विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

२..राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर'- हमर ज्ञान-पिपाशाक स्रोत: शरदिन्दु चौधरी

राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर'

हमर ज्ञान-पिपाशाक स्रोत: शरदिन्दु चौधरी

हमरा मोन नहि अछि- शरदिन्दु चौधरीसँ कहिया भेंट भेल, हेम-छेम बढ़ल आ बादमे अन्तरंग भऽ गेलहुँ। हम नेपालमे, जनकपुरधाममे मैथिली भाषा, साहित्यक एकटा जिज्ञाशु पाठक रहलहुँ अछि। किछु पढ़बाक, जानबाक ललक हमरा मैथिली पुस्तक विक्रेताक पाछाँ बेहाल करैत रहल। ई आदति हमरा हाईस्कूलक पढ़ाईसँ लागि गेल रहए।

डॉ. धीरेन्द्रक सान्निध्यमे मैथिली पुस्तक, विक्रेता आ भेटबाक स्थान सभ ज्ञात होइत रहल आ हम तकरा लेल अपस्यांत होइत रहलहुँ। पहिने तँ दरभंगाक टावर चौक लग ग्रन्थालय प्रकाशन हमर स्रोत रहय। जे पुस्तक खोजी ओ सभ उपलब्ध करबैत रहलाह। तकरा बाद मिथिला पुस्तक भण्डार आ सभसँ बेसी स्रोत बनलाह आदरणीय रमानन्द रेणुजी।

हम आगाँ बढ़ैत गेलहुँ। कैम्पसमे गेलहुँ। तकरा बाद पढ़ाईक संगहि हमर लेखन सघन रूपसँ आगाँ बढ़ल। सन् १९६४ मे छपल हमर बालकथा 'इमान्दार बालक' सँ मिहिरक लेखक बनलहुँ आ तकरा बन्न होएबा धरि दर्जनों लेख-रचना प्रकाशित होइत रहल। ताहु बीच अनेकों जिज्ञासा उठैत रहल आ तकरा शान्त करबा लेल पुस्तक विक्रेता आ भण्डारकेँ खोजैत रहलहुँ।

ताही खोजीक क्रममे हमरा शरदिन्दुजी सँ भेँट भेल। हमरा लगैत अछि परिचय मिहिर कार्यालयसँ भेल छल। आत्मियता हुनका घरेमे सजायल पुस्तक सभक बीच बढ़ल जे हमर ज्ञानपिपाशाक महत्वपूर्ण स्रोत छल।

मैथिलीक नवप्रकाशन होइक, शब्दकोष हो अथवा कोनो संग्रह शरदिन्दु चौधरीसँ हम प्राप्त करैत रहलहुँ। हम अपन पुस्तक सेहो हुनका विक्रयक हेतु दैत रहलहुँ। एहिमे दुनू दिश एकटा सम्बन्ध विकसित भेल ओ एखन धरि बन्हने अछि।

पुस्तकक विक्री-वितरणमे एकटा सभसँ पैघ अवरोध होइछ- किताब लऽ कऽ- विक्रेताक तकर पाइ सोझ भऽ रचनाकारकेँ देबऽ नहि चाहब। ई दुर्गुण लगभग सभ विक्रेतामे देखल गेल अछि। जहाँ धरि शरदिन्दु जीक सबाल छैक हमरा कठिनाई नहि भेल। सामान्यतः हम अदला-बदलीक रूपमे पुस्तकक लेन-देन करैत रहलहुँ अछि। हमर आवश्यक पुस्तक हुनक 'शेखर प्रकाशन'सँ लऽ लैत छी, तहिना अपन प्रकाशन दऽ दैत छियनि। एहिसँ कोनो कठिनता नहि होइत अछि।

