logo logo  

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक बालानां कृते

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

India Flag Nepal Flag

(c)२००४-१७. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

बालानां कृते

विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम

भाषापाक

डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” - ३ टा बाल कविता

 

(१) आइ आबए बला रिजल्ट छै (बाल कविता)

 

आइ  आबए  बला  रिजल्ट छै ।

आइ  दिन  बड़ी डिफिकल्ट छै ।

की करियै - किछु  फुरा रहल ने,

आइ  ने  कोनो  विकल्प  छै ।।

 

जएह लिखलियै,  खूब लिखलियै ।

सभ पन्नाकेँ भरि - भरि देलियै ।

तइयो  आइ  बड़  डऽर   लगैए,

छपने   केहेन   रिजल्ट   छै !!

 

कोनो  चीजमे  मोन ने लागए ।

कछमछ मोन  उताहुल भागए ।

इण्टरनेट  अछि देखा रहल बस,

“आबए  बला   रिजल्ट  छै” ।।

 

कहुखन  मोनेँ  टॉप  करै छी ।

कहुखन सभसँ  फ्लॉप करै छी ।

आइ  तराजू  केर  पलड़ा सनि,

डगमग  दृढ़   संकल्प   छै ।।

 

 

(२) छोट माँछ, पैघ माँछ (बाल कविता)

 

छोट माँछ,  पैघ माँछ,  ताहूसँ  पैघ  माँछ,

कक्कर आहार के ? – बुझिते छी भाइ यौ ।

दुनिञाक  इएह  नियम,  सदिखनसँ आबैए,

बेसी हम की कहू - बुझिते छी  भाइ यौ ।।

 

जिनगी  संघर्ष  छिऐ,  सएह  आदर्श  छी,

विश्वक  विचित्र  संकल्पना छी  भाइ यौ ।

हर  कण  निर्जीव जे,  वा  हो  सजीव जे,

करइछ संघर्ष नित, अस्तित्वक, भाइ यौ ।।

 

मानी  ने  मानी अहँ,  संघर्षे  सत्य  छी,

शान्तिक विचार  बस सपना छी भाइ यौ ।

जतबा   प्रकृतिकेँ,   हमसब  जनैत  छी,

अस्तित्वक इएह  संकल्पना छी भाइ यौ ।।

 

जल थल बसात नभ, अस्तित्व लेल निज,

करइछ प्रयत्न नित, बुझले छी भाइ यौ ।

अपना अस्तित्वकेँ जञो नञि बचाए सकी,

सहअस्तित्व तखन सपना छी भाइ यौ ।।

 

 

 

(३) पटना पुस्तक मेला (बाल कविता)

 

आइ गेल छलहुँ  पुस्तक मेला,

पटनाक   गान्धी   मैदानमे ।*

नञि विशेष किछु  छल तइयो,

नव  पोथीक  अनुसन्धानमे ।।

 

याद आबैछ  एखनहु  ओहिना,

पटनाक  पहिल पुस्तक मेला ।

पोथी  सभहक  अम्बार   बेस,

आ लोक सभक रेला - ठेला ।।

 

मीर,  रादुगा,  प्रगति प्रकाशन,

सोवियतक   पुस्तक  आगार ।*

ऑक्सफोर्ड, प्रैण्टिस आ कैम्ब्रिज,

एन॰बी॰टी॰, सी॰एस॰आइ॰आर॰ ।।*

 

हरेक विषय पर  छल  पुस्तक,

भाषा, इतिहास, भूगोल  रहए ।

अभियंत्रन, वाणिज्य, चिकित्सा,

ज्योतिष, धर्म, खगोल  रहए ।।

 

बहुबिध  देसी  आओर  बिदेसी,

पुस्तक   केर   स्टॉल  रहए ।

मैथिलीक  सेहो  एक - दू  टा,

नीक  छोट   स्टॉल   रहए ।।

 

सोचल    आगाँ   धीरे - धीरे,

मैथिलीक    स्टॉल    बढ़त ।

ई  तँऽ   पहिलुक  बेर  थिकै,

आगाँ  बढ़िञा माहौल  रहत ।।

 

एहनहु  बरख   रहल  जहिया,

छल नामहि केर पुस्तक मेला ।

पाटलीपुत्र    मैदान    फिरल,

भेल  दूसल्ला  पुस्तक मेला ।।

 

कतोक  प्रकाशन   बन्न  भेल,

अन्तर्जालक  ई  युग आएल ।

थिक  उदासीन  सरकार  सेहो,

राज्यक भाषा सभ बौआएल ।।

 

युवा ई मेला - चौबीस बरखक,

वृद्ध  सनक  लागैत  अछि ।

पुस्तक मेलाक  शिशु अवस्था,

याद  बहुत  आबैत  अछि ।।

 

 

* - पटना पुस्तक मेला २०१७

* - रादुगा पब्लिशर्स मॉस्को, मीर पब्लिशर्स मॉस्को आ प्रगति प्रकाशन मॉस्को - ताहि समए मे भारत मे उपलब्ध सोवियत पोथीक प्रकाशक सभ ।

* - किछु अमेरिकी’ ब्रिटिश आ भारतीय विज्ञान विषयक पोथीक प्रकाशक सब ।

 

 

ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।