विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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२..मुन्नी कामत- भाषाविद् श्री शरदिन्दु चौधरी

मुन्नी कामत

भाषाविद् श्री शरदिन्दु चौधरी

 

सत्यक बाट पर पाथर हजार,

हजुरे-हजूर मठाधिस बनल

सत्य केँ टारैय संसार।

आय हम बात कऽ रहल छी पत्रकार, संपादक एवं साहित्यकार ,ओना ओऽ कतेको साहित्यक रचना करैयक बादों स्वयं केँ साहित्यकार नै मानैत छथि से हिनकर बड़पन्न अछि। नाम - शरदिन्दु चौधरी,गाम - मिश्रटोला दरभंगा।

श्री शरदिन्दु चौधरी जी अपन लेखनक जादुगरी लेल जानल जाएत अछि। हिनकर कलम कहियो हिनका मन सँ समझौता नै केलक आऽ सत्यक श्याहि संगे दौड़ैत रहल। माँ सरस्वती के उपासक हिनकर समस्त परिवार ज्ञान अर्जन कऽ सबसँ पैघ धन मानलक। हिनकर बाबूजी पंडित सुधांशु शेखर चौधरी जे अपन लेखन सँ मैथिली साहित्य कऽ विभिन्न विधा सँ समृद्ध् केलैथ। हिनकर बाबा पंडित शशि नाथ चौधरी जे मैथिली केँ पैघ विद्वान छेलैथ। तँ हम निधोक कहि सकैत छी जे साहित्यक ई स्नेह हिनका विरासत मऽ भेटल छैथ।

श्री चौधरी जी पॉलिटिकल साइंस सँ  ूूएम ए केलखिन आऽ वकालतक डिग्री हासिल केलैथ। मुदा जे खून मऽ रहैत अछि सोझाँ एबिए जैत अछि। साहित्य हिनका खून मऽ सनल छल अहि सँ लाख कोशिश कऽ बादों ई अहि सँ मुक्त नै भऽ पौलखिन।

वकालतक पढ़ौनी करैके बाद जखन ओऽ अहि क्षेत्र मऽ अपन किस्मत अजमाबैय लेल दू - चारि दिन कोट गेलखिन तँ हिनका भान भेल जे अहि पैसा मऽ झूठक सिवा किछ नै अछि। हिनका ऐहन झूठक खेल नै खेलबाक छल। जे सत्य आऽ भ्रष्टाचार्य कऽ तार -तार करैय लेल अपन भेल नौकरी कऽ इंटरव्यू काल मऽ घेंट दैब देलक से शरदिन्दु जी वकालत कोना करैथ। हिनकर ई सत्यक सिनेह हिनका बेर -बेर पिछा धकलैत रहल, मुदा ओऽ अपन बाट नै बदललैथ।न सत्यक लाट छोड़लैथ।  हीनकर लेखन हिनकर सत्यताक प्रमाण अछि।

हिनकर प्रसिद्ध व्यंग्य संग्रह अछि *बड़ अजगुत देखल* , *करिया कक्का कोरामिन* ,  *गोबर गणेश*

संस्मरणात्मक रचना अछि *बात -बातपर बात* ,*हमर अभाग: हुनकर नहि दोष* ,*मर्मान्तक शब्दानुभुति*

आकाशवाणी दूरदर्शनसँ दर्जनों वार्ता। मिथिला मिहिर पत्रिका साप्ताहिक, दैनिक, मासिक कऽ संपादक। आर्यावर्त हिन्दी दैनिक पत्रिका कऽ फीचर संपादक।

तीन दशक सँ साहित्यिक गतिविधि मऽ सक्रिय रहितो हिनका बेसी मंच सँ अलग - थलग देखल गेल। हिनकर विचार समाजक व्यवस्थाक विपरित अछि जे ओहि व्यवस्था केँ बनेनाहर सभ के विरुद्ध अछि जे हिनकर व्यंग्य संग्रह मऽ सहजे देखल जा सकैत अछि। अपना कऽ पाग आऽ दोपटा सँ  स्वतंत्र रखबाक लेल ई आजिवन कोनो संस्था सँ सम्मानित नै हेबाक सपथ नेने छैथ।

स्वतंत्र भऽ बिन किछ लेबाक इच्छा सँ अपने सद्खिन मिथिला आऽ मैथिली लेल अपन लेखन सँ काज करैत रहलैथ। उद्देश्य मात्र अतबे जे अपन धरोहर कऽ मिथिला मैथिल नामक खाल पहिर दिम्मक कऽ नै खा देब। अहि लेल ओऽ अपन लेखनी सँ अहि दिमक सभ केँ चेतौनी दैत रहैत छैथ।

चौधरी जी अहि समाज सँ नै समाजक व्यवस्था सँ व्यथित छथि। साहित्यिक गतिविधि जे वर्तमान में चैल रहल अछि ओहि गतिविधि पर क्षुब्ध छथि।जिनका भाषा कऽ ज्ञान नै से मठाधिस अछि आऽ जे ओहि भाषा कऽ गरहैत छैथ से अन्चिनहार अछि।

वर्तमान मऽ मैथिली भाषा सँ पढ़ौनी केनिहार विद्यार्थी सब लेल शेखर प्रकाशन केँ व्यवस्थापक एवं संचालक श्री शरदिन्दु चौधरी कऽ नाम सबसँ ऊपर अछि। ओऽ विद्यार्थी सबहक मन मऽ हिनका प्रति जे सम्मान अछि से बनावटि नै अछि।ई सम्मान हिनकर हक अछि जे हिनकर काज हिनका दियौलैथ। हिनकर स्मारिका, व्यंग्य, संस्मरण जखन पढ़ब तँ किछ काल लऽ ठमैक जरूर जैब आऽ सोचए परत जे शरदिन्दु जी गलत कतए कहलैथ। हिनकर यैह कला हिनकर रचना कऽ अमर बनाबैत अछि।

 

- संपर्क- साहिबाबाद (गाजियाबाद)

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