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२.१७.गजेन्द्र ठाकुर- शरदिन्दु चौधरीक संस्मरण साहित्य [बात-बातपर बात (I-IV)]

गजेन्द्र ठाकुर

शरदिन्दु चौधरीक संस्मरण साहित्य [बात-बातपर बात (I-IV)]

 

"बात-बातपर बात खण्ड-"; "मर्मान्तक-शब्दानुभूति (बात-बातपर बात खण्ड-)"; "हमर अभाग: हुनक नहि दोष (बात-बातपर बात-)" "साक्षात् (बात-बातपर बात-) ई चारिटा पुस्तिका शरदिन्दु चौधरीक संस्मरणात्मक निबन्धक संग्रह छन्हि, पहिल २०१९मे दोसर २०२०मे आ तेसर आ चारिम २०२१मे प्रकाशित भेल।

संगहि २००२ मे प्रकाशित "जँ हम जनितहुँ" हुनकर हास्य-व्यंग्य युक्त संस्मरणात्मक निबन्धक संग्रह छन्हि जे पुरस्कार-लोलुप मूल-धाराक साहित्यकारक नामसँ युक्त अछि आ हुनकर सभक किरदानी तँ तेहेन छन्हिये जे ओ संस्मरण हास्य-व्यंग्यक संग्रह अनायासे बनि जायत, मुदा ई पोथी शुद्ध संस्मरणक पोथी नै थिक, ऐमे नोन-मिर्च सेहो अछि मुदा कम मात्रामे। एतऽ ई संतोषक विषय अछि जे शरदिन्दु जी केँ समानान्तर धारामे एक्कोटा लोलुप व्यक्ति नै भेटलन्हि।

एकर अतिरिक्त २००५ मे प्रकाशित "बड़ अजगुत देखल", २०११ मे प्रकाशित "गोबरगणेश" आ २०१६ मे प्रकाशित "करिया कक्काक कोरामिन"केँ करिया कक्का व्यंग्य शृंखला कहि सकैत छी, कारण ऐ तीनू पोथीमे खट्टर कक्का सन करिया कक्का विराजमान भेटता, मुदा एतौ किछु आलेखमे करिया कक्का नै छथि, जेना गोबरगणेश संग्रहक 'तावत काल','गोलैसी- अर्थात्' आ 'सीडी समीक्षा '। मुदा ई तीनू संग्रह सेहो मोटा-मोटी संस्मरण आधारित अछि मुदा नोन-मिर्चक सङ आ सेहो पुष्टसँ। एतऽ 'करिया कक्काक कोरामिन' क लेखकीय मे ओ लिखै छथि जे (करिया कक्का)केँ 'जे फुरेलनि सैह कयलनि मुदा ई ध्यान अवश्य रखलनि जे... अश्लीलताक आरोप नहि लागय..." मुदा ऐ पोथीसँ ५ साल पूर्व प्रकाशित 'गोबरगणेश' क 'सीडी समीक्षा ' मे साहित्य अकादेमी द्वारा कथित लिटेरेरी एसोशियेशन सभ द्वारा चयनित मैथिली परामर्शदात्री समितिक अध्यक्ष विद्यानाथ झा 'विदित'क सम्बन्धमे लिखल गेल अछि, '.. ओ तँ स्वयं रसिया छथि। प्रवासीजी संग संध्यावंदन करताह, ठकुराइन संग युगलबंदी करताह...'  ओही पोथीक 'तावत काल' आलेखमे लिखल गेल अछि- 'एहने सन प्रयोग साहित्य अकादेमी सेहो कयलक जे जकरा होटल रहतैक सेहो परामर्शदातृ समितिक सदस्य बनि सकैत छथि।" तावत काल केर वर्णन अश्लील नै अछि मुदा सीडी समीक्षाक विवरण स्पष्टतया अश्लील अछि। ई स्पष्ट अछि जे साहित्य अकादेमी द्वारा कथित लिटेरेरी एसोशियेशन सभ द्वारा चयनित मैथिली परामर्शदात्री समितिक सभ अध्यक्ष मैथिलीकेँ रसातल पहुँचेबाक काज केलन्हि अछि मुदा एकटा महिलो ओइमे छथि तँ ओ सत्य हरिश्चन्द्र किए बनथु? आ ओइपर सेक्सिस्ट कमेण्ट ईएह देखबैत अछि जे लेखक बा सम्पादक साहित्यमे आ सार्वजनिक स्थलपर महिला बा पुरुषेत्तर लिंगक प्रति सम्वेदनशील नै छथि। 'करिया कक्काक कोरामिन'मे 'सरकारक लिंग परीक्षा ' मे सेहो ई असम्वेदनशीलता देखल जा सकैए जतऽ 'स्त्री-गुणसँ परिपुरित सरकार' विनोद कुमार झा [देखू 'ईर्ष्या द्वेष नहि- समन्वय चाही'- 'हमर अभाग: हुनक नहि दोष (बात-बातपर बात-)' पोथीमे- सरकार (विनोद कुमार झा, आब कवि सम्राट)] लेल प्रयुक्त कएल गेल अछि।

