वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका B R E A K the Language Barrier - Read in your own script
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बालानां कृते-
१. जगदीश प्रसाद मंडल-किछु
प्रेरक प्रसंग
२.
देवांशु
वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स) ३.कल्पना शरण-देवीजी
१.जगदीश प्रसाद मंडल
किछु प्रेरक प्रसंग
41 धर्मक असल रुप
श्रावस्तीक सम्राट चन्द्रचूड़ कऽ अनेक धर्म आ ओकर प्रवक्ता सभ स नीक लगाव छलनि। राज-काज स जे समय बचनि ओकरा ओ धर्मेेक अध्ययनो आ सत्संगे मे बितबथि। ई क्रम बहुत दिन स चलि अबैत छल। एक दिन ओ असमंजस मे पड़ि गेला। मोन मे एलनि जे जखन धर्म मनुक्खक कल्याण करैत अछि तखन एतेक मतभेद एक दोसर प्रवक्ता मे किऐक अछि?
अपन समस्याक समाधानक लेल ओ (चन्द्रचूड़) भगवान बुद्ध लग पहुँचलाह। ओहिठाम ओ अपन बात बुद्ध कऽ कहलखिन। चन्द्रचूड़क बात सुनि बुद्धदेव हँसै लगलखिन। सत्कारपूर्वक हुनका ठहरै ले कहि दोसर दिन भिनसरे समाधानक बचन देलखिन। एकटा हाथी आ पाँच टा आन्हर ओ जुटौलनि।
दोसर दिन भिनसरे तथागत (वुद्धदेव) चन्द्रचूड़ कऽ संग केने ओहि हाथी आ अन्हरा लग पहुँचलथि। एकाएकी ओहि अन्हरा सभ के हाथी छुबि ओकर स्वरुप बुझबै ले कहलखिन। बेराबेरी ओ अन्हरा सब हाथी कऽ छुबि-छुबि देखै लगल। जे जे अंग हाथीक छुलक ओ ओहने स्वरुप हाथीक बतबै लगलनि। क्यो खूँटा जेँका त क्यो सूप जेँका त क्यो डोरी जेँका त क्यो टीला जेँका कहलकनि।
सभक बात सुनि तथागत (बुद्ध) चन्द्रचूड़ कऽ कहलखिन- राजन!
सम्प्रदाय अपन सीमित क्षमताक अनुरुप धर्मक एकांकी व्याख्या करैत अथि। अपन-अपन मान्यताक प्रति जिद्द धऽ अपने मे सब लड़ैत छथि। जहिना एक्केटा हाथीक स्वरुप पाँचो अन्हरा पाँच रंगक कहलक तहिना धरमोक व्याख्या करैवला सभ करैत छथि। धर्म त समता सहिष्णुता उदारता आ सज्जनता मे सन्निहित अछि।
42 सौन्दर्य
संगीतकार गाल्फर्ड लग पहुँच एकटा शिष्या अपन मनक व्यथा कहै लगलनि। कुरुपताक कारणे संगीतक मंच पर पहुँचते मन मे अवै लगैत अछि जे आन लड़कीक अपेक्षा दर्शक हमरा नापसन्द कऽ हँसी उड़बैत अछि। जहि स सकपका जाइ छी। गबैक जे तैयारी केने रहै छी ओ नीक जेँका नहि गाबि पबै छी। ओइह गीत घर पर बढ़ियाँ जेँका गबै छी मुदा मंच पर पहुँचते की भऽ जाइत अछि जे हक्का-बक्का भ जाइ छी।
