
प्रीति कुमारी
श्री लालदेव कामत जीक व्यक्तित्व आ कृतित्व
विश्व कवि रविन्द्र नाथ टैगोर लिट्रेचर अवार्ड आ साहित्य अकादमी पुरस्कार (
मैथिली मूल) प्राप्तकर्ता श्री जगदीश प्रसाद मंडल जीके बिछल कथा (कथा संचयन)
प्रो० रामसेवक सिंह - मैथिली हेड ,भागलपुर यूनिवर्सिटी (२०२५) केर
लोकार्पणकर्ता श्री लालदेव कामतजी अन्तरमुखी व्यक्ति छथि। हिनक व्यक्तीत्व
केँ जानय लेल बालपनके पृष्ठभूमिमे जाए पड़त। मोरंग काऊटन मिल्सके जोगबनी
क्वाटरमे लालदेव जीके जन्म भेल रहनि। प्रदीप दाजूके अम्मा हिनक पुकारु नाउ
- पबन रखलखिन। बालपनमे आन बच्चाक अपेक्षा ई दू मास पहिले चलब शुरू केलनि।
एक दिन डेगाडेगी दैत पौरके बिजुआ आ सुखदेव जीके पछबरिया क्वाटरधरि चलि गेल
छलैक। उत्तरबरिया अपना क्वाटरमे सुतल अवस्थामे ढोढीक मखठी मोलही देवी नोंचि
नोकसान पहुचेने छलैन। से सैंली -मैली आ सानो के बहिण काँछी पकैड़ लेने रहैक।
ओहि अबघात सँ गंगौली डाक्टर बचा लेने रहैनि। मैच फैक्टरी सँ मैज्यू छुट्टीमे
अबथिन तँ भोजन सँ पहिले ओ पबनके दुलारथि आ लोरीक जगह जलजला टाकिजमे लागल
फिल्मक गीत सुनाबथिन-:
साउनके महिना पबन करय शोर ...........
जियरा रे झूमे ऐसे , जैसन बनमा नाचे मोर!
ऐ गीतक मीठ धुन पर पबनके सँग पुष्पा, काली,कार्तिक,किशोर आ मंजू सेहो पहारी
धियापुता आनन्द उठाबैक। कहय लागल रही २ अप्रिल १९७१ ई० केँ हटनी निवासी
बाबूचन कामति उर्फ बाबूलाल केउट आ अरहुल देवी केर घर तेसर खेप एक बालकक जनम
भेल रहय, जिनकर नाम जागेश्वर पड़ल। परँच छठिहारी पुकारू नाउ हुनक पितियौत
बड़ बहिन लक्ष्मी देवी राखलनि लालदेब,से बहुचर्चित नाम टिप्पैणमे नहि छैक।
शिवहरि बाजे ओतय एक सिलेट आ धार्मिक पोथी ल' केँ बहिन वैशाली उर्फ सरोस्वती
संग पढय जा लागल तँ कैम्पसमे मदूमाके दूगोट हाँस खेहारलकनि। फेर नेपाल सँ
नौआबाखर गाम आबि जाए गेलथि। हुनक छोटका ममा बिराटनगर सँ आबि अपर प्राइमरी
स्कूल - नौआबाखर कचहरी पर पं०हेमकर झा, हेडमास्टर लग ल' जाकय पहिल वर्गमे
नाम लिखा देलथिन। श्री लालदेव कामत मनोहर पोथी अपना वार्डक सज्जन चौधरीक
मरबापर हरखित संगे जाकय सांझ- भोर ट्यूशन पढ़य जाए। ओतय पिरोजगढके काॅ०
कामेश्वर राम खानगी रूपेँ मास्टरी करैत कड़ा सँ पढ़बथिन। हिनक संगी- तुरिया
सब टिनही सिलेट आ काठक पाठी लऽ पैरमे खरपा पहिरके गुलाबजी सँगे टीशन पढ़य
नितह जाई। सब सहपाठी हिनक हवाई चप्पल आ पाथरक सिलेटकेँ अचरज नजरिये देखय।
श्री कामतजी तेहने पढ़ैयोमे लगनशील आ अकिलगर रहथि। दुसरा कक्षामे गेलापर