 

 

बात-बातपर बात खण्ड-

 

"बात-बातपर बात खण्ड-" "श्रेय आ प्रेय" मे मैथिलीक पुनः बिहार लोक सेवा आयोगमे प्रवेश आ ओकर पाठ्यक्रमक सम्बन्धमे श्यामानन्द चौधरीक योगदानक ओ चर्चा केलन्हि। शरदिन्दु जी ओ पाठ्यक्रम जे आयोग कार्यालयमे हरा गेल रहै, आयोगक गेटपर स्थित "झा जी बुकसेलर की दुकान" क नामसँ दोकान चलबैला स्व. चौधरी जी सँ लऽ कऽ श्यामानन्द चौधरीजी (तत्कालीन विशेष अधिकारी, बिहार लोक सेवा आयोग)केँ देलन्हि। श्यामानन्द चौधरी जी २० दिसम्बर २०१८ केँ कहलनि जे कोनो संस्था (मैथिलीक) ऐ सम्बन्धमे सरकारकेँ कोनो लिखित प्रस्ताव नै देलकै। मुदा चेतना समिति विधिवत एकर श्रेय लैत प्रसन्न्ता व्यक्त केलक! "हम आभारी छी"मे वैद्यनाथ चौधरी 'बैजू' द्वारा प्रेस रिलीज/ घोषणाक बादो २०१० क 'मिथिला रत्न' सम्मान सूचीसँ शरदिन्दु चौधरीक नाम बादमे हटा देबाक चर्च अछि। ई संस्था छल साहित्य अकादेमी द्वारा कथित लिटरेरी एसोशियेशन रूपमे मान्यता प्राप्त विद्यापति सेवा संस्थान, सम्मान निर्णायक मण्डलमे रहथि डॉ. भीमनाथ झा, डॉ. फूलचन्द्र मिश्र 'रमण' आ कमलाकान्त झा, जँ शरदिन्दु चौधरीकेँ सम्मान देल जायत तँ ओ जहर खा लेता, ई धमकी देलन्हि साहित्य अकादेमी द्वारा कथित लिटरेरी एसोशियेशन रूपमे मान्यता प्राप्त विद्यापति सेवा संस्थानक अध्यक्ष पं चन्द्रनाथ मिश्र 'अमर' "हम नहि कहि सकैत छी..." मे साहित्य अकादेमी द्वारा कथित लिटरेरी एसोशियेशन रूपमे मान्यता प्राप्त करबा लेल असफल भेल संस्था 'मैथिली लेखक संघ ' आ विनोद कुमार झा केर राजनीति केर चर्चा अछि। पंजीयनमे ओना विनोदजीक अलाबे सभक बबुआने बनल रहबाक चर्चा अछि। मंत्रेश्वर झा पर मीटिंगमे अनेक आरोप लगाओल जयबाक, प्रेमलता मिश्र 'प्रेम', इन्दिरा झा आ पन्ना झा केर मूर्तिये सन व्यवहार (बुद्धिजीवी बनबाक लौलमे) केर चर्चा अछि। मैथिली लेखक संघमे आब स्थायी अध्यक्ष आ स्थायी सचिव छथि मुदा संघ स्वयं बिलायल अछि। से अकादेमीक कथित लिटेरेरी असोसियेशन सभक सेहो यएह खेरहा छै। विद्यानाथ झा 'विदित' तत्कालीन साहित्य अकादेमीक ५ साल धरि रहल मैथिली पदाधिकारी सेहो शरदिन्दुक 'सक्रिय सहयोग'(!)क अभिलाषी रहथि। "हमर दुर्गुण आ क्रोधक दुष्प्रभाव"मे लहेरियासरायक एकटा युवा लेखक/ पत्रकारक छद्म नामे अखबारमे लिखबाक चर्चा अछि जे शरदिन्दु साहित्य अकादेमी, मैथिली अकादमी आ चेतना समितिकेँ भयादोहन कऽ कमाइत छथि। चेतना समितिक सम्बन्धमे ओ लिखै छथि- "... हम पत्रकार नहि रहितहुँ तँ हमरा संग किछु गोटे मारपीट सेहो करितथि। समितिक एकटा पूर्व सचिवक विरोध कयलापर हुनक कोना अभद्र रूपे गंजन भेल छल से लोककेँ बूझल छैक तथापि से स्थिति हमर नहि भेल।"

