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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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बी.एन. लाल दास- चिचड़ी वाली भौजी
मैथिली कहानी

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लाल काकी , नामि के कहैत रहथिन्ह जे एतेक टा छः घरवासी वाला आंगन में चिचड़ीवाली कनिया के त्याग आओर बलिदान याद राखय योग्य अछि।
नामि पुछलखिन्ह - माँ , की केलखिन्ह,भाभी।

लाल काकी बड्ड पुरान घटना सभके कहँ लगलखिन्ह- जे चिचड़ी वाली कनिया एहि परिवार में आब सं पूर्ब विधवाक जिंदगी जी रहल रहैथ। वोकर नाम जस्सी रहैंह।

एक दिन लाल कका ककरो सिद्धान्त में गेल रहथिन्ह। हाल चाल पुछैत समय पता चललैन्ह ,जस्सी के बारे में, ज़े कतेक कठिन सा जीवन बिता रहल छैक। जस्सी के पिताजी, एतबे कहलथिन्ह - ओकरा भाग्य में इहा लिखल रहैक। जिंदगी भार बनि गेलैक। हम ककरा की कबैक जे हमर विधवा बेटी के हाथ पीला करू। दालानों पर बैस नहीं देत। एक लोटा पानि त बहुत दूरक बात अछि।
लाल कका काफी सुलझल आओर उदार विचारधारा के एक सम्मानित लोक छैथ। ई सुनि हुनक ह्रदय हहैर गेलैन्ह। सामाजिक व्यवस्थाक आओर सोच पर तरस ऐलैन्ह। हम सभ 21 वी सदी में छी,समाजक सोच 19वी सदी के छैक। हम अपने घर सं शुरू करब विधवा बिबाह। हम अपन घर में विधवा के बियाहब। हमर भातिज सं बढ़िया के हेतैक। लाल काकी ई सुनि स्तब्ध भ गेलिह।

लाल ककाक ई निर्णय पर गाम में खलबली मैच गेल। भात भतबरी के निर्णय समाज द्वारा सुनाओल गेल। लाल काका टस सा मस नहि भेलाह। पंचायत लागल,लाल कका स्पस्ट कहलखिन्ह - अहाँ सभ भात-भतबरी करू,कोनो बात नहि। हमरा सभ के बारि दि अ, कोनो बात नहि, मुदा एक विधवा के नया जीवन दें मं में कोनो कमि नहि रह देबैक। हमर इहा प्रार्थमिकता अछि।

पारिवारिक सभ लोक फगुआ में जमा भेल। बैभव सेहो आयल रहैत।लाल कका विना लैप लपट के पुछलखिन्ह, बैभव , अहाँक की विचार?

बिना संकोच केने बैभव अपन विचार प्रकट केलखिन्ह- अहाँ सभ जे करबैक,हमरा सहर्ष मंजूर अछि। विवाह शुभ मुहूर्त में भय गेलैन्ह। आईं वो चिचड़ी वाली कनिया छैथ।

चिचड़ी वाली कनियाक नया जीवन शुरू भेल काफी साल बीत गेलैन। सभक साथ केना मिल क रहल जाइत छैक,केना प्रेमक गंगा परिवार,समाज में बहै, वो इक मिशाल मानल जाइत अछि।

बैभव के नीक नौकरी नहीं रहैंह, एक स्कूलक नौकरी। परिवार मुश्किल से चलैत रहें। लाल काकी के नहीं याद रहैंह जे कहियो किछु मांगने हेतैन्ह। जे रहैं, भगवानक प्रसाद मानि चलैत रहथिन।

बैभव के याद छैन्ह जे छोट बहिनक बिबाह में जस्सी अपन सभ गहना गुरिया के बेच क नीक बिबाह में सहयोग केने रथिन्ह। आई हुनका कोनो गहना गुरिया,किछु नहीं छैन्ह।गोल्डप्लेटेड गहना हुनक सौन्दर्य बढ़ा रहल छैन्ह।वाहि ठाम नामि के गहनाक कोई कमी नहि। कोनो ईर्ष्या, जलन के नामो निशान नहि। जिंदगी सा कोनो शिकवा- शिकायत नहि।
बैभवक आंगन में दू बच्चा सभ के दिल जीतने रहैछ।

समाजक कोनो प्रकारक बीमारी,हॉस्पिटल के कोनो काज महिला के होइनिन्ह,जस्सी राति भरि समय द क लोक सभक दिल जीतने रहथिन्ह।

जस्सी अपन आभार लाल काकी,लाल कका आओर पूरा परिवार के दैत नहीं थाकैत छैथ। आई समाज में इज्जत, सम्मान सभ लाल कका के उच्च विचारक परिणाम छल।

 

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