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पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य    

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(c)२००४-१२.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

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कामिनी कामायनी


2011 दिसंबर मास मे महात्मा बुद्व के महासंबोधि प्राप्ति के 2600 बरख भेलोपरांत ’हम हुनक अद्र्धांगिनी के मोन पाङैत ई काव्य कुसुम हुनक चरण कमलेषु मे समर्पित कय रहल छी । ..


गांधारी
हिय मे शूल.. .. .मुदा भाव निर्मूल
रहि रहि क’ उठैत ई आह
करैत अछि करेज के स्याह
कानू त’ कत्तेक आ’ फाटू त’ कत्तेक ।
सबटा नोर एके बेर सहस्त धार बनि
चुबि गेल छल ऑखि सॅ
जखन पितामहक ई उदघोष

कर्ण कुटीर के चीरैत
छाती मे पवेशकरैत
मचा देने छल पलय
जे पराजित नरेशक’ सर्वांग सुन्नरि
विजित क’ हाथ मे सौंप देल जाए
तखन की ऋ
आकाश मे उङैत पाखी
क्षण भरि उङनाय तजि
चिंतित आ’ व्याकुल छल
बाध बोन मे चरैत
उमकैत
बैसल
ठाढ
पसु उद्विग्न भ’ . . . माथ झुका
परती के निहारै छल।
तप्पत तप्पत बयार
जोर जोर सॅ बहैत
तबाही के सनेस पसरैत।
अंतरिक्ष मे बैसल इष्टदेव सॅ
नम निवेदन करैत
चिहुॅकि क’ बाजि उठल छल
ई कीऋ
कारी कारी मेघ
अपन लट छितरेने
उद्दाम अश्व सन दौगैत
संपूर्ण नभ मंडल प’ पसरि त’ गेल
मुदा स्वयं के आघात दैत
पीटैत चिकरैत
कंठ फाङि क’ कानब सॅ पहिनहीं
माथ प’ हाथ धेने गुमसुम गुमसुम
चुप्पेचाप .. . . .नहि जानि कोन कोन मे
गेल बिला
तखन कीऋ
ओहो अपन रत्नजङित पलंग प’
कतेक काल धरि
अपार केस रासि फोलने
पेटकुनिया देने  .. . . रहितथि पङल
नहुॅ नहुॅ क’ भवनक पट्ट खोलि
द्वार प’लटकल पीजङा सॅ निहारैत सुग्गा
सॅ उदास भ’ बजै ल’ चाहल
आखर लाजै . . . .मुॅह सॅ नहि बहरायल
मुदा अवज्ञा कोना राजकुम्मरिक’
आबैत काल . . . देखल सब . . . कोना लङखङाति
डगमगैत  . . हकमैत.  तोतराति 
आध छिध आखर  .. . जेठक’ सूखैल घासक’ ढेर जकॉ
दग्ध हिय मे लुत्ती लगा
सनासन  . .जरय लेल उकसाबए लगलै
पिंजङा मे बन्न सुगबा. . .आखरक ताप नहि सकल सहि
आ’ क्षण मात मे ओकर प्राण ।
कुम्मरि के हाथ मे रहि गेलेै
मुदा ओ कानियो नहि सकलिह
समस्त नोर  .. . एके बेर. . .सहस्त धार बनि
ऑखि सॅ चूबि चुकल छल।
करेज फाटय के स्थिति मे क़त्तए
ओ त’ बज भेल
आ’ बज कत्तौ फाटय
ओ त’ फाङब टा जानैत अछि ।
सब टा पट्ट महिषी .. .सखी सहेली सन्न
एहेन कोन पन्न
केहेन ई विध्वंसी  . . . रचल चक चालि
नहि जानि विधाता  .. . देलन्हि ई केहेन आघात
सहस्त्रो वजपात
एक संग  . . .क्षण भरि मे
उन्मुक्त हवा के सहचरी
सुशील कोमलांगी परी
केहेन विषाक्त
जेना बरख क’ ज्वरोपरांत उठल जुबती
मुरूझायल अङहूल सन . . . निस्तेज मुख मंडल
ऑखि मे पसरल दूर दूर धरि सन्नाटा

कपोल द्वय प’ नोर मे भींजल काजरक’ चॉटा ।
ई अथाह दारूण  .. केहेन करूणा
कत्तेक व्यथा ।
