वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका B R E A K the Language Barrier - Read in your own script Roman(Eng) Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।
प्रोफेसर
राधाकृष्ण चौधरी (१५ फरबरी १९२१- १५ मार्च १९८५) अपन सम्पूर्ण जीवन बिहारक इतिहासक
सामान्य रूपमे आ मिथिलाक इतिहासक विशिष्ट रूपमे अध्ययनमे बितेलन्हि। प्रोफेसर चौधरी
गणेश दत्त कॉलेज, बेगुसरायमे अध्यापन केलन्हि आ ओ भारतीय इतिहास कांग्रेसक प्राचीन
भारतीय इतिहास शाखाक अध्यक्ष रहल छथि। हुनकर लेखनीमे जे प्रवाह छै से प्रचंड
विद्वताक कारणसँ। हुनकर लेखनीमे मिथिलाक आ मैथिलक (मैथिल ब्राह्मण वा कर्ण/ मैथिल
कायस्थसँ जे एकर तादात्म्य होअए) अनर्गल महिमामंडन नहि भेटत। हुनकर विवेचन मौलिक आ
टटका अछि आ हुनकर शैली आ कथ्य कौशलसँ पूर्ण। एतुक्का भाषाक कोमल आरोह-अवरोह, एतुक्का
सर्वहारा वर्गक सर्वगुणसंपन्नता, संगहि एतुक्का रहन-सहन आ संस्कृतिक कट्टरता ई सभटा
मिथिलाक इतिहासक अंग अछि। एहिमे सम्मिलित अछि राजनीति, दिनचर्या, सामाजिक मान्यता,
आर्थिक स्थिति, नैतिकता, धर्म, दर्शन आ साहित्य सेहो। ई इतिहास साहित्य आ पुरातत्वक
प्रमाणक
आधारपर रचित भेल अछि, दंतकथापर नहि आ आह मिथिला! बाह मिथिला! बला इतिहाससँ फराक अछि।
ओ चर्च करैत छथि जे एतए विद्यापति सन लोक भेलाह जे समाजक विभिन्न वर्गकेँ समेटि कऽ
राखलन्हि तँ संगहि एतए कट्टर तत्त्व सेहो रहल। हुनकर लेखनमे मानवता आ धर्मनिरपेक्षता भेटत जे
आइ काल्हिक साहित्यक लेल सेहो एकटा नूतन वस्तु थिक ! सर्वहारा मैथिल संस्कृतिक एहि
इतिहासक प्रस्तुतिकरण, संगहि हुनकर सभटा अप्रकाशित साहित्यक विदेह द्वारा अंकन
(हुनकर हाथक २५-३० साल पूर्वक पाण्डुलिपिक आधारपर) आ ई-प्रकाशन कट्टरवादी संस्था सभ
जेना चित्रगुप्त समिति (कर्ण/ मैथिल कायस्थ) आ मैथिल (ब्राह्मण) सभा द्वारा
प्रायोजित इतिहास आ साहित्येतिहास पर आ ओहि तरहक मानसिकतापर अंतिम मारक प्रहार
सिद्ध हएत, ताहि आशाक संग।-सम्पादक
मिथिलाक इतिहास
अध्याय–१३
मिथिलामे अंग्रेजी राजक अमल
(१७६५–१९४६)
१७६४क वक्सरक लड़ाई भारतक हेतु एकटा निर्णायक युद्ध छल कारण एकरा बाद इ स्पष्ट भगेल छल जे उत्तर भारतक कोनो शक्तिकेँ आब अंग्रेजसँ मुकाबिला करबाक क्षमता नहि रहि गेल छलन्हि। १७६५मे अंग्रेजी इस्ट इण्डिया कम्पनीकेँ जखन दिवानी भेटलैक तखनहिसँ भारतमे अंग्रेजी राज्यक स्थापनाक वीजारोपण सेहो भगेलैक। १८म शताब्दी उत्तर भारत आ दक्षिण भारतक महत्वाकाँक्षी नेता लोकनिक स्वार्थ पूर्त्तिक युग छल जखन लोग देशक पैघ स्वार्थकेँ बिसैरि अपन छोट–छोट स्वार्थक पूर्त्तिक हेतु देशक बलिदान करैत जाइत गेलाह। तिरहूत औरंगजेब समय धरि मुर्शिदाबादक नवावक मातहदीमे छल। १७४०सँ बिहार आ तिरहूतक भाग्य मुर्शिदाबादसँ मिलल छल आ ओहिठामक नवाव बिहारमे अपन उपनवाव बहाल करैत छलाह। अलीवर्दी खाँ पहिने बिहारेक उपनवाव छलाह। अलीवर्दीक कृपासँ अंग्रेज व्यापारी लोकनिकेँ थोड़ेक सुविधा प्राप्त भेल रहैन्ह।
१७५६मे अलीवर्दीक मृत्यु भगेलैक आ तकर बाद सिराजुद्दौलाह बंगालक नवाव भेल। अंग्रेज लोकनि अपन कुचक्रसँ पलासीक युद्धमे सिराजकेँ परास्त कए मीरजाफरकेँ १७५७मे नवाव बनौलन्हि। १७६०मीरजाफरकेँ हटाकए मीरकासिमकेँ नवाव बनाओल गेल। मीरकासिम मूंगेरकेँ अपन राजधानी बनौलन्हि। हुनका अंग्रेजसँ पटैत नहि छलन्हि आ बरोबरि खटपट होइत रहन्हि आ अंग्रेज मीरकासिमक चुस्ती चालाकीसँ खार खाइत छलाह। १७६३मे अंग्रेज आर मीरकासिमक बीचक आर सम्बन्ध खराब भगेल आर मीरकासिम दिल्लीक शाह आलम आर अवधक नवाव शुजाउद्दौलाहक सहाय्यसँ अंग्रेजक पटनामे स्थित कम्पनीपर धावा करबाक विचार केलन्हि। एकरे नतीजा भेल १७६४क बक्सरक लड़ाई। एहिमे अंग्रेज लोकनि विजयी भेलाह आ १७६५मे हुनका दिवानी भेटलन्हि। बंगाल, बिहार आ उड़ीसाक ओ अप्रत्यक्ष रूपेँ मालिक भगेलाह। तहियेसँ मिथिलामे अंग्रेजी राज्यक अमल मानल जा सकइयै। १७६५मे राबर्ट बारकर अपन सेनाक संग उत्तरी बिहारमे विदोही जमीन्दारकेँ दबेबाक हेतु ऐलाह। बेतियाक जमीन्दार जे गत दू वर्षसँ अराजक स्थितिसँ लाभ उठाकेँ विद्रोहक झंडा गारि देने छलाह तनिका ई दतेलन्हि। ओ जमीन्दार अपन किलामे नुका रहल छला। बारकरक पहुँचलाक बाद ओ तुरंत हुनकासँ समझौता कऽ लेलन्हि आर सबटा बकिऔता चुका देलन्हि। बारकर बेतियाक सम्बन्धमे बड्ड बढ़िया विवरण देने छथि। १७७२मे जखन बोर्ड आफ रेवन्युक स्थापना भेल तखन तिरहूतक सेहो राजस्वक आधारपर समझौता भेल। १७७४मे तिरहूतकेँ पटनाक अधीन कदेल गेलैक। १७७२मे फ्रांसीस ग्रैण्ड तिरहूतक प्रथम कलक्टर भके एलाह। ग्रैण्ड नीलहा कोठीक संस्थापक सेहो छलाह आर हिनके प्रयासे समस्त तिरहूतमे नीलहा कोठीक जाल बिछा देल गेल छल। १७८७धरि ग्रैण्ड साहेब रहलाह आर एहि बीच ओ समस्त तिरहूतक सर्वेक्षण राजस्वक दृष्टिये केलन्हि। तकर वार्थस्ट एला।
१७६२मे राज प्रताप सिंह भौरसँ हटाकेँ दरभंगामे अपन राजधानी लऽ अनले छलाह। १७७०मे जखन पटनामे रेवेन्यु कौंसिलक स्थापना भेल तखन पुनः प्रताप सिंहकेँ अपन जमीन्दारीक मुकर्ररी कम्पनीसँ भेटलन्हि। केली तिरहूतक राजस्व अधीक्षक भऽ कऽ एलाह। १७७१मे प्रताप सिंह आर केलीमे मतभेद प्रारंभ भेल। राजाक ओतऽ बहुत रास बकिऔता भऽ गेल छलन्हि आर अंग्रेज लोकनि हिनक पुरान स्तित्वकेँ नहि रहए देमए चाहैत चलथिन्ह। माधवसिंहक समयमे फेर नव हिसाबे कम्पनीक संग समझौत भेलन्हि, ओना राज्यारोहणक पूर्वहिं माधवसिंहकेँ धीरज नारायणसँ कैकटा परगन्ना भेटल छलन्हि। सबटा बकिऔता चुकौला पर राज्य पुनः माधवसिंहकेँ वापस भेलन्हि। ताहि दिनमे एक प्रकारक अस्थायित्व छल तैं लगले–लगले परिवर्त्तनो होइत रहैत छल। तथापि १७८१ सँ १७८९ धरि दरभंगा निस्तुकी रूपें माधव सिंहक अधीन रहल। वार्थस्ट्र कलक्टर दरभंगा आवि महाराजसँ भेटकए अनुरोध केलकन्हि जे दमामी बन्दोबस्त मानि लैथ परञ्च माधवसिंह बड़ा चिंतामे पड़ि गेल छलाह आर कोनो निर्णय लेवामे असमर्थ रझलाह। वो गवर्नर जेनरलसँ अनुरोध केलन्हि जे हुनक राज्य घुरा देल जान्हि। जखन ई सब वार्तालाप छल तखन हुनका कराम अलीक स्टेट सेहो प्राप्त भेलैन्ह (१७९५)। एहिमे १५परगन्नामे ३५टा गाम छल। सरकार बहादुर अहिबातकेँ नहि मानि एहि सब दान बला गाँव अपन राज्यमे मिला लेलक। पुनः झंझटक बाद १८००ई.मे इ सम्पत्ति राजकेँ भेटलैक। अतंतोगत्वा दरभंगा राज सेहो दमामीबन्दोबस्तक अधीन भगेल।
महाराज छत्रसिंहक समयमे कम्पनीक संग सम्बन्ध आर बढ़िया भेलैक। कम्पनीकेँ तखन नेपालसँ खटपट होइत छलैक आर लड़ाईक संभावना बढ़ल जाइत छलैक। कम्पनीक प्रतिनिधि महाराजसँ भेंट केलक आर हिनकासँ अनुरोध केलकन्हि जे संभावित गोरखा आक्रमणक विरूद्ध हिनका लोकनिकेँ सतर्क रहबाक चाही। तिरहूतक कलक्टर सीलीकेँ सेहो लिखल गेलैक जे ओ क्षेत्रक सब जमीन्दार सबसँ सेना प्राप्त करबाक प्रयास करे। सीली सेजर बैडशाक नाम जे पत्र लिखने छलाह जनकपुरसँ ताहिसँ ज्ञात होइछ जे दरभंगा महाराजकेँ छोड़ि केओ सक्रिय सहयोग नहि देने छलन्हि। छत्रसिंह करीब ९हजार टाकाक मदति सेहो देने रहथिन्ह। योग्य सैनिकक व्यवस्था सेहो इ कऽ देने छलथिन्ह। हिनक खुफिया सब अंग्रेजकेँ गोरखाक आक्रमणक पूर्व सूचना एवं ओकरा सबहिक बढ़बाक बाटक संकेत सेहो देलकन्हि। नेपालक विरूद्धक संघर्षमे अंग्रेजक मुख्य सहायक (सब तरहें) छत्र सिंह छलाह आर अंग्रेज सेना तखन पुपरी तक पहुँच चुकल। खिसियाकेँ नेपालक राजा अपन सैनिककेँ ई आदेश देलन्हि जे वो तिरहूत जिलाक सब गामकेँ लूट–पाट शुरू करे। जखन नेपालक विरूद्ध अंग्रेजक जीत भेलैक तखन छत्रसिंहकेँ महाराज बहादुरक पदवी भेटलन्हि। युद्ध समाप्त भेला उत्तरो अंग्रेजक अनुरोधपर छत्रसिंहक सेना मोतिहारीमे बनल रहल। ई लोकनि सतत अंग्रेजक खैरखाह बनल रहल। महेश्वर सिंहक समयमे सिपाही विद्रोह भेल। अंग्रेजकेँ हिन्दुस्तानी जमीन्दारपर सन्देह होइते छलैक आर ताहि पर एकटा कारणो आवि गेलैक। एक अफवाह प्रसारित भेलैक जे बहेड़ाक डिपुटी मजिस्ट्रेट मिस्टर डोवटनपर महाराजक एकटा कर्मचारी बन्दुक उठौलक यद्दपि ई बात किछु दोसर छलैक। महाराज अपन स्वामीभक्ति प्रदर्शित करबाक हेतु अंग्रेजकेँ नाथपुर आर पुर्णियाँक बीच डाक व्यवस्था चालो रखबाक हेतु १६टा घोड़सवार देलथिन्ह। १०० सिपाही सेहो ओ अंग्रेजकेँ पठौलन्हि मुदा ओ लोकनि संशकित रहबाक कारणे ओकरा घुरा देलन्हि। १८५५मे संथाल विद्रोहकेँ दबेबाक हेतु सेहो महाराज हाथी इत्यादि कम्पनीक सैनिककेँ देने छलथिन्ह। महाराज महेश्वर सिंहक बाद कोर्ट आफ वार्डस भऽ गेलैक। तिरहूतमे सिपाही विद्रोहक प्रभाव कोनो रूपें कम नहि छल।
