प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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मानेश्वर मनुज

जे अहाँ/ लोक बानी

जे अहाँ

आजुक राति

अहाँक याद मे
डुबल रहलौं
अखबार में
एक नाम देखलौं
आहलाद सँ सबकिछु
जानक कोशिश करऽ लगलौं
एक आखर पर जा नजरि अटकि गेल
होरीक लगातिक बात छल ओ

विश्वास भऽ गेल
ओ रंगक बात अहाँक अनुपस्थिति मे
कोनो यात्राक प्रसंग नहि छल
ओतँ अहाँक एहि दुनिया सँ
अंतिम यात्राक छल।

1971 सँ लऽकऽ जून एखन तक
सब बात अहाँक प्रसंग
दृष्टिपटल पर नचैत छल
भलेही अहाँ केँ देखैत नहि छलौं
प्रतिदिन ...
मुदा याद तँ अहाँकेँ
सब दिन करैत छलहुँ।

पहिल बेर
अहाँक मूर्ति देवाल पर
छायाक रूप मे देखने छलौं
कामाख्या मंदिरक दृश्य ...
तकर बाद तँ सब बातक
व्याख्या होबऽ लागल छल
अहाँक विषय
जीवन जीवक विषय

अहाँक परिवार मे तँ आरो लोक छलै
अहाँक दियादनी बड़का बाबूक कनियाँ
अमीन साहबक कनियाँ
बौआसीन, बौआजीक बहिन
मुदा बड़ चटगर बात सब
कहैत छल अहाँक प्रसंग
आ अहाँक ननदिक प्रसंग
दाईजीक कानक प्रसंग
सिकिन सुन्दरिक असहमति
अपने वरक संग सुतक प्रसंग
अहाँक परिसरक किछु लोक ...

अहाँ अगना मे
गप्प - सप्प करै छलौं
अपनो विषय ...
एक घाट मे बाघ
आ बकरीक प्रसंग
वियाहक पूर्व लत्ती जकाँ अहाँ
चतरैत छलौं
मुदा बियाहक बाद
हरकि गेलौं
जेना गाछ - वृक्ष हरकि जाइत छैक
सासुर आबि
ननदि आ पितियौत दियोरक
प्रेमलीला ...
सब दिन चलैत छलै
रजनी ताहि दिन रजनिए छल
ननदि छोड़ि रजनी
अहीँक देह दृष्टि देख
अहीँ दिस मुड़ल ...
प्रेमलीला अहिँक छल
वा अहाँक संग बलजोरी
लीला दिनों मे ठाढ़ भऽ जाइत छल

बुधना करैत छल बात ...
बड़ चटकार सँ कहैत छल
कोतरा सेहो कहैत छल ...
आपसी झगड़ा - झंझटक विषय
कान पकड़ि, उठबैत, बैसबैत छलयनि अहाँ
कुमार नम्बरदार केँ
जिनका नामक संग लागल छलनि, कान्त
मुदा रजनी पर नजरि
अहाँक देखने छलहुँ, डम्हायल सन, हमहूँ

अहाँ हमरो नजरि देख
कहैत छलियै आंगन मे
जे हम नै छी कुमारबार
अहाँक मोने हम अंतर्यामी छलौं
सब बात सबहक जानि जाइत छलौं
की ई बिनु अनुभव सँ संभव छलै घ्

सत्त तँ ई छल जे
रसोइघरक देवाल पर ठाढ़ भऽ
अहाँक स्त्री - रूप देखने छलौं
छाया मे अंग - प्रत्यंग देखने छलौं
किन्तु ओ बात तँ छल
कल्पनाक बात !

सब दिन अहाँ
हमरा दऽ बजैत छलौं, किछु ने किछु
अपनो दऽ अंगना मे
सुदामा सँ कहैत छलियै अहाँ
ओ सब बात हम सुनैत छलौं
बाहर दरवज्जा सँ
व्याख्या आ विवेचनाक
कोनो प्रयोजन नहि छल

अपना बेटा सँ चोरा कऽ
हमरा कान मे कहने छलौं अहाँ किछु
जे अहाँक भेल छल अॅपरेशन
आब फेर सँ नहि बनि सकैत छलहुँ
अरो बच्चाक माय अहाँ
नहूँ - नहूँ बाजब
नहूँ - नहूँ खाएब अहीं हमरा
सिखौने छलहुँ
मुदा हमरा नाम केँ दुसने छलौं
एहन कतौ नाम भेलैआ घ्
वर्तमान सँ अधिक सुन्दर भविष्य छल
अहाँक नजरि पर, तेँ
परिवर्तन आ संशोधनक बात छल
अहाँक मोन मे
हमरा अप्पन एक सुन्दर नाम
राखक चाही, की ई बूढ़सन घ्
निश्चिते अपना मोन मे अहाँ
हमर एक सुन्दर नाम
हमरा चेहराक संग गढ़ैत छलौं
अपना मोन मे !

