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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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प्रीति कुमारी बीए. बीएड.

समकालीन भारतीय साहित्य पत्रिका अंक - २४६ वर्ष -४७ ,मास जुलाई -अगस्त २०२६ मादे

साहित्य अकादमीके द्विमासिक पत्रिका हिन्दीमे नियमित रूपेँ प्रकाशित होइत आबि रहल अछि। एहि पत्रिका केँ भारतके चोटिक पत्रिका श्रेणीमे राखि १९८० ई० सँ अनेकों विद्वान सम्पादक लोकनि पाठक बीच निरपेक्ष भाव सँ देखेलाह ।मुदा हालके ऐ पत्रिकामे सम्पादक श्री बलराम जी मो०नं० ९८१०३ ३३९३३ जे पाँच पृष्ठमे 'भारतीय मनुष्य की छवियाँ' शिर्षक सँ सम्पादकीय प्रस्तुत कयलन्हि ,ताहि सँ १० करोड़ मैथिली भाषी बिहारके समाजकेँ घोर निराशा भेलनि अछि। ओ ऐ पत्रिकामे मैथिली उपन्यास'केँ उल्लेख नहिं करैत अनभिज्ञ रहलाह। जहनकि मैथिली उपन्यास'क 1914 सँ अद्यतन सूचि बढ़ पैग अर्थात् २५० सँ लगधक बेसियेक छैक। यथा -:
क्र.उपन्यासक नाओं-प्रकाशन वर्ष-उपन्यासकार
01. निर्दय सासु 1914 जनार्दन झा 'जनसीदन'
02. शशिकला 1915 जनार्दन झा 'जनसीदन'
03. सुमति 1918 रासबिहारी लाल दास
04. कलियुगी संयासी वा ढकोसलानन्द 1921
05. मनुष्यक मोल 1924 भोल झा
06. मिथिला दर्पण 1914 ले. 1925.प्र जनार्दन झा 'जनसीदन'
07-पुनर्विवाह-1926-जनार्दन झा 'जनसीदन'
08-चन्द्रग्रहण-1933-काँचीनाथ झा 'किरण'
09.कन्यादान-1933-प्रो. हरिमोहन झा
10.चामुण्डा-1933-लक्ष्मीपति सिंह
11.अगिलही-1935- कुमार गंगा नन्द सिंह
12.माधवी माधव-1935- हरिनन्दन ठाकुर 'सरोज'
13.सौंदर्योपासनाक पुरस्कार -1938-चौधरी केदार नाथ ठाकुर
14.सुशीला- 1943- गंगापति सिंह
15.द्विरागमण-1943-प्रो. हरिमोहन झा
16.भलमानुस-1944-योगानन्द झा
17.असहाय जाया-1945-ब्रजनन्
18.द्विरागमण रहस्य-1945-46-जनार्दन झा 'जनसीदन
19.पारो-1946-वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री'
20.जयवार-1946-शारदानन्द झा
21.कुमार-1946-उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' 22.वनमानुस-1947-अवध नारायण झा
23.माला- मिथिला मिहिरमे प्र.-कश्यप सुरेन्द्र झा सुमन
24.चन्द्रकला-1950-बद्री नारायण दास
25. प्रतिमा-1950-शैलेन्द्र मोहन झा
26.वीर कन्या-1950-चन्द्र नाथ मिश्र 'अमर'
27.अनल पथ-1954-मणिपद्म
28.नवतुरिया-1954-वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री'
29.मधुश्रावणी-1956-शैलेन्द्र मोहन झा
30.कृष्ण हत्या-1957-गणेश चन्द्र झा
31.रत्नाहार-1957-गणेश चन्द्र झा
32.आन्दोलन-1958-छत्रधारी लाल दास
33.दूर्वाक्षत-1958-तारानाथ कण्ठ
34.आदि कथा-1958-राजकमल
35.चानो दाइ-1959-सोमदेव
36.बिहाड़ि, पात आ पाथर-1960-मायानन्द मिश्र
37.विद्यापति-1960-मणिपद्म
38.विदागरी-1963-चन्द्र नाथ मिश्र 'अमर'
39.ब्रह्मपिशाच-1964-सोमदेव
40.भोरुकबा-1965-धीरेश्वर झा 'धीरेन्द्र'
41.पृथ्वीपुत्र-1965-ललित
42.खोता आ चिड़े-1965-मायानन्द मिश्र
43.पवित्रा-1966-योगानन्द झा
44.अर्द्धनारीश्वर-1966-67- मणिपद्म
45.बिनु मायक बेटी-1967-श्यामा झा
46.बाटक भेंट जीनगीक गेंठ-1967-विन्देश्वर मण्डल ,आदि....….....! मैथिली भाषा सँ हिंदी समेत आनो भाषामे अनुवाद'क पोथीक' एक पैग सूचि हेरबाक आवश्यकता छैक।
