बैत अछि। तें मधुमेह युक्त व्यक्ति के कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स बला खाद्य के चुनाव कऽ  खेबाक चाही। चाउर, गहूम, मकई इत्यादि के ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा अछि। करीब ७५ सँ ८०। तें ओकर आटा मे अगर कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स बला आंटा मिला देल जाय त श्रेयस्कर। जेना कि चना, सोया, ओट, बाजरा इत्यादि केर आंटा।

ग्लाइसेमिक लोड

एकर एकटा सूत्र अछि।

ग्लाइसेमिक लोड = (ग्लाइसेमिक इंडेक्स x कार्बोहाइड्रेट)/१००

अर्थात कोनो खाद्य मे ओकर कार्बोहायड्रेट और ओहि खाद्य के कतेक ग्लाइसेमिक इंडेक्स होइत अछि एहि दुनू पर निर्वर करैत अछि ग्लाइसेमिक लोड।

तें कोनो खाद्य चयन सँ पूर्व ओकर विश्लेषण करवाक छैक जे ओहि खाद्य मे कार्बोहायड्रेट कम रहैक आ ओकर ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम सेहो रहैक।एहि सँ स्वाभवतः शरीर मे आवश्यकतानुसार  ग्लाइसेमिक लोड प्रति दिन खा सकैत छी।

 

मधुमेह बिमारीक प्रथम चरण स्थिति- कोना - कोना  मधुमेह  बिमारी  क्रमिक  रूप  सं  बढल  चल  जाइत  अछि।

जखन  स्वास्थ्य  हमर  बिल्कुल  ठीक  रहैत  अछि अर्थात  मधुमेह  नहि  प्रारंभ  भेल  अछि, तखन जे  भोजन  करैत  छी हम  सभ तत्क्षण  हमर  अग्न्याशय  समीचीन  मात्रा  मे  इन्सुलिन रक्त  मे  भेज  दैत  अछि।  ई  समीचीन  इन्सुलिन  रक्त  मे  प्रविष्ट  ग्लूकोज/ चीनी  कऽ रक्त  नलिका  माध्यम  सं  विभिन्न  अंगक  कोशिका  सभ  मे  शरीरक  शक्ति  उद्येश्य  पूरा  करैक  लेल  पहुंचा  दैत   अछि। कखनो  नियमित, कखनो  अनियमित  खान -पानक  कारणे  भोजन  सं  प्रदत्त  चीनी /ग्लूकोज  आओर  अग्न्याशय  सं स्रावित  इन्सुलिन  केर  मात्रा  असंतुलित  होमय  लगैत  अछि। शरीरक  कोशिका  सभ  धीरे  धीरे  इन्सुलिन  लेल प्रतिरोध  करय लगैत  अछि।  ओहि  स्थिति  मे, रक्त  मे  खान पान  सं  बनल  ग्लुकोज / चीनी  सामान्य  रूप  सं  कोशिका  सभ  मे  नहि  जा  पवैत अछि।  तखन  रक्त  मे  चीनी  कम  बेसी  होमय  लगैत  अछि। प्रारंभ  मे  त  हमर  अग्न्याशय  बिल्कुल  ठीक  रहैत  अछि। कदाचित  जं  किछु  अधिक  कार्बोहाइड्रेट या  अधिक  ग्लायसेमिक लोड बला  खाना  खा  लैत  छी त  ओहि  सं  बनल  अधिक  ग्लुकोज  सेहो  आसानी  सं  इन्सुलिन  द्वारा कोशिका  सभ  मे  चल  जाइत  अछि  कारण  अग्न्याशय  अधिक  ग्लूकोज  अनुरूप  अधिक  इन्सुलिन स्रावित  करैत  अछि।  परंच  ई  शिलशिला   किछु  समय  बाद  अवरुद्ध  भ  जाइत  अछि कारण  कोशिका इन्सुलिन  हेतु  प्रतिरोध  करए  लगैत  छैक ।  कोशिका  के  आवश्यकता  सं  अधिक  ग्लुकोज  नहि  चाही तें  ओ  प्रतिरोध  करय  लगैत  अछि।  ई  स्थिति  ४-५  साल  धरि  रहि  सकैत  अछि आओर  भ  सकैत  अछि  जे  कोनो  लक्षण  सं  हमसभ  अनभिज्ञ  सेहो  रही।  कोशिका द्वारा  इन्सुलिन  प्रतिरोधक  प्रारंभ  मधुमेह  केर  प्रथम  चरण  होइत  अछि।

 

मधुमेह बिमारी केर दोसर चरण (ऽtage)

