विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

२.१९.गजेन्द्र ठाकुर- शरदिन्दु चौधरीक तीनटा व्यंग्य संग्रह- 'बड़ अजगुत देखल..', 'गोबरगणेश' 'करिया कक्काक कोरामिन'

गजेन्द्र ठाकुर

शरदिन्दु चौधरीक तीनटा व्यंग्य संग्रह- 'बड़ अजगुत देखल..', 'गोबरगणेश' 'करिया कक्काक कोरामिन'

'बड़ अजगुत देखल..' प्रकाशित भेल २००५ मे, 'गोबरगणेश' प्रकाशित भेल २०११ मे  'करिया कक्काक कोरामिन' प्रकाशित भेल २०१६ मे। तीनू पोथी करिया कक्का शृंखलाक व्यंग्य पोथी थिक हुनकर संस्मरण साहित्यसँ दू तरहेँ भिन्न अछि। करिया कक्का ओइ लोलुपताक प्रतीक छथि जकरा अहाँ चीन्हि सकै छियन्हि मुदा कोनो असली नाम नै छथि, मुदा किछु आलेखमे करिया कक्का निपत्ता छथि किछुमे असली नामबला भूप सभ सायास प्रयन्तोक बादो जबरदस्ती आबिये जाइ छथि। मुदा लेखक तीनू पोथीमे सँ 'बड़ अजगुत देखल..'केँ स्पष्टरूपेँ संस्मरणे कहै छथि। 'बड़ अजगुत देखल..'मे 'मुक्ति पयबाक प्रयत्न' आमुखमे लिखैत छथि- "हम जे नै कऽ पौलहुँ, जे नहि सोचि पौलहुँ मुदा देखबामे आयल- सैह अछि- बड़ अजगुत देखलमे।"

'बड़ अजगुत देखल..'

 

की मथै छी?

"... हमर मैथिली.. जमाय-ससुरक बहिकिरनी बनबा लेल विवश अछि... किछु सामाजिक कार्यकर्ताक आमदनीक साधन बनल अछि।"

दर्शन-सुदर्शन

"...चलू महाकवि विद्यापतिक चेतना समिति स्थित वासा...

.. 'अयं यौ के छथि नेपालवला नाटककार?'

'महेन्द्र मलंगिया दिया पूछै छी सर।'

..'दऽ दियौ ओही नाटककारकेँ एहि बेरुक चेतना पुरस्कार।'

..'मुदा हुनकासँ सीनियर...'

'ककरो तँ देबे करबै, छोट होइ की पैघ।..'

'कवि-सम्मेलने बन्न भऽ जयबाक चाही। लोक रहिते ने छैक ओहिकालमे। ... होयबाक चाही तँ टाका जुटबियौ ने।... मैथिली अकादमी.. कवि-सम्मेलनक नामपर पाँच हजार गछलक मुदा देलक दुइये हजार। बाँचत कतऽ सँ डाँरेसँ घाटा लागि गेल छल।.. छपलाहा किताब सभमे दीवार लागल छै.."

.. नहि भागू यौ, यात्रीजी एकर स्थापना कऽ भागि गेलाह। आइ हुनकर फोटो टांगल छनि मुदा संस्थापकक दावेदार कैक गोटे भऽ गेलाह...

 

'गोबरगणेश'

बोर्ड लागल टाटपर, सूतल छी खाटपर

मैथिली अकादमीक दलानपर। ओहो वैह फगुआ गाबि रहल छह। दुनूटा भाषणमालामे अपन परामर्शीयेकेँ भाषणबाज बना देलकौह कहाँदन तेसरसँ सभटा पोथीक सम्पादन करा रहल अछि (अशोक, तारानन्द वियोगी मोहन भारद्वाजकेँ लक्ष्य कऽ)

तावत काल

'एहने सन प्रयोग साहित्य अकादेमी सेहो कयलक जे जकरा होटल रहतैक सेहो परामर्शदातृ समितिक सदस्य बनि सकैत छथि।.. पटनोमे खूब कचरम कूट होइत। लेखक संघकेँ सम्मानक टाटक नहि करय पड़ितैक।.. मैथिली लेखक संघ.. खाली अभिनन्दन-वन्दन, ने कोनो स्पन्दन ने कोनो गर्जन। मात्र कलहंत जकाँ अभावक अरण्य-रोदन।"

गोलैसी- 'अर्थात्'

जाहि आलोचनाक पोथीकेँ लोकोक्तिक बैसाखी नहि चला सकल, जाहि आलोचनाकेँ 'अखियासल ', 'बेसाहल ', 'भजारल ' (रमानन्द झा 'रमण' अर्द्ध-समालोचनाक पोथी सभ) नहि भजा सकल तकरा गोलैसीक प्रतिमाने टा मानल जा सकैछ ने!