ओहि शिष्याक बात सुनि गाल्फर्ड एकटा नमगर-चैड़गर अयना ल आगू मे रखि गबैक विचार दैत कहलखिन- अहाँ कुरुप नहि छी जना मन मे होइ अए। गीति गौनिहारि केँ स्वरक मिठास हेबाक चाही। जकरा कुरुपता स कोनो संबंध नहि छैक। जखन भाव-विभोर भऽ गायब तखन अहाँक आकर्षण बढ़ि जायत। केयो सुनि निहार कुरुपता पर ध्यान नहि द स्वर पर ध्यान देत। जहि स मनक हीनता समाप्त भऽ जायत आ आत्म-विश्वास बढ़ि जायत।
फ्रान्सक वैह गायिका मेरी वुडनाल्ड नाम स प्रख्यात भेलीह।
43 स्तब्ध
दोसर विश्वयुद्ध समाप्त भ गेलैक। इंगोएशियन (आंग्ल-रुसी) संधि पर हस्ताक्षर करैक लेल चर्चिल मास्को अयलाह। संधि पर हस्ताक्षरो भऽ गेलैक। मास्को छोड़ै स एक दिन पहिने अनायास स्तालिन आ मोलोटोव चर्चिल लग पहुँच कहलकनि- लड़ाई-उड़ाई त बहुत भेल। नीक समझौतो भऽ गेल। काल्हि अहाँ जेबो करब तेँ आइ थोड़े मौज-मस्ती क लिअ। हमरा ऐठाम चलि भोजन करु।
स्तालिनक आग्रह सुनि चर्चिल मने-मन सोचै लगलथि जे महान् तानाशाह स्तालिन नौत देबए अयलाह आइ जरुर किछु अद्भुत वस्तु देखैक मौका भेटत। चर्चिल नौत मानि स्तालिनक संग विदा भेलाह। रास्ता मे सिपाही सब अभिावादन करनि। थोड़े दूर गेला पर एकटा पीअर रंगक दुमहला मकानक आगू मे कार रुकल। सभ केयो उतड़लथि। स्तालिनक संग चर्चिल मकानक भीतर गेला। भीतर जा चर्चिल कऽ बैसबैत स्तालिन कहलखिन- ऊपरका तल्ला मे लेनिन रहैत छलाह। ओ गुरु छथि तेँ ओहि तल्लाक उपयोग हम नहि करै छी। ओ म्युजियम बनल अछि। निच्चा मे तीनि टा कोठरी अछि एकटा मे दुनू परानी रहै छी। दोसर मे बेटी रहैत अछि आ तेसर मे पार्टी सदस्यक लेल बैठकी बनौने छी।
स्तालिनक बात सुनि चर्चिल छगुन्ता मे पड़ि गेलाह जे जाहि तानाशाहक डरे पूँजीवादी जगत थरथराइत अछि ओहि तानाशाहक रहैक व्यवस्था ऐहने छैक। मने-मन सोचैत चर्चिल गुम्म रहथि कि स्तालिन कहलकनि- थोड़े काल हमरा छुट्टी दिअ। भोजन बनबै जाइ छी।
ई सुनि चर्चिल अचंभित होइत पूछलखिन- अपने भानस करै छी? भनसिया नहि अछि?
मुस्कुराइत स्तालिन उत्तर देलखिन- नहि। अपने दुनू परानी मिलि भानस करै छी।
स्तालिनक बात सुनि चर्चिल हतप्रभ होइत कहलखिन- बड़ बढ़ियाँ। आइ घरेवाली केँ भानस करै कहिअनु। अहाँ गप-सप करु।
हम लाचार छी। पत्नी घर पर नहि छथि। ओ पाँच बजे कपड़ा मिल स औतीह।
चर्चिल स्तब्ध भऽ गेलाह।
44 एकता
एकटा पैघ भवनक निर्माण होइत छलैक। निर्माणस्थल लग एक भाग पजेबा दोसर भाग बालू तेसर लकड़ी सीमेंट चून इत्यादि जमा छल। ढ़ेरी स पजेबा बाजल- अकास ठेकल कोठा हमरे स बनत तेँ कोठाक श्रेह हमरे भेटक चाही।
