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सुजीतकुमार
झा
नेपालमे मिथिला राज्य
की सम्भव छैक ?

नेपालक संविधानसभाक राज्य पूनर्संरचना तथा राज्यक शक्ति बाँटबखरा समिति अपन प्रतिबेदनमे मिथिला भोजपुर कोच मधेश नामक राज्य रखलाक बाद मिथिला नाम सँ राज्य बनत तकर सम्भावना बढल अछि । नेपालमे १४ टा राज्यक आवश्यक्ता रहल ओ प्रतिवेदनमे उल्लेख अछि ।
राज्य पूनर्संरचना तथा राज्यक शक्ति बाटबखरा समितिक सदस्य राम चन्द्र झा कहैत छथि –‘नयाँ संविधान निर्माणक लेल समितिक प्रतिवेदनकेँ आधिकारिकता महत्वपूर्ण रहल तएँ नेपालमे मिथिला राज्य हैत, अहि गप्पकेँ नजर अन्दाज नहि कएल जा सकैत अछि ।’
मिथिला
राज्य संघर्ष समिति सेहो आव मिथिला राज्य हैत ताहिमे कोनो भाँगठ नहि
रहल कहैत अछि । संघर्ष समितिक संयोजक परमेश्वर कापड़ि कहैत छथि–‘नेपालमे
राज्यक लेल जे तत्वसभ चाही से मिथिला लग मात्र छल तएँ ई तऽ होबहेके
छल । तखन मिथिला संग आओर नाम जोडि देल गेल अछि
,
ताहि पर हमरा सभकेँ
आपत्ति अछि ।’
(नीचाँक
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‘मिथिला भोजपुरा कोच मधेशक स्थानपर मिथिला मात्र रहैत तऽ बेशी प्रशन्नता होइत’ कापडि आगा कहलन्हि । ओना राज्य पूनर्संरचना तथा राज्यक बाँटबखरा समितिक सदस्य एवं पूर्व मन्त्री राम चन्द्र झा कहैत छथि –‘नाममे सेहो मिथिला अछि फेर एकर राजधानी सेहो जनकपुर तखन अओर सँ की लेना देना ।’ ओना विश्लेषक सभ राज्य पूनर्संरचना तथा राज्यक शक्ति बाँटबखरा समिति देशक प्रमुख आधिकारिक शक्ति होइतो एकर रिपोर्ट पर बहुत रास अभ्यास करबाक बाँकी रहल कहैत छथि । तएँ बहुत उत्साहित होएबाक आवश्यक्ता नहि अछि ।
मिथिला राज्यक स्थापनामे बाधा
एक दिस राज्य पूनर्संरचना तथा राज्यक शक्ति बाँटबखरा समितिक प्रतिवेदन मे मिथिला राज्य स्थापनाक बात अएलाक बाद जहाँ किछ मैथिल संघ संस्था सभ उत्साहित अछि ओतहि एकर प्रतिवेदन अबिते नेपालमे विवाद ठाढ भऽ गेल अछि । नेपालक मधेशवादी दलसभ मधेश राज्यमे मिथिला उपराज्यक बात कऽ रहल अछि । नेपालक प्रमुख मधेशवादी दल मधेशी जनअधिकार फोरमकेँ केन्द्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र यादव कहैत छथि –‘हम स्वयं मैथिल छी मुदा मिथिला क्षेत्रकेँ तखने विकास हैत जखन मधेश राज्यक स्थापना हैत आ ओहिमे मिथिला रहत ।’
ओ एक मधेश स्वायत्त प्रदेश बाहेककेँ बात बर्दास्त नहि कएल जा सकैत अछि कहलन्हि । मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल, मधेशी जनअधिकार फोरम लोकतान्त्रिक, तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी आ सदभावना पार्टी संयुक्त रुपमे एक मधेश प्रदेशकेँ लऽ कऽ आन्दोलन कऽ रहल अछि ।
मधेशी दलसभक विरोध मिथिला राज्य स्थापनामे सभ सँ बेसी बाधक बनि रहल अछि ।
मैथिल सभकेँ आपत्ति कतय
बहुतो मैथिलकेँ नाम पर आपत्ति छन्हि । ओ सभ कहैत छथि ‘मिथिला भोजपुरा कोच मधेशक स्थान पर मात्र मिथिला रहबाक चाही । मिथिला लग राज्य बनबाक सभ सँ बेसी आधार अछि ।’ आधारकेँ प्रष्ट करैत रामानन्द युवा क्लब जनकपुरक अध्यक्ष दिपेन्द्र ठाकुर कहैत छथि– ‘मिथिला संगे इतिहास भुगोल मात्र नहि वर्तमान मे सेहो सभ चीज अछि ।’
एखन मिथिला भोजपुरा कोच मधेश राज्यक सीमा जे निर्धारण कएल गेल छैक से नेपालक झापा जिल्ला सँ पर्सा जिल्ला धरि अछि । जाहिमे करिव ४६ प्रतिशत मैथिली भाषी छथि । ५४ प्रतिशतकेँ नजर अन्दाज नहि कएल जा सकैत अछि । जँ सभ भाषाकेँ राज्य भाषाक रुपमे स्थान देल गेलै तऽ मैथिली भाषाकेँ बेसी क्षति हैत । जानकार सभक अनुसार मैथिली बाहेककेँ भाषा सेहो राज्यक भाषा भऽ सकैत अछि । ताहि सँ मैथिली भाषाकेँ जे अलग रुप सँ फाइदा होइतै से नहि हैत ।
