कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान -२१

आत्मकथा लिखबाक अपूर्ण इच्छा
"अग्रिम योजना अछि आत्मकथा लिखबाक। अपन आत्मकथा लिखब; निश्चित लिखब... घर-परिवारक.. लोक सभक आग्रह कि दुराग्रह जे कहल जाए, से छनि... आब ईश्वरक जे कृपा!"
ई पूज्य 'व्यास' जीक मुखारविन्द सँ निकलल शब्द छनि। मुदा से ई इच्छा अपूर्णे रहि गेलनि हुनकर। मामा, श्री सत्येन्द्र कुमार झा (मोहन जी) सँ गप्प भेल एहि संदर्भ मे। तँ ओ कहलनि, "बाबू केँ जखन-जखन कहिअनि, "Autobiography लिखबाक चाही अहाँ केँ।" तखन हुनकर कहब रहैत छलनि, "Autobiography बड़का लोक, मतलब महान लोक सभ लिखैत छथि, हम तेहन विशिष्ट लोक नहि। आत्मकथा ओ ने लिखैत अछि, जनिकर जीवन-यात्रा सँ लोक प्रेरित भ' सकथि। जेना नेल्सन मंडेला, महात्मा गांधी, बराक ओबामा सन लोक लिखलनि।" मुदा भीतर इच्छा छलनि आत्मकथा लिखबाक, से बुझाइत छलनि परिवारक लोक सभ केँ। जीवन तँ बहुत संघर्षपूर्ण रहलनि 'व्यास' जीक। हुनकर जीवन-यात्रा सँ बहुतो लोक प्रेरित भ' सकैत छलए। ओना Autobiography लिखबा मे समस्या तँ छै। अपन उपलब्धिक चर्चा स्वयं करितथि तँ लोक "आत्ममुग्धता" वा "आत्मगौरव"क अधीन बुझि सकैत छलनि।
"आत्मकथा एकटा साहित्यिक विधा अछि जाहि मे कोनो व्यक्ति अपन जीवनक उतार-चढ़ाव, अपन सफलता-असफलताक लेखा-जोखा केँ स्वयं पोथी रूप मे लिखि सार्वजनिक करैत अछि" से कतेक पाठक ई बात बुझितनि, के जानए...। कतहु ने कतहु 'व्यास' जीक मोन सशंकित छलनि प्रायः। आ तैँ मैथिली साहित्य जगतक सुप्रसिद्ध व्यक्तित्व रहितहुँ ओ सहास नहि कएलनि आत्मकथा लिखबाक। जखन कि अपन विचार आ अनुभव सँ लोक केँ अवगत करबाओल जाए, से इच्छा बलवती छलनि हुनका भीतर। खैर, Autobiography नहि biography तँ लिखल जा सकैत अछि। लोक 'व्यास' जीक जीवन-यात्रा सँ बहुत किछु सीखि सकैत छथि। सएह सोचि हम एहि काज मे लगलहुँ अछि। कतेक-की लिखि सकलहुँ, से तँ प्रकाशनक उपरान्तहि स्पष्ट होएत। लोकक प्रतिक्रिया सँ। अवतारी पुरुष 'व्यास' जीक जीवनी लिखैत, हम हुनकर विराट व्यक्तित्वक चित्रण करबाक क्रम मे कतेक सफल रहलहुँ, हमर लिखल कतेक न्यायसंगत अछि, से तँ पोथीक प्रकाशनक उपरान्तहि स्पष्ट होएत। प्रयास तँ पूरा रहल अछि, जे हमरा द्वारा एक्कहु टा शब्दक चयन एहन नहि हुअए, जे हुनकर मान-मर्दन करैत सन प्रतीत होइन पाठक केँ। यथार्थ चित्रण करी एहि मिथिला विभूतिक व्यक्तित्वक, से प्रयास रहल हमर।
उपर्युक्त पैराग्राफ मे हम 'व्यास' जी केँ 'अवतारी पुरुष'क उपाधि देलिअनि अछि, से एकरा अतिशयोक्ति रूप मे नहि लेल जाए। किछु-ने-किछु वास्तविकता तँ निश्चित बुझना जाइत अछि एहि तथ्य मे, जे ओ सामान्य पुरुष नहि छलाह। एहन हमहीं टा नहि, बहुत लोकक मुहेँ सुनल अछि हमरा। एहि तरहक प्रतिभा सामान्य मनुक्ख मे कहाँ देखाइत अछि। जाही काज मे हाथ लगौलनि, जाही क्षेत्र मे जे काज कएलनि, सभठाम हुनकर लोहा मानलकनि लोक। मतलब कर्मक्षेत्र हुअए कि साहित्यिक जगत, आ कि अन्य सामाजिक गतिविधि, सभठाम खुट्टा गाड़लनि। एकटा इंजीनियर रूप मे, एकटा साहित्यकार रूप मे, एकटा संवेदनशील मानवक रूप मे, सभ रूप मे सभठाम समादृत भेलाह। अवतारी पुरुष कहबाक पाछाँ एकटा कारण सेहो अछि।
