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कवि राजीव झा 'एकान्त' (संपर्क- कनफुसकी: 9911562859 व्हाट्सप्प: 8287480484)

"हिस्टोरिओग्राफी ऑफ मैथिली लेक्सिकोग्राफी"केर मनोवैज्ञानिक आ आलोचनात्मक व्याख्या


विदेहक 'व्यक्तित्व विशेष' अंक लेल जखन श्रीमान रामावतार यादव जीक केंद्रित आलेखक आग्रह भेल कने दुविधा मे पड़ि गेलहुँ। इतिहासक दृष्टि सँ लिखित आलेख केँ प्रामाणिक साक्ष्य मानल जाइछ अर्थात आजुक आलेख भविष्यक इतिहास थिक। तँय एकतरहें इतिहासे लिखब भेल। अनावश्यक आलोचना पक्षपात थिक मुदा अनुचित महिमामंडन सेहो अपकारके थिक । मनुक्खक जिनगी मे काल सापेक्ष ओकर कृत्यक परिणाम सेहो देखा पड़ैत छैक। लेखनी सऽ लऽ कऽ अन्यथा विविध पक्ष मे उत्कर्ष - अपकर्ष होइत रहैत छैक। अभिप्राय जे कोनहुँ जीवित व्यक्ति पर लिखब एक तरहें दुनू दिस धार बला तलवार पर चलबा सन थिक कारण जीवित व्यक्तिक चारित्रिक, नैतिक उत्थान आ पतनक संभावना शेष रहैत छैक। लिखल आ प्रकाशित आलेख मनुक्ख सन क्षणभंगुर नहि होइछ। विचार ऊर्जाक रूपमे युग- युगांत धरि स्थिर रहैछ आ देश -समाज- इतिहास कें प्रभावित करैत रहैत अछि।
अही सभ चलते ठाढ़ दुविधा आ व्यक्ति विशेष खास कऽ जिबैत लोकक सन्दर्भ मे लिखबाक अपन अभिरूचिक अभावक पछातियो कलम उठेबाक प्रेरक, ई तथ्य आ सत्य रहल जे मैथिली भाषाक परिपेक्ष्य मे डॉ रामावतार यादव जी साधारण लोक नहि थिकाह । भारत सऽ नेपाल धरि भाषाशास्त्रीक रूपमे बेस प्रसिद्धि छन्हि । वैश्विक मंचो पर मैथिलीक प्रतिनिधित्व करैत रहलाह अछि तँय मैथिलीक हित - अहित केँ प्रभावशाली ढंग सँ प्रभावित कऽ सकबा मे सेहो समर्थ छथि।
एकरा हमर अलहनरैनिये कहल जा सकैत अछि जे मिथिला- मैथिली आंदोलन मे लगभग एक युग सऽ सक्रिय रहितो श्रीमानक विशेष किछु पढ़बाक चेष्टा नहि केलहुँ, हलाँकि बड़ अवसरो नहि लागल। एहन मे सहजहि अइ आलेखक अवलम्ब बनल 'उद्यान किरण पस्तकालय, दिल्ली' मे उपलब्ध डॉ यादव जीक बहचर्चितपोथी "Histography of Maithili Lexicography & Francis Bucanan's cpmparative Vocabularies"। तँय सम्प्रति अइ आलेख केँ डॉ. यादवक एखन धरिक सम्पूर्ण जीवन यात्राक विवेचना नहि अपितु मात्र आ केवल मात्र हुनक उपर्युक्त पोथीक संक्षिप्त समीक्षा कहल जा सकैछ। ह ! तखन इहो सत्य जे कतेको बेर लेखकक एकटा कृति ओकर जीवन भरिक मुल्यांकनक आ यश - अपयशक कारक बनि जाइछ। हमरा जनैत उक्त पोथी प्रायह एहने सन उदहारण थिक। ई आलेख पोथीयेक आधारे पर मनोवैज्ञानिक दृष्टि सँ लेखकक व्यक्तित्वक निरीक्षण, परिक्षण आ मूल्याङ्कनक प्रयास सेहो थिक ।