ज्ञातहुए नेपालमे नेपाली भाषाक बाद सभ सँ बेसी बाजल जाय बला भाषा मैथिली अछि ।
मिथिला राज्य स्थापनाक आन्दोलन कतय
मिथिला राज्य स्थापनाक आन्दोलन जाहि रुपमे बढबाक चाही से नहि बढि रहल अछि । खास कऽ डकुमेन्टेशनकेँ विषयमे जेना किछो नहि भऽ रहल अछि । एमाले नेता शितल झा, साहित्यकार डा. सुरेन्द्र लाभ, डा. विजय कुमार सिंह, पूर्व मन्त्री राम चन्द्र झा वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सीके लाल, माओवादी नेता राम रिझन यादव ,डा. विरेन्द्र पाण्डे, साहित्यकार धीरेन्द्र प्रेमर्षि सहितक व्यक्ति सभक किछ कार्यपत्र आएल अछि मुदा ओहो संग्रहित नहि अछि । मिथिला राज्य स्थापनाक माँग केँ लऽ कऽ मिथिला राज्य संघर्ष समिति गठन तऽ भेल अछि मुदा एक वर्ष भितर आन्दोलनकेँ नाम पर सडकपर कवि गोष्ठी बाहेक तेहन उल्लेखनीय काज किछ नहि भेल अछि । ओना संघर्ष समितिक सचिव रमेश रञ्जन झा संघर्ष समिति खासे काज नहि कएलक अहि बातकेँ मानयकेँ लेल तैयार नहि छथि । ओ कहैत छथि ‘संघर्ष समिति मिथिला राज्यक लेल लविङ्गकेँ काज करैत आएल अछि ।’
ओना मिथिला नाट्यकला परिषद जनकपुर, रामानन्द युवा क्लबक अभियानकेँ सेहो नजर अन्दाज नहि कएल जा सकैत अछि । मुदा महिना दू महिना पर एकटा दू टा कार्यक्रम कऽ देलौं ताहि सँ ठोस उपलब्धि नहि भऽ रहल अछि ।
इतिहासमे मिथिला
मिथिलाक परम्परागत सीमा बृहदविष्णुपुराणक मिथिला महात्म खण्डमे वर्णित अछि । जाहिकेँ आधार मानि कवीश्वर चन्दा झा मिथिलाक सीमा सम्वन्धमे अहि प्रकार वर्णन कएने छथि –
गंगा बहथि जनिक दक्षिण दिशि, पूर्व कौशिक धारा
पश्चिम बहथि गण्डकी उत्तर हिमबत बल विस्तारा
कमला त्रियुगाअमृतृता धेमुड़ा वागमति कृतसारा
मध्य बहथि लक्ष्मणा प्रभृति से मिथिला विद्यागारा
अहि भूभागक विस्तार अहि प्रकार पूर्व पश्चिम करिव २९० किलो मिटर , उत्तर दक्षिण करिव १९३ किलो मिटर होइत अछि । जाहि अनुसार एकर कुल क्षेत्रफल ५५ हजार ९७० बर्ग किलो मिटर रहल अछि । ई क्षेत्र एखन नेपाल आ भारतमेँ बटि गेल अछि ।
जहाँ धरि मिथिलाक स्थापनाक बात अछि विदेध माधव सरस्वती तीर सँ आबि मिथिलामे आर्य सभ्यताक विस्तार कएलन्हि । आ विदेह वा जनक राज्य वंशक आधारशीला राखल गेल । अहि वंशमे जनक द्वितीय नाम सँ चर्चित शिर ध्वज भेल छलाह । जिनक पुत्री भगवती सीता रहथि । विदेह राज्य कुलक मिथिला पर शासनक समय ३००० ईश्वी पूर्व सँ ६०० ईश्वी पूर्व धरि अनुमानित अछि ।
नेपालमे मिथिला राज्य किया
मिथिलाकेँ
स्वर्णिम इतिहास अछि । मात्र नेपालेके लेल जाए तऽ कहियो मैथिली भाषाके
प्रसार राज्य सभाधरि छल । राजधानी काठमाण्डूक मूल भाषा मैथिली छल ।
मुदा अखन मैथिली जनबोली धरि सिमित भऽ गेल अछि । एकर कला परम्पराक
विकास होबय नहि सकि रहल अछि । भारतक मधुवनी पेन्टिङ्ग जतय विश्व
बजारमे तहलका मचौने अछि ओतहि विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेन्टिङ्गक एकटा
सीमित बजार अछि । ओहु पर मैथिल सभक पहुँच नहि अछि । वरिष्ठ राजनीतिक
विश्लेषक सीके लाल कहैत छथि
‘मिथिला
राज्यक आवश्यकता आँगुर पर नहि गनाओल जा सकैया’
। ओ समग्र मिथिलाक विकासक लेल मिथिला राज्यक आवश्यकता
रहल बतौलन्हि । हुनक अनुसार मिथिलाक गुमल पहिचान पुनः प्राप्तीक लेल
मिथिला राज्यक आवश्यकता अछि ।

