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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक   

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२०००-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

गजेन्द्र ठाकुर

शुनः शेपक मृत्युदण्ड वा बलि

 

इक्षवाकु वंशक वेधस राजाक पुत्र हरिश्चन्द्रक सए पत्नी

घरमे पर्वत आ नारद दूटा ऋषि रहैत छलन्हि

नारदक निर्देशपर वरुणसँ कहलन्हि- सन्तान दिअ,

सँ हम अहाँक यज्ञ कऽ सकी।

माने सन्तानक बलि?

 

रोहित नाम्ना पुत्रक जन्म भेल

वरुणसँ १० दिनक समय मांगलन्हि हरिश्चन्द्र।

फेर दाँत हेबा धरिक समय मांगलन्हि,

फेर दुद्धा दाँत खसबा धरिक समय मांगलन्हि।

फेर नव दाँत हेबा धरिक समय मांगलन्हि।

फेर ओकर शस्त्रधारी होएबा धरिक समय मांगलन्हि।

 

जखन रोहित भऽ गेल शस्त्रधारी

तखन रोहितकेँ कहलन्हि हरिश्चन्द्र वरुणक लेल यज्ञक

कबुलाक लेल ओकर बलि देबाक गप।

 

मुदा रोहित तीर-धनुष लऽ बोन दिश चलि गेलाह,

मना कऽ देलन्हि।

 

आ तकर एक बरख बाद वरुण हरिश्चन्द्रकेँ पकड़ि लेलन्हि

वरुण छथि जल-देवता,

आ फूलि गेलन्हि पेट हरिश्चन्द्रक।

 

घुरल इन्द्र पुरुषक रूपमे कहल

जे मनुष्यक बीचमे रहने नीक सेहो अधलाह भऽ जाइए।

 

विचर एक साल

विचरलासँ पएर फूलयुक्त हेतौ।

आत्मासँ फल बहार होइए आ ओ ओकरा काटैए

 

एक साल

भाग्य ठाढ़क ठाढ़

बैसलक बैसल

आ सूतलक सूतल

से विचर एक साल

 

कलि सूतल-पड़ल

द्वापर उड़ैत

आ त्रेता ठाढ़

से तोँ सत्य जेकाँ विचर एक साल

 

सूर्य विचरैत नै थाकैए

तोरा मधु आ उदुम्बरक मिठगर फल भेटतौ

विचर एक साल

 

सुयवश ऋषिक पुत्र अजीगर्तक परिवार

भूखल पत्नी

तीन पुत्र शुनःपुच्छ, शुनःशेप, शुनोलांगूल

बापक प्रिय शुनः पुच्छ आ माएक प्रिय शुनोलांगूल

 

से सए गाए दऽ

शुनःशेपकेँ कीनल

 

राजसूय यज्ञ भेल

होता रहथि विश्वामित्र

अध्वर्यु जमदग्नि

उद्गाता अयास्य

आ ब्रह्मा रहथि वशिष्ठ

 

से बलि बान्हत के?

 

एक सए गाए आर

मांगलक अजीगर्त

 

अग्निक आवाहन आ परिक्रमा

आब वध के करत?

 

एक सए गाए आर दिअ

मांगलक अजीगर्त

पिजबैत तरुआरि

 

शुनःशेप केलक

प्रजापतिक आवाहन

कहलनि ओ

जो अग्नि लग

 

अग्निक आवाहन शुनःशेप केलक

जो सविता लग

कहलनि ओ

सविता कहलनि

जो वरुण लग

वरुण खलनि

जो फेर अग्नि लग

अग्नि कहलनि

जो जो विश्वदेव लग

विश्वदेवक आवाहन शुनःशेप केलक

कहलनि ओ

जो इन्द्र लग

इन्द्रदेवक आवाहन शुनःशेप केलक

जो आश्विनौ लग

दुनू अश्विनक आवाहन शुनःशेप केलक

जो उषा लग

उषाक आवाहन शुनःशेप केलक

 

मंत्र पढ़ैत-पढ़ैत बन्धन खुजैत गेलै शुनःशेपक

 

इक्ष्वाकुक पेट ठीक भऽ गेल

फेर ओ ऋत्विज् भऽ यज्ञमे सम्मिलित भेल

 

विशेष विधि

“अंज सव” विधिसँ निकाललक सोमरस

आ राखलक ओकरा द्रोणकलशमे

फेर स्वाहा

फेर अन्तिम कृत्य

 

फेर शुनःशेप विश्वामित्रक कोरामे बैसि गेल

 

अजीगीर्त कहैत छथि- विश्वामित्र दिअ हमर पुत्र

विश्वामित्र कहै छथि- नै ई अछि आब देवरात विश्वामित्र

 

अजीगीर्त पुत्र शुनःशेप बाजल

आउ देखू

शुनःशेप कहैए- हे अजीगीर्त- तीन सए गाए हमरासँ पैघ?

 

विश्वामित्र कहै छथि- हे पुत्र मधुच्छन्दा

ऋषभ,

रेणु

अष्टक

शुनःशेप भेल अहाँ ज्येष्ठ

 

मधुच्छन्दाक पचासटा पैघ भाएकेँ ई नै पड़लन्हि पसिन्न

 

विश्वामित्र ओकरा सभकेँ देलन्हि त्यागि

 

आ आब त्याग करबाक समय आबि गेल अछि

भय केर त्याग, लोभ केर त्याग

भोजन केर त्याग

 

आ ग्रहण करबाक समय सेहो अछि

वएह जकरा कैएक बर्ख धरि राखने रही नुका कऽ, बझा कऽ

हाथ जोड़लौं, नै करू तंग हमरा, नै तँ बुझि जायत ई

बड्ड आदर करैए ई हमर

जँ ओकरा बुझि पड़तै जे अहाँ कऽ रहल छी हमर अपमान

तँ फेर ई हमरो गप नै मानत

अखन हम हाथ जोड़ने नेहोरा कऽ रहल छी

फेर अहाँ करब नेहोरा जखन ई शुरू करत नाराशंसी

अखन तँ एक्केटा खिस्सा सुनेलौं अछि

आ अहाँ कहै छी जे एकर ऐ मामिलासँ की छी सम्बन्ध

तँ फरिछा दइ छी ऐ सम्बन्धकेँ आइ।

 

शुनः शेपकेँ देल गेल रहै मृत्युदण्ड बा ई रहै बलि?

उत्तर दिअ, हम छी प्राश्निक आ अहाँकेँ सुना कऽ खिस्सा

परीक्षाक लेल तैयार केलौं अछि ई पहिल प्रश्न,

आ एकर उत्तर निर्धारित करत जे कतेक बुझनुक छी अहाँ

आ तखने हम अही खिस्सासँ नब प्रश्न पूछब

बा भऽ सकैए कोनो नब खिस्से सुना दी अहाँकेँ

जँ हमरा लागत जे ऐ खिस्सासँ नब प्रश्न पुछला सँ कोनो फाएदा नै।

शुनः शेपकेँ देल गेल रहै मृत्युदण्ड बा ई रहै बलि?

 

आ बाजब आस्ते, कारण ओ हमरा बड्ड मानैत अछि।

जँ कनियो ओकरा बूझि पड़तै अहाँक हमरा प्रति क्रूर आचरण

तँ ओ बर्दास्त नै कऽ सकत, हमरो रोकलापर नै रोकि सकत अपनकेँ।

तँ आस्तेसँ दिअ उत्तर- शुनः शेपकेँ देल गेल रहै मृत्युदण्ड बा ई रहै बलि?

(अनुवर्तते)

 

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