विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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२.२०. लक्ष्मण झा सागर- खाँटी मैथिलीस्ट शरदू जी

 

लक्ष्मण झा सागर

खाँटी मैथिलीस्ट शरदू जी

आइ हम एहन ओझरौटमे पड़ल छी जे की कहू। हमरा श्री शरदिंदु चौधरीजीपर लिखबाक अछि। की लिखबाक अछि से मोनमे सरिया नै रहल अछि। एहन सन स्थिति हमरा एहिसँ पहिने किनकोपर लिखबाक बेरमे नै भेल छल। हिनकापर एना कियै भऽ रहल अछि? कारण हमरा जनैत ई भऽ सकैत अछि जे शरदू जीसँ हमर जान पहचान कहिया भेल, कोना भेल आ कियै भेल से हमरा स्मरण शक्तिमे क्रमवार सैंतल नै अछि। तेँ की हम हुनकापर लिखब छोड़ि देब? नै, हम लिखब। लिखबाक चेष्टा करब। जहिना हैत तहिना लिखब। जेना-जेना जे-जे फुरत से-से लिखब।

मैथिलीमे बहुत एहन साहित्यकार सभ छथि जे बाबा बले फौदारी करैत छथि। शरदू जी से नै करैत छथि। ई बात सत्य अछि जे हिनका शरीरक रक्त नलिकामे अपन पिता स्व सुधांसु शेखर चौधरी जीक लहू बहैत रहैत अछि। सम्पादक जीक नामसँ विख्यात मिथिलाक महान व्यक्तित्व शेखर जी मिथिला मिहिर , पटनाक सम्पादनसँ आधुनिक मैथिली साहित्यक वर्तनीक एकटा एहन डड़ीर पारि देलनि जे मैथिली साहित्यक मानक वर्तनी बनि गेल। आ मैथिली साहित्यक रचना ताहि स्वरूपमे आइ धरि भऽ रहल अछि। से नहियो भऽ सकैत छल जँ हुनका एकमात्र पुत्र रत्न शरदू जी सन उत्तराधिकारी नै भेल रहैत। शरदू जीक जीवनक सबसँ पैघ उपलब्धि ई छनि जे अपन पिताक अधिकांश साहित्यिक रचनाक पोथी प्रकाशित केलनि। एखनो ताकि-हेर कइए रहलाह अछि। एहि पोथी सबकेँ एलाक बादे मैथिलीक साहित्यकार सभ कें शेखर जीक बहुआयामी प्रतिभाक मादे विशेष परिचय भेलनि। एहि कृत्य लेल शरदूजीकें जँ आधुनिक मिथिलाक श्रवण कुमार कहल जाय तँ कोनो विस्मय नै हेबाक चाही।

मात्र ततबे नै। पिताक एहन आज्ञाकारी पुत हैब दुर्लभ नै तँ मुश्किल जरूर अछि। राजनीति शास्त्रसँ एम.ए केलनि। सचिवालयमे सरकारी नोकरी भऽ रहल छलनि। पिता कहलखिन जे ई नोकरी नै करू। सत्य नै बाजि सकब। निर्भीक बनल नै रहि हैत। हिन्दी लिखय-बाजय पड़त। नै केलनि से नोकरी। अपन हृदयपर हाथ राखि सब गोटे सोचू जे कै गोटे छी हम सब जे मैथिली लेल अपन जीवन के दाँवपर लगेने छी। शरदू जी से लगेने छथि। मिथिला-मिहिर, पटनाक सम्पादन विभागमे अपन योगदान देलनि। अपन जीवन-यापन लेल अल्प दरमाहाकेँ अपन बोइनि बूझि खूब मोन लगा कऽ सम्पादन विभागमे पहिने प्रशिक्षण आ पछाति नोकरी करय लगलाह से ताधरि केलनि जा धरि इन्डियन नेशन प्रेस चलैत रहल। हमर परिचय शरदू जीसँ तहियेसँ अछि। दुनू गोटेक बीच खूब पत्राचार होइत रहैत छल।