मुदा काल शीघता सॅ बुलैत
बॉचय जा रहल छल
कोनो आओर पलयंकारी कथा ।
दारूण दुख हिस्सा मे नहि तोरे टा
सब किछु त’ संग अछि  ....रहत नै नोरे टा
ठठा क’ हॅसल छल कत्तो कोनो राजा
सजाबए लै महफा
बजाबए लै बाजा ।
आ’ दौङैत रथ क’ स्वर्ण जङित चक्का
मे ओझरायल अगनित कत्तेक रास खिस्सा
आईयो कहैत अछि उङि उङि क’ रज कण
कोना ओ कचनारि बेकल भ’ निहारल
हवेली आ जन जन के मन मे उतारल
ओ हरियर पीयर लाल कारी दुपट्टा
ओ लहंगा ओ चुनरि चानी के पनबट्टा
उङैत तूर सन ओ संध्या कुमारि
असरफी ओ मोती ओ हीरा जवाहरि’
बिछिया हॅसुली बाजुबंद साङी
नथिया ओ टीका मखमल ओ अटारी
निहारल भरि ऑखि रूप जीनगी के
पकृति धरा के माता बहिन के
फफा क’ कानल काल देखि अपन करनी
एकरे चुनल किएक
अही परीक्षा घङी लेल
मुदा भाग्य अप्पन
कयल पूर्ब जन्मक
तथापि
निरासक लुत्ती मिझाबैत
ओ ज्ञानी स्वयं
कारी पट्टी बनल छल
आ’ सुन्नरि सुनारि के दृग प
चढल छल
पति परमेश्वर जखन छथि नयन बिन
त’ देखब नजरि सॅ हम किएक ई दिन
ठिठुरैत  . . .निहुरैत  . . दुलारैत  . मनाबैत
चलल छल विधाता अपने हिसाबे
मुदा हाथ मे आब ओकर डोर कत्तय ऋ
ओ अपने पहिया के दॉत सॅ झीकैत
बढल जा रहल छल देखय खेल बिक्कट ।

इन्द्रासनक परी. . .ऑखि प पट्टी केहेन. . .
ई गर्विनी . .यक्षिणी. . . सुखदायी परम
नागिन सन फुफकारैत  . .कारी जुट्टी. . .
बेकल अछि छुबए लेल नगर के माटि
वाक विहिन.  .सब  . .झहरै छै नोर
कत्तो नै उत्साह नै कोनो सोर
क़त्तेक काल सॅ ठकुआयल ठाढ अछि भोर ..
बिसरल अछि नाचय पमरिया आ’ मोर
तखन राजपंडित महाशंख बजाओल
आगॉ बढि क’ सोहागिन महफा सॅ उतारेत
समवेत स्वर मे मंगल गान गायल
विधना लिखल हमहू पात सब छी
ई रानी हमर भावी राज्य माता
नयन बिनुसहचर के कथा छल सुनल सब
सबटा नीति के चालि बुझि
रानी लै मन मे अथाह स्नेह उमङल
ताबैत शोक सॅ उबैर क’ बहुरिया
धो मॉजि अपन व्योहार के चमकायल
सिनेहक मजगूत डोरी बांधवा मे
कलेसक’ ताप ताग के’ जरा दै
रहि रहि क’ ओ करूण वेदना
आबै हिय के डॉवा डोल करै
मुदा ओकर कोढ कहियो नहि फाटल
ओ त’ कहिया कत्त नै बज भ’ गेल छल
आ’ बज फटै नै फाङै छै सबके
एकसरि जुबति  .. .जौवन अपरूप
पणय निवेदन .. .पति के पतीक्षा
पसूति गृह सॅ . .अबैत पथम बाल क्रंदन . .
डोलाबैत हिय के  . . . अतिशय कोमल गाछ ..वा . .
पानि बिनु तङफङाइत  .. .छिलमिलाईत माछ . .
अथवा कनसारि
क’ बौल मे भङभङा क’ फूटैत लाबा
सिंहासन सॅ दौगैत त’
मुदा वीरांगी  .. . संयमी. . .क्षत्राणी क’ बहकल
पएर. . ठामे ठाम ठमकल
क़त्तेक स्वर गुंजायमान भेल कान मे
दासी के स्वर सॅ बनल पतिबिम्ब
गौर भुर्राक़ . .चन्दमासन .कारी औंठिया केश
पैघ पैघ ऑखि वला  .. स्वस्थ . भावी नरेशक वर्णन सुनि
ओकर हाथ सॅ झपट्टा मारिक’
छीनैत नेना के. . .अपन दग्घ हिय सॅ लगौने ‘
नयन रहितौ नयन विहिन . . कतेक पैघ विपत्ति
कतेक कठोर पण.  . केहेन घोर तप
मात बीत्त भरि क’ दूरी प ऑखि .
