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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक बालानां कृते

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(c)२००४-१२.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका B R E A K the Language Barrier - Read in your own script Roman(Eng) Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi
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बालानां कृते

१.कणकमणि दीक्षित- भगता बेङक कथा- नेपालीसँ मैथिली अनुवाद: श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि द्वारा २.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- १.माँ शारदे वन्दना २.उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम (भाग-२)

 

कणकमणि दीक्षित, ५५ बर्ख, हिमाल खबरपत्रिकाक प्रकाशक आ हिमाल साउथ एशियनक सम्पादक छथि। ओ कॉलेजक पढ़ाइ काठमाण्डूसँ, लॉ क पढ़ाइ दिल्लीसँ आ परास्नातकक पढ़ाइ न्यूयॉर्कसँ केने छथि।

नेपालीसँ मैथिली अनुवाद: श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि द्वारा

रूपा धीरू: रूपा धीरू- जन्मस्थान-मयनाकडेरी, सप्तरी, श्रीमती पूनम झा आ श्री अरूणकुमार झाक पुत्री।स्थायी पता- अञ्चल- सगरमाथा, जिल्ला- सिरहा। प्रथम प्रकाशित रचना-कोइली कानए, माटिसँ सिनेह (कविता),भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक पुस्तकक धीरेन्द्र प्रेमर्षिसँग मैथिलीमे सहअनुवाद,सङ्गीतसम्बन्धी कृति- राष्ट्रियगान, भोर, नेहक वएन, चेतना, प्रियतम हमर कमौआ (पहिल मैथिली सीडी), प्रेम भेल तरघुस्कीमे, सुरक्षित मातृत्व गीतमाला, सुखक सनेस। सम्पादन-पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादन-सहयोग,हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ आ कक्षा 9-10 क ऐच्छिक मैथिली विषय पाठ्यपुस्तकक भाषा सम्पादन)।

धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सिरहा, नेपाल 1967-

वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि।कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। “पल्लव” मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ “समाज” मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादन।

भगता बेङक कथा

 

काठमाण्डूक आकर्षण

भक्तप्रसाद एखन बेङचीसँ बेङ बनबाक उपक्रममे छल । अर्थात बाल्यावस्था पार कऽ जुआन होइत रहए । ओ काठमाण्डूक इचङ्गू नामक स्थानपर धानक खेतमे अपन बाबा बुद्धिप्रसाद, माए सानुमैयाँ आ भाएबहिनक सङ्ग रहैत छल । इचङ्गू स्वयम्भूक पच्छिमभर अछि । ओकरा अपन उमेरक बेङसँ किछु बेसीए बुझबाक जिज्ञासा रहैत छलैक । ओकरा परिवारमे सभसँ पहिने कूदफान करऽवला सेहो उएह छल । भक्तप्रसादक घरे लग एकटा एकपेड़िया रहैक । ओहिबाटे मौगीमेहरि, पुरुषपात आ धीयापुता सभ अवर्जात करैत रहए । भक्तप्रसादक मोनमे जिज्ञासा होइत छलैक जे ई सभ कतऽ सँ अबैत अछि आ कतऽ जाइत अछि ? ेङ सभकेँनुक्ख जकाँ एमहरम्हर करैत रहबाक आवश्यकता नहि रहैत छैक । ओ सभ एक्कहि ठाम कहुना कऽ एहि प्रतीक्षामे बैसल रहैत अछि जे कखन कोन कीड़ामकोड़ा भेटए आ

ओकरा गटकि जाइ । ओकरा सभकेँ मात्र साँप सँ बचिकऽ रहऽ पड़ैत छैक । एकरा अतिरिक्त ओ सभ चिक्कादरबर खेलाइत कण्ठ फाड़िफाड़ि कऽ टर्रटर्र टरटराइत रहैत अछि । ओकरा सभक जिनगी बस्स

एतबए अछि ।

 

मुदा लोकसभ ओहिठामक एकपेड़ियाबाटे एमहरओमहर करिते रहैत अछि । एना बुझइत छैक जेना ओ सभ कतहु जारहल होअए ।

