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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक बालानां कृते

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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बालानां कृते

विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम

भाषापाक

 

           

डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” - २ गोट सचित्र बाल कविता

 

. कड़रिक सितुआ या कड़रिक शितुआ या जोंकती

(बाल कविता)

 

कड़रिक सितुआ शितुआ जोंकती मैथिली TERRESTRIAL SLUG MAITHILI 5.jpg

कड़रिक सितुआ शितुआ जोंकती मैथिली LAND SLUG MAITHILI 6.3.jpg

 

कड़रिक सितुआ शितुआ जोंकती मैथिली LAND SLUG MAITHILI 7.3.jpg

 

कड़रिक  ऊपर   सितुआ  चोख ।*

कड़रिक थम्ह पर  सितुआ चोख ।*

कड़रि - कदलि - केरा  भेल अर्थ,

केरा पर किए  सितुआ  चोख ?? *

 

केराक  फऽड़  ने,  केराक  थम्ह,

आशय  छी − केरा  केर  गाछ ।*

ताहि  केरा  केर  गाछक  ऊपर,

खुरचनि चलबय केर की काज ?? *

 

खुरचनि - सितुआ  धार - नदीसँ,

केरा   गाछ   कोना   पहुँचल ?

नञि पहुँचल तँऽ कोना कड़रि पर,

दाँत ओकर  भऽ गेल धारगर ?? *

 

खुरचनि - सितुआ आन जीव आ

कड़रिक  सितुआ  आन  थिकै ।*

दुहु  जीवमे   छी  बड़  अन्तर,

की जँ  एक्कहि  नाम  भेलै ??

 

कड़रिक सितुआकेँ  रओ  बौआ,

खुरचनि - ढाकन नञि होइ छै ।*

छाहरियुक्त  माटि  जे  भीजल,

ताहि ठाँ  कड़रिक सितुआ छै ।।

 

भाँति-भाँति छै  कड़रिक सितुआ,

एक्कर छै  साम्राज्य बड़ी - टा ।

सभहक  देह  बहुत छै  कोमल,

रौद - नूनसँ   भागय  उनटा ।।

 

प्रायः  देह  एकर  छै   नमगर,

मूड़ी  पर  छै   दू  संस्पर्शक ।

कतोक  जीव केर  छै आहार ई,

मुदा मनुक्ख एकर ने भक्षक ।।*

 

छाहरिमे   जे   गाछ   उगैतछि,

तकर   देहमे   पानि    बहुत ।

ओकरहि खा कऽ अछि  जिबैत ई,

करैछ  तकर  तेँ  हानि  बहुत ।।*

 

एहने  गाछ  छी  केरा  केर  आ

लत्ती - फत्ती    सजमनि   केर ।

स्वयं  जीव  कोमल  छी  तइयो,

भक्षक  कोमल  तरुगण   केर ।।*

 

तेँ     कहबीमे    केरा - कदुआ,

अबल - दुबल   पर्याय   बनल ।*

मुदा छगुन्ता, कड़रि आ खुरचनि,

कोना   एक   पर्याय   बनल !!*१०

 

जोंक  जेकाँ  नमरैत  चलैत  अछि,

मुदा ने जन्तुक  खून चुसैत अछि ।

चलबामे   सादृश्य  छै  किछु  तेँ,

“जोंकती” सेहो लोक कहैत अछि ।।

 

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - मैथिलीक एकटा पुरान कहबी । कड़रि = कदलि = केरा

* - उपरोक्त कहबीक समानार्थी अपरूप । “कड़रिक थम्ह” संकेत करैछ जे एहि कहबीमे “कड़रि” माने केराक फऽर नञि अपितु केराक गाछ अभिप्रेत अछि ।

* - जँ एहि कहबीक “शितुआ”केँ खुरचनि मानैत छी तँऽ प्रश्न ई उठैत अछि जे कड़रिक थम्ह पर खुरचनि चलएबाक की प्रयोजन ?

* * - जँ जिबैत खुरचनि (अर्थात खुरचनि सितुआ) केर बात करी तँऽ ओ नदी वा धारक पेनीमे रहैत अछि । आ केरबन्नी वा केराबाड़ी धरि पहुँचबाक कोनहु सम्भावना नञि । आ जँ बाढिक पानिक संग ताहि ठाम पहुँचिअहु गेल तँऽ केरा गाछकेँ नोकशान नञि पहुँचाए सकैछ । तेँ “खुरचनि सितुआ” “कड़रिक सितुआ” निश्चितहि दू अलग-अलग तरहक प्राणी वा प्राणी समूह थिक ।