क्षण मात मे पट्टी झटैक़  . . विस्फारित दृष्टि सॅ  . .भरि पोख तकैत.... . .अपन लाल के. . .
मुदा बज बनल करेज़  .
बज नहि फाटैत अछि  बज फाङैत अछि।
आ’ हाथ कखनो  . कर्मक रेघा नांघए के कोरसिस सेहो नहि कयल
तखन समय काल के सेहो
होबैेत रहलै प्राण बेकल.  .
एकसरि रूपवती. . .जौवन भार सॅ दबल.  .
हाथ सॅ टउआ क’ निहारैत नेना शिशु सबहक रूप
एहेन केस रासि  .. ओहेन मजगुत भुजबल
राजीव लोचन  . .मक्खन.  . मोलायम चितवन
पीतांबरी के गोटा  .. . धनुषक’ नक्काशी. . .चेरी कहैत अछि. . .आ’ नैनन मे हुनक उपस्थित भ’.. .अतीत ..
फरीछा दैत छन्हि सब किछु. . .पटोरक रंग़  .पलंगक़ . चद्दरि. . . .खिङकी.  .दलानक’ परदा . .
स्त्रीगण सबहक रूप गुण . . .सुनैत गुनैत. . .
बसौने अपन मस्तिष्क मे  . . एक गोट अजगुत संसार
जौं पति नयन बिन  . .आखीर तखन रहल की  . .
हुनक़ . भाग्य संसार.  . पुर स्वामिनी . .महारानी. . .अभिमानी .. . .
एतेक विस्तृत सामाज्य . .जीबए केर. .ई केहन सुन्नर आधार.  .
तखन रानी मात कान . . कान बनि गेलन्हि . रोम रोम ।
भनसा सॅ आबैत सुगंध.  . पाक विद्या के पवीण हस्त
भॉति भॉति क’ सामागी .. .मात गंध सॅ चिन्हैत. . .
परोसति थारी मे स्वामी के. . .विहृवल भ’ पूछि लैथ
‘ई पायस केहेन आर्य ..’ .
बनौने हमी छी  . च्ोटी अछि पमाण ..।’ .
विहॅसि श्रीमान .. बढाबैत ..अतिशय स्नेह सॅ पकंपित अपन बाम हाथ. . . .
पमाणक’ कोन पयोजन ऋ.. . जखन हम दूनू नयन विहिन .. .
हम जन्मजात . . अहॉक .स्नेह प आघात. 
भेल भानस. . .अहॉक स्पर्श मात सॅ.  रसमय.  मधुमय. . .
भ’ उठैत अछि. . . .आ’ ई त’ सद्यः अपने कोमल हाथ सॅ
रान्हल.  .
थामैत राजा के बढल हाथ. 
शब्द मात सॅ हृदय मे उठैत
सिनेहक तीव . . .वेगवती धार के छुबैत. . .पकङि हुनक अर्इंठ हाथ. . .कठौत मे धोबए लेल  . . दासी बढौलक जलपात ..। .
निशा राति मे नीन्न .. किए नै किए बनि दियाद. . .
लङए लागैत अछि ऑखि सॅ.  .
भवनक’ छत प’.  .सिहकैत बयार मे .. नहुॅ नहुॅ टहलैत . .
हाथ पकङने चेरी कहैत.  . .
आय अकास मे बङका टा के चान निकसल छै.  .
केहेन पीयर  . .. जेना दूध मे फेंट देने होय केसर कियो. . ।.
आ अनेको बिम्ब . . . विगत क’
चान के.  .
ऑखिक सोझा थरथर कॉपैत.  .
पूछि रहल .. . कोन अपराध हमर कहु सुन्नरी
किएक नै हमरा हेरी रहल छी. . . .चकोर बताह बनल हमरा लै. . .अहॉ केना विरक्त बनल. .? .
मुदा ओ पण  .. . हिय प लागल छल जे वण.  .