सीडी समीक्षा

'रमण'जी ओतऽ जायब जरूरी अछि, असक छथि... भारद्वाजजीक लेखनीकेँ सक्रिय करबा लेल पंचलीटरा मोबिल लेबऽ लेल घेंटाजोड़ी कयने अशोक तारानन्द वियोगी नचिकेता मालिकसँ नेहोरा कऽ रहल छलाह मुदा मुंशी रामलोचन कहि देलथिन जे एक बेर देलियनि (मोहन भारद्वाजकेँ प्रबोध सम्मान चयन समितिमे रहितो प्रबोध सम्मान लेबा/ देबाकेँ लक्ष्य करैत) तँ उत्फाल मचि गेल छल आब देबनि तँ मिथिलो दर्शन लोककेँ नहि करा सकबैक।.. जीवकान्तक जोगीरा अमरक विरहाक मिक्सर होयत, भीमनाथक गुलगुल्ला रामदेवक वाइप्रोडक्टक लीला होयत होयत पन्ना-इन्दिरा-नीता-सुशीला वीणाक झंकार.. मन्त्रेश्वरजीक बाँहि पकड़ल- फरब-फुलायब। मुदा सख-सेहन्ता नहि पूरल। .. नर इन्द्र लग गेलहुँ .. मुदा तँ आर किदन निकललाह।... हुनका हीरा-पन्नासँ फुरसतिए नहि। .. अग्निपुष्प थिक, एकरेसँ शृंगार करू.. कुणाल, सुकान्त साकेतानन्द.. सभ समलैंगिक छथि.. विदितजी.... ओ तँ स्वयं रसिया छथि। प्रवासीजी संग संध्यावंदन करताह, ठकुराइन संग युगलबंदी करताह...' 

पाहुन इन्द्रकान्त झा.. झाजी वीरेन्द्र.. तार नेपालक उपराष्ट्रपतिसँ सोझे सोझ जुड़ल.. पं. योगानन्द झा.. वैद्यनाथ मिश्र, गणेश झा.. हमर मान-मर्दन करैत छथि..

बच्चा ठाकुरक नेतृत्वमे सुरेन्द्रनाथ, केदार कानन, रमेश चिचिआइत...फेर अजित (आजाद) बाजय लगलाह- .. जतऽ होइ ततहिसँ एस.एम.एस. कऽ एहि सरकारक ओहिना मदति करियनि जेना राजमोहन झा प्रेमशंकर सिंहकेँ एस.एम.एस. बलपर सरकारक दर्जा दैत रहलियनि।

'करिया कक्काक कोरामिन'

बुद्धिक बखारीक वर्गीकरण

मात्र दू गोत्र (भारद्वाज-रमण) पाँजिक लेखक छोड़ि कऽ, कारण मैथिलीक पैथिलॉजिस्ट श्रेणीमे अबैत छथि।

'लीव इन रिलेशन'सँ जनमल सुन्नर नेना

पटनाक विख्यात समितिक विषपिपड़ी पी.आर.. साहित्यकार एहू समारोहमे शामिल भऽ नेपाली साहित्यकार-समाज संग तेहन ने राजनीति कयलनि जे क्षुब्ध भऽ लोकनि बटुआमे आनल 'नेरू' (नेपाली रुपया) सहयोग राशि ओहिना आपस अपना संगे लऽ गेलाह।

'सरकार' लिंग परीक्षण

मैथिलक एक पुरुषवेश धारीकेँ अपन 'सरकार' (विनोद कुमार झा केँ लक्ष्य करैत) बनौलह मुदा एक्कोटा काज पुरुषवला कऽ सकलथुन। कहियो आचार्य अरिष्टनेमीक बहिकिरनी बनि दिन कटलनि तँ आब एकटा संघमे द्रोपदी बनि सौभाग्यवती बनल छथुन।

व्यंग्य लिखबाक व्योंत

आचार्य अरिष्टनेमीक चर्च एतहु भेल अछि।

लुटन... आचार्य अरिष्टनेमी (चन्द्र नाथ मिश्र 'अमर') क दरबारी बनि मंच सभक तिरपेच्छन कयलह।...

कोरामे नेना, नगरमे सोर

' गोलैसिये ने छै हौ जे पुरना सरकार ठकैत-ठकैत सत्ता रूपी गाछसँ तुबि कऽ नीचाँ खसि पड़ल मुदा भेद नहि खोललक आब देखह जे नवको सरकार वैह धुन गाबि रहल अछि।

पुरस्कार विज्ञानक फलाफल

योगानन्द चुटकी लैत बजलाह- 'अहाँ डाक्टर साहेबसँ पोथी विमोचन करेबै मिश्रटोलाक श्रीमान् हुनकर ओझाजीक वर्चस्व स्वीकार नहि करबैक तँ गाछसँ सेव नीचे मुँहे किए खसैत छैक से कोना बुझबै।'...

वीणा-वादनक अभ्यासक संगहि 'इदं रसे, इदं गुद्दे' सम्बोधनसँ मिश्रजी ओझाजीकेँ प्रसन्न करबाक प्रयास करथु...

 

 

 

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।