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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक बालानां कृते

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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बालानां कृते

१.आशीष अनचिन्हार-बाल गजल २.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- भेटत मजूर कतऽ - मिथिलाकेर बच्चा

 

आशीष अनचिन्हार

बाल गजल

 

मोजा दे जुत्ता दे सीड़क दे सुइटर दे

बड़ ठंडा लागै बस चद्दरि दे मफलर दे

 

सुनि ले हमहूँ करबै खूब तमाशा सौंसे

तंतर दे अंतर दे जंतर दे मंतर दे

 

बड़ भूकै छै करिया कुक्कुर जोरे जोर

टुटतै एक्कर हड्डी बस लाठी नमहर दे

 

कफ जमि गेलै छातीमे खोंखीपर खोंखी

तँइ तरकारी बेसी कड़ुगर दे झँसगर दे

 

चिन्नी दे गूड़ो दे कुच्चा संगे दूधो

खट्टा खेबौ कम हमरा बेसी मिठगर दे

 

सभ पाँतिमे बारहटा दीर्घ अछि।

दू टा अलग-अलग लघुकँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।

तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघुकेँ संस्कृतक हिसाबें दीर्घ मानल गेल अछि।

 

डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”, ग्राम – रुचौल (दुलारपुर – रुचौल), पो॰- मकरमपुर, जि॰ – दरभंगा, पिन - ८४७२३४

भेटत मजूर कतऽ - मिथिलाकेर बच्चा

 

चुनावक बोखार छै,

सभ केओ बेहाल छै,

तकनहु  भेटैछ   केओनेता  ने  सुच्चा ।।

 

मिथिलाक आँच पर,

रोटी अछि सेकि रहल,

मिथिलेकेँ  बेचि  रहल,  लबड़ा  आ लुच्चा ।।

 

भाषणमे मिथिला छै,

भाषणमे मैथिली,

घऽर  ओकर – मैथिली  बूझय  ने  बच्चा ।।

 

मिथिलाक जनगण छै,

दिल्ली आ पटना लए,

भोटक  जोगार  बस,  जीत   बुझू  पक्का ।।

 

योजनाक बात भेल,

देशक बिकाश लेल,

भेटत  मजूर  कतऽ - मिथिला केर  बच्चा ।।

 

देशक अजादी केर,

सत्तरि अछि लागि रहल,

पर ने  उद्योग  एतए,  नहिञे  छी  धन्धा ।।

 

सरकारक नीति ई,

नञि जानि केहेन छी,

भोगि रहल कुहरि रहल,  मिथिलाक बच्चा ।।

 

प्रदेशक जबार भल,

मिथिलाक पात पर,

मड़ुआक  रोटी  अछि,  माँगू  ने  कुच्चा ।।

 

आन भाग देशक,

जोगार करए पेटक,

पोल्हाबए   कुटुमे  छऽ,  देशे  समुच्चा ।।

 

हर भाग देशक,

जँ बनतै उत्पादक,

तँऽ  तोँही   कहह,  के  हेतै  उपभोक्ता ।।

 

 

 

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