प्रथम  चरण  मे  जे शरीरक  कोशिका  सभ  द्वारा  इन्सुलिन प्रतिरोध  प्रारंभ  होइत  अछि  ताहि  सं  रक्त  नलिका  मे  इन्सुलिन  अधिकता  होमय  लगैत  अछि। तें  दोसर  चरण के  हाइपरइन्सुलिनोमिया  सेहो  कहल  जाइत  अछि।रक्त  मे   आवश्यकता  सं  अधिक  इन्सुलिन  होयब  शरीर  लेल  ठीक  नहि। ई  बढल  इन्सुलिन  पहिने  छोट  छोट  रक्त  नलिका  जे प्रायः  शरीरक  सब  महत्वपूर्ण  अंग  तक  पहुंचैत  अछि, ओकरा  क्षति  पहुंचेनाई प्रारंभ  क ऽ  दैत अछि।  पातर - पातर  रक्त  नलिका  मस्तिष्क  मे, आँखि   मे  और  अनेक  महत्वपूर्ण  अंग  मे  होइत  अछि। इन्सुलिन  केर  कुप्रभाव  सं  एहि  पातर  पातर  रक्त  नलिकाक आंतरिक  झिल्ली, जकरा  एन्डोथेलिअम  झिल्ली  कहल  जाइत  अछि  ओ  क्षतिग्रस्त  होमय  लगैत  अछि।  ओहि  क्षतिग्रस्त स्थान  पर  खइठी (Plaque) परि जाइत  अछि।  एहि   खइठी सं  रक्तक  सामान्य   प्रवाह  ओहि  अंग  मे  वाधित  होमय  लगैत  अछि।

मधुमेह  केर  दोसर  चरण  मे  किछु  किछु  लक्षण  सेहो  आवय लगैत  अछि।   अकारण  थकान - थकान  सनक  अनुभूति  ,वजन  मे  बृद्धि, मोटापा, गर्दैन  क्षेत्र  मे  बहुत  हल्का  हल्का कारीपन  इत्यादि  इत्यादि  लक्षण  सभ  आबि  सकैत  अछि। एहि  दोसर चरण  केर  पुष्टि  रक्त  परीक्षण  सं  कइल  जा  सकैत  अछि।  मधुमेह  के  दोसर  चरण  स्थिति  ३-४  साल  धरि  रहि  सकैत  अछि। तें  ओहि  चरण  मे  अगर ध्यान  दी  आ  तद  अनुकूल  अपन  खान - पान  रहन  सहन  मे  सुधार  कए  ली  त ऽ  बहुत  श्रेयस्कर।  ओहि  सं  मधुमेह  के  प्रवेश  निषेध  भ  जायत।  जे  छोट  मोट  समस्या  आवय  लागल  छल  ओहो  पूर्ण रुपेण  ठीक  भऽ जायत।

 

मधुमेह बिमारीक तेसर चरण

एखन तक के स्थिति मे भऽ ई रहल छल जे  असंयमित खान- पान के कारणे एक तरफ रक्त मे ग्लूकोज़ बढि रहल अछि आ दोसर तरफ इन्सुलिन सेहो। मगर शरीरक कोशिका सभ इन्सुलिन लेल निरंतर प्रतिरोध क ऽ रहल अछि । दिनानुदिन प्रतिरोध बढिये रहल अछि।

एही क्रम मे अग्न्याशय  आओर ओहि सँ श्रावित होई वला इन्सुलिन  अनियंत्रित(unregulated) होमय लगैत अछि। अर्थात कखनो कम्मे आओर कखनो आवश्यकता सँ अधिके इन्सुलिन श्रावित होमय लगैत अछि। कखनो काल भोजन उपरान्त अग्न्याशय खूब अधिक इंसुलिन श्रावित क दैत अछि।

ई जे स्थिति अबैत अछि ओहि मे जखन रक्त मे चीनी केर परीक्षण करबैत छी त  भुखल पेट वला परीक्षण रिपोर्ट सामान्य सँ कम अबैत अछि आ भोजन उपरान्त जतेक बढ़ल अबैक चाही एहि सँ बहुत कम। एहनो होइत अछि जे भुखल पेट वला रक्त परीक्षण रिपोर्ट स्तर सँ भोजन उपरान्त वला रक्त परीक्षण रिपोर्ट परिणाम कम्मे अबैक।

