logo logo  

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक बालानां कृते

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

India Flag Nepal Flag

(c)2004-15.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

बालानां कृते

विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम

भाषापाक

१.आशीष अनचिन्हार-बाल गजल २.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”-मैट्रिकक तैय्यारी

१.

बाल गजल

 

 

छै ईसू बीसू जीसू मीसू

हम्मर बौआकेँ बड़का बूझू

 

जीबू जाबू आ ढनढन पादू

खिलखिल झिलमिल चुनमुन सन लागू

 

बौआकेँ नानी सुंदर सुंदर

हुनकर गालेपर हरदी पीसू

 

उपटन पिसतै बौआकेँ मौसी

हुनकर नाम कनी जल्दी बाजू

 

बाबाकेँ धोती कुरता गमछा

नानाकेँ ढेका जल्दी घीचू

 

सभ पाँतिमे 222+222+222 मात्राक्रम अछि।

दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।

संबंध बदलिते संबंधवाची शब्दकेँ बदलल जा सकैए। उदाहरण लेल तेसर शेरमे नानी बदला दादी, बाबी, पीसी, मौसी काकी सेहो आबि सकैए। तेनाहिते चारिम आ पाँचम शेरमे सेहो बदलल जा सकैए।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

 

डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”, ग्राम – रुचौल (दुलारपुर – रुचौल), पो॰- मकरमपुर, जि॰ – दरभंगा, पिन - ८४७२३४

मैट्रिकक तैय्यारी

 

जीत – हारि (उच्चा॰ – हाइर) दुनु खूब मनेलियै

 

पएर  तर  बगरा, बाप रौ बाप !*‍१

आब की करियै, आहि रौ बाप ! !

 

नओमाकेँ हम किछु ने बुझलियै ।

भरि नओमा हम खेलि गमेलियै ।

कहुना नओमा पास भऽ गेलियै ।

छओ महिना फेर खुशी मनेलियै ।

मैट्रिकमे   दसमेक  पुछै  छै,  नओमामे  तेँ  बेपरवाह ।*

पएर  तर  बगरा, बाप रौ बाप ! !

 

दूर्गापूजा   खूब   घुमलियै ।

नाटक, थेटर, नाच देखलियै ।

दियाबाती  छठि*३ मनेलियै ।

फॉर्म बोर्ड केर, सेहो भरलियै ।

दसमा केर सिलेबस एतबे, चारि मासमे दस – दस चास ।

पएर  तर  बगरा, बाप रौ बाप ! !

 

ठण्ढी   आ  शीतलहरी   एलै ।

साटा पर  कत’ मैच  खेललियै ।

कतहु खेललियै, कतहु देखलियै ।

जीत – हारि दुनु खूब मनेलियै ।

पढ़बा कालमे ठण्ढी लागय, ट्वेण्टी – ट्वेण्टी केर उछाह ।

पएर  तर  बगरा, बाप रौ बाप ! !

 

नऽव  बरख,  बनभोजो  केलियै ।

मंगलमयक   सनेश    पठेलियै ।

लाई, चुड़लाई आ तिलबा खेलियै ।

खिच्चरि – दऽही   संगे  देलियै ।

प्रात भने  बुझना  गेलै, छै मास एक मैट्रिक केर – आह !

पएर  तर  बगरा, बाप रौ बाप ! !

 

“एटम बम” कण्ठस्थ रटलियै ।*

“गेस पेपर” केँ  खूब चटलियै ।*

महाबीरजीकेँ      गोहरेलियै ।*

जोड़ा - छागर कबुला केलियै ।*

हाथ परीक्षाफल आयल तँऽ,  जेना  सूँघि नेने हो  साँप !

पएर  तर  बगरा, बाप रौ बाप ! !

 

 

*१ - पएर तर बगरा, बाप रौ बाप – ई एकटा बुझौअलि अछि जकर मतलब होइत अछि “आगि” ।

*२ – आइ काल्हि बहुत रास धियापुता मोनमे ई विचार बहुत दृढ़तासँ पोषने रहैत छथि कि मैट्रिक केर पाठ्यक्रममे मात्र दशमे वर्गक पाठ्यक्रमसँ पूछल जाइत अछि । ई विचार अत्यन्त भ्रामक अछि । उदाहरणार्थ जँ नओमाक रसायनशास्त्रमे परमाणु संरचना, संयोजकता आदि नञि पढ़ने छथि तँऽ हुनिकालोकनिकेँ दशमाक रासायनिक बन्धन, रासायनिक समीकरण संतुलन आदि कोना कऽ बुझबामे अओतन्हि ।

*३ - उच्चारण भेल “छइठ” ।

*४ – “एटम बम” – एक प्रकारक अति सम्भावित प्रश्न सभक पुस्तिका थिक, जकर नाँव सँ मिथिलाक बच्चा – बच्चा (आ तेँ पैघलोकनि सेहो)  चिर – परिचित छथि । ई कोनो “बम” वा “बम बनएबाक पुस्तिका” नञि अछि ।

*५ – “गेस पेपर” – एहि नाम सँ तँऽ पूरा देशे सुपरिचित अछि ।

*६ आ *७  – महाबीरजी वा अप्पन – अप्पन आन आराध्य देवी – देवता सभक परिचायक ।

 

 

ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।