अंग्रेजक संग बढ़िया सम्बन्ध रखितहुँ महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह देशक नब्जकेँ चिन्हलन्हि आर काँग्रेसक प्रारंभिक अवस्थामे जे जानसँ मदति केलन्हि जकर उल्लेख हम पूर्वहिं कऽ चुकल छी। सिपाही विद्रोहक बाद समस्त भारतपर अंग्रेजक एकछत्र राज्य कायम भेल आर तिरहूत कमीश्नरीक एकटा अंग जिलाक रूपमे दरभंगा राजक नामें प्रसिद्ध भेल आर उत्तर बिहारक प्रायः सब जिलामे किछु न किछु हिनका लोकनिकेँ रहबे करैन्ह। रामेश्वर सिंह आर कामेश्वर सिंहक समयमे सेहो ब्रिटिश सरकारक संग सम्बन्ध बढ़िये रहलैन्ह आर १९३५–१९३६मे महाराज कामेश्वर सिंह अपन स्तित्वकेँ आर दृढ़ केलन्हि आर हुनकमे बृद्धि भेलन्हि। नेहि भऽ राज्यक स्थिति प्राप्त करबाक हुनक पैघ अभिलाषा छलैन्ह आर अहि दिशामे ओ बहुत प्रयत्नो केने छलाह। सामान्य प्रतिष्ठाक हिसाबे आन जमीन्दारक अपेक्षा दरभंगा राज्यक विशेष महत्व छलैक आर अंग्रेज लोकनि एकरा अपन एकटा पैघ सम्बन्ध मानैत छलाह। १९३५क कानूनक बाद जे राष्ट्रीयताक एकटा वयार बहल तकरा फलें परिवर्त्तन स्वाभाविक भगेल आर १९४६मे भारतक स्वाधीनताक बाद बिहार पहिल राज्य छल जे जमीन्दारी उन्मूलनक हेतु कानून पास केलक आर बिहारसँ जमीन्दारी प्रथा समाप्त भगेल। बिहारक सब जमीन्दार समाप्त भगेला आर ओहि क्रममे मिथिलाक सबसँ पैघ जमीन्दार जे कहियो मिथिलेशो कहबैत छलाह। सेहो समाप्त भगेला।
II
तिरहूतमे नीलहा कोठीक इतिहासे:- उत्तर बिहार आधुनिक भारतक इतिहासक दृष्टिकोणसँ बड्ड महत्वपूर्ण मानल गेल अछि कारण नीलक खेती अहिठाम होइत छल आर एकरा हेतु अंतर्राष्ट्रीय बाजार प्राप्त छल। नीलक अपन महत्व होइत छैक आर जखन ई बुझना गेलैक जे उत्तर बिहार एकरा हेतु उपर्युक्त स्थान अछि तखन इस्त इण्डिया कम्पनीक कार्यकर्त्ता लोकनिक ध्यान अहि दिसि जाएब स्वाभाविके। अंग्रेजक आगमनक पूर्वहिंसँ अहिठाम नीलक खेती बढ़िया जकाँ होइत छल। युरोपमे ई रंग ततेक जनप्रिय भगेल छलैक जे एकर माँग बढ़ि गेल छलैक। भारतवर्षमे सेहो एकर खेतीक प्रश्न किछु विवाद उठल हेतैक जकर कारण स्पष्ट नहि अछि मुदा १८३७ई.क लार्ड मैकौलक एकटा मेमोरेण्डम छैक जाहिसँ अहि वस्तुपर प्रकाश पड़इयै आर ई आभास भेटइयै जे तकर बादसँ बंगालमे नीलक खेती कम होमए लागल आर नीलक खेतीपर तिरहूत विशेष ध्यान दिये जाए लागल।
१७८२ग्रैण्ड तिरहूत क कलक्टर भऽ कऽ आएल छलाह आर १७८५मे ओ लिखैत छथि जे ओ अपने तिरहूतमे नीलक खेतीक सूत्रपात युरोपिय पद्धतिपर केलन्हि। ई ओ सबटा अपने खर्चपर केने छलाह। अंग्रेजक सर्वप्रथम फैक्ट्री ओना तिरहूतमे १६५०–१७००क बीच हाजीपूरक समीप सिंधिया अथवा लालगंजमे भेल छल आर तहियासँ अहि क्षेत्रमे अंग्रेजक प्रभाव बढ़ैत गेल आर ग्रैण्ड जखन कलक्टर भऽ कऽ एलाह तखन नीलक खेतीकेँ विशेष प्रोत्साहन भेटल। ग्रैण्ड एकरा एकटा उद्योगक हिसाबे विकसित केलन्हि। १७८८क ४फरबरीक एकटा रिपोर्टमे कहल गेल अछि जे तिरहूत कलक्टरीमे जे बारह–गोटए युरोपियन रहैत छथि ताहिमे १०गोटए नीलक खेती करैत छथि। ई बारहो गोटए कम्पनीक नौकर नहि छलाह। एहिमे सँ ६ गोटएक नाम छल–पीटर डी रेजेरियो, जेम्स जेंटिल, जी. डब्लु. एस. शुभान, जेम्स गेलन, जान मिलर आर फ्रांसिस रोज। जेम्स गेलन रेजेरियोक मनेजर छलाह। फ्रांसीस रोज जबर्दस्ती तिरहूतमे राजवल्लभक जागीरमे अपन नीलक खेती शुरू कऽ देने छलाह। १७९३मे नील फैक्ट्रीक संख्या ९भऽ गेल छल। नील फैक्ट्रीक स्थापना कानूनी व्यवस्था जटिल भऽ गेल आर ओहिपर सरकारकेँ ध्यान देमए पड़ैत छलैक। एकर कारण ई छल कि ई लोकनि तरह–तरहक अन्याय आर जोर जबर्दस्ती करैत जाइत छलाह। १७९३मे तिरहूतक जज नीवकेँ बाध्य भऽ कए डोनबल नामक एक फ्रेंच नागरिक तथा टोमस पार्ककेँ तिरहूत छोड़बाक आदेश देमए पड़ल छलन्हि। टोमस पार्क सरैया आर सिंहियामे बिना कोनो लाइसेंसकेँ कतहु बसब ताहिदिनमे गैरकानूनी छल। ढ़ोलीक जेम्स आर्नल्डकेँ सेहो जज महोदय ताकिद कऽ देने छलाह जो स्थानीय लोकनिक कुलाचारपर ध्यान राखैथि आर ओकरा विरूद्ध कोनो काज नहि करैथ। एहेन आदेश देबाक कारण ई छल जे जेम्स आर्नल्ड एकटा ब्राह्मणकेँ मारि बैसल छलाह। एवं प्रकारे रोज कोनो ने कोनो समस्या उठिते छल आर एकर विस्तृत इतिहास हमरा लोकनिकेँ मिन्डन विलसनक “हिस्ट्री आफ बिहार इंडिगो फैक्ट्रीज”मे भेटैत अछि। ९टा प्रारंभिक नीलक कोठी जे फुगल छल तकर विवरण एवं प्रकारे अछि:-
(i) दाउदपुर -
(ii) सराय - विलियम औखी हण्टर
(iii) ढ़ोली -
(iv) अधर - जेम्स जेंटिल
(v) शाहपुर - रिचार्डसन परविस
(vi) काँटी - अकेजेण्डर नामेल
(vii) मोतीपुर -
(viii) दयोरिया - फिंच
(ix) बनारा - ल्पुयिस किक तथा शुभान
१७९४मे मात्र ७६७ बीघा १४ कट्ठा जमीनपर नीलक खेती होइत छल मुदा थोड़वे दिनमे ओकर एतेक विकास भेलैक जे समस्त उत्तर बिहारक कोन- कोनमे नीलहा साहेब सब पसरि गेल आर बढ़ियासँ बढ़िया जमीनपर अपन अधिकार कऽ लेलक। १८०३मे २५टा नील कोठी छल जाहिमे प्रमुखक नाम अछि भवराहा (भौर), मुहम्मदपुर, बेलसर, पिपराघाट, दलसिंहसराय, जितवारपुर, तिवारा, कमतौल, चितवारा, पुपरी, शाहपुरूण्डी इत्यादि। १८१०मे कलक्टर अहिबातक अनुशंसा केलन्हि जे २५टा नील फैक्ट्रीकेँ खजानासँ कर्ज देल जाइक कारण ई लोकनि अपना क्षेत्र बेकार सबकेँ काज दैत छथि आर एवं प्रकारे बेकारीक समस्याकेँ दूर करैत छथि। १८१०मे लगभग १०,०००मन नील तिरहूतसँ कलकत्ता पठाओल जाइत छल। चम्पारणमे नेपाल युद्ध समाप्त भेलाक बाद कर्नल हीकी नामक एक व्यक्ति १८१३ई. मे नीलक खेती शुरू केलन्हि। हीकी बारामे अपन फैक्ट्री फोललन्हि। ओकर ठीक बाद राजपुर आर तुरकौलियामे मोरन आर नहल अपन अपन नीलक कारखाना खोललन्हि। १८४५मे सिरहामे कैप्टेन टाइलर अपन कारखाना खोललन्हि।
१८१६मे चम्पारणमे नीलक खेतीक उल्लेख नहि भेटइयै मुदा १८३०क रिपोर्टमे एकर वर्णन अछि। चीनीक स्थानपर लोग नील उपजाएब शुरू केलन्हि। नीलक खेती अहि हिसाबसँ बढ़ए लागल कि तिरहूतक कलक्टर घबरा गेला १८२८मे लिखलन्हि जे आब अहिपर रोक लगाना चाही। १८५०मे तिरहूतमे (दरभंगा मुजफ्फरपुर)मे ८६टा नीलक कारखाना भगेल छल। सब गोटए चीनीक कारबार छोड़ि नीलपर उतरि गेल छलाह। नील उद्योगपर युरोपियन लोकनिक एकाधिपत्य छलन्हि। सिपाही विद्रोहक समयमे जे तिरहूतमे वेसी विस्फोट नहि भेल तकर कारण इएह छल जे अहि क्षेत्रमे नीलहा साहेबक बोलबाला आर दबदबा छल आर मजूर सब हिनका सबसँ रोजी रोटी पबैत छल आर तैं दबाबमे रहैत छल। सिपाही विद्रोहक समयमे अहि क्षेत्रमे शांति स्थापनाक भार सरकार हिनके लोकनिपर छोड़ि देने छलन्हि आर ई लोकनि ओकर नीक जकाँ निर्वाह केलन्हि। दलसिंहसराय, तिवारा आर जितवापुरक कारखाना पुरान छल आर ओहि सबहक बड्ड धाक छलैक। १८७४मे तिरहूतक सबसँ पैघ नीलक कारखाना पण्डौलमे छलैक जकर क्षेत्रफल ३०० वर्गमील छलैक।
१८६७–६८मे नीलक खेतीक विरोधमे एकटा जबर्दस्त प्रदर्शन चम्पारणमे भेलैक। रैयतक शोषण चरमोत्कर्षपर छलैक आर ओकर कोनो निदान सेहो नहि बहराइत छलैक। मजदूरकेँ पूरा पारिश्रमिक नहि देल जाइत छलैक। मजदूर लोकनि नीलक खेती करबासँ इंकार करए लागल आर जिउकतिया नामक गाममे अहि विरोधक पहिल उदाहरण भेटैत अछि। आनगामक लोग सब सेहो एकर देखा–देखी शुरू केलक। अहि वस्तुकेँ जल्दी सोझरेवाक हेतु मोतिहारीमे तत्काल कचहरीक स्थापना भेल। रैयतक प्रति थोड़ेक सुविधा सेहो देखाओल गेल। अंग्रेजकेँ शक्क भेलैक जे अहि आन्दोलनकेँ केओ उसका रहल अछि। आर हुनका लोकनि दृष्टि बेतिया राजपर गेल। १८७६मे बेतिया राजमे अंग्रेज मनेजर बहाल भेल आर तकर बाद फेर अंग्रेज लोकनि नीलक खेती दिस ध्यान देलन्हि। १९म शताब्दीक अन्त धरि चम्पारणमे कुल २१ फैक्ट्री आर ४८टा ओकर शाखा छल। चम्पारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगाक नीलहा साहेब मिलि कऽ १८०१मे अपना सबहिक हेतु एकटा नियम बनौलन्हि आर १८७७ ओ लोकनि बिहार इण्डिगो प्लांटरस एशोसियेशन नामक संस्था सेहो स्थापित केलन्हि। एकर मुख्यालय मुजफ्फरपुरमे छल आर एकरा सरकारसँ मान्यता छलैक।
