
बद्रीनाथ राय अमात्य
हम लिखै छी आँकड़ पाथर
हम लिखै छी आँकड़ पाथर,
पोथी हमरा पुरब' दे।
हम निर्लज कहबैका मैथिल,
मैथिल हमरा कहब' दे।।
बरदोके नञि हजम हेतै ई,
हमर पेटके बढ़ब' दे।
हम मैथिल छी' बबुर गाँछसँ ,
मधुर आमके फरब' दे।।
हम निर्लज.....
छी गदहा घोड़ दौड़ खेलाइ छी,
सब घोड़ाके चरब' दे।
मनक बात हम आइ बजै छी,
बरका हमरा कहब' दे।।
हम निर्लज.......
अन्हरा गामक कनहा हम छी,
डीठरा हमरा कहब' दे।
अपन मुँह तुँ राख यथावत,
हमर मुँह के गढ़ब' दे।।
हम निर्लज.......
केकरो रचना नीक कहाँ छै?
सब रचनाके जरब' दे।
पुरस्कारके भूख बहुत अछि,
भूतके हमरा झरब' दे।।
हम निर्लज........
स्वामीभक्त कुक्कुड़ हम पोसा,
नाङरि हमरा डोलब' दे।
हे रौ अभगला बात बुझ तुँ,
फुसिके हमरा परस' दे।।
हम निर्लज........
छन्द विधानके बुझि करब की?
मुदा मूर्खके पढ़ब' दे।
माटिके कोरब धर्म हमर नञि,
उपरे अल्हुआ फरब' दे।।
हम निर्लज........
मिथिला लेल हम कानि रहल छी,
ओरपानीमे बहब' दे।
ज्येष्ठ श्रेष्ठ हमही मैथिल छी,
पैघ हम छी कहब' दे।।
हम निर्लज......
-बद्रीनाथ राय अमात्य, ग्राम पोस्ट करमौली, भाया कलुआही, जिला मधुबनी बिहार ,फोन 6205190859
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