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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक बालानां कृते

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१६. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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बालानां कृते

विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम

भाषापाक

 

डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”

किछु बाल कविता

बागर (बाल कविता)

 

बागर मैथिली पोथी BIRDS.jpg

 

कोना करै छेँ - “बागर”  सनि,

बागर की होइ छै - से  बता ।

बागर - बागर   लोक  बाजैए,

बागर की - ककरो  ने पता ।।

 

जे   कहबेँ  -  पएबेँ   ईनाम,

सोचै जाइ जो सभ धियापुता ।

हारि गेलेँ,  तखने  हम कहबौ,

नञि तँऽ छी  हमरो ने पता ।।

 

एहिना बहुते  शब्द  मैथिलीक,

हेरा  गेल  ककरो  ने  पता ।

जे  बाँचल,  पैघो  ने  बाजए,

सीखतै   कोना   धियापुता ।।

 

नेनपनमे सुनलहुँ, पूछल,  पर

अर्थ  ने  बूझल छल ककरो ।

उत्कण्ठा  तकबाक  हिलोरल,

तेँ किछु बूझल अछि हमरो ।।

 

“बागर”  परबा  केर  प्रजाति,

सन्दर्भ भेटल हमरा एक ठाँ ।*

उकपाती  आ  बड़  झगड़ौआ,

बड़ हल्ला रहितए जाहि ठाँ ।।*

 

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

 

* - CSIR (आब NISCAIR) NEW DELHI द्वारा प्रकाशित पोथी WEALTH OF INDIA : BIRDS केर अनुसार बागर परबाक एक प्रजाति छल । कल्याणी कोशक अनुसार बागर एक प्रकारक बकरी थिक । सम्भवतः दुहु अपना - अपना अनुसारेँ सही छथि आ बागर अनेकार्थी शब्द थिक ।

* - एहि ठाम हम परबाक एकटा प्रजातिक रूपमे बागरकेँ लेल गेल अछि जे स्वभावसँ बहुत झगरौआ, उकपाती आ हल्ला मचबए बला होइत छल आ परबाक प्रतियोगिता (परबाबजी) केर उद्देश्यसँ पोषल जाइत छल ।

गेंड़ा (बाल कविता)

 

एकसिंघी गेंड़ा मैथिली INDIAN RHINOCEROS INDIAN UNICORNIS 3.jpg

 

केहेन अजगुत जीव ! − पहिरने “सूट - सफारी” ।

लागय   सेना केर वर्दीमे    भागल  वर्दीधारी ।।*

 

नाकक  ऊपर सिंघ एगो या दूगो* छै जनमल ।*

सिंघक* वार - प्रहार  जेना तरुआरिक सनकल ।।*

 

बास  ओकर,   घास   संगहि  क्षेत्र  दलदली ।*

देखितहिं देरी  सिंहहुमे  मचि जाइछ खलबली ।।*

 

घासहि खा कऽ जिबैत अछि ई जीव शाकाहारी ।

निर्मम वध कऽ रहल एकर सिंघ केर व्योपारी ।।*

 

भारत केर उत्तर आ पूब दिशि एकरहि राज छै ।

काजीरंगा - जलदापाड़ा - दुधवामे सोराज  छै ।।*

 

नेपालक   परसा - चितबन - बर्दिया   भूटानमे ।

भारतीय गेंड़ा बाँचल छै, एहने किछु सुठाममे ।।*

 

कहियो सौंसे बास छलै - सिन्धुसँ दिहांग धरि ।*

आब तँऽ बूझू बाँचल छै बङ्ग ओ असाम धरि ।।

 

एकसिंघी  भारत - नेपाल - भूटान आ जावा ।

दूसिंघी - गेंड़ा  भेटैतछि  अफ्रिका - सुमात्रा ।।*१०

 

एकसिंघी गेंड़ा मैथिली INDIAN RHINOCEROS INDIAN UNICORNIS 6.1.jpg

एकसिंघी गेंड़ा मैथिली INDIAN RHINOCEROS INDIAN UNICORNIS 9.1.jpg

भारतीय  गेंड़ा RHINOCEROS.jpg

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - गेंड़ाक शरीर पर चमरीक मोट सुरक्षात्मक स्तर होइत अछि जकर मोटाई डेढ़सँ पाँच सेन्टीमीटर धरि भऽ सकैत अछि ।

* - एगो दूगो क्रमशः एक गोट दू गोट केर संक्षिप्त रूप थिक । ठीक तहिना जेना कि अंग्रेजीक RHINO शब्द RHINOCEROS केर संक्षिप्त रूप ।

* - गेंड़ाक नाकक ऊपर एक या दू टा सिंघ होइत अछि ।

* - श्रृंग (तत्सम)  >  सिंग (अर्ध तत्सम)  >  सिंघ (तद्भव), संगहि एकसिंगही = एकसिंघी = एक सिंग/सिंघ बला  । सिंघ शब्द सिंह केर तद्भव स्वरूपमे सेहो प्रयुक्त होइत अछि । एहि तरहेँ सिंघ शब्द मैथिलीमे तद्भव शब्द भेल आ अनेकार्थक शब्द सेहो कारण एकर दू टा भिन्न अर्थ होइत अछि - पहिल श्रृंग (HORN) आ दोसर सिंह (LION)

* - सिंघ केर उपयोग गेंड़ा अपन सुरक्षा लेल करैत अछि । सिंघ जखन पैघ भऽ जाइत अछि तँऽ ओ एतेक मजगूत भऽ जाइत अछि कि ओकर प्रहारसँ गेँड़ा कोनहु मजगूत गाछकेँ सेहो तोड़ि सकैत अछि । एहि सिंघक प्रहारसँ बाघ - सिंह सेहो डऽर मानैत अछि ।