पिता हिनक दरभंगाक जे अपन मरौसी जमीन-जायदाद छलनि तकरा बेच-बिकनि कऽ पटनामे घर बनेलनि। पिताक देहांत के बाद शरदू जी अपन घरक मुखिया भेलाह। हिनको एकमात्र पुत्र आयुष्मान राजाशेखर चौधरी एखन बेंगुलुरूमे कार्यरत छथि। चारि टा पुत्रीमे छोटकी एखन उच्च शिक्षा ग्रहण कऽ रहल छनि पटनेमे। लगमे वैह बेटी आ पत्नी रहैत छथिन। एकटा बेटीक बियाह मैथिलीक स्वनामधन्य गजलकार श्री जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल जीक पुत्रसँ भेल छनि। दोसर बेटीक वियाह मैथिलीक दिवंगत कवि सुकांत सोमक बालकसँ भेल छनि। सभ गोटे सुखी आ सम्पन्न छथिन। आमदनीक जरिया घरक किराया आ शेखर प्रकाशनसँ प्राप्त आय छनि। ने बड़ सुखी आ ने तेहेन दैन्य स्थिति छनि। अपन सब आवश्यक खर्च जुमि जाइत छनि। शरीर आ स्वास्थ्यसँ सब दिन कमजोर रहैत आयल छथि। तीन बेर हृदयपर आघात भेल छनि। अस्पतालमे भर्ती हुअय पड़ल छनि। मुदा,अपन आत्मबल आ जीजिविषाक जोरपर सब बेर स्वस्थ भऽ कऽ घर आबि जाइत छथि। बहुत साहसी लोक छथि शरदू जी।

नब्बेक दशकमे हम अपन कम्पनीक काजसँ पटना गेल रही। होटलमे रूकल रही। शरदूजीकें फोनपर खबरि केलियनि जे भेंट करय चाहैत छी। हमरा कहलनि जे ४ बजे जमाल रोडमे श्री विनोद कुमार झा जीक (देसकोस वाला) कोरियरक दुकानमे आबि जाउ। हम समयपर चल गेल रही। विनोद जीसँ (कलकत्तेसँ परिचय रहय) गप-सप करिते रही कि देखैत छी दू गोटे आबि गेलाह। दुनू हमरा लेल अनजान। विनोद जी परिचय करेलनि। उज्जर दप-दप केश आ झुनकुट पाकल दाढ़ी वाला लक-लक पातर शरदू जी रहथि। संगमे रहथिन युवा पत्रकार अजित आजाद। गोर-नार,शुभ्र- शाभ आ आकर्षक व्यक्तित्व बला छवि। परिचय पातक बाद शरदू जी हमरा (आग्रह आ अधिकारक मुद्रामे) कहलनि जे अजितकेँ कतहु नीक नोकरी लगा दियनु। हम अनुभव कैल जे शरदू जी मैथिलीक नव लोक लेल कतेक उपकारी छथि। आ हुनक ई स्वभाव एखनो बदस्तूर कायम अछि।

श्री उदय चन्द्र झा विनोदजीकेँ अपन पोथी प्रकाशित करेबाक रहनि। पाइक अभाव रहनि। शरदू जी लग गेलाह। शरदू जी उधारी पोथी छापि देलखिन। एखनो धरि हिसाब नै फरियेलनि अछि। श्री केदार कानन कोनो मुसीबतमे फँसि गेल छलाह। शरदूजीकें पता लगलनि। तुरत श्री मंत्रेश्वर झाजीकेँ लऽ जा कऽ न्यायाधीश श्री मति मृदुला मिश्राजीसँ पैरवी करबेलनि। मामिला रफा-दफा भेल। केदारजीकें फारकती भेटलनि। एवं प्रकारें शरदूजी मैथिलीक बहुतो साहित्यकारककेँ उपकार करैत रहलाह अछि। मुदा, हुनक हस्त रेखामे यश नै लिखल छनि। हुनका लग एहन करीब १५० टा साहित्यकारक लिस्ट छनि जिनका लग हिनक पाइ बाँकी छनि। एक दिन कहैत छलाह जे हम एकटा पत्रिका निकालब। नाम रखबै पोल-खोल। सबहक नाम छापि देबैक। आइ जे सब गोटे अपनाकेँ मैथिलीक महन्थ कहैत छथि से सब कतय भऽ के रहताह? मुदा, से शरदू जी करताह नै। कियैक तँ हुनकर हृदय जहिना उदार छनि तहिना साफ सेहो छनि।