पजेबाक बात सुनि सिमटी आ बालू प्रतिवाद करैत कहलकै- तोँ झूठ बजै छेँ। तोरा इ नहि बुझल छौ जे एक स दोसर पजेबाक बीच जँ हम नहि रहबौ त तू ढ़नमनाइते रहमे। संगे तोरा इहो नइ बुझल छौ जे जत्ते दूर तक तोँ जेमे तत्ते दूर तक हमहू संगे जेबौ आ तोरो स ऊपर हमही सुइत क रक्षो करबौ।
बालू आ सिमटीक बात सुनि खिड़की आ केवाड़िक लकड़ी तामसे थरथराइत कहलकै- तोरा तीनू बूते बर हेतौ त देबाल बनि जेमे मुदा बिना हमरे ने छत बनि सकमे आ ने मुह-कान चिक्कन हेतौ। जाबे हम नइ रहबौ ताबे कुत्ता-बिलाईक घर रहमे।
सब सामानक बीच कटौज चलैत छल। कारीगर चाह पीबि बीड़ी सुनगेलक। बिड़ियो पीबैत छल आ मने-मन हँसबो करैत छल। जखन भरि मन बीड़ी पीलक मूड साफ भेलै तखन तीनू कऽ चुप करैत कहलक- अगर तू सब मिलाने क लेमे तइ से की हेतौ? जाबे हम नहि इलम स तोरा सबके बनेवौ ताबे ओहिना माटि पर पड़ल रहमे। कौआ-कुकुड़ आबि-आबि गंदा करैत रहतौ।
सभक विचार सुनि निर्णय करैत भवन कहलकै- अपना-अपना जगह पर सबहक महत्व छौ। मुदा जाबे एक-दोसर स मेल क कऽ नहि रहमे तावे भवन नहि कहेमे। वहिना पजेवा सिमटी चून लकड़ी रहमे। तेँ अपन-अपन बड़प्पन छोड़ि मिलानक रास्ता पकड़ जहि स कल्याण हेतौ।
45 विधवा विवाह
राजस्थानक इतिहास मे हठी हम्मीरक विशेष स्थान अछि। ओ ऐहन जिद्दी छल जे जकरा उचित बुझैत छलैक ओ वैह करैत छल। भले ही कतबो विरोध आ निन्दा किऐक ने होय। जखन हम्मीर विआह करै जोकर भऽ गेल तखन विआहक चरचा शुरु भेल। विद्यार्थिये (छात्रे) जीवन मे हम्मीर विधवाक दुर्दशा क गहराइ स अध्ययन केने छल। पढ़ैऐक समय संकल्प क नेने छल जे हम विधवे औरत स विआह करब। हम्मीरक विआहक चरचा पसरलै। मुदा हम्मीर एकदम संकल्पित छल जे विधवे स विआह करब। कुटुम परिवार सब हम्मीर पर बिगड़ै मुदा तकर एक्को पाइ गम नहि। पंडित सभक माध्यम स परिवारबला कहबौलक जे विधवा अमंगल सूचक होइत तेँ ऐहन काज नहि करक चाही। मुदा हम्मीर ककरो बात सुनै ले तैयारे नहि।
एकटा बाल-विधवा क हम्मीर देखलक। विधवा देखि हृदय पसीज गेलै। तखने ओहि विधवा के हम्मीर कहलक- हम अहाँस विआह करब। भले ही परिवारक कतबो विरोध हुअए।
हम्मीरक बात सुनि विधवा खुशी स अह्लादित भ उठल। हम्मीर विआहक दिन तय क कुटुम्ब-परिवार आ पुरहित-पंडित केँ छोड़ि अपन संगी-साथी आ सैनिक सभ कऽ संग केने जा विआह कऽ लेलक।
जखन हम्मीर मेवाड़क शासक बनल तखन सभ विरोधी सहयोगी बनि गेलैक। पंडित सब घोषणा केलक- विधवा नास्ति अमंगलम्।
46 देशसेवाक व्रत
सुभाषचन्द्र बोस बच्चे रहथि। एक दिन राति मे माए लग स उठि निच्चा मे सुतै लगला। बेटा कऽ निच्चा मे सुतैत देखि माए पुछलखिन जे ऐना किऐक करै छी?