ओहेनका स्थिति जँ अबैत अछि त ओकरा हाइपोग्लाइसीमिया कहल जाइत अछि। अर्थात न्यून सर्कराक स्थिति। ओहि स्थिति मे कोनो संदर्भित कुशल चिकित्सक सँ परामर्श क लेबाक चाही जाहि सँ सुनिश्चित भ सकय कि आखिर की बात छैक।

मधुमेह के तेसर चरण मे किछु लक्षण सब सेहो परिलक्षित भ सकैत अछि। जेना कि भूख के बहुत तीब्र अनुभूति। कनियो देरी भेला पर चिड़चिड़ापन अर्थात अनावश्यक क्रोध। सदिखन किछु ने किछु खाय लेल मोन छुछवैत रहनै। वजन और मोटापा बढि सकैत अछि। सदिखन  बिना कारण , थाकल - थाकल जकाँ लगैत रहनाइ। रक्त चाप सेहो  बढ़ल के क्रम मे  भऽ सकैत अछि। भोजन केलाक उपरान्त बहुत आनन्दक अनुभव ।  भोजन उपरान्त  ओंगही लागय लगैत अछि। मिठाई खेबाक इच्छा होइत रहैत अछि।

एहि चरण मे होइत ई अछि जे हम बुझैत छी  हम्मर चीनी त कम अछि। थोरे मोरे मिठाई या चीनी खायल करब त ओ अपने ठीक भ जायत। किछु लोक सभ सेहो ओहने परामर्श दैत छथि।

मगर ई बात बिल्कुल नहि। रक्त परीक्षण और कुशल चिकित्सक सँ परामर्श आवश्यक अछि ओहि स्थिति मे।  हँ, खान पीन ओहेन जरूर हेबाक चाही जे कर्बोहायड्रेट कनी कम(  प्रति दिनक लेल समुचित ग्लाइसेमिक लोड अनुरूप)। ओहेन अनाज जाहि मे प्रोटीन इत्यादि ज्यादा होइक आ कार्बोहायड्रेट  बहुत ज्यादा नहि।  हरियर तरकारी सब , शुष्क फल सभ( नट्स)।  जकर ग्लायसेमिक इंडेक्स  और तदनुरूप  शुद्ध ग्लाइसेमिक लोड कम होइक ओहेन फल सभ सेहो खा सकैत छी।

मधुमेह बिमारी बिल्कुल छुटय तरफ भ जा सकैत अछि जँ अपन खान पान  ग्लाइसेमिक इंडेक्स  और ग्लाइसेमिक  लोड आधारित उपयुक्त डाइट लेनाइ प्रारम्भ करैत छी।

ओना कुशल चिकित्सक सँ परामर्श आवश्यक अछि एहि सभ लेल।

 

मधुमेह बिमारीक चारिम अवस्था(ऽtage)

एखन तक रक्तक ग्लूकोज स्तर क्रमिक रूप सँ बढि रहल अछि, इन्सुलिन सेहो बढि रहल अछि कारण कोशिका द्वारा प्रतिरोधक क्रम सेहो बढि रहल अछि। यद्यपि एखन तक कोनो खास अधिक गंभीर लक्षण परिलक्षित नहि अछि और हम सब एकरा बिल्कुल हल्लुक मे लैत छी।

आब तेसर चरण के बाद रक्त परीक्षण मे भुखल पेट मे ग्लूकोज़ स्तर १२५ तक और नास्ता भोजन उपरान्त २०० तक आबय लागैत अछि। ओहि परिस्थिति मे अंदर -अंदर  खराबी बढि रहल अछि परञ्च एखनो ऊपर -ऊपर  हल्लुक़ फल्लुक  लक्षण देखा पड़ि रहल अछि। जेना कि रक्त चाप बढ़ल आबि सकैत अछि, थकान लागि सकैत अछि, भूख प्यास  बेसी जोड़ सँ लागि सकैत अछि , कोलेस्ट्रॉल सेहो बढ़ल आबि सकैत अछि, मोटापा और शरीरक वजन  इत्यादि इत्यादि बढि सकैत अछि।  इहो स्थिति २-३ साल धरि  रहि सकैत अछि।

वास्तविक मे ई चरण  बिल्कुल  डायबिटिक चरण एबाक  पूर्व के चरण होइत अछि। ओहि स्थिति  के  उलटेनाय(revere केनाय) हेतु जे आवश्यक छैक ओ अवश्य प्रारम्भ क देवाक चाही। ई  पूर्ण डायबिटिक स्थित पहुँचबाक शीमा(बोर्डेर) अछि।