शरदिन्दु चौधरीक नाम बहुतो मैथिली सेवीक लेल अनोन लागि सकैत छैक। तकर कारण छैक हुनक लेखनी। ओ सामान्यतः मोलाहिजा कऽ ककरो कृति, व्यक्तित्व वा कारनामाकेँ लिखबाक जरूरति नहि बुझलनि। जे कही ठाँए पटाका। एहिसँ सम्बन्धित पक्षकेँ छनछना कऽ लागब अस्वभाविक नहि। ई काज हुनकर नीक छन्हि से हमर कहब नहि, तखन सत्य बात अवश्य लिखी मुदा कोना भाषा आ साहित्यक लेल लिखी तकर ज्ञान हयब जरूरी। आ कखन किछु लिखी तकरो महशूस कएल जएबाक चाही। तकर विचार नहि रखने ओ अनेरे विवादित भऽ जाइत छथि। जखन कि हुनक उद्देश्य प्रायः ककरो चोट पहुँचाएब नहि रहैत छन्हि, अनटोटल बातकेँ मात्र विरोध करब रहैत छन्हि।

जहिया मधुकान्त जीक सहयोगे ओ समय-साल निकालैत छलाह तहियो अपन कटाक्षपूर्ण टिप्पणीसँ कतेकोकेँ नजरिमे खटकैत रहलाह। हम यद्यपि नियमित हुनक आग्रहपर लिखैत रहलहुँ समय-सालमे। कहियो कोनो तरहक असुविधा नहि भेल।

हुनक टिप्पणी सभ अबैत रहैत अछि। खास कऽ व्यंग्य विधापर हुनक कलम नीक चलैत छन्हि। मुदा व्यंग्य जतऽ विनोद उत्पन्न करैत छैक, हुनक व्यंग्य कतेकोकेँ सुइया जकाँ भोंकइत छैक आ तएँ शरदिन्दुजी कतेकोकेँ नजरिमे खटकैत रहलाह अछि।

ओ किताब लिखैत छथि, पुस्तकक सम्पादन करैत छथि, पत्रिका सभक सम्पादन करैत रहलाह अछि- एहि मानेमे ओ साहित्यकार, पत्रकार आ नीक सम्पादक छथि। मनुक्खकेँ चिन्हबाक हुनक नजरि 'डोकहरक आँखि' जकाँ तेज थिक। आ हुनक इएह नेत्र आ घ्राण शक्तिक कारणेँ हमहुँ एक बेर उपकृत भेल छी। 

मोन पड़ैत अछि २००६ साल नवम्बर ३ क ओ दिन जखन हमरा 'शेखर सम्मान' भेटल छल। आवश्यक नहि साहित्य अकादेमी, प्रबोध साहित्य सम्मान अथवा आने कोनो कथित प्रतिष्ठित सम्माने सम्मान योग्य होइत अछि। कोनो संघ-संस्थाक निष्ठापूर्वक दैत आएल सम्मान आन कोनो विवादित सम्मान-पुरस्कारसँ पैघ महत्व रखैत अछि।

से शेखर प्रकाशनसँ प्राप्त हमर ओ सम्मान जे पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रक हाथे भेटल छल ताहिमे उद्घृत वाक्य हमरामे ऊर्जा उत्पन्न कएने छल- आखिर हमर काजकेँ एहि तरहेँ मूल्यांकन तँ भेल अछि। निश्चय एहि प्रक्रियामे गठित चयन समितिक हाथ भऽ सकैछ, मुदा शरदिन्दु चौधरीजी सँ हमर एतेक नम्हर सम्बन्ध, हमर साहित्य, हमर पत्रकारिता (३९ वर्षसँ गामघर साप्ताहिकक निरन्तर प्रकाशन)क बारेमे हुनका सभकेँ कोनो धारणा बनएबामे सहायक भेल होइक। कहबाक अर्थ- मात्र कटु बाते नहि, प्रतिभाकेँ मूल्यांकनक नजरि आ परबाह सेहो छन्हि शरदिन्दुजीमे जे हुनका आनसँ फूट बनबैत अछि।

