विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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२..विभा रानी- शरदिंदु भाईक गम्भीर सिद्धांतप्रियता!

 

विभा रानी

शरदिंदु भाईक गम्भीर सिद्धांतप्रियता!

मैथिली हमर भाषा नहिं छल. हमरा घर मे सभ किओ हिंदी बाजै छल. हमर मोहल्लावाला सभ बस्ती- बलिया स' माइग्रेट क' के आएल छल. ओ सब भोजपुरी बजैत छल. हमरा कान मे मात्र हमर घर मे पूजा कराबए लेल आबएवाला पंडित जी बच्चा झा छलखिन्ह, जिनका स' हम सभ शुद्ध मैथिली सुनैत छलहुं.

बीए मे गेलाक बाद बोध भेल जे मैथिली सीखबाक चाही. असल मे, जहन हम आरके कॉलेज मे गेलहुं त' टीचिंग स्टाफक अतिरिक्त सभ किओ मैथिलीए मे बाजय छलखिन्ह. आब हुनका हिंदी मे जवाब देनाई अथवा हुनका सभ स' हिंदी मे गप्प केनाई हमरा बड्ड अबूह लागै छल. अही अबूहक चक्कर मे हम भोजपुरी सीखि गेल छलहुं. कलकत्ता मे बांग्ला सीखि गेलहुं. महाराष्ट्र मे मराठी नहिं सीखि सकलहुं, कियैक त' अहि ठां लोग आओर हिंदी- अंग्रेजी मे गप्प करैत रहलन्हि आ हमहू एक गोट सुभीतगर कोना ताकि क' अजगर बनि पडि रहि गेलहुं.

मुदा ओ कॉलेजक दिन छलै. तैं हम तय कएल जे हम आब मैथिली सीखब. टूटल- फ़ूटल मैथिली बाज' लागल छलहुं. आब जहन बाज' लागलहुं, ' दिमागी कीडा काटय लागल. एक गोट कथा सेहो लिखि लेलहुं. मुदा, एतेक भरोस नहिं छल अपन मैथिली पर. साओन के जनमल बेंग भादो मे कहल जे एहेन दाही त' हम कहियो देखबे नहिं कएल. याहि हमर स्थिति छल. मोन हुदबुद क' रहल छल जे की करी? घर मे आर्यावर्त अबैत छल. ओही मे एक गोट विज्ञापन देखल- मिथिला मिहिरक नवतुरिया लेखन अंक लेल. आब हुदबुद्दी कछ्मच्छी मे बदलि गेल. हम त' भाई नवतुरिये छी. हमर ई पहिल कथा अछि. उमिर मे सेहो नवे छी. एम ए मे पढि रहल छी. त' सभ मामिले फिट. कथा लिखि लेने छलहुं. की लिखने छलहुं, सेहो नहिं बूझल छल. मात्र ईयाहि टा बूझल छल जे हम मैथिली मे एक गोट कथा लिखि नेने छी.

फेर सएह यक्ष प्रश्न! देखाबी ककरा स'? बच्चा झा पंडी जी त' अहि मे सहायक नहिं हेताह. मोन एलन्हि दोसर झा जी. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मे काज करै छलाह. बड्ड गर्व स' अपना के कहैत छलाह जे हम CBI मे काज करै छी. लोक सभ चौंक जाए छलै- आंय! CBI? माने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन?' ओ शुद्ध मैथिली बाजै छलखिन्ह पूरा परिवार सहित. हमर घरक सोझे मे आएल छलाह किराया पर. नवयुवक. तुरंते बियाह भेल छलन्हि. कनिया सेहो खांटी मैथिली बजै छलखिन्ह. कॉलेजक स्टाफ के बाद झा जीक कनियां स' हमर स्पोकेन मैथिलीक अभ्यास चलि रहल छल.