मूंगेर, भागलपुर, पूर्णियाँक बिभिन्न भागमे नीलक खेती पसरि गेल आर बेगूसराय, सहरसा, पूर्णियाँ आर कटिहार जिलाक बिभिन्न नीलहा कोठीक ताँता लागि गेल छल। १८९६मे मंझौल, बेगूसराय, भगवानपूर, बेगमसराय, दौलतपुर आदि स्थानमे नीलक कारखाना खुजल छल। ओनासँ १८७७सँ अहि जिलामे नीलक प्रसार भऽ चुकल छल। बेगूसरायक कोठी १८६३मे बनल छल। सहरसामे चपराम, सिंहेश्वर, पथरघट, राघोपुर आदि क्षेत्रमे प्रमुख नीलक कोठी सब छल आर तहिना पुर्णियाँ आर कटिहारमे सेहो। एक्के नीलहा साहेबक कैकटा कोठी होइत छल। प्रतापगंज दिसि सेहो एकटा प्रसिद्ध कोठी छल।
तिरहूत प्लांटरस लोकनि एकटा सैनिक टुकड़ी सेहो बनौने छलाह जकर नाम छल। ‘दऽ बिहार लाइट हार्स’। १८५७–५८क सिपाही विद्रोहक समयमे जखन हिनका लोकनिकेँ तिरहूतमे शांति सुरक्षा रखबाक भार देल गेल छलन्हि तखन ई लोकनि सरकारक समक्ष अहि आशयक एकटा आवेदन हेतु एक प्रकार सैनिक संगठन करबाक अधिकार भेटैन्ह। १८६१–६२ई. अधिकार हिनका लोकनिकेँ भेटलन्हि आर ई लोकनि ‘सूबा बिहार माउंटेड राइफिल्स’ नामक एकटा संस्था बनौलन्हि। १८८६मे ओकर नाम बदलिकेँ ‘बिहार लाइट हार्स’कऽ देल गेल। १९१४–१८क प्रथम विश्वयुद्धमे एहिसँ सरकारकेँ बहुत सहायता भेटल छलैक। १९२०मे एक कानून द्वारा एकरा ‘आक्जिलियरी फोर्स’मे परिवर्त्तित कऽ देल गेलैक।
१९म शताब्दीक अन्तिम चरणमे नीलक खेतीकेँ बड़का धक्का लगलैक। १८९६मे जर्मनीमे एकटा सिंथेटिक सस्त नीलक आविष्कार भेलैक आर संसार भरिमे प्रसिद्ध भऽ गेलैक आर एकर परिणाम ई भेलैक जे अहिठामक नीलक खेती समाप्त होमए लगलैक। नीलक दाम २५०सँ घटिकेँ १५०/- मन भगेलैक। जाहिमे नील उपजैत छलैक ताहिमे लोग तम्बाकु आर कुसियारक खेती शुरू केलक। प्लैंटरस एशोसियेसन सेहो अहि प्रकारक निर्णय लेलक। १९१४मे विश्वयुद्धक कारण जब जर्मनीसँ नील एनाए बन्द भऽ गेलैक तखन फेर साहेब लोकनिक ध्यान अहि दिसि गेलन्हि आर पुनः नीलक खेत शुरू भेल मुदा से बहुत दिन धरि चलल नहि। नीलक खेती समाप्त भेल।
III
स्वातंत्र्य संग्राम आर मिथिला:- प्राचीन मिथिलाक सीमा अंग्रेज अमलमे आबिकेँ नहि रहि गेल। अंग्रेजक आगमन कालहिसँ प्रत्यक्ष एवँ अप्रत्यक्ष रूपेँ ओकर विरोध सबठाँ शुरू भऽ गेल छल कारण हुनका लोकनिक स्वार्थ अपन साम्राज्य विस्तारमे छलन्हि, जनताक कल्याणमे नहि। तथापि शक्तिशाली होयबाक कारणे आर अहिठाम आंतरिक फूट रहबाक कारणे हुनका लोकनिजे सफलता भेटलन्हि तकरा परिणाम स्वरूप ओ लोकनि २००वर्ष धरि अहिठाम शासन केलन्हि आर १९४७मे अहि देशक पिण्ड छोड़िकेँ ओ लोकनि गेला।
मिथिलामे सिपाही विद्रोहक बाद जे विरोधक पहिल आवाज उठल छल से उएह जे चम्पारणमे किसान लोकनि नीलहा कोठीक साहबक विरूद्ध उठौने छलाह आर तिरहूतक हिसाबे ओ एकटा महत्वपूर्ण घटना भेल। ओहि विद्रोहक सूत्रकेँ महात्मा गाँधी १९१७मे चम्पारणमे पकड़लन्हि आर सत्यक संग अपन योग शुरू केलन्हि। अहि दृष्टिकोणसँ ई निर्विवाद रूपें कहल जा सकइयै जे वास्तविक अर्थमे स्वाधीनता संग्रामक श्रीगणेश गाँधीक युगमे मिथिलहिक आँगनसँ भेल। जँ कहियो महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह लाउथर कास्टल कीनिकेँ काँग्रेसक सेसनक हेतु देने छलाह तँ काँग्रेस ओकर प्रतिदान चम्पारणमे गाँधीजीकेँ नियुक्त क देलक आर चम्पारणमे स्वातंत्र्य संग्रामक जे आगि पजरलसँ तातक जड़ैत रहल जातक कि भारत स्वतंत्र नहि भेल। वैशाली विदेहक गणराज्य परम्पराक अनुरूप अशोक द्वारा चिन्हित एवं शेरशाहक सुशाशनसँ पद्मांकित चम्पारणक पवित्र क्षेत्र गाँधीजीक कर्मभूमि बनि महावीरक अहिंसाकेँ साकाररूप प्रदान केलक। १९१७–१९४७धरि गण्डकसँ कोशी आर हिमालयसँ गंगाधरिक क्षेत्रमे एकसँ एक सपूत जन्म लेलन्हि जे स्वतंत्रताक हेतु अपन प्राणक आहूति देने छलाह। कलकत्तासँ आबि प्रफुल्ल चाकी आर खुदीराम बोस सेहो अपनाकेँ अहि भूमिमे अमर केलन्हि। राष्ट्रीय संग्रामक इतिहास लिखब हमर अभीष्ट एतए नहि अछि मात्र एतबे कहबाक अछि जे स्वातंत्र्य संग्राममे मिथिला कोनो प्रांतसँ ककरोसँ पाछु नहि छल। १९१७मे जँ गाँधीजी बाट देखौलन्हि तँ १९४२मे मिथिला सेहो अपन सर्वनिछावर कऽ देलक हुनके आह्वानपर आर उत्तर बिहार १९४२मे सब तरहें क्रांतिकारी लोकनिक गढ़ बनल छल। सब बिचारक भूमिकाक निर्वाह केलन्हि आर हुनके लोकनिक सत्प्रयासे १९४७मे भारतक स्वतंत्रता प्राप्त भेल–ओहिमे मिथिलाक योगदान ओतवे छल जतवा आन कोनो प्रांतक। क्रांतिकारी दलक इतिहासमे सेहो मिथिलाक नाम प्रख्यात छैक।
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अध्याय–१४
मिथिलाक अन्यान्य राजवंशक विवरण
(i.) गंधवरिया राजवंशक इतिहास:- स्वर्गीय पुलकित लाल दास मधुर अथक परिश्रम कए गन्धवरियाक इतिहास लिखि स्वनाम धन्य श्री भोला लाल दासक ओतए प्रकाशनार्थ पठौने छलाह। कोनो कारणवश ई पाण्डुलिपि जे कि आब जीर्णावस्थामे अछि। प्रकाशित नहि भऽ सकल आर गन्धवरियाक इतिहासक प्रसंग एकदिन जखन हमरा भोला बाबूसँ गप्प भेल तखन ओ एहि पाण्डुलिपि चर्च केलहि आर हमरा आग्रहपर ओ पाण्डुलिपि हमरा पठा देलन्हि। पाण्डुलिपि देखलापर ई बुझबामे आएल जे मधुरजी गन्धवरियाक इतिहास किवदंतीक आधारपर लिखने छथि मुदा ताहु हेतु हुनक परिश्रम स्तुत्य एवं सराहनीय अछि। जखन गन्धवरिया कतहु किछु प्रामाणिक इतिहासक सामग्री नहि एकत्रित भऽ सकल अछि ताहि दृष्टिकोणे मधुरजीक ई सत्प्रयास सर्वथा प्रशंसनीय अछि। सोनबरसा राजकेसमे गन्धवरियाक इतिहास देल गेल अछि मुदा ओहुमे जे गन्धवरिया लोकनि सोनबरसाक विरोधमे गवाही देलन्हि ताहिमे हक एकटा प्रमुख व्यक्ति स्वर्गीय श्री चंचल प्रसाद सिंह मुइलासँ पूर्व हमरा व्यक्तिगत रूपें ई कहने गेला जे हुनक अपन जे वयान ओहि केसमे भेल छन्हि से एकदम उल्टा छन्हि तैं गन्धवरियाक इतिहासक हेतु ओकरा उपयोग करबामे ओकरा ‘रिभर्स’ ककए पढ़ब उचित। ओहु केसमे जे इतिहास बनाओल गेल अछि से बहुत किछु परंपरेपर आधारित अछि मुदा ओहिमे एक बहुत महत्वपूर्ण बात ई भेटल जे गन्धवरियाक द्वारा देल दानपत्र सब बहुत किछु उपस्थित कैल गेल छल जाहिमे किछु चुनल दानपत्रक अंग्रेजी अनुवादक अंश हम अपन ‘हिस्ट्री आफ मुस्लिमरूल इन तिरहूत’मे प्रकाशित कैल अछि। सहरसा जिलामे गन्धवरियाक एतेक प्रभुत्व छल तइयो ओकर कोनो उल्लेख पुरनका ‘भागलपुर गजेटियर’मे नहि छल आर जखन सहरसा जिला बनल आर ओकर नव गजेटियर बनल तखन ओहिमे इतिहास लिखबाक भार हमरा भेटल आर ओहिक्रममे हम एक पाराग्राफमे गन्धवरियाक चर्च कैल। एकर अतिरिक्त आर कोनो प्रामाणिक इतिहास गन्धवरियाक नहि बनल अछि आर नेऽ अधावधि एहि दिशामे कोनो प्रयासे भऽ रहल अछि। एहना स्थितिमे मधुरजीक लिखल गन्धवरियाक इतिहासक मूलकेँ हम अहिठाम प्रस्तुत कऽ रहल छी जाहिसँ ओहि मृतात्माकेँ अपन कृतिक स्वीकृति देखि आनन्द होन्हि। अनापेक्षित बातकेँ हटा देल गेल अछि। गन्धवरिया लोकनिक गन्धवारडीह एखनो शकरी आर दरभंगा टीसनक बीचमे अछि आर हुनका लोकनिक ओतए जीवछक पूजा होइत छन्हि। गन्धवरिया लोकनि पँचमहलामे पसरल छथि– वरूआरी, सुखपुर, परशरमा, बरैल आर यदिया मानगंजकेँ मिलाकेँ पँचमहला कहल जाइत छल। जाहिठाम मधुरजीक अंश समाप्त होएत ओतए हम संकेत दऽ देब।
