
आचार्य रामानंद मंडल
मातृभाषा बनाम संपर्क भाषा/ दिमागी नक्सली यात्री नागार्जुन
१
मातृभाषा बनाम संपर्क भाषा
मिथिला के लोक मातृभाषा के गंवारपन के निदान के लेल अपन बच्चा के माडर्न स्कूल
वा ईसाई मिशनरी स्कूल मे पढबैय हय।आइयो अपन आर्थिक स्थिति के देखैत स्कूल में
भर्ती करय हय।आइयो मिशनरी स्कूल ग्रैजुएट से कम माता -पिता के संतान के एडमिशन
न लेइ छै। केते मिशनरी स्कूल त अभिभावक के न अंग्रेजी बोल ला पर एडमिशन न लेइ
छै।बच्चा आ शिक्षक के अनिवार्य रूप से अंग्रेजी मे बातचीत करे के लेल मजबूर कैल
जाइ छै ।न त निष्कासित कैल जाइ छै। पहिले सरकारी विद्यालय में छठा वर्ग से
अंग्रेजी के पढाई शुरू होय।आब पहिला वर्ग से अंग्रेजी के पढाई हो रहल हय।आब त
दोसर तरफ भारतीय ज्ञान परम्परा के बात हो रहल हय। प्राथमिक शिक्षा मे मातृभाषा
वा क्षेत्रीय भाषा वा स्थानीय भाषा मे शिक्षा देबे के बात हो रहल हय।
मिथिला मे मैथिली, बज्जिका आ अंगिका में प्राथमिक शिक्षा मे पढाबे के
बात हो रहल हय।आब गाइ चरय हय/छै। आधुनिक युग के केहन पढाई कहल जतय। हिंदी में
गाय चरती है। मैथिली में लिंग न हय। हिंदी अंग्रेजी में लिंग हय। मैथिली के
प्रयोग करे पर हिंदी गड़बड़ और हिंदी के प्रयोग करे पर मैथिली गड़बड़ हो जाइ
छै।बच्चा के कि हालत होतय।
हमरा जनते वो परिवार विकसित मानल जाइ छै।जिनकर बोल चाल के भाषा अंग्रेजी हय।
हिंदी वाला दोयम दर्जा के परिवार विकासशील मानल जाइ छै। केवल मातृभाषा के
प्रयोग करे वाला अविकसित परिवार मानल जाइ छै।
वर्तमान में उच्च शिक्षा के लेल नामी गिरामी वा विदेशी विश्वविद्यालय में
बच्चा शिक्षा के लेल जाइ छै।उंहा अंग्रेजी के बेहतर ज्ञान आवश्यक हय। वर्तमान
में उच्च शिक्षा में मातृभाषा में पुस्तक के अभाव हय। भूमंडलीकरण के दौर में
प्राइवेटेशन के कारण अंग्रेजी के महत्व आउर बढ गेल हय।सभ परीक्षा अंग्रेजी में
हो रहल हय। डायलॉग अंग्रेजी में बढ रहल हय।
अपन सभ्यता, संस्कृति, साहित्य आ मातृभाषा के जीवित रखे के लेल अपन परिवार आ
समाज में बातचीत करैत रहु। साहित्य लिखैत रहु। परंच अपन जीवन के सुखमय करे के
लेल हिंदी आ अंग्रेजी मजबूत कैल जाय।आब भारत के लेल संपर्क भाषा हिंदी आ
अंतरराष्ट्रीय संपर्क भाषा अंग्रेजी के जानकारी आवश्यक हय। संयोग से हिंदी आ
अंग्रेजी राज काज के भाषा सेहो हय।अपन सभ्यता आ संस्कृति संग आकाश के चूमे के
जीजीविषा बनायल राखब।हो सके त मैथिली साहित्य संग हिंदी आ अंग्रेजी साहित्य
रचना करैत रहु।
२
दिमागी नक्सली यात्री नागार्जुन
संत तुलसीदास आ रामचरितमानस के सामाजिक विषमता अर्थात वर्णव्यवस्था यथा पूजिए
विप्र शील गुण हीना। पूजिए न शूद्र गुण ज्ञान परबीना। बंदौउ प्रथम महीसुर चरना।
ढोल गंवार शुद्र पशु नारी।ये सब तारन के अधिकारी आदि पर यात्री नागार्जुन के
विचार से दक्षिण पंथी अर्थात परंपरावादी वर्णव्यवस्था वा सामाजिक विषमता के
समर्थक नागार्जुन से खफा दिखाइ देलन। नागार्जुन वामपंथी अर्थात
मानवतावादी,समानतावादी रहलन। कांग्रेस काल मे इंदिरा के विरोध मे विचार प्रकट
कैलन। जमींदारी प्रथा के विरोध मे पिटाई खैलन आ जेल गेलन। इंदिरा के समय मे आइ
के दक्षिण पंथी इंदिरा पंथी अर्थात इंदिरा इज इंडिया विचार के समर्थक रहलन।
तैं यात्री नागार्जुन के विरोध कैलन।
कुल मिलाके नागार्जुन सत्ता विरोधी रहलन। एगो सच्चा साहित्यकार के सत्ता विरोधी
रहनाइ निक लक्षण हय।संत तुलसीदास जी सेहो सत्ता के प्रतीक हतन।वो रामराज्य के
दरबारी कवि रहलन। यात्री नागार्जुन जनकवि रहलन। हालांकि बाबा यात्री से भंते
नागार्जुन के यात्रा कैलन।अंततः बाबा नागार्जुन बन के रह गेलन।परंच जौं हुनकर
वामपंथी विचार सामने अबैत हय त दक्षिण पंथी के नजर मे वो दिमागी नक्सली लगैत
छतन। दिमागी नक्सली वो हय जे दिमागी गुलामी के विरोध मे शंखनाद करैत हय।
हर सत्ता अपन प्रतिरोधक के दिमागी नक्सली से संवोधित करैत हतन। गरीबी आ सामाजिक
विषमता के विरुद्ध आवाज उठाबे बाला दिमागी नक्सली हय। जनकवि यात्री नागार्जुन
स्वभावत : स्वतंत्रचेत्ता अर्थात दिमागी नक्सली रहलन।
-आचार्य रामानंद मंडल पश्चिमी मैथिली बज्जिका साहित्यकार सीतामढ़ी।