प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान -२०

कल्पना झा

'व्यास' जीक अप्रकाशित कृति

जीवनक अन्तिम साँस धरि पढ़ैत-लिखैत रहए बला एकटा बुद्धिजीवीक लिखल की-की, कतए-कतए राखल हेतनि, से तकर हिसाब राखब सहज काज नहि। माने सभ टा लिखलाहाक हिसाब राखब कठिनाहे बुझू घरबैयोक लेल। माने कोनो डायरी, कोनो कॉपी, कोनो फाइल मे सम्हारि क' राखल पन्ना सभ, सभ किछु मे एकहक पन्ना-पन्ना छानि मारब संभवो नहि ने! तँ से छोट-छोट रचनाक तँ कोनो हिसाब नहि उपलब्ध अछि हमरा। मुदा किछु एहन काज जे एखन तत्काल उपलब्ध अछि से सभ निश्चिते मैथिली लेल अमूल्य निधि अछि। नीचा देखल जाए अप्रकाशित रचनाक सूची-

1. "शुक्ल यजुर्वेदक मैथिली भाष्य"- 'व्यास' जीक हाथक लिखल साढ़े बारह सए पृष्ठक पाण्डुलिपि हुनकर अलमारी मे ओरिआ क' राखल छनि। एकर प्रकाशनक प्रति किएक उदासीन छथि घरक लोक, तकर पाछाँक कारण हम ठीक-ठीक कहि नहि सकैत छी। एहि दिस तत्परता देखबैत, एकरा प्रकाशित करबाओल जाएत, से विश्वास अछि।

2. 'श्रीकान्त'क दोसर पर्व- 'व्यास' जीक अनुवाद कार्यक ब्यौरा दैत, हिनकर सातम अनूदित पोथीक चर्चाक क्रम मे श्रीकान्त (प्रथम 'पर्व')क चर्चा कएने छलहुँ हम। जे सन् 1997 मे प्रकाशित भेल छलनि। शरतचन्द्र चट्टोपाध्यायक द्वारा चारि 'पर्व' मे लिखल गेल एहि पोथीक प्रथम 'पर्व'क अनुवाद कएलनि अछि 'व्यास' जी। एहि अनूदित पोथीक 'दू शब्द' मे 'व्यास' जी एहि बातक चर्चा कएलनि अछि जे ओ, उपन्यास लिखबाक कला मे सिद्धहस्त शरत् बाबूक एहि चर्चित उपन्यासक प्रथम आ द्वितीय 'पर्व'क अनुवाद कएलाह अछि। मुदा प्रकाशित तँ मात्र पहिल 'पर्व' भेल छनि। माने दोसर 'पर्व'क अनुवाद 'व्यास' जी कएलनि से हुनकहि कथन सँ स्पष्ट अछि। एकर मतलब दोसर 'पर्व' अप्रकाशिते राखल छनि प्रायः। मुदा घरक लोक एकर पाण्डुलिपिक उपलब्धताक सन्दर्भ मे किछु स्पष्ट कहि नहि पाबि रहल छथि। ई असमंजस बला बात बुझा रहल अछि, 'व्यास' जीक दू शब्दक आधार पर मानि क' चली जे 'श्रीकान्त'क दोसर पर्वक पाण्डुलिपि सेहो कतहु ने कतहु राखल हेतनि घर मे, आ कि पाण्डुलिपिक अनुपलब्धताक आधार पर ई मानि लेल जाए जे जएह प्रकाशित भेल छनि, बस ओतबे अनुवाद कएलनि 'व्यास' जी।

एहि दू अप्रकाशित अनुवादक अतिरिक्त बेसी सम्भावना तँ ईहो अछि जे तेसर आ चारिम 'पर्व'क अनुवाद सेहो ने कएने होइथ ओ। कारण शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय 'व्यास' जीक पसंदीदा लेखक मे सँ छलथिन। हुनकर इच्छा जरूर भेल हेतनि चारू पर्वक अनुवाद करबाक। मुदा निजगुत किछु कहब कठिन अछि एहि सन्दर्भ मे।

 

संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी-

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-10

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-11

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-12

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-13

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-14

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-15

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-16
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-17
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-18
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-19

 

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।