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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक बालानां कृते

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१६. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

बालानां कृते

विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम

भाषापाक

डॊ. शशिधर कुमर- किछु बाल कविता

चीता (बाल कविता)

 

चीता मैथिली CHEETA CHEETAH MAITHILI 2.jpg

 

चित्रकाय - चीता प्रशिद्ध अछि,

भारत  भरिमे  भेल  विलुप्त ।

संस्कृतक  अछि  देल   नाँओ,

पर संस्कृतक  क्षेत्रहिसँ लुप्त ।।*‍१

 

भारतीय चीता  बाँचल अछि,

अगबहि    आब    ईरानमे ।

किछु केर  आशा छी  एखनहु,

ओ   भेटत  बलुचिस्तानमे ।।*

 

ईरानक चीता    ओएह   बूझू,

जे  छल  भारत केर  चीता ।

भारत  आ  भारतसँ पच्छिम,

एसियामे छल  इएह चीता ।।*

 

चीता केर  इएह  एक प्रजाति,

छल एसियाक सभ टा चीता ।

बाँकी  चारि  प्रजाति  शेष जे,

अफ्रिकाक से  अछि  चीता ।।*

 

जतबा  धरतीक  जन्तु एखन,

स्थलमंडल पर विचरैत अछि ।

सभसँ   बेसी  त्वरित  वेगसँ,

चीतहि टा बस दौड़ैत अछि ।।*

 

बाघ-सिंह-तेन्दुआ  जे अछि से,

प्रायः     रातिचर    प्राणी ।

जगुआरक दिन - राति समानेँ,

चीता     दिनचर    प्राणी ।।*

 

अल्प  समयमे  त्वरित  वेगसँ,

करैछ     खेहारि    शिकार ।

बारहसिंघा,  हरीन,   नीलगाए,

खढ़िआ    आदि    शिकार ।।

 

अल्प  समयमे  त्वरित  वेगसँ,

हकमि  जाइत  अछि  चीता ।

कए शिकार,  नञि खाऽ सकैछ,

ओ  आधा - पओने   घण्टा ।।*

 

निर्बल ओ असहाय  देखि कऽ,

आन    उठाबैछ    फायदा ।

मारल  शिकारकेँ  लए भागैछ,

चीता आ सिंह - लकड़बग्घा ।।*

 

भूखल चीता  उठैछ पुनः आ,

फेरहु     करैछ    शिकार ।

जँ तकदीर नीक एहि बेर तँऽ,

बनैछ    शिकार - आहार ।।

 

भारतीय - चीता    भारतमे,

करए     फेरसँ     बास ।

तकर व्योंतमे  अछि लागल,

आब भारत  केर  सरकार ।।

 

देशक ई भोतिआएल धरोहरि,

प्राप्तिक   होइछ   प्रयास ।

जतन भऽ रहल भारत-भू पर,

चीताक    हो    पुनर्बास ।।*

 

 

 

चीता मैथिली CHEETA CHEETAH MAITHILI 2.1.jpg

 

 

चीता मैथिली CHEETA CHEETAH MAITHILI 3.2.jpg

 

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - संस्कृतक चित्रक वा चित्रकाय शब्दसँ चीता शब्दक उत्पत्ति भेल अछि । मुदा भारतीय चीता आब भारतसँ विलुप्त (EXTINCT) भऽ चुकल अछि ।

* - भारतीय चीता एखन मात्र ईरान देशमे बाँचल अछि आ तेँ ओकरा आब ईरानी चीता कहि सम्बोधित कयल जाइत अछि । किछु लोकक कहब अछि जे भारतीय चीता बलुचिस्तानमे सेहो बाँचल भऽ सकैत अछि मुदा तकर पुष्टिक लेल कोनहु वैज्ञानिक अध्ययन नञि कयल गेल अछि ।

* - जिबैत चीताक कुल पाँच प्रजाति (SUB SPECIES) अछि । पहिल प्रजाति एसिया महाद्वीपमे भेटए बला भारतीय या ईरानी चीता अछि आ शेष चारिटा प्रजाति अफ्रिका महाद्वीपमे पाओल जाइत अछि ।

* - बाघ, सिंह आ तेनुआ आदिक विपरीत चीता मुख्यतः दिनचर जन्तु अछि आ दिनहिमे शिकार करैत अछि । चीता अपन घ्राण शक्ति वा सुँघबाक शक्तिक आधार पर नञि अपितु दृष्टि वा देखबाक क्षमताक बलेँ शिकार करैत अछि ।