करेज वज भ’ गेल छल.  . .आ’ बज फटैत नहि अछि फाङैत अछि ।
मस्तिष्क मे बसल सबटा कोलाहल.  .
समय काल पाबि अर्थ गहण करैत
ठाढ भेल सचित  . .सावाक .. .आ अनायास . . .जीवन जीबा मे कोनो विशेष नहि देखैत कंटक
मुदा काज पयोजन. . .
शिशु बालकक उपनैन वा विद्याभ्यास  .. .
विवाह दान .. .परिछन.  .चुमौन .. .
समय ककर बंधुआ. . . ककर खवास
एहेन पण .. .आय धरि के ज्ञात इतिहास मे ।
निभा सकल के. . . ताहू मे एकगोट नारि. .
जेकरा लेल अहि समाजक नियत सदिखन विकट ..
सूर्य.  चन्द. .्र .गह नक्षत ्र्र.. .ताहि सॅ उपजल . .्र्र .वत उपवास सॅ एकदम फराक ........... .. . . .
आन आन वत . .्र मात अन्न  .पानि त्यागि
भूमि शयन  .. .अग्नि गमन वा एहने सन किछु .. 
ंमुदा ओ वत आ ई. . .असंभव. .  दुसाध्य. .  आजीवन दृष्टि बाध्य अछैत दृग़ .. . .्र
स्ती एक गोट खेलौना. .्र्र .
राज्य जीतबाक कम मे . . . ्र
जीत लिअ ओकरो .. .ओ एकगोट वस्तु मात .. ्र. .
फहराबू अपन ध्वजा. . .अपन वर्चस्व ्र
ओकर कोन र्दद. . .अभिलाष वा ज्ञान ..
मात सेविका .. . परिचारिका .. .्र
तखन की. . .्र्र
तखन विधान इएह बनौल ई समाज .. .
जे स्ती आखीर उठौत किएक आवाज़ . .्र
घेंट प’ बङका टा के फट्टा
आ’ माथ प’ दुपट्टा .. .्र
आ मजबूरि क अथाह समुद
कत्त ..्र डूबब ्र.. . कत्त ..्र पौङब .. ्र.
ताहू मे पराजित राज के दुहिता .. .्र
मुदा भाग्य दासी नहि रानी
सेहो बनायल. .
. . . . . . . .आय सहस्तों बरिख बाद
जुग औचक जेना जागि उठल
बङका बङका परचम फहराबैत. ्र .. .
पूछि रहल अछि हुनका सॅ. . .्र्र्र्र
आखीर किएक बान्हल ऑखि प’ पट्टी. . ्र.
ई अज्ञानता वा परम निराशा
अतीत के एक गोट दुसह दुखद दिन देखौलक
संसार क’ पथम विश्व जुद्व. . . कुरूक्षेतक जुद्व ..्र .
कारण . ..मूल मे माते. . . .
सौ टा संतान करैत घमासान. . .्र
जिनक सहस्त पुत
कोना नै हेतै एहेन जुद्व. . . .
आ तखन ऑखि प’ पट्टी .. . ्र
जानि बूझि क’ रहय लेल .. ्र. सत्य सॅ अनभिज्ञ. . . .्र
अहॉ के नजरि मे सुयोधन .. .सुयोधने रहि गेल. . .्र्र
मुदा कर्म. . .आ .. समाज धेल दोसरि नाम .. .सु’ हटि क’ दु’. .  .आ इएह एक गोट आखर .. .्र
भ’ गेलै पाथर. . . . ्र
ंमानवता के संहारक़ . .आत्याचारी  . .लोलूप. . ्र.
ंमाता के कोमल उपदेश . .
द सकैत छल इतिहास के एक गोट नीक संकेत. .्र
आ’ वन वन नहि भटैक़ . ्र.
पॉच गाम. . सॅ संतुष्ट .. ्र्र
भ’ जयतथि अनंत मे विलिन. .्र . .
मुदा युद्व त’ कदापि नहि .
तङपि क कहलैन्ह जुग सॅ
सुननेछी अहू सुरू सॅ.  . . हमरा.. प’ जे कलंक लागै . मुदा अन्याय के गाछ प’ न्यायक फङ नै लागै छै .. . सत्य ई
अहि गप के रहि गेलन्हि
हुनको मन मे खेद. . . .
किएक एहेन विभेद. . ्र.
एके कुलक लोक एक दोसरा लेल. .. एतेक पैघ अरि .... . . .