श्री बलराम जी भारतीय भाषामे उपन्यास लेखनक विस्तार सँ चर्चा करैत मैथिलीके उपन्यास साहित्य केँ पूर्णतः नजैर अन्दाज करैत जतय ऐ प्रतिष्ठित पत्रिकाक' गरिमा आ विश्वसनीयताक प्रतिकूल रहलैथ, ततय सम्पादकीय दृष्टि आ संतुलन पर सेहो प्रश्नचिन्ह ठाढ़ केयलथि। सुविज्ञ पाठक अवलोकन कयने होयब जे ओ प्रायः २२ गोट भाषामे सँ नऊ- नऊ, दस- दस गोट उपन्यास केँ अपन अधिकतम ज्ञाने चयन कय एहि तरहेँ उल्लेख कयलाह; जेना -: अंग्रेजीक पोथीमे अछूत (मुल्कराज आनंद), द गाइड (आर के नारायण), ट्रेन टू पाकिस्तान (खुशवंत सिंह), ब्लू अम्ब्रेला (रस्किन याॅन्ड), मिड नाईट चिल्ड्रेन(सलमान रूशदी), द गार्ड आॕफ स्मालथिंग्स (अरुंधति रॉय), ए सुटेबल याॕय (बिक्रम सेठ), द हंग्री टाइड (अमिताव घोष), द ह्वाईट टाइगर (अरविंद अडिगा), इन कस्टडी (अनिता देसाई),नारको पाॕलिस (जीत लागल)।
२. उर्दू -: उमराव जान अदा(मिर्ज़ा हादी रुसवा), आजाद कथा (रतननाथ सरशार) , स्वर्ग यात्रा (मौलाना अब्दुल हलीम सरर), आग का दरिया (कुर्रतुल -ऐन-हैदर), बहुत देर कर दी(अलीम मसरुर), लहू के फूल (हया तुल्ला अंसारी), टेढ़ी लकीर (इस्मत चुग़ताई), एवाने गेल(जीलानी बानो), फायर एरिया ( इलियास अहमद गद्दी), कई चाँद थे सरे आसमां (शम्सु र्रहमान फारुकी)।
३. मराठी -: ध्यान कौन देता है (हरि नारायण आप्टे), यात्री(नारायण सीताराम फड़के), ययाति (विष्णु सखाराम खांडेकर), बलि (मालती वेडेकर), रणागन(विश्राम वेडेकर), रथचक्र (श्रीपातु नारायण पेंडसे), मृत्युंजय (शिवाजी सावंत), वारोमास (सदानंद देशमुख), कोसला ( भालचंद्र नेमाड़े), पानीपत (विश्वास पाटिल) ।
एहि तरहेँ पंजाबीके १०, ओड़ियाके ९, बांग्लाके १५, कन्नड़के १९, कश्मिरीके १०, गुजरातीके १५, डोगरीके १०, तमिलके १५, तेलगु के १५, नेपाली केर ९, मलियालमके ९ , राजस्थानी केर १०, सिंधिके १०, संताली के १०, संस्कृत केर १५, हिन्दीके १५ असमिया के १० आदि । मैथिली लेखकीय समाज वर्तमानमे दू हजार लोक सक्रिय छथि। आओर मैथिली सेवी लोकनि,अभियानी लोकनि जे संस्था - समिति गठन कय मातृभाषा मैथिली लेल अहर्निश सेवामे लागल छथि आ पुरस्कार सेहो तैमेसँ किछु लोक पाबि गेल छथि,हुनका लोकनिके मनोदशा सेहो ऐ तरहक उपेक्षा सँ आक्रान्त भ' उठल छन्हि। एतेक निशन्न,
एतेक पुरान मैथिली भाषा केँ जे संविधानके अष्टम अनुसूचिमे मिजहर छैक ,आ साहित्य अकादमी कतेको मैथिलीक उपन्यास केँ सालभरि पर पुरस्कृत कयने छैक ; तकर वादो सम्पादक महोदय हीनभावना रखैत घोर उपेक्षा कयलाह से कतेक उचित?
(नोट- अंक आ अक्षर हिन्दी -अंग्रेजीमे व्यवहारिक रूप सँ चलैछ।आब देवनागरी लिपि चलैनमे आबि गेल अछि,जखनकि मिथिलाक्षर बा तिरहुती अंक आ वर्णकेँ अपन स्वतंत्र अस्तित्व छैक)
 
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।

साहित्य अकादेमीक संकीर्ण मैथिली भाषा विभागसँ विदेह (मैथिली साहित्यक समानान्तर मंच) ऐ अर्थमे सेहो फराक अछि जे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिका सन सहभाषाकेँ संग लऽ कऽ मिथिलाक बोली-वैविध्यक समग्र चित्र देल जाइत अछि। विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक भाषा विज्ञान, रचना आ व्याकरण मैथिलीक संग देल गेल अछि मैथिलीक एकटा समानान्तर व्याकरण, रचना आ भाषा विज्ञान (ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाकेँ संग लऽ कऽ)- गजेन्द्र ठाकुर, संगे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक साहित्य ई-प्रकाशित आ समीक्षित सेहो होइत अछि।– गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक, विदेह ISSN 2229-547X
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