प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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उदयनारायण सिंह 'नचिकेता'-संपर्क-9434050218

रामावतार यादव जी-जेना हम हुनका चिन्हने छलियनि

रामावतार यादव जी सँ पहिल साक्षात् भेल छल 1978 मे जखन हम इलिनॉय विश्वविद्यालय मे एक सेमेस्टर लेल लिंगविस्टिक इंस्टिट्यूट प्रोग्राम मे शोधरत छात्र के रूप मे गेल रही। हमरो शोध-कार्य अंतिम चरण मे छल दिल्ली विश्वविद्यालय के भाषाविज्ञान विभाग मे आ' हुनको थीसिस लगभग समाप्ति के सूचना दैत छल। ता धरि ओ एम.फील. त कैये नेने छला मुदा तखन केंसास विश्वविद्यालय के लॉरेंस कैंपस सँ ओ डॉक्टरेट डिग्री के अंतिम चरण मे छला। हम बहुत आश्चर्य चकित भेल छलहुँ अहू लेल जे जखन भारतो मे साधारणतया क्यो प्रायोगिक ध्वनिविज्ञान पर चर्चा नहि क' रहल छल, तखन केंसास के जर्नल मे हुनकर महत्वपूर्ण निबंध, 'A Fiberoptic Study Of Stop Production In Maithili' छपि चुकल छल 'केंसास वर्किंग पेपर्स इन लिंग्विस्टिक्स' के चारिम वॉल्यूम में - जतय वर्णन छलै एहि तरहक: "A fiber optic study was made to investigate the temporal course and width of the glottis during the production of four types of Maithili stops in initial, medial and final positions. The results show that the voiced-voiceless distinction correlates with the adduction-abduction gesture of the larynx. The study also suggests that glottal width is the key factor for aspiration and that sounds which are produced by a combination of vibrating vocal cords and aspiration should, in fact, be called 'voiced aspirated' consonants."

हमर ज्ञानतः मैथिली कियैक, हिन्दियो मे भरिसक एहन अध्ययन क्यो नहि क' रहल छल। हँ, ई बात अवश्ये कहब जे आगाँ चलि कय श्रद्धेय डॉ सुभद्र झा जी के सुपुत्र डॉ प्रभाकर झा पेरिस मे एही तरहक काज कयने छला - सोरबोन में कैल डॉ मुनीश्वर झा के मैथिली कें आर आगाँ बढ़बैत। मुदा जे बुझलहुँ (बुझबा मे दिक्कत त छलैहे कियैक त हमर विषय छलै अन्वय अर्थात सिन्टैक्स आ' समाज-भाषा-विज्ञान। तखन हम त चौंकबे करब। भेंट करबाक इच्छा छलै - मुदा हम क' रहल छलहुँ एडवांस्ड कोर्स यहां सब विषय मे - बर्नार्ड कॉमरी के 'भाषाजगतक सार्वभौमता' (Language Universals), जॉर्जिया ग्रीन के 'भाषा-व्यवहार-विज्ञान' (Pragmatics), जेर्री सैडॉक के 'भाषाविज्ञानक तर्कप्रणाली' (Linguistic Argumentation) ' विश्वख्यात पाणिनीय विशेषज्ञ जॉर्ज कार्डोना के 'इंडियन ग्रामेटिकल ट्रेडिशन' - मुदा ओ त ओझरल छला निरीक्षामूलक ध्वनिशास्त्रक अत्याधुनिक प्रयुक्ति के क्षेत्र मे। पहिल दर्शने आर चमत्कृत क' देबय बाला छल - हमरा ज्ञानतः एहन कोनो मैथिली के विद्वान नहि छथि जे हिनका सँ बेसी प्रभावी ढंग सँ अंग्रेजी तथा जर्मन मे अपन बात कें अंतर्राष्ट्रीय फोरम मे राखि सकै छथि। तहिये सँ हम हिनकर क्रियाकर्म कें नीक जकाँ देखैत पढ़ैत बुझैत रहलहुँ।