हे हरि. .
. . . .तखन बहल जतेक शोणित आ’ नोर .. . . हिय नै रहल्ौ कठोर.  . छल ओ सहस्त पुतक जननी.  .के. . . .युद्व भूमि मे करैत. . हृदय .दावक विलाप.  .
असहृय वेदना. . . करूण संताप
सुनौलन्हि जदुनंदन के भरि पोख सराप. .
अहि संहार के .. ओएह संचालक . .
अजस्त नोर सॅ  . .पट्टी पारदर्शी भ’ . . .दृष्टिगत कयल सबटा नर संहार. .सुन्नर .. .विलक्षण काया . . पङल अंग भंग भेल. . .खसल माटीक मूरत .. .नै बाजय. .्र नै भूकय लेल ..
ओ माटिक बासन सब  . .एखन धरि नहि भांगल .. .अछि अजहू राखल आंगन. . .ताहि मे पोषल पूत सब कोना .. .एतेक शीघ भेला सपन  .
मात एक स्ती के माथ प’ कलंक़ . ्र आ’ अपने बुलि रहल छी निःशंक़ . . .
हे रणछोङ . . कहै छी हिय तोङि. .
चतुराई सॅ अहॉ के अपना अधीन
करि के सकैत अछि. ्र. .जे स्वयं चौसठो कला मे पवीण. .  .छल सॅ ..  बल सॅ . .कौसल सॅ. . .तोङितौ सारथिसुत क अभिमान .. एकसर दुरजोधनक अज्ञान .. . ककरा बल प’ लङबा लेल ताल ठोकितै . .
अहॉसन ज्ञानी. . .त्रिलोक दर्शी कहेबाक दंभ रखैत .. ्र. एतेक नहि भेल जे खूनक ई फाग रोकि दैतिएक़ . . . .
चारू कात धधकैत आग़ि . . ताहि मे अहॉ तकैत छलहू केहेन न्याय . . .
फुसियाही के खेल मे .. . सोचैत रहि गेलौं उपाय .. .
चालि शतरंजक चला देलियै. . .अपने पाछॉ हटि क’ .. . मति भष्ट सब के जुटा देलियै. . 
धिया पुत्ता के कर्म के ..
नाम देलियै धर्म के. .  .
युद्व त’ युद्व होइत छै.  .परिणाम . .नर संहार.  .
तखन एकरा धर्मक नाम किएक देल. .
धर्म की अछि .. . कहूॅ विस्तार सॅ .. . . .
हङपब .. . मारब . .लूटब. . .जारब .. 
जाहि समस्याक समाधान . . .गप सॅ भ’ सकैत छल. . .ताहि लेल तरूआरि . . गङासा.  .तीर धनुक्ख़  .
ई कोन जुगक मनुक्ख .. .
पाषाण कालक’ वा. . .ताहू सॅ पहिने के आदिम . .
हे अवतारी. . .अहॉ त’ तखनो पकट भेलहु . .भरल सभा मे दा्रैपदी के जखन भ’ रहल छल चीर हरण. . .नूआ त’ बढा क’ वाह वाही लुटल . .जे पांचाली के लाजबचि गेल
मुदा अहि कुकृत्यक विरोध मे स्वर त’ उठौबितौ.  .
गुरूजन. . . दूरजोधन के ललकारिक  . .मल्लजुद्व मे पछाङि क’ . . शिक्षा त’ दैतियैक नैतिक़ . . .पांडव दिस स्नेह सिक्त  .. . ..कौरव दिस फूटल दृष्टि. . . .
आखिर कियै केशव. .्र . हित त’ पांडव के सेहो कतए. . . सब कानि खींझी क’ विलखि विलखि क’ अपन अपन शिविर मे . . . .करि रहल अछि .  दारूण विलाप  .. . कतए अहॉ के जय जय कार . . .सब युक्ति . . सब तर्क बेकार.  .
अहूॅ त’ एतबे मे रहि गेलहू. . . ..प्रेम सॅ नहि पूछल त’ साग विदूरक घर खेलहूॅ.  . . .
ओ समय मान सम्मान करेबाक कतए छल.  . प्रेम त’ कत्तेक देल गोपी . . .तैयो तरसल.  . देखैत रहलहू धर्मक’ रथ प’ चढल . .भाय भाय के कूक्कूर जकॉ लङल. . .
