logo logo  

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य  

India Flag Nepal Flag

 

 

(c)२००४-१२.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

Read in your own script

Roman(Eng) ગુજરાતી বাংগ্লা ଓଡ଼ିଆ ਗੁਰਮੁਖੀ తెలుగు தமிழ் ಕನ್ನಡ മലയാളം हिन्दी

 

 

१.प्रो. राजकुमार नीलकंठ २.राजदेव मण्‍डल

प्रो. राजकुमार नीलकंठ

अवकाश प्राप्‍त प्रोफेसर

हि‍न्‍दी वि‍भाग

ि‍नर्मली महावि‍द्यालय, ि‍नर्मली।

गाम- बेलही

जि‍ला- सुपौल।

 

कवि‍ता-

स्रष्‍टा

 

अहाँ

जतऽ कतहु जनमलहु

अपनहि‍ शवकेँ

गुरू-चरण तर दबाए

ऊर्जित-उत्तनि‍त यष्‍टि‍

अानत मुख, नमि‍त दृष्‍टि‍

ठाढ़ रहलहु एक ि‍नर्मम प्रश्नवाचक।

आ, फेरसँ

शून्‍यमे पसरि‍ गेल

दि‍गस्‍तत्‍व–सहस्र-दल

नव रङे रंजि‍त

नव नामे संज्ञि‍त,

 

अहाँक सर्प-यज्ञमे

देशसँ, देशान्‍तरसँ

ससरि‍-ससरि‍, छि‍हुलि‍-छि‍हुलि‍

आयब अनि‍वार्य भेल

होयब अनि‍वार्य भेल अनर्थकेँ अहाँसँ

उत्‍तरि‍त अहाँसँ

अन्‍तत: अहाँसँ अमुक्‍त।

ठाढ़ रहलहु अहाँ

तोड़लहु तँ कि‍छु नहि‍

टूटि‍ गेल सभ अपनहि‍-आप

अपनहि‍ अनुत्तरक नागफणि‍ वनमे

लोटि‍-अरूछा कऽ,

जोड़लहु तँ कि‍छु नहि‍

सभ जुटि‍ गेल अपनहि‍-आप

अपनहि‍ ववर्तसँ

अपनहि‍ नाङरि‍क पाछाँ-पाछाँ धावि‍त।

अहाँक होयब मात्रसँ

नग्रता भेल पूर्ण।

अहींक दृष्‍टि‍-आवरणसँ पुन:

छँपि‍ गेल सम्‍पूर्ण।

 

एक तीक्ष्‍ण अटकनपर

चि‍तकाबर केचुआ उतारि‍

ससरि‍ गेल शंकि‍त ओ-

 

अनि‍र्वचनीय वृद्ध अजगर

स्‍यात् कोनो अन्‍य घाटीक खोजमे

शापि‍त करए सुख-मग्र तृरीति‍या।

 

साभार- मि‍थि‍ला मि‍हि‍र, जून, 1969ईं.

 

राजदेव मण्‍डलक कवि‍ता-

कुहेस

 

कतौ ने कि‍छु बचल अछि‍ शेष

चारूभर पसरल कुहेस

कठुआ गेल देह भीजल अछि‍ केश

अधभि‍ज्‍जू सन भेल सभटा भेष

घुरि‍या रहल छी ठामहि‍-ठाम

 

कि‍यो ने दैत अछि‍ समैपर काम

 

टूटल जा रहल सभ आस

 

ऊपरसँ लगि‍ गेल दि‍शाँस

 

कुहेस आर भऽ गेल सघन

 

इजोत लगैत अछि‍ टीका सन

 

खेत-खरि‍हान, घर जंगल-झाड़

 

सभटाकेँ घोंटि‍ गेल अन्‍हार

 

उनटि‍ गेल जेना माथ

 

छूटि‍ गेल सभ संग-साथ

 

नै भेटैत अछि‍ बाट

 

नै अपन घाट

 

लगे-लग औनाइत

 

मन भेल उच्‍चाट

 

सभ गोटे धऽ लेने छी खाट

 

देखा दि‍अ जाएब कोन बाट

 

कहि‍या फटत ई कुहेस

 

भेटत अपन घर परि‍वेश

 

हे सुरूज कि‍रणकेँ जगाऊ

 

आबो तँ ऐ कुहेसकेँ भगाऊ।

  


 

ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।