एक दिन भक्तप्रसाकेँ बुझेलै जे एहि तरहेँ चलऽवला के जरूर कोनो उद्देश्यरहल करैत होएतैक । गर्मीक समयमे एक दिन किशोर वयक भक्तप्रसाद सोचलक— “हमरो कोनो उद्देश्य होएब आवश्यक अछि । हमरो तँ किछु करबाक चाही ।

मुदा तहिया रि तँ भक्तप्रसादक नाङरि सेहो नीक जकाँ नहि झड़ लै बेसी दूर नहि जा सकै रहए । ते हुना रे ल रहल चबुतरा धरि मात्र घूम फिर करबाक हिम्मति करए ।

चबुतरापर आबऽजाएवला बटोही सभ सुस्ताइत रहए । ओहि बटोही सभक गप्पसप्प सूनि कऽ ओकरा ई बुझ्बामे अएलैक जे धानक खेतसँ हटियोकऽ दोसर कोनो संसार छैक ।

ओहि दोर संसारके देखबाक उत्सकुतासँ भक्तप्रसाद काठमाण्डू उपत्यका दिस नजरि फिरौलक । ओहि समय सूर्यास्त होबऽ लागल छलैक । साँझ्क ललौन सूर्यक किरिनसँ धानक हरियरहरियर खेत सभ

पिराउछाउन चमकि रहल छल । ओहि सँ किछु दूर घनगर खपड़ै घर सभ, मन्दिरक गुम्बज सभ आ विशालविशाल दरबारक बुर्ज सभ देखलक। ओकरा विश्वास भेलैक जे इचङ्गूक बेङ सभ जाहि शहर बात करतै छल से निश्चित रूपेँ इएह थिक । भक्तप्रसाद सुने छल जे शहरमे मोटरगाड़ी, बिजलीपङ्खा आ सैकड़ो कोठलीवला बड़काबड़का बङ्गला सभ होइत छैक ।

एक दिन भक्तप्रसादक कनेक लटकलहा नाङरि सेहो टूटि गेलैक । ताही दिन ओ सभसँ कहलकैक जे आइ साँझ्मे ओ घर छोड़ि देबाक निश्चय कएलक अछि ।

किएक छोड़बह ?”— सभगोटे एक्कहि स्वरमे पुछलकैक । घर छोड़ि ओ दूर जा सकैत अछि ताहि बात पर ओकरा घरक ककरो विश्वासे नहि छलैक ।

भक्तप्रसाद जवाब देलक— “हम एहि दुनियासँ बाहरी दुनियाक अनुभव करऽ चाहैत छी । हम देखऽ

चाहैत छी जे शहरमे लोकसभ कोना रहैत अछि । हम तराइमे जाए चाहैत छी । हमरा बड़का नदी, आश्चर्यजनक प्राणी सभ, समतल काठमाण्डूक आकर्षण चौरीचाँचर आ बड़काबड़का पहाड़ सभ देखबाक मोन होइत अछि ।

घरक अभिभावक बुद्धिए प्रसादटा भक्तप्रसादक मोनक बात बुझ्लकैक । बहुतो साल पहिने ओकरो मोनमे एहने विचार आएल रहैक । मुदा, ओ अपन सोचलहा नहि कऽ पओने रहए । ओकरा अपन सोचलाहा ूरा नहि होएबाक बडड् पछताबा छलैकतेँ ओ ्रसन्न भऽ अपन हिम्मतगर पोताकेेखि मोनहि मोन विचार कएलक— “ई छौड़ा हमरोसँ बेसी हिम्मतगर बहराएल । अपना विचारमे ई अड़ल रहऽवला अछि । एकरा केओ नहि रोकि सकैत अछि ।