"समय-सालक जन्म आ साहित्यिक-राजनीतिक कुचक्र"मे विनोद बिहारी लालक पत्रक चर्चा अछि, ओ लिखलखिन्ह जे चलू 'सम्पादक रूपमे इतिहासमे अहाँक नाम अयबाक सख पूरा भऽ जायत।' २००१ ई.मे स्व. बबुआजी झा अज्ञातकेँ 'प्रतिज्ञा पाण्डव' महाकाव्यपर साहित्य अकादेमी पुरस्कारक विरोधमे राजमोहन झा द्वारा अभियान आ झूठ प्रचार जे ओ पोथी छपबे नै कएल अछि, ओइ हस्ताक्षर अभियानमे शरदिन्दु हस्ताक्षर नै केलन्हि आ तइपर राजमोहन झा 'अंतिका'मे अनाप-शनाप लिखलन्हि तकर चर्च अछि। एतऽ ई बता दी जे शरदिन्दु ओ छपलाहा पोथी ऊपर केलन्हि आ पटनाक अपन दोकानमे ओकरा प्रदर्शितो केलन्हि। मुदा फेर राजमोहन झाक चूक मानबाक आ शरदिन्दुक हुनका प्रति मोन फेरसँ निर्मल हेबाक चर्चा अछि। "नोकरी नहि करबाक निर्णय"मे अग्निपुष्पक चर्चा अछि, "एहन काज तँ अग्निपुष्प सन-सन पत्रकार कऽ सकैत छलाह जे आर्यावर्तमे हाथि कटबाक धमकी भरल स्वर निकालथि आ जागरणमे नांगरि सुटकाकऽ सेवानिवृति धरि काज कयलनि।" अहीमे प्रेसक मैनेजर सह कम्पोजीटर शिव कुमार ठाकुरक चर्चा अछि- "जे-से, ओ कम्पोजिटरसँ मालिक भेलाह- हमरा यैह प्रसन्नता अछि।" हमरा विचारे ओ शिवकुमार ठाकुरक प्रति कने बेशी 'हार्श' भऽ गेल छथि, चेतना समितिक विद्यापति भवन, बहुत गोटे मात्र हुनके (शिवकुमार ठाकुरक), पोथीक दोकान दुआरे जाइ छल, चेतना समितिकेँ सेहो नै अरघलै, अपने तँ ओ मैरेज हॉल बुक करैमे लागल रहैए, से पोथी किए बेचत, मुदा शिवकुमार ठाकुरक दोकान बन्न जरूर करबा देलकै। जे.. से.. "जीवन युद्धक भूमिका"मे मित्र दिलीप, अजित आजाद, अभय झा, पं. ताराकान्त झा, मंत्रेश्वर झा, बासुकी बाबू क सहयोगी, मदति केनिहार आ परामर्श देनिहारक रूपमे चर्चा अछि। "सम्मानक भूख"मे मूलधाराक पुरस्कार लोलुप साहित्यकारक वर्णन भेल अछि- "आदरणीय गोविन्द बाबूक खिस्सा प्रायः लोककेँ बुझले छैक जे पुरस्कार नहि भेटलापर मैथिली बाजब छोड़ि हिन्दीमे बाजल करथि जे 'मैथिली बईमानो की भाषा है' "मैथिलक अविश्वसनीयता" मे मैथिल तांत्रिक बटेश महराज जीक 'कामाख्या संदेश'(मासिक) छपबाइयो कऽ ३० हजारसँ बेशी टाका नै देबाक चर्चा भेल अछि। "तीत लागय वा कड़ू"मे उदयचन्द्र झा 'विनोद' १५७५ टाका नै देलखिन्ह मात्र ११०० टाकामे २०० पोथी लऽ गेलखिन्ह शेष ने पाइये देलखिन्ह ने पोथीये लऽ गेलखिन्ह, तकर चर्चा अछि।

