वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.
Read in your own script
Roman(Eng) ગુજરાતી বাংগ্লা ଓଡ଼ିଆ ਗੁਰਮੁਖੀ తెలుగు தமிழ் ಕನ್ನಡ മലയാളം हिन्दी
१.
मो. गुल हसन-सभटा चौपट्ट भऽ
गेल २.
मनोज कुमार मंडल-बहीन३.कल्पना शरण-मिथिलाक तीला
संकराति
१
मो. गुल हसन,
आई. कॉम,
जन्म
तिथि- 5. 01. 1964
ई.,
पिता- अब्दुल
रशीद भरहुम,
ग्राम,
पोस्ट-
बेरमा,
जिला- मधुबनी
सभटा चौपट्ट भऽ गेल
बड़ मेहनतसँ खेती कएलहुँ
नीक-नीक धानक बीया लगेलहुँ
गोबर-छाउरकसँ खेत भरि हम
कादो कए हम धान लगेलहुँ
मुदा नहि जानि विधना कि लिखि देल....
की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल।
धानक शान कहल नइ जाइ छल
हरियर कंचन धान लगै छल
तुलसी फूल-बासमतिसँ
गम-गम करैत हमर खेत भरल छल
मुदा, बाढ़िक चपेटमे सभ चल गेल
की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल
कमला तँ मानि गेली
मुदा, कोशी बिगड़ल छल
आ भुतहीकेँ तँ बाते नहि करु
जेना सोझहे ओ उलटल छल
नहरक पानि आ वर्षा मिलि
दुनू खेलल ऐहन खेल
की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल
सरकारक अभियान चलल
नेता सभ केलनि पहल...
एक हजार रुपैआ आ एक क्वीन्टल अनाज
देव से सुनि मनमे राहत तँ जरुर भेटल,
मुदा हे, अढ़ाइये सए रुपैआ पचीसे किलो चाउर
एतनेपर ओहो ब्रेक लागि गेल
की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल
लिखैत ई बात गुल हसन कहैए की कहुँ भाय.....
आब हमरा किछु नहि फुरैए...
किऐक तँ हेँ
केलहा-धेलहा तँ सभटा पानिमे चल गेल
की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल।
२
मनोज कुमार मंडल
पिता- श्री भगवान दत्त मंडल
श्ौक्षणिक योग्यता- ग्राम, पोस्ट- बेरमा
बहीन
जखन बहीन अहि घर जनम लेल,
लार-प्यार व स्नेहक बरखा केलहुँ
स्नेहक पुतला बना हम हृदयक मंदिरमे बैठाउल
जखन स्नेह यौवन छूलक
दुनियाँ कहैछ जाइछथि ई
हम पुछलहुँ की कहैत छी?
सबहक बहीन जाइ छाथि।
आँखिमे पानि व्यथित हृदयसँ
हम बाजल- ‘जो बहिन तू अपन घर,
जतए खुशीसँ भरल बाग होउ
दुखक छाँह तोरा नहि भेटउ
स्नेहक जतए राज होउ,
कहैत-कहैत आँखिसँ गिरल
पानिक दू गोट बून्न
लोक सहृदए कहलक- ‘भुलि जाओ अहाँ
हम पुछलहुँ की कहैत छी?
सबहक बहीन जाइ छथि।
महिना बीतल, बरखक बरख बीतल
हमहुँ जेना भुलि जेँका गलहुँ
नव बन्धनमे बान्द्धि हम
मायामे समाए गेलहुँ
जखन कहियो मन परल पुरने स्नेह उमैर परल,
स्नेहक मोटरी बानिह पहुँचलहुँ
लोग कहलक- ‘भुलि जाओ अहाँ
हम पुछलहुँ की कहैत छी?
सबहक बहीन जाइ छथि।
डोली लागल बरात साजल छल,
सबहक आँखि नोरसँ भरल छल
पग भारी छल,
आगू डोली, पाछु बरात छल
हम पुछलहुँ केहन ई उत्सव?
सभ कहलक- भूहल जाओ अहाँ
हम.......
३
कल्पना शरण
मिथिलाक तीला संकराति
भाेरहरबामे नहायक छल याेग
घूर तापैत चुड़लायक भाेग
माय बाप सऽ तील बहबाक
बात कऽ लेल स्वाद तीलबाक
सप्ताह भरि सऽ तैयारी रहल
घरमे साेन्हगर गंध छल भरल
सूर्य मकर राशिमे प््रावेश लेल
सालक प््राारम्भ पाबनि सऽ भेल
दिनमे भेल खिचड़ीक महाभाेज
अन्न दान लेल पंडितक खाेज
पकवानक ढ़ेर भेल जहन राति
इर् छल मिथिलाक तीला संकराति

