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१.
इन्द्र भूषण
२.
राजेश
मोहन झा
इन्द्र भूषण
१.हमर नगरक
दास्तान
चहुँ ओर खामोशी छल,
पसरल रहै विराना।
ताल-तलैया लागे ओछाउन सन,
रहै कोसीक धार सिरहाना।
सब राति होए बदमाश सबहक आगमन,
गलि-कुची लागै बिया-बान सन।
होरी खेलए पड़ए कादोमे,
लागै दीवालियोक राति अन्हार सन।
मुदा हिम्मत नहि हारलक नगरक लोगसब,
भरोसा रहए सबक अपन-अपन बाँहि पर।
गमक बरियाति लऽ चलल खुशीक विवाह,
किएक तँ रहै ओकरा सभक उजड़ल चमन बसाएब।
चारूकात तटबंध बनल,
सलिका सँ शहर बसल,
विद्यालय,
महाविद्यालय,
कारागार,
न्यायालय,
भंडारगृह,
चिकित्सालय,
संचार केन्द्र व चित्रालय
सब निर्मित भेल।
ई शेष भारते नहि पुरा विश्व सँ जुटल,
आब एतऽ भेटैत अछि सुख-सुविधाक हर समान,
एकर अछि एक अपन पहचान।
जे क्यो राखत भरोसा अपना पर,
जी-तोड़ करत मेहनत,
कठिनाई सँ नहि डरत,
भरत सफलताक पैघ उड़ान,
बस यैह कहैत अछि,
हमर नगरक
दास्तान-
२.“एना
किएक होइत अछि?”
जखन करऽ चाहै छी काज कोनो ओहन
जकरा उपमा भेटै
आकाश सँ तारा तोरनाइ जैसन
एक-एक टा डेग उठाबै छी सम्हारि कऽ
उपर चढ़ि जाएत छी कतेको पायदान तक
तखन आबैए एकटा झौंका बिहाड़िक
उड़ा लऽ जाए नींव हमर अरमानक
बाँचल अछि जे किछु आशाक तिनका
सेहो बिखड़ले सन लगैत अछि
एना किएक होइत अछि
?
कतेको बरख बित गेल
हम सपना देखनाइ छोड़ि देलउँ
जँ देखबो करब तँ,
कथुक?
हमर जिनगीमे
एहन कोन हसीन पल बीतल
मुदा तैयो जँ भूलोसँ
कौखन कोनो ख्वाब आबी तँ
ख्वाब शुरू भेल नहि कि
नेत्र खुजि जाइत अछि
एना किएक होइत अछि
??
सौचैत छी
नव दिनक शुरूआत
नव उत्साह सँ करब
सदिखन नव आशाक संग चलब
मुदा पुरनके दिनमे
एक गोट नव निराशा
सोझामे आबि जाइत अछि
एना किएक होइत अछि
???
२.
राजेश मोहन झा
पलायन
प्रश्न- औ बावू अहाँ कतए रहैत छी?
उत्तर- भरैए पोख जतए ओतए रहैत छी।
प्रश्न- ओ कोन ठाम अछि, कोन देश अछि
की भाषा अछि की भेष अछि?
उत्तर- ने कोनो परिचए नहि किछु पहिचान
आन देश थिक भाषा आन
देशक नाम सौराष्ट्र जुनि बूझव सौराठ
कतेक राज लाठी नेने
करैत छथि अपन मोनक राज
लोकक व्यथासँ हुनका नहि मतलव
मानवतासँ नहि किछु काज
प्रश्न- किए गेलहुँ परदेशी भेलहुँ
छोड़ि कऽ अपन माटि- ई मिथिला
उत्तर- नहि काज भेटैए नहि पेट भरैए
मिथिला आव बनि गेली शिथिला
प्रश्न- शस्य श्यामला धटा अछि अपन
खूब मेहनति करू खूब उपजाऊ
उत्तर- सभटा सुन्न कए देलनि अछि कोशी
ककर सेवा करू की उपजाऊ?
बेश तँ जाइत जाऊ छोड़ कऽ गाम
निर्णए- मुदा! नहि विसरव अपन भाखा
अपन ठाम आ अपन गाम।।।