भक्तप्रसादक घर छोड़िकऽ जएबाक निर्णयसँ दुःखित भऽ सभटा ेङ एकठाम जमा भेल । ओकरा सभकेँद्धि प्रसाद कहलककै — “एकरा जाए दहक । जखन   बाहरी दुनिया देखि लेत तँ हमरा सभकेँतेको नवनव बात सभ बताओत ।तैयो भक्तप्रसादक माए सानुमैयाँ किछु कहऽ चाहतै छलि कि भकप्रसाद चटपट सभकेँ प्रणाम-पाती कऽ विदाह भऽ गेल ।

बाबा ! हम जाइ छिअह ।भक्तप्रसाद जाइतजाइत जोरसँ चिकरैत बाजल । तकरा बाद ओ लोकक चलऽवला रस्तासँ चलनाइ शुरू कएलक आ जा अपन खेतसँ अऽढ़ नहि भऽ गेल ता ओ उनटिकऽ नहि

तकलक । किछु दूर चललाक बाद ओ मोटरगाड़ी दौड़ऽवला पक्की ड़कपरसँ चलनाइ शुरु कएलक ।

 

........

(जारी...)

२.

डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- १.माँ शारदे वन्दना २.उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम (भाग-२)

 

  १

 

माँ शारदे वन्दना - ‍१

(गीत)

(श्री सरस्वती पूजाक शुभ अवसरि पर विशेष)

 

 

जय  अम्बे,  जय  माँ शारदे,

विनय  हमर  स्वीकार करू ।

सभहक अहाँ सुनै छी हे माता,

हमरो   बेड़ा   पार    करू ।

क्षमा करू  अपराध हमर सभ,

हमरो  अहाँ   उद्धार   करू ।

जय  अम्बे,  जय  माँ शारदे,

विनय  हमर  स्वीकार करू ।।

 

नञि जानी पूजा केर विधि  माँ,

हम धिया - पुता अज्ञानी छी ।

दिशाहीन  संसार  बीच    हम,

अहींक  चरण - अनुगामी छी ।

हमहूँ अहींक सन्तान छी  माता,

हमरो निज करुणा  दान करू ।

पथ - प्रशस्त, शुभ - दिशाबोध,

सद्ज्ञान  दियऽ, अभिमान हरू।

जय   अम्बे,  जय  माँ शारदे,

विनय   हमर  स्वीकार करू ।।

 

 

नञि बालक प्रह्लाद छी हम माँ,

नञि ध्रुव सन हम ज्ञानी छी ।

आयल छी माँ अहींक शरण मे,

कृपा  दृष्टि  केर  कामी  छी ।

अज्ञानक  अन्हार   हरू   माँ,

ज्ञानक  ज्योति  प्रदान  करू ।

नहि हमरहि, सम्पुर्ण जगत भरि,

जन – जन केर कल्याण करू ।

जय   अम्बे,  जय  माँ शारदे,

विनय   हमर  स्वीकार करू ।।

 

 

 

माँ शारदे वन्दना - ‍२

(गीत)

(श्री सरस्वती पूजाक शुभ अवसरि पर विशेष)

 

 

जय  माँ   शारदे,  विद्यादायिनी,

अज्ञानस्य    तिमिर    हरणम् ।

तन शुभ्र प्रकाशित, पंकज राजित,

शोभित  चारु   कमल  नयनम् ।।

जय  माँ   शारदे,  विद्यादायिनी, अज्ञानस्य   तिमिर    हरणम् ।।

 

कामिनि  चतुरानन,  हंसहि वाहन,

शान्त  स्वभाव,  वाणि  मधुरम् ।

वीणा कर शोभित, सभजन पूजित,

सकल  कला – कौशल  कुशलम् ।।

जय  माँ   शारदे,  विद्यादायिनी, अज्ञानस्य   तिमिर    हरणम् ।।

 

 

मम्  जहि  निर्बुद्धि,  देहि  सुबुद्धि,

विद्या  सम   वारिधि   सलिलम् ।

छल लोभ च कामम्, तम अज्ञानम्,

हरिअ  सकल  मम्  दोष अयम् ।।

जय  माँ   शारदे,  विद्यादायिनी, अज्ञानस्य   तिमिर    हरणम् ।।

 

