प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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अयोध्यानाथ चौधरी (संपर्क- जनकपुर)

मिथिला-मैथिलीक मूल स्तम्भ: प्रा. डा. रामावतार यादव

हम गौरवान्वित छी जे हमरा प्रा. डा. रामावतार यादव प्रति अपन श्रद्धा आ सम्मान प्रकट करबाक सुअवसर प्राप्त भेल अछि। हमरा अहू बातक गौरव होइए जे जाहि हाई स्कूलक ओ विद्यार्थी छलाह, ताही स्कूलक विद्यार्थी कालातंर मे हमहुँ रहलहुँ। अर्थात मधुबनी जिलान्तर्गत श्री बी. के. एस. उच्च विद्यालय, जटुलिया जे मिथिलाक प्रसिद्ध विद्वान लोकनिक दूटा गाम महिनाथपुर आ जोंकीक निकटस्थ अछि। हमरा अहू बातक गौरव होइए जे हमरा दुनू गोटेक गाम एके नगरपालिकामे पड़ैत अछि। अर्थात नेपालक धनुषा जिलान्तर्गत विदेह नगरपालिका। हमरा अहू बातक गौरव होइए जे हमरा हुनक साहचर्यसँ यदाकदा बिभिन्न विषयक विशिष्ट ज्ञान प्राप्त होइत रहैए। हमरा अहू बातक गौरवबोध होइए जे ओ जाहि मूल विषयक प्राध्यापक रहलाह, हमहुँ ओही मूल विषयक शिक्षक रहलहुँ, अर्थात अंग्रेजी। हमरा अहू बातक गौरवबोध होइत रहैए जे हुनका पश्चिमी देश सभमे जाए जतेक विशद् अध्ययन आ तालिम प्राप्त करबाक सुअवसर भेटल  छन्हि से विरले व्यक्तित्वकेँ प्राप्त होइत छनि।

जेना हुनकर दुर्लभ योग्यता तहिना हुनकर दुर्लभ भाग्य। योग्यता अनुकूल ओ सब दिन उच्च स्तरीय सरकारी ओहदा पर विराजमान रहलाह। ओ मूल रूपमे अत्यन्त यशस्वी प्राध्यापकक रूपमे त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडूमे करीब तीस वर्ष धरि नेपाल सरकारक सेवामे रहलाह। तकर बाद अवकाशप्राप्त करबाधरि नेपाल सरकारक अनेक अति प्रतिष्ठित पदसबकेँ सुशोभित कयलनि।

जहिना हुनकर दुर्लभ योग्यता, जहिना हुनकर दुर्लभ भाग्य तहिना हुनकर दुर्लभ कृतित्व। हमरा जनैत हुनक एक-एकटा कृति मैथिली भाषा-साहित्यक हेतु अनमोल धरोहर अछि। मैथिली भाषा-साहित्यक इतिहास अनन्त समय धरि गर्व करैत रहत।

जर्मन, अंग्रजी आ मैथिलीमे मोटगर आ महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखिनहारकेँ समीक्षा आ टिप्पणी लिखबाक फुर्सति कतय? एकबेर हम अपन कथा-संग्रह "एकटा हेरायल सम्बोधन" बास्ते टिप्पणी (blurb) लिखबाक अनुरोध कयलियनि। ताहि पर ओ जबाब देलनि- टिप्पणीक कोन प्रयोजन? ओ त' जकरा नहि केओ जनैत छैक, तकरा बास्ते छैक। आ फुर्सतिक अभाव देखा नहि लिखि सकलाह। दोसर बेर हम अपन गीत-गजल संग्रह "चली किछु गुनगुनाली" हेतु पुन: अनुरोध कैल। मुदा अहू बेर हमरा निराश करब हुनका ठीक नै बुझेलनि। आ' से जे ओ लिखलनि से देखल जाय--"कतेकहु महान् कवि-आलोचक लोकनिक मतेँ कवि-सर्जक ओ कवि-व्यक्तिक दू फराक फराक स्वत्वमे परस्पर साम्य-मूलकताक तादात्म्यकताक अभाव रहैत अछि; मुदा ई उक्ति अयोध्यानाथक गीत-गजल सभमे चरितार्थ नहि होइत अछि। अयोध्यानाथ-गीत / गजल-शतीमे संगृहीत गीत / गजल सभक ई सटीक विशेषता रहल अछि जे जहिना सरल, मृदुभाषी, कलुषताविहीन कवि-व्यक्तित्व तहिना सहज, अकृत्रिम, मृदुल, आह्लादपूर्ण, एवम् ललितगर अभ्यर्थना-नेहोरासँ परिपूर्ण आ मूक उद्वेग, निरीहता, वेदना, तथा निश्छल सुकोमल प्रेम-भावसँ सराबोर कवि-सर्जक सृजित मैथिली गीत-गजल सभ। जहिना स्मितभाषी कवि-व्यक्तित्व तहिना सर्जित गीतसभमे एकहुगोट हरफ फाजिल नहि। हमर ई दृढ धारणा अछि जे शीघ्रहि ई मर्मस्पर्शी गीत-गजलसभ जनसाधारण मैथिलक लोककण्ठमे स्थायी बास पाओत आ ओलोकनि अनायासहि एकरा गुनगुनाब' लगताह। मैथिली गीत विधाक श्रेष्ठता प्रतिस्थापित करबाकहेतु अयोध्यानाथ धन्यवादक पात्र थिकाह