खान- पान, रहन सहन मे अनुकूल परिवर्तन केनाय परम आवश्यक। कोनो चिकित्सक सँ परामर्श कय ई सुनिश्चित क लेबाक चाही जे वास्तविक मे कोन चरण मे ओ बिमारी अछि।  जँ चिकिसक परामर्श सँ भुखल पेट ग्लूकोजक परीक्षण, भोजनक बाद ग्लूकोज़ परीक्षण, ५ घंटा बला जीटीटी इन्सुलिन सहित परीक्षण, एचबीए१सी  परीक्षण  करायल जाय त सुनिश्चित भेल जा सकैत अछि जे आखिर कोन स्थिति तक मधुमेह पहुँचल अछि। सभ रिपोर्टक विश्लेषण कय चिकित्सक बता सकैत छथि जे अहाँ अमुक ने अमुक स्थिति मे छी। परिमार्जन हेतु अहाँ की सब करी , चिकित्सक उचित परामर्श अवश्य देताह।

ओना कार्बोहायड्रेट और ग्लाइसेमिक लोड आधारित डाइट  अर्थात कम कार्बोहायड्रेट , कम ग्लाइसेमिक इन्डेक्स  बला खाद्य पदार्थ अपन डाइट मे शामिल करी। ई ध्यान मे अवश्य राखल जाय  जे भरि दिनक आहार मे हमर कुल ग्लाइसेमिक लोड समुचित सँ विशेष नहि होइक।

ई हम बारम्बार पुनरावृत्ति क रहल छी कारण डायबिटीज हेतु मुख्य कारक  चीनी और कार्बोहायड्रेट मे विद्यमान ग्लूकोज़ अछि।  तें ओहि पर ध्यान देनाय अति आवश्यक अछि।

मधुमेह बिमारीक पाँचम अवस्था(ऽtage)

 

मधुमेह बिमारीक पाँचम अवस्था पूर्व मधुमेह स्थिति (prediabetic tage) के बादक अवस्था थिक।

एहि स्थिति मे आब रक्त ग्लूकोजक स्तर खाली पेट १२५ सँ ऊपर तथा  नास्ता खाना बाद २०० सँ ऊपर होमय  लगैत अछि। कुशल चिकित्सक सँ देखेलाक बाद ओ(चिकित्सक) आब मोहर लगा दैत छथि अर्थात सुनिश्चित कऽ कहि दैत छथि जे मधुमेह भए गेल। निवारण हेतु चिकित्सक दवाई सेहो प्रारम्भ करवाक सुझाव दैत छथि। एहि अवस्था के नाम चिकित्सा क्षेत्र मे टाइप २ मधुमेह (Type- Diabetee Milletu) कहल जाइत अछि।

मरीज बुझैत छथि जे हमरा आब मधुमेह बिमारी भय गेल आ आब हमरा सभ दिन दवाइ पर आश्रित रहय पड़त। किछु मरीज भयभीत सेहो भय जाइत छथि जे ई बिमारी त निरन्तर बढ़ै बला (Progreऽऽive) होइत अछि तें आब ओकर निदान हेतु विशेष ध्यान देव आवश्यक भऽ गेल।

वास्तविक मे ई अवस्था एकाएक नहि आयल अछि। ओकरा अबै मे १० -१५ साल लागि गेल हेतैक । जखन ई बिमारी आयल अछि त ई बुझू जे बीस प्रतिशत हमर आँखि के क्षति पहुचा देलक। आन आन महत्वपूर्ण अँग के किछु ने किछु क्षति पहुँचेने सेहो होयत।

आधुनिक शोध और  अन्वेषण केर संकल्पना (concept) अनुसार  इहो अवस्था  अयलाक उपरान्त विशेष डरक कोनो बात नहि। आधुनिक शोध कहैत अछि जे ई बिमारी कोशिका सभ द्वारा प्रेषित इन्सुलिन प्रतिरोधक स्थिति उतपन्न केला सँ उत्पन्न  भेल अछि। जँ  क्रमिक रूप सँ एहि प्रतिरोध के नियंत्रित कऽ लैत छी  तँ एहि स्थिति के पलटा(revere) कऽ सामान्य अवस्था के प्राप्त कऽ सकैत छी।

कुशल चिकित्सक परामर्श अनुसार दवाइ  संग - संग  अपन डाइट के जँ  अनुमोदित कार्बोहायड्रेट और ग्लाइसेमिक लोड आधारित  सुधार कऽ लैत छी त सम्भव अछि जे एहि बिमारी सँ निजात पाबि जै।