 

 

उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम

(भाग-२)

 

 

अगिला साँझ, हाट – बजार कऽ कऽ आङ्गन अबैत रही । दूरहि सँ कोनटहि लऽग सँ बुझा गेल जे धिया – पुता सभ बाट ताकि रहल अछि । आइ संख्या सेहो किछु बेशीअहि बुझि पड़ल, जे कि यथार्थे छल ।

लऽग अबितहि सभ धिया  - पुता सामने राखल काठक कुर्सी पर हमरा झीकि – तीरि कऽ बैसा देलक आ अपने सभ सामने राखल चौकी पर बैसि रहल ।

सोनी – तऽ चलू आब शुरू भऽ जाउ आ आगाक खिस्सा सुनाउ ।
कञ्चन – हम्मे काल्हि नञि रहियै , हम्मे शुरू सऽ सुनाउ ।

किछु धिया पुता सभ बाजल – नञि ! नञि !  हम सभ आगा केर खिस्सा सुनब ।

कञ्चन आइ भोरहि भागलपुर सऽ आयल छलि, एहि ठाम ओकर मामा गाम । तऽ फेर भगिनमानक बऽल, कोना ओकर बात टारि सकैत छलियै । बाकी धिया – पुता केँ सेहो मोन नञि तोड़ल जा सकैत छल तेँ ओकरा सभ केँ समझबैत पहिलुका खिस्सा एक बेर फेर सँ संक्षेप मे कहल ।

.......................... तऽ हम सभ कैसोवरी लग आबि कऽ रूकल रही ??

- हँ, आ एकर बाद “सोन चिड़ै” केर रहए । बब्बन सोनी दिशि इशारा करैत बाजल । सभ धिया – पुता फेर जोर सँ भभा कऽ हँसि पड़ल ।

सोनी ओहि ठाम सँ उठि, हमर कुर्सीक कात मे आबि ठाढ़ि भऽ गेलि । थोड़ेक तामस मे बाजलि – यौ देखै छियै ई सभ कोना हमरा खौंझबैत रहइए ।

- हम कात मे राखल एकटा मचिया अपन कुर्सीक बगल मे रखैत बजलहुँ – ठीक छै तोँ एहि ठाम बैस । एहि मे खौंझाइ केर कोन गप्प , तोँ तऽ छेँहे “सोन चिड़ै” । लोक तऽ दुलार सऽ कहैत छौ ने ।

- ओकर तामस कम होइत निपत्ता भऽ गेलै जेना कि सहजहि धिया – पुता सभ मे होइत छै । ओ हमरहि लऽग ओहि मचिया पर बैसि रहलि ।

- हँ तऽ ऑस्ट्रेलिया केर बगल मे कोन देश छै ? - हम बाकी धिया – पुता दिशि मूँह करैत बजलहुँ ।

– न्यूजीलैण्ड । सभ धिया पुता केँ शान्त देखि कञ्चन कने गम्भीर पर आत्मविशवास भरल स्वर मे बाजलि ।

हम – आ ओहि ठामक राष्ट्रिय चिड़ै कोन ?

– सभ धिया पुता फेर अवाक भए हमर मूँह ताकए लागल ।

- तोँ सभ क्रिकेट खेलय जाय छह, देखै जाय छह, कने जोड़ दहक दिमाग पर – हम बजलहुँ ।

हम पुनः बजलहुँ - अच्छा छोड़ह, ई कहह जे न्यूजीलैण्ड केर लोक सभ केँ की कहल जाइत छै ?