सुभाष जबाव देलखिन- माए! आइ स्कूल मे मास्टर साहेब कहने छेलखिन जे हमर पूर्वज ऋृषि मुनि जमीने पर सुतबो करथि आ कठिन मेहनतो करैत छलाह। हमहू ऋृषि बनव। तेँ कठिन जिनगी जीवैक अभ्यास शुरु कऽ रहल छी।
सुभाषचन्द्रक पिता जगले रहथिन। सब बात सुनि सुभाष केँ पिता कहलखिन बेटा! जमीने पर सुतब टा पर्याप्त नहि होइत। एहिक संग ज्ञानोक संचय आ मनुक्खोक सेवा आवश्यक अछि। आइ माइये लग सुति रहू जखन नमहर हैब तखन तीनू काज संगे करब।
सिर्फ शिक्षकेक बात नहि पितोक बात केँ सुभाष गिरह बान्हि लेलनि। आई. सी. एस. केलाक उपरान्त जखन नोकरीक बात सोझा मे एलनि तखन ओ (सुभाष) कहलखिन- हम जिनगीक लक्ष्य तय कऽ नेने छी। नोकरी नहि करब। मातृभूमिक सेवा करब।
47 आत्मबल
फ्रान्सक कथा थिक। रास्ता बगलक पहाड़ी पर बैसि एक गोटे अपन जुत्ता मरम्मत करबैत रहथि। एकटा ढ़ेरबा बच्चा जुत्ता मरम्मत करैत छल। ओहि बच्चाक बगए-बानि स गरीबी झलकैत रहए। मुदा आत्म-बल आ लगन मजगूत छलैक। जुत्ता मरम्मत करा ओ आदमी एक रुपैया पारिश्रमिक दऽ चलै लगल। मुदा माएक बिचार ओहिना ओहि बच्चाक हृदय मे जीबैत छल। बच्चा अपन उचित पाइ काटि बाकी घुमाबए लगल। ओ महानुभाव (जूत्ता मरम्मत करौनिहार) सब पाइ राखि लइ ले कहलक। बच्चा कहलक- हमर जतबे उचित मजूरी हैत ओतबे लेब। माए कहने छथि जे जतबे श्रम करी ओतबे मजूरी ली।
बच्चाक बात सुनि ओ गुम्म भ आहि बच्चा केँ ऊपर स निच्चा घरि निंग्हारै लगल। वैह बच्चाक फ्रान्सक राष्ट्रपति दगाल भेलाह।
48 स्वाभिमान
स्कूलक पढ़ाई समाप्त क सुभाष चन्द्र बोस कओलेज मे नाओ लिखाओल। ओहि कओलेज मे अंग्रेजीक शिक्षक अंग्र्रेज छल। नाम छलनि सी.एफ. ओटन। ओहुना सत्ता मे रहनिहारक बोली जनताक बोली स भिन्न होइत। मुदा ओटन मे आरो बेसी रोब छलैक। बात-बात मे ओ (ओटन) भारतीय जिनगीक मजाक उड़बैत। भारतवासीक जिनगीक प्रति घृणा पैदा करब ओ अपन बहादुरी बुझैत छल।
सुभाष बाबू केँ ओटनक व्यवहार पसिन्न नहि होइन। मुदा विद्यार्थी रहने मन भसोसि क रहि जाथि। एक दिन वर्गे मे सुभाष बैसल रहथि। ओटन भारतबासीक प्रति व्यंग्य करै लगल। व्यंग्य सुनि सुभाषक हृदय मे आगि धधकै लगलनि। क्रोधे ओ बेकाबू भऽ गेलाह। अपन जगह स उठि आगू बाढ़ि ओटनक गाल मे कसि कऽ दू थापर लगबैत कहलखिन- भारतवासी मे अखनो स्वाभिमान जीवैत छैक। जँ क्यो एहि बात क बिसरि चुनौती देत त एहिना मारि खायत।
49 कलंक