कल्पना जे छल अपूर्ण
तकरा पूर्ण करऽ चाहैत छलौं
हम जाइत छलौं बेर - बेर गाम
अहाँके होइत छल जेना
अहाँ अधिकार सँ बंचित भऽ रहल छलौं

जे बात सोचैत छलहुँ अहाँ
ओ हमरा सँ पुष्पा आ कामिनी
संग किशोर आ कमल सेहो
कहैत अबैत छल
जे हमर बियाह भऽ गेल अछि
से सब बात अहिंक मुँह सँ सुनि
ओ सब कहैत छल
तैओ अहाँ कहैत छलियै, दूनू ...
पुष्पा आ कामिनी सँ जे
तोहर दूनूक बियाह करा देबौ
हमरा लेल एक गढ़ल नव आ
सुन्दर नाम सँ ;हमरद्ध ३

अहाँक मोन मे हम अहाँक छलौं
वा छलौं पुष्पा ओ कामिनीक
मुदा छलौं जरूर
ओ तँ अछि आन बात
जखन घिचैत छलाह ओ
अहाँकेँ अन्हार घर मे मदिरा पीबि
पल्ला केवाड़क दुनू फुजले छलै
आ अहाँ पल्ला भिरबक प्रयास करैत छलौं
बात व्यर्थ हमरा सँ छिपबैत छलहुँ
जखन हम बरंडा बैस भोजन करैत छलौं
लजाइत, लजाइत पुछैत छलौं ...
किछु चाहबो करी घ्
हम अहाँक मोनक बात जनैत छलहुँ
हम कहि दैत छलौं
अहिक मोनक बात ... नै !
अहाँक मोन हर्षित भऽ जाइत छल
हाँ कहि दीतहुँ
तँ की अहाँ थमि जैतहुँ घ्
वा ओ घिचनाई छोड़ि दितथि
अहाँक बाँहि, अन्हार दिस धीचऽ सँ घ्
भऽ जाइत हास्य बड़का ठाढ़
अहाँ तकैत छलहुँ साकांक्ष
हमरा नजरि दिस
जे की अछि हमरा नजरि पर घ्
वैह तँ बात छल हमरा नजरि पर
जे बात छल अहाँक नजरि पर
हम जखन कऽ लैत छलौं
अप्पन नजरि निच्चा
अहाँ केँ स्वतन्त्र छोड़ि देबऽ लाश्
कारण ओ छल
जीवन जीवक एक सुनर समय

जतेक जे अहाँक विषय
हम जनैत छलहुँ
ताहि सँ बेसी अहाँ
हमरा दऽ जनैत छलहुँ
आ जतेक जे अहाँ हमरा दऽ
सोचैत छलहुँ
ताही सँ बेसी हम अहाँ दऽ
सोचैत छलहुँ !

जानक बाते की होइत छैक जीवन मे घ्
दू रोटी ठोकब
खायब आ खुआयब
किछु नोन अनोन रोटी खायब
किछु नोन अनोन
जीवन जीयब !

जीवन मे प्यार
करैत अछि केओ
मेरिनड्राइव आ चौपाटी पर
दिनादानिस
तँ केओ करैत अछि
अन्हारो घर मे चोरा कऽ
चोर जकाँ केवाड़ भिरा कऽ।
अहाँ देखैत छलौं जे
हमरा देहक हड्डी झलकि रहल छल
बजैत छलहुँ ...
जहिना छलौं, तहिना छी
कनिको देह पर
मांस नहि आएलाश्