* - चीता बहुत कम समयावधिमे बहुत बेसी गति धरि पहुँचि सकैत अछि । गति पकड़बाक एहि त्वरित प्रक्रियाक कारणेँ चीताक त्वरण (ACCELERATION) धरती पर विचरण कएनिहार जन्तुसभमे सभसँ बेसी अछि । शिकार करबा काल चीताक औसत गति (AVARAGE SPEED) 64 कि॰मि॰ प्रति घण्टा रहैत अछिपर शुरुआति गति 112 कि॰मि॰ प्रति घण्टा धरि भऽ सकैत अछि । गति पकड़बाक एहि त्वरित प्रक्रिया अर्थात अत्यधिक त्वरणक कारणेँ चीताक शरीर बहुत बेसी गर्म भऽ जाइत अछि जाहिसँ चीता बहुत बेसी थाकि जाइत अछि । ओ एतबा थाकि जाइत अछि जे अपन पकड़ल शिकारकेँ अपना सोझाँमे राखि आधा - पओन घण्टा सुस्ताइत अछि आ तकरा बादहि ओ एहि शिकारकेँ खाइत अछि । बहुधा ओकर क्लांति वा हकमीक फायदा आन मांसाहारी जन्तुसभ (यथा - आन चीता, बाघ, सिंह, लकड़बग्घा, हुड़ार आदि) उठबैत अछि आ सुस्ताइत चीताक सोझाँसँ ओकर शिकार लऽ कऽ भागि जाइत अछि आ बेचारा चीता विवश भऽ से देखैत रहि जाइत अछि ।

* - भारतीय चीताकेँ ईरानसँ आनि फेरसँ भारत जंगलसभमे पुनर्वासित करबाक प्रयास भारत सरकार द्वारा कएल जा रहल अछि ।

*अंग्रेजीक पॅन्थर (PANTHER) शब्द चीताक अतिरिक्त तेनुआ ओ जगुआर लेल सेहो प्रयुक्त होइत अछि ।

 

जगुआर (बाल कविता)

जगुआर मैथिली JAGUAR MAITHILI 1.1.jpg

 

जगुआरक  मतलब  नञि  चीता,

ओ तँऽ  आनहि  जीव छी ।

किछु-किछु तेन्दुआ सनि देखबामे,

मुदा ओ आनहि जीव छी ।।*

 

तेसर   पैघ   बिलाड़ि   अछैतहु,

बहुतहि  ओ  शक्तिशाली ।

छोट  मुदा  सुगठित   काय  छै,

फुर्ती छै  सब पर  भारी ।।

 

छोट  मुदा  खूब  मोट  पएर छै,

बड़ छै  पएरक  मजगूती ।

मगर - काछुकेँ  चीड़ि  सकैतछि,

दाँतक  ततबा  मजगूती ।।*

 

हरीन आदि प्राणिक बुझलहि अछि,

पैघ बिलाड़ि शिकार करैछ ।

साँप - मगर - कछुआ सरिसृप जे,

तकरहु ने जगुआर छोड़ैछ ।।*

 

दिनचर छी,  रातिचर  सेहो  ओ,

जखन मोन, शिकार करैछ ।*

नबका दुनिञा  केर  बासी  अछि,

दच्छिन-माँझ विहार करैछ ।।*

 

तेन्दुआ आओर बिलाड़ि जेकाँ ओ,

आसानीसँ  गाछ   चढ़ैछ ।

पानि हेलि कऽ  ओ बाघहि सनि,

नदी - धारकेँ  पार करैछ ।।

 

जगुआरेट आमेजन  घाटीक,

भाषा   केर   छी   शब्द ।

तकरहिसँ जगुआर बनल अछि,

अंग्रेजीक   नञि    शब्द ।।*

 

अहँसभकेँ जँ फुरए नऽव किछु,

कही    मैथिली     नाम ।

ता धरि जगुआरहि मिथिलामे,

एहि  जीवक  भेल  नाम ।।*

 

जगुआर मैथिली JAGUAR MAITHILI 2.1.jpg

 

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - आइ - काल्हि जगुआर या जैग्युआर (JAGUAR) शब्द श्रव्य ओ दृश्य माध्यम (AUDEOVISUAL MEDIA) पर बेसी चर्चित भऽ गेल अछि आ कतेकहु बेर ओकर भ्रामक अर्थ चीता धिया-पुतसभकेँ बताओल जाइत अछि । मुदा से नञि, चीता ओ जगुआर दूनू दू जन्तु अछि - एकदम भिन्न । चीता पुरना दुनिञाक (एसिया ओ अफ्रिका महादेशक) मूल निवासी अछि जखनि कि जगुआर नबका दुनिञाक (दछिनबारी ओ उतरबारी अमेरिका महादेशक) मूल निवासी । जगुआर सम्पुर्ण दछिनबारी अमेरिका आ उतरबारी अमेरिकाक माँझ ओ दछिनबारी भागक वन्य क्षेत्रमे पाओल जाइत अछि । जगुआर बहुत किछु तेन्दुआ सनि लागैत आछि, मुदा तेन्दुआसँ सेहो भिन्न अछिजगुआरक चाम पर बनल कारी घेरेबाक बीचमे एकटा कारी बुनका रहैत अछि पर, तेनुआमे से नञि । बाँकी, आन अन्तरसभ तँऽ अछिअहि ।

