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वि दे ह 

प्रथमे मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृतामे्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य

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(c)२००४-१४.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नामे नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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जगदानन्द झा मनु’- ग्राम पोस्ट हरिपुर डीहटोल, मधुबनी 

  

अनमोल झा जीक पोथी “टेकनोलजी”क समीक्षा

 

मिथिला संस्कृतिक परिषद, कोलकत्ता द्वारा प्रकाशित श्री अनमोल झा जीक लघुकथा संग्रह “टेकनोलजी” एखन हमरा हाथेमे अछि। पाँछाक तीन दिनसँ लगातार एकरा पढ़ि रहल छी। सुन्नर कवर पेंजसँ सजल तेहने भीतरक कथा सभ एकसँ एक उपरा उपरी।

सबसँ पहिने अनमोल जीकेँ एहि --- कथा संग्रह हेतु बहुत बहुत बधाइ आ संगे संग मंगल कामना जे मैथिली साहित्यमे दिनो दिन ओ शुक्ल पक्षक चाँन जकाँ उदयमान होइत रहथि।

मिथिलांचल टुडे टीमक तरफसँ हमरा एहि पोथीक समीक्षा केर दायित्व भेटल। हमरा लेल ई कठिन काज आ ओहूसँ बेसी कष्टकर छल बिना कोनो पक्ष बिपक्षमे गेने तटस्थ एहि पुस्तककेँ समीक्षा केनाइ। हमरामे कौशल आ शहास दुनूक अभाब मुदा माँ सरोस्वती आ गुरुदेवकेँ सुमिरैत अपन आँखिकेँ पोथीक पन्नापर आ कलमकेँ कागदपर चलबए लगलहुँ।

अनमोल जीक समर्पण देख मोन गदगद भए गेल। जतए आजुक नव पीढ़ी अपन माए बाबूकेँ बोझ बुझि रहल अछि ओहिठाम अनमोल जीक ई पोथी हुनक पूज्य बाबूजीक श्रीचरण कमलमे समर्पित अछि। नवका पीढ़ी लेल ई एकटा नव रस्ता काएम करत।

आगू पोथी पढ़ैसँ पहिने एकटा बात मोनकेँ कचोटलक, जे अनमोल जीक एहिसँ पहिने दूटा विहनि कथा संग्रह प्रकाशित भए चुकल अछि। हुनक नाम मैथिली साहित्यमे एकटा स्थापित विहनि कथाकारकेँ रूपमें लेल जा रहल अछि तकर बादो ओ अपन एहि नव विहनि कथा संग्रहकेँ, विहनि कथा संग्रह नहि कहि लघु कथा संग्रह कहि रहल छथि। जखन की आइ विहनि कथा एकटा स्थापित विधाकेँ रूपमे मैथिली साहित्यमे स्थापित भए चुकल अछि। विहनि कथा आब कोनो तरहक परिचय लेल मोहताज नहि अछि। श्री जगदीश प्रसाद मंडलजी अपन विहनि कथा संग्रहपर टैगौर पुरस्कार जीत कए दुनियाँक बड़का-बड़का भाषाकेँ एहि दिस सोचै लेल बिबस कए देलखिन्ह। अंग्रेजी एकरा seedseedseed”सीड स्टोरी” कहि सम्बोधित केलक। हिंदी अंग्रेजीमे जकर कोनो स्थान नहि ओहेन एकटा नव बिधाक अग्रज मैथिली साहित्य आ ओ बिधा, “विहनि कथा”।

विहनि कथा आ लघु कथामे बहुत फराक अछि। विहनि अर्थात बिया। बिया वटवृक्षकेँ सेहो भऽ सकैए आ सागक सेहो। तेनाहिते मोनक बिचारक बिया जे कोनो आकारमे फूटि सकैए, विहनि कथा। विहनि, बिया, सीडमे सँ केहन गाछ पुट्टै कोनो आकारक सीमा नहि। लघु कथा मने एकटा छोट कथा जेकर आरम्भ आ अन्त दुनू छैक।

अनमोल झा जीक एहि संग्रहक एक एकटा कथा जबरदस्त विहनि कथा अछि। तहन लघु कथाक जामा किएक ? हाँ, किछु गोट लघु कथाक श्रेणीक कथा सेहो अछि मुदा अल्प मात्रामे, जेना पृष्ट संख्या ७६ पर “बढ़ैत चलू”, ७९ पर “समाज”, ८० पर “मर्माहत”, ८२ पर “सपूत सब”, ८३ पर “शोध”, ८५ पर “प्रायश्चित”, ९० पर “बड़का लोक”, ९५ पर “समय समय केर बात” आ पृष्ट संख्या १०१ पर “अप्पन जकाँ"। पृष्ट संख्या ८८ पर “मिथिला राज्यक” तँ नहि विहनि कथा अछि आ नहि लघु कथा, एहिपर जँ कनीक आओर मेहनत कएल गेल रहथि तँ एकटा नीक आलेख अवश्य भए सकैत छल।

प्रकाशक, मिथिला सांस्कृतिक परिषद, कोलकत्ता केर मन्त्री श्री गंगाधर झाजी अपन प्रकाशकीयमे “लघु कथा"केँ एकटा नवीन विधा कहि सम्बोधित कए रहल छथि, एहिठाम जँ ओ विहनि कथा कहितथि तँ साइद उचितो रहितए मुदा लघु कथा आ नवीन विधा हास्यपद। हम एहि कथा संग्रहक कथाकेँ आँगाक  उल्लेखमे विहनि कथा कहि सम्बोधित करब।