(रामावतारजी) जाहि विषय आ विधा पर कलम चलबैत छथि से डेग समधानल रहैत छनि। हम कहिलियनि जे अपनेक भाषा एकदमश्रोत्रिय' भाषा होइत अछि, ताहि पर ओ किञ्चित मुस्कुराइत रहि गेलाह आ हम हुनक सामर्थ्य पर चकित रहि गेलहुँ।

ई सर्वाधिक गौरवक विषय थिक जे आब अवकाशप्राप्त भेला उपरान्त, जीवनक उतरार्द्ध मे, ओ सम्पूर्ण समय लगा मातृभाषा मैथिलीक सेवामे समर्पित छथि। हुनक अत्यन्त कष्टसाध्य लिखल आलेखक हेतु पटनासँ प्रकाशित होबयबला नामी पत्रिकामिथिला भारती'क हेतु संपादक शिव कुमार मिश्र जी तथा मधुबनीसँ प्रकाशित होबयबला नामी पत्रिकाअनुप्रास'क हेतु दीप नारायणविद्यार्थी' जी केँ अपन-अपन पत्रिकाक पहिल पृष्ठ पर प्रतिष्ठापित करबाक मनोकांक्षा आ व्यग्र प्रतीक्षा रहैत छनि। हुनक बहुआयामिक व्यक्तित्व पर जौं आलेख लिखल जाए त' एकटा मोटगर किताबक रूप ग्रहण करत। तैं हुनक निबन्धकार व्यक्तित्व पर मात्र एकटा निबन्ध के आधार बना किछु लिखबाक सोच बनौने छी। हुनक मैथिली आलेख सञ्चयन भाग एक आ दू मैथिली भाषा-साहित्यक अनमोल निधि छनि जाहिमे क्रमश: सोलहटा आ नौटा अति उच्च-स्तरीय आलेख संगृहीत छैक। एक-एकटा आलेख पर जौं विचार कैल जाए त' ओहि मे प्रयुक्त सन्दर्भ सूची देखि लेखक कोन विधि ओतेक पुस्तक, पत्र-पत्रिका आदि उपर कएने होएताह, फेर ओकर अध्ययन-अनुशीलन कएने होएताह आ तखन कतेक समय लगा लेखन-संपादन कएने होएताह से सोचि चकित भ' जाइत छी। लेखक निश्चय विशिष्ट धन्यवादक पात्र छथि आ हम पाठक लोकनि स्वत: आभारसँ नतमस्तक भ' जाइत छी। कोनो आलेख ककरोसँ कम नहि। हुनक निबन्धसब मे पाँचटा बात अत्यन्त प्रभावित करैत अछि। पहिल-भाषा सौष्ठव। दोसर-दुर्लभ जानकारी। तेसर-सकारात्मक भाव बा आशावादिता। चारिम-निष्कर्ष बा उपसंहार। पाचम-अत्यन्त लाम सन्दर्भ सूची। सन्दर्भ सूची अन्तर्गत आधासँ बेशी ग्रंथ अंग्रेजी भाषाक रहैत छनि जाहिमे ओ अपन अंग्रेजी भाषाक विशद् ज्ञान केर व्यापक उपयोग कय दुर्लभ आ नवीनतम जानकारी दय पाठककेँ मंत्रमुग्ध कएने रहैत छथि। आब हम एहि सभ विशेषताकेँ संक्षिप्त रूपेँ राखि रहल छी-