साहित्य आ इतिहास दुनू दूटा भिन्न शास्त्र थिकैक । साहित्य मे तऽ काल्पनिक संस्प्रत्ययक आ अवयवक संभावना रहैछ मुदा इतिहास मे नहि। इतिहास विभिन्न स्रोत सऽ उपलब्ध तथ्य आ साक्ष्यक आधार पर लिखक जाइछ तँय एखन धरि भारतक महाभारत आ रामायण केँ इतिहास हेबाक औपचारिक मान्यता विश्व समुदाय नहि देलक अछि । तथापि साहित्य हो वा इतिहास, विषय वस्तुक उपस्थापन, रचनाकारक चिन्तन आ विचारक प्रतिबिम्ब बनि परिचय अबस्से करबैछ । लेखकक मानसिकता आ मनोविज्ञान अबस्से सोझाँ अबैत अछि। तँय आइ इतिहासकारोक वामपंथी, दक्षिणपंथी आदि-आदि वर्गीकरण देखा पड़ि रहल। अस्तु ।
डॉ. यादवक पोथी पढ़ि, पोथीक कथ्य, तथ्य आ साक्ष्यक अध्ययन, अन्वेषण आ विश्लेषण केने जे किछु गप्प विशेष अचंभित वा उद्वेलित केलक से आगाँ अपने लोकनिक सोझाँ विंदुवार प्रस्तुत अछि ।
केन्द्रिय विषय आ नाओं: पोथीक नाओं बेस पैघ अछि "Historiography of Maithili Lexicography & Francis Buchanan's ComparativeDictionary". पोथीक नाओं पढ़ला सऽ जे प्रधान पक्ष बुझा पड़ैछ से अछि, "Historiography of Maithili Lexicography" आ तँय सहजहि शेष पक्ष "Francis Buchanan's Comparative Dictionary" गौण विषय होबक बोधक होइत अछि । मुदा से अछि ठीक एकर विपरित।
फरिछ सऽ पोथीक केन्द्रिय विषय केँ चिन्हबाक लेल देल गेल विषय सूची केँ एक बेर फेरो व्यवस्थित करब समीचीन बुझा पड़ैत अछि।
PROLEGOMENA आ Maithili Lexicography (पृ. सं. 1 सऽ पृ. सं. 28 धरि) ~डॉ. यादव द्वारा पोथीक परिचय, शब्दकोशक इतिहास पर विमर्श।
The Manuscript, Francis Bucanan's Life & Work आ Buchanan's Comperative Vocabulary: A Critique (पृ. सं. 28 सऽ पू. सं. 59 धरि) ~फ्रांसिस बुकानन केर शब्दकोशक उपलब्धता, व्यक्तित्व, शब्दकोश निर्माणक पृष्ठभूमि आ थोड़ बहुत आलोचनात्मक व्याख्या अछि।
Buchanan's Comperative Vocabulary (पृ. सं. 60 सऽ पृ. सं. 202 धरि) ~फ्रांसिस बुकानन द्वारा संकलित शब्दकोश

Notes to Introduction (पृ. सं. 203 सऽ पृ. सं. 210 धरि) ~पोथी
परिचय विषय मे आयल उल्लेख जेना अंग्रेजी मे भेल संस्कृत पोथीक अनुवाद सहित किछु चिट्ठी, ईमेल आदिक प्रतिलिपि ताहू मे फ्रांसिस बुकानन केर उल्लेख अबिते अछि विभिन्न सन्दर्भ मे ।
Bibliography (पृ. सं. 211 सऽ पृ. सं. 227 धरि) ~सन्दर्भ स्रोतक उल्लेख ।
देखल जाइ तऽ आरम्भिक 28 पृष्ठ पोथीक विषय मे परिचय आ विभिन्न मैथिली शब्दकोश आ ताहिक निर्माणक परिचय अछि । लेखक द्वारा शब्दकोशसंग्रहक लेल भेल यात्रा आ लोक सभ सऽ भेंट-घांटक विवरण अछि। पुनह देखने पहिल 27 पृष्ठ एकटा ऐतिहासिक पोथीक परिचय लेल आदर्श बुझा पड़ैछ । पृष्ठ संख्या 28 सऽ 59 धरि घुमा फिरा कऽ फ्रांसिस बुकानन पर केंद्रित अछि चाहे हुनक व्यक्तित्व हुअय वा शब्दकोश निर्माणक पृष्ठभूमि अथवा आलोचनात्मक व्याख्या। पृष्ठ संख्या 60 सऽ 203 धरि तऽ विशुद्ध रूपें फ्रांसिस बुकाननक कम्पेरेटिव शब्दकोश केर छाया प्रतिये संलग्न अछि, तँय कोनो गप्पे नहि हो। पृष्ठ संख्या 203 सऽ 227 धरि सन्दर्भ ग्रन्थ वा स्रोतक उल्लेख देने छथि जे, महत्वपूर्ण रहितो ग्रंथक हिस्सा नहि कहल जा सकैछ ।