* - जगुआर बिलाड़ि कुलमे (Family - FELIDAE) आकार ओ भारक अनुसारेँ तेसर (क्रमशः बाघ ओ सिंहक बाद) सभसँ पैघ सदस्य अछि मुदा ताहि अनुरूपेँ ओ बहुत शक्तिशाली होइत अछि । बिलाड़ि कुलक आन कोनहु सदस्य मगर ओ काछु केर शिकार नञि करैत अछि मुदा जगुआर अपन शक्तिशाली श्वदन्त दाँत (CANINE TEETH) हन्वास्थिक (MANDIBLE) बलेँ मगरक मजगूत खाल ओ कछुआक मजगूत खोलकेँ चीड़ि दैत अछि

* - बाघ, सिंह आ तेनुआ मुख्यतः रातिचर होइत अछि जखनि कि चीता दिनचर । मुदा जगुआर दिनचर ओ रातिचर दूनू होइत अछि, मतलब कि ओ दिन ओ राति दूनू समय समान रूपेँ शिकार करबामे सक्षम अछि आ शिकार करैत अछि ।

* - अंग्रेजीक जगुआर शब्द आमेजन घाटीक क्षेत्रीय भाषाक शब्द जगुआरेट सँ लेल गेल अछि आ तेँ एहि ठाम मैथिलीमे सेहो हम ओहि शब्दक यथावत प्रयोग कयल अछि । मैथिलीमे जगुआर विदेशज श्रेणीक शब्द भेल ।

 

तेन्दुआ या तेनुआ (बाल कविता)

तेन्दुआ तेनुआ मैथिली LEOPARD MAITHILI 5.jpg

 

किछु-किछु बाघहि सनि लगैत छै,

किछु मिलैत अछि चीतासँ ।

पानिमे बाघहि सनि  हेलैत अछि,

रंग मिलैत अछि  चीतासँ ।।

 

चित्रकाय छै  चीतहि  सनि, मुदा

करिया धब्बा  गोल ने छै ।*‍१

गाछ  चढ़एमे   बहुतहि  माहिर,

पैघ बिलाड़िमे जोड़ ने छै ।।*

 

गाछ चढ़ैछ  झट  मूँहमे  धएने,

मूइल  बहुत भारी शिकार ।

छीनि सकैछ ने  बाँटि सकैतछि,

आन केओ मूहँक आहार ।।

 

गाछक मोटका डाढ़ि पर बैसल,

भक्षण करैछ शिकार ओ ।

दिनभरि सूतल रहइछ ओहि ठाँ,

उतरैछ साँझ अन्हार ओ ।।

 

बाघ - सिंह - चीतासँ  छोट छै,

लागैत छै  जगुआर जेकाँ ।

एक जँ रहितए  दुहु टा  दुनिञा,

अलग फेर जगुआर कहाँ !! *

 

तेनुआ भेटैछ एसिया - अफ्रिका,

विविध क्षेत्र - जलवायुमे ।

बारल छै  बस क्षेत्र विषम अति,

मरू - हिम जलवायु जे ।।

 

हिम-तेनुआ अलगहि छी प्राणी,

भेटैछ  ऊँच  पहाड़  पर ।*

ओतबहि अलग ओ छी तेनुआसँ,

जतबा चीता - बाघसभ ।।

 

 

तेन्दुआ तेनुआ मैथिली LEOPARD MAITHILI 6.4.jpg

 

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - प्राचीन संस्कृतक चित्रकः वा चित्रकायः शब्दमे आजुक चीता सेहो आबैत छल आ तेन्दुआ या तेनुआ सेहो । किछु लोक संस्कृतक तरक्षुः शब्दसँ तेन्दुआ मानैत छथि पर तरक्षुः चीता आ बाघ आदि लेल सेहो आयल अछि । हिन्दीमे सेहो तेन्दुआ शब्दक आगमनक श्रोत स्पष्ट नञि अछि; सम्भवतः कोनहु जनजातीय भाषा वा बोलीसँ आयल छल आ ओतहिसँ मैथिलीमे सेहो आयल । मैथिलीमे तेन्दुआ शब्द यथावत प्रयुक्त होइत अछि जकर उच्चार भेद (PHOENETIC VARIANT) तेनुआ सेहो अछि । 

* - तेन्दुआ गाछ पर चढ़बामे बड्ड माहिर होइत अछि । ओ शिकार कएलाक बाद ओहि शिकारक लहाशकेँ अपन मूँहमे दाबि आसानीसँ गाछ पर चढ़ि जाइत अछि । एहि प्रकारेँ ओ अपन भोजनकेँ आन प्रतिद्वन्दी शिकारीसभसँ (जेना कि - बाघ, सिंह, चीता आदिसँ) सुरक्षित कऽ लैत अछि ।