एक दिन सांझ मे जहन ओ बैंक स' घुरलाह, हम हुनका ओहि ठां पहुंचि गेलहुं. ओ चूडा भूंजाक नाश्ता क' रहल छलाह. हम हुनका स' कहलियन्हि जे हम एक गोट मैथिली मे कथा लिखलहुंए. अहां कनेक ओकरा जांचि देबै?'

ओ कहलन्हि- 'हम त' नोकरिया, बैंक वाला आदमी छी. बैंकिंगक परीक्षाक रीजनिंग टेस्ट पूछब त' बता देब. ई खिस्सा- कहानी सभ हम की जान' गेलहुं?

हम हिम्मति नहिं हारल. कहल- 'कथा नहिं, अहां कनेक भाषा चेक क' दियऊ.'

हुनकरो सम्भवत: हिम्मति बढलन्हि. सकारि लेलन्हि. हम हुनका अपन हस्तलिखित कथा द' देलियै. तहिया कोन कम्प्यूटर आ टाइपिंगक व्यवस्था? दू दिन बाद फेर सांझ मे हम हुनका ओहि ठां पहुंचलहुं. कहल- 'कथा देखि नेने होयब त' ' दियौ. हम ओकरा 'मिथिला मिहिर' मे पठेबाक सोचने छी. तारीख देल छै. एखनि हम एकरा फेयर करब, तहन पठायब. डाक स' मधुबनी स' पटना पहुंच' मे सेहो समय लगतै.'

आब लोक सभ लोके की भेलाह जे अनुरोध करी आ तत्क्षण काज क' दौथु. मुदा, ओ हमर टाइम लाइन सुनलन्हि आ ओहि हिसाबे करेक्शन क' देलन्हि. हम कनेक आश्वस्त भेलहुं जे लाल पेन स' पेज सभ चिर्री- चोथ नहिं भेल छल. कतहु- कतहु निशान लागल छलै. से त' एखनो लोक सभ निशान पाडि दैत छथि आ हम तकरा लेल तैयार सेहो रहै छी.

कथा फेयर कएल आ 'शुभे हो शुभे' करैत 'मिथिला मिहिर' के पठा देलियन्हि. कोनो जवाब नहिं आयल. हमर हुदबुद्धी बढ' लागल छल. मुदा कही त' ककरा स' कही? ककरो कह' मे सेहो संकोच होइत छल जे कही जे हम कथा लिखलहुंए. ओना हिंदी मे लिखबाक शुरुआत भ' गेल छल. मुदा लिखबाक काज कोनो नोटिस कर'वाला काज त' होइत नहिं छै.

आ एक दिन डाक स' हमर नाम स' डाक पहुंचल. तहिया अपना नामे चिट्ठी सेहो एक गोट अजगुत घटना होइत छलै. तहिया चिट्ठी सेहो केयर ऑफ क' के अबै छलै. हमर डाक सेहो आएल. पता चलल जे 'मिथिला मिहिर' 'नवतुरिया लेखक विशेषांक'क पहिले अंक मे हमर कथा 'कौआहंकनी' छपल अछि. हम त' मारे खुशी के बताह भ' गेलहुं. सांझ मे झा जी के देखेलहुं. ओहो बड्ड प्रसन्न भेलाह आ हमर मैथिली लेखनक यात्राक शुरुआत भ' गेल.

आब कहै छी जे एतेक पैघ राम कहानी हम कियैक लिखलहुं? 'जाना था जापान, पहुंच गए चीन, समझ गए ना!' लिख' आएल छलहुं हम शरदिंदु शेखर चौधरी पर आ लिख' लगलहुं अपन कथा पर. मुदा से नहिं छै. शरदिंदु शेखर चौधरी पर लिख' लेल आ हमरा संगे हुनकर केहेन नाता छलै, ई बुझबा लेल एतेक पैघ भूमिका स' पास होयब ज़रूरी छै.

शरदिंदु शेखर चौधरी ओहि समय 'मिथिला मिहिर' मे छलाह. मैथिली मे लिखबाक संकट कोनो अजुका संकट नहिं छै. ओहू समय मे नवतुरिया लोक सभक आगम कम छलै. तकरे बढावा देब' लेल 'मिथिला मिहिर' ई योजना निकाललक आ एकर जिम्मा शरदिंदु शेखर चौधरी आ टीम पर द' देल गेलै.

होइत छै स्वाभाविक रूपें जे कोनो योजना निकलला पर ओही बहाने रचनाकर्म भ' जाइत छै, जेना कथा- लेखन कम भेला पर प्रभास कुमार चौधरी आन- आन लोक सभ संगे मिलि क' 'सगर राति दीप जरय' केर आंदोलन शुरु केलन्हि, एखनि श्रीधरम आ अंतिका प्रकाशन उपन्यास लेखन के बढावा देब' लेल 'लक्ष्मी- हरि स्मृति उपन्यास लेखन' योजना कार्यांवित क' रहल छथि. 'मिथिला मिहिर' मे सेहो नवतुरिया लेखन अंक लेल बहुत रास कथा सभ पहुंचल छलै.

हमरा बहुत बाद मे पता चलल जे हमर कथा 'कौआहंकनी' कोना क' पहिले अंक मे छपलै. आब फेर कहब जे ओहि समय कोनो सोशल मीडिया त' छलै नहिं जे लोक आओर पता क' लौथु जे फलां व्यक्ति के छै? सम्पादक ल'ग मात्र रचनाकारक रचना छलै. आ ई त' नवतुरिया लेल छलै, तैं आओरो पता लगायब मुश्किल जे के सभ के आ की छथि.

हमर कथा शरदिंदु भाई के बहुत पसंद पडलनि. हुनका संगे सम्भवत: अग्निपुष्प जी सेहो छलखिन्ह. आओर एक दू गोट सेहो, जिनकर नाम हमरा मोन नहिं. सम्पादक मंडलक पैघ- पैघ लोक सभ लेल ई छलै जे ई कोन विभा रानी? कोनो सरनेम नहि. कोना क' बुझल जाओ जे ई के छथि? शरदिंदु भाई कहलखिन्ह जे अहां सभ व्यक्ति आ हुनक सरनेम के छाप' चाहै छी अथवा रचना के? व्यक्तिक सरनेमक गुणवत्ता चाही अथवा रचनाक गुणवत्ता?

मातबर लोक सभ तैयो थथमथ छलाह. शरदिंदु भाई अंत मे कहलखिन्ह जे 'ई कथा बहुत नीक छै. ई कथा भविष्य मे मीलक पाथर साबित हेतै. बहुत सम्भावनावान कथा छै.' हुनका फेर कहल गेलै जे 'ठीक छै. एतबे अहांक जिद अछि त' एकरा दोसर अंक मे छापि लेब.' शरदिंदु भाई फेर कहलखिन्ह जे 'नहिं, रचना छपतै त' इयाहि अंक मे. आ यदि ई रचना अहि अंक मे नहिं छपतै, तहन हम अपना के अहि योजना से अलग करै छी.'

हम बताह सन लोक. आइयो ओहने बताह छी. भितुरका गप्प स' कोनो सरोकार नहिं राखयवाली. 'कौआहंकनी'क त' जे प्रसिद्धि भेंटलै, तकर त' कोनो चर्चे नहिं. हम राताराति जेना मैथिलीक सेलेब राइटर भ' गेलहुं. हमरा लग पाठकीय पत्रक ढेरी लागि गेल. सभ किओ खोज पुछारी कर' लागलै जे ई विभा रानी के? हमरा लग सभ ठाम से रचना पठेबाक पत्र आब' लागल. हमर मास्टर (बैंकवाला झा जी)जीक जिम्मेदारी आओर बढि गेलै.

मिथिला मिहिर मे हमर छपब बढि गेल. ओही छपबाक क्रम मे हमर परिचय भेल मैथिलीक अन्यान्य दिग्गज सोमदेव जी, जीवकांत भाई, मायानंद मिश्र, उषाकिरण खान, मोहन भारद्वाज, राजमोहन झा, कुणाल भाई, अग्निपुष्प भाई, विभूति आनंद जी, अशोक, शिव शंकर श्रीनिवास, रमेश, तारानंद वियोगी सहित अनेकानेक लेखक सभ स'.