एकर अर्थ भेल जे पोथीक सार्थक 202 पृष्ठ मे 174 पृष्ठ मे बुकानन छथि केन्द्रिय विषय जाहि मे सऽ 143 पृष्ठ तऽ विशुद्ध बुकाननक शब्दकोशे अछि। 10 प्रतिशत जे अन्यथा किछु अछियो तऽ से पोथीक भूमिका लेल आदर्श विषय वस्तु मानल जा सकैछ मुदा केन्द्रिय विषय हेबा हेतु कतेक उपयुक्त से तऽ विद्वाने लोकनि कहताह। जँ मानि ली जे एकटा भाषा शास्त्रीक रूपमे स्वयं लेखकोक दृष्टि गेल हेतन्हि तखन इहो प्रश्न ठाढ़ होइछ जे 90 प्रतिशत विषय वस्तु केँ न्यून कियैक देखेलन्हि ?
विश्वप्रसिद्ध मानव मनोविज्ञानी A. H. Maslow केर मोताबिक कोनो मनुक्खक क्रिया पांच तरहक प्रेरणा सऽ निर्धारित होइछ, जकरा "Hierarchy of Need" कहल जाइछ। शारीरिक / भौतिक आवश्यकता, सुरक्षा आ स्नेह आदि प्रेरणाक संतुष्ट भेला पछाति मनुक्खक क्रिया आत्म-सम्मानक अर्जन सऽ प्रेरित होइत अछि। [1] आगाँ Constantine Sedikides & Coकेर अध्ययनो मे Self - Potency केर अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित होइछ कोनहुँ व्यक्तिक आचरण आ चिंतन प्रक्रिया पर।[2]
पोथीक नाओं देबक प्रयोग सऽ लेखकीय श्रेय लेबक सुविचारित उद्योग जँ नहि रहैत तऽ "A Critical Analysis Of Francis Buchanan's Comparative Dictionary & Maithili Lexicography" तुलनात्मक दृष्टिये अधिक सार्थक बुझा पड़ैत अछि।
निश्चयात्मकताक संग तऽ किछु कहब कठिन मुदा ध्यातव्य जेA Critical Analysis पोथीक नाओं मे रहने, लेखक यशक भागी तऽ हेबे करितथि मुदा पोथीक 90 प्रतिशत केन्द्रिय विषयो संग न्याय होइत । कहल जा सकैछ जे लेखक फ्रांसिस बुकानन कऽ संग अन्यान्य आ 'श्रेय लेबक अनावश्यक आरोप' सऽ बचि सकैत रहथि ।
नाओं मे अनुचित शब्द प्रयोग : इतिहास (History) आ इतिहासविद्या (Historiography) दुनू मे समानता लगितो मौलिक भिन्नता छैक। समय काल आ घटनाक अध्ययन इतिहास कहबैत छैक। मुदा इतिहास विद्या शब्दक अभिप्राय बुझबा लेल किछु व्याख्या कें देखब आवश्यक।

Britannica मे व्याख्या: Historiography, the writing of history, especially the writing of history based on the critical examination of sources, the selection of particular details from the authentic materials in those sources, and the synthesis of those details into a narrative that stands the test of critical examination. The term historiography also refers to the theory and history of historical writing. [3]
Merriam Webster Dictionary: the writing of history based on the critical examination of sources, the selection of particulars from the authentic materials, and the synthesis of particulars into a narrative that will stand the test of critical methods. [4]