मात्र जँ दवाइ पर आश्रित रहैत छी आ  खान पान पर ध्यान नहि दैत छी तँ क्रमिक रूप सँ शरीर मे इन्सुलिन बढ़ैत चल जायत जे कि धीरे धीरे शरीर मे आन आन तरहक क्षति पहुचेबाक क्रम रखनहिये रहत। दवाइ सँ ई प्रबन्ध होइत अछि जे अग्न्याशय सक्रिय भ इन्सुलिन श्राव करय। एहि सँ ( इन्सुलिन श्राव सँ)  रक्त मे उपस्थित  असामान्य ग्लूकोज  कोशिका  सभ मे प्रवेश करै मे सक्षम भ जाइत अछि। आ एहि तरहेँ शरीरक ग्लुकोज़ नियंत्रण दृष्टिगत होइत अछि।

ग्लूकोज त नियन्त्रित भ जाइत अछि परञ्च दवाइ मर्फ़द श्रावित और अधिक इन्सुलिन त आन आन खराबी पहुँचा सकैत अछि। तें हेतु जँ खान पान सेहो समुचित करैत चल जायब तखन चिकित्सक कें सुविधा होयतन्हि  जे ओ दवाइ खुराक के कुशल प्रवन्धन कऽ सकता ।  ओ (चिकित्सक) समुचित आओर कम से कम शक्तिक दवाइ आ कम सँ कम दवाइक खुराक केर सुझाव दऽ   बिमारी के निदान करैक लेल परामर्श दऽ सकता।

एहि सँ ई होयत जे अग्न्याशय मे विद्यवान बीटा सेल जे इन्सुलिन श्रावित करैत छैक ओकर क्रमिक क्षरण कम सँ कम होयत । अग्न्याशय बहुत जल्दी खराब नहि होयत।

 ई भेल पाँचम अवस्था अर्थात टाइप २ मधुमेह।

मधुमेह बिमारीक छअम अवस्था (stage)

ई अवस्था थिक शरीर मे इन्सुलिन केर अभाव। जखन अग्न्याशय इन्सुलिन के लगातार श्राव करैत करैत अपन सक्षमता कम करय लगैत अछि आ बहुत कम इन्सुलिन श्राव क पवैत अछि तखन छठम अवस्था केर आगमन प्रारम्भ भs जाइत अछि। अग्न्याशयक बीटा कोशिकाक संख्या न्यून भ जेबाक कारणे ई होइत अछि। इन्सुलिनक निर्माण त बीटा कोशिकाक माध्यमे सँ होइत अछि । ओ न्यून भ गेल तँ स्वाभवतः बहुत कम इन्सुलिनक निर्माण भ रहल अछि एहि अवस्था मे।  इन्सुलिन केर भूमिका रक्त सँ  शरीरक कोशिका सभ मे ग्लूकोज़ के उघि ल जेनै अछि जेकि दिन प्रति दिनक आवश्यक शक्ति लेल परम जरूरी होइत अछि। अर्थात इन्सुलिन ग्लूकोज केर  वाहक( carrier) थिक।  शरीर मे अपन अनुकूल इन्सुलिनक अभाव मे आब चिकित्सक मरीज लेल बाहर सँ इन्सुलिन हेतु सुझाव करैत छथिन्ह । कारण ई जे आब बाहरी दवाइ अग्न्याशय के इन्सुलिन बनेबा हेतु सक्रिय नहि क पवैत अछि । आब अग्न्याशय इन्सुलिन सँ अभावग्रस्त भ गेल अछि। ई जे अवस्था थिक ओ मधुमेहक छठम अवस्था कहबैत अछि। एहि में निदानक हेतु एक मात्र विकल्प वाहर सँ इन्सुलिन लेब अछि।

ई अवस्था नहि आवय ताहि लेल पाँचम अवस्था, आ सम्भव हुए तँ ओहि  सँ पूर्वहि सँ अपन खान पान दुरुस्त क ओकरा  हेतु निवारण करी। ई  सुरक्षात्मक सर्वोत्तम प्रयास होयत।

एहि तरहेँ हम मधुमेह बिमारी आ ओकर सभ अवस्थाक विस्तृत चर्चा कयलहुँ अछि। पूरा देश मे जाहि तरहेँ एहि मधुमेह बिमारीक  द्रुत प्रसार भs रहल अछि  ओ बहुत चिन्ताक विषय अछि। हमर एहि आलेखक मुख्य उद्देश्य ई अछि जे आम लोक सभ मे सजगता आवनि ताकि  एहि बिमारी सँ पूर्ण रूपेण बाँचल जा सकय। भरोस जरूर अछि  जे एहि आलेख सँ किछु ने किछु लाभ लोक के जरूर होयतन्हि।

 

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