शरदूजीकें हम मूलत: पत्रकार मानैत छियनि। से कोनो इड्डी-गुड्डी वाला पत्रकार नै। एकदमसँ निष्पक्ष,निर्भीक,सचेतन आ प्रखर छवि वाला पत्रकार। जे कियो हिनक संपादनमे प्रकाशित समय-साल, पुर्वोत्तर मैथिल (गुवाहाटी), चेतना समिति, पटनाक स्मारिका देखने आ पढ़ने हैब से जनैत हैब हिनक सम्पादनक वैशिष्ट्य। हिनक सम्पादकीय केर धार। हिनक मानक मैथिलीक छटा। रचनाक संरचना। सामयिक टिप्पणी जे राजशेखरक नामसँ टिपैत रहथि। मुद्दा राजनैतिक हो, मैथिलीक विकासक हो, गाम-घरक खेतीक समस्या हो, शहरक विद्रूपता हो शरदू जीक बेबाक लेखनीसँ सब गोटे परिचित छीहे। हिनक मारुख कटाक्ष सत्ताक गलियारीमे गुँजैत रहल अछि। शरदू जी कोनो राजनैतिक दलक लोक नै छथि। एकटा तटस्थ विचारधाराक हस्ती छथि। हुनका कियो अपन सिद्धांतसँ झुका नै सकैत छथि। आ ने ओ किनको लादल विचारसँ प्रभावित होइ वाला जीव छथि। यदि शरदू जीक स्वभावमे कनियों लचीलापन रहितनि त आइ ओ पटनामे मैथिलीक धारे झा रहितथि। मैथिलीक साहित्यकार सभक दरबार होइत हिनका लग। मैथिली सेवी संस्थाक अधिकारी सभ हिनक चारण रहितनि। चेतना समिति, पटनामे जे चाहितथि से करबा सकैत रहथि। घर-बाहर पत्रिकाक सम्पादक बनि गेल रहितथि। कैक टा सम्मान आ प्रशस्ति पत्र घरमे जमा भेल रहितनि। मुदा, से सब किछु नै भेलनि। पटनाक हनुमान जी मंदिर लग एकटा साधारण पोथिक दोकान छनि। ताहि ठाम बैसल रहैत छथि। मैथिलीक गतिविधिकेँ अकानैत रहैत छथि। पटनाक साहित्यकारक नजरिमे उफाँटि बनल एकोर भेल रहि रहल छथि शरदू जी।

शरदू जी बनब सभक वशक बात नै अछि। समकालीन साहित्यमे अपन व्यंग्य विधाक मौलिक पोथी सभ लिखि एकटा स्तरीय साहित्यकारक श्रेणीमे हिनक नाम उल्लेखनीय रहल अछि। करिया काकाक कोरामिन, जँ हम जनितहुँ, साक्षात्कारक दर्पणमे आदि-आदि हिनक पोथी प्रकाशित छनि। सभटा पढ़बाक प्रयोजन अछि, हिनक लेखनक विशेषता के जनबाक लेल। हिनक शैली, शिल्प आ बिम्ब-विधान हिनक अप्पन छनि। रजनी-सजनी आ हल्लुक-उत्थर बात नै लिखलनि कहियो। जे लिखलनि जतबा लिखलनि से समय साक्षेप लिखलनि। समाजोपयोगी लिखलनि। अपन सम्पादनमे दू टा पोथी प्रकाशित केलनि जे बहुत महत्वपूर्ण काज भेल अछि। एक तँ पत्रकारिताक दशा आ दिशा जे लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल सहयोगी पोथी अछि। दोसर मिथिलाक ज्वलन्त समस्या मिथिला राज्य लेल पक्ष आ विपक्षपर भेल परिचर्चाक संकलन। मिथिला राज्य अभियानी लोकनि लेल मीलक पाथर अछि।

