विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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२.१०.गौरीनाथ- शरदिन्दु चौधरी हेबाक माने

गौरीनाथ

शरदिन्दु चौधरी हेबाक माने 

 

शरदिन्दु चौधरी। जिनकर बात मे नोनक कमी आ मिरचाइक तासीर खूब कड़गर आ झाँसिगर लागि सकैत अछि, मुदा मिठास तकै लेल बड़ परिश्रम कर' पड़य। कतेको गोटे लेल माहुर चढ़ाओल व्यंग्य-वाण जेना हिनक जिह्वा पर सदति तैयारे रहैत छनि! ई नइँ जे दुर्वासा महाराज जाइत-जाइत अपन तामसक बोरा बुद्धमार्गक कोनो गाछ पर सँ हिनके माथ पर उझलि गेल छलाह! साफ-साफ बात करयवला एहन सहृदय आ सहयोगी मानुस पटनाक मैथिली-परिसर मे कमे भेटताह। विद्यापति भवनक विद्यापति बाबाक बर्खी मे अबैत-जाइत मैथिलीक साहित्यकार लोकनि भने हिनका सँ बिदकैत होथि आकि केओ-केओ आरोप लगबैत होथि जे शरदिन्दु जी "साहित्य अकादेमी, मैथिली अकादमी आ चेतना समिति केँ भयादोहन क' " कमाइत छथि!... मुदा सत्त तँ ई अछि जे शरदिन्दुजी अपन परिश्रमक कमाइ धरि कतेक मिठबोलिया मैथिली साहित्यकारक उधार खाता मे बोहाबैत रहलाह अछि। अक्कत तीत आ तीख बजैत-बजैत हुनक स्वास्थ्य तते खराब भ' गेलनि जे बेसी काल बीपी बढ़ल रहै छनि, मुदा मैथिलीक तथाकथित साहित्यकार लोकनि लेलधनसन! एहन कय टा स्वनामधन्य कवि-साहित्यकार भेलाह जे एक निश्चित राशि तय क' हिनका सँ किताब छपा लेलनि आ पाइ देब' बेर मे अपन मैथिली सेवी हेबाक बखान करैत हिनका 'चूना'लगा गेलाह। एहन-एहन अनेक लेखक सँ पीड़ित शरदिन्दु जी मैथिलीक खाँटी पाठक आ छात्र-छात्रा लोकनिक प्रिय छथि तँ अपन श्रम, लगन आ ईमानदारी के बल पर।मैथिली पोथीक प्रकाशन आ वितरणक अव्यवस्थित दुनिया मे हिनक योगदान केँ भनहि मैथिलीक साहित्यकार लोकनि नइँस्वीकार करथि, छात्र-छात्रा आ खाँटी पाठकक मन मे हिनका लेल हम बड़ आदर अनुभव कयलहुँ अछि। दूर-दूर सँ केओ कोनो दुर्लभ पोथीक खोज करैत अछि, तँ हुनका बस एक टा व्यक्तिक नंबर दैत छी- शरदिन्दु जीक। किछु दिन बाद पोथी प्राप्त क' चुकल ओ व्यक्ति धन्यवाद-ज्ञापन करैत हिनक तारीफ जाहि भावना सँ करैत अछि, ओकर मर्म सब नइँ बूझि सकैत अछि।    

 

"बालपन मे भरि पेट अन्न लेल तरसब, किशोरावस्था मे प्लूरिसी सन बीमारी सँ ग्रस्त होयब, एम.ए. मे पढ़ैत काले मायक देहान्तक मर्मांतक पीड़ा भोगब, 34-35क बयस मे नोकरीक छूटब, बेकारी-लचारीक समय मे पिताक संसार सँ उठि जायब, चारि गोट संतान आ पत्नीक संग सालो-साल आर्थिक कष्ट सँ जूझब आ आब बुढ़ारी मे जीवन-यापन लेल संघर्ष करैत-करैत परीक्षाक अर्थ की होइत छै से बुझय लगलहुँ अछि। शेष जीवन मे आर कतेक पर-इच्छाक पालन करय पड़त से बूझल नहि अछि मुदा हम सदा तत्पर छी अग्रिम परीक्षा देबाक हेतु आ से पूर्ण मनोबलक संग।" 14 अप्रैल, 2020 केँ 11.20 बजे राति मे कोरोना लॉकडाउनक पीड़ा बीच लिखल हुनक ई डायरी-अंश हुनक मनोदशा साफ-साफ बतबैत अछि। ई एक टा संघर्षशील मनुक्खक मनोव्यथाक अभिव्यक्ति थिक। 