* - “खुरचनि सितुआ” “कड़रिक सितुआ” दूनू मोलस्का सुदायक (Phylum - Mollusca / Molluska) प्राणी छी मुदा दूनूमे बहुत अन्तर अछि । “खुरचनि सितुआ” (FRESHWATER BIVALVE MOLLUSCS) पानिमे रहएबला जीव अछि, पानिअहिसँ भोजन तथा ऑक्सीजन प्राप्त करैछ आ बाहरसँ दूटा ढाकन सदृश कठोर अवयवसँ बनल सम्पुटसँ आवृत्त रहैछ । मुदा, “कड़रिक सितुआ” (GASTROPOD / UNIVALVE PULMONATE MOLLUSCS) जमीन पर रहएबला जीव अछि तथा ओ ऑक्सीजनकेँ सीधे वायुमण्डलसँ अपन श्वसन छिद्र वा न्यूमोस्टोम (PNEUMOSTOME) नामक अंग द्वारा ग्रहण करैछ । “कड़रिक सितुआ” जमीन पर छाहरियुक्त ओ नम स्थान पर रहैत अछि तथा ताहि ठामक वनस्पतिसभकेँ हराशंखहि जेकाँ बड़ क्षति करैछ । कड़रिक सितुआकेँ ऊपरसँ देखला पर ओकर शरीर पर प्रायः कोनहु कवच (SHELL / EXOSKELETON) नञि रहैत अछि मुदा उपरुका चामक नीचाँमे एकटा छोट-क्षिण अन्तः कवच (VESTIGIAL INTERNAL SHELL / EXOSKELETON) रहैत अछि जे कि ओकर शरीरकेँ पुर्ण रूपेँ नञि झाँपि सकैत अछि ।

कड़रिक सितुआ शितुआ जोंकती मैथिली LAND SLUG MAITHILI 5.1.jpg

* - “कड़रिक सितुआ”क भक्षण प्रायः मनुक्ख नञि करैत अछि, जखनि कि मिथिलाक जनजातीय समूहक लोक सभ “खुरचनि सितुआ”क भक्षण डोका आ घोंघरी आदि सदृश करैत अछि ।

* - छाहरिबला स्थान पर उगल कोमल गाछ-पात, लत्ती-फत्ती आदि केर भक्षण कए कड़रिक सितुआ अपन पेट भरैत अछि ।

* - छहरिबला स्थान पर उगल कोमल गाछ-पात, लत्ती-फत्ती आदिकेँ दुर्बल वा कमजोर मानल जाइत अछि कारण जे ओहि तरहक गाछ बिरिछमे पानिक मात्रा बहुत बेसी रहैत अछि आ मजगूत काठ नञि रहैत अछि । तेँ मिथिलामे एकटा कहबी आओरहु अछि - “अबल दुबल पर सितुआ चोख” ।

*१० - एहि प्रकारेँ निम्न चारू कहबी समानार्थी अछि -

·        कड़रिक ऊपर सितुआ चोख

·        कड़रिक थम्ह / गाछ पर सितुआ चोख

·        अबल दुबल पर सितुआ चोख

·        कदुआ ऊपर सितुआ चोख

मुदा आश्चर्यक बात जे मिथिलाक जन-सामान्य ओ विद्वत-लेखक वर्गमे सेहो दूनू सितुआकेँ खुरचनि बूझल जाइत अछि जखनि कि लोक साहित्यक सूक्ष्म अवलोकनसँ स्पष्ट संकेत भेटैछ जे दुहु दू प्रकारक जीव थिक

 

 

. खुरचनि सितुआ या खुरचनि शितुआ

(बाल कविता)

 

खुरचनि सितुआ शितुआ मैथिली UNIO BIVALVE MAITHILI 5.1.jpg

 

कड़रिक  सितुआ  बुझू ने  हमरा,

हम   छी   खुरचनि - सितुआ ।*

हम  ने  केरा - सजमनि  नाशक,

निर्धन     केर     पेटभरुआ ।।*

 

सीप  सनक  हमरहु  दू - ढाकन,

“खुरचनि”    तकरहि     नाम ।

हम  छी  कोमल  जीव, हमर छी

कवचक   “खुरचनि”     नाम ।।*

 

पोखरि - धार - नदी - डबरा  केर,

पेनीमे   अछि   बास    हमर ।

हम नञि  धरती पर  फिरैत  छी,

पानिमे  चलइछ   साँस  हमर ।।*

 

मनुख जे निर्धन, नहि उपाए किछु,

तकर   प्राण-रक्षक   हम   छी ।

आहूत बनि  स्वयं,  पेट भरी हम,

नञि   जजाति-भक्षक  हम छी ।।*

 

खतड़ा  देखितहिं  अपन  कवचमे,

नुका  रहैत  छी   हम   बैसल ।

जिबितहि  हमरा  उसीनि दैत छी,

तइयो  हमरा   नञि  चिन्हल ।।

 

कोना कहैत छी  कड़रिक सितुआ,

अबल - दुबल पर सितुआ चोख ?

