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कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान -२२

कल्पना झा

उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' जीक परिवारक अन्य सदस्यक विवरण

"मैथिली साहित्य मे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान" एहि विषय पर लिखैत आब हम ओहि ठाम पर पहुँचि चुकल छी, जतए 'व्यास' जीक अगिला पीढ़ीक उपलब्धिक चर्चा शुरू कएल जाएत। जँ 'व्यास' जीक परिवारक योगदान मैथिली साहित्ये टाक सन्दर्भ मे देखल जाए, तखन तँ हुनकर मात्र दू गोट सन्तान सक्रिय छथिन। मुदा साहित्य सँ उपर अछि समाज। आ समाजक लेल तँ 'व्यास' जीक सभ सन्तान कोनो-ने-कोनो रूप मे सहयोग कएनहि छथि, एखनहुँ कइए रहल छथि। तैं बेरा-बेरी हम 'व्यास' जीक सभ संतानक चर्चा करब। क्रमवार। जेठ सँ छोट धरि, सभक। छओ गोट सन्तानक पिता छलाह 'व्यास' जी। क्रमानुसार सभक नाम एहि तरहेँ छनि -

द्विजेन्द्र कुमार झा (कुमर जी)

बृजेन्द्र कुमार झा (किशोर जी)

शैलेन्द्र कुमार झा (केशव जी)

विजया झा (मुन्नी)

सत्येन्द्र कुमार झा (मोहन जी)

धीरेन्द्र कुमार झा (सोहन जी)

लोकमन्त चिकित्सक : डॉ. द्विजेन्द्र कुमार झा

आब चर्चा शुरू करैत छी 'व्यास' जीक ज्येष्ठ संतान डॉ. द्विजेन्द्र कुमार झाक, जनिक घरक नाम छलनि कुमर जी। जन्म भेल छलनि 9 जून, सन् 1948 मे। बहुमुखी प्रतिभाक धनी छलाह। जेहने पिता, तेहने पुत्र। पिता बला बहुत गुण आएल छलनि हुनका मे। कुशाग्र बुद्धिक संग साहित्य आ संगीत मे रुचि, ई गुण सभ पिता समान छलनि। हुनकर मृदुभाषिता, विनम्रता, सादगी, शालीनता एहन छलनि जे पहिले भेंट मे ककरो मोन जीति लेबाक क्षमता रखैत छलनि। घर सँ बाहर धरि कहियो ककरो सँ कोनो तरहक मनमुटावक स्थिति नहि उत्पन्न भेलनि हुनका। एकटा स्मित मुस्की सदिखन ठोर पर विद्यमाने सन बुझना जाइत छलए। कखनो क्रोधितो होइत हेताह, तेहन अंदाज नहि लागैत छल।

 

संगीत मे रुचिक जे चर्चा कएलहुँ, से एहि आधार पर जे शास्त्रीय संगीत सुनिते टा नहि छलाह, बुझितो छलाह‌, गबितो छलाह। राग-तानक नीक जानकार छलाह। एहि मामला मे पिता सँ आगुए छलाह। ई जनतब हमरा देलनि श्री सत्येन्द्र कुमार झा (मोहन जी)। ओ कहलनि जे, "बाल्यावस्था मे हम आ भाइजी एक्कहि चौकी पर सुतैत छलहुँ।" मतलब परमानेंट सीट जे छलनि सुतबाक से मोहन जी आ कुमर जीक एक संग। तँ तैं हिनका देखल छलनि, अपन भाइजीक संगीत प्रेम। राति एगारह सँ बारह बजे तक ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित होइत छलै शास्त्रीय संगीतक कोनो कार्यक्रम। "भाइजी नियमित सुनैत छलाह, ऑल इंडिया रेडियो पर ओ संगीतक प्रस्तुति। एकटा ट्रांजिस्टर कीनि देने छलथिन बाबू। संभवतः 'संगीते प्रेम'क कारणें ट्रांजिस्टर भेटल छल हेतनि हुनका। आन कोनो धिया-पूता कें एना व्यक्तिगत ट्रांजिस्टर नहि भेटल छलनि। हुनकहि संगति मे हमरो इंटरेस्ट जागल संगीतक प्रति। नहि तँ ओहि सँ पहिने हम शास्त्रीय संगीत सँ अनभिज्ञ छलहुँ। संगीतक आनन्द लेब, मतलब संगीत मे डूबि क' ओकर रसास्वादन करब भाइएजीक कृपा सँ सिखलहुँ हम।" ई वक्तव्य छनि डॉक्टर द्विजेन्द्र कुमार झाक अनुज श्री सत्येन्द्र कुमार झाक।