जहरी दीदी दोकान सँ सदातावके कागत बेसाहि अपने सँ टाँकि लिखना काॅपी बना
लेने रहथि। ओहिमे करचीक
कलम - इंक दुआति ल' केँ 'चलो पाठशाला चलें ' पोथीक पाठ सँ देखशी लिखना
उतारथि। चित्रकारी सेहो आ अक्षर हूबहू छापथि। घीनसी लिखना देखि टोलक सहपाठी
दुर्गानन घर पर आबि एक पृष्ठमे मात्र ५ पाँति वाक्य लिखकेँ बतौलकनि। तखन
दररोज तेहने लिखबाक अभ्यास करय लगलाह। हिसाबक जोड़- घटावधरि लिखने कोपीमे
अभ्यास कय जमैलाक मोलबी साहेब (अनवारूल हक )केँ देखबय पड़ैन। हिनक सबसँ
प्रिय अध्यापक दुर्गीपट्टीक यमुना साफीजी रहथिन,जिनका जन्मभूमि पर लोक गंगा
साफी नामे जानैत रहलनि। ओ चनरदेव आ अकलेश केँ बाल वर्गमे सेहो पढ़य लेल सँग
लगेलक आ नाऊ लिखबेलनि। जे चटिया तै जमानामे कहियो स्कूल जाय सँ नागा करै तँ
साफीजी घर पर सँ ताकि आनथि आ करमीलाके छरी सँ ततारि दैथि। पंडित जी सबक सुनि
कतेको चटियाकेँ दे धौल ....! धरि शनीचराक चाउर आ कैँचा लै ले हुनक छोट बालक
हरेराम धार टपि आबि जाइन। अपना सँ छोट भायकेँ रानी मदन अमर नामक पीयर ढ़ाउस
बड़का किताब केर सँग पहलामे नाम लिखा देलन्हि। ता पहिले खेप नि: शुल्क
मैथिली पोथी - मीरा कमल दिनेश ,कर्पूरी जीक कृपा सँ बाल वर्गमे बितरीत
भेलैक। ताहि समय हिनका गुलाबजी सँ भुली महिस बाला मैथिली पुस्तक सेहो
पढ़बाक सौभाग्य भेलन्हि।
जहन चौथा वर्गमे रहथि तँ बुधदिन हटिया जाइतकाल पछोर लागि गेलाह। जहन बगरबोनी
लग जीराय खातीर बैसलाह भोगी लालजी आ पाछाँ उनटि देखल तँ बजलथिन देखू काकी
अहाँक लालदेब बौआ सेहो चलि आयल। आ बजारमे इसकुलिया बाकस कीनलक। ओहि दिन
तारभुज खाइतेकाल मरचाई दोकान बाला लग मुर्छा आबि गेल छलैन्ह। सन् १९८० मे
पाँचमाके छात्र कामत जीक बालवियाह २५ फरबरी केँ कु० सूमित्रा उर्फ
मुन्नीजीक सँग भेलन्हि। ओहि समय सासुरमे मरजाद दिन अपन जेष्टसार श्री मंगनू
जीकेँ गणितक ऐकिक नियम पाठ सँ हिसाबधरि सिखेने रहथि।
सन् १९८१ मे छठम वर्गमे हटनीके मध्य विद्यालयमे नामाकंन प्रधानाध्यापक उमेश
झा लग करेलनि। कोशी मरनाधार टपिकय आ वर्षाकालिन ऋतुमे जूगत मियाँके नाह सँ
पार होइत नितदिन पढाय करय जाथि। नाँह लिखबैसँ सालभरि पहिने शनिदिन बौएलाल
जीक सँग हटनी मिडिलस्कूल पढ़य गेल रहथि। ओहि दिन रायजी गुरूजी सब विद्यार्थी
सँ लोकगीत गबाबथि। हिनको पँतियानीमे क्रम अयलनि तँ चरफर सँ ठाढ़ भ' अपन
मीठकंठ सँ निधोख छकरवाजी नाचमे लेबरा सँ सुनल गीत गौलथि -:
पीतरोके गहना द' केँ हमरा फुसिलेलह
सोना केँ नै पड़लै गतरमे - गतरमे! गतरमे !!