हम तँऽ छी  निर्बल  केर  रक्षक,

तकरा  पेटक   आगिक  तोष ।।*

 

आन  ठाम   दुनिञाभरि   सौंसे,

हमर   बहुत   व्यञ्जन  अछि ।

अपन देश,  ने जानि किए,  पर

हमर  बहुत   गञ्जन   अछि ।।

 

हमर खोल  खुरचनि केर  जगमे,

बहुतहि      छी      उपयोग ।

“बटन” बनैत छल  एहिसँ पहिने,

बहुविध      आन     प्रयोग ।।

 

दूध  आ  घी  केर  डाढ़ी  पहिने,

खुरचनिसँ    खोखरैत    छलहुँ ।

रगड़ि - भूर  कऽ   बीच  भागमे,

काँच   आम   सोहैत   छलहुँ ।।

 

चित्रकार    खुरचनिमे    पहिने,

रंगक      करथि     मिलान ।

पएर - मँजना  केर  रूपमे  सेहो,

हम्मर   छल    बड़    माँग ।।*

 

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खुरचनि सितुआ शितुआ मैथिली UNIO BIVALVE MAITHILI 6.2.jpg

 

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - “खुरचनि सितुआ” “कड़रिक सितुआ” दूनू मोलस्का सुदायक (Phylum - Mollusca / Molluska) प्राणी छी मुदा दूनूमे बहुत अन्तर अछि ।

* - “खुरचनि सितुआ”  लत्ती, साग आ छाहरियुक्त जमीन पर उपजएबला आन कोनहु तरहक /कोमलन गाछ-बिरिछकेँ कोनहु ञि पहुँचेबैत अछि ।

* - मोलस्का समुदाय (PHYLUM - MOLLUSCA) केर एहेन समस्त प्राणी (चाहे समुद्रमे रहए किंवा नदी-धार आदिमे) जे दू गोट ढाकन सदृश ठोसगर संरचनाक सम्पुटमे बन्न रहैत अछि मैथिलीमे “सीप” (BIVALVES / BIVALVE MOLLUSCS / BIVALVE MOLLUSKS) कहबैत अछि । सीपक दूनू ढाकन वा पट एक कातसँ एकटा स्नायु (LIGAMENT) द्वारा परस्पर जुड़ल रहैत अछि जे कब्जा (HINGE) जेकाँ काज करैछ । एहि कब्जाक कारणेँ सीपक दूनू ढाकन एक दिशिसँ परस्पर जुड़ल रहैत अछि आ दोसर दिशिसँ जीवक इच्छानुसार फुजि सकैत अछि । एहि प्रकारेँ खुरचनि सितुआ (UNIOES) सेहो व्यापक रूपेँ एकटा सीपहि अछि जकर दूनू ढाकनकेँ मैथिलीमे “खुरचनि” नाँओसँ जानल जाइत अछि ।

* - “खुरचनि सितुआ”  नदी, धार, पोखरि आदिक पेनीमे माटि वा बालुमे आधा धँसल रहैत अछि । एकर शरीरमे दूटा नली सदृश संरचना रहैत अछि जे कवचसँ (ढाकनसँ) बाहर अलग-अलग छेदक रूपमे फुजैत अछि । एक छेदसँ पानि अन्दर जाइत अछि आ दोसरसँ बाहर आबैत अछि । पानिमे उपस्थित भोज्य पदार्थ आ ऑक्सीजनकेँ ई जीव अवशोषित कऽ लैत अछि आ उच्छिष्ट व उत्सर्जी पदार्थकेँ पानिक संग पुनः आपिस जलाशयमे त्यागि दैछ । पानिसँ निकाललाक बाद किछु दिन धरि ई सुषुप्तावस्थामे निष्क्रिय वा निस्चेष्ट रहैत अछि मुदा बेसी दिन धरि नञि जीबि सकैत अछि ।

* - कड़रिक सितुआक रूपमे खुरचनि सितुआकेँ उपस्थित करब एकटा बहुत पैघ साहित्यिक चूकि छी खुरचनि सितुआ कोनहु प्रकारक मनुष्योपयोगी गाछ - बिरिछकेँ नोकशान नञि पहुँचबैत अछि । उनटहि, मिथिलामे सामाजिक-आर्थिक रूपसँ कमजोर वर्गक आहार बनि ओकर क्षुधाकेँ शान्त करैछ ।

* - विश्वक विभिन्न भागमे भिन्न-भिन्न समुदायक लोकसब द्वारा खुरचनि सितुआ आहारक रूपमे लेल जाइत अछि । खुरचनिसँ पहिने शर्ट आदि केर बटन बनैत छल । गाम घरमे लोकसब दूधक डाढ़ी खखोरबाक लेल, काँच आम आ खीरा आदि सोहबाक लेल, पएर मँजबाक लेल प्रयुक्त होइत छल । पहिने चित्रकार लोकनि विभिन्न रंगकेँ फेँटबाक लेल वा मिलान करबाक लेल खुरचनिक प्रयोग करैत छलाह ।

 

 

 

 

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