Collin James Dictionary: The narrative presentation of history based on a critical examination, evaluation, and selection of material from primary and secondary sources and subject to scholarly criteria. [5]
Cambridge Dictionary मे Historiography के परिभाषा अछि ~ "The study of history and how it is written." [6]
उपरोक्त व्याख्याक आलोक मे इतिहास विद्याक अभिप्राय भेल लिखित वा ज्ञात इतिहासक पुनर्व्यवस्थित अध्ययन जाहि सऽ कोनहुँ नव तथ्यक प्रकट हुअय। अर्थात अइ पोथीक अभीष्ट छल के, केना आ कोन परिस्थिति मे मैथिलीक शब्दकोशक निर्माण केलक संगहि अइ उद्यम केँ कोन बाह्य आ आतंरिक कारक प्रभावित केलक।
उपलब्ध इतिहासक समीक्षात्मक अध्ययन द्वारा नव संकल्पनाक स्थापना तऽ नहि भऽ सकल अछि। के केलन्हि शब्दकोश लेखन ताहिक उल्लेख तऽ अछि, मुदा जतय धरि, केना केलन्हि आ शब्दकोश निर्माण केँ प्रभावित करै बला कारक तत्वक विषय अछि, से एकतरहें नहिये सन अछि। तँय हमर दृष्टि मे हिस्टोरिओग्राफी शब्दक प्रयोग ओजन भलो दैत होइक मुदा समीचीन नहि अछि ।
मैथिलीक प्राचीनतम शब्दकोशक चिन्हान मे असफल : लेखक पोथीक नाओं मे Historiography of Maithili Lexicography (मैथिलीक शब्दकोश विद्याकइतिहास विद्या) केर सार्थकता सिद्ध करबाक लेल देश - विदेशक जतेक शब्द संग्रह वा शब्दकोश आ संग्रहकर्त्ताक उल्लेख केलन्हि अछि आ ताहि हेतु देश विदेश नपलन्हि अछि से प्रभावित भलो करैत होइक, मुदा नव की छैक ? सभटा तऽ पूर्व विदित आ स्वघोषित शब्दकोश थिक। आ तँय मैथिली शब्दकोशक ज्ञात इतिहास मे कोनहुँ नवताक संचार नहि करैत अछि।
सत्त कही तऽ अइ समस्त पोथी मे इतिहासक नामे बुकाननक शब्दकोश आ बाँकी डाटा संग्रहक अतिरिक्त सार्थक आयाम मात्र बुकाननक आलोचनात्मक व्याख्या टा अछि। लेखक नूतन अन्वेषणक दृष्टि आ क्षमताक प्रदर्शन नहि कऽ सकलाह अछि।
डॉ. यादव अपन पोथी मे मैथिली भाषाक इतिहास आ विशिष्टाकउल्लेख करैत वर्ण रत्नाकरक निकट गेलाह अछि। वर्ण रत्नाकर विलक्षण ग्रन्थ अछि ।कविशेखरक विलक्षणता कहल जा सकैछ । सुनीति कुमार चटर्जी, गोविन्द झा, काञ्चीनाथ झा 'किरण', भुवनेश्वर गुरमैता आ महेंद्र मलंगिया जाहि दृष्टि सऽ देखबाक प्रयास केलन्हि सैह देखा पड़लन्हि। [7] मुदा ताहिये दृष्टिकोण सऽ वर्णरत्नाकरक मूल्यांकन अइ पोथीक आलोक मे निरर्थक श्रम थिक। उपर्युक्त कोनहुँ विद्वान शब्दकोश विद्या विषयक ने विद्वान रहथि, आ ने से अध्ययन केलन्हि। काव्यक विभिन्न धाराक दृष्टि सँ काव्यशास्त्रीय निरीक्षण परिक्षण केलन्हि। मुदा लेखक सऽ तऽ Historiography of Maithili Lexicography लिखबाक क्रम मे वर्णरत्नाकरक विमर्श निरीक्षण परिक्षण, अन्वेषण, मनन - मन्थन अपेक्षित रहय।