शरदिंदु भाई स' हम एखनो बहुत धखाइत छी. ओ बहुत गम्भीर रहै छथि, हम जतेक हुनका परिलक्षित केलहुं. बहुत कम, ज़रूरति भरि बाजै छथि. बहुत कम बाजयवाला स' हमरा ओहुनो बड्ड भय होबैत रहैये. 'मिथिला मिहिर' बंद होबैत धरि ओ ओत' रहलाह. तकर बाद 'समय-साल' पत्रिका स' जुडलाह. बाद मे हुनक शेखर प्रकाशन एलै. हम एक बेर पटना गेलहुं त' हुनक प्रकाशन मे सेहो गेलहुं आ हुनक मैथिलीक प्रति प्रेम आ निष्ठा देखि अभिभूत भ' गेलहुं. एतेक निस्वार्थ भाव स' किताबक प्रकाशन आ बिक्री मे लागल छथि. किताब स' वास्ता राखनिहार आब कतेक लोक छथि, सभ किओ जनैत छथि. मुदा शरदिंदु भाई जेना संकल्प नेने होथु मैथिलीक सेवा करबाक. ओ मैथिली प्रकाशन के उपयोगी सेहो बनेलन्हि. बीपीएससी आ अन्य परीक्षा मे काज आबयवाला किताब सभक प्रकाशन, उपलब्धता आदि मे ओ लागि गेलन्हि. हम जतेक काल ओत' रहलहुं, देखल जे छात्र सभ आबि क' किताब सभ पूछैत गेलन्हि आ कीनैत गेलन्हि. कोनो कोनो किताब नहिं रहला पर ओ कहलन्हि जे किताब नहिं अछि, अहां फोटोकॉपी करा लिय'. छात्र खुशी- खुशी किताब ल' ' चलि गेलन्हि फोटोकॉपी कराब' लेल. हम पूछबो केलियन्हि, जे 'यदि नहिं घुराबय?' ओ अपन दाढीक भीतर स' मंद मुस्कान स' कहलन्हि- 'जायत कत'? मैथिली किताब सभ ओकरा आओर के आओर भेंटतै कत' '? आई चलि जायत त' काल्हि ओकरा एबाक मुंह रहतै आ यदि आबियो गेल त' की ओकरा स' फेर मांगब पार लागतै?'

हमरा जनितब, ककरो स' किछु कहबाक, मंगबाक हुनक स्वभाव नहिं छै. अपन सिद्धांत पर ओ कोनो व्यवस्था स' भीडि जायवाला लोक छथि, चाहे ओ हमर कथा छापबाक समय छल अथवा पटनाक आन- आन महत्वपूर्ण संस्था सभ स' भिडबाक. कुणाल जी कहै छथिन्ह जे 'ओ अपन प्रतिबद्धताक धनी छथि.' मैथिली मे एहेन सिद्धांतवाला लोक सभ त' दीया के कहय, सुरुजक प्रकाश ल' ' ताक' जाऊ, तहनो मुश्किल स' भेटायत. हुनक शेखर प्रकाशन एक गोट स्तम्भ छै मैथिलीक छात्र- छात्रा लेल, मैथिलीक आन- आन लोक सभक अड्डाबाजी लेल सेहो. सुनल, जे एखनि हुनक मोन बेसी खराब रहै छै. हम फोन कएल. ओ फोन नहिं उठेलन्हि. लागल, जे ई खबर सत्य छै. शारीरिक अस्वस्थता मन्हुष्य के भीतर स' उदास आ अवसन्न करै छै. शेखर भाई जल्दी स्वास्थ्य लाभ करथु, ई हमर कामना. अपन सिद्धांतक दीप चतुर्दिक लेसथु, ई हमर कामना!

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