 

आब बात डॉक्टर द्विजेन्द्र कुमार झाक शिक्षा आ रोजगार संबंधी। इंग्लिश ऑनर्स कएलाक उपरान्त MGM मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर (झारखंड) सँ MBBS के डिग्री लेलनि ओ। तदुपरान्त इंटर्नशिप कएलनि पटने सँ। कोनो हॉस्पिटल सँ ज्वाइनिंग लेटर अबितनि, ताहि सँ पहिले किछु दिन लेल एकटा छोट सन क्लिनिक सेहो खोलने छलाह, पटने मे। माने डिग्री प्राप्त क', एक्कहु दिन बैसल नहि रहलाह। आ संयोग एहन जे अवसान दिन धरि ई क्रम (बैसल नहि रहबाक) जारी रहलनि।

 

पहिल पोस्टिंग भेलनि मिर्जागंज, गिरीडीह जिलान्तर्गत। जतए हॉस्पिटलक कैम्पसे मे आवासक व्यवस्था छलनि। 'ड्यूटी आवर'क अलावे जखन कखनो कॉल आबनि, कोनो इमरजेंसी केस आबनि, अपन "चिकित्सक-धर्म"क पालन बहुत इमानदारी सँ कएलनि। तकर बाद किछु समय धरि पोस्टिंग रहलनि विक्रम। विक्रम सँ ट्रांसफर भेलनि मोतिहारी। मुदा विक्रम मे सरकारी हॉस्पिटल मे कार्यरत रहैत अपन क्लिनिक सेहो खोलि लेने छलाह। आ से क्लिनिक खूब नीक चलि रहल छलनि। बहुत यश कमओलाह ओहि ठाम। ओहि ठामक हॉस्पिटलो मे अन्य डॉक्टरक अपेक्षा मरीज सभ हिनके सँ देखेबाक पक्ष मे रहैत देखाइत छलनि। माने हिनकर प्रतीक्षा मे चारिओ घंटा बैसए लेल तैयार रहैत छलनि मरीज सभ। देखाएब तँ डॉ. झाए सँ देखाएब, तेहन मानसिकता लोकक। आ तैं मोतिहारी ट्रांसफर भेलाक बादो विक्रम आबैत-जाइत रहलाह। मतलब विक्रम बला क्लिनिक चलिते रहलनि। ओहि क्लिनिकक बोर्ड पर एखन धरि 'डॉ. द्विजेन्द्र कुमार झा'क नाम जस-के-तस टंकिते छनि। भले आब ओहि ठाम दोसर डॉक्टर बैसि रहल छथि। मुदा ओहि क्लिनिकक नाम आ पहचान हिनकरहि नाम सँ छनि, एखनहु। मोतिहारीक बाद किछु दिन लेल पालीगंज पोस्टेड रहलाह, जे पटने जिला मे पड़ैत अछि।

 

डॉक्टर मामाक एकटा बड़का विशेषता ई छलनि, जे जखन जाहिठाम पोस्टिंग रहलनि आ जेहन मरीज अएलनि सोझाँ, ओकरा संग ओकर भाषा मे समस्या पुछैत छलथिन। माने देश, काल, परिस्थिति अनुरूप स्वयं कें ढालबा मे निपुण छलाह। मगही, भोजपुरी, हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली, जे मरीज जाहि भाषा मे कंफर्टेबल रहथि, तनिका संग तहिना बतिआएल करथि। आ एकर लाभ ई भेटैत छलनि जे लोक हृदय सँ जुड़ाव महसूस करैत छलनि डॉक्टर साहब सँ। जाहिठाम पोस्टिंग रहलनि, यश-मान-प्रतिष्ठा पर्याप्त भेटलनि। मुदा सभ बेसी लोकक मोन मे जगह बना सकलाह, विक्रम रहैत।