वर्ण रत्नाकर वस्तुतह एकटा विशिष्ट तरहक शब्दकोश थिक जकरा आजुक परिभाषा मे Thesaurus वा सन्दर्भ ग्रन्थ कहल जाइछ।[8] अइ लैटिन शब्दक व्युत्पत्ति वास्तव मे ग्रीक भाषाक 'थेईसाउरोस'(Thesauros)सऽ भेल अछि जाहिक अर्थ होइछ 'खजाना', संग्रहालय, स्टोर हाउस (Chest.) ।दोसर अर्थं कहल जा सकैछ जे थिसॉरस केर अभिप्राय भेल पर्यायवाची शब्दक खजाना कोश ।
ई आश्चर्यक विषय जे मैथिली शब्दकोशक इतिहास छनबाक लेल डॉ. यादव मैथिली साहित्यकार समाजक किछु चिन्हल जानल व्यक्तित्व आ विदेशी स्रोत पर टा कियैक आश्रित रहलाह। एक मात्र वर्ण रत्नाकर के शब्दकोश सिद्ध केने प्रयास हुनक लिखल पोथी ऐतिहासिक भऽ सकैत छल । मुदा से तऽ अपने वर्ण रत्नाकरक स्वरूपोकें चिन्हबा मे असफल रहि गेलाह सेहो तखन जखन हुनक मूल उद्देश्ये शब्दकोशक चिन्हान आ नव तथ्यक प्रतिपादन रहन्हि। कहबाक प्रयोजन नहि जे मैथिलीक इतिहास मे गौरवक स्थान सुनिश्चित करबा सऽ चुकि गेलाह।

मैथिलीक भाषाइ अस्मिता भंजन : अपना पोथी मे डॉ. यादव मैथिली भाषाक इतिहास तकैत मैथिलीक भाषोत्पत्ति सन्दर्भ मे लिखने छथि, "Lately, in contradistinction to contemporary knowledge on the probable time of the origins of the New Indo-Aryan languages, including Maithili, Dhiraj (2019: 127) has unabashedly reiterated his earlier untenable position and additionally erred into claiming about the existence of Maithili universally believed to have originated from the Eastern Māgadhī Apabhramśa (and not the Ardhamāgadhī Apabhraṁśa, as some would erringly suggest), branching off into West (Awadhi, Bhojpuri), Central (Magahi, Maithili, Angika, Kurmali), and East (Bengali, Assamese, Oriya) New Indo-Aryan languages (cf. Gangananda Singh 1950, Govind Jha 1968, Tsuyoshi Nara 1979, and Tanmoy Bhattacharya 2016) at a time contemporaneous with the Old Indo-Aryan Vedic Sanskrit. [9]
ई देखि हतप्रभ छी जे डॉ. यादव सभटा भाषा वैज्ञानिक, भाषा दार्शनिक दृष्टिकोण आ ऐतिहासिक साक्ष्य-तथ्य केँ तऽ ताख पर राखिये देलन्हि अपितु नहि जानि कोन तरहक प्रेरणाक प्रभाव मे आबि अपनहि समस्त पहिलुक शोधक विरोधाभास मे ठाढ़ होइत छथि।
ई स्थापित ऐतिहासिक तथ्य अछि जे भागलपुर आ मुंगेर दिस मैथिलीक दक्षिणी मानक शैली आ छिका-छिकी शैलीक प्रयोग होइछ। [10] इहो लगभग स्पष्ट छैक जे भागलपुर विश्वविद्यालय मे बिना UGC के मान्यताक हिंदी विभागक अधीन बलात 2002 अंगिका विभाग खोलि कऽ मैथिली केँ खंडित करबाक कुत्सित प्रयास चलि रहल अछि जाहि सऽ अंगिका केँ कालांतर मे हिन्दीक बोली घोषित कयल जासकय जखन कि कोनहुँ ध्वनि विज्ञान आ भाषा वैज्ञानिक दृष्टि स अंगिका एखनहुँ हिंदी स अधिक मैथिलीक निकट अछि। अंगिकाक संकल्पनो 1960 के दशकक पछातियेक थिक। ताहि सऽ पहिने भाषाक रूप मे मैथिली सऽ अस्तित्वक कोनो साक्ष्यो नहि छैक। एकरा मैथिलीक दुर्भाग्ये कहल जा सकैछ जे भारतक मैथिली ध्वनि वैज्ञानिक एखन धरि मैथिलीक हित रक्षार्थ कोनो तरहक प्रतिरोधक स्वर नहि उठौलन्हि अछि आ ने कोनहुँ शोध आलेख प्रकाशित करा लोक समाजक मार्गदर्शने केलन्हि अछि।
कोनहुँ भारतीय वा पाश्चात्य भाषाशास्त्री द्वारा अर्ध मागधी सऽ अंगिका के उद्भावक उल्लेख नहि भेटैत अछि मुदा नेपाल स्थित मिथिलाक लेखक नहि जानि कियैक, कोन आधार पर अंगिका आ मैथिलीक उद्गम एक्कहि स्रोत सऽ लिखबाक प्रेरणा भेटलन्हि। बिनु साक्ष्यक तऽ एहन कोनो बताहे लिख सकैत अछि। दुर्भाग्य जे मैथिलीक समकक्ष आ एक्कहि स्रोत सऽ अंगिकाक उद्भवक साक्ष्य कोन पोथी मे भेटलन्हि, अर्धमागधी अपभ्रंशक केन्द्रिय शैली मे मैथिली, मगही, कुरमाली संग अंगिका नाओं उल्लेख कतय अछि ताहि स्रोतक स्पष्ट उल्लेख नहि अछि। अपितु गप्प के तेना घुमा फिरा कऽ लिखल गेल अछि जाहि सऽ पंडित गोविन्द झा आ गंगानन्द सिंह सहित कुल चारि लेखक पर शंका जाइछ। मुदा ताहि शंकाक निराकरणक उपाय नहि देल अछि।
भाषाशास्त्रीक रूपमे ख्याति प्राप्त सुनीति कुमार चटर्जी, जॉर्ज ग्रीयर्सन [11], सुभद्र झा [12], पंडित भगवद्दत [13], भोलानाथ तिवारी [14] आदि किनकहु पोथी मे अंगिकाक उल्लेख नहि अछि। जतबा धरि पढ़बा मे आयल अछि कोनहुँ आन उल्लेखनीय भाषा शास्त्रीक अध्ययन मे अंगिकाक इतिहासक सन्दर्भ मे किछु नहि भेटैछ ।
एहना मे नेपाल मे मैथिलीक विखण्डन रोकि सकबा मे असफल डा. यादवक ई पोथी मैथिलीक भाषाइ अस्मिता पर कुठाराघात तऽ अछिये, लोक दृष्टिमे अनावश्यक भ्रम आ आरजकताक स्थिति ठाढ़ होइछ । अर्थात 'अश्वथामा हतो नरो वा कुंजरो वा' के चरितार्थ करैत असत्यक स्थापना। भारत सऽ लऽ कऽ नेपाल धरि आ ओतबे टा नहि विश्व भरि मे पसरल अपना - अपना स्तर पर मैथिलीक सेवा मे लागल कोटि- कोटि मैथिली प्रेमीक संग छल कहाओत।
ऐतिहासिक अशुद्धिक परिमार्जनक मनोवृत्तिक अभाव : पाश्चात्य विद्वान् एलेन थ्रेसर द्वारा मंडन मिश्रक ब्रह्मसिद्धि पर टीका लिखैत Bachaspati के स्थान पर Bacaspati लिखने छथि । 'Ch' के स्थान पर 'C' के प्रयोग प्रायह पाश्चात्य विद्वान् द्वारा एहने त्रुटि भेल अछि ।
लेखक मैथिल थिकाह, मिथिलाक माटि पानि सऽ। एहना मे आस कयल जा सकैछ जे पाश्चात्य विद्वान लोकनिक अइ त्रुटिक परिमार्जन करितथि आ से दायित्वो रहन्हि मुदा से प्रवृति नहि देखा पड़ैछ। ओहो Ch के स्थान पर C के प्रयोगे केलन्हि अछि । [15]