रामावतार जी अध्यापक के रूप मे प्रसिद्ध अंग्रेजी भाषा आ साहित्य के जानकार छला - त्रिभुवन विश्वविद्यालय आ पाटन कॉलेज मे पढ़ौने छलथि। मुदा केंसास विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण हुनका दक्षिण एशियाई देश सभक प्रमुख ध्वनि-विज्ञानी बना देलकनि। मुदा हिनक विशिष्टता ईहो जे ओ मात्र नीरस भाषाचार्य नहि छला, साहित्यो के क्षेत्र मे ओ एकटा प्रतिष्ठित नाम छथि। अन्ततः पूर्वांचल विश्वविद्यालयक कुलपति सेहो नियुक्त भेला। हुनक मूल पोथी जे हुनका ख्यातिक शीर्ष पर ल' गेलनि, से छल: जर्मनी के श्रेष्ठ प्रकाशन De Gruyter Mouton संस्था द्वारा छपल A Reference Grammar of Maithili (1996) ' ताहू सँ पहिने Selden and Tamm प्रकाशन संस्था सँ छपल Maithili Phonetics and Phonology (1984)। देश-विदेशक भाषाविज्ञान सम्बन्धी पत्र-पत्रिका मे पचासो आलेखक प्रकाशन द्वारा ओ मैथिलीक विशिष्टताकेँ उजागर केलनि। मैथिली ध्वनिशास्त्र आ मैथिलीक संदर्भ व्याकरण 1पर काजक अलाबे 2000 . मे लंदनसँ प्रकाशित भारतीय आर्यभाषा पुस्तक मे संकलित हिनकर मैथिली भाषा संबंधी आलेख विशेष उल्लेखनीय छलनि। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानसँ पासाङ ल्हामु प्रज्ञा-पुरस्कारसँ सम्मानित भेल छला।

एहि बीच मे रामावतार जी कतेको महत्वपूर्ण बात सब कहलनि जकरा दिसि हम सभक ध्यान आकृष्ट करय चाहब। मैथिली भाषा-भाषी पर आयोजित तीन दिवसीय मिथिला कला साहित्य आ फिल्म महोत्सव 28 दिसम्बर 2018 मे ओ सहरसा के रमेश चन्द्र झा महिला कॉलेज सभागारमे कहने छला जे मैथिली भाषामे प्राथमिक शिक्षा भेनाई बहुत जरूरी अछि। मिथिला मिरर मे एकर नीक विवरण हमसब पढ़नहि छी। समारोहकेँ संबोधित करैत भाषावैज्ञानिक के रूप मे डा. रामावतार कहने छला जे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मैथिली भाषाक व्यापक स्तर पर प्रसिद्वि अछि। मुदा अपने घरमे माने अपने भूभागमे मैथिलीक स्थिति कमजोर भ' गेल अछि। हुनकर कहब छलनि जे हमसभ अपन भाषाक प्रयोग कम आ दोसर भाषाक प्रयोग बेसी करैत छी। एहन स्थितिमे प्राथमिक शिक्षामे मैथिली भाषाकेँ शामिल केनाय बहुत जरूरी भ गेल अछि। एहि पर हमरा सब कें गहन चिंतन करबाक जरूरी अछि आ' संगहि मैथिली भाषाकेँ अपन दैनिक जिनगीक व्यवहारमे आनयके नितांत आवश्यक अछि। हुनकर कहबाक तात्पर्य छलनि जे साहित्यक-सांस्कृतिक गतिविधि होइत रहै' ' एहन तरहक आयोजनसँ भाषाक पकड़ मजबूत होयत। मैथिली भाषा हमर अपन भाषा अछि आ हमरा सभकेँ एहि पर गर्व होयवाक चाही। एम्हर 2021 के दैनिक भास्कर रिपोर्ट कैलक जे रामावतार जी कहलनि जे मैथिली भाषा माध्यम सँ नेपाल में राजकाज क शुरुआती प्रक्रिया के शुभारम्भ भ' गेल। बिहार सरकार तथा मिथिलांचल पछुआ रही सकैत अछि मुदा नेपाल तीव्र गतिएँ आगा बढ़ि रहल अछि। दड़िभंगा के महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय के प्रमुख डॉ. शिव कुमार मिश्र के कहब छनि जे प्रो. रामावतार यादव सँ हुनका ई जानकारी भेंटल छनि जे लैंग्वेज कमीशन आफ नेपाल तकर अनुशंसा क' देने अछि जे नेपालक दूटा प्रदेश मे राजकाज केर भाषा के रूप मे मैथिली आ' भोजपुरीक प्रयोग शीघ्र हैत। धरती पर भरिसक पहिल बेरि कोनो सरकार एकर प्रक्रिया प्रारंभ क' रहल अछि। सभक कहब छलनि जे भरसक एकर सकारात्मक प्रभाव बिहार सरकार पर सेहो पड़ि सकैत अछि। मैथिली साहित्य संस्थान क सचिव भैरव लाल दास क कहब छलनि जे नेपाल मे जाहि तरहक निर्णय लेल गेल अछि, ताहि सँ ईहो भ' सकैछ जे आब भारत सरकार सेहो मैथिली कें शास्त्रीय भाषा के दर्जा देबय मे राजी भ' जाओत।