दरभंगा ओ विशेषतः उत्तर भागलपुर (सम्प्रति सहरसा जिला)मे गन्धवरिया वंशज राजपूतक संख्या अत्यधिक अछि। दरभंगा जिलांतर्गत भीठ भगवानपुरक राजा साहेब तथा सहरसा जिलांतर्गत दुर्गापुर भद्दीक राहा साहेब एव वरूआरी, पछगछिया, सुखपुर, बरैल, परसरमा, रजनी, मोहनपुर, सोहा साहपुर, देहद, नोनैती, सहसौल, मंगुआर, धवौली, पामा, पस्तपार, कपसिया, विष्णुपुर एवं पारा इत्यादि ग्राम स्थित बहुसंख्यक छौट पैघ जमीन्दार लोकनि एहि वंशक थिकाह आर सोनबरसाक स्वर्गीय महाराज हरिवल्लभ नारायण सिंह सेहो एहि वंशक छलाह। ई राजवंश बहुत प्राचीन थिक ओ एहि राजवंशक सम्बन्ध मालवाक सुप्रसिद्ध धारानगरीक परमारवंशीय राजा भोज देवक वंशसँ अछि। एहिवंशक नाम “गन्धवरिया” एतै आविकेँ पड़ल। राजा भोज देवक ३५म पीढ़ीक पश्चात् ३६म पीढ़ीक राजा प्रतिराज साह अपन धर्मपत्नी तथा दू ई पत्रक संग ब्रह्मपुत्र स्नानक निमित्त आसाम गेल छलाह। एहि यात्रा जखन ओ लोकनि फिरलाह तँ पुर्णियाँ जिलांतर्गत सुप्रसिद्ध सौरिया ड्योढ़ीक समीप मार्गमे कतहु कोनो संक्रामक रोगसँ राजा–रानीक देहांत भऽ गेलन्हि। सौरिया राजक प्रतिनिधि एखनो दुर्गागंजमे छथि। माता–पिताक देहांत भेलापर दुनू अनाथ बालक भूलल–भटकल सौरिया राजाक ओतए उपस्थित भेलाह आर अपन पूर्ण परिचय देलन्हि। सौरिया राज्य ताहि समयमे बड्ड पैघ आर प्रतिष्ठित छल। ओ दुनू भाइकेँ यथोचित आदर पुरस्कार अपना ओतए आश्रय प्रदान केलन्हि तथा कालांतर उपनयन संस्कारो करा देलन्हि। उपनयनक समय उक्त दुनू भाइक गोत्र अवगत नहि रहबाक कारणे हुनका लोकनिकेँ परासर गोत्र देल गेल जबकि परमारक गोत्र कौण्डिल्य छल। दुहू राजकुमारक नाम लखेशराय आर परवेशराय छलन्हि। ओ लोकनि वीर आर योद्धा छलाह। सौरिया राजक जमीन्दारी दरभंगा राज्यमे सेहो पबै छलन्हि। कोनो कारणे ओहिठाम युद्ध उपस्थित भेलन्हि। राजा साहेब अहि दुनू भाइकेँ सेनानायक बनाए अपन सेना पठौलन्हि। कहल जाइछ जे दुनू भाइ एक राति कतहु निवास कैलन्हि कि निशीय राति भेलापर शिविरक आगाँ किछु दूरपर एक वृद्धा स्त्रीक कानव ओ दुनू गोटए सुनलन्हि। जिज्ञासा केला संता ओ स्त्री बाजलि “जे हम अहाँ घरक गोसाओन भगवती थिकहुँ। हमरा अहाँ लोकनि कतहु स्थान दिअह”। एहिपर ओ दुनू भाइ बजलाह जे हम सब तँ स्वयं पराश्रित छी तैं हमरा वरदान दिअह जे हमरा लोकनि एहि युद्धमे विजय पाबी। ओ स्त्री हुनका लोकनिकेँ एक बहुत उत्तम खड़ग प्रदान कैल जकर दुनू पृष्ट भागपर बहुत सूक्ष्म अक्षरमे समस्त दुर्गा सप्तशती अंकित छल। ई खड़्ग प्रथम दुर्गापुर भद्दीमे छल पश्चात् महाराज हरिवल्लभ नारायण सिंह ओकरा सोनबरसा आनलन्हि। ओहिमे कहियो बीझ नहि लागल छल। ओ खड़्ग एक पनबट्टामे चौचेतल बन्द रहैत छल आर झाड़ि देला संता ओ खड़्गक आकारक भऽ जाइत छल। दुनू भाई युद्धमे विजयी भेला। समस्त रणक्षेत्र मुर्दासँ पाटि गेल आर दुर्गन्ध दूर–दूर धरि व्याप्त भऽ गेल। एहिसँ सौरियाक राजा प्रसन्न भए एहिवंशक नाम ‘गन्धवरिया’ रखलन्हि। ई युद्ध दरभंगा जिलांतर्गत गंधवारि नामक गाममे भेल छल। गंधवारि आर अन्यान्य क्षेत्रक हिनका लोकनिकेँ उपहारस्वरूप भेटलन्हि। लखेशरायक शाखामे दरभंगा जिलांतर्गत (सम्प्रति मधुबनी) भीढ़ भगवानपुरक श्रीमान राजा निर्भय नारायणजी भेल छथि आर परवेशक शाखामे सहरसाक गन्धवरिया जमीन्दार लोकनि छथि। सहरसाक विशेष भूभाग एहि शाखाक अधीन छल। दुर्गापुर भद्दी एकर प्रधान केन्द्र छल।
परिवेशरायकेँ चारि पुत्र भेलन्हि– लक्ष्मण सिंह, भरत सिंह, गणेश सिंह, वल्लभ सिंह। गणेश सिंह आर वल्लभ सिंह निस्तान भेलाह। भरत सिंहक शाखामे धवौलीक जमीन्दार भेल छथि। लक्ष्मण सिंहकेँ तीन पुत्र भेलन्हि– रामकृष्ण, निशंक आर माधव सिंह। एहिमे माधव सिंह मुसलमान भए गेलाह नौहट्टाक शासक भेलाह। ‘निशंक’क नामपर निशंकपुर कुढ़ा परगन्नाक नामकरण भेल। प्रथम एहि परगन्नाक नाम मात्र ‘कुढ़ा’ छल बादमे ओहिमे निशंकुपर जोड़ल गेल। निशंककेँ चारि पुत्र भेलन्हि– दान शाह, दरियाव शाह, गोपाल शाह आर क्षत्रपति शाह। दरियाव शाहक शाखामे वरूआरी, सुखपुर, बरैल तथा परसरमाक गन्धवरिया लोकनि छथि।
लक्ष्मण सिंहक ज्येष्ठ पुत्र रामकृष्णकेँ चारि पुत्र भेलन्हि– वसंत सिंह, वसुमन सिंह, धर्मागत सिंह, रंजित सिंह। वसुमन सिंहक शाखामे पछगछियाक राज्य भेल। धर्मागत सिंहक शाखामे जदिया मानगंजक जमीन्दार लोकनि भेल छथि। रंजित सिंहक शाखामे सोनबरसा राज्य भेल। एहि वंशक हरिवल्लभ नारायण सिंहकेँ १९०८मे सोनबरसासँ १०–१२मील उत्तर कांप नामक सर्किलमे साढ़े नौ बजे रातिमे शौचक समय मारि देल कैन्ह। हिनक एक कन्याक विवाह जयपुरक स्टेटक संम्बन्धीक संग भेल छलन्हि। आर हिनका एकोटा पुत्र नहि छलन्हि। ओहि कन्याक पुत्र रूद्रप्रताप सिंह सोनबरसाक राजा भेलाह। एहि शाखामे सोहा, साहपुर, सहमौरा, देहद, वेहट, वराटपुर, तथा मंगुआरक गंधवरिया जमीन्दारी भेल छथि। एहिमे साहपुरक राजदरबार सेहो प्रसिद्ध छल–हुनका दरबारमे बिहपुर मिलकीक श्यामसुंदर कवि आर शाह आलमनगरक गोपीनाथ कवि उपस्थित छलाह। स्वर्गीय चंचल प्रसाद सिंह सेहो सोनबरसाक दमाद छलाह।
वंसत सिंहकेँ जहाँगीरसँ राजाक उपाधि भेटल छलन्हि। राजा वसंत सिंह गंधवारिसँ अपन राजधानी हटाकेँ सहरसा जिलामे वसंतपुर नामक गाम बसौलन्हि आर ओतहि अपन राजधानी बनौलन्हि। मधेपुरासँ १८–२०मील पूब इ गाम अछि। वंसत सिंहकेँ चारि पुत्र छलन्हि– रामशाह, वैरिशाह, कल्याण शाह, गंगाराम शाह। प्रथम पुत्रक शाखा नहि चलल। वैरिशाह राजा भेल। कल्याण शाहक शाखामे रजनीक जमीन्दार लोकनि आर गंगारामक शाखामे वाराक जमीन्दार लोकनि भेलाह। ई अपना नामपर गंगापुर वासुका बसौलन्हि। वैरिशाहकेँ दु रानी छलन्हि– जाहिमे जेठरानीसँ राजा केसरी सिंह आर जोरावर सिंह भेलथिन्ह आर छोट रानीसँ पद्मसिंह। जोरावर सिंहक शाखामे मोहनपुर आर पस्तपारक जमीन्दार लोकनि भेलाह। पद्मसिंहक शाखामे कोड़लाहीक जमीन्दार लोकनि भेल छन्हि। राजा केसरी सिंह प्रतिभाशाली व्यक्ति छलाह। हुनका औरंगजेबसँ राजाक उपाधि भेटल छलन्हि। केसरी सिंहक पुत्र धीरा सिंह, धीरा सिंहक कीर्ति सिंह, कीर्ति सिंहक राजा जगदत्त सिंह भेलाह जे बड्ड प्रतापी, दयालु आर दानबीर छलाह। गंगापुर, दुर्गापुर आर बेलारी तालुका हिनका अधिकारमे छलन्हि। ई जनश्रुति विशेष प्रख्यात अछि जे ताहि समयमे दरभंगा राजक कोनो महारानी कौशिकी स्नानक निमित्त अवै छलीह। सिंहेश्वरक समीप बेलारीमे हुनक डेरा पड़ल। ई सुनिकेँ जे ई दोसरा गोटाक राज्य थिकाह ओ बजलीह जे हम आन राज्यमे अन्न जल ग्रहण नहि कऽ सकैत छी। जगदत्त सिंह तत्काल बेलारी तालुकामे दानपत्र लिखिकेँ महारानीसँ स्नान भोजनक आग्रह केलन्हि। उक्त बेलारी तालुका हेवनिधार बड़ागोरियाक खड़ौड़य बबुआन लोकनिक अधीन छल आर तत्पश्चात् राज दरभंगाक भेल। जगदत्त सिंहकेँ चारि पुत्र भेलैन्ह– हरिहर सिंह, नल सिंह, त्रिभुवन सिंह, रत्न सिंह। त्रिभुवन सिंह ‘पामा’मे अपन ड्यौढ़ी बनौलन्हि। मधुरजी विवरण संक्षेपमे एतबे अछि।
मधुरजीक विवरणसँ आर आन विवरणसँ किछु तफात देखबामे अवइयै। पंचगछियाक राजवंश अपनाकेँ नान्यदेवक वंशज हरिसिंह देवक पुत्र पतिराज सिंहसँ उत्पत्ति मनैत छथि। पतिराज सिंह ‘गन्धवारपुर’मे अपन वास स्थापित केलन्हि आर तै गन्धवरिया कहौलथि। परञ्च इहो लोकनि अपनाकेँ पतिराज सिंहक पुत्र परवेश रायक वंशज कहैत छथि। रामकृष्ण सिंहक वंशज भेला पछगछिया स्टेट। हिनका लोकनिक वंश वृक्षक अनुसार–
लक्ष्मण सिंहसँ राज्यक बटबारा एवं प्रकारे भेल–
माधव सिंह रामकृष्ण निशंक सिंह
(मुहम्मद खान) (दुर्गापुर, सोनबरसा (पंचमहला)
(नवहट्टा) पछगछिया इत्यादि)
सोनबरसा, पछगछिया तथा बरूआरी प्रसिद्ध स्टेट मानल जाइत छल। पंचमहलामे बरूआरी मुख्य स्टेट छल। निशंक सिंहक पुत्र दरिया सिंहक वंशज भेला बरूआरी स्टेट। अहिवंशमे राजा कोकिल सिंह प्रख्यात भेल छथि जनिका सम्राट शाह आलमसँ ११६५ हिजरीमे शाही फरमान भेटल छलन्हि। राजाक उपाधि हिनका सम्राटसँ भेटल छलन्हि। राजाक उपाधि हिनका सम्राटसँ भेटल छलन्हि। बरूआरी तिरहूत सरकारक अधीन छल आर कोकिल सिंहकेँ अहिक्षेत्रक ननकार हैसियत भेटल छलन्हि। गन्धवरिया लोकनिक कुलदेवी “जीवछ”क प्रतिमा वरूआरी राजदरबारमे छल आर ओकर पूजा नियमित रूपेँ होइत छल। ‘जीवछ’क प्रतिमाकेँ नोहट्टासँ अहिठाम आनल गेल छल।
निशंक सिंह
दानी सिंह दरिया सिंह क्षत्रपति सिंह गोपाल सिंह
(परसरमा) (वरूआरी) (गोबरगढ़ा) (कुमुरखन)
वरूआरी सुन्दर सिंह कृष्ण नारायण सिंह
(सुखपुर) (बरैल)