 

आब कने गप्प डॉ. द्विजेन्द्र कुमार झाक व्यक्तिगत/पारिवारिक जीवनक। 24 जून 1974 मे श्री देवानन्द झाक सुपुत्री रीता झाक संग परिणय सूत्र मे बन्हाएल छलाह डॉक्टर मामा। नारायणपट्टी गामक सभ सँ धनाढ्य परिवारक बेटी रीता मामी रंग रूप सँ ल' ' शिक्षा-दीक्षा, सभ किछु मे पतिक सोझाँ कने 'दब' छलीह, मुदा से कहियो पतिक व्यवहार मे पत्नीक प्रति कोनो तरहक उपेक्षाक भाव कहियो ककरो नहि देखेलनि। बहुत प्रेम सँ गृहस्थीक गाड़ी आगाँ बढ़बैत, साल 1979 मे एक टा पुत्रीक आगमन भेलनि हिनकर दुनूक जीवन मे। फेर साल 1981 मे एकटा पुत्रक आगमन भेलनि आ साल 1994 मे दोसर पुत्रीक पदार्पण भेलनि एहि दम्पत्तिक आश्रम मे।

 

ज्येष्ठ पुत्री फैशन डिजाइनिंग के कोर्स क' स्वावलंबी छथि। बौआ चि. शरद Tribhuwan University Institute of medicine Maharajgunj Medical Campus, नेपाल सँ MBBS कएलनि। जखन कि हिनकर सेलेक्शन BHU मेडिकल कॉलेज मे भ' गेल छलनि। मुदा जाहि दिन सेलेक्शनक लिस्ट जारी भेलनि, ठीक ओही दिन 10 नवम्बर 2004 क' डॉक्टर द्विजेन्द्र कुमार झाक निधन भ' गेलनि। आब ओ बच्चा उत्तरी धारण करितथि आ कि मेडिकल कॉलेज मे नामांकनक प्रक्रिया मे लगितथि। भावी जे छलनि, से भेलनि। नेपाल सँ MBBSक डिग्री प्राप्त क' DMCH दरभंगा सँ MD कएलनि। बौआक  पहिल पोस्टिंग पटनाक पारस हॉस्पिटल मे भेलनि। तदुपरान्त दिल्ली पारस, फेर टाटा पावर मे, सम्प्रति पटनाक बिहटा थानांतर्गत रेफरल हॉस्पिटल मे कार्यरत छथि।

 

घरक मुखियाक असमय प्रस्थान क' जाएब, वज्रपात सन बुझना गेलनि घरक लोक कें। मुदा ककरो बिना कोनो काज ने रुकलैए ने रुकतैक, ई अकाट्य सत्य अछि। से सएह, पिताक अवसानक उपरान्त पुत्र पढ़ि-लिखि डॉक्टर बनिए गेलथिन आखिर। यशस्वी डॉक्टर बनि, आब चि. शरद नीक पति आ एकटा नेनाक पिता सेहो बनि गेल छथि। चि. शरद बाबूक जीवनसंगिनी अपर्णा भारद्वाज सेहो डॉक्टर छथिन। डेन्टल डॉक्टर। जे नॉएडा मे अपन क्लिनिक खोलने छथि। डॉक्टर द्विजेन्द्र कुमार झाक ज्येष्ठ संतान सौ. नमिताक विवाह हुनकर रहिते मे भ' गेल छलनि। पिताक अवसानक बाद ओहो एकटा पुत्रक माए बनलीह। आ डॉ. द्विजेन्द्र कुमार झाक सभ सँ छोट संतान सौ. विशाखा अंतरा एखनहि दू साल पहिने परिणय सूत्र मे बन्हएलीह अछि। मतलब तीनू सन्तान अपन-अपन जगह पर सुखमय जीवन जीबि रहल छनि। आइ जँ सशरीर एहि धराधाम पर रहितथि तँ अपन भरल पूरल परिवार देखि कतेक आह्लादित होइतथि डॉक्टर द्विजेन्द्र कुमार झा। मुदा जन्म-मृत्यु पर ककर वश रहलैए जे हिनकर रहितनि।