1. भाषा सौष्ठव

डा.यादवक विभिन्न आलेख सभमे किछु यदा-कदा प्रयुक्त पाण्डित्यपूर्ण आ ठेठ शब्द सभ दिस हमर ध्यान आकृष्ट भेल त' हमरा भेटल-उपोदघात, बेआलिस, संगृहीत, अनुसंधित्सु, वैदुष्यपूर्ण, अन्त्यानुप्रास, अन्तर-अनुप्रास, पूर्वहि, अनुसन्धेत्सु, अनुसन्धाता, खगता, दुई, तीनि, धन्यवादार्ह, निष्प्रयोजनीय, प्रयोजनवशात्, प्रयोक्ता, नेहोरा, हरफ, प्राक्कलन, अक्षुण्ण, अद्यतन आदि-आदि। हुनक तत्सम-बहुल शब्दक प्रयोग देखि एक दिन प्रश्न कयलियनि जे अपनेक भाषा आम लोकक हेतु कठिन बुझना जाइछ। ताहि पर ओ जबाब देलनि जे भाषाक स्तर के खसेबाक काज हम किन्नहु नहि क' सकैत छी। इएह त' ओकर निजत्व आ सौन्दर्य छैक। अंग्रेजी भाषा सेहो कतेक रूप मे बाजल आ लीखल जाइत अछि। स्वयं इंग्लैंडक विभिन्न प्रान्तमे विभिन्न प्रकारसँ अंग्रेजी व्यवहृत होइत अछि। परन्तु आर.पी. साउन्डक खास आ विशेष महत्व छैक ने। अमेरिकन आ आस्ट्रेलियन अंग्रेजीक त' बाते छोड़ू। तहिना मैथिली भाषा विभिन्न क्षेत्र मे विभिन्न रूप मे लीखल आ बाजल जाइत छैक। मुदा छैक त' सब मैथिलीए। कनेक मेहनत कयलासँ लोक स्तरीयता प्राप्त क' सकैत छथि।

हुनक निबन्ध सभ एकपर एक उपरि-जुपरि छनि। सब ओहने व्यापक आ श्रम-साध्य। तैं हम दृष्टान्त स्वरूप हुनक एकमात्र निबन्धक चर्च करय चाहब, मुदा हमरा डर अछि जे हुनक अधिकांश कथ्यकेँ यथावत-यथारूप नहि राखि हम नहि रहि सकैत छी। तकर कारण आशय पूर्ण रूपसँ स्पष्ट परिलक्षित करबाक समस्या। एखन हुनक महत्वपूर्ण कृति "मैथिली आलेख सञ्चयन" भाग दू हमरा हाथ मे अछि। हमरा कहबाक अछि एहिमे प्रयुक्त दोसर निबन्ध नेपालक भाषा नीति आ मैथिली (p.19) मादे।

2. दुर्लभ जनतब

नेपालमे ई. 1950सँ ई. 1990 धरि पंचायती व्यवस्था कालखंडमे शिक्षा आ भाषा प्रति तत्कालीन सरकारक केहेन संकीर्ण आ हास्यास्पद नीति छलैक तकर किछु दुर्लभ जनतब एहि आलेखमे एना भेटैत अछि। ओकर नीति छलैक-एउटै भाषा, एउटै भेष, एउटै धर्म, एउटै देश। एउटै अर्थात एकेटा। आब अर्थ स्पष्ट अछि। शिक्षा तहिआ किछु खास व्यक्तिक हेतु मात्र आवश्यक बूझल जाइत छलैक। देखल जाय- "Education was discouraged, even prohibited except for sons of the government officials. (Hugh B. Wood 1958: 429)"

आब भाषाप्रतिक सरकारी रबैया तत्कालीन नेपालक सरकारकेँ प्रस्तुत Education in Nepal: Report on the Nepal National Education Planning Commission (NNEPC) प्रतिवेदनक किछु मुख्य बूंदापर ध्यान देल जाए- "Local dialects and tongues, other than standard Nepali, should be vanished from the school and playground as early as possible in the life of the child. (NNEPC, p. 92)"