बब्बन – चहकैत बाजल – अरे, हाँ ................ किवी ।

हम – एकदम सही “कीवी” ओहि ठामक राष्ट्रिय चिड़ै अछि आ ओहो उड़ि नञि सकैत अछि । एकर वंश (Genus) थिक अटेरिक्स (Apteryx) । एकर पाँच टा जाति (Species) पाओल जाइत अछि , जाहि मे सँ अटेरिक्स ऑस्ट्रेलिस (Apteryx australis) । ई लजकोटरि आ मुख्यतः राति मे विचरण कएनिहार चिड़ै अछि । तेरहम सती मे न्यूजीलैण्ड मे मनुक्खक आगमन सँ ओहि ठाम कीवी केर कोनो शत्रु नञि छल । परञ्च मनुक्ख अपना संगहि कुकुर, बिलाइ आ ओकरहि सन आन जानवर जेना कि स्टोट (Stoat) फेर्रेट (Ferret ,बिज्जी केर एक प्रकार)  आदि सेहो नेने आयल । स्टोट आ फेर्रेट कीवीक अण्डा केर परम शत्रु आ कुकुर बिलाइ वयस्क कीवीक । एहि प्रकारेँ कीवीक संख्या बहुत कम होइत गेल आ ई चिड़ै वलुप्त होयबाक श्रेणी मे आबि गेल । एकरा बचयबाक लेल 200 ई॰ मे न्यूजीलैण्ड मे पाँच टा कीवी अभयारण्य (sanctuary) बनाओल गेल अछि ।

 

 

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प्रिया – से सभ तऽ ठीक । पर एकरा बारे मे कोनो विशेष बात बताउ ।

हम – बहुत किछु विशेषता छै । एकर सूँघबाक शक्ति बहुत तेज होइत अछि ।

सोनी – तखन तऽ ईहो कुकुरहि भेल कि ने ?

हम – हाँ एहि मामिला मे कुकुरहि सन तेज । एकर नमगर चोंचक अगिला भाग मे नासाछिद्र (Nostrils)  होइत अछि जखन कि आन चिड़ै सभ केर चोंच केर पछिला भाग मे । ई सर्वाहारी अछि फल – फूल, कीड़ा – मकोड़ा, बेङ्ग – दादुर आदि खा जाइत अछि । कीवी बिना देखनहि, जमीनक नीचा मे बिल मे बैसल कीड़ा – मकोड़ा केँ सही – सही अन्दाजि सकैत अछि । यद्यपि शुतुर्मुर्गक अण्डा केर वास्तविक आकार दुनिञा मे सभसँ पैघ अछि , पर वयस्क चिड़ै केर आकार केर अनुपात मे अण्डा केर आकार  देखला सँ कीवीक अण्डाक सानुपातिक अकार (Relative / comparative size) सभसँ पैघ होइछ । कीवीक एक अण्डा केर ओजन वयस्क स्त्री कीवीक ओजन केर चौथाई ओजन धरि भऽ सकैत अछि । ई किछु गिनल - चुनल चिड़ै मे सँ अछि जे एक बेर जोड़ी बनलाक बाद जिनगी भरि संग रहैछ ।

विकास – हूँ । से नञि बूझल छल ।

हम – आब हम सभ नऽव दुनञा दिशि चली ।

बब्बन – नऽव दुनिञा ? हम नञि बुझली ।

प्रिया – अमेरिका के नऽव दुनिञा कहल जाइत छै ........छै ने ? हमरा दिशि तकैत बाजलि ।

हम – हँ नऽव दुनिञा (New World) प्रायः अमेरिकहि केँ आ खास कऽ दक्षिणी अमेरिका (उच्चारण – दैच्छनी अमेरिका)  केँ कहल जाइत छै । ओना किछु लोक ऑस्ट्रेलिया आ लऽग – पासक द्वीप समूह सभ केँ सेहो नऽव दुनिञा कहैत छथिन्ह ।

कञ्चन यानि कि हम्मे सभ एक नऽव दुनिञा सऽ दोसर नऽव दुनिञा जयवो ।

हम हँ । तऽ चली । सभ केओ तैय्यार छी ।

- सभ धिया पुता एक स्वरेँ बाजल हँ, तैय्यार छी ।

हम -  द॰ अमेरिका केर मूल निवासी अछि रिया । ई करीब – करीब पूरा दक्षिणी अमेरिका – जेना कि ब्राजील, पेरू, अर्जेण्टीना, चिली आदि देश – मे पाओल जाइत अछि ।