 

जेना कि सर्वविदित अछि जे डॉक्टर पेशाक बड़का त्रासदी छै मानवीय जीवनक अनिश्चितता, माने लाख प्रयासक बावजूदो अप्रत्याशित मृत्यु सँ दू-चारि होबहि पड़ैत छै सभ दिन, एहि पेशाक लोक कें। हालांकि एहि पेशा के 'सेवा' बला पेशा कहल जाइत अछि। मुदा त्रासदी ई जे विज्ञान सेहो मृत्यु कें हरएबा मे असमर्थ भ' जाइत अछि। आ तैं ई पेशा बहुत तनावपूर्ण जीवनशैली सँ युक्त भ' जाइत छै। अधिकांश डॉक्टर सामान्य लोकक तुलना मे अल्पायु (औसत 55-59 वर्ष) होइत छथि। जाहि ठाम सामान्य भारतीय नागरिकक औसत आयु 69-72 वर्ष रहैत छनि, ओहि ठाम डॉक्टर सभक औसत आयु 55-59 वर्ष मात्र रहैत छनि। मतलब सामान्य नागरिक सँ 10 वर्ष कम। (आँकड़ा गूगल सँ लेलहुँ अछि)

 

आ ताहू मे अधिकांश डॉक्टर हृदय रोगक चपेट मे आबि जान गमबैत छथि। डॉ. द्विजेन्द्र कुमार झाक सेहो एक बेर एंजियोप्लास्टी भेल छलनि। तकर बाद नस-संबंधी किछु समस्या सुनबा मे आएल छलए। अन्ततः मात्र 58 बरखक बएस मे 10 नवम्बर 2004 क' इहलोक त्यागि अनन्त यात्रा पर निकलि गेलाह श्री भवनक जेठपुत 'कुमर' जी। 'व्यास' जीक देहावसानक मात्र दू बरखक उपरान्तहि। ओना जतबे टा जीवन जीबि क' गेलाह, घर-परिवार सँ ल' ' समाज धरि, सभ ठाम 'बहुत नीक लोक'क छवि बना क' गेलाह। से संतोषक गप्प !

 

एहि ठाम हमरा 'व्यास' जीक ज्येष्ठ पुत्र-वधू, माने डॉक्टर द्विजेन्द्र कुमार झाक धर्मपत्नी श्रीमती रीता झाक धैर्य ओ कर्तव्य पारायणताक चर्चा करब सेहो आवश्यक अछि। हिम्मत नहि हारलीह ओ। पतिक असामयिक मृत्यु सँ हतोत्साहित नहि होइत अपन कर्तव्यक पालन कएलनि। तीनू धिया-पूता कें स्वावलम्बी बनबा धरिक समय, हुनका लेल परीक्षाक समय छलनि। आइ हुनकर सभ धिया-पूता अपन-अपन स्तर पर सुव्यवस्थित, सुखमय जीवन जीबि रहल छथिन, से धिया-पूताक संग माएओक सफलता कहल जाएत ने !

 

वर्तमान मे रीता मामी अपन पुत्र आ पौत्रक सान्निध्य मे अधिक समय बितबैत छथि। 'व्यास' जीक दोसर पीढ़ीक पहिल बौआ (जेठपुत), जे एखन धरि हमरा सभ लेल 'बौए' छथि, तनिका परिस्थिति समय सँ पूर्वहि बहुत जिम्मेदार नागरिक बना देलकनि। बौआ अपन जिम्मेदारी जहिना सकुशल निभाबैत रहलाह अछि एखन धरि, तहिना आगाँ सेहो निभाबैत रहताह, विश्वास अछि।

 

(डॉक्टर द्विजेन्द्र कुमार झा अपन धर्मपत्नी श्रीमती रीता झाक संग)

 

संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी-

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