निष्कर्ष : उक्त पोथी आ ताहि लाथे लेखकक मनोविज्ञानक मूल्याङ्कन सऽ जे फरिछ होइछ ताहि आधार पर ई कहबा मे संकोच नहि जे फ्रांसिस बुकानन अइ पोथीक केन्द्रिय विषय छथि आ ताहि विषयकें यथेष्ट श्रेय नहि देल गेल अछि। इहो कहबा मे संकोच नहि जे शब्दकोशक इतिहास लिखबा काल लेखक केँ शब्दकोशक विविध स्वरूपक विषय मे फरिछ सऽ ज्ञान रहल हैब, नहि बुझा पड़ैत अछि। आ तकरे परिणाम थिक जे वर्णरत्नाकरक वास्तविक स्वरुपो चिन्ह सकबा मे असफल रहलाह। आ इहो सत्य जे "Historiography of Maithili Lexicography" मैथिलीक भाषा साहित्य- शब्दकोश विषयक ऐतिहासिक पोथी नहि बनि सकल अछि ।
जहाँ धरि मैथिलीक भाषाइ अस्मिताक प्रश्न अछि ई पोथी कथमपि मैथिलीक प्रति संवेदनशील हृदयक प्रतिबिम्बित नहि थिक आ अनावश्यक भ्रम पसरैत अछि। समकालीन लेखकक प्रति लोक समाज मे आक्रोश आ शंका पसारैत अछि, कादो फेकैत अछि।
एहन नहि जे मैथिलीक हित चिन्तक संघर्ष नहि करत वा हारिये जायत। इहो नहिजे डॉ. यादव के उल्लेख मात्र सऽ किछु प्रमाणित भऽ जायत मुदा भाषाइ राजनीति मे कमजोर पड़ैत मैथिलीक विरोधी केँ एकटा सशक्त उल्लेख (reference) केर हथियार भेट गेलैक अछि आ मैथिलीक लेल संकट अबस्से ठाढ़ होइत अछि।
नेपाल मे जखन मैथिलीक विघटन देखि रहल छी । पछिमा शैली केँ बज्जिका नामे पृथक भाषाक दर्जा भेट गेलैक अछि आ भारतोक झारखण्ड मे अंगिका के द्वितीय राज्यभाषा बना देल गेल अछि, इतिहास, डॉ. यादव केँ मैथिली हितैषीक रूपमे कतेक दिन स्वीकार करत वा मोन राखत ई देखबाक विषय अछि । इति।

संदर्भ :
1. A. H. Maslow, Psychological Review, A Theory of Human, Motivation, 1943
2. Constantine Sedikides & Asst., Psychology, Faculty Publication University of Dayton, A Three Tier Hierarchy of Motivational Self-Potency, 2013, PP 235-295
3. Britannica Encyclopedia
4. Merriam Webster Dictionary
5. Collin James Dictionary
6. Cambridge Dictionary
7. Dr. Ramavtar Yadav, Historiography of Maithili Lexicography & Francis Buchananís Comparative Dictionary, 2021, Pg. 17
8. Kavi Rajiv Jha Ekant, Pravashi, 2021-22, PP. 21-30
9. Dr. Ramavtar Yadav, Historiography of Maithili Lexicography & Francis Buchananís Comparative Dictionary, 2021, Pg. 18
10. G. A. Grierson, Linguistic Survey Of India, 1903, PP 13-29
11. G. A. Grierson, Linguistic Survey Of India, 1903, PP 13-29
12. Dr. Subhadra Jha, Formation of Maithili Language, PP. 23-30
13. Pandit Bahgvadutta, Bharatvarsh ka Itihas, 1946
14. Bholanath Tiwari, Hindi Bhasha ka Sankshipt Itihas, 1981
15. Dr. Ramavtar Yadav, Historiography of Maithili Lexicography & Francis Buchananís Comparative Dictionary, 2021, Pg. 7-28

 

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