तेन्दुआ तेनुआ मैथिली LEOPARD MAITHILI 7.1.jpg

 तेन्दुआ तेनुआ मैथिली LEOPARD MAITHILI 8.1.jpg

* - पैघ बिलाड़िसभमे तेन्दुआक अतिरिक्त मात्र जगुआर गाछ पर चढ़ि पाबैत अछि । जँ पुरना आ नबका दुनिञा कोनहु स्थल मार्ग द्वारा परस्पर जुड़ल रहैत तँऽ सम्भवतः तेन्दुआ ओ जगुआर अलग - अलग प्राणीक रूपमे नञि विकसित भेल रहैत ।

* - हिम तेन्दुआ (या हिम तेनुआ) नामक जन्तु तेन्दुआ (या तेनुआ) केर कोनहु प्रजाति नञि छी अपितु एक गोट स्वतन्त्र मांसुभक्षी जन्तु छी । ओहि दूनूमे ओतबहि अन्तर अछि जतबा कि तेन्दुआ ओ आन पैघ बिलाड़ि (बाघ, सिंह, जगुआर, चीता) सभमे अछि । हिम तेन्दुआ (Eng. - SNOW LEOPARD / OUNCE) (Bio. Name - Panthera uncia syn. Uncia uncia) भारतमे मात्र हिमालय पर्वत श्रेणीक 3000 मीटर सँ 4,500 मीटर (9,800 फीट सँ 14,800 फीट) केर ऊँचाई धरि भेटैत अछि । भारतक अतिरिक्त प्राकृतिक रूप सँ ओ नेपाल, भूटान, चीन, मंगोलिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गीस्तान, ताज़िकिस्तान आ उजबेकिस्तान देशमे पाओल जाइत अछि ।

 

हिम हिमालयी तेन्दुआ तेनुआ मैथिली SNOW LEOPARD OUNCE MAITHILI 1.1.jpg

हिम हिमालयी तेन्दुआ तेनुआ मैथिली SNOW LEOPARD OUNCE MAITHILI 2.1.jpg

बनबिलाड़ि खटाँसु/खटाँस

(बाल कविता)

 

खटाँसु खटाँस बनबिलाड़ि मैथिली JUNGLE WILD CAT MAITHILI 3.2.jpg

छी बिलाड़ि ओ जे मनुक्ख केर,

घऽर - आङ्गन खरिहान  भेटैछ ।

आ  मनुक्ख  केर   परिवेशहिमे,

जकर  सभक  सन्तान  पलैछ ।।*

 

आन बिलाड़ि  जतेक जे  बाँचल,

बनबिलाड़ि केर  नाम  पाबैछ ।

बाध - बोन  जंगल  आ  झाड़मे,

बनबिलाड़ि  केर   बास  रहैछ ।।*

 

साँझ - परातहि  घुमैत - घामैत,

बाट - घाट   खरिहान   भेटैछ ।

छै   बिलाड़िसँ  पैघ - पुष्ट  ओ,

मोटका भोकना बिलाड़ि लागैछ ।।

 

एकरहि  तँऽ यौ  गाम - घऽरमे,

दोसर  नाम  खटाँसु  कहैछ ।

पर खटाँसु  शब्दक  परीधिमे,

आनहु  जन्तुक  नाँओ आबैछ ।।*

 

तेँ अर्थक  फरिछौठ  लेल  किछु,

होअए  उपाए  से  माँग करैछ ।

जोड़ि  विशेषण, भिन्न कएल तेँ,

अपन - अपन दूनू नाम पबैछ ।।*

 

जे   खटाँसु   मार्यार   समूहक,

बनबिलाड़ि खटाँसु”     भेलैक ।

अथवा  मांसुक  भक्षण  कारण,

मांसुभक्षी खटाँसु     हेतैक ।।*

 

आन  समूहक  जे  खटाँसु  से,

मांसु  खाइछ, फलाहार  करैछ ।

तेँ  अप्पन गुण केर  अनुसारहि,

सर्वभक्षी खटाँसु     भेलैक ।।*

 

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - मैथिलीमे जाहि जन्तुक नाम बिलाड़ि अछि से अंग्रेजी ढर्रा पर घरैया बिलाड़ि (DOMESTIC CAT / FERAL CAT) भेल किएक तँऽ ई मनुक्खक घऽर-आङ्गन खरिहान-दलान आदि स्थानहि पर रहैत अछि । वस्तुतः बिलाड़िक बेसीतर समय मनुक्खहि केर परिवेशमे बितैत अछि, ओकर बच्चासभ मनुक्खहि केर परिवेशमे जन्म लैत अछि आ पैघहु होइत अछि ।