आब नै रहब देह जरूआक घरमे- घरमे !!
एके अंतरा गीत सुनि सभ विद्यार्थी थपरी बजेलकनि तँ सतमाक चेष्टगर विद्यार्थी
लोकनि पिहकारी पारलकनि। एक आरो प्रसँगक चरच सुनने छी -:
नेनपनमे जखन ओ तिसरेमे रहथि तँ पाँच नया पैसा सँ शिक्षक दिवसके टिकस
वर्गशिक्षक सँ किनय पड़ल रहनि। से बेरियां पहरमे बजरंगी साह संगे ओकरा घर
लगक घाट पर धार टपि दुर्गापूजा होय सँ मासदिन पहिले बनैत मूरूत देखय गेला,
हटनीके धियापुता सब मूरूत नहिं देखय दैन। तखन दोसर दिन सँ सबदिन पाँच
सितम्बर बाला वोयह टिकट बुसर्ट केर जेबी पर साटिकय जाथि आ अधिकार पूर्वक
मैटिक मूरूत छलगरिया केँ बनाबैत देखथि। मधेपुरके कारीगर सँ लुरि मोनेमोन
सीख , गामपर कुमरोटी माँटि सँ छोटगर मूर्ति यथा-: भोमरा,भाँटा, करेला ,ऊँट
,हाथी- कुत्ता बनाकय पीठार सँ ढ़ौरकेँ सीमक पातके रस,कुसूम फुलके आ खापरिक
पेनी सँ कारिख ल' केँ रंगैत बार्षिक व्यवहारिक परीक्षामे डोरी- बाढ़ैन आ
खर्रा सहित पंडीजी मासेएब केँ दैथि,परीक्षा पास करैले नारिकेल - छोहाराधरि
छढ़ाबा करय पड़ैन। १९८१ ई०मे एक दिन इंग्लिश विषयके टीचर शंकर मिश्रजी
रीडिंग दैलै कहलकैन, छठम् वर्गके सब छात्रकेँ बेराबेरी ठाढ़ करैत गेलाह।
हिनकर प्रखर उच्चारण 'इट वाज सण्डे ,देयर वाज ए क्रिकेट मैच इन द स्कूल ,
पाल वाज कैप्टन .गार्डेन इन प्लेग्राउंड,गोपी .....कहैत काल शाबसी दैत
बैसबाक संकेत केलकैन। ओहि दिन संयोगे क्रमांक १ . आशुतोष झा एवम् कुसूम लाल
चौधरी वर्ग सँ अनुपस्थित छलैक। एक सोमदिन हटनीके विद्यालयमे बालवर्ग सँ
अष्टम (नवीन) वर्गधरिक विद्यार्थीगण साढ़े दसवजे जुमि गेलैक आ वि० शिक्षक
कृष्ण देब साहु आ महेश बाबू आयल रहथि। सब वर्गक छात्र - छात्राकेँ वरपिपर-
पाखैर गाछतर विर्तमे बैसबैत सातगोट प्रश्न लिखाओल गेलैक। उत्तर पुस्तिका
जाँचलेल जमा लेल गेल़ै तँ एकमेव उत्तीर्ण छात्र इयहटा रहथि। बहुत गोरे
राष्ट्रीय गान आ गीतमे भ्रमित भऽ लिखने छलैक। एकदिन देवकान्त यादव शिक्षक
हिनका हेडमास्टर उमेश जा लग भोजनावकाश समयमे कार्यालय लऽ गेलनि,आ १५ अगस्त
पर भाषण सुनबय कहलकैन। से संभाषण कलामे प्रवीण बुझलकन्हि। आनछात्र -
छात्राके बन्सव्त शिक्षक लोकनिक बीच हिनका मादे नीक धारणा बनल रहलन्हि। सन्
१९८३ ई०मे गामक दक्षिण ३ किलोमीटर पर अवस्थित ने०रा०सा० उँच्च वि० सरौतीमे