 2019 मे कोरोना सँ पहिने रामावतार जी के आर एकटा वक्तव्य हमसब सुनने छी। रमेश झा महिला महाविद्यालय मे आयोजित कला साहित्य तथा फिल्म महोत्सव मे 2018 के दिवंगत मैथिली साहित्यिक प्रतिभा - प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन, मोहन भारद्वाज, डा.प्रेमशंकर सिंह, आदि कें श्रद्धांजलि अर्पित करैत ओ कहलनि जे ज्यों आम आदमी जेना मैथिली भाषा बाजल जाइत अछि तहिना ओ बाजैत आ' लिखैत रहता तखन मैथिली नहीं मरती - हमर धरोहर विलुप्त नहि हैत। अपन रेफेरेंस ग्रामर मे यादव जी बड़ स्पष्ट रूप सँ जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सनक ओहि बात कें दोहराइने छथि जतय ओ मैथिली भाषा आ' साहित्यक गहन अध्ययनक बाद ओ उल्लेख करैत छथि: “…Maithili is a language and not a dialect. It is the custom to look upon it as an uncouth dialect of untaught villagers, but it is in reality the native language… of (millions of ) people … who can neither speak nor understand either Hindi or Urdu without greatest difficulty…”

Alexander von Humboldt Foundation मे हुनकर जे गरिमामय शोध-समय बीतलनि ओतय यूरप के श्रेष्ठ भाषाविद लोकनि के साथ ओ काज कयने छला - कय गोटे मैथिल से जानै छथि? माइन्ज़ के प्रख्यात Institut für Indologie, जे कि Johannes Gutenberg-Universität Mainz मे छै, ओतहुका विद्वान् Prof. Georg Buddruss के संग ओ काज कयने छला, संगहि भारत अध्ययनक एकटा प्रमुख केंद्र किएल क Seminar für Allgemeine und Indogermanische Sprachwissenschaft, जे कि ओतहुका Christian-Albrechts-Universität zu Kiel के अंतर्गत अछि, ओतहु ओ छला। ओत्त' आचार्य वेर्नर विंटर आ' जॉन पेटर्सन के साथ ओ काज कयने छला पोस्ट डाक्टरल के समय। 2018 मे अंग्रेजी साहित्य के क्षेत्र मे प्रकाशित हुनक काज - Elegy written in a Royal Courtyard - A Facsimile Edition of Jagatprakasamalla´s Gitapancaka (जकरा एड्रोइट प्रकाशन छापने छल) सेहो देखबैत अछि जे साहित्यो मे हुनक रूचि छलनि। एम्हर ओ एकटा नव पोथी पर काज क' रहल छथि - a critical edition of an early 18th-century Maithili play मैनुस्क्रिप्ट जे कि भूपतींद्र मल्ल के रचना छलनि, तकरा पर काज क' रहल छथि। भक्तपुर शैली के नेपालमण्डल मे सोडष सदी के मैथिली नाटक के stagecraft केहन होइ छलै तकरो पर ओ काज कयने छथि। नेपाल-प्रांतक इतिहासकार आ भाषा-विद्वान लोकनि क लेल एकटा बुझौअलि जकाँ ई बात काज करैत अछि जे नेपालमंडलक क्षेत्र मे - जतय शासक आ आम जनता नेवारी बजैत छल, ओतय मध्यकाल मे कोना एकटा भारतीय-आर्य भाषा- अपन साहित्यिक अभिव्यक्ति कें प्रतिष्ठित क' पौलक एकटा अत्यंत शक्तिशाली आ मजबूत साधनक रूप मे तकर आविर्भाव भेलै - एहि केर निदानक रूप मे रामावतार जीके नवतम काज मे प्रयास कयल गेल छनि। ईनेपाल-तिरहुत कनेक्शन कोना बनल, आओर भूपतिन्द्र मल्ल (1696-1722) जकाँ मैथिली नाटककार कोना आविर्भूत भेला ई तकरे ऐतिहासिक-राजनीतिक-भाषिक दलील बनि सकत से हम विश्वास करै छी।

अंत मे केहन केहन अपमानजनक परिस्थिति के भीतर सँ मात्र 'मधेशी' हैबाक कारणें एहन महान व्यक्तित्व कें जीवन व्यतीत करय पड़ल छलनि, तकर एकटा मर्मस्पर्शी विवरण पाठक देखि सकैत छथि हुनक दीर्घ निबंध 'ऑन बीइंग मधेशी' मे। जे 'मधेशनामा' मे प्रकाशित भेल छल। दक्षिण एशियाई देशक पुनः पुनः विभाजन सँ कतेको प्रतिभाशाली व्यक्ति कें हम सब मिलि कय दूर किनार क' कय रखने छी से हम अपन बारम्बार बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका तथा पाकिस्तान भ्रमण के माध्यमें देखने छी - अपन कतेको प्रिय अफ़ग़ान छात्र सँ सेहो जानने छी। तैं हमरा प्रसन्नता भेल ई जानि कय जे ई-विदेहक एकटा विशेषांक बहिरा रहल अछि जे कि मित्रवर रामावतार यादव जी जकाँ व्यक्तित्व पर समर्पित अछि।

 

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