एतवा सब किछु होइतहुँ गन्धवरियाक कोनो प्रामाणिक इतिहास नहि बनि पाओल अछि। जे किछु दानपत्रक अंग्रेजी अनुवादमे केसमे भेटल अछि से वेसी भीठ–भगवानपुरक राजा सबहिक। भीठ भगवान गन्धवरियाक पैघ हिस्साक राजधानी छल आर हुनका लोकनिक स्तित्व निश्चित रूपें दृढ़ छलन्हि आर ओ दान पत्र दैत छलाह जकर प्रमाण अछि। दरभंगाक गन्धवरिया लोकनि सेहो अपन इतिहासक रूपरेखा नहि प्रकाशित केने छथि तैं ओहि सम्बन्धमे किछु कहब असंभव। हमरा बुझने ओइनवार वंशक पतनक बाद ‘भौर’ क्षेत्रमे राजपूत लोकनि अपन प्रभुत्व जमा लेने छलाह आर स्वतंत्र राज्य स्थापित केने छलाह। खण्डवलासँ हुनका संघर्षो भेल छलन्हि आर ओहि संघर्षक क्रममे ओ लोकनि भीठ–भगवानपुर होइत सहरसा–पुर्णियाँक सीमा धरि पसरि गेला। “गन्ध” आर “भर” (राजपूत)क शब्दक मिलनसँ गन्धवारि बनल (‘गन्धभर’) आर ओहि गाँवकेँ ओ लोकनि अपन राजधानी बनौलन्हि। कालांतरमे भीठ–भगवानपुर हिनका लोकनि प्रधान केन्द्र बनल। इतिहासक परंपराक पालन करैत इहो लोकनि अपन सम्बन्ध प्राचीन परमार वंशक संग जोड़लन्हि आर ‘नीलदेव’ नामक एक व्यक्तिक अनुसंधान केलन्हि। ओहिमे सँ केओ अपनाकेँ विक्रमादित्यक वंशज कहलैन्हि आर केओ नान्यदेव। भीठ भगवानपुरक वंश तालिका तँ हमरा लग नहि अछि मुदा सहरसाक गंधवरिया लोकनिक वंश तालिका देखलासँ ई स्पष्ट होइछ जे परमार भोज आर नान्यदेवसँ अपनाकेँ जोड़निहार गन्धवरिया लोकनि लखेश आर परवेशक अपन पूर्वज मनैत छथि। पूर्वजक हिसाबे सब श्रोत एकमत अछि। परंपरामे इहो सुरक्षित अछि जे नीलदेव गंधवारिमे आविकेँ बसल छलाह आर ‘जीवछ’ नदीकेँ अपन कुलदेवता बनौने छलाह। कहल जाइत अछि जे नीलदेव राजा गंधकेँ मारिकेँ अपन राज्य बनौलन्हि। सहरसा जिलामे भगवतीक आशीष स्वरूप राज्य भेटबाक जे गप्प अछि ताहुमे कैक प्रकारक कथा आर किवदंती भेटइयै। मात्र एक बातपर सब श्रोत एकमत अछि जे हिनका लोकनिकेँ उपनयनक अवसरपर अपन गोत्र याद नहि रहला संता ‘परासर गोत्र’ देल गेलन्हि। जा धरि कोनो आन वैज्ञानिक साधन उपलब्ध नहि होइछ ताधरि गन्धवरियाक इतिहास अहिना किवदंती आर परम्परापर आधारित रहत।
ii. बनैली राज्यक इतिहास:- प्राचीनताक दृष्टिकोणसँ बनैली इतिहास सेहो अपन महत्व रखैत अछि। १४म शताब्दीमे गदाधर झा नामक एक विद्वान दरभंगा जिलाक वैगनी नवादा नामक गाममे रहैत छलाह। कहल जाइत अछि जे हिनक विद्वतासँ प्रभावित भए गयासुद्दीन तुगलक हिनका काफी सम्पत्ति दानमे देने छलथिन्ह। हुनकासँ नवम पीढ़ीमे भेला देवनंदन झा जनिका परमानंद झा आर मानिक झा नामक दूटा पुत्र छलथिन्ह। परमानंद झा संस्कृत, फारसी आर अरबीक प्रसिद्ध विद्वान छलाह। शिकारक सेहो हुनका बड्ड शौख छलन्हि। बाघ मारबामे तँ वो सहजहि निपुणते प्राप्त केने छलाह। अपन पूर्वजसँ हिनका पर्याप्त धन सम्पत्ति भेटले छलन्हि आर तैं हिनक निपुणताकेँ देखि अठारहम् शताब्दीमे हिनका फकराबाद परगन्नाक चौधरी बना देल गेलन्हि। दिनानुदिन हिनक ख्याति बढ़ैत गेलन्हि परञ्च ई अपन काज सम्पादन करबामे असावधान होइत गेलाह। फलस्वरूप ई अजीमाबादक कोपभाजन बनला आर दरभंगासँ भागि कमला नदी बाटे फरकिया दिसि प्रस्थान केलन्हि। अजीमाबादक सरकारसँ डर बनले रहैन्ह तैं फरकियाकेँ छोड़ि ओ धरमपुर दिसि बढ़ला आर पुर्णियाँक क्षेत्रमे अमौर दिसि चल गेलाह। ताहि दिनमे नवाव आर अंग्रेजमे खटपट चलि रहल छल। एम्हर हिनका लाल सिंह चौधरी आर दुलार सिंह चौधरी दूटा पुत्र उत्पन्न भेलन्हि। हुनक भाए माणिक चौधरी देहांत भगेलन्हि। माणिक चौधरीक एक पुत्र छलथिन्ह हरीलाल चौधरी। ओहि समयमे आमौरमे भैरव मल्लिक नामक एकटा सम्पन्न कायस्थ सेहो रहैत छलाह जे बड्ड जनप्रिय, निपुण आर उत्साही लोक छलाह आर जिनकर प्रतिष्ठा ओहि क्षेत्रमे अपूर्व छल। ओ पूर्णियाँ आर दिनाजपुर क्षेत्रक कानूनगोय छलाह। इएह अपना ओहिठाम परमानन्द चौधरीकेँ रहबाक प्रश्रय देलन्हि। कृषिकार्य कए अपन पालन पोषण करबाक हेतु परती जमीन सेहो ओ परमानंद चौधरीकेँ देलन्हि।
तकर बादहिसँ परमानंद चौधरीक भाग्य पलटल। पटसाराक प्रसिद्ध राजा इन्द्रनारायण राय एक दिन अपन पालकीपर बैसल कतहु जाइत छलाह कि बाटहिमे परमानन्द चौधरी एकटा राहु माछ मारिकेँ हुनका समक्ष उपस्थित केलन्हि। राजा प्रसन्न भए हुनका अपना ओतए तहसीलदार मनेजरमे बहाल कऽ लेलथिन्ह। परमानन्द शक्तिशाली लोक भगेलाह आर ओहि क्षेत्रमे हुनक प्रभाव बढ़ए लागल। एक दिन पुर्णियाँक नवाव शिकारक हेतु एम्हर एला मुदा हुनका एक्कोटा शिकार नहि भेटलन्हि तखन परमानंद चौधरी हुनका देखितहि देखितहि एकटा बाघ मारिकेँ देलथिन्ह। नवाब पसिन्न भए हुनका “हजारी”क उपाधि देलथिन्ह आर वो आब हजारी चौधरीक नामे प्रसिद्ध भऽ गेलाह। हिनक पुत्र दुलार सिंह कृषि आर व्यापारक माध्यमसँ अपन आर्थिक स्थितकेँ सुदृढ़ केलन्हि। घी, इलायची, आर लकड़ीक व्यापार ओ नेपालसँ शुरू केलन्हि आर नवाबसँ मिलिकेँ ओहि सब वस्तुकेँ कलकत्ता धरि पठबे लगलाह। फेर हाथीक व्यापार शुरू केलन्हि जाहिमे बड्ड लाभ भेलन्हि। अहि क्षेत्रमे धनीमानी व्यक्तिमे हुनक गिनती होमए लागल। भैरव मल्लिकक धन बिलहि गेल आर ओ शोकाकुल भए मरि गेल। हुनका स्थानपर दुलार सिंह कानुनगोय नियुक्त भेला। एम्हर ताधरि परमानंद चौधरी असजा आर मोरंग तटक तीरा परगन्नाक अधिकारी सेहो भऽ चुकल छलाह। ओम्हर ताधरि राजा इन्द्रनारायण सिंहक महल कुरसाकाँटाक बन्दोबस्त दमामी बन्दोबस्तक समय ई लऽ लेने छलाह। राजा इन्द्रनारायण हुनक एहि विश्वासघाती कार्यसँ असंतुष्ट भगेल छलथिन्ह। हजारी चौधरीक परोक्ष भेलापर हुनका लोकनिमे आपसी मनमुटाव शुरू भेल। दुलार सिंह हरलालकेँ अमौरक इलाका अपन घरेलु कलहकेँ शांत केलन्हि। हरलालक उत्तराधिकारी अयोग्य बहरेला। दुलारसिंह बनैलीमे अपन निवास स्थान बनौलन्हि। ओतहिसँ हिनक प्रभावमे वृद्धि शुरू भेल। दुलार सिंहक दू पुत्र छलथिन्ह सर्वानन्द आर वेदानन्द– सर्वानन्द निसंतान मरि गेलाह। वेदानंदक कार्यकलापसँ वंशक कीर्ति बढ़ल। दुलार सिंहकेँ दोसर विवाहसँ कतेको संतान भेलैन्ह जाहिमे प्रख्यात भेलाह रूद्रानंद सिंह जे अपन पुत्र श्रीनंदनक नामपर श्रीनगर राज्यक स्थापना केलन्हि। कानूनगोय रहलाक कारणे सरकारक ओतए दुलार सिंहक वेश प्रभाव छल आर अपन प्रभावहिसँ ओ नवहट्टा, धपहर, गोगरी आदि क्षेत्र धरि अपन अधिकारक विस्तार केलन्हि। ओम्हर पुर्णियाँ आर मालदह धरि अपन जमीन्दारी बढ़ौलन्हि। नेपाल युद्धमे सेहो ई कम्पनी सरकारकेँ सहायता देने छलाह। नेपाल विजयक पश्चात् हिनका कम्पनी सरकारसँ राजाबहादुरक उपाधि भेटलन्हि। नेपाल आर अंग्रेजक बीच सीमा निर्णयक समयमे कम्पनी सरकार तीरा परगन्नाक समीप हिनका सातकोस भूमि बन्दोबस्तमे दऽ देलकन्हि।
दुलार सिंहक बाद हुनक पुत्र वेदानंद सिंह राजा भेला आर हुनको कम्पनीसँ राजाक उपाधि भेटल छलन्हि। हुनका समयमे राज्य दू भागमे बटि गेल। वेदानंद अपन पैत्रिक बनैलीमे रहलाह आर रूद्रानन्द सौरा नदी टपिकए श्रीनगरमे बसलाह। वेदानन्द खरगपुर महाल कीनिके अपना राज्यमे मिलौलन्हि आर अपन रज्यक पूर्ण विस्तार केलन्हि। हिनके बनैली राज्यक संस्थापक कहल जा सकइयै। हिनक विवाह मिथिलामे महेश ठाकुरक वंशजमे भेल छलन्हि। ई विधा प्रेमी छलथिन्ह– प्रथम पत्नीसँ पद्मानंद सिंह आर तेसर पत्नीसँ कुमार कलानन्द आर कृत्यानंद सिंह भेलथिन्ह। लीवानंद सिंह अपना समयक मिथिलाक एक प्रमुख व्यक्ति छलाह। हिनक परोक्ष भेला पर राजा पद्मानंद सिंह राजा भेलाह आर हिनका अंग्रेजी राजसँ सरकारक उपाधि सेहो भेटल छलन्हि। हिनकहि समयमे राज्यमे बट्बाराक मामला शुरू भेल जाहिमे हिनका ७आना आत कुमार कलानंद आर कृत्यानंदकेँ ९आना हिस्सा भेटलन्हि। पद्मानंद सिंह अपना बापे जकाँ दानी छलाह। वैद्यनाथ मंदिरक फाटक बनेबामे हिनक पूर्ण योगदान छलन्हि। महादेवक प्रति हिनक निम्नलिखित कविता प्रसिद्ध अछि–
__ ”जो अलका पति की सुख, सम्पत्ति देई मेरो प्रभु भौन भरेंगे।
अङ्कलिये गिरि राज सुता, कर पंकज तेसिर आइ धरेंगे॥
चन्द्र विभूषण भाल धरे, दुख जाल कराल हमार हरेंगे।
पद्मानंद सदा शिवकेँ, हरखाह मखाह निवाह करेंगे॥
करै पवित्र जाको दर्शनदिव्य देवन को,
सेवाते होत जाके, सहजहि सनाथ है।
गायें यश जाको, पावें मंगल मनोरथको,
छाई छिति कीरति कृपाल गुणगाथ है॥
नाथनकेँ नाथको अनाथन के नाथ प्रभु,
देवनकेँ नाथ मेरे बाबा वैद्यनाथ है॥