 

 

मर्मान्तक-शब्दानुभूति (बात-बातपर बात खण्ड-)

 

 

"मर्मान्तक-शब्दानुभूति (बात-बातपर बात खण्ड-)" "महाकालक वज्राघात' कोरोना लाकडाउनमे २६.०३.२०२०केँ लिखल गेल ४१ बर्ख पुरान घटनाक वर्णन अछि, मिश्रजीक बैंकक पाईक उनटफेरमे फँसब, नोकरी जायब, मायक मानसिक स्थितिक खराप हएब आ फेर हुनकर मृत्यु। "शेखर"  अवसानमे पिताक चर्च अछि, प्रभासजी, मुखियाजी, बटुक भाइ केर बरमहल सुधांशु शेखर चौधरीजी सँ भेँट करबा लेल अयबाक चर्चा अछि मुदा "हँ, ओ अंतिम साल भरि प्रवासी जीसँ गप्प करय चाहथि मुदा से सम्भव नहि भेलनि। हमरा कहलोपर प्रवासीजी भेँट नहि कयलथिन अन्त धरि।" माताक मृत्युक वर्णनक अगिला संस्मरण पिताक मृत्युक ई विवरण कोरोना लाकडाउनमे २७.०३.२०२०केँ लिखल गेल। "अग्रलेखसँ भेंट"मे मिथिला मिहिरमे शरदिन्दुजीक आगमन (ओना नियुक्ति आर्यावर्तमे) आ तकरा भीमनाथ झा द्वारा अपन पदोन्नत्तिक मार्गमे बाधक बुझल जयबाक चर्चा अछि आ भीमनाथ झा ऐपर 'लंगूर' कविता लिखलन्हि जे सुधांशु शेखर चौधरी आ शरदिन्दु चौधरीकेँ बेधलकन्हि । भीमनाथ झाकेँ लगलन्हि जे हुनकासँ जूनियर गोकुल बाबूकेँ भीमनाथ झासँ टपा कऽ सहायक सम्पादक बना देल गेल आ सुधांशु शेखर चौधरी अपन पुत्र शरदिन्दु चौधरीकेँ नोकरी दिआबय खातिर से बर्दाश्त केलन्हि, जखनकि गोकुल बाबूक पैरवीकार रहथि कुमार साहेब (अखबार-प्रेसक मालिक)क नाना आ गोकुल बाबू रहथि कुमार साहेबक मौसा।  एम्हर गोकुल बाबू धोती-कुर्ता छोड़ि सफारी सूटमे आबय लगलाह, से भीमनाथ झाकेँ आर असह्य भऽ गेलनि, मुदा फेर हुनकर नोकरी मिथिला विश्वविद्यालयमे लागि गेलनि। सुधांशु शेखर चौधरी (शरदिन्दुक पिता जिनका ओ लालकक्का कहैत छला) २ अक्टूबर १९८२केँ सेवानिवृत्त भऽ गेलाह आ शरदिन्दु आ दिलीप (दिलीप सिंह झा) गोकुल बाबूक टेम्पो बनि रहि गेलाह। (आर्यावर्त, इण्डियन नेशन आ मिथिला मिहिरक राजनीति आ कोना ई राष्ट्रीय अखबार सभक पटना आगमनक बाद धराशायी भऽ गेल! सुनै छिऐ भाङ घोटल जाइ छलै ओतऽ बेरू पहर, किछु आर संस्मरण ऐपर एबाक चाही!) "सफलता ओ विफलताक कारण" मे पं हीरानन्द झा शास्त्री आ स्वं गजेन्द्र नारायण चौधरीसँ भेटल सम्पादकीय दायित्व आ अधिकारक ज्ञान भेटबाक चर्च अछि। मैथिलीक लेखक आ हिन्दीक पत्रकारक बेइमानीक चर्च अछि जे साहित्य अकादेमीक गोष्ठीमे मैथिली पत्रकारिताक श्रेय देसकोस आ विनोद कुमार झा केँ देलनि आ मिथिला दैनिकक बेरमे 'जँ ओकरा दैनिक मानि लेल जाय' कहि ओकर उपलब्धिकेँ न्यून कऽ देलथिन। पाखण्डी युगक प्रतिनिधि रचनाकारक रूपमे बैद्यनाथ विमल केर चर्चा अछि आ कोनो ने कोनो सोंगरपर चतरयवला आलोचक/ सम्पादकक रूपमे रमानन्द झा 'रमण'क।