* - आन बिलाड़िसभ जे मनुक्खक परिवेशसँ दूर बाध-बोन, जंगल-झाड़ आदिमे रहैत अछि आ जकर बच्चासभ ओही परिवेशमे जन्मैछ आ पलैछ-बढ़ैछ, तकरासभकेँ मैथिलीमे बनबिलाड़ि कहल जाइत अछि । ओ सभ साँझ-परात कहुखन-कहुखन मनुक्खक परिवेशमे या बाट-घाट पर घुमैत-फिरैत भेटि सकैत अछि पर बेसी काल मनुक्खक परिवेशसँ दूरहि रहैत अछि । बनबिलाड़ि बिलाड़िक अपेक्षा आकारमे थोड़ेक पैघ होइत अछि ।

* - बनबिलाड़िकेँ खटाँसु (उच्चारण - खटाँउस या खटौंस) अथवा खटाँस (कल्याणी कोशमे देल वर्तनीक अनुसार) सेहो कहल जाइत अछि । मुदा एहि शब्दक एकटा समस्या छैकखटाँसु या खटाँस शब्द बनबिलाड़ि समूहक जन्तुक अतिरिक्त एकटा आनहु जन्तुक लेल प्रयुक्त होइत अछि जकरा अंग्रेजीमे सीवेट (CIVET) कहल जाइत अछि ।

* * - आजुक परिस्थितिमे एहि तरहक ओझराएल शब्दकेँ फरिछाएब आ फरिछाए कऽ परिभाषित करब आवश्यक । तेँ हम समानता ओ विषमताकेँ देखैत खटाँसु या खटाँसकेँ दू टा व्यापक समूहमे बाँटल अछि ।

* - खटाँसु (खटाँस) केर पहिल समूह भेल बनबिलाड़ि खटाँसु (खटाँस) जे कि ऊपर बनबिलाड़ि नामसँ परिभाषित कएल गेल अछि । ई जन्तुसभ बिलाड़ि कुल या मार्यार कुल (Family - FELIDAE) केर सदस्य अछि । ई सभ प्राकृतिक रूपसँ मुख्यतः मांसु केर भक्षण करैछ अर्थात मांसुभक्षी (CARNIVOROUS) होइत अछि । तेँ एकरासभकेँ मांसुभक्षी खटाँसु (खटाँस) सेहो कहि सकैत छी ।

 

खटाँसु खँटास 3.jpg

 

* - खटाँसु (खटाँस) केर दोसर समूहकेँ हिन्दीमे गन्धबिलाव कहल जाइत अछि कारण जे एकर एकरासभमे कस्तुरी सनि सुगन्ह (सुगन्धि) होइत अछि । तेँ मैथिलीमे  गन्हबिलाड़ि (या सुगन्हबिलाड़ि) खटाँसु (खटाँस) कहि सकैत छी । मुदा ध्यातव्य जे गन्हबिलाड़ि कोनहु बिलाड़ि नञि छी आ नहिञे बिलाड़ि कुल या मार्यार कुल (Family - FELIDAE) सँ एकर कोनहु सम्बन्ध अछि । ई जन्तुसभ विवेराइडी कुल या गन्हबिलाड़ि कुल (Family - VIVERRIDAE) केर सदस्य अछि आ रातिचर होइत अछि । ई सभ प्राकृतिक रूपसँ मांसु आ संगहि संग फऽल (यथा - आम, चीकू, ताड़कून आदि) ओ घास-पातक भक्षण सेहो करैछ, मतलब कि ई सब नैसर्गिक रूपेँ सर्वभक्षी (OMNIVOROUS) होइत अछि । तेँ एकरासभकेँ सर्वभक्षी खटाँसु (खटाँस) सेहो कहि सकैत छी । बंगालीभाषामे एकरा गन्धगोकूल या खाटोश कहल जाइत अछि ।

 

बाघ (बाल कविता)

 

बाघ मैथिली TIGRE TIGER MAITHILI 1.2.jpg

 

 

राजा मरि गेल,  राज तँऽ अछिए ।

सिंह मूइल सनि, बाघ तँऽ अछिए ।

जाहि जंगलमे सिंह अलोपित,  ताहि ठाँ राजा  बाघ तँऽ अछिए ।।*‍१

 

सिंहक छल साम्राज्य विश्व भरि ।

कहियो ओतबा नञि छल बाघक ।

सत्ता पलटल, सिंह बिलटि गेल, बिलटल तइयो बाघ तँऽ अछिए ।।*

 

सभसँ  पैघ  बिलाड़ि  बाघ छी ।

तदनन्तर  सिंहक  अछि पदवी ।

पर जे हो,  सौंसे  जंगलमे,  मार्यारक  साम्राज्य  तँऽ  अछिए ।।

 

भारत,   दच्छिन−पूब  एसिया ।

हिन्द-पड़ोसी   आ  साइबेरिया ।

एसियाक ओ मात्र धरोहरि,  दुनिञा भरिमे  धाख तँऽ  अछिए ।।*

 

चामक रंग छै  लाल - नारंगी ।

ताहि पर  कारी - कारी पट्टी ।

पेट, गाल, नाङ्गरि छी उज्जर; कारी धारीक छाप तँऽ अछिए ।।

 

