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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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नन्द विलास राय

स्वाभिमान- बीहनि कथा

डॉ. पंकजक बेटाक बिआहक काल्हि बहुभोज छल। आइ भोरेसँ सर-कुटुम आ धी-स्वासीन सभ अपन-अपन गामक बाट पकड़लैन। कनियाँक संगे जे लोकनियाँ सभ आएल रहैथ ओहो सभ अपन-अपन फटफटियापर चढ़ि गाम जाइ गेला।

दिनक चारि बजे-बेरुका पहर। डॉ. पंकज अपन पत्नी- अलकासँ कहलखिन-

कनी नीक कॉफी पिआउ। बड़ थकान बुझाइत अछि।

कनियेँ कालक बाद अलका दू कप कॉफी नेने पति लग एली। एकटा कप पतिक हाथमे देली आ दोसर कप अपने हाथमे लेली। दुनू पति-पत्नी बैस कऽ कॉफी पीबए लगली। कॉफी पीबैत डॉ. पंकज बजला-

सभ सर-कुटुम तँ एला मुदा वीणा दैया आ ओकर दुल्हा नै एला। कहू तँ हमरा बेटाक बिआह फेरसँ हएत..!”

तैपर पत्नी अलका कहलकैन-

वीणा दैयाक बेटीक बिआहमे अहाँ आकि हमहीं गेल रहिऐ जे ओ सभ अबितए।

डॉ. पंकज बजला-

हमरा समय नै भेटल तँए नै गेलौं मुदा नौत पुराइ एगारह साए टका तँ पठाइये देने रहिऐ।

तैपर पत्नी अलका कहलकैन-

ओहो सभ अहाँक बेटाक बिआहमे बाइस साए टका पठा देलखुन हेन। की बुझै छिऐ ओ सभ गरीब अछि तँ दौड़ले औत। यौ सभकेँ अपन स्वाभिमान छइ।

तैपर डॉ. पंकज किछु ने बजला, मुदा हुनका मनमे भेलैन जे भगिनीक बिआहमे नै गेलौं से हमरा सन नीक नै भेल।

 

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