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खुशबू झा
हमरा नजरिमे सुजीतक रिपोर्टर डायरी
संस्मरणक किताब हम कएटा पढने छलहुँ मुदा रिपोर्टर डायरी पढयके हमर पहिल अनुभव रहल ।
रिपोर्टर डायरीमे कीसभ हेतैक एकर उत्सुक्ता छल ।एकरे कारण जखन हमरा रिपोर्टर डायरी
भेटल हम दु बैसानमे पढि लेलहुँ । पत्रकार सुजीतकुमार झाक पहिल कृती चिडै हम पढने
छलहुँ सँगहि हुनक एभि न्यूज टिभी, रेडियो मिथिला आ मिथिला डटकमक रिपोर्टिङ्ग सँ सेहो
परिचित छी । मुदा जे चीज रिपोर्टर डायरीमे भेटल एहि सँ पहिने हमरा हुनकामे देखबामे
नहि आएल छल । ४७ टा डायरी अर्थात लेखमे कोन बढियाँ वा कमजोर छुटियाब कठिन अछि । सभ
एक पर एक । फेर एहिमे सभ चीज भेटैत अछि । संस्मरण, रिपोर्टाज आ अहुँ सँ बेसी सभ
स्टोरीके हम कथे कहैत छीयैक । ला जबाब पिक्चराईज अछि । रिपोर्टर डायरी पढलाक बाद
लोक जनकपुर बुझि सकैत अछि । फेर पत्रकारक नजरिमे केहन जनकपुर अछि एकर स्पष्ट झलक
एहिमे भेटैत अछि । फेर बहुत रास समस्या सभ सेहो उठल अछि । जेना रस नहि गुल्लाक
रेकर्डमे बरियाती आ बेटी बलाक अवस्थाक बहुत बढियाँ जाका चित्रण भेल अछि । तहिना साज
विहीन स्वरसम्राट बेचनमे बेचनक अवस्था आ बेचनक मित्र उदित नारायण झा बिचक विकासक्रम
बढियाँ सँ कम शब्दमे कहल गेल अछि । बिबाह कार्डमे मैथिली भाषा आ ओ तऽ मैथिली बिटक
समाचारदाता छला ओहो लाजबाब अछि । जनकपुरक बिबाह कार्डसभमे कोना मैथिली लिखायके क्रम
शुरु भेल तहिना रहिकाक चुनचुन मिश्रक मैथिली प्रतिक समर्पण सेहो गजब सँ लिखाएल अछि
। चुनावक नाम पर पैसाक बहस नाम सँ चुनावमे भ्रष्टाचार कोन रुप सँ बढल अछि अहि सँ
बढियाँ चित्रण नहि भऽ सकैत अछि । एकटा पत्रकार कोन अवस्था सँ अपन पत्रकारीताक क्रममे
गुजरैत अछि तेकर गजब एहिठाम बानगी भेटैत अछि । घडीक सुइके केउ पकरि लेने छल ताहिमे
महिला पत्रकार उमा सिहंक हत्या दिनक लेख अछि । एहिमे लेखकके रेडियोमे कार्यक्रम
चलाबय जाइतकाल एकटा टेलिफोन अबैत अछि पत्रकार उमासिहंके आक्रमण भेलैक एहनमे ओ उमा
सिहंके सहयोग करय जाइथ वा कार्यक्रम चलाबय ओहि समयक द्वन्द बेजोर आएल अछि । तहिना
महासंघक चुनाव आ सुन्धराक आनन्दमे नेपालमे पत्रकारितामे पैसाक खेल कतेक बढिगेल अछि
तेकर सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत कएलगेल अछि । नेपालक पत्रकारितामे कतेक रास बिकृती आएल
अछि तेकरा रखैत एकटा निकास देबाक सेहो प्रयास कएलगेल अछि । सरल भाषामे लिखल सुजीतक
रिपोर्टर डायरी पढयमे आम पाठकके बहुत आसान हैत । फेर किताबक प्रिन्टीङ्ग तऽ एहन अछि
जे एक बेर देखिते रही लगैत अछि । किताबक प्रकाशक आफन्त नेपाल अहिके लेल धन्यबादक
पात्र छथि । सुजीत जी किताबमे लिखने छथि पहिल पुस्तक जँका अर्थात चिडै कथासंग्रह
जँका एकरा स्निेह भेटतैक आशा रखने छथि । पढलाक बाद हम ई कहि सकैत छी स्नेहके
आबश्यकता नहि छैक । नीक चीज छैक लोक पसिन कऽ रहल अछि । हमरा तऽ बहुत बेजोड लागल ।
मैथिली संसारमे एहन रचनासभक आबश्यकता अछि । खाली कथे कबिता नहि सभ तरहक चीज आबक चाही
। नयाँ चीज पाठकके नयाँ आनन्द दैत अछि ।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