जे  कहबैछ   बंगालक  बाघ ।

छी  पूरा  भारत  केर  बाघ ।

अंग्रेजक देल नाम ई भ्रामक,  ऊघैत एखनहु  बाघ तँऽ अछिए ।।*

 

नगर वाल्मीकि भारत केर छी ।

चितवन - परसा नेपालक छी ।

पछबारी मिथिला गण्डक तट, एखनहु शोभित बाघ तँऽ अछिए ।।*

 

सभ  बिलाड़िकेँ  पानिक डऽर ।

एकरा  तक्कर  डऽर ने भऽर ।

सुन्दरवन गंगा - तिमुहानी,  दलदल तइयो  बाघ तँऽ अछिए ।।*

 

बाघ मैथिली TIGRE TIGER MAITHILI 3.3.jpg

बाघ मैथिली TIGRE TIGER MAITHILI 2.3.jpg

उजरा बाघ मैथिली WHITE TIGRE TIGER MAITHILI 1.2.jpg

 

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - पहिने समस्त भारतवर्षमे सिंहक साम्राज्य छल । एक्कहि जंगलमे सिंह (LION, Panthera leo) आ बाघ (TIGER/TIGRE, Panthera tigris) दूनू रहैत छल आ ताहि समएमे सिंहकेँ जंगलक राजा कहल जाइत छल । धीरे - धीरे शिकारक कारण सिंहक संख्या बहुत तेजीसँ घटल । घटल तँऽ बाघक संख्या सेहो, मुदा सिंह अपेक्षा कम तेजीसँ । आ जाहि ठाम सिंह अलोपित भऽ गेल ताहि जंगलक राजा बाघकेँ कहल जाए लागल ।

अछिअहि = (अछिअ ++ ह) = (अछिए + ह) = (अछिए + ……… ह केर लोप) = अछिए

 

* - बहुत पहिने सिंहक साम्राज्य बाघक तुलनामे बहुत विस्तृत छल । सिंह पहिने सम्पुर्ण भारतवर्षक जंगलमे पर्याप्त मात्रामे (सम्भवतः बाघसँ बेसी मात्रामे) छल ।  समय बदलल, परिस्थिति उनटि गेल आ आब गुजरातक गिरिवनकेँ छाड़ि सिंह समूचा भारतक जंगलसँ अलोपित भऽ गेल । सिंहक तुलनामे बाघक स्थिति भारतमे बहुत बेसी नीक अछि । आ सिंहक अनुपस्थितिमे बाघहि जंगलक राजा भेल ।

* - बाघ प्राकृतिक रूपसँ मात्र एसिया महादेशमे भेटैत अछि । भारतक संगहि भारतक पड़ोसी देशसभ, आन दच्छिन-पूब एसियाक देशसभ आ रूसक साइबेरिया प्रदेशक दच्छिन-पूब भागमे भेटैत अछि । तेँ ओ खास तँऽ अछिए ।

* - ईस्ट इण्डिया कम्पनीक बंगाल स्टेटमे ताहि समय आजुक पच्छिम बंगालक अतिरिक्त बिहार (मिथिला सहित), उड़ीसा आ बाङ्ग्ला देश अबैत छल । ओ लोकनि सुन्दरवनमे बाघकेँ देखि कऽ ओकर नाम रॉयल बंगाल टाइगर (ROYAL BENGAL TIGRE) राखि देलन्हि जखनि कि ताहि समयमे बाघ समस्त अविभाजित भारतक जंगलसभमे सामान्य रूपसँ भेटैत छल । ताहि समय अपना दिशि भेटए बला बहुत रास जीव-जन्तु ओ गाछ-बिरिछक नाम बंगालक नामसँ राखि देल गेल जे भ्रामक छल आ अछि । तहिना ई बाघ सेहो । कोनहु जैववैज्ञानिक नाँओमे जञो बेंगालेन्सिस (bengalensis / benghalensis) प्रत्यय जुड़ल होअए तँऽ बेसी सम्भावना जे ओ जैव-जाति वा प्रजाति अपना दिशि सेहो सामान्य रूपसँ भेटैत होयत ।

* - मिथिलाक पछबारी सीमा पर गण्डकक तट पर अवस्थित जंगलसभमे एखनहु बाघकेँ देखल जा सकैत अछि । पच्छिम चम्पारणक वाल्मीकि राष्ट्रिय उद्यान (VALMIKI NATIONAL PARK & WILDLIFE SANCTUARY) केर वाल्मीकि बाघ रिजर्व (VALMIKI TIGER RESERVE / VTR) भारतमे बाघक प्रमुख प्राकृतिक आवास क्षेत्रमेसँ एक अछि । एकरहि ठीक उत्तर भऽर नेपालक सीमामे अवस्थित चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज (CHITWAN NATIONAL PARK) आओर पर्सा वन्यजन्तु आरक्ष (PARSA WILDLIFE RESERVE) सेहो बाघक प्राकृतिक आवास क्षेत्र अछि । एहिमेसँ चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जकेँ युनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व सम्पदा क्षेत्र (WORLD HERITAGE SITE) केर श्रेणीमे सम्मिलित कएल गेल अछि । वास्तवमे ई तीनू वन्य क्षेत्र मीलि कऽ एक गोट बाघ आरक्ष एकाई केर रचना करैछ जकरा चितवन-पर्सा-वाल्मीकि बाघ आरक्ष एकाई (CHITWAN-PARSA-VALMIKI TIGER CONSERVATION UNIT or CPV-TCU) कहल जाइत अछि ।