* - गेंड़ा शाकाहारी प्राणी अछि । दलदली क्षेत्र जकर आस - पास घासक प्रचूरता हो − से गेंड़ाक प्राकृतिक आवास क्षेत्र होइत अछि ।

* - गेंड़ाक सिंघ केर तश्करी होइत अछि आ ताहि कारणेँ ओकर निर्मम अवैध हत्या कएल जाइत अछि ।

* - भारतीय गेंड़ा पहिने सम्पुर्ण उतरबारी भारतक जंगलमे पाओल जाइत छल पर आब सिर्फ किछु सुरक्षित अभ्यारण्य या निकुञ्जमे बाँचल अछि ।

* - दिहांग नदी - अरुणाचल प्रदेशमेब्रह्मपुत्र नदी केर नाँओ ।

*१० - भारत, नेपाल, भुटान, म्यांमार आ जावामे प्राकृतिक रूपसँ पाओल जाए बला गेंड़ाक नाकक ऊपर मात्र एक टा सिंघ होइत अछि जखनि कि अफ्रिका महादेश आ सुमात्रामे पाओल जाए बला गेंड़ाक नाकक ऊपर दू टा सिंघ होइत अछि ।

 

दू आखर हुनिका लेल जनिका सिंग केर एवजमे सिंघ नञि रुचैत हो -

(एहि अंशकेँ प्रकाशित करबाक वा नञि करबाक पुर्ण अधिकार सम्पादक महोदयकेँ छन्हि । चाहथि तँऽ ओ एहि अंशकेँ बालानां कृतेसँ अलग आन ठाम कतहु स्थान दऽ सकैत छथि ।)

Ø सिंग सही कि सिंघ ? - एहि तरहक प्रश्न करब अनुचित ।

Ø भाषाशास्त्री लोकनिक एहि तरहक प्रश्न गलत ओ अपुर्ण अछि ।

Ø प्रश्न होयबाक चाही कि सिंग सिंघ जँ दुहु मैथिलीक शब्द थिक तँ ओहिमे भाषाशास्त्रीय दृष्टिकोणसँ की अन्तर ?

Ø अथवा, प्रश्न होयबाक चाही कि ओ दुहु शब्द भाषाशास्त्रक कोन आधार पर मैथिलीक शब्द भेल ? (एहि प्रश्नक उतारा हम ऊपरमे देबाक प्रयास कएल अछि) ।

Ø हम आओर अहाँ अपना मान्यताक आधार पर के होइत छी सही-गलत केर प्रमाण पत्र देनिहार ?

Ø मैथिलीक जँ वास्तवमे हित चाहैत छी तँऽ मैथिलीक भाषाशास्त्री ओ व्याकरणाचार्य लोकनिकेँ आन भाषाक भाषाशास्त्री ओ व्याकरणाचार्य लोकनि जेकाँ एकहरबा वा एकढ़बा बनबाक स्थान पर समावेशी होअए पड़तन्हि । ठीक तहिना जेना अंग्रेजी मे COLOUR सेहो सही अछि आ COLOR सेहो सही । LEUCOCYTE सेहो सही अछि सेहो LUCOCYTE सही आ LUKOCYTE सेहो सही ।

Ø आनहु भाषा यथा हिन्दी, भोजपुरी, मगही, मराठी, बाङ्ग्ला आदिमे ई समावेशी नीति अपनाओल जा रहल अछि । यथा हिन्दीक एकटा उदाहरण नीचाँक दुहु चित्रमे देखू -

 

बारा सिंगा ४.jpg

 

बारह सिंघा ४.jpg

 

Ø केओ कहैत छथि हम मात्र संस्कृतनिष्ठ शब्दकेँ मैथिली मानैत छी । केओ कहैत छथि हम मात्र कें मैथिली बुझैत छी केँ नञि । यौ (अओ,औ), अहाँक अहाँक मानब ओ बूझब अहाँक अप्पन मोनक बात छी, ओ सभ पर नञि थोपल जा सकैत अछि । जँ सएह करबाक छल तँऽ कथी लेल मैथिली वर्णमालाकेँ मैथिली व्याकरणमे स्तान देल आओर किएक किएक पढ़बेत छिऐ जे उद्गमक आधार पर शब्द मुख्यतः चारि प्रकारक होइत अछि - तत्सम, तद्भव, देशज ओ विदेशज ।

Ø कोनहु जिबैत भाषा सतत प्रवाहमान नदी जेकाँ होइत अछि । ओएह नदी जिबैत अछि जे सतत प्रवाहमान होइत अछि आ अपना दुहु किनाराक माटिकेँ काटि अपनामे भँसिआ, अपना धारक संग बहा आगाँ बढ़बाक सामर्थ्य रखैत अछि । जाहि नदीमे से सामर्थ्य नञि ओ क्रमिक रूपेँ सूखाए जाइत अछि आ अन्ततः मृत भऽ जाइत अछि ।

Ø कोनहु जिबैत भाषाक व्याकरण सतत समावेशी होइत अछि आ कालक्रमेण धीरे-धीरे ओहिमे किछु-किछु सकारात्मक परिवर्तन होइत रहैत अछि । शेक्सपियरकालसँ एखन धरिक अंग्रेजी व्याकरणक अध्ययन अपने कऽ सकैत छी ।

 

ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।