 

शरदिन्दु जी केँ विगत पैंतीस वर्ष सँ हम बहुत निकट सँ देखैत आबि रहल छी।खासक' किछु पुस्तक मेला सभक क्रम मे दस-बारह दिनक निरंतर भेंटघाट सेहो रहल, भोर सँ साँझ धरि। हम हुनक दैनिक जीवनक उतार-चढ़ाव आ मनःस्थिति केँ ओहि क्रम मे बेसी निकट सँ अनुभव क' सकलहुँ। घनघोर अर्थ-संकट आ कैक तरहक शारीरिक परेशानीक बादो ओ अपन नैतिक-आत्मबल पर सदा अडिग देखाइत रहलाह अछि। सेवा-भाव सँ भरल। विचलन कतहु ने। संघर्ष-पथतेना प्रिय जे कखनो कोनो हालति मे हुनका असत्यक संग दैत नइँ देखलहुँ। 'अंतिका' मे प्रकाशित हुनक रिपोर्ट सब सेहो तकर गवाह अछि जे ओ जाहि व्यक्ति आ संस्थाक काज अपन आर्थिक लाभ लेल करैत छलाह, तकरो विरुद्ध कलम चलबैत ओ कोनो संकोच कहियो नइँ कयलनि।  

 

एखन हमरा सामने मे शरदिन्दु चौधरीक संस्मरणात्मक निबंध 'बात-बातपर बात' आ एकर दोसर खंड 'मर्मान्तक-शब्दानुभूति' अछि। बहुत झुझुआन सन कायाक पोथी। मैथिली प्रकाशन जगत, मैथिल संस्था सभक किरदानी आ एकर साहित्यकार लोकनिक गोलैसी मादे शरदिन्दु जीक जे विस्तृत जानकारी आ अनुभव-संसार रहलनि अछि, तकरा देखैत तँ एहि पोथीक काया आरो निराश करैत अछि। एहि परिक्षेत्रक जे जानकारी हिनका लग छनि, से अन्यत्र कतहुँ नइँ। जँ ई विस्तार सँ लिखितथि तँ कतेको मुँहपुरुख केँ मुँह नुकब' पड़तनि, कतेको तथाकथित सम्मानित साहित्यकार अपन सम्मानक पोटरी बान्हि पेटी मे नुकब' लगितथि। मारते रास एहन सत्यसभ सभक सोझाँ अबैत जाहि सँ मैथिलीक अधिकांश गोटे अनभिज्ञ छी। मुदा से नइँ भेल अछि!... हम जनै छी, हिनका लग से सब इत्मीनान सँ लिखबाक ततेक पलखति नइँ छनि। शरदिन्दु जी केँ अनेक ओहन साहित्यकारक अशुद्ध पांडुलिपि केँ शुद्ध क' छपबाक छनि जिनका जल्दी सँ पुरस्कारक लाइन मे लगबाक हड़बड़ी रहैत छनि, बीपीएससी-यूपीएससीक छात्र-छात्रा लेल किताबक पैकेट बान्हि क' पोस्ट करबाक रहै छनि। ककरो स्मारिका, ककरो किताबक तैयारी मे लगबाक रहै छनि। अपन शरीर केँ मैथिली पोथी आ प्रकाशन पाछू तिल-तिल गलबैत रहल एहि व्यक्तिक मन दूर बैसल कोनो छात्र-छात्राक सफलता सँ पुलकित होइत अछि। प्रकाशन-व्यवसाय आ पोथी दोकान सँघर-गृहस्थी चलेबा लेल हिनक नोन-तेलक जोगाड़ तँ जरूर होइ छनि, मुदा एतबा बचत नइँ भेलनि जे बेटी ब्याहक अवसर पर पिताक अरजल जमीन बेचबाक तकलीफ सँ बाँचल रहितथि। हिनक एहन-एहन मारते रास दुख बुझबाक लेल एहि पोथी केँ बहुत बारीकी सँ पढ़ब जरूरी अछि। अपन व्यथा-कथा कहैत कैक ठाम हिनक तामस तेना लहरि जाइ छनि जे ई विस्तार सँ कोनो बात राखि नइँ पबैत छथि। बिना विस्तार मे गेने, बहुत मेंही-मेंही छोट-पातर सूत्र केँ पकड़ि क' हिनक बात केँ बुझब तखने हिनका ढंग सँ जानि सकै छियनि। जँ से धैर्य नइँ तँ ई पोथी अहाँ लेल कोनो काजक नइँ हैत।