* - बिलाड़ि कुलक आन सदस्य सभकेँ पानिसँ बड़ डऽर होइत अछि तीतल बिलाड़ि - एक गोट प्रशिद्ध कहबी छै । मुदा बाघ जगुआर एहेन सदस्य अछि जकरा पानिसँ डऽर - भऽर नञि होइत छै । ई दूनू पानिमे बहुत दूर धरि आ बहुत काल धरि हेलि सकैत अछि । तेँ बाघकेँ सुन्दरवन सनि तिमुहानी (DELTA) दलदली क्षेत्रमे सेहो कोनहु असौकर्य नञि होइत छै ।

पानिमे हेलैत बाघ मैथिली TIGRE TIGER MAITHILI 1.1.jpg

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बिलाड़ि (बाल कविता)

 

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बाघक मौसी  कहै छी  जकरा,  तकरहि नाम बिलाड़ि छै ।

एक्कहि कुल केर  जीव दुनु छै,  बहुतहि छोट  बिलाड़ि छै ।।

 

छोट  ओकर  कद-काठी छै तेँ,  विचरि  रहल  निर्बाध छै ।

पैघ बिलाड़ि जेकाँ ओक्कर नञि, सिकुड़ि रहल साम्राज्य छै ।।

 

कखनहुँ म्याँउ-म्याँउ बाजैत अछि, खन गुम्हरैत आबाज छै ।

घऽर-आङ्गन  कि  बाध-बोन,  सभठाँ  मार्यारक  राज छै ।।

 

अपना  मिथिलामे  प्रशिद्ध  बड़,  गोनू झाक बिलाड़ि छै ।*

एतबा कीर्त्ति  जे  कहबी बनि गेल,  गोनू झाक बिलाड़ि छै ।।

 

मांसुभक्षी  आ  चतुर  शिकारी,  मूसक  करैछ  शिकार  छै ।

माछक  चाट  बहुत छै  ओकरा,  दूधक  सद्यः काल  छै ।।

 

जतए बिलाड़िक पहुँच असम्भव,  सीक एहेन निर्माण छै ।*

सीक टुटल  तँऽ  भाग बिलाड़िक,  तेँ ई कहबी विधान छै ।।

 

घर-आङ्गन जे भेटैछ हरदम, सएह कहबैछ बिलाड़ि छै ।

जंगल-झाड़  बिलाड़ि  रहैछ जे,  से तँऽ बन-बिलाड़ि छै ।।*

 

तेनुआ ओ जगुआर जेकाँ ओ,  गाछ चढ़एमे  माहिर  छै ।

ऊँच भवन ओ गाछ-बिरिछसँ, कूदि जाइछ जग-जाहिर छै ।।*

 

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संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - गोनू झाक खिस्साक बिलाड़ि ततेक ने प्रशिद्ध भेल कि ओकरा नाम पर कहबीअहि बनि गेल ।

* - सीक वस्तुतः दूध, दऽही आ माखन आदिकेँ बिलाड़िसँ सुरक्षित रखबाक एकटा सस्ता लेकिन बहुत नीक उपाए छल ।

* - बिलाड़ि वस्तुतः मनुक्खहि केर परिवेशमे रहैत अछि आ जे जंगली परिवेशमे रहैत अछि से बनबिलाड़ि कहबैत अछि । बनबिलाड़िकेँ खटाँसु (उच्चारण - खटाँउस या खटौंस) अथवा खटाँस सेहो कहल जाइत अछि । मुदा खटाँसु या खटाँस शब्दक अन्तर्गत बनबिलाड़िक अतिरिक्त एकटा आन जन्तु सेहो अबैत अछि जकरा अंग्रेजीमे सीवेट (CEVET) कहल जाइत अछि । एकर गुणक आधार पर एकरा मैथिलीमे गन्हबिलाड़ि कहि सकैत छी (हलाँकि मैथिलीमे एकर ई नाँओ प्रचलित नञि अछि) ।

* - बिलाड़ि कुल (Family - FELIDAE) केर मात्र ४ टा सदस्य गाछ पर चढ़बामे माहिर होइत अछि । ओ चारू सदस्य अछि - तेन्दुआ (तेनुआ), जगुआर, बनबिलाड़ि आ स्वयं बिलाड़ि ।