गामक कोन लेखा जे पचकोसीक लोक किसुन भाय केँ इमानदार बुझैत छनि। ओना ओ एकचलिया लोक छथि जबकि गामो आ परोपट्टाक लोक बहुचलिया। तेँ किसुन भाय कऽ जत्ते प्रशंसा होइत ओतवे निन्दो। ओना ज्ञान-अज्ञानक बीच सुख-दुखक बीच धरम-पापक बीच उत्थान-पतनक बीच प्रशंसा-निन्दाक बीच त पहिनहि स संघर्ष होइत आयल अछि। मुदा किसुन भाय अनकर प्रशंसा-निन्दा क ओते महत्व नहि दैत जत्ते अपन सैद्धान्ति जिनगी क। अपन जिनगीक रास्ता पर सदिखन सचेत रहैत छलथि। कैक दिन एहेन होइत जे किसुनभाइक बिचार स अलग सैाँसे गामक लोकक विचार होइत। मुदा तेकर एक्को पाइ गम हुनका नाहि। अपन रास्ता पर ओ असकरो निरभिक स ठाढ़ रहैत छलाह। मुदा बिचार बदलैक लेल तैयार नहि होथि।
जिनगीक आरंभे किसुन भाय खेती स केलनि। खेत त बहुत नहि छलनि मुदा जतबे छलनि तहि स मेहनतक बले परिबार चला लथि। बाढ़ि रौदी आ आरो-आरो प्राकृतिक आफत तथा उपद्रव जेँका मानवीय आफत क मुकावला करैक लूरि सीखि नेने छथि। तेँ आन परिवार जेँका परिवार मे चिन्तो नहि होइन। खानदानी खेती कऽ कतौ बदलि त कतौ सुधारि क करति। जहि स गामोक खेतिहर अचता-पचता क हुनकेर अनुकरण करैत।
तेसर साल टहलै ले पंजाब गेल रहथि। टहलै ले की जइतथि खेती देखै ले गेल रहति। पंजाबक खेती अगुआइल तेँ देखब जरुरी बुझि पड़लनि। पंजाव मे झिगुनिक (झिमनिक) खेती देखलखिन। मिथिला क्षेत्र मे जत्ते-जत्ते घेड़ा (नेनुआ घिया झिंगा) होइत तत्ते-तत्ते झिंगुनी देखलखिन। फड़ो अटूट। झिगुनी देख किसुन भायक मन मे गड़ि गेल। मने-मन सोचलनि जे जहि पंजाबक माटि गोंग अछि (दब माटि) तखन जब ऐहेन अछि त अपन माटि (मिथिलाक माटि) मे केहन हैत तत्काल ओ नहि सोचि सकलथि। मुदा ओ बीआ नेने ऐलाह। समय पर बीआ रोपलनि। ओहि चारि कट्ठा झिंगुनिक खेती स किसुन भाय एकटा जरसी गाय किनलनि। अपना ले ओते बीआ शुरुहेक फड़ रखि लेलनि जे छः कट्ठा खेती अगिला साल करब। धुर-झाड़ जखन झिंगुनी बेचै लगलथि तखन गामोक लोक बीआ मंगलकनि। पचता फड़क बीआ लोक सब ले रखि देलखिन अगता फड़क समय त निकलि चुकल छल।
एहि बेर गाम मे झिंगुनिक अनधुन खेती भेल। किसुन भायक उपजा ते पैछिलेसाल जेँका भेल मुदा गामक लोकक दब भ गेलै। दब होइक कारण छलैक उपजवैक ढ़ंग आ पचता बीआ। सैाँसे गामक लोक हुनका ठक कहि कलंकित करै लगलनि। कतेक गोटे सोझहो मे कहलकनि। ठकक कलंक स किसुन भाय रोगाय लगलथि। जना कते भारी कुकर्म क नेने होथि। मन मे सदिखन यैह नचैत रहनि जे- ऐना भेलै किएक?
एहि प्रश्नक उत्तर मन मे जगवे ने करनि। अनायास एक दिन हृदय स आवाज उठलनि- किसुन! तोहर दोख एक्कोपाइ नइ छह। अनेरे सोगाइल छह। तोहर कलंकक कारण बीआक मुरहन आ दौंजी गुने भेल छह।
हृदयक आवाज सुनि किसुन भाय पूछलखिन- अगर हम एहि बात क मानि अपना क निरदोस बुझिये लेब तइयो आन कोना बुझत?