'व्यास' जीक नाना छलथिन बड़का भारी तांत्रिक। उचैठ भगवतीक अनन्य उपासक। आनन्दी देवी, माने 'व्यास' जीक माएक, हिनका सँ पहिने पाँच-छओ टा संतान जन्म होइतहि मृत्यु प्राप्त करैत गेलनि। बहुत कबुला-पाती, टोना-टोटकाक उपरान्त एहि अद्भुत प्रतिभाशाली नेनाक प्राप्ति भेल छलनि, आनन्दी देवी केँ। स्वाभाविके एकटा पिता, अपन पुत्रीक स्वस्थ, दीर्घायु सन्तान लेल किछु विशेष पूजा-अर्चना-तप, कएनहि छल हेताह। एहन अनुमान लगबैत अछि लोक। एतेक गुणवान व्यक्ति विरले देखल जाइत अछि समाज मे, तैं एहि तरहक अनुमान लगएबा लेल बाध्य होइत अछि लोक। सहनशीलता, धैर्य, कर्मठता, हुनकर अनुशासित जीवन, दृढ़ संकल्प, सभ किछु सामान्य पुरुष सँ बहुत उच्च स्तरक रहलनि। आ से आजीवन रहलनि। किछु दैवीय शक्ति छलनि प्रायः। किंवा भगवतीक अनन्य भक्त/उपासक छलाह, ताहि भक्तिक शक्ति प्रतापेँ असम्भवो के सम्भव क' लैत छलाह। अन्तरात्मा सँ भक्तिभाव छलनि भगवती लेल। देखावटी बला नहि। देवी भागवतक सम्पूर्ण पाठ दू सए बेर सँ बेसीए क' चुकल छलाह। एक सए आठ बेर पुरि गेलनि सम्पूर्ण पाठ, तकर बाद कुमारि भोजन/कन्या पूजन कएने छलाह। आ तकर बादहु पाठ चलिते रहलनि, अनवरत। तैं घरक लोक अनुमान लगा रहल छथि, जे दू सए बेर सँ बेसीए क' चुकल हेताह, कम नहि।
असम्भव के सम्भव करए बला बात जे कहलहुँ, तकर पाछाँक खिस्सा कहब आवश्यक अछि। एक बेर आंशिक पक्षाघातक चपेट मे आबि गेल छलाह 'व्यास' जी। बामा पैर नहि उठनि। से भरि राति मन्त्रोच्चारणक संग पैर उठेबाक प्रयास, ता धरि करैत रहलाह जा धरि डेग उठएबा मे सफल नहि भ' गेलाह। दृढ़विश्वास छलनि जे हम अपनहि प्रयास सँ ठीक क' लेब अपन पैर। "उठत कोना नै" सेहो बाजथि, संगहि अभ्यास आ मन्त्रोच्चारण करैत रहलाह, लगातार । अन्ततः सफलता हाथ लगलनि, आ सरपट चलए लगलाह, बिनु कोनो लाठी/छड़ीक सहारा लेनहि। आजुक लोक के ई प्रसंग अविश्वसनीय सन लगतनि। मुदा अछि ई शत् प्रतिशत सत्य।
साल 2002 मे 85 बरखक अवस्था मे हुनकर देहावसान भेलनि। सेहो इच्छा-मृत्यु सन। कोनो दुःख-बेमारी नहि, कोनो दवाइ, कोनो पथ्य-परहेज नहि। आब ई की-कोना संभव भेलनि, से तँ कहब कठिन अछि। ज्योतिष विज्ञानक गहन अध्ययनक फलस्वरूप संभव भेलनि, आ कि कोनो दैवीय शक्तिक फलस्वरूप, से नहि जानि। सिद्ध योगी सभ, योग दर्शन आ तंत्र-उपनिषद् परम्पराक अभ्यासक माध्यम सँ इच्छामृत्यु प्राप्त करैत छलाह, एहन हमरा पहिनहु सुनल छलए। मुदा सामान्य मनुष्य लेल सेहो ई संभव हेतैक, से नहि बूझल छलए।
पचासी वर्षक अवस्था धरि, माने अपन अन्तिम साँस धरि 'व्यास' जी लेखन-कर्मक प्रति पूर्णतया समर्पित रहलाह। साहित्य हुनकर सौख नहि छलनि। आ ने हुनकर आजीविका छलनि। साहित्य हुनका लेल साधना छलनि। से ओहि साधना मे लीन रहलाह। अपन जीवनक एकहक क्षणक एहि तरहेँ सदुपयोग करब अनुकरणीय अछि। आउ न'....हम-अहाँ, सभ गोटे संकल्प करी, जे हिनक पदचिन्ह पर चलि सकी आ अपन मनुष्य जन्म सफल/सार्थक बना सकी। जेना 'व्यास' जी अपन जन्म सफल बनौलनि। ततेक सफल, जे अमर भ' गेलाह।
संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी-
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-10
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-11
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-12
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-13
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-14
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-15
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-16
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-17
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-18
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-19
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-20
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।