c)२००८-०९.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
(कार्यालय प्रयोग लेल)
विदेह:सदेह:१ (तिरहुता/ देवनागरी)क अपार सफलताक बाद
विदेह:सदेह:२ आ आगाँक अंक लेल वार्षिक/ द्विवार्षिक/ त्रिवार्षिक/
पंचवार्षिक/ आजीवन सद्स्यता अभियान।
ओहि बर्खमे प्रकाशित विदेह:सदेहक सभ अंक/ पुस्तिका पठाओल जाएत।
नीचाँक फॉर्म भरू:-
विदेह:सदेहक देवनागरी/ वा तिरहुताक सदस्यता चाही:
देवनागरी/ तिरहुता
सदस्यता चाही: ग्राहक बनू (कूरियर/ रजिस्टर्ड डाक खर्च सहित):-
एक बर्ख(२०१०ई.)::INDIAरु.२००/-NEPAL-(INR 600),
Abroad-(US$25)
दू बर्ख(२०१०-११ ई.):: INDIA रु.३५०/- NEPAL-(INR 1050),
Abroad-(US$50)
तीन बर्ख(२०१०-१२ ई.)::INDIA रु.५००/- NEPAL-(INR 1500),
Abroad-(US$75)
पाँच बर्ख(२०१०-१३ ई.)::७५०/- NEPAL-(INR 2250), Abroad-(US$125)
आजीवन(२००९ आ ओहिसँ आगाँक अंक)::रु.५०००/- NEPAL-(INR 15000),
Abroad-(US$750)
हमर नाम:
हमर पता:
हमर ई-मेल:
हमर फोन/मोबाइल नं.:
हम Cash/MO/DD/Cheque in favour of AJAY ARTS payable
at DELHI दऽ रहल छी।
वा हम राशि Account No.21360200000457 Account holder (distributor)'s
name: Ajay Arts,Delhi,
Bank: Bank of Baroda, Badli branch, Delhi क खातामे पठा रहल छी।
१.
रामभरोस
कापडि भ्रमर-गीत
२.
रमण
कुमार सिंह-
दिल्लीमे...
गीत
ओ पवन, झिहिर झिहिर बहैत जाउ
छूबि बताउ कने, पिया छथि कत्त ककरा संग
वर्षहु गेला भेलन्हि, सुधिबुधि किछु ने छैन !
दिन भेल पहाड, दुख भेल जीवनक अंग ।
निष्ठूर समाज चाहे, नोचि नोचि खाइ जेना
शेरक भूख बनल जवानीक तरंग जेना
चारुभर शिकारी ताकमे वैसल अछि
रहल ने कोनो उमंग !
ओ पबन, पिया छथि कत्त ककरा संग !!
अधिकारक बात सभ लागुने भेल कखनो
नारीक व्यथा कथा कमैनीक धंधा एखनो
जान जोखिम बनल कत्त धरि घींचब
त्यागब प्राण वियोगे कन्त !
ओ पवन, पिया छथि कत्त ककरा संग !!
जानि जानि आगिसं खेली कोना हम
शक्ति भरल मुदा तौली कोना हम
शील, सुशील मिथिलाकेर ललना
पतिक परोक्ष भेल शिथिल तरंग !
ओ पवन, पिया छथि कत्त, ककरा संग !!
!!!
गीत
बाध बोनसं उपर उठियौ
करियौ मनके चंगा
देश दुनियांके हाल ने जनबै
रहब सभ दिन उटंगा
अखनो अनके मुंह तकबै
कखनो ने भेटत जस,
पिया अहां रहलहुं जस के तस ।
ठीक नीक ने उठब–बैसब
कोना वुझबै जीवनक रंग
अप्पन काज सुतारत सदिखन
अहां चास वासमे दंग
भुच्चर बनि क� आंगन सेबने
जीवन तहस–नहस,
पिया अहां रहलहुं जस के तस !
बाल बच्चा टेल्गर होइते
पढएबै बोरडिंग नीके
पढ़तै लिखतै बढ़का बनतै
सभ किछु हयतै ठीके
सपना मनमे राखि हम जिलौं
भोगलहुं अहांक अजस,
पिआ अहां रहलहुं जस के तस !
अहांके बोली कोंढ़ कटैए
आबो करु अहां बस,
पिया रहलहुं जसके तस !
गीत
ऐ चन्दा अहां, खोजि पठाउ प्रिय कंत
अहींक इजोरियामे गेला निरमोहिया
बनल प्रतिक्षा अनन्त !
सजल सेज ओगरने सदिखन, हम बैसलि बौरायलि
अओताह हृदय लगओताह, मनहिमन अकुलायलि
राति–दिनकेर गणना विसरल
सुधि वुधि भेल उसरन्त !
ऐ चन्दा, अहां खोजि पठाउ प्रिय कन्त !!
लुच्चा पबन देह, छुबि–छुबि लसकए
काम मोचरुवा हिय, रहि रहि चसकए
ठाढ़स बान्ह भंग दुखदायी
शील, कुल केर अन्त,
ऐ चन्दा, अहां खोजि पठाउ प्रिय कंत !!
दुनियां बैरी आंखि गड़ौने, लप–लप जीह करैए
आनक चास खएबा अभ्यासी, हरिय घास तकैए
आबहुं जं अहां भेद नुकएलहुं
परतारब दिगदिगन्त ।
ऐ चन्दा, अहां खोजि पठाउ प्रिय कंत ।
अहींक इजोरियामे गेला निरमोहिया
बनल प्रतिक्षा अनन्त!!!
२
दिल्ली
मे...
सालो
भरि वसंत रहै छै दिल्ली मे
जे
चाही सब मोल बिकै छै दिल्ली मे
मेट्रो
-मल्टीप्लेक्स बने छै दिल्ली मे
डेग
-डेग पर लोक कनय छै दिल्ली मे
गाड़ी
बंगला कोठा सोफा दिल्ली मे
बाट
-बाट पर मौत के तोहफा दिल्ली मे
दारू
स्मैक गुटका खैनी दिल्ली मे
हरपल
भागम-भाग बेचैनी दिल्ली मे
नवका
-नवका बाट बनै छै दिल्ली मे
लोकतंत्र
के खाट खड़ा छै दिल्ली मे
नित
नव-नव बाजार बनै छै दिल्ली मे
माय
-बहिन के लाज लुटे छै दिल्ली मे
सालो
भर वसंत रहै छै दिल्ली मे
जे
चाही सब मोल बिके छै दिल्ली मे