बनारसमे श्यामा मंदिर आर तारा मंदिरक स्थापना हिनके पत्नी लोकनिक प्रयत्ने भेल छल। हिनक पुत्र लोकनिक अकालमृत्यु भगेलन्हि। हिनक वंशजक रानी चन्द्रावतीक कोठी भागलपुरमे अछि।
कलानंद सिंहकेँ सेहो सरकार बहादुरसँ राजा बहादुरक पदवी भेटलन्हि। हिनक दूटा पुत्र भेलथिन्ह कुमार रामानंद सिंह आर कुमार कृष्णानंद सिंह। कृष्णानंद सिंह। कृष्णानंद सिंह अपन निवास स्थान सुल्तान गंजक श्रीकृष्ण गढ़मे बनौलन्हि। कलानंद सिंहक बाद राजा कृत्यानंद सिंहक प्रभाव बनैली राज्यमे सबसँ विशेष छल। बिहारक जमीन्दारमे ई सर्वप्रथम ग्रैजुएट छलाह आर अंग्रेजी हिन्दी आर संस्कृतक असाधारण विद्वान सेहो। खेलकुद आर शिकारमे ई अद्वितीय छलाह। बंगाल–बिहारक काउंसिलमे सेहो ई सक्रिय भाग लैत छलाह आर पटनासँ बिहारी पत्रिकाक प्रकाशन सेहो करौने छलाह। तेजनारायण जुबिली कालेजक आपत् कालमे ई अपूर्व सहयोग दए ओहि कालेजकेँ जीवित रखलन्हि आर ताहि दिनक हिसाबे ६लाखक दान देने छलाह। हिनके दानक स्वरूप ओहि कालेजक नाम तेजनारायण बनैली कालेज पड़ल अछि। हिनको राजाबहादुरक उपाधि छलन्हि आर सनद देवा काल बिहारक राज्यपाल बेली साहेब तेजनारायण जुबिली कालेजमे देल हिनक सराहणीय दानक उल्लेख केने छलाह। भागलपुरमे आयोजित अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलनक स्वागताध्यक्ष सेहो छलाह। कलकत्ता विश्वविद्यालयमे मैथिलीकेँ स्थान दियेबामे हिनक अपूर्व योगदान छल। बिहार प्रांतीय संस्कृत सम्मेलनक सभापति सेहो ई छलाह।
वंशवृक्ष गदाधर झा
११म पीढ़ी–दुलार सिंह चौधरी
(१२) सर्वानंद सिंह वेदानंद सिंह रूद्रानंद सिंह
लीलानंद सिंह (श्रीनगर राज्य शाखा
पद्मानंद सिंह कुमार गंगानन्द सिंह)
कलानंद सिंह
कृत्यानंद सिंह
पद्मानंद सिंह कलानंद सिंह कृत्यानन्द सिंह
चन्द्रानन्द सिंह रामनंद सिंह श्यामानंद सिंह
सूर्यानन्द सिंह कृष्णानन्द सिंह बिमलानंद सिंह
(सुलतान गंज) तारानन्द सिंह
दुर्गानन्द सिंह
जयानन्द सिंह
नुनु जी
iii. शंकरपुर राज्यक इतिहास:-
शंकरपुर मधेपुरासँ उत्तर १२मीलक दूरीपर अछि। एकरा वड़गोड़िया स्टेट सेहो कहल जाइत छल कारण बड़गोड़िया स्टेट सेहो कहल जाइत छल कारण बड़गोरिया नामक एकटा गाम दरभंगामे अछि। जाहि नामपर अहि राज्यक नम करण अभेल छल। शंकरपुरक समीप दूटा प्रसिद्ध प्राचीन गढ़ अछि राय भीर आर बुधिया गढ़ी। एकरे समीपमे बेलारी गाम अछि। बेलारीक सम्बन्धमे किवंदन्ती अछि जे वल्लालसेन अहिगामक संस्थापक छलाह। शंकरपुरक समीप मधेली बजार आर वंसतपुर नामक प्रसिद्ध एतिहासिक स्थान अछि जाहिठाम सीत–वसंतक ध्वंसावशेष देखबामे अवइयै।
बेलारी तालुका पहिने दुर्गापुरक अधीन छल। पाछाँ दरभंगा राज्यक अंतर्गत भेल। खण्डवला कुलक महाराज छत्रसिंहक तेसर पुत्र नेत्रेश्वर सिंहकेँ बबुआनीक हिसाबे शंकरपुर भेटलन्हि। तखनहिसँ शंकरपुर राज्यक स्थापना मानल जा सकइयै। हिनका दूटा पुत्र छलथिन्ह एकरदेश्वर सिंह आर जनेश्वर सिंह। जनेश्वर सिंह लक्ष्मीश्वर सिंहक अभिभावकत्वमे रहलाह। जनेश्वर सिंह प्रख्यात पुरूष भेल छथि। ई विधाप्रेमी छलाह आर मधेपुरामे संस्कृत विद्यालयमे स्थापना केने छलाह। हिनक पुस्तकालय अपूर्व छल जे हिनक परोक्ष भेलापर लक्ष्मीश्वर पुस्तकालय दरभंगामे पठा देल गेल। वैवाहिक दृष्टिकोणे एकरदेश्वर सिंहक सम्बन्ध शौरिया राज्य (संस्थापक राजा सुमेर सिंह चौधरी)सँ सेहो छल। एकरदेश्वर सिंहकेँ तीन पुत्र भेलथिन्ह–
होमेश्वर सिंह, फुलेश्वर सिंह, चितेश्वर सिंह।
वंशवृक्ष
महाराज रूद्र सिंह
नेत्रेश्वर सिंह
एकरदेश्वर सिंह जनेश्वर सिंह
होमेश्वर सिंह
फुलेश्वर सिंह
चितेश्वर सिंह
iv. हरावत स्टेटक इतिहास:- ई राज्य सहरसा आर पूर्णियाँक सीमा रेखापर छल। हरावत परगन्नामे रहलाक कारणे अहि राज्यक नाम हरावत राज्य पड़ल। अहि राज्यक संस्थापक अग्निवंशीय चौहान छलाह परञ्च बादमे ई लोकनि जैन धर्ममे दीक्षा लेलन्हि। सम्राट शाहजहाँक समयमे हिनका लोकनिकेँ राजाक उपाधिसँ विभूषित कैल गेलन्हि आर राजस्थानसँ ई लोकनि मुर्शिदाबाद पहुँचलाह। हरावत परगन्नामे स्टेट संस्थापक रूपमे प्रतापसिंहक नाम अवइयै। हिनक व्यक्तित्वसँ प्रभावित भए दिल्ली सम्राट आर बंगालक नवाबसँ हिनका खिल्लत भेटल छलन्हि। हरावतक प्रसिद्ध राजा इन्द्रनारायणक पत्नी इन्द्रावतीक कर्त्तापुत्र विजयगोविन्द सिंह प्रताप सिंहसँ महाजनी कारबार शुरू केलन्हि। इन्द्रनारायणक जमीन्दारी शौरिया राजक नामे प्रख्यात छल। जे हिनक पूर्वज सूमेरसिंह चौधरीकेँ मुसलमान सम्राटसँ भेटल छलन्हि। विजय गोविन्दसँ प्रताप सिंहकेँ झगड़ा भेलन्हि आर १८५०मे सम्पूर्ण हरावत परगन्नाक जमीन्दारीपर प्रतापक अधिपत्य भगेलैन्ह। एव प्रकारे शौरिया राज्यक एक महत्वपूर्ण भाग समाप्त भऽ गेल। हुनके नामपर प्रतापगंज बाजार बसल अछि। प्रतापगंज अहिवंशक सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति भेलाह। अपना मृत्युसँ पूर्वहि ओ अपन सम्पत्ति अपन दुनू पुत्र लक्ष्मीपति सिंह आर धनपति सिंहमे बटबा देलन्हि। ई दुनु भाई सार्वजनिक काममे सक्रिय रूपसँ भाग लेलन्हि। धनपति सिंह सेहो काफी प्रसिद्ध व्यक्ति भेल छथि। हिनका तीनटा पुत्र छलथिन्ह– गनपत, नरपत, बहादुर। गनपत सिंह अपना नामपर गनपत गंज बजार बसौलन्हि। नरपत सिंह कैसरे हिन्द कहबैत छलाह। हिनक पुत्रमे शूरपत सिंह प्रसिद्ध भेल छथि। ओ महाजनी भाषाक अतिरिक्त आरो कैक भाषाक जानकार छथि। हिन्दीसँ हुनका विशेष प्रेम छलन्हि आर जैन धर्म ग्रंथक हिन्दीमे अनुवाद सेहो करौने छलाह। प्राचीनकालमे हरावत जंगल छल आर आइनी–अकबरीमे एकर राजस्वक उल्लेख अछि। नाथपुरक चलते हरावत्क बड्ड नाम छल मुदा कोशीक पेटमे सब जाके नष्ट भऽ गेल।
वंशवृक्ष
राजा सोमचंद
४८म प्रताप सिंह
लक्ष्मीपत
छत्रपत
धनपत
गनपत
नरपत
शूरपत
महिपत
भूपत
बहादुर
v. चक्रवारक इतिहास:- मिथिलाक पाँजि आर अंग्रेजक इस्ट इण्डिया कम्पनीक कागज देखलासँ ज्ञात होइत अछि जे मुगलकालक अंतिम दिनमे बेगूसराय इलाकामे एकटा छोट–छीन चक्रवार ब्राह्मण लोकनि बनौने छलाह जे सम्प्रति चक्रवार भूमिहारक नामे प्रसिद्ध छथि। शुद्ध भूमिहारक दृष्टिकोणसँ लिखल गेल स्वामी सहजानंदक ‘ब्रह्मर्षिवंश विस्तार’मे चक्रवारकेँ भूमिहारमे नहि गिनल गेल छैक आर बहुतो दिनधरि ओ लोकनि मैथिल कहबैत छलाह। चक्रवारक मूल छन्हि ‘बेलौंचे सुदई’।
स्थानीय परम्पराक आधारपर ज्ञात होइछ जे चिरायुमिश्र नामक एक व्यक्ति बेलौंचे डीहसँ उपटिकेँ बेगूसराय जिलाक साम्हो ग्राममे आविकेँ बसि गेल छलाह। मुल्ला तकियाक वयाजसँ ई ज्ञात होइछ जे ओ हाजी इलियास तिरहूत राज्यकेँ दू भागमे बहने छल आर गंडकक दक्षिणी भागपर अपन अधिपत्य स्थापित कए बेगूसराय क्षेत्र धरि अपन प्रभाव बढ़ालेने छल। फिरोज तुगलक पुनः तिरहूतक सम्पूर्ण राज्य भोगीश्वर केंटस्तांतरितक देने छलाह। मिथिलाक ब्राह्मण शासक, ओइनवार वंशक लोग, आंतरिक मामलामे स्वतंत्र छलाह परञ्च दिल्लीक प्रभुताक मनैत छलाह। ओहि कालमे जे एक प्रकारक अस्त व्यस्तता छल तकरा चलते बहुत रास मैथिल ब्राह्मण अपन जीविकोपार्जनक हेतु चारोकात बहराइत गेलाह। तेरहम–चौदहम शताब्दीमे चिरायुँ मिश्र सेहो गंगा स्नान करबाक दृष्टिये साम्हो दिसि पहुँचलाह आर ओतुका प्राकृतिक छटा देखि आकृष्ट भए गेलाह आर ओतुके लोकक आग्रहपर ओतए बसि गेलाह। चक्रवार परम्परामे तँ ई कथा सुरक्षित अछि जे तहियेसँ हुनका लोकनि राज्य ओतए बनि गेलन्हि आर चक्रवारक प्रभाव पूर्णियाँसँ बक्सर धरि गंगाक दुनूकात पसरि गेल। तुगलक कालीन मलिक वायासँ संघर्ष हेबाक कथा सेहो चक्र्वार परम्परामे सुरक्षित अछि। (अहि प्रसंगमे देखु–हमरे लिखल–‘चक्रवारस आफ बेगूसराय’)