शरदिन्दु चौधरी विभिन्न परीक्षामे शामिल होबऽ बला परीक्षार्थी लोकनिक हेतु सन्दर्भ सामग्री सेहो उपलब्ध करएबाक काज करैत आएल छथि जे महत्त्वपूर्ण भेल करैत अछि। एखन मैथिली साहित्यक विक्री वितरणक काजमे शेखर प्रकाशनक माध्यमसँ कएल जा रहल हुनक काज सराहनीय मात्र नहि बहुतोकेँ लेल सन्दर्भ ग्रन्थक उपलब्धिक स्रोत उपलब्ध करएबाक काज थिक जाहिसँ हिनक प्रतिष्ठा बढ़ल अछि।

एहिठाम एकटा आर घटनाक चर्च करब जे हमरा बेसी प्रभावित कैने रहए। नेपालमे मधेश आन्दोलन तेजीमे रहैक। लगभग डेढ़ दशक पूर्वक बात छै। भारतीय मिडियामे एहि आन्दोलनकेँ नेपालसँ फूट होबऽ बला आन्दोलन बता एकटा भ्रम सृजन कयल जाइत रहै। अथवा भऽ सकैए- भारतीय मिडिया एहि आन्दोलनकेँ गम्भीरतासँ बुझि नहि पौने रहए। तखन एत्तऽ नियार भेलै जे भारतीय मिडियाकेँ मधेश आन्दोलनक वास्तविकतासँ अवगत कराओल जाए। आ साथी लोकनि एहि काजमे हमरे चुनलनि। हुनका सभकेँ ई विश्वास रहनि जे पटनामे हमर नीक सम्बन्ध अछि, ताहिसँ पत्रकार लोकनिक जुटानमे आ बातकेँ बुझबाक गम्भीरतामे ई सहायक हयतैक।

हम सभ पटना गेलहुँ। हमर लक्ष्य रहए- शरदिन्दु चौधरी, जनिक सहयोगसँ पत्रकार सभकेँ जुटाओल जा सकैछ। रातिमे २ बजे डेरापर पहुँचलहुँ। घनघोर वर्षा। दोसर दिन कार्यक्रम रखबाक नियार। समयक नितान्त अभाव। जे से भिनसर भेल तँ भोरे शरदिन्दुजीकेँ सभ बात कहलियनि। ओ हमरा निशिन्त कयलनि, हम सम्पर्क करै छी। हम संतुष्ट तँ भेलौं मुदा विश्वस्त नहि। कारण एतेक कम समयमे पत्रकार लोकनि की आबि पओताह। तएँ एकटा कोठरीमे पाँच-छवटा कुर्सी लगा इन्तजार करऽ लगलहुँ। प्रायः ९ बजेक समय रहैक। कहबाक जरूरति नहि- समयपर पत्रकार सभक जे जुटान होबऽ लागल तँ अगल-बगलसँ कुर्सी आदि खोजैत बैसबाक व्यवस्था करऽ पड़ल रहैक। प्रिण्ट आ इलेक्ट्रोनिक मिडियाक पत्रकारसँ कोठरी भरि गेल रहैक। मोन प्रसन्न भऽ गेल रहए। तखन हम मधेश आन्दोलनक सत्य सभक सामने रखने रहिऐक जे दोसर दिनक भोरका संस्करणमे लगभग सभ अखबारमे छपल छल। एतहु हमरा शरदिन्दु चौधरीक आप्तता नीक सहयोग कएने रहए। अर्थात् ओ मात्र कठोर नहि, मित्र सभक हेतु खुआ बनि जाइत छथि।

ई सत्य छै जे मैथिली साहित्य हुनका ओतेक मोजर नहि देलकनि जकर ओ हकदार रहलाह अछि। एखनो हुनक एकांत सेवा मैथिली प्रकाशन क्षेत्रमे सदैव प्रशंसित रहतनि- रहबाक चाही। हम हुनक सेवाक निरन्तर विस्तारक कामना करैत छी।        

              

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।