वर्ग अष्टममे मो० शगीर साहेब वर्ग शिक्षक लग नामांकन लेल दरखास्त आ
विद्यालय स्थानांतरण प्रमाणपत्र तथा कौमनचार्य जम्मा देलनि। विद्यालय किरानी
रामबाबू कामत लग पिऊन रामप्रकाश शर्मा बजाकय लऽ गेलनि ओतय बालचर रसीद भेटलनि।
मैथिली विषय खूब नीकजेकाँ सीताराम कामत पढ़ाबनि। ओहि समय नवम् - दशम् वर्ग
लेल मैथिली भाषा साहित्यमे गद्य-पद्य संग्रह, एकांकी , गल्प गुच्छ आ आदर्श
जीवन पोथीक अतिरिक्त व्याकरण आओर रचना स्वीकृत रहैक। समसामयिक पत्र -
पत्रिका पढ़य लेल सीताराम बाबू हिनका प्रेरित केलकनि। सन् १९८६ मे
प्रवेशिकोत्तीर्ण आ १९८८ मे अन्तर स्नातक(कला) तृतीय श्रेणी सँ पास केलाह।
हिनका इसकूल - कालेज सरौतीमे फर्स्ट डिवीजन नील चलि गेल रहनि। कर्पूरी
नागेश्वर शम्भूनाथ जनता महाविद्यालय सरौतीमे सेकेण्ड डिविजन सेहो नीले भेल
रहैक। धरि मातृभाषा मैथिलीमे हिनका १०७ लव्धाँक मेंटल रहनि। आन दोसर विषय
यथा इतिहास, राजनीतिक विज्ञान अथवा लौजीकमे ९० अंक सँ कम रहने बी. ए. (आर्ट)
सत्र १९८८-९१ टीडीसी फस्ट बैचमे आनर्स नहिं भेलनि। चन्द्रमुखी भोला
महाविद्यालय डेवढ़ - घोघरडीहामे कला संकाय केर बहुत कमे विषयमे तत्काल
प्रतिष्ठा करैक विषय मंजूर रहैक। इग्नू सँ पीजी. डीआरडी. १९९६ म मुजफ्फरपुर
बी आर अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय केर पुस्तकालय कक्षमे नामांकन लेल गेल
रहथि। ऐ लेल गाम सँ अथक परिश्रम बले पदयात्रा करैत लोहनामे रेलगाड़ी पकड़ि
अवधेश जी आ रामलोचन औभरसियर साहेब सँग पहुँचल छलाह। निर्मली सँ झंझारपुर धरि
रेलमार्ग प्रल्यंकारी वाढ़िक कारणेँ कमला नदी लग ठप्प पड़ल रहलैक कतेको
मासधरि। आधुनिक किसान आ प्रगतिशील कृषक लेल एन वाय के - मधुबनी सँ जुड़ि
तिरहुत कृषि महाविद्यालय - ढोली आ पुसा कृषि विश्वविद्यालय सँ आवासीय
प्रशिक्षण 'नगदी फलोत्पादन ' पर करने रहथि। सन् १९९१-९२ मे वेदव्यास
ग्राम्य निर्माण सह युवा क्लब गाममे गठित करने रहथि। ग्राम स्वराज सभा कायम
कय जनहितमे भूदान किसानके बीच काज कयलनि। हिनका आठमा वर्गमे भारत स्काउट एवं
गाइड केर गुरू पद प्रशिक्षण श्रीकृष्ण यादव उँच्च विद्यालय - फुलप्राश सँ
शिविर जीवनक अनुभव भेल रहनि। स्काउटिंग बौक्स रखि आवश्यक प्राथमिक उपचार क'
सामग्री कतेको सालधरि समाज सेवार्थ व्यवहारिक सुविधा देलनि। प्रखंड आत्मा०