अठारहम शताब्दीक पूर्वार्द्धमे मुगल साम्राज्यक विघटन प्रारंभ भऽ गेल छल। प्रांतीय राज्यपाल लोकनि अपन स्वतंत्रता घोषित करें लागल छलाह। एहना स्थितिमे चक्रवार लोकनि सेहो अपना बेगूसराय क्षेत्रमे स्वतंत्र घोषित कए देलन्हि। हुनक स्वतंत्र राज्य होएबाक सबसँ पैघ प्रमाण ई अछि जे चक्रवार राज्यक विभिन्न व्यक्ति अपन हस्ताक्षर आर मुदासँ युक्त अनेको दानपत्र देने छथि। चक्रवार राजा बख्तावर सिंहक एक भूमिदान पत्रसँ ई प्रतीत होइछ जे हुनक अधिपत्य दलसिंहसराय धरि छल “महाराज बख्तावर सिंह देवदेवानम्”–क उपाधिसँ सेहो ई सूचित होइछ जे ओ मात्र एक सामंतेटा नहीं अपितु अपना प्रदेशक एक स्वतंत्र शासक सेहो। कम्पनीक कागजातमे बख्तावर सिंहक उल्लेख चक्रवारक राजाक रूपेँ भेल अछि। राजा शिवदत्त सिंह चक्रवारक एकटा दानक मान्यता अलीवर्दी स्वीकृत केने छल आर ओहि दानकेँ ओ यथावत् रहए देने छल। इहो कहल जाइछ जे राजा वख्तावर सिंहक पिरव्य रूको सिंह फरकिया परगन्नाकेँ लूटने छलाह जे तखन राजा कुंजल सिंहक अधीनमे छल। रूको सिंह १७३०मे कुंजलासिंहक हत्या कऽ देलन्हि।
कम्पनीक लेखसँ बुझि पड़इयै जे १७१९धरि चक्रवार लोकनि बेगूसरायमे प्रभुता संपन्न राज्यक रूपमे स्वीकृत भऽ चुकल छलाह। ओ लोकनि सरकारकेँ लगान देव बन्द कऽ देने छलाह आर मूंगेरसँ पटना धरि गंगा नदीक मार्गपर नियंत्रण सेहो कऽ लेने छलाह। ओहि मार्गसँ जाइबला सब नावकेँ रोकिकेँ ओ लोकनि कर वसूल करैत छलाह आर ओकरा लूटितो छलाह। अंग्रेज कम्पनीकेँ अपन नावक संग सेना सेहो पठवे पड़इत छलैक। कोन्ना आर अन्य स्थानमे चक्रवार लोकनि अंग्रेज सबल पड़इत छलाह। चक्रवार लोकनि अंग्रेजक नावपर आक्रमणो करैत छलाह आर अंग्रेज आर चक्रवारक बीच बरोबरि युद्ध होइत छल। अंग्रेज लोकनि 1721मे वख्तावर सिंहकेँ चक्रवारक राजा मानि लेलाह। अलीवर्दी चक्रवारकेँ पराजित करबामे सफल भेलाह। कहल जाइत अछि जे 1730मे विश्वासघात ककए अलीवर्दीक आदमी चक्रवार राजाकेँ मारि देलक। हालवेल अपन पोथीमे अहि विश्वासघातक वर्णन केने अछि। ओ चक्रवार राजा कोन छल तकर नाम नहि भेटैत अछि कारण वख्तावर सिंह अलीवर्दीसँ नीक सम्बन्ध स्थापित कऽ लेने छलाह आर बादमे अलीवर्दीक अभियानमे हुनक मदति सेहो केलथिन्ह। चक्रवारवंशक दलेल सिंह टेकारी राज्यक एक महत्वपूर्ण पदाधिकारी छलाह आर राजा मित्रजित सिंहक प्राण बचेबामे सहायक भेल छलाह। 1793मे दमामी बन्दोबस्त चक्रवार दिग्विजय नारायणक संग कऽ देलक। अखनो धरि बेगूसराय जिलाक बारह गाम चक्रवार लोकनि पसरल छथि आर अपन प्राचीन इतिहासक अध्ययनसँ गौरवांवित होइत छथि। चक्रवार कालमे बेगूसरायक महत्व काफी बढ़ि गेल छल आर एकर प्रमाण हमरा कम्पनी रेकार्डससँ भेटैत अछि।
vi. नरहनक द्रोणवार वंश :- द्रोणवार लोकनिकेँ छथि, कहाँसँ एलाह आर कोना अहिठाम अपन राज्यक स्थापना केलन्हि अथक परिश्रमक बाबजूदो हमारा कोनो ठोस सामग्री जुटेबामे समर्थ नहि भेलहुँ अछि। ईलोकनि पश्चिमसँ एलाह आर एक परम्पराक अनुसार कन्नौजसँ। जँ अहि परम्परामे विश्वास कैल जाइक तखन तँ हमरा बुझि पड़इयै जे कोलाञ्चसँ ब्राह्मण लोकनिकेँ बजाकेँ जे दान देल जाइत छल ताहिकालक ओहिमहक कोनो शाखा द्रोणवारक पूर्वज रहल हेथिन्ह। पंचोभ ताम्रपत्र अभिलेखसँ स्पष्ट अछि जे 13म शताब्दी धरि कोलाञ्च ब्राह्मणकेँ आमंत्रित कए दान देल जाइत छलन्हि। द्रोणवार परम्परामे कहल जाइत अछि जे कन्नौज से जे द्रोणवारक शाखा तिरहूत अवइत छल ताहिमे सँ किछु गोटए बाटहिमे गाजीपुरमे रूकि गेलाह। कहल जाइत अछि जे तिरहूतमे ‘द्रोणवार’ लोकनि ‘द्रोणडीह’सँ आएल छथि। दोसर परम्पराक अनुसार हिमालयक तलहट्टीमे द्रोणसागर नामक कोनो ताल अछि जकर चारूकात बहुत रास ब्राह्मण बसैत छलाह आर तैं ई लोकनि द्रोणवार कहौलन्हि। रेलवे बोर्ड द्वारा प्रकाशित ‘तीर्थाटन – प्रदीपिका’ नामक पोथीमे काशीपुर द्रोणसागरक वर्णन अछि। पाण्डव लोकनि अपन गुरू द्रोणाचार्यक हेतु ‘द्रोणसागर’क निर्माण केने छलाह।
सरैसा परगन्नाक द्रोणवारक ओतए जे मैथिल पंडितक लिखल हस्तलेख सब अछि ताहिमे ओ लोकनि द्रोणवारक हेतु ‘द्रोणवंशोद्भव’ शब्दक व्यवहार कएने छथि। द्रोणवार लोकनि अपनाकेँ द्रोणक वंशज कहैत छथि आर पश्चिमक वासी सेहो। मुसलमानी उपद्रव बढ़लाक बाद ई लोकनि अपन मूलस्थानसँ भगलाह आर ओहि क्रममे एक शाखा तिरहूतमे आबिकेँ बसलाह। विद्यापति अपन लिखनावलीमे द्रोणवार पुरादित्यक उल्लेख केने छथि जिनक राज्य नेपालक तराईमे छल आर जाहिठाम विद्यापति लखिमाकेँ लऽ कए प्रश्रय लेने छलाह। परमेश्वर झाक अनुसार शिवसिंह रानिपासक सब स्त्रीवर्गकेँ विद्यापति ठाकुरक संग कए नेपालक तराईमे रजा बनौली गाम सप्तरी परगन्नाक अधिपति निजमित्र पुरादित्य नामक द्रोनवंशीय द्रोणवार राजाक शरणमे पठौलन्हि। पुरादित्य द्रोणवार हुनका सबहिक सम्मानपूर्वक रक्षा केलन्हि। एहिसँ स्पष्ट अछि जे ओइनवार वंशक शिवसिंह आर द्रोणवार वंशक पुरादित्यक मध्य घनिष्ट मित्रता छल। अहिठाम विद्यापति लिखनावली लिखलैन्ह आर भागवतक प्रतिलिपि सेहो तैयार केलन्हि।
द्रोणवारक बस्ती देवकुलीक सम्बन्धमे परमेश्वर झा लिखैत छथि जे तेसर देवकुली मुजफ्फरपुर जिलामे शिवहर राजधानीसँ एक कोस पूर्व सीतामढ़ी सड़कसँ दक्षिण भागमे अछि, ताहिमे एक बहुत खाधिमे एक शिवलिंग भुवनेश्वर नामक छथि आर एहि गामक विषयमे बहुत रास पुरान कर्थापकथन अछि जाहिमे कौरव पाण्डवक उल्लेख सेहो अबैछ। संभवजे ई देवकुली द्रोणवारक मूल स्थान रहल हो आर एतहिसँ ओ लोकनि चारूकात पसरल होथि। द्रोणवारक संघर्ष बौद्ध लोकनिसँ तिरहूतक सीमामे भेल छलन्हि से हमरा लोकनिकेँ विद्यापतिसँ ज्ञात होइछ। एहिसँ इहो सिद्ध होइछ जे द्रोणवार लोकनि सेहो मिथिलाक उत्तरांचलमे प्रबल शक्तिक रूपमे विराजमान छलाह आर मैथिल ब्राह्मणहि जकाँ बौद्ध विरोधी सेहो छलाह। आन द्रोणवार वंशक एहेन प्रमाण आर कहाँ भेटैत अछि। द्रोणवार लोकनि मूलरूपेण तिरहूतक अंशमे प्राचीन कालमे रहल हेताह आर नेपालक तराई धरि अपन राज्यक विस्तार केने होथिसे संभव।
द्रोणवार परम्परा एकटा कथा इहो अछि जे बुद्धक देहावसान भेलापर जखन हुनक अस्थि वितरण होइत छल तखन मिथिलामे द्रोण ब्राह्मण लोकनि हुनक अस्थि अनने छलाह। जँ ताहिकाल ‘द्रोणवार’ लोकनि मिथिलामे उपस्थित छलाह तखन तँ हमर तँ ई मत आरो पुष्ट होइछ जे द्रोणवार अहिठामक थिकाह आर मिथिलाक आन ब्राह्मण जकाँ हिनको उत्पत्ति तिरहूतेमे भेल छलन्हि। मात्र अस्थि संचय करबा लेल ओ द्रोण लोकनि ओतए दूरसँ एतए नहि आएल होएताह। काल क्रमेण ब्राह्मण कौलिक कार्यसँ अपनाकेँ फराक कऽ लेलापर ई लोकनि भूमिहार कऽ कोटिमे राखल गेल होथि से संभव।
एक दोसर परम्पराक अनुसार नेपाल दरबारसँ द्रोणवार लोकनिकेँ राजाक उपाधि भेटलन्हि आर हिनक शौर्यकेँ देखैत मकमानी जिलाक भार हिनका लोकनिकेँ देल गेल छलन्हि। द्रोणवार राजा अभिमान राय प्रसिद्ध भेला आर मकमानीमे हिनक अधिपत्य छलन्हि आर ई लोकनि ‘पाण्डेय’ कहबैत छलाह। अभिमानक मृत्युक पश्चात् हुनक कर्मचारी लोकनि महारानीकेँ लऽ कए मिथिला प्रांतक दक्षिणी सीमापर स्थित बेलौंचे सुदई मूलक चक्रवार ब्राह्मणक राज्यमे पहुँचा देलन्हि। अभिमान रायक पुत्र छलाह गंग़ाराम। गंगाराम अहिवंशक सर्वप्रसिद्ध व्यक्ति भेल छथि आर हिनका सम्बन्धमे बहुत रास किवंदती अछि। चक्रवार राजा अपन कन्यासँ गंगारामक विवाह करौलन्हि। सार–बहनोईमे सामान्य बाताबाती भेलापर ओ राज्य छोड़ि देलन्हि आर अपन पत्नीकेँ संग लऽ कए ओतएसँ चलि देलन्हि। ससूरसँ सेनाक साहाय्य भेटलन्हि आर ओ सरैसा परगन्नामे अपन राज्यक स्थापना केलन्हि। सरैसा परगन्नाक “पुनाश” गाममे हिनक पूर्वज पहिने रहैत छलथिन्ह तैं सरैसा परगन्नामे राज्य स्थापनाक निर्णय ई केलन्हि। ताहि दिनमे ओहि सब क्षेत्रपर मुसलमानक आधिपत्य छल। ताजखाँ (ताजपुरक संस्थापक) आर सुल्तानखाँ (सुल्तानपुरक संस्थापक)केँ मारि ई मोरवामे अपन राजधानी बनौलन्हि। सरैसा परगन्ना नरहनसँ जन्दाहा धरि करीब ४०मील नाम अछि आर पो खरैरासँ सुल्तानपुर घाट धरि करीब २०मील चाकर अछि। हिनक एक विवाह मैथिल ब्राह्मण परिवारमे सेहो छलन्हि। पहिल पत्नीक नाम भागरानी आर दोसराक नाम मुक्तारानी छलन्हि। हिनक दुनुरानी मोरवा गढ़मे सती भेलथिन्ह।
भागरानीसँ उत्पन्न पुत्र भेला राय बड्ड प्रतापी भेलाह। भेला राय मोरवा सुल्तानपुरमे रहलाह आर मालाराय ‘वीरसिंह पुर–पोखरैरा’मे भेला रायक वंशज नरहनक पूर्वज भेलाह। अहिवंशक लोग बनारसक गद्दीपर छथि। भेला रायक पुत्र विक्रमादित्य रायकेँ सरैसा परगन्नाक ‘चौधराई’ भेटलन्हि। विक्रमादित्य राय बड़ा पराक्रमी छलाह। ई अपना नामपर ‘विक्रमपुर’ गाम बसौलन्हि। हिनक पुत्र हरेकृष्ण राय नरहनमे अपन दोसर राजधानी बनौलन्हि।– प्रधान राजधानी मोरवा आर दोसर नरहन। वंशवृक्षक अनुसार इतिहास एवं प्रकारे अछि–