-हँ तोरा ओहि दिन तक कलंकक मोटरी कपार पर रखै पड़तह जहि दिन तक ओहो सब मुरहन आ दौजीक भेद बुझि नहि जायत।
50 बुलकी
एकटा खेत बोनिहारक घरवाली नाकक बुलकी ले रुसि रहलि। बुलकी कीनैक उपाय पति क नहि। हर जोति क जखन ओ (बोनिहार) आयल त घरबाली केँ रुसल देखलक। मुह-तुह फुलौने ओसार पर बैसलि। धिया-पूता खाइ ले कनैत। बोनिहार अपन तामस क घोटि घरबाली लग जा कहलकै- किअए रुसल छी? भूखे बच्चो सब लहालोट होइ अए। आबो भानस करु।
अपन रोष झाड़ैत पत्नी बाजलि- जाबे बुलकी नइ आनि देब ताबे ने खायब आ ने किछु करब।
खुशामद करैत पति कहलकै- आइये साँझ मे हाट स कीनि क आनि देब। अखन भानस करु।
पतिक बात पत्नी मानि गेलि। बोनिहार कर्ज रुपैआ अनै ले विदा भेल। दश रुपैआ अना दर सूइद पर अनलक। रुपैआ घरवालीक हाथ कऽ द देलक। भानस भेलै। सब खेलक। बेरु पहर दुनू परानी हाट स बुलकी कीनि अनलक।
दोसरि साँझ मे बुलकी पहिर सुगिया दादी कऽ गोड़ लगै बोनिहारिन गेलि। सुगिया दादी ओसार पर बैसि पोता-पोती क नल-दमयत्नीक खिस्सा सुनबति रहति। दादी कऽ गोड़ लागि बोनिहारिन बुलकी देखै ले कहलक। बुलकी देखि दादी कहै लगलखिन- कनियाँ। सोन चानी गरीब-गुरबा घर मे नइ रहै छै। जइ घर मे पेटेक भूख नइ मेटाइ छै ओइ घर मे सिंगारक चीज कन्ना रहतै। अनेरे अपन सख करै छह। कहुना-कहुना बच्चा सब के पालह जे कुल-खानदान जीबैत रहतह।
दादीक बात सुनि बोनिहारिन आंगन आबि पति केँ कहलक- गलती भेल जे हम रुसि क अहाँ स बुलकी किनेलहुँ। अखैन रखि दइ छियै काल्हि घुमा क कर्जवालाक रुपैआ द ऐबै।

२.देवांशु वत्स, जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए., हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन।
विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा “जंग” प्रकाशित (2004 ई.)
नताशा:
(नीचाँक कार्टूनकेँ क्लिक करू आ पढ़ू)
नताशा एकतालीस
नताशा बियालीस
३.कल्पना शरण- देवीजी
देवीजी ः बिहारमे आर्थिक विकास
26 जनवरीके अवसर पर झण्डा फहरेलाके बाद देवीजी अपन भाषण प््राारम्भ केने छलैथ। देवीजी कहलखिन जे गणतंत्र भारतमे आर्थिक विकास हेतु पंचवर्षीय याेजना बनाआेल गेल जाहि के अन्तर्गत एक दिशामे प््रागति पर जाेर देल गेल। जेनाकि पहिल मे कृषि दाेसर मे कल कारखाना तेसरमे कृषिये मे चाउर उत्पादन पर जाेर चारिम मे बैकिंग तथा कृषि पर पाॅंचम मे बेराेजगारी आ गरीबी उन्मूलन तथा न्याय व्यवस्थाकसुधार पर जाेर छठममे उद्याेग विशेषतः इन्फाेरमेशन टेक्नाेलाॅजीक तीब्र गति स विकास पर जाेर सातममे तकनीकी विकास द्वारा उद्याेगक उत्पादमे वृद्धि पर जाेर आठममे उद्याेगक आधुनिकीकरण पर जाेर नवममे राेजगार व्यवस्था गरीबी आैद्याेगिकरण आदि पर जाेर तथा दशममे सेहाे नवम जका ध्येय राखल गेल एवम दशम मे अहि सबहक अतिरिक्त शिक्षा पर्यावरण स्वास्थ्य महिला एवम् बच्चासबहक भलाइर् पर ध्यान देल गेल अछि।अहि सबमे देशके आर्थिक विकासमे मददि भेटल अछि मुदा देवीजीके विशेष प््रासन्नता अहि बातक छलैन जे 2008 09 स लऽ कऽ अखन तक बिहारके आर्थिक विकास बहुत नीक अछि। गणतंत्र दिवसके अवसर पर देवीजीक शब्दमे गामक बच्चा बच्चा के बिहारक विकासक सुन्दर सपना देखि रहल छल।
बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
१.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽ–बिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।