सँ मौधमाछी पालन प्रशिक्षण लेल राजगीर (नालन्दा) आ पुष्प खेती पर विशेष
प्रशिक्षण लेल भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय - सबौर पठाओल गेल छलनि। निवंधित
संस्था " मिथिलांचल कोसी विकास समिति केर प्रवक्ता छथि ,ऐ सामाजिक संगठन सँ
लोकहीतमे कतिपय काज कयलाह अछि। बड़ी रेल मार्ग सकड़ी सँ पूरब धरि बनय आ ताहि
पर सस्ता रेलयात्रा आरम्भ हुअय। ऐ लेल अथक परियास अपना टीम द्वारा करैत
रहलाह। जनताक ज्वलंत समस्याक समाधान लेल सरकारी कार्यालय पर अनेकों बेर धरणा
- प्रदर्शन करैत रहल छथि। मातृभाषा मैथिली केर प्रचार -प्रसार लेल जत्थामे
कतेको जिलामे जन चेतना जगेलाह। कोसी संदेश त्रिमासिक मैथिली पत्रिका माध्यम
सामाजिक अव्यवस्था दूर करबामे सदैव लागल रहैत छथि। मिथिला'क लोकमे
अंधविश्वास,करिति आ नशापान छोड़ेबाक सेहो काज कयने छथि। श्रीकामत जी अपने
आपमे एक करैत - फिरैत स्वयं संस्था छथि। हिनक क्रिया कलाप केर विश्लेषण वा
लेखा जोखा कोनो शोधार्थी वा अन्वेषक करथि तँ एक पोथी बनि सकैत अछि। सन्
१९९२-९३ मे एन सी आर डी- नागपुर सँ जुड़िकय विनोबा आश्रम शाला प्रकल्प के
तहत् आदिवासी बाहुल्य बस्ती हेडरी,तलबारा, कोटमी,
गेदा,अहेरी,एटापल्ली,अल्लापल्ली आ बेणागुण्डीमे अपन भरल जवानी कष्टप्रद
बितौने छथि। अखिल भारत रचनात्मक समाजके मुख्य पत्र ' नित्य नूतन ' पाक्षिक
पत्रिकामे हिनक आर्टिकल्स छपैत रहैत छलनि। १९९२ मेँ पत्रकारिता महाविद्यालय
लाजपनगर सँ प्रकाशित मोटगर पुस्तक 'हिन्दी पत्रकारिता कोश'मे हिनक नांऊ छपल
'युवा लेखक एवं पत्रकार ' रूपेँ अशोक गुप्त जी जगजियार कयने रहनि। कामतजी
गांधीवादी विचार वो समाजवादी विचारधाराक गहन अध्ययन कयने छथि। देशरत्न
राजेन्द्र बाबूक ' सादा जीवन - उँच्च विचार ' बाला दर्शनकेँ आत्मसात करने
छैथ। कोशी नदी अपन बहावधारा बदैल श्रेणी, मुदा कोशी कछेरक लालदेव जी अपन
एकसुराह धारा ऐ दसकोशीमे नइ बदैल सकला हेन्। सामुदायिक भाव आ परोपकारमे
लागल बात हिनका मादे ट्युशन मास्टर सुखदेब पंडित कतेको ठाम बजैत रहथिन। जाहि
समय घोघरडीहा बजार जाईमे तीन ठाम नाह पर पार हुअय पड़ैक आ कारनीकेँ चारि
आदमी सँ खाटपर डाक्टरी आनल जाई, ओहि समय ई कतेको रूग्ण स्री- वृध- नचार
पुरूष केँ साईकिल सँ मधेपुर अन्सारी जी लग ल' जाइन। अपनो हेमोपैथिक, एलोपेथी
आ आयुर्वेदी औषधि राखि वरखा कालीन समय जरूरतमंद बेरामी केँ दैत रहलखिन।