"If the younger generation is taught to use Nepali as the basic language, then other languages will gradually disappear, and greater national strength and unity will result. (NNEPC, p. 93)"

आब एहिपर विद्वान डा. रामावतार यादवक स्पष्ट, दू टूक प्रतिक्रिया देखल जाय- "ई प्रतिवेदन नेपाली-इतर भाषा सभकेँ नेपाल राष्ट्रक अमूल्य धरोहर (Language-as-Resource) नहि मानि एक गोट समस्या अर्थात (Language-as-Problem) बूझि अल्पमत भाषिक अधिकारकेँ (Language-as-Right) न्यून प्राक्कलन करबाक दोषक भागी अछि।"

3. सकारात्मक भाव / आशावादिता

ओना आब स्थिति बदललैक अछि। वर्तमान मे नेपालमे मैथिलीक गरिमाक चर्च करैत हुनक स्वर मे आशावादिताक झलक भेटैत अछि- "मैथिली नेपालक दोसर सर्वाधिक बाजए जाए वाला एक गोट समृद्धिशाली ओ प्राचीन भाषा अछि। ई भाषा नेपालमे प्राथमिकसँ लए विश्वविद्यालय स्तर धरि पढाओल जाइत अछि। नेपाल सरकारक सञ्चार माध्यममे एहि भाषामे समाचार वाचन सेहो होइत अछि। वस्तुत: सम्पूर्ण आर्यभाषा मध्य मराठीकेँ छोडि मैथिली सर्वाधिक पुरान भाषा अछि। बेसी नहि त' कम स' कम 12 सय बर्ष पूर्वहिसँ एहि भाषाक लिखित साहित्य एखनहुँ अक्षुण्ण अछि। आ, नवम शताब्दीसँ लए अठारहम शताब्दी धरिक मैथिली भाषाक हस्तलिखित पाण्डुलिपिसभ अद्यतन नेपालक राष्ट्रिय अभिलेखालयमे संगृहीत एवम् अनुरक्षित अछि। ई सर्वविदित अछि जे एतहिसँ पाण्डुलिपि सभक छायाप्रति ल' जाए कए भारतीय, जर्मन, अङरेज, फ्रेन्च, तथा इटालियन विद्वान सभ विश्वप्रसिद्ध भेल छथि।"

4. उपसंहार / निष्कर्ष

मैथिली भाषाकेँ नेपालक मधेस-प्रदेशमे सरकारी कामकाजक भाषा बनाओल जयबाक जे चर्च चलि रहल अछि ताहि मादे ओ कहैत छथि जे ताहि उत्तरदायित्वक सफल निर्वाह एवम् कार्यान्वयनक हेतु मैथिली विद्यमान स्थितिमे पूर्वरूपेण अशक्त अछि, असक्षम अछि। हुनक कहब छनि जे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वन, मत्स्यपालन, विज्ञान, प्रविधि, वाणिज्य, कानून, प्रशासन, व्यवस्थापन, वातावरण, ऊर्जा, कम्प्यूटर, संचार आदि अनेक क्षेत्रमे विभिन्न स्तरक मैथिलीमे प्रवीण दक्ष जनशक्तिक आवश्यकता एकाएक मुह बाबि क' ठाढ भ' जाएत। तैं ओ मैथिली अनुरागीजनसँ आग्रह करैत छथि जे ओलोकनि एहि मादे गम्भीर चिन्तन-मनन करथि एवम् एहि पुनीत कार्य दिस प्रवृत भए दत्तचित्तसँ आगाँ बढ़थि। हुनक गम्भीर चिन्ता आ सुझाव हुनके मुहे सुनल जाए-"अन्तत:, हम नवतुरक जिज्ञासु मैथिली अनुरागी तथा अनुसन्थित्सु युवक-युवतीसँ विनम्र अनुरोध कर' चाहब जे ओलोकनि मैथिली भाषा-साहित्यक गम्भीर अध्ययन-अनुसन्धान दिसि उन्मुख होथि, उत्प्रेरित होथि। हम स्पष्ट रूपेण देखि रहल छी जे मैथिली  भाषा-साहित्यक विविध क्षेत्र मे अनुसन्धानक जे उच्च मानक स्तर अद्यावधि स्थापित भ' चुकल अछि तकर कुशल संवाहक भए ताहि स्तरीय कार्यकेँ निरन्तरता प्रदान करबाक हेतु नव पीढीक लोक ने त' तत्पर छथि आ ने प्रवीण प्रतीत होइत छथि। सम्भवत: आजुक प्रतिस्पर्धापूर्ण वैश्विकरणक युगमे हुनका ई काज निष्प्रयोजनीय बुझना जाइत छैन्हि। हमरा जनितेँ ई एकगोट चिन्ताक विषय थिक। आ, जनकपुर तथा लग-पासक क्षेत्रमे मैथिलीक प्रयोक्ता वा कहू जे उपभोक्ता लोकनि विभिन्न व्यापारिक प्रयोजनवशात् सञ्चार माध्यममे एहि भाषाक जाहि स्वरूपक प्रयोग वा कहु जे कुप्रयोग करैत छथि से त' गम्भीर चिन्ताक विषय अछिए।" डा. यादव सन निर्भीक आ स्पष्टवक्ता भेटब कठिन। आ की नहि ?