 

सिंह या सिंघ (बाल कविता)

 

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सिंह  कहू  या  सिंघ कहू  अहँ,

छी  ओ  तँऽ जंगल  केर राजा ।

पहिने छल विचरैत  विश्व  भरि,

मुदा आब बाजल अछि  बाजा ।।*‍१

 

राज  ओकर  भारत भरिमे  छल,

आ   सौंसे  पच्छिमक  एसिया ।

छाड़ि     सहारा     मरूभूमिकेँ,

भेटैत छल  हर ठाम  अफ्रिका ।।*

 

दू  शताब्दी   पहिने  धरि  तँऽ,

यूरोपहुमे   बड़   रहैत   छल ।

प्रागैतिहासिक   कालक   युगमे,

भरि अमेरिका ओ फिरैत छल ।।*

 

आब तँऽ बाँचल ठाम-ठीम किछु,

जतए  सुरक्षित  जंगल  अछि ।

भारत केर गुजरातक गिरिवन”,

ओत्तहि सिंहक  मंगल  अछि ।।*

 

अछि प्रयास चलि रहल  बसाबी,

सिंहकेँ     आनहु    जंगलमे ।

पहिल  खेप  छी  मध्य-प्रदेशक,

कुनो  नाम  केर  जंगलमे ।।*

 

तहिना  अफ्रिकाक  स्थिति  छै,

ओत्तहु  कम्महि  सिंह  बचल ।

नवका    गिनतीमे    पहिनेसँ,

सिंहक  संख्या  बहुत  घटल ।।

 

पुरुष-सिंह  केर  गर्दनि पर  छै,

केसरिया    केसक   केसर*

सिंहनी केर  नञि रहैछ घेंट पर,

लटकैत सुन्नर सनि केसर ।।

 

इएह केसर केर कारण  सिंहक,

नाम  केसरी”    सेहो   पड़ल ।

इएह  केसरी  जतए - ततए,

अछि  शूरत्वक पर्याय बनल ।।

 

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संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

*** - बहुत पहिने सिंहक साम्राज्य बाघक तुलनामे बहुत विस्तृत छल । सिंह पहिने एसिया, अफ्रिकाक अतिरिक्त यूरोप आ दूनू अमेरिका महादेशमे पाओल जाइत छल । करीब ‍दस हजार वर्ष पहिने अमेरिका महादेश आ प्रागैतिहासिक कालमे (PREHISTORIC ERA) यूरोपसँ विलुप्त भेल । भारतमे सेहो मात्र गुजरातक गिरवनमे किछु सिंह बाँचल अछि । हाँ, अफ्रिकाक सिंहसभक स्थिति भारतीय सिंहसभसँ किछु नीक अवश्य अछि ।

क्र॰सं॰

मैथिली नाँओ

अंग्रेजी नाँओ

जैववैज्ञानिक नाँओ

सिंहक स्थिति

भारतीय या एसियाक सिंह

Asiatic Lion / Indian Lion / Persian Lion

Panthera leo persica

जिबैत (जिउत)  अछि

अफ्रिकाक सिंह

African Lions - collectively (Each subspecies with a different name individually)

Panthera leo leo & other approx. 17-18 subspecies

जिबैत (जिउत)  अछि

यूरोपक सिंह

European Lion

Panthera leo spelaea

करीब २,५०० वर्ष पहिने विलुप्त

अमेरिकाक सिंह

Americon Lion

Panthera leo atrox

करीब १०,००० वर्ष पहिने विलुप्त

 

* - भारतमे एखन मात्र गुजरात राज्यक गिरिवनमे (GIR FOREST NATIONAL PARK & WILDLIFE SANCTUARY) सिंह बाँचल अछि जे कोनहु प्राकृतिक आफद या महामारीक कारण एक संगहि सुड्डाह भऽ सकैत अछि । एहि बातकेँ ध्यानमे रखैत भारत सरकार सिंहकेँ किछु आनहु जंगलसभमे पुनर्स्थापित करबाक प्रयास कऽ रहल अछि । एहेन पहिल प्रयास मध्य प्रदेशक कुनो-पालपुर वन्यजीव अभयारण्य (KUNO - PALPUR WILDLIFE SANCTUARY) करबाक तैयारी भऽ रहल अछि ।

* - पुरुष सिंहक गर्दनिसँ चहु दिशि स्वर्णाभ पीयर (वा किछु प्रजातिमे पीयर-भूरा-कारी) रंगक केस लटकैत रहैत अछि जकरा संस्कृत आ मैथिलीमे केसर कहल जाइत अछि । इएह कारणेँ सिंहक एकटा पर्यायी नाँओ केसरी सेहो अछि । हिन्दीमे एकरा आयाल आ अंग्रेजीमे मॅन (MANE) कहल जाइत अछि । सिंहनीमे एहि तरहक संरचना नञि रहैत अछि ।

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