बच्चा जन्म देवऽ काल
जनानीक देहक सम्पूर्ण हड्डी केँ
तोड़ि देबऽ सन दर्द होइत छैक
मुदा अहाँक मोन मे
आर बच्चा जनमाबक बात छल
कहैत छलियै दुपहरियामे
भोजन - साजन केलाक बाद
आब हम जन्माब छोड़ि देलौंहाँ
नै तँ हम आरो नै जन्मलितहुँ
ताहि बातक अपसोच छल अहाँक मोन मे
अॅपरेशन भेलाक बादो !
ओ बात अहाँ चोरा कऽ रखने छलौं
अपना मोन मे।
ओ बात हमहूँ देवालक ओइ पार सँ
सुनैत छलहुँ
अहाँ बजैत छलहुँ जे ...
अहाँ जन्माब बन्द कऽ देने छी
ई नै बजैत छलहुँ जे ...
ई अधिकार अहाँ सँ छीन लेल गेल अछि
हम भल मानुष
की अहाँ मनुषी
भावना तँ देह मे
समाने रूप सँ उठैत छैक
दवाओ कऽ रखबै तैओ
कोनो ने कोनो रूप मे
भावनाक धुँआँ तँ उठिते छैक
अपना मोनक बात केँ दबा
अहाँ कामिनी आ पुष्पा सँ कहैत छलियै
तोहर सबहक बियाह करा हुनका ;हमराद्ध सँ
भऽ जायब हम निश्चिन्त
कामिनी छल भऽ गेल बियाह जोगरक
ताहि दिन कम्मे उमेर मे
कऽ देल जाइत छलै बियाह
पुछनहो छलथि अहाँक वर हमरा सँ
केहन अछि अहाँक घर - द्वार
मुदा ई सब बात अछि पुरान
हालहि मे अहाँ सँ भेंट कयने छलौं
बिसरि गेल छलौं अहाँक नाम
पुछने छलहुँ अहाँ सँ तऽ
अहाँ कहने छलहुँ, सबिता
शाइत अहाँ बिसरि गेल छलहुँ
अपनो नाम सासुर मे
कारण सासुर मे बेटाक मायक
नामे अहाँ के सोर पाड़ैत छल सब
हमरा जनैत अहाँक नाम तँ छल
उमा, कात्यायनी, गौरी, काली सन किछु
मुदा पुछलो पर अहाँ चोरा लेने छलहुँ
अप्पन नाम आ कहि देने छलहुँ
कोनो नवतुरक नाम
बहुत दिन तक अपनो नामक
उच्चारण नै केने
अवश्ये अपनो नाम बिसरा जाइ छै
आ अपना नाम सँ बेसी
पूतहुक नाम मोन मे रहै छै
जकरा पर आस लगा बैसल जाइ छै
दऽ देबक जन्म संतानक !
कतेको प्रसिद्ध लेखकक
पढ़ि चुकल छी कतेको कथा
सहयोग प्राप्त करक पड़ोस सँ
जखन नै छलै सरोगेटक
कोनो व्यवस्था !
मधुश्रावणिक कथा मे
गौरी दाइक बात
गौरी दाई खेलाड़ि
गौरी दाइक भागिन
गौरी दाइक ननदोइस
गौरी दाइक ननदि
अहाँ जकरा जे कहैत छलियै
हँस्सी मे बियाहक बात
ओ सत्य जानि
गीरह बान्हि लेने छल
हास्य रस मे हमरे सँ पुछला पर
ओ सब बात उगलि देने छल
जे ओ मोन मे रखने छल
ओ छल अत्यन्त आकर्षित
मुदा हम नै जुटा पौने छलहुँ
किछु आगाँ बढ़ि प्रस्ताव राखक
जखन ओ स्वयं चलि गेल छल
अन्हार घर मे हमरा सामने
द्वारि फोलि बाँहि पसारने

बात बहुत आगाँ बढ़ि गेलै
समय की आदमीकेँ दोसर मौका दै छै घ्
ओ अप्पन अलग घर बसौलक
ओ दू बच्चाक जन्म देलाक बाद
ओ एतेक तँ साहस कयने छल
दुनू सँ पैर हमर छुऔने छल
अपनो घरक कोनटा सँ निकलि
पैर छू हमर स्पर्श कयने छल
हम सुनने छलौ अहाँक कुमार केँ
कहैत छलै किओ ...
तोँ लऽ लेलाँ, तूँ कऽ लेलाँ
सोझ संबोधन बड़ आकर्षित करै छै
दूर - दराज सँ
जेँ केओ ककरो मैसेस मे कहै छै
वा कहै छै फोन पर ठाहि - पठाहि
हम जनैत छलौं
ओ हमरो सँ करऽ चाहैत छल
बहुत रास बात
मुदा हम लजाइत छलहुँ
ओ नहूँ - नहूँ कतराइत छलहुँ
जहिना हम कोनो बातक
कोनो जवाब नै दै छलियै

अहाँ अपने मोन केँ
अनका मोन मे लऽ गेल छलै
आ घुमा - घुमा कऽ सब बात
करैत छलहुँ
जीवन आ जगत मे उपस्थितिक
यैह रहि जाइत छैक इपिटाफ
जे अहाँ, अहींटा छी !

लोक बानी

साहित्य के क्लासिक्स बनवक लोभ मे
कहीं लोक बानी ने मरि जाश्। लोकबानी
मरि जाश्त तऽ लोको मरि जाश्त आ
जँ लोके मरि जाश्त तऽ साहित्ये मरि जाश्त
संसार सिकुड़ि रहल अइ।
उपन्यास कथा मे आ कथा लघुकथा मे
समटि रहलाश्। महाकाव्य काव्य मे
आ काव्य चुटकुला अंत्याक्षरी मे।
गुणवत्ता के त्यागि संपादक अप्पन
सामर्थ्यक अनुसार शब्द संख्याक मांग
करैत छथि, कारण शेष पृष्ठ पर सामग्री
समाहित होबक रहै छै

हमर ई भावात्मक कविता जानि - बुझि
कऽ एक नमहर आकार अख्तियार कश्ने अइ। मोन भरि भोजन आ मोन भरि
पठन - पाठनक आकाँक्षा अइ।
बड़ नीक लगैत अइ जखन कोनो आभा
मद्रास सऽ कोनो सुशान्तक फेसबुक पर
कॉमेन्ट करै छै?- सुशांत ई उपनाश्न ककर
भऽ रहल छै, तोहर तऽ भऽ गेलौ घ् तूँ अन - मन
बाबुए पर गेल छाँ।

दूर - दराज सऽ संवादक ई भाषा अपनापनक
कतेक एहसास करबैत छै घ् ई सम्पूर्ण अर्थक संग
दिमाग पर प्रहार करै छै। प्रतिविम्वक बोछार करै छै।

पता:-मानेश्वर मनुज
, आदर्श नगर कॉलोनी, गौशाल रोड, मधुबनी - 847211






 

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