पवन रिया तऽ हमर मौसी के नाम हए ।

हम पर एहि ठाम रियामनुक्खक नञि, चिड़ै केर नाँव थिक । एकर दू टा जाति पाओल जाइछ पहिल बड़की रिया या रिया अमेरिकाना (Rhea americana) आ दोसर छोटकी रिया या रिया पिन्नाटा (Rhea pennata) । ई सभ सर्वाहारी (Omnivirous)  होइत अछि पर अधिकांशतः चाकर पत्तावला गाछ – बिरिछ केर पात खाइत अछि, पर जरूरति पड़ला पर फल, बीया आ छोट – मोट गाछक जड़ि सेहो चिबा जाइत अछि । भूख लगला पर छोट – मोट कीड़ा – मकोड़ा आ गिरगिट धरि खा सकैत अछि । नञि उरि सकएबला चिड़ै सभ मे रिया केर पंखक आकार सभसँ पैघ होइत अछि आ जखन ओ चलैत वा दौड़ैत अछि तऽ पंख केँ थोड़े – थोड़े पसारि लैत अछि । ई चिड़ै बहुत चलाक होइत अछि ।

सोनी – से कोना ?

हम – पहिने कहल आन चिड़ै सभ जेना ईहो, जमीने पर अपन अण्डा दैत अछि , घोसला आस – पास मे पाओल जाय वला  घास – पात सँ बनबैछ । एक घोसला मे 10 सँ 60 धरि अण्डा भऽ सकैत अछि ।

पवन – एहि मे कथी केर चलाकी ?

हम - ई एकर चलाकी नञि । अण्डा खएनिहार जीव – जन्तु केर ध्यान बहटारए केर लेल ई चिड़ै अपन मुख्य घोसला केर चारू कात दू – चारि टा अण्डा छोड़ि दैत अछि । एहि प्रकारेँ अपन किछु अण्डा केर बलि दऽ कऽ शेष अण्डा केर बुद्धिमानी सँ सुरक्षित बचा लैछ ।

 

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बब्बन – हँ, तऽ बुझली, इएह छी एकर चलाकी ।

हम – दक्षिणी अमेरिका मे एक गोट आओरो चिड़ै भेटैछ , जे उड़ि नञि सकैछ । केओ बता सकैत छह ओकर नाँव ??

- सभ धिया – पुता एक दोसराक मूँह ताकए लागल । पर केओ किछु नञि बाजल ।

हम“पेंगुइन” केर नाम सुनने छह की ?

- सभ धिया – पुताक जेना भक टुटि गेल हो । एक्कहि संगे जोर सँ बाजल – यौ ! ओ तऽ अण्टार्कटिका मे होइत छै ।

सोनी –  अहीं तऽ अपन पिछला खिस्सा – “खिस्सा अण्टार्कटिका केर” - मे लिखने छलियै । अहूँ केँ निन्न लागल सन बुझाइत अछि ।

हम – निन्न नञि लागल अछि । हम ई थोड़े ने लिखने रही कि पेंगुइन (पेंग्वीन) खाली अण्टार्कटिकहि मे होइत अछि । पेंगुइन केर करीब 17 सँ 20 जाति पाओल जाइत अछि आ ओ अण्टार्कटिकाक अतिरिक्त दक्षिणी अमेरिका (अर्जेण्टीना, चीली), ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, दक्षिण अफ्रिका, गैलेपैगोस द्वीपसमूह आदि स्थान पर पाओल जाइत अछि । ई सभटा स्थान पृथ्वीक दक्षिणी गोलार्ध (Southern hemisphere) मे अबैछ । जे अकार मे पैघ आ भारी पेंगुइन अछि ओ ठण्ढा जगह पर आ जे छोट आ हल्लुक पेंगुइन अछि से अपेक्षाकृत गर्म जगह पर पाओल जाइछ । सम्राट पेंगुइन या एम्पेरर पेंगुइन (Emperor penguin) सभसँ पैघ आ भारी होइछ जे कि अण्टार्कटिका मे रहैछ । एकर ऊँचाई 1.1 मीटर (लगभग साढ़े तीन फीट) आ ओजन लगभग 35 कि॰ग्रा॰ धरि होइत अछि ।  सम्राट पेंगुइन केर जैव वैज्ञानिक नाँव अछि ऑप्टेनोडाइटिस फोर्सटेराइ (Aptenodytes forsteri) । अच्छा तोरा सभ केँ एकरा बारे मे की की बूझल छह ?