हम अधिकारपूर्वक ई बात कहबा ले बाध्य भेल छी जे शरदू जी कोनो पुरस्कार आ सम्मान लेल कहियो रेसमे नै रहलाह। सब दिन मैथिलीक सेवामे अपस्यांत रहैत छथि। संघीय लोक सेवा आयोग आ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षार्थी सभ लेल चयनित पोथी सभक जोगार करेबामे दिन भरि लागल रहैत छथि। एक दिन रातुक १२ बजे हमरा फोन केलनि जे मणिपद्म जीक लोरिक विजय बजारमे उपलब्ध नै अछि। विद्यार्थी सभ परेशान आ चिंतित छथि। कोर्समे लागल छैक। एहि पोथिक प्रकाशक कलकत्तेक मिथिला सांस्कृतिक परिषद अछि। अहाँक मदति चाही। तावत हम अपना लग जे एक प्रति बाँचल अछि तकरे जेरॉक्स करा कऽ हम बिद्यार्थी सभकें वितरित कय रहल छी। से सहीमे अपन खर्च कऽ कऽ नि:शुल्क विद्यार्थी सभकें बँटैत छलथि। एना हम स्व किशोरीकांत मिश्रजीकें आग्रह कय पोथिक दोसर संस्करण प्रकाशित करबाय दोसर सालक लेल उपलब्ध करबा देने रहियनि। माटिपरक काज करैत छथि शरदू जी। एक दिन कहलनि जे हमरा एहिसँ पैघ उपलब्धि आर की हैत जे हमरा सहयोगसँ देश विदेशमे रहनिहार आइ.ए.एस, आइ.एफ.एस आ आइ.आर.एस करीब १५०सँ ऊपरे। ओ सभ फोनपर हमरा सर कहैत छथि आ हमर हाल समाचार पुछैत छथि। बी.डी.ओ, सी.ओ ,कलक्टर आ एस.पी तँ बूझू जे हमर दासो-दास बनल रहैत छथि। के छथि मैथिलीमे एहन कलामी से हमरा देखाउ तँ।

एकटा आर बात कहि कऽ हम विराम लेब। शरदू जी पराकाष्ठाक इमानदार लोक छथि। एक बेर पूर्वोत्तर मैथिल पत्रिकाक बिक्री मूल्य सब मिला कऽ हम हुनका ५०० रुपैयाक चेक कोरीयरसँ पठेलियनि। हुनका भेट गेलनि से निस्तुकी रूपेँ हम निचैन भऽ गेल रही कियैक तँ पावतीमे हुनक पुत्र राजा शेखर दस्तखत केने छल। हम समय-समयपर अपन बैंक बैलेंस मिलबैत रहैत छलहुँ। हमर बैलेंस घटि नै रहल छल। जहन छह मास बीत गेलै तखन हम फोन कऽ हुनका पुछलियनि जे चेक हमर वाला बैंकमे जमा नै केलियै तँ फटसँ हमरा कहैत छथि जे प्रेमकांत चौधरी जी हमरासँ मँगबे नै केलनि तँ हम कोना आ कियै जमा करितहुँ। भेटत एहन लोक मिथिलामे?

अंतमे हम अपन अनुज तुल्य शरदू जीक उत्तम स्वास्थ्य लेल माँ मैथिलीसँ मंगल कामना करैत छियनि आ विदेहक समस्त टीमकें हार्दिक आभार व्यक्त करैत छी जे मैथिलीक एकांत साधक श्री शरदिंदु चौधरी जीपर विशेशांक बहार कऽ अहाँ लोकनि मैथिलीक बड़ पैघ उपकार कैल अछि।

-संपर्क-लक्ष्मण झा सागर, कोलकाता/ १३.११.२०२२ 9903879117

 

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