द्रोणवार हरगोविन्द राय–
चौधरी केशवनारायण राय (सरैसा, भूषारी, नैपुर परगन्ना)
फतेह नारायण
अजीत नारायण
चित्र नारायण (इमाहपुर परगन्नाकेँ मिलौलन्हि)
अजीतन नारायण–सम्राटसँ हमका, सुरौली, लोमा, विझरौली, ननकार, लाखिराजक रूपमे हिनका भेटलन्हि
वैवाहिक सम्बन्ध टेकारीसँ छलन्हि
हिनक जेठपुत्र दिग्विजय नारायण बनारसक राजा बलबंत सिंहक बेटीसँ विवाह केलन्हि -
वारेन हेस्टिङ्गक मदतिसँ बलबंत सिंहक बाद चेतसिंह बनारसक गद्दीपर बैसलाह। जखन चेतसिंह वारेन हेस्टिङ्गसँ पराजित भेलाह आर बनारसक राजगद्दी खाली भेल तखन नरहनक अजीत नारायणक पौत्र आर दिग्विजय नारायणक पुत्र वारेन हेस्टिङ्गक अनुमतिसँ बनारसक गद्दीपर बैसलाह। हुनक नाम छलन्हि राजा महीप सिह आर ई सालाना ३८ लाख टाका वारेन हेस्टिङ्गकेँ देबाक वचन देलथिन्ह। तहियासँ बनारसक गद्दीपर हिनके वंशज शासन कै रहल अछि।
महीप सिंह
उदित सिंह
ईश्वरी प्रसाद सिंह
प्रभुनारायण सिंह
आदित्य नारायण सिंह
दिग्विजयक भ्राता अरहन स्टेटक मालिक भेला। महाराज दरभंगाक जे नवाबक संग कन्दर्पी घाटक लड़ाई भेल छल ताहिमे सर्वजीत सिंह नरेन्द्र सिंहक दिस छलाह। हुनक भाए उमराव सिंह नरहनक सैनिकक नेतृत्व करैत छलाह आर एकर विवरण हमरा लाल कविसँ भेटैत अछि। नरेन्द्र सिंह प्रसन्न भए हिनका दुनु भाईकेँ पुरस्कृत करए चाहैत छलथिन्ह मुदा ओ लोकनि पुरस्कार लेबासँ नकारि गेलाह तथापि फरकिया परगन्नामे हिनका लोकनिकेँ किछु गाँव भेटलन्हि। दरभंगा राज परिवारमे एहि हेतु नरहन राज परिवारक बड्ड सम्मान छलैक। हिनका लोकनिमे एतेक नीक सम्बन्ध छल जे महाराज प्रताप सिंहक समयमे जखन नवाबक दबाब बढ़ल तँ प्रताप सिंह अपन परिवारकेँ नरहन पठा देलन्हि आर अपने बेतिया च गेलाह। रामेश्वर सिंह धरि ई सम्बन्ध ओहिना बनल छल।
सर्वजीत
रणजीत
रूपनारायण
परमेश्वरी प्रसाद सिंह
नरहन दरबारमे चित्रधर मिश्र आर चंदा झा सन प्रसिद्ध विद्वानकेँ प्रश्रय भेटल छलन्हि आर महामहोपाध्याय गंगानाथ झासँ सेहो हिनका लोकनिक बढ़िया सम्बन्ध छल। रामनारायणक सम्बन्ध नेपालक जंगबहादुर शाहसँ सेहो छल कारण दुनु गोटएकेँ सोनपुर मेलामे नेट भेल छलन्हि। रामनारायण नेपालो गेल छलाह।
vii. बेतिया राज्यक इतिहास :- सोलहम शताब्दीक उतरार्द्धमे स्थापना भेल। गज सिंहकेँ शाहजहाँसँ राजाक पदवी भेटल छलन्हि। ई मिथिलाक राजा महिनाथ ठाकुरक समकालीन छलाह आर हुनका समयमे दुनुक बीच मनमुटाव आर खटपट सेहो भेल छल। मुगल साम्राज्यक कमजोर भेलापर उत्तर बिहारक सबटा राज्य स्वतंत्र हेबाक प्रयासमे लागि गेल छल आर बेतिया राज एकर कोनो अपवाद नहि कहल जा सकइयै। १७२९मे अलीवर्दी बेतिया राज्यपर आक्रमण कए ओकरा अपना अधीन केने छलाह। १७४८मे बेतियाक राजा लोकनि दरभंगा अफगानक संग मित्रता केलन्हि। दरभंगा अफगान अलीवर्दीक सेना द्वारा पराजित भेला। दरभंगा अफगानकेँ बेतियाक राजा सब बरोबरि मदति करैत रहैथ। अलीवर्दीक बाद पुनः बेतिया अपन स्वतंत्रता घोषित कए लेलक आर अंग्रेजी सत्ताक विरूद्ध ताधरि बनल रहल जाधरि कि १७५९मे अंग्रेजी सेनाक आक्रमण बेतियापर भेल। मीरजाफरक पुत्र मीरन अंग्रेजी सेनाक संग १७६०मे बेतियापर धावा मारलक आर बेतियाक स्वतंत्रता पुनः समाप्त भऽ गेल। १९६२मे मीरकासीम बेतियाक विरूद्ध सेना पठौलन्हि आर बेतियापर अपन अधिकार जमौलन्हि।
१७६६मे राबर्ट बेकरक प्रयाससँ बेतियामे अंग्रेजी सत्ताक स्थापना संभव भऽ सकल। १७६२मे ओहिठाम जुगल केश्वर सिंह राजा छलाह। हुनका पुनः इस्ट इण्डिया कम्पनीसँ झंझट भेलन्हि कारण बहुतो दिनसँ बेतियापर करक बकिऔता खसल छलैक। करदेबाक बजाय बेतियाक राजा अंग्रेजी सेनासँ युद्ध करब उचित आर सम्मानीय बुझलैथ आर युद्धमे परास्त भेला उत्तर ओ भागिकेँ बुन्देलखंड चल गेला आर कम्पनी हुनक राज्यकेँ अपना अधीन कऽ लेलक। बादमे जखन राज्यक स्थिति अंग्रेजक बुते नहि सुधरलैक तखन अंग्रेज पुनः जुगलकेश्वर सिंहसँ वार्त्ता शुरू केलक आर हुनका घुरबाक लेल अनुरोध केलक। अंग्रेज जुगलकेश्वर सिंहकेँ मझवा आर सिमरौन परगन्ना सेहो देलक आर बाँकि क्षेत्रकेँ गजसिंहक पौत्र आर पितिऔत श्री किशुन सिंह आर अवधुत सिंहमे बाँटि देलक। उएह लोकनि बादमे क्रमशः शिवहर (मुजफ्फरपुर) आर मधुबन (चम्पारण) राज्यक संस्थापक होइत गेलाह।
१७९१ जुगलकेश्वर सिंहक पुत्र वीरकेश्वर सिंहक संग कम्पनीक समझौता भेल आर वीरकेश्वरक नेतृत्वमे बेतिया राज्यक स्थिति सुदृढ़ भेल। कम्पनी आर नेपालक बीच जे युद्ध भेल ताहिमे वीरकेश्वर सिंह सक्रिय भाग लेलन्हि। १८१६मे आनन्दकेश्वर सिंह रजा भेला आर लार्ड विलियम बेरन्हिङ्गसँ हुनका महाराज बहादुरक पदवी भेटलन्हि। एकर कारण ई छल जे ओ अंग्रेजकेँ बड्ड मदति केने छलाह। हुनका बाद नवलकेश्वर सिंह राजा भेलाह आर १८५५मे राजेन्द्र केश्वर सिंह। सिपाही विद्रोहक अवसरपर ई अंग्रेजक अपूर्व सहायता केने छलाह। हुनका आर हुनक पुत्र हरेन्द्र केश्वरकेँ महाराज बहादुरक पदवी अंग्रेजसँ भेटल छलन्हि। १८९३मे हरेन्द्रकेश्वरकेँ के.सी.आई.ईक पदवी सेहो भेटलन्हि।
बेतियाक शासक लोकनि भूमिहार ब्राह्मण छलाह। ई लोकनि अपना राज्यकालमे नीक अस्पताल आर पुस्तकालय बनौने छलाह। ई लोकनि साहित्य प्रेमी सेहो छलाह। हिनका लोकनिक दरबारमे कवि आर कलाकारक बड्ड आदर छल। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आर राजा शिवप्रसाद सितारे हिन्दकेँ हिनका लोकनिक ओतएसँ बरोबरि सहायता भेटैत छलन्हि। ओना तँ बेतिया राज बड्ड प्राचीन मानल गेल अछि मुदा एकरा सम्बन्धमे अखन सब बात स्पष्ट नहि भसकल अछि। बेतिया राजक वंशावली एवं प्रकारे अछि।
बेतिया राजक वंशावली
गंगेश्वर देव
मकेश्वर देव
राजा देव
घानोराज
उदय करण राज, जदुराज
उग्रसेन
गज सिंह (राज सिंह ?)
दिलीप सिंह
पृथ्वी सिंह
सत्रजित सिंह
ध्रुवसिंह (बड्ड पैघ किला बनौने छलाह)
अपन बेटीक बेटा जुगल केश्वरकेँ कोरामे लेलन्हि। कारण हिनका पुत्र नहि छलन्हि।
शिवनाथ सिंह
जुगलकेश्वर सिंह
वीरकेश्वर सिंह
वीरकेश्वर सिंह
नवलकेश्वर सिंह
महेन्द्र केश्वर सिंह
आनन्दकेश्वर सिंह
राजेन्द्र केश्वर सिंह
हरेन्द्र केश्वर सिंह
(महारानी शिवरतन–महारानी जानकी कुवँर)
= भूमिहार ब्राह्मणक ईवंश अपनाकेँ बड्ड प्राचीन मनैत छथि। हिनका लोकनिक वैवाहिक सम्बन्ध बनारस राज्यसँ सेहो अछि। कामेश्वर वंश जकाँ इहो लोकनि अपनाकेँ सुगौनासँ जोड़ैत छथि मुदा एतिहासिक तत्वक अभावमे अखन किछु कहब असंभव। बेतियाक वर्णन १७८६मे वर्णन १७८६मे प्रकाशित गजेटियरमे भेटैत अछि। १७८६मे अहिठाम ईशाई मिशनक एकटा शाखा छल।
* छोट छिन्ह राज्य सभहिक विवरण :- शिवहरक स्थापना बेतिया राज्यक शाखासँ भेल छल। सुरसंड राज्य सेहो भूमिहार ब्राह्मण वंशक राज्य जकर स्थापना महाराज प्रताप सिंह (दरभंगा)क समयमे भेल। एहिमे सर्वाधिक प्रसिद्ध व्यक्ति चन्द्रेश्वर प्रसाद नारायण सिंह भेल छथि जे नेपाल क्रांति (१९५०)क समयमे भारतक राजदूत रहल छलाह। बनैली राज्यक शाखाक रूपमे श्रीनगर राज्य श्रीनगरक स्थापना भेल अछि। रूद्रानंद सिंह अपन पुत्र श्रीनन्दन सिंहक नामपर श्रीनगरक स्थापना केने छलाह श्रीनन्दन सिंहक तीन पुत्र नित्यानंद सिंह, कमलानंद सिंह आर कालिकानंद सिंह भेला। कमलानंद सिंह साहित्य सेवी छलाह आर हिन्दीक प्रगतिक हेतु लाखो टाका खर्च केने छलाह। ‘साहित्य सरोज’, ‘अभिनव भोज’, ‘कलियुगी हरिश्चन्द्र’, ‘कलिकर्ण’ आदि उपाधिसँ ई विभूषित छलाह। हिनके पुत्र भेल थिन्ह कुमार गंगानन्द सिंह जे मैथिली हिन्दी अंग्रेजी आर प्राचीन भारतीय इतिहासक प्रकाण्ड पण्डित छलाह। कालिकानंद सिंह आर गंगानंदक पुस्तकालय दर्शनीय छल। पुर्णियाँमे राजा पृथ्वी चन्द लालक राज्य सेहो प्रख्यात छल। छोट–मोट मुसलमान राज्यक संख्या सेहो ओतए बड्ड अछि। पुर्णियाँमे क्षत्रिय लोकनिक रजबारा सेहो छल जाहिमे सौरिया राज्यक इतिहास प्रसिद्ध अछि। मुसलमानी राज्यमे खगड़ाक मुसलमानी राज्य प्रसिद्ध छल।