 

 

हमर अभाग: हुनक नहि दोष (बात-बातपर बात-)

 

'भूमिका- श्यामपक्ष ओ हमर लेखन' मे ओ लिखैत छथि "हम जे लिखैत छी से प्रायः क्यो नहि लिखैत छथि। हँ कहियो काल लक्ष्मण झा 'सागर' क किछु-किछु एही तरहक आलेख पढ़बाक सौभाग्य भेटैत अछि।" "हमर अभाग: हुनक नहि दोष" मे 'मैथिलीपुत्र प्रदीप प्रभुनारायण झा ' पर निकलल मैथिली अकादमी पत्रिका विशेषांकक चर्चा अछि, काज सभटा शरदिन्दु जी केलन्हि सम्पादकमे नाम दिनेशचन्द्र झा केर छपलनि आ मेहनति केर मोल २८० टाका शरदिन्दुजीकेँ भेटलन्हि। "सम्पादकीय आ पाठकीय पत्र"मे बिनु नाम लेने रमेशक चर्चा अछि जे अबोध आ दुर्बोध मिश्रक नामसँ पाठकीय पत्र पठाबथिन आ शरदिन्दु आ हुनकर पिताक विषयमे अनाप-शनाप लिखैत छलाह कारण शशि बोध मिश्र 'शशि'क रचना समय-सालमे छपलासँ ओ आहत छलाह। बादमे कोना ओ केदार काननक पैरवीसँ पूर्वोत्तर मैथिलमे (जखन शरदिन्दु ओतऽ सम्पादक बनलाह) छापल गेलाह, ".. आब.. ओ जमीनपर छथि। नीक लिखैत छथि।" मधुकान्त झासँ प्राप्त पैरवीक आधारपर कोनो प्रोफेसर साहेबक कविता समय-सालमे छापलखिन्ह मुदा ई रमेश सन नीक नै लिखैत छथि, बड्ड दब कविता लिखैत छथि मुदा साहित्य अकादेमीक पुरस्कारक अन्तिम राउण्ड धरि तीन बेर पहुँचलाह- शरदिन्दु स्मरण करैत छथि। "मैथिलीक बदलैत स्वरूप"मे श्याम दरिहरेक पहिने अपने, फेर पोथी आ अन्तमे मैथिलीकेँ स्थान देबाक चर्चा अछि। "पैघत्वक अकारण प्रदर्शन किएक"मे कीर्तिनारायण मिश्र द्वारा 'अर्थान्तर' पोथी छपयबाक आ मोहन भारद्वाजक सोझाँमे मात्र ९००० टाका देबाक आ शेष ३५०० टाका नै देबाक चर्चा अछि जखनि कि सभटा पोथी हुनका घरपर पहुँचबा देल गेलन्हि। अहीमे साहित्य अकादेमीक 'मीट द ऑथर्स' केर चर्चा अछि जे ओकरा द्वारा मान्यता प्राप्त कथित लिटेरेरी एसोशियेसन चेतना समितिक प्रेक्षागृहमे आयोजित भेल। "कीर्ति बाबू सेहो हिन्दी-मैथिलीमे बजलाह। दावी जे हिन्दी-मैथिली दुनूक हम लेखक छी मुदा राजकमल-यात्री छोड़ि ककर हिन्दीमे कोन स्थान रहलैक से देखल-बूझल अछि। ... हमर बेधक आ सटीक प्रश्न छल- अपने एतेक श्रेष्ठ साहित्यकार छी जे आइ अपनेपर साहित्य अकादेमी सन शीर्ष संस्था ई कार्यक्रम आयोजित कयलक अछि तखन अहाँ अपन नामपर जीविते किए 'कीर्तिनारायण मिश्र सम्मान' प्रारम्भ करौलहुँ, की अपनेकेँ भय अछि जे मरणोपरान्त क्यो स्मरण नहि करत तेँ जीविते अपन प्रचार-प्रसार देखबाक सेहन्ता छल? हमर एहि प्रश्नपर ओ विचलित भऽ उठलाह आ बजलाह- हमर पारिवारिक सदस्यक इच्छा रहनि। .. चेतना समितिक सम्पूर्ण पदाधिकारी एकर विरोध करय लगलाह आ ओतऽ स्वर गूँजय लागल- ई सम्मान कोनो हालतिमे निरन्तर चलैत रहत। एकर कारण रहैक ओ चेतना समितिकेँ पुनः डेढ़ लाख टाका पुरस्कार राशि बढ़यबा लेल टाका लऽ कऽ आयल रहथिन।" चेतना समिति द्वारा पुरस्कारक नामपर, पुरस्कार जिनका नामपर देल जाइत अछि हुनका आ हुनक परिवारसँ पाइ दोहनक ई एकटा फर्स्ट हैण्ड अकाउण्ट अछि, एहेन आर संस्मरण सोझाँ एबाक चाही।