 

 

पेंगुइन ‍२.jpg

 

 

बब्बन – ई हमरे आर मनुक्ख जेकाँ दू पैर सऽ चलि सकै हए ।

हम – एकर मतलब कि अहाँ सभ एहि चिड़ै सँ अपरिचित नञि छी । पेंगुइन मनुक्खे जेकाँ दू पएर सँ धऽर उठा कए नाकक सीध मे चलि सकैत अछि । एहि चलबाक समय ओकर छोट- क्षीण नाँगरि (Tail)  सन पछिला भाग ओकरा अपन शरीर केँ सन्तुलित रखबा मे मदति करैछ ।

कञ्चन – हम्मे डिस्कवरी चैनल पर देखने रहियै जे ओकर पेट उज्जर आ पीठ कारी होइ छैक ।

हम – एकदम सही, ओकर पेटक रंग बर्फ सन उज्जर होइत अछि । एहि कारणेँ समुद्रक अन्दर सँ ताकि रहल शिकारी समुद्री जीव – जेना कि सील, वालरस आदि – समुद्रक कात मे बर्फ पर ठाढ़ पेंगुइन आ बर्फ मे भेद नञि कऽ पबैछ । एहि प्रकारेँ पेटक उज्जर रंग ओकरा लेल सुरक्षा – कवच सन काज करैत छै । तहिना पीठ परक कारी रंग सेहो – आकाश मे उड़ि रहल पैघ शिकारी चिड़ै सभ पाथर सन बुझि धोखा खा जाइत अछि ।  जीव विज्ञान मे एहि प्रकारक प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था केँ छद्मावरण (Camouflage)  कहल जाइछ । एकर आन उदाहरण अछि गिरगिट केर रंग बदलब ।

सोनी – ओ पानि मे हेलि सेहो सकैत अछि ।

हम – बेस कहल । ओ समुद्रक पानि मे डुम्मी काटि कऽ हेलि (Diving) सकैत अछि । ओकर देह मे बहुत चर्बी रहैत छै । अहाँ सभ केँ बुझले होयत कि चर्बी पानि सँ हल्लुक होइत अछि आ तेँ ओ पानि मे हेलबा मे मदति करैछ । ई चर्बी पेंगुइन केँ ठण्ढी सँ सेहो सुरक्षित रखैछ । ओकर दुनू पंख पानि मे हेलबाक लेल अनुकूलित भऽ गेल अछि आ हेलबाक समय नाओ केर पतवाड़ि सदृश काज करैछ । ओ 6 सँ 12 कि॰ मि॰ प्रति घण्टा केर गति सँ पानि मे दुम्मी मारि कऽ हेलि सकैछ । सम्राट पेंगुइन समुद्र केर भीतर 365 मीटर अर्थात्  1870 फीट गहीर तक जा सकैत अछि । ओ समुद्री माछ आ जीव  जन्तुक शिकार कऽ कऽ अपन पेट भरैछ आ कहुखन – कहुखन इएह फेरी मे स्वयं आन समुद्री प्राणीक (यथा सील आ वालरसक) शिकार सेहो बनि जाइछ । ओ समुद्रक पानि सेहो पिउबि कऽ पचा सकैत अछि आ समुद्रक पानि केर संग पिउल गेल अतिरिक्त नोन केँ मगरमच्छे जेकाँ नोरक संग बहा दैछ । पानि मे पेंगुइन केर हेलबाक प्रक्रिया देखबा मे बहुत किछु हवा मे कोनो चिड़ै केर उरबाक प्रक्रिया सँ मेल खाइछ ।