 

केओ कहि सकै छथि जे शरदिन्दु चौधरी सन एक टा मामूली प्रकाशक आकिताबक छोटछिन दोकान चलब'वला केँ जानि क' की लाभ? तेहन कठपिंगल लेल ई किताब दुइयो कोड़ीक नइँ अछि आ हुनका बुझायब सेहो कठिन! मुदा जिनका एहि दुर्लभ कोटिक मनुक्खक प्रति कनेको जिज्ञासा होनि, ओहि व्यक्ति लेल एहि दुनू किताबक बड़ महत्त्व अछि। संक्षेप मे बहुत काजक बात कहल गेल अछि। आबयवला समय मे एहन पुस्तकप्रेमीक घनघोर अभाव हैत। मिथिला-मैथिली के नाम पर जय-जय करयवला बहुत भेटत, मुदा एतेक कम लाभ पर जीवन-यापन करयवला शरदिन्दु चौधरी सन दोसर केओ नइँ भेटत।

 

शरदिन्दु चौधरी मैथिलीक ख्यात साहित्यकार आ 'मिथिला मिहिर'क संपादक सुधांशु शेखर चौधरीक पुत्र छथि जिनक जन्म 07 अक्टूबर 1956 केँ दरभंगाक मिश्रटोला मे भेलनि। ओ पटना विश्वविद्यालय सँ राजनीति शास्त्र मे एमए आ मगध विश्वविद्यालय सँ एलएलबी कयने छथि। कतेको साल विभिन्न पत्र-पत्रिका आ अखबार मे पत्रकारिता कयने छथि। ई सब हुनक ओ परिचय छी जे प्रायः सब जनै छथि। एकरा बाद लोक बसएतबे जनै छथि ओ शेखर प्रकाशन नाम सँ एक टा प्रकाशन आ किताबक दोकान चलबै छथि। बड़ तीत आ कड़ू लगैवला भाषा मे बजै छथि आ संस्था सभक असलियत जनै के कारणें ओकर भयादोहन करै छथि! एकरा बाद आरोप-दर-आरोप कि जकरे किताब छपै छथि तकरे नाँगट करै छथि! कथी लेल तँ कखनो बकियौता पाइ लेल तगेदा क' दै छथि, कखनो अशुद्ध लिखै लेल बोकियबै छथि!... एहन लोक केँ ई पता नइँ हेतनि आ नइँ से पता करबाक उहि हेतनि जे ई व्यक्ति ऑटो-रिक्शा चलब'वला एक टा मजदूर कोटिक लोक लेल तेहन खतरा मोल ल' सकैत अछि जेहन स्थिति मे सहोदरोक प्रति कतेक के डेग पाछु भ' जायत। जखन अहाँ हिनक जीवन मे नीक जकाँ उतरब आ हिनक संघर्ष केँ देखब-गमब तखने बूझि सकब जे शरदिन्दु चौधरी हेबाक माने की होइत छै!... 

 

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