"बइमान होयबाक घोषणा"मे 'साहित्यिकी ' (सरिसवपाही)पाहीक कोनो जगदीश मिश्रक चर्चा अछि, जे ख्यात साहित्यकार अशोककेँ १० टा पोथी शरदिन्दुजीकेँ देबा लेल कहने रहथिन्ह मुदा ओ विद्यापति भवनमे शिव कुमार ठाकुरकेँ दऽ देलन्हि आ ओ पोथी बेचिकऽ पाइ हुनका दऽ देलथिन्ह। मुदा ई जगदीश मिश्र माइक पर घोषित केलन्हि जे शरदिन्दु पोथी बेचि कऽ पाइ नहि देलनि आ ई सूचना रमानन्द झा 'रमण' शरदिन्दु जीकेँ देलन्हि। एक गोट घटना मोन पड़ैत अछि जे एक गोट रचनाकार अइ संस्थाकेँ 'सोइतिकी' कहैत छलाह आ जखन हुनकर पोथी ई संस्था छापि देलकन्हि तखने ओकरा 'साहित्यिकी ' कहलन्हि। 'हमर  अभाग: हुनक सौभाग्य"मे भीमनाथ झा द्वारा फूलचन्द्र मिश्र 'रमण'केँ लेसि देबाक चर्चा अछि, कथित लिटरेरी असोशियेशन चेतना समिति द्वारा कोनो स्मारिकामे (स्मारिकाक राजनीति!) सत्यनारायण मेहता जी हुनकर रचना छाँटि देने रहथिन्ह। "मैथिलीक राजनीतिक कृपा"मे भारतीय भाषा संस्थानक अजित मिश्र आ अदिति मुखर्जीक वर्णन अछि। भारतीय भाषा संस्थानक 'सेमीनार सह वर्कशाप' मे हिनका आ मधुकान्त झाक नामपर दोसर गोटे द्वारा पाइ उठा लेबाक चर्चा अछि आ हेतुकर झाक पुत्र तेजकर झा केर सूचना जे शेखर प्रकाशनकेँ भारतीय भाषा संस्थानक अनुवाद मिशनक काज नै भेटौक से मैथिलीक २ टा विद्वान संस्थानक मीटिंगमे कहलन्हि। ९ टा पोथीक अनुवाद, प्रूफरीडिंग, प्रकाशन आ वितरणक भार शेखर प्रकाशनकेँ भेटल रहै, मुदा संस्थान एक-दूटा चमचाक कहलापर सम्पादकक चयन बिना शरदिन्दुसँ राय लेने चुनि लेलक, आ ओइ प्रकाशक-सम्पादकक मीटिंगमे हुनका नै बजाओल गेल। बादमे किछु काज नोवेल्टीक नरेन्द्र कुमार झा केँ भेटलन्हि, फेर पं सीताराम झाजीक पौत्र श्री चन्द्रनाथ झा जी हिनका कहलखिन्ह जे हुनकासँ ओ अनुवाद करा लेलखिन्ह आ कनी-मनी दऽ कऽ टारि देलखिन्ह। "ईर्ष्या द्वेष नहि- समन्वय चाही"मे परमेश्वर कापड़ि द्वारा ५ हजार टाकाक किताबक लऽ कऽ राम भरोस कापड़ि भ्रमरक कहलो उत्तर पाइ नै देब केर चर्चा अछि। केदार काननक कएकटा शिष्य सेहो एहिना केलखिन्ह। तारानन्द वियोगीक चर्चा अछि जे फेसबुकपर जाति विशेष (ब्राह्मण) लेल 'सभ बापूत' शब्दक प्रयोग खुलि कऽ करैत छथि।  " .. ओ जाहि परिचर्चामे  भाग लैत छथि ओहूमे ७० प्रतिशत वैह लोक भाग लैत छथि (ब्राह्मण) जकर पुरुखाकेँ ओ उकटैत छथिन... हम लोहा मानबनि श्री वियोगीजीक तखन जखन अपना सदृश बीसो टा व्यक्तित्वक निर्माण ओ अपना समाजसँ ठाढ़ कऽ देखाबथु। मात्र उकटा पैंची कयलासँ...मुदा हुनकर ई लिखब जे ओ परमेश्वर कापड़ि जीकेँ कहलनि- "अहाँकेँ एहिठाम बाँसमे बान्हि कऽ पीटी तँ कोनो हर्ज नहि ने। ओतऽ सरकार (विनोद कुमार झा, आब कवि सम्राट- व्यंग्यात्मक प्रयोग) आ युवा कवि बालमुकुन्दजी सेहो छलाह। "- मुदा बाँसमे बान्हि कऽ पीटी तँ कोनो हर्ज नहि ने- एकर कोनो तरहेँ समर्थन हम नै कऽ सकैत छी।