5. लाम सन्दर्भ सूची

कोनो आलेख तैयार करबासँ पहिने डा. यादव कतेक किताब सभक, पत्र-पत्रिकादिक संगोर करैत छथि से प्रत्येक आलेखक अन्तमे देखल जा सकैए। ओ आवश्यकतानुसार विदेशी मित्र लोकनिसँ सेहो सन्दर्भ-सामग्री सभ उपलब्ध कएल करैत रहैत छथि। जेना उपर्युक्त आलेखमे तेरहटा अंग्रेजी किताबक आ चारिटा मैथिली किताबक उल्लेख अछि। एहि मैथिली आलेख सञ्चयन भाग दूमे पहिल आलेखमे सोलहटा, दोसरमे सत्रहटा, तेसरमे सत्रहटा, चारिममे पैंतीसटा, पाचममे छब्बीसटा, छठममे बाइसटा, सातममे उन्नहत्तरिटा, आठममे चौंतीसटा, नवममे सैंतिसटा सन्दर्भ सूचीक उल्लेख अछि। एहि समुद्रमेसँ कोनाक' ओ आवश्यकतानुसार छोटका आ बड़का माछ ऊपर करैत छथि से ओएह जानथि। परन्तु ई सहज बोधगम्य अछि जे बहुत समय लगा', बहुत श्रमपूर्बक अपन कार्यसम्पादन करैत होएताह।

डा. रामावतार यादव एकटा अति विशिष्ट भाषावैज्ञानिक, अन्तर्राष्ट्रिय ख्यातिप्राप्त प्राध्यापक, विरल निबन्धकार, कुशल प्रशासक त' छथिहे, ओ व्यक्तिगत, पारिवारिक आ सामाजिक जीवनमे जाहि मूल्यबोध आ शालीन व्यवहारक परिचय दैत रहैत छथि तकर शब्दश: वर्णन हमरा कठिन बुझा रहल अछि। हम हुनक विशिष्ट, बहुमुखी आ व्यावहारिक ज्ञानसँ अभिप्रेरित आ अनुप्राणित होइत रहैत छी। ओ बिरासी बर्षक छथि। ओ दुनू पारक नवका पीढीक किछु रचनाकारक प्रतिभासँ आशान्वित छथि आ चाहैत छथि जे ओलोकनि आर अध्ययनशील भए, विशेष समर्पणभावसँ अपन रचनाशीलताक परिचय देथि। हम सेहो हुनक आशय पर जोर दैत  बैद्यनाथ मिश्र यात्रीजीक किछु शब्द "नवतुरिया आगाँ आबथु आब" सापटी लए अपन कथ्यकेँ विराम देबए चाहैत छी।

 

संपादकीय टिप्पणी- एहि आलेखमे रामावतारजीसँ संबंधित किछु सूची जेना कि हुनक शैक्षिक, प्रशासनिक आ कृति केर छल जकरा दोहरावसँ बचेबाक लेल रामावतारजीक परिचय बला खंडमे समाहित कऽ लेल गेल अछि।

 

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