 

 

पेंगुइन ‍१.jpg

 

 

प्रिया – सही मे , ई तऽ चिड़ै सनि लगिते नञि अछि ।

हम – हाँ । कखनो कखनो ई बर्फ पर छहलैत – छहलैत (Sliding)  एक जगह सँ दोसर जगह पहुँचि जाइछ तऽ कखनो – कखनो छोट धिया – पुता जेकाँ दुनु पएर उठा कऽ कूदि – कूदि कऽ सेहो चलैछ ।

पवन – आश्चर्य !!!

हम – हाँ आश्चर्ये थिक । ओना तऽ नञि उड़ि सकनिहार करीब 40 प्रकारक चिड़ै अछि पर ई चिड़ै सभ लोक केँ बेशी आकर्षित करैत अछि तेँ अहूँ सभ केँ सुना देलहुँ । ई  खिस्सा आब एतहि खतम करैत छी ।

विकास – तइयो किछु आओर एहि तरहक चिड़ै सभहक नाँव तऽ बताउ ।

हम – नाँव तऽ अहूँ सभ केँ बुझले अछि – मुर्गा, बत्तख मोर

प्रिया – पर ओ सभ तऽ उड़ए छै ।

हम – नञि खा गेलहुँ ने धोखा । ओ सभ वास्तव मे उड़ैत नञि अछि, कोनो ऊँच स्थान सँ कुदैत अछि, अपन पंख केँ फड़फड़बैत अछि आ हवा पर गुड्डी (पतंग) जेकाँ उधियाइत वा उड़ियाइत (Glide) रहैत अछि ।

पवन – सही कहलहुँ अहाँ ।

हम – चलैत – चलैत एकटा नाँव आओर बता दैत छी – “डोडो” । ई चिड़ै मॉरिशस केर मूल निवासी छल, उड़ि नञि सकैत छल । अत्यधिक शिकार होयबाक कारणेँ ओ करीब चारि – साढ़े चारि सौ वर्ष पहिने विलुप्त (Extinct) भऽ गेल ।

पवन – ओह । ई तऽ बहुत खड़ाब भेल ।

हम – हँ से तऽ अछि । पर जे एक बेर विलुप्त भऽ गेल से फेर सँ दोबारा नञि आबि सकैछ ।

- किछु क्षण केर लेल सभ शान्त भऽ गेल ।

- शान्ति केर तोड़ैत हम बजलहुँ । ठीक अछि तऽ आब चलबाक चाही ।

- हाँ । सभ धिया – पुता बेमोन सँ बाजल ।

सोनी – फेर अगिला बेर कोन खिस्सा सुनाएब ।

हम – से अगिलहि बेर कहब । ता धरि शुभ रात्रि ।

 

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बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक

.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।

करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥

करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।

२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-

दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।

दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।

३.सुतबाक काल-

रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।

शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥

जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।

४. नहेबाक समय-

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥

हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।

५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।

वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥

समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।

६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।

पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥

जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।

७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।

कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥

अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।

८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी

उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।

सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः

जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥

९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।

अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥

१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)

आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥

आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥

मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।

ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।

हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥

मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।

एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।

अन्वय-

ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म

रा॒ष्ट्रे - देशमे

ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त

आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए

रा॑ज॒न्यः-राजा

शुरे॑ऽ–बिना डर बला

इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण

ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला

म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर

दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)

धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित

सप्तिः॒-घोड़ा

पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री

जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला

र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर

स॒भेयो॒-उत्तम सभामे

युवास्य-युवा जेहन

यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे

वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला

निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे

नः-हमर सभक

प॒र्जन्यों-मेघ

वर्षतु॒-वर्षा होए

फल॑वत्यो-उत्तम फल बला

ओष॑धयः-औषधिः

पच्यन्तां- पाकए

योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा

नः॑-हमरा सभक हेतु

कल्पताम्-समर्थ होए

ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।