 

 

 

साक्षात् (बात-बातपर बात-)

ऐमे शरदिन्दुजी स्मरण करैत छथि जे केना ".. एक गोटा हमरा पुरस्कार प्रक्रियाक स्तरहीनताक गप्पक क्रममे एहिमे लागल लोक सभकेँ माय-बहिनकेँ गारि-पढ़ैत कहलनि जे कोनो हालतिमे साहित्य अकादमिये वा कोनो पुरस्कार हम नहि लेब, मुदा लगले छओ मासक अभ्यंतर पुरस्कार ग्रहण कऽ गदगद भऽ गेलाह। हम पूछैत छी एहिसँ हुनकर क्षमता, विद्वतामे कतेक अभिवृद्धि भेलनि। तखन अनेरे अर्र-दर्र बजने की लाभ! सेटिंग करैत रहू आ गारियो पढ़ैत चलू।" मैथिली साहित्यमे हिनका किरण, मधुप, सुमन, मणिपद्म, जयकान्त मिश्र, प्रभास, गुंजन, मन्त्रेश्वर, अमर, जीवकान्त, गोविन्द बाबू, बासुकी बाबू, प्रवासी, राजमोहन, बच्चा ठाकुर, भीम बाबू, रामदेव बाबू,शेखरजी, हेतुकर बाबू, अशोक, शिवशंकर श्रीनिवास, उषाकिरण खान, शेफालिका वर्मा, श्यामानन्द चौधरी, रंगनाथ दिवाकर, कमलमोहन चुन्नू, अजित आजाद, अशोक मेहता, सुरेन्द्र राउत, रमण कुमार झा, मुकुन्द मयंक आ बालमुकुन्द प्रभावित केलकन्हि। ओ ईहो कहैत छथि जे ".. पत्रकारिता माने आब बलिदान बूझल जाय लगलैक अछि। क्यो कहैत छथि- हमरा पत्रिका निकालबामे आठ-दस लाख खर्च भऽ गेल। युवा ललित नारायण (मिथिला मिरर) एही वयसमे रिपोर्टिंगक क्रममे कहैत छथि- हम हड्डी गला रहल छी। जखन कि हमरा हिसाबें एखनेसँ प्रोफेशनल पत्रकार भऽ गेलाह अछि ओ।"

ओ कहैत छथि "जे प्रकाशक ओकरा कहैत छैक जे अपन पाइसँ अनकर किताब छापय आ मुद्रक ओकरा कहैत छैक जे पाइ लऽ कऽ काज करय। आ जे ई दुनू काज करय से अपनाकेँ मुद्रक आ प्रकाशक दुनू कहबैत अछि... शेखर प्रकाशन ई दुनू काज दुनू स्तरपर कयलक अछि। हमरा जनैत यैह काज पूर्वमे पुस्तक भण्डार आ ग्रन्थालय सेहो करैत छल।... कुल ५२ पोथी अपन दमपर छपने छी। आधा-आधी खर्चपर सेहो लगभग तीन दर्जनसँ बेसी पोथी छपने छी।..."

 

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