
आचार्य रामानंद मंडल
गोस्वामी बनाम ब्राह्मण/
मिथक बनाम चमत्कार
१
गोस्वामी बनाम ब्राह्मण
हालै मे ब्राह्मण युवती रिया गोस्वामी एगो दलित युवक मिलन पासवान से प्रेम
विवाह क लेलक।त ब्राह्मण समाज के कुछ लोग कहलन कि ब्राह्मण समाज के लोग बदनाम क
रहल छतन। कारण कि गोस्वामी समाज ब्राह्मण न छतन।वो ईडब्ल्यूएस कोटि मे न छतन।
वो पिछड़ा वर्ग सूची -२ मे छतन। संविधान में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा
वर्ग के आरक्षण के प्रावधान हय।आब ब्राह्मण (झा, मिश्र , पाठक, पाण्डेय,
उपाध्याय आदि) वर्ग यजमानी व्यवस्था मे छतन।हिंदू कर्मकांड करबैत छतन।समाज मे
उच्च वर्ग अर्थात अगड़ा वर्ग में अबैत छतन।परंच गोस्वामी, समाज से कटल लगैत
छतन। हालांकि वो शैव पंथ में छतन।आ ज्यादातर महादेव मठ के महंत वा पुजारी रहैत
छतन। ब्राह्मण समाज द्वारा ब्राह्मण समाज द्वारा नकारला के बाद दूटा गोस्वामी
युवक शोशल मिडिया पर अपन समाज के विस्तृत जानकारी देलन।
वो बतैलन कि जौं आदि शंकराचार्य सनातन धर्म के समर्थन में बौद्ध धर्म के नष्ट
करे के अभियान चलैलन त हम गौड़ ब्राह्मण शाखा शंकराचार्य के साथ संन्यास ग्रहण
कर बौद्ध धर्म के नष्ट करय मे संग देली। शंकराचार्य चार पीठ के स्थापना कैलन।आर
चार मठ के हमर समाज के शंकराचार्य बनलय। परंतु कालांतर में अन्य ब्राह्मण शाखा
सेहो शंकराचार्य बनै छैय। परंतु उपाधि हमरे दसनामी शाखा के देल जाए छै। यथा
-गिरि , गोस्वामी, सरस्वती आदि।देखल जाय त अइ के देखैत अन्य ब्राह्मण संत
गोस्वामी वा गुसाईं के रूप मे जानल जाइत हय। जेना संत गोस्वामी तुलसीदास वा संत
तुलसीदास गुसाईं आ संत लक्ष्मीनाथ गुसाईं। वोना मिथिला में घर के देवता गोसाईं
वा गुसाईं कहल जाइ छै।
अंततः गोस्वामी समाज ब्राह्मण समाजे हय।भले वो पिछड़ा वर्ग मे होय। हालांकि
सरकारी दस्तावेज में टाइटल गोस्वामी आ जाति दशनामी वा गौड़ ब्राह्मण रहला पर
जाति प्रमाण पत्र बनवाने आ आरक्षण प्राप्त करे मे कठिनाई के सामना करे के पड़य
छै वा कबो काल बंचित सेहो होइत हय। अंततः बौद्ध सनातन धर्म के संरक्षक ब्राह्मण
गोस्वामी के ब्राह्मण से बंचित न कैल जाय, चाहे पिछड़ा आरक्षण से बंचित भले क
देल जाए।
२
मिथक बनाम चमत्कार
मिथक से कोनो व्यक्ति वा पात्र के चमत्कारिक बनायल जाइत हय।मिथक के प्रोपगेंडा
वा अफवाह सेहो मानल जा सकय हय।
ऐगो कहावत हय एके झूठ के सौ बार बोलल जाइ छै त वो सत्य मानल जाइ छै।माने कि सौ
व्यक्ति ओइ झूठ के बोले।लोग कहत हय कि एक व्यक्ति झूठ बोल सकय छै।निनानबै
व्यक्ति कैला झूठ बोलतय ।
जेना संत तुलसीदास के एगो भूत, हनुमान जी के बारे में बतैलक।आ बाद में संत
तुलसीदास के हनुमान से भेट भेलैन।आब हनुमानजी, संत तुलसीदास के राम लक्षमण के
बारे मे बतैलक।
संत तुलसीदास लिखैत छतन -चित्रकूट के घाट पर भैइ संतन के भीड़, तुलसीदास चंदन
घिसे, तिलक करे लखन रघुवीर।
एहन एहन मिथक वा दंत कथा से शास्त्र पुराण भरल पड़ल हय।
जै पर सहसा विश्वास न होइ छै। परंतु भवानी शंकरौ श्रद्धा विश्वास रूपिणौ अलग
बात छै।इ घटना कलयुग के हय आ अकबर कालिन हय।
आब मुगलकालीन एगो आउर महाकवि विद्यापति के चर्चा हय। महाकवि विद्यापति, मिथिला
राज के राजा शिवसिंह के दरबारी कवि रहलन। शृंगारिक रचना रचैत रहलन।बुढारी मे
भगवान शिव उगना बनके खबासी करै लगलन।वोइ उगना के महाकवि विद्यापति के छोड़ के
कोनो देखलन।
हालांकि इ मिथक उज्जैनवासी कवि के मिथक रहय।वो महाकवि विद्यापति संग जोड़ देल
गेल। ज्ञातव्य कि महाकवि विद्यापति,संत तुलसीदास से पहिले भेल रहतन।
मुगलकालीन समय मे मिथिला मे एगो संत भेलन लक्ष्मीनाथ गुसाईं जी।जिनकर धोती आकाश
मे सुखैय।
आब अंग्रेज काल के एगो घटना गांधी जी के बारे मे प्रचलित हय।जौं गांधी जी जेल
में बंद रहलन।आ हुनका कहीं भाषण देइत देखल गेल। जेना बालपन मे राम जी कहीं खेलत
रहय। परंतु वो पलना मे सुतैत देखल गेल। अर्थात मानुष अवतार में सेहो देवीय
शक्ति देखल गेल।
मिथक कोनो कथा वा पात्र के चमत्कारिक बनबैत हय।आ वो दीर्घकालिक छाप छोड़य छैय
कारण वो धार्मिक आवरण धारण क लेइ छै।वो आस्था आ विश्वास के पात्र बन जाइ छै।
-आचार्य रामानंद मंडल पश्चिमी मैथिली बज्जिका साहित्यकार सीतामढ़ी।