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विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान -२५

कल्पना झा

उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' जीक परिवारक अन्य सदस्यक विवरण

'व्यास' जीक आँखिक पुतरी: विजया झा

 

'विदेश-भ्रमण' पोथीक पृष्ठ संख्या तीन पर विदेश-यात्रा लेल प्रस्थान कालक बड्ड मार्मिक चित्रण कएल गेल अछि 'व्यास' जी द्वारा। परिवारक लोक तँ सहजहि, शताधिक मित्रगण स्टेशन पर आबि नोराएल आँखिए कोना विदा कएने छलथिन, ताहि प्रसंगक चर्चा करैत एक पैराग्राफ लिखल गेल अछि लेखक द्वारा उक्त पोथी मे। ओहि 'पैराग्राफ'क अन्तिम तीन वाक्य हम अक्षरशः उद्धृत क' रहल छी। देखल जाउ - "हाथ ओ रूमाल हिलबैत लोक सभ विदाइ देलक- हमहूँ हाथ हिलबैत रहलहुँ जाबत धरि विद्युतक आलोक मे किछुओ अंश देखबा मे आएल। ...मन पड़ल कविगुरु

रवीन्द्रक कविता- 'जेते नाहि दिबो'- आ हमर अपन तीनि वर्षक चि. श्री विजया...ओकर मुह....छोट हिलैत हाथ। 'तबू जेते दिते हय, तबू चले जाय' 21 सितम्बर 1958 क चारि बजे भोरुकबाक एहि मार्मिक दृश्यक चित्रांकन जाहि तरहेँ कएल गेल अछि, से पढ़ि हमहीं टा नहि सभ पढ़निहार लेखकक भावुक हृदय सँ सहजहि परिचित भ' जाएत।

 

साल 1954 मे ठीक विजया दशमी दिन जन्म भेल छलनि 'व्यास' जीक एकमात्र सुपुत्रीक। तैँ नाम राखल गेलनि विजया। 'व्यास' जी अपन धियाक व्यक्तित्व निर्माण मे कतहु कोनो कसरि नहि छोड़ने छलाह। पढ़ाइ-लिखाइ आ घरेलू लूड़ि-व्यवहारक संग बजाप्ता शास्त्रीय संगीतक शिक्षा सेहो दिआओल गेल छलनि विजया दाइ केँ। श्याम नारायण खवाड़े आ सीताराम झा हुनकर गुरु रहलथिन; जनिकर शिष्या रूप मे ओ संगीत सिखलनि। नीक गाबैत छलीह, गाबैत छथि एखनहु। हुनका मुहेँ पारम्परिक गीत तँ हमहूँ सुनने छी, विवाह, मूड़न, उपनएन, इत्यादिक अवसर पर।

 

"विदेश-भ्रमण" पोथी मे उद्धृत ओहि प्रसंगक विषय मे पढ़ैत हमरा स्मरण आएल अपन नानी 'फूल देवी'क मुहें सुनल एकटा वृत्तान्त। 'व्यास' जीक करेजक टुकड़ी विजया झा, घरक नाम 'मुन्नी' जखन सोलहम वर्ष पूर्ण क' सतरहम मे प्रवेश कएलीह; तखन बहुत जोर-सोर सँ हुनका लेल सुयोग्य 'वर' ताकल जाए लागल। ककरा हाथ मे देल जाए एहि सुकुमारि के; जे हुनके लोकनि जकाँ ओरिआ क' रखथिन हुनकर धिया के। कोना परखल जाए....भारी मोशकिल। एहन समय मे किंकर्तव्यविमूढ़ बला स्थिति रहैत छै प्रायः सभ पिताक। अन्ततः थाकि हारि क' सप्ता ग्रामक मूल निवासी, फारबिसगंज कॉलेजक प्रिंसिपल धनेश्वर झाक सुपुत्र डॉक्टर के. के. झा (eye specialist) संग संबंध तय क' एलाह। तय क' ' अँगना पहुँचितहि ओसारा पर राखल चौकी पर बैसि बहुते जोर सँ कानए लगलाह 'व्यास' जी। छोट हिलैत हाथ सँ पिता के विदाइ देनिहारि विजया दाइ केँ घर सँ विदा करबाक बेर जे आबए बला छलनि। किंवा एकटा पिताक हृदय आशंकित छल; जे हमर निर्णय सही सिद्ध होएत कि गलत। वास्तव मे ई निर्णय लेब कठिन तँ रहिते छै। आखिर पिता, जन्मदाते टा ने रहैत अछि। ओ भाग्यविधाता तँ नहिए ने भ' सकैए अपन संतानक।

 

विजया दाइ दू टा पुत्र आ दू टा पुत्रीक माए छथि। आब अपन चारू संतानक विवाह-दान क' ' निश्चिन्त भ' गेल छथि। हिनकर चारू संतान सुखमय गृहस्थ जीवन जीबि रहलाह अछि। दुर्भाग्यवश पतिक संग छूटि चुकल छनि, पन्द्रह वर्ष पहिनहि। धर्म-कर्मक संग जीवनक गाड़ी निरन्तर बढ़ि रहल छनि। अन्तिम सत्यो तँ इएह ने अछि- जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च...

 

संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी-

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-10

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-11

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-12

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-13

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-14

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मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-18
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मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-22
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-23

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-24

 

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