अहि मे अहॉ क’ की विराटता . .पत्यक्ष ठाढ अपने. . .आ’ हस्तिनापुरक दू टा कुलक’ सर्वनाश भ गेलै. . . तखन अहॉ केहेन भगवान .. . .नहि जानि की छल. . .अहॉक दृष्टि .. . .अहॉक ईमान. . 
कतए उठाबए चाहैत छल
स्वजन प’ पांडव अपन गांडीव. . . .
निषिद्व भीख लेल मोन बना क’ पङारहल छल निर्जन मे . . . .सदाचारी ओ . . गुरूजन सोझॉ कहियो माथ नै उठाओल.  .
उकसा उकसा हाथ मे ओकरा हथियार पकङाओल
शंखनाद करि रक्त जरैलौ
कोखि उजाङय लेल. .
स्त्रीजाति के . .धिक्कार अछि हे कृष्ण. . 
आयल छलहूॅ बहन्ना करि क’
मारए लेल वा तारय लेल
ओ लूल्ह.  . ई लांगङ. . .ओ कोढ़ि . .ई आन्हर. . ्र.
एयह छल अहॉक सैन्य बल . . . ..वा कोनो पैघ छल .. 
तिल के ताङ . . राई के पहाङ .. . .ताहि प’ अपने ठाढ़ . .नेने हाथ मे सुदर्शन चक. . .बनौने दृष्टि वक .. .
केकरा छल बनेबाक छिन्नमस्ता . .
हमहू छी ठाढ़  .काटू हमर मत्था. . . .
हे तेजस्वी पुरूख .. . देखने होयत जे अहॉक रूप . .
आश्चर्य हेतै जुग के. . 
नायक . . महानायक . .देखि क’ दृश्य. .  .फटैत अछि कियेक नहि करेज़ . .
होबैत अछि किएक नहि मन मे कोनो दरेग .. . .
सुनि क’ एहेन आत्र्तनाद .. . . .दिग्दिगंत धरि भ’ चुकल अछि ..  .आका्रंत . . अहॉ एहेन निस्पृह.. .
नहि कोनो मोह . . .नहि सिनेह. . . .
भीषण ताप सॅ चट्टान सेहो भ’ जाईत अछि विखंडित. . . . .नारि अहॉ के नेह सॅ सराबोर करि देलक . .त’ दोसरो नारिए अहॉक अभिशप्त सेहो कय रहल.  . लिखू. . . दिवस .. .समय .. . स्थान .. .्र्र .
अहिना अहॉक कुलक घमासान . . . शोणितक एकएक बूॅद जरबैत .. . .करत चित्कार. .  फाटत माथ कपार. . . आ’ ओहि शोकाकुल मानस दशा मे .  . .करब अपने धरती सॅ पस्थान. . . . .अंत अहू के निकट. . . . होयत एतबै बिकट. . .  .
कनैत बजैत गांधारी ..्र . संभारैत अपन साङी . .  .क्षण मात मे ततेक कमजोर . . जेना . .जन्मजात अशक्त . . .नहूॅ नहॅू . .पहुचल छली त’ महल मे. . मुदा सुनि कोलाहल .. . . कुंतीक वन गमनक’. . . पति सॅ कयल निवेदन. . . आब एत्त की  .. . .कतेक सूनब सोर. . . .अहि कष्टक .. . कोन छोर. . . .नहि छल भाग्य मे जे सुख . .तेकर कोन दुख़ . . .लिखनहार सॅ केहेन बैर.  . .स्वप्न छल जरि गेल. . . . .सूल सॅ भरल ई महल .. .
आब कत्तय रहय बला रहल. . .
कान मे सदिखन गुॅजैत अछि  . .पुत .  .पौत. . .सखा मीतक स्वर . .
हिय मे उठैत अछि लहरि. . .
सागरक छाति प’ छटपटाईत बताहि. . ्र.
काटैत अछि किंस्याह अपने वंश सन आहि. .
जतेक बॉचल आब जीवन.
कटि जेतैक चलि क’ वन. . .
मस्तिष्क मे शांति आर हेतै त’ कोना .. 
चलू ओहिना चली. . . चलाबैत छथि विधाता जेना. . . .
तीनू गोटे.  .संग निकसल. .
तप करय  ..वा अगिन मे भस्म होबए . .नियति. त’ चुप छल . . . ओकर हाथ मे किछु कत्तय .. . . . . ।

 

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