“टेकनोलजी” विहनि कथा संग्रह रूपी मालामे कुल १५५ गोट विहनि कथा गाँथल गेल अछि। संग्रहक पहिले विहनि कथा “टेकनोलजी” एकरे नामपर संग्रहक नामकरण भेल अछि। अनुपम विहनि कथा, विहनि कथाक सबटा गुण कुटि-कुटि कए भरल अछि। जतेक प्रसंशा करी कम। एहि विहनिमे, कोना एकटा परदेशीया पुतहु अपन ससुरकेँ मात्र एहि द्वारे पाइ पठाबैक इक्षा रखैत छथि, जाहिसँ समाजमे हुनक नाम होइन। एहि द्वारे ओ नव टेकनोलजी बैंकिंगकेँ छोरि मनीआडर द्वारा पाइ पठबै छथि।

“टेकनोलजी” नाम धरी ई विहनि कथा संग्रह नामक भ्रम उत्पन्य कए रहल अछि। पहिल नजरिमे टेकनोलजी नामसँ एना बुझा रहल अछि जे विज्ञान, टेकनोलजी आदिसँ सम्बंधित विषय बस्तु होएत मुदा एहन कोनो गप्प नहि। समस्त पोथीमे एकसँ एक नीक, रुचिगर विहनि कथा अछि मुदा टेकनोलजी, विज्ञान, तकनीकीसँ सम्बंधित एकौटा नहि।

विहनि कथाक मुख्य अंग संबाद अछि आ अनमोल जीक विहनि कथा संबादसँ डूबल अछि, जबरदस्त ! मुदा संबाद “--------“ इनवरटेड कोमामे बन्द कए कऽ नहि लिखल अछि, एकर अभाब सम्पूर्ण पोथीमे अछि।

दोसर कमी जे हमरा सम्पूर्ण पोथीमे, कथासँ प्रकाशकीय तक लागल, विभक्ति। विभक्ति अप्पन पहिलुका आखरसँ हटा कए लिखल अछि जाहि कारण कतौ कतौ अर्थकेँ फरिछौंतमे असमंजसकेँ स्थिति उत्पन्न भऽ रहल अछि।

पृष्ट १३ पर लिखल विहनि कथा “टेकनोलजी” आ २७ पर लिखल “लोक बुझाउन” दुनू एक्के सन कथा थिक मात्र नामेटा बदलल अछि।

एहि संग्रहमे कोनो एहन पक्ष नहि जाहिपर अनमोल जीक कलम नहि चलल होइन। मनक भावसँ समाजकेँ बिडम्बना धरि, अन्तरंग अम्बन्धसँ हँसी ठठा धरि सभ पक्षक उचित स्थान देल गेल अछि। पृष्ट ३३ पर “ड्यूटी”, ३८ पर “चिन्ता (एक)”, ३९ पर “बेटा बेटी”, ४३ पर “दुख”, ४५ पर “खोराकी”, ४६ पर “गोहारि”, ५८ पर “भीख”, ६० पर “मोनमे”, ९८पर “अन्हरजाली”, १०१ पर “अप्पन जकाँ”, १०३पर “मनुक्ख के कुकुर के”, मनकेँ छुबैत करेजाकेँ मोम जकाँ गला कए आँखिक रस्तासँ  बाहर आबैक पर मजबूर कए कऽ मोनक कोनो कोनामे एकटा टीस छोरि दै छैक। ओतए पृष्ट संख्या ३२ पर “एकदम ठीक” आ ३७ पर “टास्क”  समाजक कुप्रथाकेँ देखार कए रहल अछि।

पृष्ट ३४ पर “सुरक्षित (एक)”, ४० पर “मन्त्र”, ७७ पर “आन्हर”, आ ८७ पर “व्यवस्था”, आजुक राजनीति आ व्यवस्थापर प्रहार करैत उत्तम विहनि कथा अछि। तँ दोसर दिस पृष्ट ३५ पर “जागरण”, ४२ पर “चेतना(एक)”, ४६ पर “विज्ञान”, आजुक जागरूक लोकक सत्य विहनि थिक। बाल मोनकेँ कागदपर उतारैत अनमोल जी एहि पोथीक पृष्ट ६५ पर “प्रश्न (दू)”, आ ६९ पर “चिन्तित”, वास्तबमे मोनकेँ चिन्तामे झोँकैक लेल प्रयाप्त अछि। ओतए ६३ पर “उत्तर” आ ७१ पर “भरम”केँ सवाल जबाव एहन अछि जेना शेरपर सबा शेर। सम्बन्धकेँ उजागर करैत पृष्ट ४८ पर “बुद्धू”, ६७ पर “महक”, आ ८१ पर “श्रधा” अछि तँ ३६ पर “सअख” आ ६० पर लिखल “युद्ध” पढ़ि हँसीसँ मुँह मुनेबे नहि करत। 

कनीक साहित्यक पक्षकेँ छोरिदि तँ कुल मिला कऽ नीक विहनि कथा संग्रह। पाठकक मोनमे शिक्षा संगे संग जिज्ञासा आ रूचि जगबैमे पूर्ण सफल। एक बेर किनको हाथमे ई पोथी आइब गेल तँ बिना पूरा पढ़ने चेन नहि|                                                                                                                                                                                                                                            


 

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