सुईया भोकाई सेहो नहि लैत रहथि। डायक्रिष्टीन इंजेक्शन लगेला उपरान्त रोगी
बुझि नहिं सकै आ दुखाई केँ बात तँ दूरे रहय! पारिबारिक बले कतेको राजनीतिक
कार्यकर्ता आ कृषिश्रमिक केँ अपन कुरता,पैजामा- धोती ,बण्डी आ कोट - शाल ओ
पनही देने हेताह तकर ठेकान नहिं। नगदो टाका,मफलर- गमछा,रुमाल,टोपी खुशी सँ
बाँटलनि। कांपी, डायरी, पत्रिका,पोथी धरि बिलहने छथि। प्रवास यात्रामे
टिकट,जलपान आ भोजनधरि होटलके बील इयह चुकबैत अपना लल भेल रहैत ,किछ लोकक
नजैरमे अर्धविक्षिप्त सेहो कहेलाह। किछु एहनो लोकक संगहत रहैन जे हिनका सँ
माछ,मौस आ अण्डो कीना लैत छलन्हि। आब तँ न आधो सँ लेनाइ,न माधोकेँ देनाए सन
अपनाकेँ ठूठ गाछ बूझैत छथीन। पहिलुका जहाँति ५ लोको कोनू पण्डा-पुजारी,
अगिलगी पिड़ित, बाढ़िक त्रासदी सं पिड़ित छात्र, क्रिकेट दलके क्रिड़ाकर्मी,
वा अन्तयके चन्दा मँगनिहार केँ हिनके हाथे बोहनी नै करबै छथि। आब कोनू
आयोजनमे हिनक अमीन बालक आ दूगोट +२ बीपीएससी.शिक्षक पुत्र बढ़ि-चढ़ि क'
आर्थिक सहयोगी बनैत छैन। से प्रभाव हिनक व्यक्तित्व आ कृतित्वके कारणेँ भेल
छन्हि।
हिनक वंशावली (कुर्सीनामा) मैथिली पोथी २०२० ई० आई एस बी एन ९७८९३८८८११५१४
केँ पृष्ठ सं०-४० पर छपल सन्दर्भ स्रोत थीक। मूलनिबासी हटनीक गोविन्द कामति
ओऽ बूलो कामति पेसर स्व० हनुमानी कामति मध्यवित् किसान पोखरिया हसामी रहथिन।
हटनी गामके अतिरिक्त खतियानी जमीन राजस्व मौजे - नौआबाखर,धनपतबरही,
हड़री,मैनही आ अलोलामे छलन्हि। गोविन्द कामतिके तीन पुत्र क्रमशः झपट,बौधू
आ ललित भेलन्हि। गोविन्द कामतिके चौथापनमे चुमौन देवनाथपट्टीक मखन कामतिके
दादाक अविवाहीत बहिन सँ भेल रहनि। ललित अशेसर केँ पहिल पत्नी सँ ललिया बेटी
भेलनि। हुनकर असामयिक निधन उपरांत अपन विधबा छोट साढ़ि रनियाँ सँ समध रचेलनि।
ताहि सुकमारपुर बाली सँ दू पुत्र रामकिसुन आ बाबुचन' बबाजी' तथा कुन्ती बेटी
जेठ रहलनि। बाबूचन्दकेँ जेठ पुत्र नन्दलाल नान्हियेटामे मरि गेलापर पुत्री
सरस्वती आ पुत्र क्रमशः लाल देब,उमाकान्त ओ महाकान्त प्रसादजी भेलनि।
लाल देब जी लव्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार आ स्वतंत्र पत्रकार छथि।(शेषांस
अंगिला अंकमे)
-प्रीति कुमारी,बी.ए. ऑनर्स (बी.एड०)
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